लौकी-सोयाबीन का चीला रेसिपी: मिनटों में लौकी और सोयाबीन का चीला, हाई इंट्रोडक्शन से करें दिन की शुरुआत, नोट करें विधि

सामग्री के लिए लौकी-सोयाबीन चीला: 1 कपसोयाबीन, 1 लोकी, 1 हरी मिर्च, 1 छोटा टुकड़ा अदरक, हरा धनिया, ½ छोटा मक्खन जीरा, ¼ छोटा मक्खन हल्दी, ½ छोटा मक्खन लाल मिर्च पाउडर, स्वाद मसाला, तेल या घी छवि: इंस्टाग्राम बनाने की विधि: सबसे पहले भीगी हुई सोयाबीन का पानी उसे भूखा और सीधे से पानी के साथ प्लास्टिक में पीस लें। तैयार पेस्ट को एक बड़े बाउल में डाला गया। छवि: फ्रीपिक इसमें कद्दू की हुई लौकी, हरी मिर्च, हरा धनिया, जीरा, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और नमक के टुकड़े अच्छी तरह मिला लें।अगर बैटर बहुत सारे एसेट में लगे तो थोड़ा-सा पानी चिली जैसा नासा तैयार करें। छवि: इंस्टाग्राम अब तवा गर्म करें और प्रभाव-सा तेल का कपड़ा। एक कलछी बैटर मैनुअल गोल आकार में फैला हुआ। मध्यम किनारे पर दोनों तरफ से सोनार और कुरकुरा होने तक सेंक लें। इसी तरह बाकी सभी चीले तैयार कर लें। छवि: एआई गरमा-गरम लौकी और सोयाबीन चीला हरी धनिया की चटनी, दही, टमाटर की चटनी या पुदीने की चटनी के साथ बनाएं। फ़्लोरिडा तो इसके साथ एक कटोरी दही या कीक भी सर्व करें, जिससे स्टान्ट और भी नैमित्तिक बन जायेंगे। छवि: एआई हाई प्रोटीन होने के कारण लंबे समय तक पेट भरा रहता है। लॉकी बॉडी को गोदाम में रखने में मदद मिलती है। वनस्पति से भरपूर होना की वजह से पाचन के लिए अच्छा माना जाता है। छवि: एआई सोयाबीन और लोकी का चीला जल्दी तैयार हो जाता है, इसलिए सुबह-सुबह के लिए परफेक्ट रेसिपी है। बच्चों और बड़ों दोनों के लिए स्वादिष्ट और स्वादिष्ट विकल्प हैं। छवि: एआई अगर आप अपने दिन की शुरूआती स्टेक और टेस्टी प्रोजेक्ट से करना चाहते हैं, तो लोकी सोयाबीन और का यह चीला जरूर ट्राई करें। इसे एक बार बनाने के बाद आपकी यह फेवरेट ब्रेकफ़ास्ट रेसिपी बन सकती है। छवि: एआई (टैग्सटूट्रांसलेट)लौकी-सोयाबीन चीला(टी)लौकी का चिल्ला(टी)सोयाबीन का चिल्ला(टी)लौकी सोयाबीन का चिल्ला(टी)हाई प्रोटीन रेसिपी(टी)ब्रेकफास्ट रेसिपी(टी)स्वस्थ नाश्ता(टी)लौकी(टी)चीला रेसिपी(टी)सोयाबीन लौकी चीला रेसिपी
'बेटी पढ़ाने से पहले दादा-दादी और नाना-नानी को पढ़ाना पड़ेगा':एक्ट्रेस नीना गुप्ता बोलीं- लड़कियों की जिंदगी नहीं बदली, 98% घरों में आज भी घूंघट

बॉलीवुड एक्ट्रेस नीना गुप्ता ने कहा कि समाज में महिलाओं की स्थिति को लेकर जितनी बातें की जाती हैं, असलियत उससे कहीं अलग है। आज भी देश के अधिकांश घरों में लड़कियों के लिए सोच नहीं बदली है। उन्होंने कहा कि बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ का नारा देने से पहले दादा-दादी और नाना-नानी को पढ़ाओ वाला काम करना होगा, तभी बेटी सच में बचेगी। नीना गुप्ता ने यह बात जयपुर के होटल ललित में आयोजित ‘डायलॉग ऑन मेंटल वेलनेस’ कार्यक्रम में कही। इस दौरान उन्होंने अपनी आत्मकथा सच कहूं तो, परिवार, महिलाओं की स्थिति, पालन-पोषण, रिश्तों, मानसिक स्वास्थ्य और अपने जीवन के अनुभवों पर खुलकर बात की। मेरे पास काम नहीं था तो कोई भी मेरे बारे में कुछ भी लिख देता था नीना गुप्ता ने कहा कि अपनी आत्मकथा लिखने का विचार करीब 25 साल पहले आया था। शुरू में जब मेरे पास काम नहीं था, तब मेरी कोई वैल्यू नहीं थी, तो कोई भी मेरे बारे में कुछ भी लिख देता था। तब मुझे लगा कि किसी को पता ही नहीं कि मैं असल में कैसी हूं। इसलिए मैंने सोचा कि मैं खुद लिखूंगी कि मैं वास्तव में कैसी हूं। उन्होंने बताया कि शुरुआत में उन्होंने किताब लिखने के लिए एडवांस भी ले लिया था, लेकिन हिम्मत नहीं जुटा पाई। मैं मम्मी, पापा, भाई और उनका परिवार के बारे में लिखना चाहती थी। उन्होंने पूरी जिंदगी अपनी सच्चाई छिपाकर रखी थी। मुझे लगा कि मुझे उनकी जिंदगी सामने लाने का अधिकार नहीं है। जब भी लिखना शुरू करती, सोचती कि मम्मी को बुरा लगेगा, पापा को बुरा लगेगा, भाई को बुरा लगेगा और मैं रुक जाती थी। ‘कोविड में हिम्मत आई, क्योंकि अब किसी का डर नहीं था’ उन्होंने कहा कि कोविड के दौरान जब वह छह महीने अपने पहाड़ी घर में रहीं, तब जाकर किताब पूरी हो सकी। तब तक मेरे परिवार के लगभग सभी लोग इस दुनिया से जा चुके थे। तब मुझे किसी का डर नहीं था। क्योंकि हम सबसे ज्यादा अपने लोगों से ही डरते हैं। मैं तो भगवान से ज्यादा अपनी बेटी से डरती हूं। नीना ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपनी किताब में भी सब कुछ नहीं लिखा। उन्होंने कहा कि मैंने झूठ नहीं लिखा, लेकिन सब कुछ भी नहीं लिखा। कुछ लोगों के बारे में बातें छिपा दीं क्योंकि लगा कि वह मेरी बेटी मसाबा, मेरे पति या कुछ दूसरे लोगों के लिए ठीक नहीं होगा। मैं किसी से बदला नहीं लेना चाहती थी। मेरे पास मौका था कि जिन लोगों ने मेरे साथ गलत किया, उनके बारे में लिखूं, लेकिन मैंने खुद को रोका। उन्होंने हंसते हुए कहा कि प्रकाशक के वकीलों ने तो उन्हें लगभग सभी लोगों के नाम तक बदलने के लिए कह दिया था। ‘भगवान से लड़ती भी हूं और धन्यवाद भी देती हूं’ मानसिक स्वास्थ्य पर बात करते हुए नीना ने कहा कि वह अपना मन भगवान के सामने खोल देती हैं। मैं दिन में कम से कम दस बार भगवान को धन्यवाद कहती हूं। जब रात को अपनी सफेद चादर पर लेटती हूं तो सबसे पहले ‘थैंक यू’ बोलती हूं। और जब गुस्सा आता है तो भगवान को डांटती भी हूं। कोई तो ताकत है जो मुझसे बड़ी है। मैं उसी से बात करती हूं। महिलाओं की स्थिति पर उन्होंने कहा कि शहरों में थोड़ा बदलाव जरूर दिखता है, लेकिन गांवों और छोटे कस्बों में हालात अब भी पहले जैसे हैं। हम लोग शायद एक-दो प्रतिशत आबादी की बात कर रहे हैं। बाकी जगह आज भी घूंघट है, पैर छूना है, सेवा करना है। बहुत कुछ नहीं बदला है। पंचायत वेबसीरीज का सुनाया किस्सा नीना ने पंचायत की शूटिंग के दौरान मध्य प्रदेश के एक गांव का अनुभव साझा किया। उन्होंने कहा कि मैंने एक लड़की से पूछा कि क्या पढ़ती हो? उसकी मां बोली- पढ़ तो रही है, लेकिन 18 साल की होते ही शादी कर देंगे। फिर घूंघट करेगी, घर संभालेगी, बच्चे पैदा करेगी। यह आज भी हो रहा है। उन्होंने कहा कि केवल बेटी को पढ़ाने से बदलाव नहीं आएगा। मैंने अपनी एक दोस्त से कहा कि ‘बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ’ से पहले दादा-दादी और नाना-नानी को पढ़ाओ। जब तक उनकी सोच नहीं बदलेगी, बेटी पढ़ भी जाएगी तो उससे कहा जाएगा कि अब बर्तन मांजो। ‘बच्चों पर गुस्सा नहीं, प्यार से बात कीजिए’ उन्होंने अपनी बेटी मसाबा के साथ रिश्ते का जिक्र करते हुए कहा कि समय के साथ उन्होंने खुद भी बहुत कुछ सीखा। पहले मैं कहती थी- नहीं जाना है तो नहीं जाना है। फिर जवाब मिलता था- मैं तो जाऊंगी। बाद में समझ आया कि अगर वही बात प्यार से कहूं कि बेटा, मुझे यह ठीक नहीं लग रहा… बाकी फैसला तुम्हारा है, तो वह खुद सोचती थी। उन्होंने कहा कि बच्चे वही सीखते हैं जो माता-पिता करते हैं। एक दिन मैंने बेटी से कहा कि चिल्लाओ मत। उसने जवाब दिया- आप भी तो चिल्लाती हैं। तब समझ आया कि बच्चे वही दोहराते हैं जो हमें करते हुए देखते हैं। ‘मेरा फोकस काम से हटकर रिश्तों पर चला गया’ कार्यक्रम में अपने करियर को लेकर उन्होंने खुलकर आत्ममंथन किया। उन्होंने कहा कि अगर मेरा फोकस सही रहता तो मैं और ऊंचाई तक पहुंच सकती थी। एक समय ऐसा आया जब मेरा ध्यान काम से ज्यादा एक अच्छे जीवनसाथी की तलाश पर चला गया। मुझे लगता है कि यही मेरी सबसे बड़ी गलती थी। महिलाओं का फोकस कई बार करियर से हटकर पति ढूंढने पर चला जाता है। अर्जुन की तरह अगर सिर्फ लक्ष्य पर नजर रहे तो मंजिल जरूर मिलती है। ‘आज की पीढ़ी बहुत कन्फ्यूज है’ युवाओं की मानसिक स्थिति पर उन्होंने कहा कि आज की पीढ़ी सबसे ज्यादा भ्रम में है। मैं बहुत सारी युवा लड़कियों के साथ काम कर रही हूं। वे कहती हैं कि अच्छे लड़के नहीं मिलते। डेटिंग ऐप्स पर जा रही हैं, लेकिन वहां भी परेशान हैं। दूसरी तरफ लड़के भी यही कहते होंगे कि अच्छी लड़कियां नहीं मिलतीं। यह पीढ़ी बहुत कन्फ्यूज है। घर में पुराने विचार हैं और बाहर बहुत आधुनिक सोच। ऐसे में उन्हें समझ नहीं आता कि सही क्या है। कार्यक्रम के अंत में उन्होंने कहा कि
सर्वगुण संपन्न:अब नॉन ग्लैमरस रोल में दिखेंगी वाणी कपूर, 3 महीने की तैयारी

वाणी कपूर की अगली फिल्म ‘सर्वगुण संपन्न’ है। इसकी निर्देशक सोनाली रतन देशमुख हैं। उन्होंने इस फिल्म के आइडिया से लेकर वाणी के इससे जुड़ने और कहानी के फोकस पर खास बातचीत की… निर्देशक सोनाली ‘सर्वगुण संपन्न’ को लेकर कहती हैं…‘फिल्म की शुरुआत किसी स्टार को ध्यान में रखकर नहीं, बल्कि एक वन-लाइनर आइडिया से हुई थी। ‘शिद्दत’ के बाद मैडॉक फिल्म्स की क्रिएटिव हेड शारदा कार्की ने मुझे लेखक सुमित घिल्डियाल के साथ तैयार की गई कहानी सुनाई, जिसमें मुझे अलग तरह की मानवीय कॉमेडी नजर आई। इसके बाद स्क्रिप्ट पर कई महीनों तक काम हुआ। कहानी को बार-बार लिखा गया ताकि हास्य परिस्थितियों से पैदा हो और भावनात्मक संतुलन भी बना रहे। वन-लाइनर सिर्फ दिशा देता है, असली फिल्म स्क्रीनप्ले में तैयार होती है।’ फिल्म पूरी तरह फैमिली ड्रामा, जिंदगी में आए बदलावों के इर्द-गिर्द घूमती है कहानी सोनाली का कहना है कि ‘फिल्म की बाहरी परत देखकर निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। किसी एडल्ट स्टार से मिलती-जुलती शक्ल कहानी की सिर्फ शुरुआती वजह है, जबकि पूरी फिल्म एक छोटे शहर की लड़की की जिंदगी में आए बदलावों और पारिवारिक रिश्तों के इर्द-गिर्द घूमती है। किरदार को जीने पर रहा वाणी का पूरा जोर बकौल सोनाली…‘फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले वाणी ने करीब तीन महीने तक अपने किरदार पर काम किया। इस दौरान लगातार स्क्रिप्ट रीडिंग, वर्कशॉप और किरदार की मानसिकता, भाषा, बॉडी लैंग्वेज व व्यवहार पर विस्तार से चर्चा की गई। हमारा उद्देश्य वाणी से सिर्फ अभिनय कराना नहीं था, बल्कि उन्हें उस लड़की की दुनिया और व्यक्तित्व में पूरी तरह ढालना था, ताकि स्क्रीन पर उनका किरदार पूरी तरह स्वाभाविक लगे।’ ऋषिकेश भी फिल्म में, सिर्फ लोकेशन नहीं, कहानी का अहम किरदार भी सोनाली बताती हैं…‘फिल्म के लिए ऋषिकेश का चयन केवल खूबसूरत लोकेशन की वजह से नहीं किया गया। धार्मिक माहौल, छोटे शहर की सामाजिक संरचना और पारिवारिक जीवन कहानी का अहम हिस्सा हैं। शूटिंग ऋषिकेश के साथ हरिद्वार और देहरादून में भी हुई, लेकिन कहानी की आत्मा ऋषिकेश में ही बसती है।’ रिश्तों की केमिस्ट्री पर फोकस, दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान लाने का लक्ष्य सोनाली ये भी कहती है कि ‘फैमिली कॉमेडी में पंचलाइन से ज्यादा रिश्तों की केमिस्ट्री काम करती है। अगर फिल्म खत्म होने के बाद दर्शक मुस्कुराते हुए सिनेमाघर से बाहर निकलेंगे, तो वही ‘सर्वगुण संपन्न’ की सबसे बड़ी सफलता होगी।’ स्क्रिप्ट लॉक होने के बाद फिल्म से जुड़ी थीं वाणी, तोड़ी अपनी ग्लैमरस इमेज सोनाली के अनुसार, ‘स्क्रिप्ट के कई ड्राफ्ट पूरे होने के बाद ही वाणी को कहानी सुनाई गई। इस बार वाणी अपने अब तक के ग्लैमरस स्क्रीन इमेज से अलग ऋषिकेश की एक साधारण, चश्मा लगाने वाली और सलवार-कमीज पहनने वाली लड़की के किरदार में नजर आएंगी। कई बार सेट इमेज से निकलकर सामान्य किरदार निभाना भी चैलेंजिंग होता है।’
संडे प्रोफाइल : जो मैनचिन:अमेरिकी राजनीति में तीसरे विकल्प की खोज में जुटे डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व सांसद

डेमोक्रेटिक पार्टी के पूर्व सांसद जो मैनचिन उन राजनेताओं में हैं, जिनका अपनी स्वतंत्र पहचान बनाए रखने में ज्यादा यकीन है। वे अमेरिका की दो ध्रुवीय राजनीति को अलग रास्ते पर ले जाने की नई पहल से सुर्खियों में हैं। राजनीति में कुछ हस्तियां हमेशा मुख्य धारा से अलग हटकर चलने की कोशिश करती हैं। दो बार सांसद रह चुके जो मैनचिन ऐसे ही हैं। वे अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए कुछ नया करते रहते हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी में रहते हुए उन्होंने कई बार पार्टी लाइन का विरोध किया था। उन्होंने मतभेदों के कारण 2024 में पार्टी छोड़ दी। अब वे नए रास्ते पर निकल पड़े हैं। उन्होंने स्वतंत्र लीडरशिप काउंसिल लॉन्च की है। 78 साल के मैनचिन अमेरिकी संसद के एक सदन-कांग्रेस के लिए चुनाव लड़ने वाले निर्दलीय उम्मीदवारों का समर्थन करेंगे। 23 जुलाई को जब उन्होंंने एक समारोह में काउंसिल के गठन का ऐलान किया तो कैलिफोर्निया के सांसद केविन किली सहित कई उम्मीदवार मौजूद थे। मैनचिन का कहना है, हम एक अन्य पार्टी नहीं बना रहे हैं। हम उन लोगों का साथ देंगे जो किसी पार्टी के नहीं हैं, स्वतंत्र हैं। अमेरिका की दो दलीय राजनीति में तीसरी राजनीतिक ताकत बनाने के प्रयास बहुत कम हुए हैं। इसलिए उनकी पहल अहम है। अपने राजनीतिक करियर में मैनचिन मध्यमार्गी रहे हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी छोड़ने से पहले उन्होंने 2020-2024 के बीच जलवायु परिवर्तन और अमीरों पर टैक्स सहित कई मुद्दों पर संसद में पार्टी लाइन का विरोध किया था। जो मैनचिन का सफर वेस्ट वर्जीनिया के कोयला खदान क्षेत्र फार्मिंगटन से शुरू हुआ। उनके पिता शहर के मेयर थे। किराना दुकान संचालक उनके दादा जरूरतमंदों की मदद करते थे। उनसे प्रेरित होकर मैनचिन ने भी लोगों का हाल जानना और उनकी सहायता करना शुरू किया। इससे स्थानीय प्रभाव बढ़ता गया। वेस्ट वर्जीनिया यूनिवर्सिटी में छात्रों की एक पार्टी के दौरान उनकी मुलाकात गेल कोनेली से हुई, जो बाद में उनकी पत्नी बनीं। राजनीति में उनकी शुरुआत राज्य विधानसभा से हुई। 2004 में वे वेस्ट वर्जीनिया के गवर्नर बने और 2010 में पहली बार अमेरिकी सीनेट पहुंचे। वे कोयला उद्योग के समर्थक रहे हैं। 2021-22 में सीनेट में डेमोक्रेट्स और रिपब्लिकंस के 50-50 सदस्य होने से जो मैनचिन का वोट निर्णायक बन गया। उनके दबाव में राष्ट्रपति जो बाइडेन को कई विधेयकों में बदलाव करने पड़े। मैनचिन का कहना है कि डेमोक्रेटिक पार्टी में अब उनके जैसे अनुदारवादी नेताओं के लिए जगह नहीं है। वे राजनीतिक ध्रुवीकरण के खिलाफ अभियान चला रहे हैं। गैलप के अनुसार अधिकांश अमेरिकी दोनों प्रमुख दलों के प्रति अनुकूल राय नहीं रखते, जबकि एक सर्वे में 45% लोगों ने खुद को निर्दलीय बताया। रिपब्लिकन प्रभाव वाले वेस्ट वर्जीनिया से उनका दो बार सीनेट जीतना उल्लेखनीय रहा, हालांकि 2024 में वे चुनाव हार गए थे।
जयपुर पहुंचीं मोहन सिस्टर्स:यूनिवर्सिटी के एनुअल फेस्ट में देंगी लाइव परफॉर्मेंस; बोलीं- पिंक सिटी में परफॉर्म करना हमेशा खास

बॉलीवुड की चर्चित मोहन सिस्टर्स रविवार दोपहर जयपुर पहुंचीं। मशहूर गायिका नीति मोहन, अभिनेत्री और डांसर शक्ति मोहन और कोरियोग्राफर एवं परफॉर्मर मुक्ति मोहन दिल्ली रोड स्थित एक निजी यूनिवर्सिटी के वार्षिक सांस्कृतिक समारोह में प्रस्तुति देने के लिए गुलाबी नगरी आई हैं। एयरपोर्ट पर तीनों बहनें बेहद कूल और कैजुअल अंदाज में नजर आईं। यहां से वे सीधे होटल रवाना हुईं, जहां कुछ देर विश्राम के बाद रिहर्सल के लिए यूनिवर्सिटी पहुंचेंगी। शाम को वे हजारों विद्यार्थियों के सामने अपनी लाइव प्रस्तुति देंगी। एयरपोर्ट पर तीनों बहनों ने कहा कि जयपुर में परफॉर्म करना हमेशा खास अनुभव रहता है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के दर्शकों का उत्साह और प्यार हर बार उन्हें यहां आने के लिए प्रेरित करता है। इस बार भी वे एक साथ मंच साझा करने को लेकर बेहद उत्साहित हैं और विद्यार्थियों के लिए यादगार प्रस्तुति देने की तैयारी कर चुकी हैं। यूनिवर्सिटी के वार्षिक समारोह को लेकर विद्यार्थियों में खासा उत्साह है। आयोजकों के अनुसार तीनों बहनों की लाइव प्रस्तुति इस वर्ष के सांस्कृतिक उत्सव का सबसे बड़ा आकर्षण होगी। स्टूडेंट्स लंबे समय से उनके कार्यक्रम का इंतजार कर रहे थे और कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के शामिल होने की उम्मीद है। तीनों बहनों ने बनाई अलग-अलग पहचान मोहन सिस्टर्स आज भारतीय मनोरंजन जगत का जाना-माना नाम हैं। चारों बहनों ने अपने-अपने क्षेत्र में अलग मुकाम हासिल किया है। इस बार जयपुर पहुंचीं नीति, शक्ति और मुक्ति मोहन लगातार बॉलीवुड और मनोरंजन उद्योग में सक्रिय हैं। नीति मोहन: बॉलीवुड की लोकप्रिय आवाज नीति मोहन देश की सबसे सफल प्लेबैक सिंगर्स में शुमार हैं। उन्होंने बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने दिए हैं। ‘इश्क वाला लव’, ‘जिया रे’, ‘सौ आसमान’, ‘नैनों वाले ने’, ‘मेरे यादों में’, ‘कश्मीर मैं तू कन्याकुमारी’ जैसे गीतों ने उन्हें देशभर में लोकप्रिय बनाया। नीति कई बड़े लाइव कॉन्सर्ट और म्यूजिक फेस्टिवल्स का भी हिस्सा रहती हैं और अपनी दमदार स्टेज परफॉर्मेंस के लिए जानी जाती हैं। शक्ति मोहन: डांस की दुनिया का बड़ा नाम शक्ति मोहन ने डांस रियलिटी शो ‘डांस इंडिया डांस’ जीतकर अपने करियर की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने बतौर डांसर, कोरियोग्राफर और अभिनेत्री अपनी अलग पहचान बनाई। वे कई बड़े डांस रियलिटी शोज में जज और मेंटर रह चुकी हैं। उनकी डांस कंपनी और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों प्रशंसक हैं। बॉलीवुड के कई लोकप्रिय गानों की कोरियोग्राफी और स्टेज परफॉर्मेंस में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। मुक्ति मोहन: अभिनय और डांस दोनों में सक्रिय मुक्ति मोहन ने भी डांस रियलिटी शोज से पहचान बनाई और इसके बाद अभिनय तथा मंचीय प्रस्तुतियों में अपनी अलग जगह बनाई। वे कई टीवी शोज, म्यूजिक वीडियो और फिल्मों में नजर आ चुकी हैं। अपनी अभिव्यक्ति और समकालीन नृत्य शैली के कारण वे युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं।
वृंदावन में VIP ट्रीटमेंट के आरोपों पर भड़कीं दीपिका सिंह:इन्फ्लुएंसर से बोलीं- व्यूज के लिए भक्तों की भावनाओं से खिलवाड़ न करें

टीवी एक्ट्रेस दीपिका सिंह ने वृंदावन मंदिर में VIP ट्रीटमेंट मिलने के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। हाल ही में पति रोहित राज गोयल और बच्चों के साथ वृंदावन दर्शन के दौरान वायरल हुए वीडियो को लेकर उठे विवाद के बीच दीपिका ने रविवार को इंस्टाग्राम पर नया वीडियो शेयर कर कहा कि पूरा सच सामने है और लोगों को बिना पूरी जानकारी के आरोप नहीं लगाने चाहिए। दरअसल, दीपिका सिंह हाल ही में अपने परिवार के साथ वृंदावन दर्शन के लिए पहुंची थीं। इस दौरान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसमें कुछ यूजर्स ने आरोप लगाया कि उन्हें मंदिर में VIP ट्रीटमेंट दिया गया, जबकि उनके सामने खड़ी एक बुजुर्ग महिला की अनदेखी की गई। दीपिका सिंह ने आरोपों पर जवाब दिया विवाद बढ़ने पर दीपिका ने इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर किया। साथ ही एक इन्फ्लुएंसर को टैग करते हुए लिखा, “यह सब @glam_with_nishitwins (निशा बंसल) ने मेरी और पुजारी जी की ट्रोलिंग से शुरू किया था, लेकिन मैं उन्हें पूरी सच्चाई दिखाने की कोशिश कर रही हूं। इससे उन्हें भी ज्यादा व्यूज और फॉलोअर्स मिलेंगे। बाद में मुझे धन्यवाद कह सकती हैं। सबूत सबके सामने है। माता जी का प्रसाद भी मिला।” उन्होंने आगे लिखा, “असली प्रसाद: सही सोच, शुद्ध मन, अहंकार का त्याग, किसी पर बिना जाने उंगली न उठाना, शांति और अपने हक के लिए खड़े होने की शक्ति। दो बच्चों को देखकर दिया गया प्रेम क्या पाप है? बच्चे भी तो भगवान श्रीकृष्ण (गोपाल जी) का ही रूप हैं।” इन्फ्लुएंसर पर भड़कते हुए उन्होंने लिखा, “@glam_with_nishitwins, आप और आपके जैसे लोग ऐसी रील बनाकर भक्तों की भावनाओं के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। जो लोग अभी-अभी भक्ति के रास्ते पर चले हैं, उनका मन इससे टूट सकता है। कृपया भक्तों की भावनाओं का सम्मान करें। सिर्फ व्यूज और फॉलोअर्स पाने के लिए लोगों को गुमराह न करें। राधे-राधे।” वीडियो में बुजुर्ग महिला को भी प्रसाद मिला दीपिका ने जो वीडियो शेयर किया उसमें मंदिर के पुजारी उन्हें अंगवस्त्र, फूलों की माला और प्रसाद देते दिखाई देते हैं। साथ ही बच्चों को बांसुरी भी भेंट की जाती है। वीडियो में सामने खड़ी बुजुर्ग महिला को भी प्रसाद मिलता हुआ दिखाई देता है। दरअसल, इंस्टाग्राम पर निशा बंसल ने दीपिका का वीडियो शेयर करते हुए लिखा था, “कुछ तो शर्म कर लो, धर्म के ठेकेदारों। वो एक बूढ़ी मां है। उसकी उम्र खड़े होने लायक नहीं थी। इनको माला, बांसुरी, इत्र, सब सेवा, उसके नसीब प्रसाद भी नहीं।” दीपिका को ‘दीया और बाती हम’ से पहचान मिली थी दीपिका सिंह ने साल 2011 में स्टार प्लस के सुपरहिट शो ‘दीया और बाती हम’ से टीवी डेब्यू किया। इस शो में उन्होंने आईपीएस अधिकारी संध्या राठी का किरदार निभाया। इसके बाद उन्होंने वेब सीरीज ‘द रियल सोलमेट’ और टीवी शो ‘कवच: महाशिवरात्रि’ में काम किया। साल 2022 में फिल्म ‘टीटू अंबानी’ से बॉलीवुड में कदम रखा।
कलौंजी हेयर ऑयल: पसंदीदा में बालों और डैंड्रफ से हैं परेशान? घर पर ही खास कलौंजी का हेयर ऑयल; नोट कर लें आसान तरीका

26 जुलाई 2026 को 11:40 IST पर अपडेट किया गया कलौंजी हेयर ऑयल: आजकल बहुत से लोग बालों के झड़ने, स्कैल्प रूखी रहने और डैंड्रफ से परेशान रहने वाले हैं। राहत पाने के लिए लोग कई उत्पादों का इस्तेमाल करते हैं। कलौंजी के तेल में मौजूद थायमोकाइनोन स्कैल्प की सूजन और आयोडीन युक्त स्ट्रेस को कम करके बालों की मजबूती में मदद कर सकता है। इसे बालों का चमत्कारी इलाज नहीं माना जा सकता है और इस पर अभी क्लिनिकल शोध की जरूरत है। आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा में कलौंजी के तेल का प्रयोग लंबे समय से होता आ रहा है। अनुसरण करना : कलौंजी बाल और स्कैल्प के लिए कई पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे थायमोकिनोन, ओमेगा-6 और ओमेगा-9 एसिड एसिड, विटामिन ई, अमीनो एसिड और प्लांट स्टेरॉल। छवि: फ्रीपिक कलौंजी का हेयर कलौंजी ऑयल बनाने के लिए आपको आधा कपौंजी, एक कप कोल्ड-प्रेस्ड नारियल का तेल या ऑलिव ऑयल, एक कांच की बोतल और एक महीन सूती कपड़ा या कलौंजी की जरूरत होगी। छवि: फ्रीपिक सबसे पहले कलौंजी को अधायन पर 1-2 मिनट प्रभाव भून लें और ध्यान दें कि बीज जलें नहीं। फिर भुनी हुई कलौंजी को दरदरा कूट लें। छवि: फ्रीपिक एक पैन में नारियल या जैतून के तेल को नारियल आँच पर गर्म करें और कुटी हुई कलौंजी के ढांचे को 30 मिनट तक बंद करें। छवि: फ्रीपिक बंद होने से तेल को ठंडा करें। इसके बाद इसे गुडकर कांच का साफ और बोतल में भर लें। इसे अदृश्य और अँधेरी जगह पर रखें। सही तरीके से स्टोर करने पर इसे लगभग 3 महीने तक इस्तेमाल किया जा सकता है। छवि: फ्रीपिक द्वारा प्रकाशित: कीर्ति सोनी प्रकाशित 26 जुलाई 2026 11:39 IST (टैग्सटूट्रांसलेट)कलौंजी हेयर ऑयल(टी)बालों के लिए काले बीज का तेल(टी)घर पर कलौंजी का तेल कैसे बनाएं(टी)प्राकृतिक बाल विकास तेल(टी)डैंड्रफ उपाय(टी)बालों के लिए थामोक्विनोन(टी)आयुर्वेदिक बालों की देखभाल
ईरान पर सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प:सलाहकारों ने चेतावनी दी, देश में इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ सबसे बड़े हमले को फिलहाल टाल दिया है। न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रंप ने यह फैसला अपने शीर्ष सलाहकारों और कैबिनेट सदस्यों के साथ शुक्रवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक के बाद लिया। इस दौरान मुख्य चिंता मध्य पूर्व में अमेरिकी सेना के पास मौजूद एयर डिफेंस सिस्टम और इंटरसेप्टर मिसाइलों की भारी कमी को लेकर थी। इंटरसेप्टर खत्म होने का डर ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने निजी तौर पर सलाह दी थी कि ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाना संभव तो है, लेकिन इससे सेंट्रल कमांड के पास मौजूद इंटरसेप्टर मिसाइलें खतरनाक स्तर तक खत्म हो सकती हैं। अधिकारियों का कहना है कि अप्रैल के अंत तक रक्षा विभाग 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें खर्च कर चुका है, जिनकी कीमत 4 मिलियन डॉलर प्रति मिसाइल से अधिक है। तब से स्थिति और खराब हुई है। जॉर्डन हमले के बाद बढ़ी चिंता हाल ही में जॉर्डन में तीन अमेरिकी सैनिकों की मौत के बाद चिंताएं और बढ़ गई हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ईरान के ड्रोन और मिसाइल हमले के दौरान एक बैलिस्टिक मिसाइल अमेरिकी सुरक्षा घेरे को भेदकर निकल गई थी। सैन्य विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अभियान बढ़ाया गया, तो अमेरिकी सैनिक, खाड़ी देशों के सहयोगी और महत्वपूर्ण ठिकाने ईरानी जवाबी हमलों के प्रति असुरक्षित हो जाएंगे। कूटनीति और दबाव की रणनीति व्हाइट हाउस के संचार निदेशक स्टीवन चेउंग ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप हमेशा से कूटनीतिक समाधान के पक्ष में रहे हैं, लेकिन अगर ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य या सहयोगियों के खिलाफ आतंकी गतिविधियां जारी रखता है, तो सभी विकल्प खुले हैं। उन्होंने कहा कि ईरान के लिए यही समझदारी है कि वह बातचीत के जरिए डील करे, वरना उसे अंजाम भुगतना होगा। आर्थिक दबाव और अन्य चुनौतियां ट्रंप के सलाहकारों ने चेतावनी दी है कि व्यापक युद्ध से वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ऊर्जा संकट और शरणार्थी संकट पैदा हो सकता है। इसके अलावा, प्रशासन के भीतर यह संदेह भी है कि तेज सैन्य अभियान ईरान को बातचीत की मेज पर लाने के बजाय उसे विदेशी खतरे के खिलाफ एकजुट कर सकता है। इसी दबाव को बनाए रखने के लिए शुक्रवार को ट्रेजरी विभाग ने ईरानी व्यवसायी बाबेक जंजानी के वित्तीय नेटवर्क से जुड़े 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंधों की घोषणा की है।
ईरान पर सबसे बड़े हमले से पीछे हटे ट्रम्प:सलाहकारों की चेतावनी- देश में पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों की कमी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के खिलाफ बड़े सैन्य हमले की योजना फिलहाल रोक दी है। द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, शीर्ष सैन्य अधिकारियों ने चेतावनी दी कि व्यापक कार्रवाई से अमेरिकी सेना के पास मौजूद पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों का भंडार तेजी से घट सकता है। जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन ने सलाह दी कि बड़े अभियान से मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल के अंत तक अमेरिका 1,200 से ज्यादा पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलें इस्तेमाल कर चुका था। हालांकि ट्रम्प ने कहा है कि जरूरत पड़ने पर सभी विकल्प खुले हैं। फिलहाल सैन्य कार्रवाई की बजाय अमेरिका ने ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाते हुए कारोबारी बाबेक जंजानी के नेटवर्क से जुड़ी 9 कंपनियों और 4 लोगों पर नए प्रतिबंध लगाए हैं। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. हूती विद्रोहियों का सऊदी अरब की रिफाइनरी पर हमला: हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उन्होंने शनिवार को सऊदी अरब के जजान स्थित सऊदी अरामको रिफाइनरी पर 3 बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया है। जजान रिफाइनरी को सऊदी अरब की पांचवीं सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी माना जाता है। 2. ईरान की फायरिंग के बाद 4 जहाजों ने बदला रास्ता: ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने दावा किया है कि उसकी नौसेना ने पिछले 24 घंटे में होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की कोशिश कर रहे चार जहाजों पर चेतावनी के तौर पर फायरिंग की। इसके बाद चारों जहाजों ने अपना रास्ता बदल लिया। 3. ईरान में पेट्रोल महंगा करने पर विचार: ईरान सरकार पेट्रोल की खपत को कंट्रोल करने के लिए पेट्रोल को महंगा कर सकती है। सरकार के मुताबिक, अभी इस पर विचार कर रही है कि बदलाव कैसे लागू किए जाएं। 4. अमेरिका ने ईरान पर हमला रोका: अमेरिका ने शुक्रवार रात ईरान पर हमला नहीं किया। इससे पहले वह लगातार 13 दिनों तक हर रात ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा था। 5. बहरीन में अमेरिकी ठिकाने पर ईरानी हमला: ईरान ने बहरीन में अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट के नौसैनिक ठिकाने पर हमला किया। यहां ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया गया, जिसके बाद कई बड़े विस्फोट हुए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
आईटी की नौकरी छोड़कर एक्टिंग चुनी:60 ऑडिशन बाद मिला पहला काम; नैना सरीन बोलीं- मुंबई में टिकना है तो पैसों का इंतजाम जरूरी

आईटी कंपनी की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर एफटीआईआई पहुंचीं और फिर मुंबई आकर लगातार संघर्ष किया। 60 ऑडिशन के बाद पहला विज्ञापन मिला, लेकिन हार नहीं मानी। वेब सीरीज मेड इन हेवन, त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर, राख और प्रीतम एंड पेड्रो जैसी सीरीज में नजर आ चुकीं अभिनेत्री नैना सरीन ने दैनिक भास्कर से बातचीत में अपने संघर्ष, ऑडिशन, इंडस्ट्री, परिवार और भविष्य की योजनाओं पर खुलकर बात की। सवाल: एक्टिंग का सपना देखने पर परिवार और समाज का कितना दबाव था? जवाब : मैं बोकारो के एक मिडिल क्लास परिवार से हूं। रिश्तेदारों को लगता था कि यह सिर्फ शौक है और कुछ साल बाद मैं वापस नौकरी कर लूंगी। लेकिन मम्मी-पापा ने हमेशा मेरा साथ दिया। मम्मी कहती थीं, “जब सिर पर पड़ेगा, तब देख लेंगे।” सवाल: मुंबई आने से पहले एफटीआईआई जाने का फैसला कैसे लिया? जवाब: मेरे पास सीधे मुंबई आने के पैसे नहीं थे। कॉलेज के एक सीनियर से एफटीआईआई के बारे में पता चला। मैं उस समय बेंगलुरु में आईटी कंपनी में इंस्ट्रक्शनल डिजाइनर थी। नौकरी के साथ वॉइस ओवर और मिमिक्री सीखती थी। फिर तैयारी करके एफटीआईआई का एंट्रेंस दोबारा दिया और चयन हो गया। सवाल: एफटीआईआई ने क्या सबसे बड़ा सबक दिया? जवाब: वहां सिर्फ एक्टिंग नहीं सिखाई जाती, बल्कि खुद को समझना और अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करना सीखते हैं। सबसे बड़ी ताकत वहां की कम्युनिटी है। मुंबई आने के बाद भी बैचमेट और सीनियर्स हमेशा साथ रहे। सवाल: मुंबई में पहला काम कैसे मिला? जवाब: मुंबई आने के बाद मैंने लगातार ऑडिशन दिए। करीब 60 ऑडिशन के बाद पहला विज्ञापन मिला। उसे नीरज घेवान ने डायरेक्ट किया था। बाद में उन्होंने मुझे मेड इन हेवन में भी कास्ट किया। सवाल: आपकी पहली फिल्म कौन-सी थी? जवाब: एफटीआईआई में पढ़ाई के दौरान ही मुझे फिल्म ‘होटल मुंबई’ मिली। इसमें मैंने ताज होटल की रिसेप्शनिस्ट का किरदार निभाया। इसके बाद ‘ईब आले ऊ’ ने मुझे काफी पहचान दिलाई। यह कई इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल्स में दिखाई गई। सवाल: वेब सीरीज का सफर कैसे शुरू हुआ? जवाब: मेड इन हेवन के बाद त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर मिली। इस शो में लंबा शूट था और कई दूसरे प्रोजेक्ट छोड़ने पड़े। लेकिन सेट का माहौल शानदार था। मानव कौल और पूरी टीम ने हर सीन में काफी मदद की। सवाल: राख में सिर्फ दो सीन थे, फिर भी रोल क्यों चुना? जवाब: किरदार छोटा था, लेकिन बहुत प्रभावशाली था। ऑडिशन देते समय ही समझ आ गया था कि यह आसान नहीं है। इसमें इंटिमेसी वाले सीन भी थे, लेकिन सेट पर इंटिमेसी कोऑर्डिनेटर मौजूद थे, इसलिए पूरा माहौल सुरक्षित और प्रोफेशनल था। सवाल: प्रीतम एंड पेड्रो में राजकुमार हिरानी और अरशद वारसी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा? जवाब: अरशद सर बेहद अनुशासित हैं। उनकी दिनचर्या सुनकर मैं हैरान रह गई। वहीं राजकुमार हिरानी सर ने मेरा सीन देखकर पूछा कि क्या मैंने एक्टिंग की पढ़ाई की है। जब उन्हें पता चला कि मैं एफटीआईआई से हूं, तो उन्होंने संस्थान को लेकर काफी बातें कीं। सवाल: आपने कहा कि लीड रोल करने के बाद भी छोटे किरदार करने में संकोच नहीं करतीं? जवाब: बिल्कुल नहीं। मैंने खुद कास्टिंग डायरेक्टर्स से कहा कि मुझे हर तरह के रोल के लिए ऑडिशन बुलाइए। मैं स्क्रीन टाइम नहीं देखती। अच्छा किरदार छोटा हो या बड़ा, फर्क नहीं पड़ता। सवाल: संघर्ष के दौरान सबसे बड़ी चुनौती क्या रही? जवाब: मुंबई में सबसे बड़ी चुनौती पैसों की होती है। मैं हर नए कलाकार से कहती हूं कि पहले अपनी कमाई का कोई जरिया तय करें। वॉइस ओवर करें, असिस्टेंट बनें, राइटिंग करें या कोई दूसरी नौकरी करें, लेकिन आर्थिक रूप से टिके रहना जरूरी है। सवाल: सबसे चुनौतीपूर्ण किरदार कौन-सा रहा? जवाब: त्रिभुवन मिश्रा सीए टॉपर में मां का किरदार। मां की जिम्मेदारी, उसकी बॉडी लैंग्वेज और भावनाएं समझना आसान नहीं था। इसके लिए मैंने अपनी मां को बहुत करीब से ऑब्जर्व किया। सवाल: इस समय किन प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं? जवाब: कुछ इंडिपेंडेंट फिल्मों की शूटिंग पूरी की है। इसके अलावा अपनी एफटीआईआई बैचमेट श्रेया भट्टाचार्य के साथ अपने निजी अनुभवों पर आधारित एक मिनी सीरीज लिख रही हूं। अभी उसके लिए प्रोड्यूसर की तलाश है। सवाल: निजी जिंदगी का क्या प्लान है? जवाब: मेरा फोकस अभी सिर्फ फिल्मों में काम करना है। शादी सही समय और सही इंसान मिलने पर हो जाएगी। फिलहाल मैं चाहती हूं कि मेरे पास इतना काम हो कि बाकी चीजों के बारे में सोचने का समय ही न मिले। सवाल: आपने मिमिक्री और वॉइस ओवर भी सीखा है? जवाब: हां। बेंगलुरु में इसकी ट्रेनिंग ली थी। आवाज निकालना आसान है, लेकिन उसे लंबे समय तक उसी टोन में बनाए रखना सबसे मुश्किल काम होता है। पहले बच्चों की ई-लर्निंग किताबों की रिकॉर्डिंग भी किया करती थी।









