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MP में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर:20 हजार कर्मचारी निकाले, 30 हजार की सैलरी आधी; 3 शिफ्ट का काम एक में चल रहा

MP में 5,600 फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर:20 हजार कर्मचारी निकाले, 30 हजार की सैलरी आधी; 3 शिफ्ट का काम एक में चल रहा

ईरान और इजराइल-अमेरिका के युद्ध का असर मध्य प्रदेश के ‘डेट्रॉयट’ कहे जाने वाले औद्योगिक क्षेत्र पीथमपुर पर बढ़ता जा रहा है। पहले एक्सपोर्ट ठप हुआ, तो अब कर्मचारियों-मजदूरों की नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है। उद्योग संचालकों का कहना है कि हालात जल्द नहीं सुधरे तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी। पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी के मुताबिक, यहां से होने वाला एक्सपोर्ट लगभग पूरी तरह रुक गया है। कच्चे माल के महंगे होने और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संकट के चलते उद्योगपति प्रोडक्शन घटा रहे हैं। इसका असर रोजगार पर भी पड़ा है। फैक्ट्रियों में शिफ्ट कम हो रही हैं। कई जगह शट-डाउन की स्थिति बन गई है। सबसे ज्यादा असर अस्थायी मजदूरों पर पड़ा है। अनुमान है कि करीब 20 हजार कॉन्ट्रैक्ट वर्कर काम से बाहर हो चुके हैं। कई कंपनियों ने स्थायी कर्मचारियों को भी ले-ऑफ (छंटनी) पर डालकर आधी सैलरी देना शुरू कर दिया है। इनकी संख्या करीब 30 हजार है। साढ़े पांच हजार से ज्यादा फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं। कम पेमेंट में 300 की गैस कैसे भरवाएं लेबर कांट्रैक्टर सद्दाम पटेल ने बताया कि पीथमपुर में लेबर बाहर से आते हैं, उन्हें गैस की छोटी-छोटी बॉटल लेना पड़ती हैं। पिछले दिनों गैस की सप्लाई प्रभावित होने से उन्हें गैस महंगी मिल रही थी। लेबर को अब 300 रुपए की गैस भरवाने में दिक्कत होती है, क्योंकि उनकी इतनी पेमेंट नहीं है। पांच दिन से काम बंद, हमारी छुट्‌टी कर दी गई सेज सेक्टर की एक फार्मा कंपनी में काम करने वाले लेबर नीतेश बघेल ने बताया- मैं प्लास्टिक फैक्ट्री में काम करता हूं। कंपनी में प्लास्टिक दाना महंगा होने से 5 दिन से काम बंद है, इसलिए हमारी भी छुट्‌टी कर दी गई। हां, घर की महिलाएं कपड़ा फैक्ट्री में पैकिंग का काम करने जाती हैं, उन्हें जरूर 10 अप्रैल तक काम पर बुलाया जा रहा है, उनका काम बंद होने के बाद हम गांव चले जाएंगे। सरकार अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रही पीथमपुर औद्योगिक संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि ऐसी क्राइसिस में हम सरकार का मुंह देखते हैं। बाकी समय तो सरकार हमारा मुंह देखती है, क्योंकि हम उन्हें टैक्स देते हैं। उन्हें जीडीपी में योगदान देते हैं, अगर आपने गैस कम कर दी तो यह कोई क्राइसिस मैनेजमेंट नहीं है। मैनेजमेंट तो तब होता, जब इंडस्ट्री की आवश्यकता के अनुसार हर चीज का निर्धारण होता है। सरकार समस्या को नकारते हुए बाहरी रूप से अगर उसे मैनेज कर रही है तो यह क्राइसिस मैनेजमेंट नहीं, बल्कि अपने पैर पर कुल्हाड़ी मारना है। SEZ से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट पीथमपुर को मध्य प्रदेश का औद्योगिक इंजन कहा जाता है। यहां ऑटो कंपोनेंट्स, फार्मा, प्लास्टिक, टेक्सटाइल और इंजीनियरिंग सेक्टर की 5,600 से ज्यादा इकाइयां हैं। SEZ से हर महीने करोड़ों डॉलर का एक्सपोर्ट होता था। अमेरिका, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बाजारों में पीथमपुर के पुर्जे, दवाएं और पैकेजिंग सामग्री पहुंचती थी। हॉर्मुज स्ट्रेट और स्वेज कैनाल पर तनाव से फ्रेट चार्ज पांच गुना बढ़ गए। बीमा प्रीमियम आसमान छू रहा है। …………………………………. यह खबर भी पढ़ें… शुगर-बीपी, बुखार सहित इन्फेक्शन की दवाएं महंगी मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण चीन से आने वाले एक्टिव फार्मास्युटिकल इंग्रेडिएंट्स की सप्लाई बाधित होने और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से मध्यप्रदेश की फार्मा इंडस्ट्री में शटडाउन का खतरा मंडरा रहा है। फार्मा इंडस्ट्री में लगने वाले रॉ मटेरियल के रेट में 30% से लेकर 50% तक की बढ़ोत्तरी हुई है। पूरी खबर पढ़ें

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