Sunday, 11 Oct 2026 | 06:55 PM

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चारधाम यात्रा 2026 पर युद्ध का साया, रजिस्ट्रेशन में गिरावट:बुकिंग लेने से कतरा रहे ट्रैवल ऑपरेटर्स; पर्यटन व्यवसायियों की बढ़ीं मुश्किलें

चारधाम यात्रा 2026 पर युद्ध का साया, रजिस्ट्रेशन में गिरावट:बुकिंग लेने से कतरा रहे ट्रैवल ऑपरेटर्स; पर्यटन व्यवसायियों की बढ़ीं मुश्किलें

उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली चारधाम यात्रा पर इस बार वैश्विक तनाव और युद्ध के हालात का गहरा साया मंडरा रहा है। यात्रा शुरू होने से पहले ही बुकिंग में आई गिरावट ने पर्यटन कारोबारियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल यात्रा के शुरुआती 26 दिनों में ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी थी और पंजीकरण का आंकड़ा 17 लाख के पार पहुंच गया था। इस साल स्थिति उलट है; अब तक केवल 11,07,841 श्रद्धालुओं ने ही पंजीकरण कराया है। 19 अप्रैल से शुरू होने वाली यात्रा के लिए रजिस्ट्रेशन में आई यह गिरावट पर्यटन व्यवसाय से जुड़े लोगों के लिए खतरे की घंटी मानी जा रही है। बुकिंग लेने से क्यों कतरा रहे ऑपरेटर्स? अधिकांश ट्रैवल ऑपरेटर्स ने फिलहाल एडवांस बुकिंग लेने से साफ इनकार कर दिया है। पर्यटन व्यवसायी दीपक बिष्ट के अनुसार, “वैश्विक स्तर पर युद्ध के हालात को देखते हुए ईंधन (डीजल-पेट्रोल) की कीमतों में अचानक उछाल की आशंका बनी हुई है। यदि हम आज के रेट पर बुकिंग ले लेते हैं और यात्रा शुरू होने तक ईंधन महंगा हो जाता है, तो हमें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।” होटल व्यवसाय पर भी असर होटल संचालकों का कहना है कि जैसे ही कपाट खुलने की तिथि घोषित हुई थी, बुकिंग में तेजी आई थी। लेकिन, ईरान-अमेरिका युद्ध की खबरों के चलते वे बुकिंग भी अब ‘होल्ड’ पर चली गई हैं और नई बुकिंग मिलनी लगभग बंद हो गई है। गौरतलब है कि 2025 में भी भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव का असर चारधाम यात्रा पर पड़ा था, और अब इस साल ईरान-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष ने यात्रा शुरू होने से पहले ही संकट के बादल खड़े कर दिए हैं।

ऑस्ट्रिया का अमेरिका को एयरस्पेस देने से इनकार:इटली-फ्रांस और स्पेन भी मना कर चुके; ईरान में ₹3,800 करोड़ का ब्रिज तबाह

ऑस्ट्रिया का अमेरिका को एयरस्पेस देने से इनकार:इटली-फ्रांस और स्पेन भी मना कर चुके; ईरान में ₹3,800 करोड़ का ब्रिज तबाह

ऑस्ट्रिया ने गुरुवार को अमेरिका को अपना एयर स्पेस इस्तेमाल करने से मना कर दिया। ऑस्ट्रिया के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उनका देश तटस्थ नीति अपनाता है, इसलिए वह किसी युद्ध में सीधे शामिल नहीं हो सकते। इससे पहले स्पेन, फ्रांस और इटली ने भी अमेरिका को अपने एयरस्पेस और सैन्य ठिकाने इस्तेमाल करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया था। वहीं ईरान की राजधानी तेहरान को कराज शहर से जोड़ने वाले B1 हाईवे ब्रिज पर गुरुवार को अमेरिका ने हवाई हमला किया। ईरानी न्यूज एजेंसी फार्स के मुताबिक इस हमले में कई लोग घायल हुए । यह पुल इसी साल शुरू हुआ था और इसे मिडिल ईस्ट का सबसे ऊंचा पुल माना जाता है। करीब 1050 मीटर लंबे और 136 मीटर ऊंचे इस पुल को बनाने में लगभग 400 मिलियन डॉलर (करीब ₹3,800 करोड़) खर्च हुए थे। इस घटना पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ईरान अब इस ब्रिज का इस्तेमाल नहीं कर सकेगा। उन्होंने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा कि अभी भी समय है कि वह समझौता कर ले, नहीं तो आगे और बड़ा नुकसान हो सकता है। भारत बोला- हम अकेले जिसने होर्मुज में नाविक खोए ब्रिटेन की पहल पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए गुरुवार को एक ऑनलाइन बैठक हुई, जिसमें 60 से ज्यादा देशों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में भारत की तरफ से विदेश सचिव विक्रम मिसरी शामिल हुए। बैठक में विक्रम मिसरी ने कहा कि होर्मुज संकट में अब तक सिर्फ भारत के ही नागरिक मारे गए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक होर्मुज संकट में अब तक 3 भारतीय नाविक मारे जा चुके हैं, ये सभी विदेशी जहाजों पर काम कर रहे थे। भारत ने कहा कि इस पूरे संकट का हल सिर्फ बातचीत और शांति से ही निकल सकता है। भारत ने सभी देशों से अपील की कि तनाव कम करें और आपसी बातचीत के जरिए रास्ता निकालें। ईरान जंग से जुड़ी 3 तस्वीरें… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे दिए ब्लॉग से गुजर जाइए…

मोतिहारी में जहरीली शराब से 5 की मौत:6 की आंख की रोशनी गई; 7 गंभीर; हत्या का केस दर्ज, SHO सस्पेंड-चौकीदार गिरफ्तार

मोतिहारी में जहरीली शराब से 5 की मौत:6 की आंख की रोशनी गई; 7 गंभीर; हत्या का केस दर्ज, SHO सस्पेंड-चौकीदार गिरफ्तार

बिहार में एकबार फिर जहरीली शराब से मौत हुई है। मोतिहारी में 5 लोगों की जान चली गई, जबकि 15 की हालत गंभीर है। इनमें से 6 की आंखों की रोशनी चली गई है। सभी का इलाज अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है। बीमार लोगों में से 2 की हालत नाजुक बनी हुई है। मामला रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा गांव से शुरू हुआ और अब आसपास के इलाकों में फैल गया है। रघुनाथपुर थाना के बालगंगा के संपत साह ने दोपहर 1 बजे मुजफ्फरपुर के SKMCH में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। इससे पहले सुबह परीक्षण मांझी (46), और हीरालाल भगत की मौत हो गई। जबकि पहली मौत कल सुबह और दूसरी कल गुरुवार रात को हुई। शराबकांड पर एसपी ने कार्रवाई की है। तुरकौलिया SHO उमाशंकर मांझी को सस्पेंड किया गया है, जबकि चौकीदार भरत राय को गिरफ्तार कर लिया है। तुरकौलिया और रघुनाथपुर थाने में मामले को लेकर हत्या का केस दर्ज कराया गया है। ये केस मृतक प्रमोद यादव और हीरालाल भगत के परिवार की शिकायत पर हुआ है। सिलसिलेवार तरीके से जानिए शराबबंदी वाले बिहार में लोगों ने कहां शराब पी और कैसे मौतों का सिलसिला शुरू हुआ….. शराब कांड से जुड़ी कुछ तस्वीरें…. गुरुवार रात दूसरी मौत के बाद खुलासा मिली जानकारी के अनुसार, दो अलग-अलग थाना क्षेत्र में बुधवार शाम लोगों ने शराब पी, जिसके बाद तबीयत बिगड़नी शुरू हई। पुलिस के अनुसार, गुरुवार सुबह तुरकौलिया थाना क्षेत्र के पुलवा घाट निवासी चंदू की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। परिजनों ने बिना किसी को सूचना दिए जल्दबाजी में उसका अंतिम संस्कार कर दिया था। शराब से मौत का खुलासा तब हुआ जब रघुनाथपुर थाना क्षेत्र के बालगंगा निवासी लोहा ठाकुर की तबीयत बिगड़ी और उनकी आंखों की रोशनी कम होने लगी। परिजन उन्हें इलाज के लिए मदन राज नर्सिंग होम ले गए, जहां लोहा ठाकुर ने बताया कि उन्होंने शराब पी थी। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस और प्रशासन हरकत में आए। शराब पीने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें इलाज के लिए अस्पताल भेजा जाने लगा। इसी दौरान तुरकौलिया थाना क्षेत्र के शंकर सरैया पंचायत के परसौना गांव निवासी प्रमोद यादव, जो पहले से बीमार थे, की इलाज के दौरान मौत हो गई। अब जानिए क्या कहते हैं पीड़ित और परिजन लक्ष्मीपुर गदरिया के रहने वाले राजेंद्र कुमार ने कल गुरुवार को शराब पी थी। उनका सदर अस्पताल में इलाज चल रहा है। भास्कर से बातचीत में उन्होंने बताया, ‘शराब पीने के तुंरत बाद कुछ नहीं हुआ। घर आया, करीब आधे घंटे बाद देखने में तकलीफ होने लगी। कुछ भी साफ नहीं दिख रहा था, सब हरा-हरा नजर आता है। मैंने ध्यान नहीं दिया और पानी पीकर सो गया। सुबह-सुबह उल्टी हुई, और बेचैनी बढ़ गई।’ इलाजरत लोहा ठाकुर ने कहा, ‘सभी लोग बालगंगा में ही स्प्रिट पी थी। उसके साथ अन्य लोग भी थे। घर आने पर तबीयत बिगड़ी।’ इलाजरत लड्डू साह की बेटी गौरी कुमारी के अनुसार, ‘उसके पिता मोतिहारी में ठेला चलाते हैं। बुधवार दोपहर 3 बजे वे घर आए। कुछ ही देर बाद बुखार और उल्टी होने लगी।’ मृतक चंदू के चाचा हरेंद्र सिंह ने बताया, ‘बुधवार रात दो बजे चंदू को तेज पेट दर्द और उल्टी हुई। दवा दिया गया। लगा कि ठीक हो गया, लेकिन कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। मौत के बाद आनन-फानन में परिजनों ने उसका गुरुवार सुबह दाह-संस्कार कर दिया।’ अस्पताल में भर्ती रमेश यादव के बेटे एसपी लाल कुमार ने बताया, कल रात हम लोग घर पर नहीं थे। पापा शाम में घूमने निकले थे, वहीं उन्होंने शराब पी ली। आज सुबह जब हम वापस आए तो पापा की तबीयत बिगड़ती हुई दिखी। पूछने पर बताया कि झिंगू बैठा के यहां शराब पी थी। इसके बाद हम उन्हें हॉस्पिटल ले आए। 15 बीमार, 3 की हालत की नाजुक जहरीली शराब से बीमार लोगों में लोहा ठाकुर, लड्डू साह, राहुल कुमार, रविंद्र यादव (35), दिनेश यादव (28), उमेश राम और बालगंगा निवासी संपत साह (30) समेत 15 लोग शामिल हैं। इनमें से तीन की स्थिति गंभीर बनी हुई है और इनका इलाज जारी है। 6 से 7 लोगों के आंखों की रोशनी चली गई है। सदर अस्तपाल में 8 भर्ती सदर अस्पताल के डॉ अनूप गौतम ने कहा, ‘रात से अभी तक 8-9 लोग इलाज के लिए अस्पताल आ चुके हैं। आज सुबह यहां एक मरीज की मौत हुई है। 2 को मैंने रेफर किया है। बीमार में से 2 की आंख की रोशनी में कमी आ गई है। मैंने दवा ली है, अगर कंट्रोल नहीं हुआ तो उन्हें भी रेफर करेंगे। जिसने भी शराब पी है, और तबीयत बिगड़ी है, मैं उनसे कहूंगा कि डरे नहीं और आकर इलाज कराए।’ परिजनों ने दर्ज कराया हत्या का केस मृतक प्रमोद यादव के परिजनों ने तुरकौलिया थाना में हत्या का मुकदमा दर्ज कराया है। कांड के मुख्य साजिशकर्ता नागा राय को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं परसौना का चौकीदार भरत राय को निलंबित किया गया । सदर SDPO के नेतृत्व में मामले की जांच के लिए SIT का गठन किया गया है। साइबर DSP और DIU प्रभारी टीम में शामिल हैं। एसपी स्वर्ण प्रभात के निर्देश पर अलग-अलग टीमों का गठन कर शराब तस्करों के खिलाफ छापेमारी की जा रही है। नागा राय के अलावे छह और संदिग्ध तस्करों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि जहरीली शराब कहां से आई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। तेजस्वी बोले- बिहार में शराबबंदी फेल मोतिहारी शराबकांड पर तेजस्वी यादव ने सरकार को घेरा है। उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर लिखा, ‘4 लोगों की मौत, 6 लोगों की आंखों की रोशनी चले जाना और कई लोगों की हालत गंभीर होना अत्यंत दुखद है। यह बिल्कुल भी पहली बार नहीं है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार शराबबंदी लागू होने के बाद से अब तक बिहार में जहरीली शराब से 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। यह तो केवल सरकारी आंकड़ा है, हकीकत में यह संख्या इससे कहीं अधिक है। इतना ही नहीं, कई दर्जन लोग अपनी आंखों की

जीएमसी में सीधी भर्ती पर बवाल, डॉक्टरों का सामूहिक बहिष्कार:‘डीन होश में आओ’ के नारे, आदेश वापस नहीं हुआ तो 3 हजार डॉक्टर नहीं करेंगे इलाज

जीएमसी में सीधी भर्ती पर बवाल, डॉक्टरों का सामूहिक बहिष्कार:‘डीन होश में आओ’ के नारे, आदेश वापस नहीं हुआ तो 3 हजार डॉक्टर नहीं करेंगे इलाज

राजधानी भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में ‘आंतरिक सीधी भर्ती’ को लेकर विवाद अब खुलकर सड़क पर आ गया है। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टरों ने न सिर्फ इस भर्ती प्रक्रिया का सामूहिक बहिष्कार किया, बल्कि लगातार दूसरे दिन एक घंटे का ‘पेन डाउन’ आंदोलन कर डीन कार्यालय के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। “डीन होश में आओ” जैसे नारों के बीच डॉक्टरों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि विवादित आदेश तत्काल वापस नहीं लिया गया तो आने वाले दिनों में ओपीडी सहित सभी सेवाएं ठप कर दी जाएंगी। डॉक्टरों का कहना है कि जब कोई उम्मीदवार ही इस प्रक्रिया में शामिल नहीं हो रहा, तो यह विज्ञप्ति अपने आप ही निरस्त मानी जानी चाहिए। सीधी भर्ती के खिलाफ एकजुट हुए डॉक्टर गांधी मेडिकल कॉलेज में 25 मार्च को डीन कार्यालय द्वारा पदोन्नति के पदों पर ‘आंतरिक सीधी भर्ती’ का विज्ञापन जारी किया गया था। इसी के विरोध में मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने मोर्चा खोल दिया है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. राकेश मालवीया का कहना है कि यह भर्ती प्रक्रिया सीनियर डॉक्टरों के अधिकारों के खिलाफ है। इससे उनकी वर्षों की वरिष्ठता और उससे जुड़े वित्तीय लाभ खत्म हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई मेडिकल कॉलेजों में इस तरह की भर्ती का विरोध हो रहा है। हाल ही में ग्वालियर हाईकोर्ट ने भी इसी तरह की भर्ती प्रक्रिया को निरस्त किया है, जिससे डॉक्टरों के पक्ष को मजबूती मिली है। दूसरे दिन भी पेन डाउन आंदोलन गुरुवार को लगातार दूसरे दिन दोपहर 12 से 1 बजे तक ‘पेन डाउन’ आंदोलन किया गया। इस दौरान हमीदिया अस्पताल के ब्लॉक 2 में बड़ी संख्या में डॉक्टर एकत्र हुए और भर्ती प्रक्रिया के खिलाफ आवाज उठाई। आंदोलन में विभागाध्यक्ष, प्राध्यापक, सह-प्राध्यापक, सहायक प्राध्यापक और मेडिकल ऑफिसर तक शामिल रहे, जिससे विरोध की व्यापकता साफ नजर आई। सीधी भर्ती से खत्म हो जाएगी सेवा निरंतरता नेफ्रोलॉजिस्ट डॉ. हिमांशु शर्मा ने कहा कि यह प्रक्रिया पूरी तरह अवैधानिक है। उन्होंने बताया कि सीधी भर्ती से सीनियर डॉक्टरों की सेवा निरंतरता (Continuation of Service) टूट जाती है। “जिस संस्थान में डॉक्टर 15-20 साल से काम कर रहे हैं, वहां उन्हें नए उम्मीदवार की तरह ट्रीट किया जाएगा। इससे ग्रेच्युटी, वेतन वृद्धि, एनपीएस और पेंशन जैसे लाभ प्रभावित होंगे,” उन्होंने कहा। 15 साल का अनुभव भी नहीं होगा मान्य हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. राहुल वर्मा ने बताया कि वे 15 साल से एसोसिएट प्रोफेसर हैं, लेकिन अब प्रोफेसर पद के लिए उन्हें अपने जूनियर्स के साथ प्रतियोगिता करनी होगी। उन्होंने कहा, “यदि चयन हो भी जाता है, तो नई नियुक्ति मानी जाएगी। इससे मेरा पूरा अनुभव और सेवा रिकॉर्ड बेकार हो जाएगा। साथ ही एक साल का प्रोबेशन पीरियड भी लागू होगा।” डीन का जवाब: उच्च स्तर से मार्गदर्शन का इंतजार स्त्री रोग विभाग की एचओडी डॉ. शबाना सुलताना ने बताया कि इस मामले में डीन से चर्चा की गई है। डीन ने कहा है कि वे उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेने के बाद ही आगे कोई निर्णय लेंगी। डॉक्टरों ने अपने विरोध को मजबूत करने के लिए न्यायालय के फैसलों का भी हवाला दिया है। ग्वालियर, जबलपुर और इंदौर हाईकोर्ट बेंच ने पूर्व में इस तरह की भर्ती प्रक्रिया को खारिज किया है। हाल ही में डॉ. आशीष कौशल बनाम मध्यप्रदेश शासन मामले में भी ग्वालियर हाईकोर्ट ने सीधी भर्ती को निरस्त किया, जिससे डॉक्टरों का पक्ष और मजबूत हुआ है। सरकार तक पहुंचा मामला, उच्चस्तरीय बैठक इस विवाद को लेकर प्रोग्रेसिव मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन (PMTA) के प्रतिनिधिमंडल ने उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, एसीएस स्वास्थ्य अशोक वर्णवाल और आयुक्त स्वास्थ्य से मुलाकात कर चुके हैं। बैठक में डॉक्टरों ने स्पष्ट कहा कि पदोन्नति के पद केवल डीपीसी (DPC) के माध्यम से ही भरे जाने चाहिए। PMTA ने इस दौरान चिकित्सा शिक्षकों से जुड़े 10 अन्य लंबित मुद्दों का भी जिक्र किया। इन मुद्दों का समाधान पिछले दो वर्षों से नहीं हो पाया है, जिससे डॉक्टरों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। संघ ने संचालनालय और शासन स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग की है। 21 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी PMTA की कार्यकारिणी बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि मांगें नहीं मानी गईं तो 21 अप्रैल से प्रदेशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। डॉ. अविनाश ठाकुर ने चेतावनी दी कि यदि सीधी भर्ती का आदेश वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को क्रमिक रूप से तेज किया जाएगा। डॉ. राकेश मालवीया ने कहा कि हम अपने अनुभव और वरिष्ठता के साथ खिलवाड़ नहीं होने देंगे। अगर विज्ञप्ति वापस नहीं ली गई, तो ओपीडी से लेकर सभी सेवाओं का बहिष्कार करेंगे। जीएमसी में शुरू हुआ यह विवाद अब सिर्फ एक भर्ती प्रक्रिया तक सीमित नहीं रह गया है। यह “नीति बनाम अधिकार” की लड़ाई बनता जा रहा है, जहां एक तरफ प्रशासनिक फैसले हैं, तो दूसरी ओर वर्षों से सेवा दे रहे डॉक्टरों के अधिकार और भविष्य दांव पर हैं।

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।

उत्तराखंड की बेटी ने जापान में जीता ब्रॉन्ज मेडल:फटे जूतों की कहानी सुन क्रिकेटर स्नेह राणा ने दिए नए स्पाइक्स, बोलीं- हमेशा साथ निभाऊंगी

उत्तराखंड की बेटी ने जापान में जीता ब्रॉन्ज मेडल:फटे जूतों की कहानी सुन क्रिकेटर स्नेह राणा ने दिए नए स्पाइक्स, बोलीं- हमेशा साथ निभाऊंगी

रुड़की के एक छोटे से गांव की रहने वाली एथलीट सोनिया ने जापान के फुकुओका में हुई 18वीं एशियन क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया है। बेहद साधारण परिवार से आने वाली सोनिया का यह सफर संघर्षों से भरा रहा, जहां संसाधनों की कमी हर कदम पर चुनौती बनकर सामने आई। बीते दिन इस संघर्ष और उपलब्धि की कहानी जब भारतीय महिला क्रिकेट टीम की स्टार ऑलराउंडर स्नेह राणा तक पहुंची, तो उन्होंने सोनिया को देहरादून स्थित अपने स्पोर्ट्स स्ट्राइव टर्फ पर बुलाया। यहां उन्होंने सोनिया को प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और बेहतर न्यूट्रिशन सपोर्ट देकर न सिर्फ मदद की, बल्कि ताउम्र साथ निभाने का भरोसा भी दिया। सोनिया के लिए यह पल भावुक कर देने वाला था। फटे जूतों में दौड़कर मेडल जीतने वाली यह एथलीट जब नए स्पाइक्स हाथ में लिए खड़ी थी, तो उसकी आंखों में सिर्फ आंसू ही नहीं, बल्कि आगे बढ़ने का नया आत्मविश्वास भी साफ दिखाई दे रहा था। टर्फ पर मिला साथ, भावुक हो गई सोनिया देहरादून के सिनोला स्थित टर्फ पर जब सोनिया पहुंचीं, तो उन्हें शायद अंदाजा भी नहीं था कि उनके लिए क्या इंतजार कर रहा है। स्नेह राणा ने उन्हें गले लगाया, हालचाल पूछा और फिर उन्हें प्रोफेशनल स्पोर्ट्स शूज और न्यूट्रिशन सपोर्ट सौंपा। यह वही चीजें थीं, जिनकी कमी सोनिया को सालों से महसूस होती रही थी। जैसे ही उन्होंने नए जूते हाथ में लिए, उनकी आंखें भर आईं। बातचीत के दौरान वह खुद को संभाल नहीं पाईं। परिवार की हालत कमजोर, बहनों ने निभाया मां का रोल सोनिया का संघर्ष सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं था। उनका पूरा बचपन आर्थिक तंगी में बीता। परिवार में चार बहनें और एक भाई हैं। पिता मजदूरी करके घर चलाते हैं और मां का निधन हो चुका है। ऐसे हालात में खेल को करियर बनाना आसान नहीं था। सोनिया बताती हैं कि कई बार ऐसा वक्त आया जब ट्रेनिंग छोड़ने का मन हुआ, लेकिन उनकी बहनों ने उन्हें कभी टूटने नहीं दिया। उन्होंने मां की कमी पूरी की, हिम्मत दी और हर मुश्किल में साथ खड़ी रहीं। यही वजह रही कि सोनिया ने हालातों के आगे घुटने नहीं टेके और अपने सपनों को जिंदा रखा। गांव के ताने, लेकिन इरादे रहे मजबूत सोनिया के सफर में सिर्फ आर्थिक परेशानियां ही नहीं, बल्कि सामाजिक दबाव भी बड़ी चुनौती रहा। गांव के लोग अक्सर ताने मारते थे और परिवार से कहते थे कि लड़की को वापस बुला लो। लेकिन सोनिया ने इन बातों को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। वह कहती हैं कि उन्होंने हमेशा खुद को अंदर से मजबूत रखा और लोगों को जवाब देने के बजाय अपनी मेहनत से साबित करने का रास्ता चुना।। फटे जूतों में जीता नेशनल मेडल सोनिया की असली पहचान 2025 में हुए राष्ट्रीय खेल 2025 के दौरान बनी। 10,000 मीटर की दौड़ में उन्होंने ब्रॉन्ज मेडल जीता, लेकिन इस जीत की सबसे बड़ी बात यह थी कि उनके पास दौड़ने के लिए सही स्पाइक्स तक नहीं थे। वह फटे जूतों में ट्रैक पर उतरीं और 35 मिनट 45.19 सेकंड का समय निकालकर पदक अपने नाम किया। यह सिर्फ एक जीत नहीं थी, बल्कि उनके संघर्ष और जज्बे की सबसे बड़ी मिसाल थी। इसी दौरान उन्होंने बताया था कि एक एथलीट के लिए सही डाइट लेना कितना मुश्किल होता है। महंगे सप्लीमेंट्स तो दूर, वह सस्ते मल्टी-विटामिन के सहारे ही अपनी तैयारी कर रही थीं। न्यूट्रिशन की कमी, लेकिन हिम्मत नहीं टूटी सोनिया ने कभी भी प्रोफेशनल लेवल का न्यूट्रिशन नहीं लिया। वह बताती हैं कि उन्होंने आज तक कोई महंगा सप्लीमेंट नहीं खरीदा। ऑनलाइन सस्ते मल्टी-विटामिन खरीदकर ही उन्होंने अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। कई बार शरीर साथ नहीं देता था, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। अब स्नेह राणा के सपोर्ट के बाद उन्हें उम्मीद है कि वह अपनी ट्रेनिंग को और बेहतर बना पाएंगी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अच्छे प्रदर्शन कर सकेंगी। स्नेह राणा बोलीं- मैं भी इसी रास्ते से आई हूं स्नेह राणा ने सोनिया से मुलाकात के दौरान अपने संघर्ष भी साझा किए। उन्होंने बताया कि वह भी एक छोटे गांव से आई हैं, जहां महिला क्रिकेट को लेकर जागरूकता नहीं थी। लोगों के ताने, संसाधनों की कमी और सामाजिक सोच- इन सभी का सामना उन्होंने भी किया है। उन्होंने कहा कि जब लोग कहते थे कि तुम यह नहीं कर सकती, तो वह और ज्यादा जिद्दी हो जाती थीं। यही जिद उन्हें यहां तक लेकर आई। अब एशियन गेम्स पर नजर जापान में ब्रॉन्ज जीतने के बाद सोनिया का आत्मविश्वास काफी बढ़ गया है। अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स के लिए क्वालीफाई करना है। स्नेह राणा के सपोर्ट से उन्हें नई ऊर्जा मिली है। बेहतर जूते, सही न्यूट्रिशन और मानसिक सहयोग- ये तीनों चीजें अब उनके पास हैं, जो किसी भी एथलीट के लिए बेहद जरूरी होती हैं। सोनिया की कहानी आज उन हजारों लड़कियों के लिए प्रेरणा है, जो संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं।

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

आर्मी का सपना टूटा, एस्पिरेंट्स में एसके बनकर छाए:अभिलाष थपलियाल बोले- आउटसाइडर होने का सबसे बड़ा स्ट्रगल, इंडस्ट्री में अपना काम खुद बताना पड़ता है

अभिलाष थपलियाल इन दिनों वेब सीरीज ‘एस्पिरेंट्स’ के सीजन 3 को लेकर चर्चा में हैं, जहां उनका ‘एसके’ का किरदार दर्शकों के दिलों में खास जगह बना चुका है। दैनिक भास्कर से बातचीत में अभिलाष ने बताया कि इस बार भी शो को जबरदस्त रिस्पॉन्स मिल रहा है, खासकर दोस्ती से जुड़े इमोशनल सीन लोगों को गहराई से छू रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘एसके’ का किरदार उन लोगों की कहानी है जो जिंदगी में फेल होते हैं, इसलिए दर्शक उससे खुद को जोड़ पाते हैं। अभिलाष ने अपने करियर की शुरुआत, रेडियो जॉकी से लेकर फिल्मों और वेब सीरीज तक के सफर को भी साझा किया। उन्होंने बताया कि एक्टिंग उनका पहला सपना नहीं था, बल्कि वह आर्मी जॉइन करना चाहते थे। इंडस्ट्री में आउटसाइडर होने के कारण आई चुनौतियों और लगातार खुद को साबित करने की जरूरत पर भी उन्होंने खुलकर बात की। पेश है कुछ प्रमुख अंश.. ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 3 को लेकर कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है? बहुत शानदार। एस्पिरेंट्स से लोग पहले ही जुड़ चुके हैं, इसलिए इस बार भी प्यार मिल रहा है। खासकर दोस्ती वाले सीन काफी वायरल हुए हैं। लोग कहते हैं कि देखकर भावुक हो गए। आपके किरदार ‘एसके’ से लोग इतना कनेक्ट क्यों करते हैं? क्योंकि ये सिर्फ टॉपर की कहानी नहीं है, बल्कि उन लोगों की कहानी है जो फेल हो जाते हैं। हम सब कहीं न कहीं वैसा ही महसूस करते हैं, इसलिए कनेक्शन बनता है। क्या बचपन से ही एक्टर बनना चाहते थे? बिल्कुल नहीं। मैं तो आर्मी जॉइन करना चाहता था। मैं फौजी परिवार से हूं, NDA क्लियर करना सपना था, लेकिन वो पूरा नहीं हुआ। एक्टिंग में एंट्री कैसे हुई? मैं दिल्ली में रेडियो जॉकी था। वहीं फिल्म ‘तेवर’ के डायरेक्टर अमित शर्मा से मुलाकात हुई। उन्होंने मुझे फिल्मों में ट्राई करने को कहा। फिर मुंबई आया और पहली फिल्म पहली फिल्म ‘दिल जंगली’ मिली। ‘एस्पिरेंट्स’ से पहले करियर कैसा था? शुरुआत में फिल्में ज्यादा नहीं चलीं, फिर टीवी और कॉमेडी शोज किए। सोशल मीडिया पर पॉलिटिकल सटायर भी करता था। लेकिन असली पहचान ‘एस्पिरेंट्स’ से मिली। इस सीरीज में ‘एसके’ का रोल कैसे मिला? मैंने ऑडिशन दिया था। पहले मुझे लगा मैं ‘अभिलाष’ का किरदार करूंगा, लेकिन बाद में पता चला कि मुझे ‘एसके’ का रोल मिल रहा है। ‘एस्पिरेंट्स’ सीजन 1 के बाद क्या जिम्मेदारी बढ़ गई थी? हां, लेकिन मैं स्क्रिप्ट में ज्यादा बदलाव नहीं करता। जो लिखा होता है, उसे ईमानदारी से निभाता हूं। मेरा मानना है “कम में बम”, कम सीन हों, लेकिन असरदार हों। रेडियो से एक्टिंग तक का सफर कैसा रहा? रेडियो ने मुझे बहुत कुछ सिखाया। वहां सिर्फ आवाज से पहचान बनती है। वही कॉन्फिडेंस एक्टिंग में काम आया। क्या आपने एक्टिंग की ट्रेनिंग ली है? नहीं, मैंने कोई फॉर्मल ट्रेनिंग नहीं ली। जो सीखा, लाइफ से सीखा। अलग-अलग जगह रहने से अलग-अलग भाषा और एक्सेंट पकड़ना आसान हो गया। ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद करियर में क्या बदलाव आया? इसके बाद मुझे कॉन्फिडेंस आया कि मैं खुद को एक्टर कह सकता हूं। फिर मैंने अनुराग कश्यप जैसे डायरेक्टर्स के साथ काम किया और अलग-अलग रोल मिले। आपने किन-किन फिल्मों और प्रोजेक्ट्स में काम किया है? ‘एस्पिरेंट्स’ के बाद मुझे कई अच्छे प्रोजेक्ट्स मिले। मैंने फिल्म ‘ब्लर’ में काम किया, अनुराग कश्यप के साथ फिल्म ‘केनेडी’ में काम किया। और अश्विनी अय्यर तिवारी के साथ वेब सीरीज ‘फाड़ू’ में काम किया। इन प्रोजेक्ट्स ने मुझे एक एक्टर के तौर पर काफी कॉन्फिडेंस दिया। इंडस्ट्री में सबसे बड़ा स्ट्रगल क्या रहा? आउटसाइडर होने का। आपको खुद जाकर लोगों को बताना पड़ता है कि आप क्या कर सकते हैं। यहां कोई गॉडफादर नहीं होता। आज भी स्ट्रगल जारी है? बिल्कुल। मैं आज भी डायरेक्टर्स और प्रोड्यूसर्स से मिलता हूं, खुद को पिच करता हूं। यह प्रोसेस कभी खत्म नहीं होती। खुद को बेहतर बनाने के लिए क्या कर रहे हैं? मैं FTII और NSD के स्टूडेंट्स के साथ शॉर्ट फिल्म्स कर रहा हूं। वहां से बहुत कुछ सीखने को मिलता है। मैं अपनी एक्टिंग को लगातार बेहतर करना चाहता हूं।

शिमला-मनाली में बारिश, लाहौल स्पीति में बर्फबारी शुरू:एवलांच गिरने और ओलावृष्टि-तूफान का अलर्ट, अगले 6 दिन बरसेंगे बादल

शिमला-मनाली में बारिश, लाहौल स्पीति में बर्फबारी शुरू:एवलांच गिरने और ओलावृष्टि-तूफान का अलर्ट, अगले 6 दिन बरसेंगे बादल

हिमाचल प्रदेश के निचले व मध्यम ऊंचाई वाले भागों में बारिश और लाहौल स्पीति के ऊंचे पहाड़ों पर बर्फबारी शुरू हो गई है। मौसम विभाग (IMD) के अनुसार- राज्य में बारिश-बर्फबारी नौ अप्रैल तक जारी रहेगी। IMD ने आज और कल 10 जिलों में तेज बारिश, तूफान और ओलावृष्टि की चेतावनी दी है। चंबा, कांगड़ा, कुल्लू, मंडी और शिमला जिला में ऑरेंज अलर्ट दिया गया है, जबकि किन्नौर और लाहौल स्पीति को छोड़कर अन्य सभी जिलों में येलो अलर्ट जारी किया गया। इस दौरान निचले व मध्यम ऊंचाई वाले भागों में तेज बारिश और ओलावृष्टि का पूर्वानुमान है। लाहौल स्पीति, किन्नौर और कुल्लू जिला के अधिक ऊंचे पहाड़ों पर हिमपात होने के आसार है। कई क्षेत्रों में 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तूफान चल सकता है। 8 अप्रैल तक बरसेंगे बादल मौसम विभाग के अनुसार- पहाड़ों पर नौ अप्रैल तक निरंतर मौसम खराब रहेगा। पांच से सात अप्रैल तक कोई चेतावनी तो नहीं दी गई, लेकिन मौसम पूरे प्रदेश में खराब रहेगा और बारिश-बर्फबारी का पूर्वानुमान है। आठ अप्रैल को वेस्टर्न डिस्टरबेंस और स्ट्रांग होगा। इसे देखते हुए फिर से तेज बारिश-ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट दिया गया है। नौ अप्रैल को भी पूरे प्रदेश में बारिश का दौर जारी रहेगा। प्रदेशवासियों को सतर्क रहने की एडवाइजरी मौसम विभाग ने लोगों को सतर्क और अधिक ऊंचे क्षेत्रों की यात्रा टालने की सलाह दी है। विशेषकर अटल टनल रोहतांग के नॉर्थ पोर्टल क्षेत्र में हिमस्खलन के खतरे को देखते हुए प्रशासन ने पर्यटन गतिविधियों पर रोक लगा दी है। डीसी लाहौल स्पीति किरण भडाना ने बताया कि सुरंग के आसपास की पहाड़ियां, चंद्रा नदी पुल क्षेत्र और ढलानें हिमस्खलन व मलबा गिरने के लिए अत्यधिक संवेदनशील हैं। इसे देखते हुए इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियां रोकी गई है। तापमान 4 से 5 डिग्री और गिरेगा बारिश-बर्फबारी के बाद अगले एक सप्ताह के दौरान तापमान में 4 से 5 डिग्री सेल्सियस तक की कमी आएगी। आमतौर पर अप्रैल में लोग गर्मी से जूझते है, लेकिन इस बार अधिक ऊंचे क्षेत्रों में अप्रैल के पहले सप्ताह में भी ठंड कम नहीं हुई। चिंता में किसान-बागवान बदले मौसम से राज्य के किसान बागवान परेशान है। प्रदेश में इन दिनों सेब की फ्लावरिंग चल रही है। ऐसे में मौसम का साफ रहने जरूरी है, लेकिन बीते डेढ़ सप्ताह से मौसम खराब बना हुआ है। कई क्षेत्रों में ओलावृष्टि किसानों-बागवानों की फसलों को कहर बनकर टूट रही है। इस वजह से किसानों-बागवानों की चिंताएं बढ़ती जा रही है।

MP में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर:20 हजार कर्मचारी निकाले, 30 हजार की सैलरी आधी; 3 शिफ्ट का काम एक में चल रहा

MP में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर:20 हजार कर्मचारी निकाले, 30 हजार की सैलरी आधी; 3 शिफ्ट का काम एक में चल रहा

ईरान और इजराइल-अमेरिका के युद्ध का असर मध्य प्रदेश के ‘डेट्रॉयट’ कहे जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर पर बढ़ता जा रहा है। पहले एक्सपोर्ट ठप हुआ, तो अब कर्मचारियों-मजदूरों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। उद्योग संचालकों का कहना है कि हालात जल्द नहीं सुधरे तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी के मुताबिक, यहां से होने वाला एक्सपोर्ट लगभग पूरी तरह रुक गया है। कच्चे माल के महंगे होने और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संकट के चलते उद्योगपति प्रोडक्शन घटा रहे हैं। इसका असर रोजगार पर भी पड़ा है। फैक्ट्रियों में शिफ्ट कम हो रही हैं। कई जगह शट-डाउन की स्थिति बन गई है। सबसे ज्यादा असर अस्थायी मजदूरों पर पड़ा है। अनुमान है कि करीब 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट वर्कर काम से बाहर हो चुके हैं। कई कंपनियों ने स्थायी कर्मचारियों को भी ले-ऑफ (छंटनी) पर डालकर आधी सैलरी देना शुरू कर दिया है। इनकी संख्या करीब 30 हजार है। साढ़े पांच हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कम पेमेंट में 300 की गैस कैसे भरवाएं लेबर कांट्रैक्टर सद्दाम पटेल ने बताया कि पीथमपुर में लेबर बाहर से आते हैं, उन्हें गैस की छोटी-छोटी बॉटल लेना पड़ती हैं। पिछले दिनों गैस की सप्लाई प्रभावित होने से उन्हें गैस महंगी मिल रही थी। लेबर को अब 300 रुपए की गैस भरवाने में दिक्कत होती है, क्योंकि उनकी इतनी पेमेंट नहीं है। पांच दिन से काम बंद, हमारी छुट्‌टी कर दी गई सेज सेक्टर की एक फार्मा कंपनी में काम करने वाले लेबर नीतेश बघेल ने बताया- मैं प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करता हूं। कंपनी में प्लास्टिक दाना महंगा होने से 5 दिन से काम बंद है, इसलिए हमारी भी छुट्‌टी कर दी गई। हां, घर की महिलाएं कपड़ा फैक्ट्री में पैकिंग का काम करने जाती हैं, उन्हें जरूर 10 अप्रैल तक काम पर बुलाया जा रहा है, उनका काम बंद होने के बाद हम गांव चले जाएंगे। सरकार अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रही पीथमपुर औद्योगिक संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसी क्राइसिस में हम सरकार का मुंह देखते हैं। बाकी समय तो सरकार हमारा मुंह देखती है, क्योंकि हम उन्हें टैक्स देते हैं। उन्हें जीडीपी में योगदान देते हैं, अगर आपने गैस कम कर दी तो यह कोई क्राइसिस मैनेजमेंट नहीं है। मैनेजमेंट तो तब होता, जब इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार हर चीज का निर्धारण होता है। सरकार समस्या को नकारते हुए बाहरी रूप से अगर उसे मैनेज कर रही है तो यह क्राइसिस मैनेजमेंट नहीं, बल्कि अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है। SEZ से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट पीथमपुर को मध्य प्रदेश का औद्योगिक इंजन कहा जाता है। यहां ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा, प्लास्टिक, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर की 5,600 से ज्यादा इकाइयां हैं। SEZ से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट होता था। अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बाजारों में पीथमपुर के पुर्जे, दवाएं और पैकेजिंग सामग्री पहुंचती थी। हॉर्मुज स्ट्रेट और स्वेज कैनाल पर तनाव से फ्रेट चार्ज पांच गुना बढ़ गए। बीमा प्रीमियम आसमान छू रहा है। …………………………………. यह खबर भी पढ़ें… शुगर-बीपी, बुखार सहित इन्फेक्शन की दवाएं महंगी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स की सप्लाई बाधित होने और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यप्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री में शटडाउन का खतरा मंडरा रहा है। फार्मा इंडस्ट्री में लगने वाले रॉ मटेरियल के रेट में 30% से लेकर 50% तक की बढ़ोत्तरी हुई है। पूरी खबर पढ़ें

एक्टर रणदीप हुड्डा की मां की फिल्मों में एंट्री:पहली मूवी में निभाया दादी का किरदार; बेटे ने मजाकिया अंदाज में दी बधाई

एक्टर रणदीप हुड्डा की मां की फिल्मों में एंट्री:पहली मूवी में निभाया दादी का किरदार; बेटे ने मजाकिया अंदाज में दी बधाई

बॉलीवुड अभिनेता रणदीप हुड्डा की मां आशा हुड्डा ने भी अपनी पहली फिल्म में दादी का किरदार निभाया है। रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से भी अपनी मां की फिल्म को लेकर एक पोस्ट शेयर की है। पोस्ट के जरिए उन्होनें हास्य अंदाज में लिखा, “जिब मां के रोल का टेम था, टेम ना मिल्या, तै ईब सीधा दादी का।” स्टेज ऐप पर रिलीज हुई फिल्म सांगी में आदि का किरदार निभा रही आशा हुड्डा दैनिक भास्कर एप से बातचीत की। कॉलेज के दिनों से एक्टिंग का शौक आशा हुड्डा ने कहा कि 1971 में उन्होंने अपनी रोहतक महिला कॉलेज से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की थी। कॉलेज के दिनों से ही वे स्टेज पर ड्रामा और एक्टिंग में हिस्सा लेती थी। हालांकि, उनका उस दौरान से ही एक्टिंग करने का मन था। बाद में शादी होने के बाद वह पारिवारिक और राजनीति में सक्रिय भूमिका के साथ काम करती रहीं। रणदीप से मजाक में कहती थी मां का रोल दिलवाना आशा हुड्डा बताती हैं कि अपने स्ट्रगल टाइम से निकाल कर जब रणदीप हुड्डा ने बॉलीवुड में दमदार एंट्री की, तो उसके बाद एक कभी-कभी मजाक में रणदीप को उनकी माता आशा हुड्डा का देती थी कि रणदीप पर अगर कभी मां का रोल मिले तो मुझे भी ले लेना, लेकिन उन्होंने कभी एक्टिंग बॉलीवुड में नहीं की। डेढ़ साल पहले फिल्म का मिला ऑफर वहीं, करीबन डेढ़ साल पहले सोनीपत की रहने वाली गीतू परी ने उन्हें फिल्म के रोल के लिए कॉल किया था। आशा हुड्डा बताती है कि सांगी फिल्म में काम के लिए जब उन्हें किरदार बताया गया, उन्होंने तुरंत हां कर दी। जहां उन्हें फिल्म में साक्षी की दादी का रोल मिला है। जींद में डेढ़ दिन की हुई शूटिंग आशा हुड्डा अपने किरदार को लेकर बताती हैं कि उन्हें डेढ़ दिन के लिए शूटिंग के लिए बुलाया गया था। शूटिंग जींद में और आसपास के क्षेत्र में हुई है। आशा हुड्डा ने बताया कि उनका भी हमेशा मान रहा है कि अपनी संस्कृति के लिए अगर काम करने का मौका मिलेगा तो वह जरूर काम करेंगे और इसी इरादे के साथ उन्होंने हरियाणवी संस्कृति में दादी का किरदार मिला है। रणदीप ने मां के किरदार पर यूं किया रिएक्ट रणदीप हुड्डा की मां ने बताया कि करीबन ने डेढ़ साल पहले जब वह हरियाणा के जींद में शूटिंग करके घर पहुंची थी, तो उसने रणदीप को बताया था कि वह शूटिंग करके आई है, तो इस दौरान रणदीप बहुत जोर-जोर से हंसा था और बोला की मां आखिर दादी का रोल कर रही है। और अपनी मां के इस जज्बे को लेकर रणदीप ने सराहना की थी। सोशल मीडिया पर वायरल हुआ पोस्ट अब जब फिल्म रिलीज हुई है तो रणदीप हुड्डा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट से अपनी मां की फिल्म के लिए पोस्ट शेयर किया है। रणदीप हुड्डा ने लिखा- मां का रोल नहीं मिला, तो सीधा बनी दादी। उनकी यह मजेदार पोस्ट सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। फैंस को पसंद आया रणदीप का अंदाज अपनी मां किरदार को लेकर बॉलीवुड एक्टर रणदीप हुड्डा ने इस हल्के-फुल्के अंदाज ने फैंस का ध्यान खींच लिया। उन्होंने आगे अपनी टीम के लिए शुभकामनाएं देते हुए लिखा, “आज आपको स्क्रीन पर देखने के लिए उत्साहित हूं मम्मी… पूरी टीम को ढेर सारी शुभकामनाएं।” इस पोस्ट के जरिए एक्ट्रेस ने इंडस्ट्री की उस सच्चाई को भी मजाकिया अंदाज में सामने रखा, जहां कलाकारों को उम्र से अलग किरदार निभाने पड़ते हैं। फैंस भी इस पोस्ट पर जमकर प्रतिक्रिया दे रहे हैं और इसे काफी पसंद किया जा रहा है। यहां जानिए कौन है आशा हुड्डा… आशा हुड्डा मूलरूप से गांव छारा की रहने वाली है और उन्होंने अपनी ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन पॉलिटिकल साइंस से रोहतक से 1973 में की थी। 1975 में उन्होंने छोटू राम कॉलेज रोहतक से बीएड की पढ़ाई पूरी की। राजनीतिक और सामाजिक सफर आशा हुड्डा ने बताया कि फरीदाबाद में उनका मकान है और रोहतक और फरीदाबाद में उन्होंने काफी काम किया है और 1994 में मुख्यमंत्री साहब सिंह वर्मा ने उन्हें राजनीति में जिला अध्यक्ष के रूप में ज्वाइन कराया था। भाजपा में वे अपनी सक्रिय भूमिका के साथ रही है। 1994 से लेकर 2000 तक वह जिला अध्यक्ष के रूप में अपनी सेवाएं देती रही हैं। महिला मोर्चा और राष्ट्रीय जिम्मेदारियां हरियाणा प्रदेश महिला मोर्चा की 2000 से लेकर 2003 तक जनरल सेक्रेटरी रही है। वहीं इसके बाद वे राष्ट्रीय कार्यकारिणी शिक्षक प्रकोष्ठ की पंजाब प्रभारी रही। वही पारिवारिक काम के चलते करीबन 3 साल वह अमेरिका में भी रही उसके बाद वापस लौटकर फिल्म सेंसर बोर्ड दिल्ली जोन की सदस्य साल 2008 में रही है। भाजपा में सक्रिय भूमिका और अन्य पद वहीं बीजेपी पार्टी ने उन्हें साल 2018 में पावर जेनरेशन हरियाणा की डायरेक्टर के रूप में नियुक्त किया था। इसके बाद प्रदेश कार्यकारिणी की सदस्य के रूप में भी उन्होंने 8 साल अपनी पार्टी के प्रति समर्पित भाव रखते हुए काम किया है। विधानसभा टिकट की दावेदारी वही साल 2014 और 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान पृथला विधानसभा से भी उन्होंने टिकट की दावेदारी की थी। लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला और उसके बाद भी उन्होंने बीजेपी का दामन थाम कर रखा और लगातार भाजपा के साथ जुड़कर कार्यकर्ता के रूप में काम करती रही है। पृथला भी विधानसभा में उनके मामा रहते हैं इसलिए वहां से लगाव था और वहीं से वह टिकट मांग रही थी। फिल्म ‘सांगी’ की कहानी और कलाकार के बारे में जानिए सोनीपत की रहने वाली गीतू परी और अन्ना फिल्म फैक्ट्री, गीतू फिल्म द्वारा क्रिएट की गई है। फिल्म में आशा हुड्डा, रोहित बच्ची, गीतू व साक्षी दलाल ने किरदार निभाया है। वहीं, डायरेक्टर रविंद्र बजवान अन्ना हैं। संघर्ष और लव स्टोरी पर आधारित फिल्म जानकारी के मुताबिक, फिल्म में एक सांगी कलाकार के संघर्ष की कहानी है और फिल्म में लव स्टोरी भी है। जहां लीड रोल में किरदार साक्षी दलाल निभा रही है। कुलदीप का सांगी कलाकार हैं और उसके बेड़े में अमन भी शामिल होता हैं। इस दौरान ने वह साक्षी के संपर्क में आता है और उससे प्यार करने