जापान के कुमामोटो में 7.1 तीव्रता का भूकंप:सुनामी की चेतावनी जारी, 10 किमी की गहराई में केंद्र था

जापान के दक्षिणी मुख्य द्वीप क्यूशू के कुमामोटो इलाके में मंगलवार देर शाम भूकंप के तेज झटके महसूस किए गए। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी (JMA) के अनुसार, भूकंप की प्रारंभिक तीव्रता 7.1 मापी गई है। झटकों के बाद प्रशासन ने सुनामी की चेतावनी जारी कर दी है। जापान मौसम विज्ञान एजेंसी ने बताया कि भूकंप का केंद्र समुद्र की सतह से 10 किलोमीटर (6 मील) की गहराई में स्थित था। भूकंप के झटके महसूस होते ही स्थानीय स्तर पर अलर्ट जारी कर दिया गया है। फिलहाल, एजेंसी की ओर से सुनामी को लेकर एहतियाती कदम उठाए जा रहे हैं। इस घटना को लेकर अभी तक किसी बड़े नुकसान या हताहतों की जानकारी सामने नहीं आई है। एजेंसी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है। खबर अपडेट हो रही है….
मैंने पिता की मौत प्लान की:राम कपूर का बड़ा खुलासा, शिल्पा शिंदे बोलीं- मैं अनाथ, शेल्टर होम में रहती हूं, घरवालों ने भगा दिया

टेलीविजन एक्टर राम कपूर ने हाल ही में खुलासा किया है कि उन्होंने अपने पिता की मौत प्लान की थी। वहीं दूसरी तरफ एक्ट्रेस शिल्पा शिंदे ने खुलासा किया है कि वो परिवार से रिश्ते तोड़ चुकी हैं। उनकी मां और भाई ने उन्हें घर से निकाल दिया था, जिसके बाद अब वो आश्रम में रहकर गुजारा करती हैं। रियलिटी शो लॉकअप में राम कपूर ने एक टास्क में अपना सीक्रेट रिवील करते हुए पिता की मौत प्लान करने का दावा किया और ये भी कहा कि इस बात से नाराज मां और बहन ने आज तक उनसे बात नहीं की। राम कपूर ने शो में कहा, ‘मैंने पिता की उनकी मौत प्लान करने में मदद की। 63 की उम्र में उन्हें कैंसर हुआ। ऑपरेशन पॉसिबल नहीं था। उन्होंने 18 कीमोथैरेपी लीं। इतना अच्छा किया कि वो 73 तक जिए। जब कैंसर वापस आया, तो डॉक्टर ने कहा कि ये बुरा है, हम सब दोबारा करेंगे।’ एक्टर ने आगे कहा, ‘मेरे पिता रिच थे। मैंने उनकी कंपनी जॉइन करने के बजाए एक्टर बनने का फैसला लिया और अलग हो गया। मेरे और पिता के बीच 36 का आंकड़ा था। जब उनका कैंसर वापस आया, वो सिंगापुर में थे, कोविड टाइम था, लॉकडाउन था। उन्होंने गौतमी को कॉल कर बोला मुझे राम से बात करना है। उन्होंने डिसाइड कर लिया था कि उन्हें जीना नहीं है, वो मरना चाहते थे, लेकिन वो ये अकेले नहीं करना चाहते थे। उन्हें लगा उन्हें मेरी जरूरत है। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुम मेरी मरने में मदद कर सकते हो।’ भावुक होकर राम कपूर ने आगे कहा, ‘उन्होंने मुझे मना लिया कि मैं मदद नहीं करूंगा तो वो अकेले मरेंगे। उन्होंने मुझसे डील की कि मैं किसी को न बताऊं। उन्होंने मुझसे कहा कि जब वो आईसीयू में हों, तो मैं साथ रहूं। मेरी मां और बहन को नहीं पता था। वो नहीं जानते थे कि उनका इलाज नहीं चल रहा है। मेरे पिता बस मेरा हाथ पकड़ना चाहते थे। वो अकेले रहने से डरे हुए थे। वो मरने से नहीं डर रहे थे, वो बस अकेले नहीं रहना चाहते थे। उन्हें लगता था कि किसी और को पता चला तो उन्हें मरने नहीं दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिस दिन मरूं उसी दिन मुझे दफ्ना या जला देना। मैंने उनका हाथ पकड़ा और उनकी मरने में मदद की।ट 5 सालों से मां और बहन ने नहीं की बात- राम कपूर मेरी मां और बहन आज भी मुझसे बात नहीं करते, 5 साल हो चुके हैं। लेकिन मुझे लगता है कि एक बच्चा अपने पिता के लिए इससे ज्यादा अच्छा कुछ नहीं कर सकता, क्योंकि हर कोई राजा की तरह जीता है, लेकिन वो राजा की तरह रहे। उनकी वजह से मैंने अपनी ताकत देखी और मौत को करीब से देखा। शिल्पा शिंदे बोलीं- मैं अनाथ, शेल्टर होम में रहती हूं शिल्पा शिंदे ने परिवार द्वारा ठुकराए जाने पर कहा, ‘लोग फैमिली-फैमिली बोलते हैं। लोगों के पास फैमिली नहीं होती। मेरे पास फैमिली होने के बाद भी मैं अनाथ हूं। मैं कोई दया नहीं चाहती। मैं पहले भी बोल चुकी हूं कि मैं शेल्टर हाउस में रहती हूं जब भी आती हूं (मुंबई)। करजत मैंने दूसरे घर की तरह लिया था, लेकिन अब वो मेरा फर्स्ट होम है, क्योंकि मैंने मुंबई छोड़ दिया।’ आगे शिल्पा ने बताया, ‘3 साल हो गए, जब मेरी शोल्डर की सर्जरी हुई। मेरे भाई वाइफ से इन्फ्लूएंस हुआ और मेरी मां भाई से इन्फ्लूएंस हुई और मुझे घर से निकाल दिया। आप सोचेंगे कि वह इतने बुरे हैं कि आपको निकाल दिया गया, लेकिन हालात ऐसे क्रिएट किए गए कि उन्हें पता है कि मैं सेल्फ रिस्पेक्ट वाली लड़की हूं। मैं रात 11 बजे घर छोड़कर चली गई, मेरी मां ने मुझे नहीं रोका, क्योंकि वो भाई के इन्फ्लूएंस में आ गई थीं।’ आगे उन्होंने कहा, ‘जब आप लोगों के लिए एवेलेबल हो जाते हैं, तो लोग आपका फायदा उठाते हैं। आप डोरमेट बन जाते हैं, मैं मेरे घर की डोरमेट हूं। मैं बॉम्बे जाती हूं और होटल में रुकती हूं तो लोग कहते हैं आप तो यहीं रहते हो, मैं कहती हूं हां, मेरे घर में बहुत सारे मेहमान आए हैं, इसलिए प्राइवेसी के लिए यहां आती हूं। मैं कभी जिंदगी में बात नहीं करूंगी। मैं अपनी वसीयत में लिख चुकी हूं कि मेरा इन लोगों से कोई रिश्ता नहीं है।’’ शिल्पा शिंदे ने भावुक होकर आगे कहा, ‘किसी ने मुझसे पूछा कि मैं ये शो क्यों कर रही हूं, तो मैं होम नहीं शेल्टर होम बनाना चाहती हूं, इसलिए ये कर रही हूं। मैं मां से मिलना चाहती हूं, वो पूछती हैं कि क्या घर आओगी, लेकिन मैं नहीं जाती। मैं रिश्तों के मामले में बहुत कठोर हूं। मैं इतनी खराब हूं कि मुझे अपने ही घर से बाहर निकाल दिया गया।’ बता दें कि शिल्पा शिंदे और राम कपूर इन दिनों नेटफ्लिक्स के रियलिटी शो लॉकअप 2 में हैं। शो के नियम के अनुसार, हर कंटेस्टेंट जिंदगी के 3 सीक्रेट शो में साथ ले जाता है, जिसे वो खुद को एलिमिनेशन से बचाने में इस्तेमाल करता है। इसी नियम के तहत एक टास्क में शिल्पा और राम को अपने सीक्रेट रिवील करने पड़े हैं। उनसे पहले आकांक्षा चमोला ने सीक्रेट रिवील कर बताया था कि वो बायसेक्शुअल हैं और एक्टर गौरव खन्ना से तलाक ले रही हैं। राम कपूर के पिता ने दी थी अमूल की पंचलाइन राम कपूर के पिता अनिल कपूर को बिली नाम से पहचाना जाता था। वो बड़े बिजनेसमैन थे। वे FCB उल्का में चेयरमैन थे। उन्हें कई यादगार विज्ञापनों के लिए जाना जाता है। लेकिन अमूल की द टेस्ट ऑफ इंडिया पंचलाइन अनिल कपूर ने ही दी थी। अनिल कपूर के सीईओ रहते ही अमूल FCB उल्का की क्लाइंट थी। उनका निधन 12 अप्रैल 2021 में हुआ था।
चांदी ₹6,543 गिरकर ₹2.18 लाख पर आई:इस साल ₹12 हजार सस्ती हो चुकी, सोने के दाम में आज ₹1,907 की गिरावट

सोने-चांदी की कीमतों में 28 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, एक किलो चांदी 6,543 रुपए सस्ती होकर 2.18 लाख रुपए पर आ गई है। वहीं, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,907 रुपए गिरकर 1.43 लाख रुपए पर आ गया है। इस साल सोने में अब तक तेजी रही इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। सोना 2026 में अब तक 10 हजार रुपए महंगा हुआ है। 31 दिसंबर 2025 को 10g सोना 1.33 लाख रुपए के ऊपर था, जो अब 1.43 लाख रुपए पर पहुंच गया है। वहीं, चांदी की कीमत में 12 हजार रुपए की गिरावट है। चांदी 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए किलो थी, जो अब 2.18 लाख रुपए पर है। इस दौरान 29 जनवरी को सोने ने 1.76 लाख रुपए और चांदी ने 3.86 लाख रुपए का ऑलटाइम हाई भी बनाया था। सोना इस साल 1.60 लाख तक जा सकता है कमोडिटी एक्सपर्ट अजय केडिया के मुताबिक सोने-चांदी के दाम अपने हाई से काफी नीचे आ चुके हैं। ऐसे में निवेशक इसमें निवेश कर सकते हैं, हालांकि इनमें एकमुश्त निवेश करने से बचना चाहिए। अजय केडिया के अनुसार साल के आखिर तक सोना एक बार फिर 1.60 लाख और चांदी 2.80 लाख रुपए तक जा सकती है।
देश में 576 अरबपति, 5 साल में चार गुना बढ़े:सरकार को नहीं पता अरबपतियों के पास कितनी संपत्ति, दावा- बेरोजगारी और गरीबी घटी

देश में पिछले पांच साल में अरबपतियों की संख्या में चार गुना से ज्यादा का इजाफा हुआ है। साल 2021-22 में 142 अरबपति थे। 2025-26 में अरबपतियों की संख्या बढ़कर 576 हो गई है। सरकार ने अरबपतियों की संख्या बताई है, लेकिन अलग-अलग अरबपतियों की कुल आय का ब्योरा नहीं दिया है। दौसा से कांग्रेस सांसद मुरारीलाल मीणा के सवाल के जवाब में केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि आयकर एक्ट में अरबपति शब्द की कोई वैधानिक परिभाषा नहीं है। लेकिन आयकर विवरण (ITR) में सालाना 100 करोड़ या इससे ज्यादा की आय दिखाने वालों का ब्योरा दिया है। सरकार के पास अरबपतियों की कुल संपत्ति का ब्योरा नहीं सरकार के पास अरबपतियों की कुल संपत्ति का ब्योरा नहीं है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने बताया कि सरकार के पास करदाताओं की कुल संपत्ति का कोई आधिकारिक या संकलित डेटा नहीं है। इसका कारण यह है कि संपत्ति कर अधिनियम, 1957 को एक अप्रैल 2016 से खत्म कर दिया गया। घरेलू खर्च में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अंतर कम जवाब के अनुसार, घरेलू खर्च में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों का अंतर कम हो रहा है। घरेलू उपभोग व्यय सर्वेक्षण 2023-24 के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के लिए गिनी गुणांक (लोगों के बीच आय या धन की असमानता) 0.237 और शहरी क्षेत्रों के लिए 0.284 दर्ज किया गया है। यह 2022-23 के आंकड़ों से कम है, जो यह दिखाता है कि ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच का अंतर कम हो रहा है। 13.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की रिपोर्ट के अनुसार, शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों के श्रम बाजार कोविड-पूर्व स्तर से बेहतर स्थिति में हैं। 15 साल और इससे ज्यादा उम्र के व्यक्तियों के लिए बेरोजगारी दर 2022 के 3.6% से घटकर 2025 में 3.1% हो गई है। नीति आयोग के राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक के निष्कर्ष बताते हैं कि साल 2015-16 और 2019-21 के बीच देश में बहुआयामी गरीबी का अनुपात 24.85% से घटकर 14.96% रह गया है। इस अवधि में लगभग 13.5 करोड़ लोग गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं। असमानता कम करने के लिए ज्यादा आय वालों पर सरचार्ज लगाया वित्त राज्य मंत्री ने अपने जवाब में कहा कि देश में असमानता कम करने और रोजगार सृजन के लिए सरकार ने कई मोर्चों पर सुधारात्मक कदम उठाए हैं। अत्यधिक आय वाले व्यक्तियों पर सामान्य टैक्स के अलावा सरचार्ज लगाया है।
सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:76,900 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा; IT और FMCG शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 28 जुलाई को बढ़त देखने को मिल रही है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 76,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक की बढ़त है, ये 24,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और FMCG शेयर्स में आज ज्यादा खरीदारी है। 87 डॉलर पर आया कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के दाम में आज करीब 2% की गिरावट है। ये आज 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव में कमी आने में दामों में गिरावट है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 27 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी बढ़त इससे पहले कल यानी 27 जुलाई को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 776 अंक की बढ़त के साथ 76,836 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 229 अंक की बढ़त रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।
सेंसेक्स में 100 अंक की बढ़त:76,900 पर कारोबार कर रहा, निफ्टी भी 100 अंक चढ़ा; IT और FMCG शेयर्स में ज्यादा खरीदारी

शेयर बाजार में आज यानी 28 जुलाई को बढ़त देखने को मिल रही है। सेंसेक्स करीब 100 अंक की बढ़त के साथ 76,900 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी भी करीब 50 अंक की बढ़त है, ये 24,000 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। IT और FMCG शेयर्स में आज ज्यादा खरीदारी है। 87 डॉलर पर आया कच्चा तेल ब्रेंट क्रूड के दाम में आज करीब 2% की गिरावट है। ये आज 87 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है। अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच तनाव में कमी आने में दामों में गिरावट है। एशियाई बाजारों में मिलाजुला कारोबार 27 जुलाई को अमेरिकी बाजार में मिलाजुला कारोबार रहा 7 दिन में विदेशी निवेशकों ने ₹9,400 करोड़ के शेयर बेचे नोट: FIIs और DIIs की नेट खरीदारी/बिकवाली के आंकड़े करोड़ रुपए में हैं। कल बाजार में रही थी बढ़त इससे पहले कल यानी 27 जुलाई को शेयर बाजार में बढ़त रही थी। सेंसेक्स 776 अंक की बढ़त के साथ 76,836 पर बंद हुआ था। निफ्टी में भी 229 अंक की बढ़त रही, ये 23,996 पर बंद हुआ था।
शहनाज गिल और जय रंधावा पहुंचे गोल्डन टेंपल:गुरु घर में नतमस्तक हुए; इश्कनामा की सफलता के लिए वाहेगुरु का किया शुकराना

पंजाबी फिल्म इश्कनामा की सफलता के बाद अभिनेता जय रंधावा और अभिनेत्री शहनाज गिल अमृतसर स्थित श्री हरमंदिर साहिब (गोल्डन टेंपल) में माथा टेकने पहुंचे। दोनों कलाकारों ने सोमवार रात अपने-अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इसकी तस्वीरें साझा कीं। गुरु घर में नतमस्तक होकर उन्होंने फिल्म की सफलता के लिए वाहेगुरु का शुकराना अदा किया। फिल्म 24 जुलाई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी और दर्शकों से मिल रहे सकारात्मक रिस्पॉन्स के बाद दोनों कलाकार आशीर्वाद लेने अमृतसर पहुंचे। शहनाज गिल ने सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरों में सफेद सूट पहना हुआ है, सिर पर दुपट्टा ओढ़े वह हाथ जोड़कर श्रद्धा भाव में नजर आ रही हैं। वहीं, जय रंधावा जींस-टीशर्ट में फिल्म के रियल किरदार निम्मा के साथ गुरु घर में नतमस्तक दिखाई दिए। निम्मा और नसीमा की प्रेम कहानी फिल्म इश्कनामा 1980 के दशक की पृष्ठभूमि पर आधारित है। इसमें भारत-पाकिस्तान सीमा के दोनों ओर रहने वाले एक सिख युवक निम्मा और मुस्लिम युवती नसीमा की प्रेम कहानी को दिखाया गया है। कहानी में बताया गया है कि कैसे सीमाएं, धर्म और उस दौर के राजनीतिक हालात उनके रिश्ते के बीच बाधा बनने की कोशिश करते हैं। शूटिंग के दौरान घायल हुए थे जय रंधावा जय रंधावा फिल्म इश्कनामा की शूटिंग के दौरान घायल हो गए थे। जनवरी में शूटिंग के समय एक जंप सीन फिल्माते हुए क्रेन मशीन में तकनीकी खराबी आ गई थी। इसके कारण जय रंधावा छत पर सही तरीके से लैंड नहीं कर पाए और सीधे दीवार से जा टकराए। सिर दीवार से जोर से टकरा गया था इस हादसे में उनका सिर दीवार से जोर से टकरा गया था। घटना का 8 सेकेंड का वीडियो भी सामने आया था, जबकि अस्पताल से उनकी एक तस्वीर भी वायरल हुई थी, जिसमें वह MRI करवाते नजर आए थे। हालांकि, रंधावा ने जल्द ही स्वस्थ होकर सेट पर वापसी की और फिल्म की शूटिंग पूरी की।
हरियाणा के सुधीर सांगवान CJP कोर टीम के मेंबर:कभी मेडिकल स्टोर पर ₹200 की नौकरी की; 'मामला लीगल है' वेब-सीरिज में SHO पेप्सू से फेमस हुए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर स्टूडेंट्स के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के अभिजीत दीपके, आशुतोष रांका और सौरव दास के अलावा एक और चेहरा सबसे ज्यादा चर्चा में रहा। यह चेहरा था हरियाणा के चरखी दादरी निवासी और एक्टर सुधीर सांगवान का। सुधीर नेटफ्लिक्स की चर्चित वेब सीरीज ‘मामला लीगल है’, फिल्म ‘RAAKH’ और कई OTT प्रोजेक्ट्स में नजर आ चुके हैं। मामला लीगल सीरिज में SHO पेप्सू से उन्हें पहचान मिली। एक्टिंग के साथ-साथ वे इन दिनों CJP की संस्थापक कोर टीम के सदस्य भी हैं। चरखी दादरी के छोटे से गांव छप्पर से निकलकर सुधीर ने संघर्ष के दम पर अपनी अलग पहचान बनाई। किसान परिवार से आने वाले सुधीर ने आर्थिक तंगी के दौर में मेडिकल स्टोर हेल्पर पर 200 रुपए के लिए नौकरी की। इसके बाद सिम कार्ड हॉकर, डीजे, ट्रांसपोर्ट कंपनी कर्मचारी और बैंकिंग सेक्टर में भी काम किया। दैनिक भास्कर ने सुधीर सांगवान से बातचीत कर उनके गांव से OTT तक के सफर और CJP से जुड़ने की पूरी कहानी जानी। बैंकों में काम करने से लेकर खुद के स्टार्टअप तक शुरू किए सुधीर सांगवान का जन्म 9 नवंबर 1988 को हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छप्पर गांव के किसान परिवार में हुआ। शुरुआती पढ़ाई गांव के सरकारी स्कूल से की। बाद में राजस्थान के बोर्डिंग स्कूल में पढ़ाई के दौरान थिएटर से जुड़े। आर्थिक तंगी के कारण भिवानी के सरकारी कॉलेज में ग्रेजुएशन बीच में छोड़नी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के लिए कम उम्र में ही काम शुरू कर दिया। सबसे पहले मेडिकल स्टोर पर हेल्पर बने, जहां रोजाना ₹200 मिलते थे। अतिरिक्त कमाई के लिए रात में डीजे बजाते और फोटोग्राफी भी करते थे। साल 2006 में ₹3,500 महीने की सैलरी पर ट्रांसपोर्ट कंपनी में असिस्टेंट बने। दो साल बाद एक विदेशी कार्गो कंपनी में सुपरवाइजर बने और 2010 तक काम किया। इसके बाद HDFC बैंक में कैशियर के रूप में बैंकिंग सेक्टर में कदम रखा। 2016 में कोटक महिंद्रा बैंक में ब्रांच मैनेजर बने। इसी साल इक्विटस बैंक में असिस्टेंट वाइस प्रेसिडेंट (AVP) बने, जहां उनकी सैलरी ₹1.24 लाख महीने तक पहुंच गई। नौकरी के साथ उन्होंने MoneyMind.com और LoanWon.com नाम से लोन सर्विस स्टार्टअप शुरू किए। 2019 में MyMistri.com लॉन्च किया, जिसे बाद में करीब ₹40 लाख में बेच दिया। इसके बाद ‘तुरंत डील’ नाम से प्रॉपर्टी स्टार्टअप और कोरोना काल में ZORKA Grocery शुरू की, लेकिन घाटे के कारण दोनों कारोबार बंद करने पड़े। 2019 में एक्टिंग लाइन में आए, हरियाणवी वेब सीरिज से शुरुआत सुधीर सांगवान बताते हैं कि 2019 में फिल्म निर्माता राहुल दहिया से मुलाकात के बाद एक्टिंग करियर की शुरुआत हुई। पहला मौका हरियाणवी वेब सीरीज ‘विरोध’ में मिला। इसके बाद ‘मायाजाल’, ‘ब्याह के लड्डू’, ‘अखाड़ा’ और ‘स्कैम’ जैसी वेब सीरीज में अलग-अलग किरदार निभाए। मुंबई में 100 से ज्यादा ऑडिशन दिए। ज्यादातर काम उन्हें ऑनलाइन ऑडिशन से मिला। नेटफ्लिक्स की ‘मामला लीगल है’ में SHO जयवंत पेप्सू के रोल से देशभर में पहचान मिली। अमेजन प्राइम वीडियो के विज्ञापन अभियान में मनोज बाजपेयी के साथ भी नजर आए। उनकी फिल्म ‘राख’ अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज हो चुकी है। अन्ना आंदोलन में शामिल हुए, CJP के मूवमेंट से जुड़े सुधीर ने बताया कि 2011 के अन्ना आंदोलन के दौरान सामाजिक गतिविधियों से जुड़े। इसी दौरान उनकी मुलाकात भिवानी के लोकेश से हुई। बाद में दोनों ने स्टैंड विद नेचर नाम से एक NGO शुरू की। सुप्रीम कोर्ट में ‘कॉकरोच’ शब्द की चर्चा के बाद सोशल मीडिया पर शुरू हुए मूवमेंट से जुड़े। शिक्षा और जनहित के मुद्दों पर सक्रिय रहने की वजह से उन्होंने CJP के अभियान में हिस्सा लेना शुरू किया। 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए पहले बड़े प्रदर्शन में शामिल हुए। उस दिन भीड़ को संभालने के लिए उन्होंने खुद आगे आकर व्यवस्था संभाली। प्रोटेस्ट के दौरान ये समझ नहीं आ रहा था कि वह बड़े स्पीकर को कहां रखें। भीड़ के बीच जब जगह नहीं मिली तो स्पीकर कंधे पर रखकर लोगों के बीच घूमता रहा। इस दौरान उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। 15 जून को जयपुर और 20 जून को जंतर-मंतर के कार्यक्रम में CJP के प्रमुख आशुतोष रानका ने मंच से उनका परिचय कराया। इसके बाद उन्हें CJP की संस्थापक कोर टीम का सदस्य बनाया गया। पूरे देश में टीम तैयार कर रही CJP सांगवान ने बताया कि संगठन देशभर में अपनी टीम का विस्तार कर रहा है। शिक्षा, रोजगार और जनहित के मुद्दों पर अभियान चलाने की तैयारी है। अलग-अलग राज्यों में संगठन की इकाइयों को मजबूत करने पर काम किया जा रहा है। सोशल मीडिया के साथ-साथ जमीनी स्तर पर भी कार्यक्रम और जनसंपर्क अभियान चलाए जाएंगे।
सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है। सवाल: सबसे पहले हमारे हिंदी पाठकों को बताइए कि ‘अगं आई अहो आई’ का मतलब क्या है? जवाब: ‘अगं आई’ का मतलब अपनी मां है। मराठी में मां को प्यार से ‘आई’ कहते हैं। शादी के बाद लड़की ससुराल जाती है तो सम्मान से सास को ‘अहो आई’ कहा जाता है। सीरीज की खूबसूरती यही है कि नई दुल्हन की यात्रा अपनी मां ‘अगं आई’ से शुरू होकर सास को भी उसी अपनत्व से ‘अहो आई’ बनाने तक पहुंचती है। सवाल: यानी सास और बहू का रिश्ता भी मां-बेटी जैसा हो सकता है? जवाब: बिल्कुल। हमारी सीरीज दिखाती है कि सास सिर्फ नियम बनाने वाली नहीं, दोस्त भी बन सकती है। वह बहू को इतना अपनापन देती है कि कई बार मां से भी ज्यादा दुलार करती नजर आती है। वहीं लड़की की मां को डर रहता है कि कहीं बेटी उससे दूर न हो जाए। रिश्तों की यही भावनाएं कहानी को खास बनाती हैं। सवाल: इस कहानी की ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: दो बातें। पहली, यह हमारे घरों जैसी कहानी है। लगता है जैसे किसी ने कैमरा घर के अंदर लगा दिया हो। दूसरी, हम अक्सर नई पीढ़ी की लड़कियों के बारे में पहले से राय बना लेते हैं कि उनके संस्कार कमजोर होंगे या वे परंपराओं को नहीं मानेंगी। लेकिन कहानी दिखाती है कि रिश्ते सिर्फ बहू की जिम्मेदारी नहीं होते। जब लड़की नए परिवार में आती है तो उसे अपनाने की जिम्मेदारी ससुराल वालों की भी होती है। सास उसे समझ और स्वीकार कर ले तो रिश्ते अपने आप मधुर हो जाते हैं। सवाल: अक्सर लोग पहले से ही बहू के बारे में राय बना लेते हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब: यही सबसे बड़ी गलती है। अगर शुरुआत ही इस सोच से होगी कि लड़की कैसी होगी, उसके संस्कार कैसे होंगे या उसके मायके को नीचा दिखाया जाएगा, तो रिश्ता कभी अच्छा नहीं बन सकता। इसका असर बेटे और पति पर पड़ता है। सबसे ज्यादा वही बीच में पिसते हैं। सवाल: अगर बहू को बेटी और दोस्त की तरह स्वीकार कर लिया जाए तो शायद आधी समस्याएं खत्म हो जाएं? जवाब: बिल्कुल। दो महिलाओं के बीच दोस्ती बन जाए तो पूरा घर मजबूत हो जाता है। हमारी सीरीज सिर्फ सास-बहू का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान और अपनापन भी दिखाती है। जब लड़की की मां देखती है कि बेटी को ससुराल में प्यार मिल रहा है, तो उसके मन में भी उस परिवार के लिए सम्मान अपने आप आ जाता है। सवाल: टीवी और फिल्मों में अक्सर सास-बहू के रिश्ते लड़ाई-झगड़े वाले ही दिखाए जाते हैं। आपकी सीरीज इससे अलग नजर आती है? जवाब: हां, हम हमेशा सुनते आए हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। बहू परिवार की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने वाली है। अगर इस रिश्ते को प्यार और सम्मान से निभाया जाए तो पूरा परिवार खुश रहता है। सवाल: क्या इस किरदार में आपको अपनी मां या खुद की झलक दिखाई दी? जवाब: मेरी मां और मैं इस किरदार जितनी सख्त नहीं हैं। मेरी मां बहुत अनुशासित थीं, लेकिन उनका तरीका अलग था। इस किरदार में मुझे थोड़ा स्ट्रिक्ट दिखना था, इसलिए यह नया अनुभव था। लेकिन एक भावना से मैं पूरी तरह जुड़ गई। हर मां चाहती है कि उसकी बेटी को संस्कारों की वजह से कभी कुछ सुनना न पड़े। खासकर जब बेटी इकलौती हो और शादी के बाद घर खाली हो जाए, तब मां के भीतर का खालीपन बहुत गहरा होता है। सवाल: आज भी बेटियों को शादी से पहले अलग तरह की सीख दी जाती है, आप क्या मानती हैं? जवाब: पहले बेटियों और बेटों में फर्क किया जाता था। अब हालात काफी बदले हैं, लेकिन आज भी मां बेटी से कहती है, “ये सीख लो, वो सीख लो, नहीं तो आगे सुनना पड़ेगा।” यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सवाल: आज परिवार तेजी से टूट रहे हैं। आपको इसका सबसे बड़ा कारण क्या लगता है? जवाब: अगर हम रोज झगड़े और कलह वाली चीजें देखते रहेंगे तो उसका असर जरूर पड़ेगा। लेकिन फैसला हमारे हाथ में है कि हमें कैसा परिवार चाहिए। हर घर में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सकारात्मक होना चाहिए। हर छोटी बात बढ़ाने का असर सिर्फ पति-पत्नी पर नहीं, पूरे परिवार और खासकर बच्चों पर पड़ता है। सवाल: और,बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। आपका क्या कहना है? जवाब: बिल्कुल। अगर बच्चे रोज मां-बाप को लड़ते देखेंगे तो वही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाएगा। इसलिए रिश्तों को संभालना सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा भावुक सीन आया जिसने आपको अंदर तक छू लिया? जवाब: हां। एक सीन करते समय मुझे अपनी मां की याद आ गई। मेरी शादी के बाद उन्होंने भी शायद यही महसूस किया होगा कि बेटी अब उनके साथ नहीं रहती। मां-बेटी का रिश्ता कितना भी मजबूत हो, शादी के बाद एक खालीपन जरूर आ जाता है। फोन पर बातें होती रहती हैं, लेकिन साथ रहने जैसा नहीं होता। उस सीन ने मुझे सचमुच भावुक कर दिया। सवाल: आप बेटी भी हैं और मां भी। आपके मुताबिक एक अच्छी मां कैसी होती है? जवाब: मेरे लिए मेरी मां आदर्श हैं। उन्होंने कभी नंबरों का दबाव नहीं बनाया। हमेशा कहा कि पूरी ईमानदारी से मेहनत करो। नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन कोशिश जरूर हमारे हाथ में होती है। मैं भी अपने बच्चों को यही सिखाना चाहती हूं कि पूरी मेहनत करो और परिणाम की चिंता में मत जीओ। मेरी मां ने मुझे जितना प्यार और संस्कार दिए, वही मैं भी
सास मां बन जाए तो रिश्ते खूबसूरत बनते हैं:रेणुका शहाणे बोलीं- नहीं तो बेटा और पति सास-बहू के झगड़ों में पिसेंगे

मराठी वेब सीरीज ‘अगं आई अहो आई’ में रेणुका शहाणे ऐसी मां का किरदार निभा रही हैं, जो रिश्तों को जोड़ने में विश्वास रखती है। दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया कि ‘अगं आई’ और ‘अहो आई’ का मतलब क्या है, सास-बहू के रिश्तों को लेकर धारणाएं कैसे बदल सकती हैं, परिवार क्यों टूट रहे हैं और बेटी की शादी के बाद मां किन भावनाओं से गुजरती है। सवाल: सबसे पहले हमारे हिंदी पाठकों को बताइए कि ‘अगं आई अहो आई’ का मतलब क्या है? जवाब: ‘अगं आई’ का मतलब अपनी मां है। मराठी में मां को प्यार से ‘आई’ कहते हैं। शादी के बाद लड़की ससुराल जाती है तो सम्मान से सास को ‘अहो आई’ कहा जाता है। सीरीज की खूबसूरती यही है कि नई दुल्हन की यात्रा अपनी मां ‘अगं आई’ से शुरू होकर सास को भी उसी अपनत्व से ‘अहो आई’ बनाने तक पहुंचती है। सवाल: यानी सास और बहू का रिश्ता भी मां-बेटी जैसा हो सकता है? जवाब: बिल्कुल। हमारी सीरीज दिखाती है कि सास सिर्फ नियम बनाने वाली नहीं, दोस्त भी बन सकती है। वह बहू को इतना अपनापन देती है कि कई बार मां से भी ज्यादा दुलार करती नजर आती है। वहीं लड़की की मां को डर रहता है कि कहीं बेटी उससे दूर न हो जाए। रिश्तों की यही भावनाएं कहानी को खास बनाती हैं। सवाल: इस कहानी की ऐसी कौन-सी बात थी जिसने आपको सबसे ज्यादा प्रभावित किया? जवाब: दो बातें। पहली, यह हमारे घरों जैसी कहानी है। लगता है जैसे किसी ने कैमरा घर के अंदर लगा दिया हो। दूसरी, हम अक्सर नई पीढ़ी की लड़कियों के बारे में पहले से राय बना लेते हैं कि उनके संस्कार कमजोर होंगे या वे परंपराओं को नहीं मानेंगी। लेकिन कहानी दिखाती है कि रिश्ते सिर्फ बहू की जिम्मेदारी नहीं होते। जब लड़की नए परिवार में आती है तो उसे अपनाने की जिम्मेदारी ससुराल वालों की भी होती है। सास उसे समझ और स्वीकार कर ले तो रिश्ते अपने आप मधुर हो जाते हैं। सवाल: अक्सर लोग पहले से ही बहू के बारे में राय बना लेते हैं, आप क्या सोचती हैं? जवाब: यही सबसे बड़ी गलती है। अगर शुरुआत ही इस सोच से होगी कि लड़की कैसी होगी, उसके संस्कार कैसे होंगे या उसके मायके को नीचा दिखाया जाएगा, तो रिश्ता कभी अच्छा नहीं बन सकता। इसका असर बेटे और पति पर पड़ता है। सबसे ज्यादा वही बीच में पिसते हैं। सवाल: अगर बहू को बेटी और दोस्त की तरह स्वीकार कर लिया जाए तो शायद आधी समस्याएं खत्म हो जाएं? जवाब: बिल्कुल। दो महिलाओं के बीच दोस्ती बन जाए तो पूरा घर मजबूत हो जाता है। हमारी सीरीज सिर्फ सास-बहू का रिश्ता नहीं, बल्कि दो परिवारों के बीच सम्मान और अपनापन भी दिखाती है। जब लड़की की मां देखती है कि बेटी को ससुराल में प्यार मिल रहा है, तो उसके मन में भी उस परिवार के लिए सम्मान अपने आप आ जाता है। सवाल: टीवी और फिल्मों में अक्सर सास-बहू के रिश्ते लड़ाई-झगड़े वाले ही दिखाए जाते हैं। आपकी सीरीज इससे अलग नजर आती है? जवाब: हां, हम हमेशा सुनते आए हैं कि औरत ही औरत की दुश्मन होती है। लेकिन ऐसा होना जरूरी नहीं है। बहू परिवार की अगली पीढ़ी को आगे बढ़ाने वाली है। अगर इस रिश्ते को प्यार और सम्मान से निभाया जाए तो पूरा परिवार खुश रहता है। सवाल: क्या इस किरदार में आपको अपनी मां या खुद की झलक दिखाई दी? जवाब: मेरी मां और मैं इस किरदार जितनी सख्त नहीं हैं। मेरी मां बहुत अनुशासित थीं, लेकिन उनका तरीका अलग था। इस किरदार में मुझे थोड़ा स्ट्रिक्ट दिखना था, इसलिए यह नया अनुभव था। लेकिन एक भावना से मैं पूरी तरह जुड़ गई। हर मां चाहती है कि उसकी बेटी को संस्कारों की वजह से कभी कुछ सुनना न पड़े। खासकर जब बेटी इकलौती हो और शादी के बाद घर खाली हो जाए, तब मां के भीतर का खालीपन बहुत गहरा होता है। सवाल: आज भी बेटियों को शादी से पहले अलग तरह की सीख दी जाती है, आप क्या मानती हैं? जवाब: पहले बेटियों और बेटों में फर्क किया जाता था। अब हालात काफी बदले हैं, लेकिन आज भी मां बेटी से कहती है, “ये सीख लो, वो सीख लो, नहीं तो आगे सुनना पड़ेगा।” यह सोच अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। सवाल: आज परिवार तेजी से टूट रहे हैं। आपको इसका सबसे बड़ा कारण क्या लगता है? जवाब: अगर हम रोज झगड़े और कलह वाली चीजें देखते रहेंगे तो उसका असर जरूर पड़ेगा। लेकिन फैसला हमारे हाथ में है कि हमें कैसा परिवार चाहिए। हर घर में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन उन्हें सुलझाने का तरीका सकारात्मक होना चाहिए। हर छोटी बात बढ़ाने का असर सिर्फ पति-पत्नी पर नहीं, पूरे परिवार और खासकर बच्चों पर पड़ता है। सवाल: और,बच्चे वही सीखते हैं जो घर में देखते हैं। आपका क्या कहना है? जवाब: बिल्कुल। अगर बच्चे रोज मां-बाप को लड़ते देखेंगे तो वही उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाएगा। इसलिए रिश्तों को संभालना सिर्फ दो लोगों की नहीं, पूरे परिवार की जिम्मेदारी है। सवाल: शूटिंग के दौरान कोई ऐसा भावुक सीन आया जिसने आपको अंदर तक छू लिया? जवाब: हां। एक सीन करते समय मुझे अपनी मां की याद आ गई। मेरी शादी के बाद उन्होंने भी शायद यही महसूस किया होगा कि बेटी अब उनके साथ नहीं रहती। मां-बेटी का रिश्ता कितना भी मजबूत हो, शादी के बाद एक खालीपन जरूर आ जाता है। फोन पर बातें होती रहती हैं, लेकिन साथ रहने जैसा नहीं होता। उस सीन ने मुझे सचमुच भावुक कर दिया। सवाल: आप बेटी भी हैं और मां भी। आपके मुताबिक एक अच्छी मां कैसी होती है? जवाब: मेरे लिए मेरी मां आदर्श हैं। उन्होंने कभी नंबरों का दबाव नहीं बनाया। हमेशा कहा कि पूरी ईमानदारी से मेहनत करो। नतीजा हमारे हाथ में नहीं होता, लेकिन कोशिश जरूर हमारे हाथ में होती है। मैं भी अपने बच्चों को यही सिखाना चाहती हूं कि पूरी मेहनत करो और परिणाम की चिंता में मत जीओ। मेरी मां ने मुझे जितना प्यार और संस्कार दिए, वही मैं भी








