छतरपुर चौक बाजार के सोना-चांदी पॉलिश सेंटर में आग:अंदर एलपीजी सिलेंडर भी रखे, काफी मशक्कत के बाद पाया काबू

छतरपुर के चौक बाजार स्थित एक सोना-चांदी पॉलिश सेंटर में बुधवार को आग लग गई। दुकान के अंदर एलपीजी सिलेंडर भी रखा हुआ था। बड़े विस्फोट के डर से लोग आग बुझाने नहीं जा रहे थे। काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। यह आग अब्दुल उजाल पॉलिश एवं छिलाई सेंटर में लगी, जहां सोने-चांदी के आभूषणों की पॉलिश और छिलाई का काम होता है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, आग अचानक भड़की और देखते ही देखते पूरी दुकान को अपनी चपेट में ले लिया। स्थानीय लोगों ने बताया कि दुकान में एलपीजी गैस सिलेंडर रखे हुए थे। पुलिस ने संभाली स्थिति स्थिति की गंभीरता को देखते हुए लोगों ने तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को सूचना दी। सिटी कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और भीड़ को नियंत्रित करते हुए इलाके को खाली कराना शुरू किया। पुलिस आसपास के लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दे रही है। इस घटना के बाद पूरे चौक बाजार क्षेत्र में दहशत का माहौल है। लोगों को डर है कि यदि सिलेंडर में विस्फोट होता तो बड़ा हादसा हो सकता था। देखें मौके की तीन तस्वीरें
एचएस फूलका का बीजेपी में जाना: 2027 पंजाब चुनाव से पहले सिख राजनीति, नैरावेटिव और स्पेक्ट्रम का बड़ा किरदार?

दिल्ली में वरिष्ठ वकील और मानवाधिकार कार्यकर्ता हर वकील सिंह फूलका का बीजेपी में शामिल होना सिर्फ एक राजनीतिक खबर नहीं है. यह पंजाब की राजनीति में नाममात्र नैरेटिविटी का संकेत है। करीब सात साल की सक्रिय राजनीति से दूरी के बाद उनकी वापसी, और वह भी बीजेपी के साथ, कई कट्टर पर सवाल और स्टॉकिंग्स दोनों का जन्म हुआ है। यह कदम ऐसे समय आया है, जब बीजेपी 2027 विधानसभा चुनाव पर ध्यान केंद्रित करते हुए पंजाब में अपनी सामाजिक और राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रही है। फूलका का ‘नैतिक राजधानी’: बीजेपी के लिए अहम क्यों?एचएस फूलका की पहचान एक राजनेता से पहले एक कानूनी योद्धा की रही है। 1984 के सिख विरोधी विद्रोहियों के लिए दशकों तक लड़ाई का सिलसिला, कई मामलों को फिर से स्थापित करना और महिमा को सजा देना, इन सबने उन्हें सिख समाज में एक विश्वसनीय चेहरा बनाया। बीजेपी के लिए फूलका की शुरुआत इसी ‘मोरल कैपिटल’ को जोड़ने की कोशिश है. खासकर उस राज्य में, जहां पार्टी की पारंपरिक पकड़ कमजोर हो रही है। बीजेपी की सीख आउटरीच: एक लंबी रणनीतिफूलका का बीजेपी में आना किसी एक दिन का फैसला नहीं लगता. यह उस रणनीति का हिस्सा है, जिस पर पार्टी पिछले कुछ वर्षों से काम कर रही है। 2021 में मंजिंदर सिंह सीडिया और हरमीत सिंह जैसे नेताओं को पार्टी में शामिल करना इसी दिशा में पहला कदम था. दिल्ली में इसका असर भी दिखा, जहां सिख मतदाताओं में भारतीय जनता पार्टी की पकड़ मजबूत हुई। अब बीजेपी उसी मॉडल को पंजाब में दोहराने की कोशिश कर रही है, ताकि संगठन के साथ-साथ पंथिक नेतृत्व में भी प्रभाव डाला जा सके। अकाली दल का संकट: भाजपा के लिए अवसरपंजाब की राजनीति में लंबे समय तक सिख नेतृत्व का केंद्र रहे शिरोमणि अकाली दल अब पतन के दौर से गुजर रहे हैं। उत्पादों में गिरावट और आंतरिक गुटबाजी ने पार्टी की पकड़ बनाई है। फूलका खुद 2024 में अकाली दल से जुड़े थे, लेकिन महिला पॉलिटिक्स और कई सारे धड़ों के गुटबाजी के चलते उनका यह कदम अधूरा रह गया। यही राजनीतिक खाली जगह अब बीजेपी के लिए अवसर बन रही है। पार्टी सिख अकाली दल के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगाने की रणनीति पर काम कर रही है, जिसमें फूलका अहम कड़ी बन सकती हैं। साथ ही कैप्टन फिलाडेल्फिया सिंह के बाद कांग्रेस के दोषपूर्ण छवि से बने नारे को भी बीजेपी के लिए नया खुलासा किया जा रहा है। आप के लिए चुनौती: नैरेटिव बनाम एडवेंचरपंजाब में सत्य सत्य आम आदमी के पास है। AAP ने 2022 में ‘परिवर्तन’ और ‘ईमानदार राजनीति’ के तहत नैरावेटिव पर जीत हासिल की थी। लेकिन एचएस फूलका जैसे नेता, जो कभी आप के अहम चेहरे थे और बाद में अलग हो गए, अब बीजेपी में शामिल हो रहे हैं. यह आप के नैटिवेटिव को चुनौती देता है। फूलका का अतीत आप के साथ कायम है, लेकिन उनकी पार्टी के कार्यकर्ता और अब बीजेपी में शामिल होना इस बात का संकेत देता है कि पंजाब की राजनीति में वैज्ञानिक और गठबंधन गठबंधन में बदलाव जारी है। बीजेपी के प्रति क्या बदलेगा सिखा वोट का रुख?पंजाब की राजनीति में सिख वोट की भूमिका निभाई है। अब तक बीजेपी में बार-बार ‘बाहरी’ पार्टी देखने को मिल रही है, खासकर कृषि कानूनों के विवाद के बाद यह दूरियां और गरीबी पैदा हो गई है। ऐसे में फूलका जैसे चेहरे की पार्टी बीजेपी को एक ‘इनसाइडर’ नैरेटिव बनाने में मदद कर सकती है। हालाँकि, यह कितना गहरा बदलाव होगा, यह इस बात पर निर्भर है कि ग्राउंड लेवल पर कितने बोल्टेज बने होते हैं। फूलका का राजनीतिक सफर: प्रतिष्ठा और विरोधाभासों की कहानीफूलका का राजनीतिक सफर भी दिलचस्प है। 2013 में AAP से जुड़ना, 2017 में चुनाव जीतना और फिर अचानक से जुड़ना। यह सिद्धांत है कि उन्होंने सदैव अपने सिद्धांतों को देशभक्ति दी है। बेअदबी मामलों में न्याय की असंबद्ध प्रक्रिया से नाराज राजनीतिक कर्मियों और फिर सामाजिक-न्याय के सिद्धांतों पर सक्रिय रहना, यह उनकी छवि को और मजबूत बनाता है। लेकिन सवाल भी यही है- क्या फूलका, जो राजनीति से निराश होकर बाहर निकले थे, अब बीजेपी ऊर्जा के साथ काम करेगी? 2027 का रोडमैप: बीजेपी की नई सोशल इंजीनियरिंगपंजाब में 2027 के चुनाव के लिए बीजेपी के लिए सिर्फ नामांकन की लड़ाई नहीं, बल्कि विचारधारा की परीक्षा होगी। फूलका की शुरूआती इसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है, जहां पार्टी जातीय और धार्मिक पहचान के साथ ‘विश्वासनीय संयुक्त राष्ट्र’ को नया सामाजिक स्तर बनाने की कोशिश की जा रही है। यह रणनीति तीन कलाकारों पर काम करती दिख रही है। सिख नेतृत्व में और भरोसेमंद समर्थक, अकाली दल के अविभाज्य होते आधार को अपमानित करना, आम आदमी पार्टी के नैरेटिविटी को चुनौती देना। लेकिन रास्ता आसान नहीं है. पंजाब में भाजपा की ऐतिहासिक पकड़ सीमित रही है और कृषि भवनों के बाद नकारात्मक धारणा अभी भी प्रभावित हो रही है। सिख राजनीति में गहरी जड़ें वाले आश्रम के बीच जगह बनाना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सिर्फ चेहरा जोड़ना काफी नहीं होगा, पार्टी को जमीनी स्तर पर भरोसेमंद भी बनाना होगा। फूलका की शुरुआत एक बड़ी बात है, लेकिन यह बदलाव की शुरुआत है या सिर्फ प्रतीकात्मक चाल-इसका जवाब आने वाला समय ही देगा। निरीक्षण इतना साफ है कि 2027 से पहले पंजाब में नैरावेटिव की जंग तेज हो गई है।
भारतीय डॉक्टर ने USG के लिए बनाया AI टूल, सेकेंडों में तैयार होगी अल्ट्रासाउंड रिपोर्ट

Last Updated:April 01, 2026, 14:02 IST नई दिल्ली में रहने वाले रेडियोलॉजिस्ट डॉ तरुण कोठारी ने वेब आधारित एआई टूल डेवलप किया है. रिपोर्टर डॉट रेडप्लस एआई नाम के इस टूल के माध्यम से सेकेंडों में यूएसजी या अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट तैयार हो जाएगी. भारतीय डॉक्टर तरुण कोठारी ने अल्ट्रासाउंड के लिए एआई टूल बनाया है. AI Tool For USG: आमतौर पर अल्ट्रासाउंड कराने के बाद रिपोर्ट लेने के लिए कम से एक से दो घंटे या कहीं-कहीं तो पूरे एक दिन का इंतजार करना पड़ता है और मरीजों को दूसरे दिन रिपोर्ट मिलती है, लेकिन भारतीय रेडियोलॉजिस्ट डॉ. तरुण कोठारी ने ऐसा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल तैयार किया है जिसके इस्तेमाल से यह काम भी फुर्ती से पूरा हो सकेगा और सेकेंडों में अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट तैयार हो जाएगी. डॉ. तरुण कोठारी ने एक बेव आधारित एआई प्लेटफॉर्म https://reporter.redplusai.com/ बनाया है जो रेडियोलॉजी में बड़ी क्रांति साबित हो सकता है. इस टूल से अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट बेहद ही कम समय में तैयार हो जाएगी. हालांकि ऐसा नहीं है कि रिपोर्ट को तैयार करने में रेडियोलॉजिस्ट या एक्सपर्ट की जरूरत नहीं होगी, बल्कि इन दोनों की मौजूदगी त जरूरी होगी लेकिन काम जल्दी हो जाएगा. कोरोना महामारी के दौरान काफी लोकप्रिय हुए दिल्ली स्थित डॉ. तरुण कोठारी ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट्स और सोनोलॉजिस्ट्स के लिए विकसित यह टूल रिपोर्ट लेखन की प्रक्रिया को काफी सरल बना देता है. इस टूल का फायदा यह है कि इसमें डॉक्टर को केवल अपने क्लिनिकल निष्कर्ष टाइप करने होते हैं और पलक झपकते ही एक संपूर्ण, संरचित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप रिपोर्ट तैयार हो जाती है. इस प्लेटफॉर्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह वेब आधारित है और इसके लिए किसी सॉफ्टवेयर इंस्टॉलेशन की जरूरत नहीं है. मोबाइल हो या कंप्यूटर, इसे कहीं से भी उपयोग किया जा सकता है. इस टूल में डालने के बाद रिपोर्ट PDF के रूप में ऑटोमेटिक तरीके से सेव हो जाती है और फाइल का नाम भी अपने आप तैयार हो जाता है. जिससे डॉक्टरों का कीमती समय बचता है. किन-किन अल्ट्रासाउंड की रिपोर्ट होती तैयार? यह टूल यूएसजी की प्रमुख श्रेणियों को कवर करता है. इनमें एब्डोमेन व पेल्विस, प्रसूति स्कैन, स्मॉल पार्ट्स, डॉप्लर और एमएसके. ये सभी आमतौर पर किए जाने वाले अल्ट्रासाउंड हैं. यह टूल रोजाना क्लिनिकल अभ्यास के लिए बेस्ट किट की तरह काम करता है. डॉ. तरुण ने बताया कि यह टूल एक भारतीय रेडियोलॉजिस्ट ने बनाया जो खुद रोजाना यूएसजी की रिपोर्टिंग करते हैं, इसलिए इसमें वास्तविक क्लिनिकल जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया है. इस टूल पर नए उपयोगकर्ताओं के लिए 300 निःशुल्क रिपोर्ट्स भी उपलब्ध हैं जो बिना किसी अग्रिम भुगतान के पढ़ी जा सकती हैं. यह उन सभी रेडियोलॉजिस्ट्स के लिए काफी सहयोगी है जो अपनी रिपोर्टिंग को तेज, सटीक और आधुनिक बनाना चाहते हैं. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent Priya Gautam is an accomplished journalist currently working with Hindi.News18.com with over 14 years of extensive field reporting experience. Previously worked with Hindustan times group (Hindustan Hindi) and …और पढ़ें First Published : April 01, 2026, 14:02 IST
कनाडा में मर्डर के 21 दिन बाद उज्जैन पहुंचेगा शव:2 अप्रैल को अहमदाबाद के रास्ते आएगा, 3 को देवास रोड से चक्रतीर्थ तक निकलेगी अंतिम यात्रा

उज्जैन निवासी सिख युवक गुरकीरत सिंह मनोचा का पार्थिव शरीर 21 दिन बाद भारत लाया जा रहा है। 14 मार्च को कनाडा में हुई हत्या के बाद अब 2 अप्रैल को शव अहमदाबाद और 3 अप्रैल को उज्जैन पहुंचेगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा। मनोचा के पार्थिव शरीर को भारत लाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। शव वैंकूवर से दिल्ली होते हुए 2 अप्रैल की रात करीब 9 बजे अहमदाबाद एयरपोर्ट पहुंचेगा, जहां कस्टम और दस्तावेजी कार्रवाई के बाद परिजनों को सौंपा जाएगा। 3 अप्रैल को उज्जैन में अंतिम दर्शन, निकलेगी शव यात्रा अहमदाबाद से एम्बुलेंस के जरिए 3 अप्रैल की सुबह करीब 9 बजे पार्थिव शरीर को पार्श्वनाथ सिटी, देवास रोड स्थित निवास लाया जाएगा। यहां अंतिम दर्शन और अरदास के बाद शव यात्रा निकाली जाएगी। इन मार्गों से निकलेगी अंतिम यात्रा शव यात्रा पार्श्वनाथ सिटी से देवास रोड, संजीवनी हॉस्पिटल चौराहा, फ्रीगंज स्थित सुख सागर गुरुद्वारा साहिब, टावर चौक, चामुंडा माता मंदिर, आगर रोड, मंगलनाथ मार्ग, पीपलीनाका होते हुए चक्रतीर्थ श्मशान घाट पहुंचेगी, जहां अंतिम संस्कार होगा। रास्ते में विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा श्रद्धांजलि दी जाएगी। सरकार और प्रशासन के सहयोग से संभव हुआ परिजनों ने पार्थिव शरीर को भारत लाने में मध्यप्रदेश सरकार, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भारत सरकार, विदेश मंत्रालय, भारतीय दूतावास और स्थानीय प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया है। घटनाक्रम से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें उज्जैन के स्टूडेंट को कनाडा में कार चढ़ाकर मार डाला:कॉलेज के 10-12 छात्रों ने आपसी रंजिश में पीटा मध्य प्रदेश के उज्जैन के एक छात्र की कनाडा में कॉलेज के छात्रों ने हत्या कर दी। 10-12 युवकों ने पहले छात्र की पिटाई की, फिर उस पर गाड़ी चढ़ा दी। छात्र को गंभीर चोटें आई थीं। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसने दम तोड़ दिया। वारदात 14 मार्च को फोर्ट सेंट जॉन शहर में हुई। जानकारी के मुताबिक मृतक की पहचान गुरकीरत सिंह मनोचा के रूप में हुई है, जो देवास रोड स्थित पार्श्वनाथ सिटी के निवासी थे। वे कनाडा के नॉर्दर्न लाइट्स कॉलेज में बिजनेस मैनेजमेंट के पोस्ट डिग्री डिप्लोमा प्रोग्राम की पढ़ाई कर रहे थे। CM मोहन यादव ने दुख जताते हुए परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। दोस्त के फोन से परिवार को मिली जानकारी
पीरियड्स में क्या वाकई नहीं खाना चाहिए खट्टा? डॉक्टर से जान लें सारा सच

Last Updated:April 01, 2026, 13:44 IST Diet During Periods: पीरियड्स हर महिला के लिए अलग-अलग अनुभव लेकर आते हैं. किसी के लिए यह केवल सामान्य थकान होती है, तो किसी के लिए पेट में असहनीय मरोड़ यानी क्रैम्प्स (Cramps), कमर दर्द और मूड स्विंग्स (Mood Swings) जैसी बड़ी परेशानी. अक्सर इन दिनों सिर्फ मीठा या जंक फूड खाने का मन करता है. अक्सर महिलाएं पूछती हैं कि पीरियड्स में क्या खाना चाहिए ताकि दर्द कम हो और शरीर में कमजोरी न आए. फरीदाबाद: पीरियड्स को लेकर हमारे यहां अब भी तरह-तरह की मान्यताएं चलती आ रही हैं. खासकर खाने-पीने को लेकर ज्यादातर… माएं-बुआएं कहती हैं कि इन दिनों खट्टा या ठंडा मत खाओ. कुछ लड़कियां सचमुच अपनी पसंद की चीजें छोड़ देती हैं बिना ये जाने कि इसका कोई ठोस कारण भी है या नहीं. असल में क्या पीरियड्स में खट्टा खाने से कोई नुकसान होता है या ये सिर्फ सुनी-सुनाई बातें हैं? सही जानकारी ज्यादा जरूरी है वरना बेवजह परेशान रहते हैं. आइए डॉक्टर से जानते हैं सबकुछ… लोकल18 को सर्वोदय अस्पताल फरीदाबाद की गाइनॉकॉलोजिस्ट डॉ. रैना चावला ने बताया कि पीरियड्स एकदम नेचुरल प्रक्रिया है. ये हर महिला के जीवन का हिस्सा है करीब 12 साल से 50 की उम्र तक. फिर भी हमारे समाज में इसे लेकर ढेरों गलतफहमियां फैली हुई हैं. खासकर खट्टा या ठंडा मत खाओ… इसका तो कोई वैज्ञानिक आधार भी नहीं. न इससे पीरियड का फ्लो बदलता है न दर्द में फर्क पड़ता है. यानी ये सब मिथक ही हैं. इन पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. डॉ. रैना बताती हैं कि पीरियड्स के दौरान सबसे जरूरी है पोषक और संतुलित आहार लेना. शरीर से खून की कमी इस समय आम है. खासकर अगर ब्लीडिंग ज्यादा हो रही हो तो ऐसे में आयरन और प्रोटीन से भरपूर खाना बहुत फायदेमंद होता है. जैसे पालक, मेथी, गुड़, चना, दाल, सेब, केला वगैरह. इनसे शरीर को ताकत मिलती है. पानी और जूस भी खूब पिएं ताकि शरीर डिहाइड्रेट न हो. वो आगे कहती हैं कि कमजोरी और दर्द भी इन दिनों हर लड़की-महिला झेलती है. दर्द कम करने में काजू, बादाम, पिस्ता और दूसरे ड्राइ फ्रूट्स, जिनमें मैग्नीशियम होता है, मदद करते हैं. वैसे कोई एक ऐसा फूड नहीं है जिससे दर्द गायब हो जाए. मगर सही तरीके से खाएं तो बहुत फर्क पड़ता है. जिन्हें ज्यादा दर्द या ब्लीडिंग होती है उन्हें अपनी डाइट खास देखनी चाहिए. वह बताती हैं कि बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार और बाहर का खाना कम ही खाएं. घर का हल्का-फुल्का हेल्दी खाना सबसे अच्छा है. थोड़ा-बहुत योग या हल्की एक्सरसाइज भी फायदेमंद रहती है. शरीर थोड़ा एक्टिव रहता है तो आराम भी मिलता है. असल में पीरियड्स के दौरान खट्टा खाने से कुछ भी बिगड़ता नहीं. बस सही जानकारी रखें और अपनी डाइट-व्यवहार को सही बना लें यही सबसे बेहतर है. पीरियड्स के दौरान हम खट्टा खा सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है. About the Author काव्या मिश्रा Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें Location : Faridabad,Haryana First Published : April 01, 2026, 13:44 IST
कब्ज, अपच और गैस? गर्मियों में बेल बन सकता है आपका सुपरफूड, जानिए इसके फायदे और इस्तेमाल का तरीका

Last Updated:April 01, 2026, 13:41 IST गर्मी के मौसम में शरीर को ठंडक देने और पाचन सुधारने के लिए बेल का शरबत एक बेहतरीन उपाय है. यह प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक है जो कब्ज, अपच, दस्त और लू जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. नियमित सेवन से शरीर हाइड्रेटेड रहता है और इम्यूनिटी भी मजबूत होती है. गर्मी का मौसम आते ही लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसमें सबसे आम समस्या पेट से जुड़ी होती है. तेज धूप, गलत खानपान, कम पानी पीना और बाहर का तला-भुना खाना खाने से कब्ज, गैस, अपच, पेट दर्द और दस्त जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे समय में अगर कोई आसान, सस्ता और देसी उपाय अपनाया जाए तो काफी राहत मिल सकती है, और इसमें सबसे असरदार फल है बेल. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि बेल का फल गर्मियों में शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ पेट को स्वस्थ रखने में भी बहुत मदद करता है. आयुर्वेद में इसे औषधीय गुणों से भरपूर माना गया है और सदियों से इसका उपयोग पेट की बीमारियों के इलाज में किया जाता रहा है. बेल क्यों है खास? अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि बेल में कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जैसे फाइबर, विटामिन C, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट. ये सभी मिलकर पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और शरीर को अंदर से ठंडा रखते हैं. गर्मियों में अक्सर पेट खराब हो जाता है, लेकिन बेल का सेवन करने से पेट को आराम मिलता है. यह न सिर्फ पेट को साफ करता है, बल्कि पाचन प्रक्रिया को भी बेहतर बनाता है. Add News18 as Preferred Source on Google कब्ज में राहत: अगर किसी को कब्ज की समस्या रहती है, तो पका हुआ बेल का फल बेहद फायदेमंद माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर होता है, जो पाचन तंत्र को दुरुस्त करता है. बेल का सेवन करने से मल नरम होता है और आसानी से बाहर निकलता है, जिससे पेट साफ रहता है और कब्ज की समस्या धीरे-धीरे कम हो जाती है. नियमित रूप से बेल खाना या उसका शरबत पीना आंतों को स्वस्थ बनाए रखता है और पाचन को मजबूत करता है. गैस और अपच से राहत: गलत खान-पान और अनियमित दिनचर्या के कारण गैस और अपच की समस्या आम हो जाती है. ऐसे में बेल का फल बहुत फायदेमंद साबित होता है. बेल में ऐसे गुण होते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और भोजन को अच्छे से पचाने में मदद करते हैं. इसके सेवन से पेट में गैस बनने की समस्या कम होती है, भारीपन दूर होता है और पेट हल्का महसूस होता है. नियमित रूप से बेल का शरबत या गूदा लेने से अपच की परेशानी धीरे-धीरे कम हो जाती है. दस्त और लू से बचाव: गर्मी के मौसम में तेज धूप और गर्म हवाओं के कारण लू लगने का खतरा बढ़ जाता है. साथ ही, बाहर का दूषित पानी या खाना खाने से दस्त की समस्या भी हो सकती है. ऐसे में बेल का शरबत एक असरदार देसी उपाय है. यह शरीर को अंदर से ठंडक देता है और पानी की कमी को पूरा करता है. बेल में मौजूद पोषक तत्व आंतों को मजबूत बनाते हैं, जिससे दस्त में राहत मिलती है और शरीर जल्दी ठीक होने लगता है. नियमित रूप से बेल का शरबत पीने से लू से बचाव में भी मदद मिलती है. गर्मियों में बेल का शरबत क्यों है फायदेमंद: गर्मियों में रोजाना बेल का शरबत पीना शरीर के लिए बेहद लाभकारी होता है. यह एक प्राकृतिक कूलिंग ड्रिंक की तरह काम करता है और शरीर को अंदर से ठंडक देता है. इसके नियमित सेवन से शरीर में पानी की कमी नहीं होती और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. First Published : April 01, 2026, 13:41 IST
खड़ी फसल में आग, 50 एकड़ में लगा गेहूं खाक:रायसेन में फायर ब्रिगेड का पानी हुआ खत्म, 25 से ज्यादा ट्रैक्टर चलाए तब पाया काबू

रायसेन में बुधवार दोपहर गेहूं की खड़ी फसल में भीषण आग लग गई। आग में करीब 50 एकड़ में लगी फसल जलकर राख हो गई। आग इतनी तेजी से फैली कि किसानों को संभलने का मौका नहीं मिला। आग की लपटों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए किसानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर ट्रैक्टर और पेड़ों की टहनियों का उपयोग कर आग बुझाने का प्रयास किया। देखें तीन तस्वीरें फायर ब्रिगेड का पानी खत्म हुआ घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन के अधिकारी सहित सांची नगर पालिका की दमकल टीमें मौके पर पहुंची लगातार आग बुझाने में जुटी रहीं। इसी बीच फायर ब्रिगेड का पानी भी खत्म हो गया। अभी आग लगने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाया है प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट और नरवाई से आग लगा बताया जा रहा है हालांकि किसानों ने बिजली कंपनी पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। इन किसानों के खेतों की फसल जली इस भीषण आग में दीवान सिंह, अवतार सिंह, बदन सिंह, सुरेंद्र पटेल, रामबाबू पटेल, बहादुर सिंह, संदीप ठाकुर, अतर ठाकुर, गोलू ठाकुर, संजू ठाकुर और ओंकार सिंह सहित कई किसानों की फसलें जलकर खाक हो गईं। कटाई से ठीक पहले हुई इस घटना से किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है। महीनों की मेहनत कुछ ही मिनटों में राख में बदल गई, जिससे उनके सामने अब आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन नुकसान का आकलन कर रहा है।
बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए; अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

अमेरिका की फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन का मंगलवार को इराक की राजधानी बगदाद में अपहरण कर लिया गया। अज्ञात हमलावरों ने शैली को अल-सादून स्ट्रीट पर स्थित बगदाद होटल के पास से अगवा किया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें अपराधी, पत्रकार को जबरन गाड़ी में खींचकर ले जाते नजर आ रहे हैं। इराक के गृह मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है, हालांकि उसने पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एक विदेशी पत्रकार का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को तुरंत कार्रवाई के लिए भेजा गया। कुछ समय से वह न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर के लिए रिपोर्टिंग कर रही थी। इसी वेबसाइट के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने पत्रकार को सुरक्षा वजहों से इराक की यात्रा न करने की सलाह भी दी थी। शैली किटल्सन युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं और उन्हें 2017 में प्रेमियो कारावेला अवॉर्ड मिल चुका है। वह मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट, खासकर इराक और सीरिया से जुड़ी रिपोर्टिंग करती रही हैं। एक आरोपी गिरफ्तार लेकिन पत्रकार का सुराग नहीं गृह मंत्रालय के अनुसार सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अपहरणकर्ताओं का पीछा किया। इस दौरान अपहरण में इस्तेमाल हो रही एक गाड़ी पलट गई, जिससे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ वाहन भी जब्त किए गए। हालांकि पत्रकार को ले जा रही दूसरी गाड़ी मौके से फरार हो गई और वह बगदाद के दक्षिण की ओर निकल गई। दो इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अपहरण की शिकार पत्रकार एक अमेरिकी महिला हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हथियारबंद लोग उनकी गाड़ी रोककर उन्हें जबरन बाहर निकालते दिख रहे हैं। सउदी अरब के चैनल अल-अरबिया ने इस कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। इराकी मिलिशिया कतीब हिजबुल्लाह पर आरोप फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से जुड़ी है या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों द्वारा पहले भी विदेशी नागरिकों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाता रहा है। CNN से जुड़े वॉर एक्सपर्ट एलेक्स प्लिटास ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि किटल्सन को ईरान समर्थित इराकी मिलिशिया कतीब हिजबुल्लाह ने अगवा किया है। हालांकि इस दावे की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यह ग्रुप ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के करीब माना जाता है। इराक में यह पॉपुलर मोबिलाइजेशन फोर्स (PMF) का हिस्सा है। PMF को इराक सरकार ने ISIS के खिलाफ लड़ाई के दौरान आधिकारिक दर्जा दिया था। ISIS की हार के बाद की स्टोरी कर चर्चित हुईं शैली अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन उन रिपोर्टर्स में गिनी जाती हैं जो दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों से ग्राउंड रिपोर्टिंग करती हैं। उनका काम मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट खासकर इराक और सीरिया पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए काम किया है। उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य विषय युद्ध और संघर्ष, मिलिशिया समूह, स्थानीय आबादी पर असर और मानवीय संकट रहा है। शैली किटल्सन की सबसे ज्यादा चर्चा उन रिपोर्ट्स को लेकर हुई, जिनमें उन्होंने ISIS के पतन (2017 के बाद) के बाद इराक की स्थिति को ग्राउंड से दिखाया। उस वक्त उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ISIS की हार के बाद जमीनी स्तर पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और सत्ता का खालीपन बना हुआ है। स्थानीय मिलिशिया इसे भरने की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिका ने दी थी इराक छोड़ने की सलाह इराक की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने 29 मार्च को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि सभी अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द इराक छोड़ दें। दूतावास ने साफ कहा कि इराक में रहना इस समय बहुत खतरनाक है। यहां आतंकवाद, अपहरण और हिंसा का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले भी मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने इराक के लिए “Do Not Travel” (लेवल 4) की चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इराक की यात्रा न करें। इराक में पहले भी विदेशी नागरिक किडनैप हुए एलिजाबेथ त्सुरकोव- 2023 में बगदाद से लापता हुईं, बाद में एक मिलिशिया समूह के कब्जे में होने की पुष्टि हुई। (2026 तक भी उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है; रिहाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है) जिल कैरोल- 2006 में अमेरिकी पत्रकार जिल का रिपोर्टिंग के दौरान अपहरण हुआ। उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई, हालांकि उन्हें 3 महीने बाद रिहा कर दिया गया। गिउलियाना स्ग्रेना- 2005 में इटली की पत्रकार को उग्रवादियों ने उन्हें बंधक बना लिया, लगभग 1 महीने तक कैद में रखा। बाद में रिहा कर दिया गया। जुनपेई यासुदा- 2004 में जापानी पत्रकार को जासूसी के शक में अगवा किया गया, हालांकि कुछ दिनों में ही छोड़ दिया गया। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक की स्थिति चिंताजनक अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक को 180 देशों में 155वां स्थान मिला है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट में इराक को ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि वहां पत्रकारों को काम करते समय कई तरह के खतरे और दबाव का सामना करना पड़ता है।
बगदाद में बीच सड़क से अमेरिकी पत्रकार का अपहरण:जबरन गाड़ी में खींचकर ले गए, अमेरिकी दूतावास ने इराक न जाने की सलाह दी थी

अमेरिका की फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन का मंगलवार को इराक की राजधानी बगदाद में अपहरण कर लिया गया। अज्ञात हमलावरों ने शैली को अल-सादून स्ट्रीट पर स्थित बगदाद होटल के पास से अगवा किया। इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी वायरल हो रहा है जिसमें अपराधी, पत्रकार को जबरन गाड़ी में खींचकर ले जाते नजर आ रहे हैं। इराक के गृह मंत्रालय ने भी घटना की पुष्टि की है, हालांकि उसने पत्रकार की पहचान सार्वजनिक नहीं की। मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि एक विदेशी पत्रकार का अज्ञात लोगों ने अपहरण कर लिया, जिसके बाद सुरक्षा बलों को तुरंत कार्रवाई के लिए भेजा गया। न्यूज वेबसाइट अल-मॉनिटर की रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन को पहले से सुरक्षा खतरे की जानकारी थी और उसने पत्रकार को इराक की यात्रा न करने की सलाह भी दी थी। शैली किटल्सन युद्ध क्षेत्रों में रिपोर्टिंग के लिए जानी जाती हैं और उन्हें 2017 में प्रेमियो कारावेला अवॉर्ड मिल चुका है। वह मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट, खासकर इराक और सीरिया से जुड़ी रिपोर्टिंग करती रही हैं। एक आरोपी गिरफ्तार लेकिन पत्रकार का सुराग नहीं गृह मंत्रालय के अनुसार सुरक्षा बलों ने खुफिया जानकारी के आधार पर अपहरणकर्ताओं का पीछा किया। इस दौरान अपहरण में इस्तेमाल हो रही एक गाड़ी पलट गई, जिससे एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया और कुछ वाहन भी जब्त किए गए। हालांकि पत्रकार को ले जा रही दूसरी गाड़ी मौके से फरार हो गई और वह बगदाद के दक्षिण की ओर निकल गई। दो इराकी सुरक्षा अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि अपहरण की शिकार पत्रकार एक अमेरिकी महिला हैं। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें हथियारबंद लोग उनकी गाड़ी रोककर उन्हें जबरन बाहर निकालते दिख रहे हैं। सउदी अरब के चैनल अल-अरबिया ने इस कथित अपहरण का वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया है। फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह घटना मिडिल ईस्ट में चल रही जंग से जुड़ी है या नहीं। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया समूहों द्वारा पहले भी विदेशी नागरिकों और अमेरिकी हितों को निशाना बनाया जाता रहा है। ISIS की हार के बाद की स्टोरी कर चर्चित हुईं शैली अमेरिकी फ्रीलांस पत्रकार शैली किटल्सन उन रिपोर्टर्स में गिनी जाती हैं जो दुनिया के सबसे खतरनाक संघर्ष क्षेत्रों से ग्राउंड रिपोर्टिंग करती हैं। उनका काम मुख्य रूप से मिडिल ईस्ट खासकर इराक और सीरिया पर केंद्रित रहा है। उन्होंने कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया प्लेटफॉर्म्स के लिए काम किया है। उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य विषय युद्ध और संघर्ष, मिलिशिया समूह, स्थानीय आबादी पर असर और मानवीय संकट रहा है। शैली किटल्सन की सबसे ज्यादा चर्चा उन रिपोर्ट्स को लेकर हुई, जिनमें उन्होंने ISIS के पतन (2017 के बाद) के बाद इराक की स्थिति को ग्राउंड से दिखाया। उस वक्त उन्होंने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि ISIS की हार के बाद जमीनी स्तर पर संघर्ष खत्म नहीं हुआ है और सत्ता का खालीपन बना हुआ है। स्थानीय मिलिशिया इसे भरने की कोशिश में लगे हुए हैं। अमेरिका ने दी थी इराक छोड़ने की सलाह इराक की बिगड़ती सुरक्षा स्थिति को देखते हुए अमेरिका ने अपने नागरिकों को देश छोड़ने की सलाह दी है। बगदाद में अमेरिकी दूतावास ने 29 मार्च को एडवाइजरी जारी करते हुए कहा कि सभी अमेरिकी नागरिक जल्द से जल्द इराक छोड़ दें। दूतावास ने साफ कहा कि इराक में रहना इस समय बहुत खतरनाक है। यहां आतंकवाद, अपहरण और हिंसा का खतरा बढ़ गया है। इससे पहले भी मार्च 2026 की शुरुआत में अमेरिका ने इराक के लिए “Do Not Travel” (लेवल 4) की चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि किसी भी हाल में इराक की यात्रा न करें। इराक में पहले भी विदेशी नागरिक किडनैप हुए एलिजाबेथ त्सुरकोव- 2023 में बगदाद से लापता हुईं, बाद में एक मिलिशिया समूह के कब्जे में होने की पुष्टि हुई। (2026 तक भी उनकी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है; रिहाई की पुष्टि सार्वजनिक रूप से नहीं हुई है) जिल कैरोल- 2006 में अमेरिकी पत्रकार जिल का रिपोर्टिंग के दौरान अपहरण हुआ। उनके साथ काम करने वाले व्यक्ति की हत्या कर दी गई, हालांकि उन्हें 3 महीने बाद रिहा कर दिया गया। गिउलियाना स्ग्रेना- 2005 में इटली की पत्रकार को उग्रवादियों ने उन्हें बंधक बना लिया, लगभग 1 महीने तक कैद में रखा। बाद में रिहा कर दिया गया। जुनपेई यासुदा- 2004 में जापानी पत्रकार को जासूसी के शक में अगवा किया गया, हालांकि कुछ दिनों में ही छोड़ दिया गया। प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक की स्थिति चिंताजनक अंतरराष्ट्रीय संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (RSF) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 के वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में इराक को 180 देशों में 155वां स्थान मिला है। हालांकि यह पिछले सालों के मुकाबले थोड़ा सुधार दिखाता है, लेकिन स्थिति अभी भी चिंता का विषय है। रिपोर्ट में इराक को ‘बहुत गंभीर’ श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि वहां पत्रकारों को काम करते समय कई तरह के खतरे और दबाव का सामना करना पड़ता है।
उज्जैन में विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत हुआ:कलेक्टर उत्कृष्ट स्कूल के मुख्य आयोजन में शामिल; 4 अप्रैल तक स्कूल चलें हम अभियान

एक अप्रैल से शुरू हुए नवीन शिक्षण सत्र 2026-27 के तहत उज्जैन जिले के स्कूलों में प्रवेश उत्सव मनाया गया। बुधवार को विद्यार्थियों को तिलक लगाकर स्कूलों में प्रवेश दिलाया गया। दशहरा मैदान स्कूल और शास्त्री नगर स्थित उत्कृष्ट स्कूल में मुख्य कार्यक्रम आयोजित हुए, जिसमें जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हुए। जिले का मुख्य कार्यक्रम शासकीय उत्कृष्ट उमावि माधवनगर में आयोजित किया गया। इसमें कलेक्टर रौशन सिंह, जिला पंचायत अध्यक्ष कलावती यादव, सीईओ श्रेयांश कुमुट और शिक्षा विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में राज्य स्तरीय संबोधन का सीधा प्रसारण भी दिखाया गया। चार अप्रैल तक चलेंगे दैनिक आयोजन एडीपीसी गिरीश तिवारी ने बताया कि “स्कूल चलें हम” अभियान एक से चार अप्रैल तक चलेगा। इस दौरान प्रतिदिन स्कूलों में अलग-अलग गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। ब्लॉक स्तर पर भी उत्कृष्ट स्कूलों में कार्यक्रम आयोजित किए गए। विद्यार्थियों को पुस्तक और साइकिल वितरण अभियान के तहत विद्यार्थियों का स्वागत कर उन्हें पाठ्यपुस्तकें वितरित की गईं। पात्र विद्यार्थियों को साइकिल भी दी गई। सभी स्कूलों को निर्देश दिए गए कि कोई भी बच्चा प्रवेश से वंचित न रहे। दो अप्रैल को शाला स्तर पर पालकों के साथ पीटीएम, सांस्कृतिक और खेलकूद गतिविधियां आयोजित होंगी। इसमें अभिभावकों को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी जाएगी और 85% से अधिक उपस्थिति वाले विद्यार्थियों के पालकों का सम्मान किया जाएगा। चार अप्रैल को ‘भविष्य से भेंट’ कार्यक्रम चार अप्रैल को “भविष्य से भेंट” कार्यक्रम आयोजित होगा। इसके तहत कलेक्टर सहित 91 अधिकारी विभिन्न स्कूलों में पहुंचकर विद्यार्थियों से संवाद करेंगे और उन्हें पढ़ाई के महत्व के बारे में बताएंगे।








