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बच्चे के जन्म के बाद पिता में भी आते हैं ये शारीरिक बदलाव, रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा

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Last Updated:March 30, 2026, 21:56 IST अक्सर यह माना जाता है कि बच्चे के जन्म के बाद सिर्फ मां ही शारीरिक और मानसिक बदलावों से गुजरती है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं अलग है. हाल की रिसर्च बताती है कि पिता भी इस दौरान बड़े स्तर पर बदलाव महसूस करते हैं, जिनमें तनाव, थकान और यहां तक कि डिप्रेशन भी शामिल है. यानी नए बच्चे की जिम्मेदारी सिर्फ मां ही नहीं, बल्कि पिता के मन और शरीर पर भी गहरा असर डालती है, जिसे अब नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 9 से 12 महीने बाद बढ़ता है सबसे ज्यादा मानसिक दबाव. घर में बच्चे का जन्म हर परिवार के लिए बेहद खास और खुशी भरा पल होता है. नवजात की किलकारी पूरे माहौल को बदल देती है और घर में नई ऊर्जा और उम्मीदें लेकर आती है. आमतौर पर इस दौरान मां की सेहत और उनके मानसिक बदलावों पर ज्यादा ध्यान दिया जाता है, खासकर ‘पोस्टपार्टम ब्लूज’ को लेकर जागरूकता भी बढ़ी है. लेकिन इसी खुशी के बीच एक और महत्वपूर्ण पहलू अक्सर नजरअंदाज हो जाता है, और वह है पिता का मानसिक स्वास्थ्य. एक पिता भी इस नए बदलाव से गुजर रहा होता है, लेकिन वह अपनी जिम्मेदारियों और भावनाओं को अक्सर खुद तक ही सीमित रखता है. हाल ही में सामने आई एक स्टडी ने इसी छिपे पहलू को उजागर किया है. ‘JAMA Network Open’ में प्रकाशित इस रिसर्च के अनुसार, बच्चे के जन्म के तुरंत बाद नहीं बल्कि लगभग एक साल के भीतर पिता के मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखने को मिलता है. इस दौरान डिप्रेशन और तनाव से जुड़ी समस्याओं का खतरा 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ जाता है. यह आंकड़ा इस बात की ओर इशारा करता है कि पिता भी मानसिक दबाव से गुजरते हैं, लेकिन उनके संघर्ष को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. यह स्टडी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह समाज में पिता की भूमिका को एक नए नजरिए से देखने की जरूरत बताती है. स्वीडन में हुआ बड़ा रिसर्च, लाखों लोगों का डेटा शामिलयह अध्ययन स्वीडन में किया गया, जिसमें करीब 10 लाख से अधिक पुरुषों के डेटा का विश्लेषण किया गया. इतने बड़े स्तर पर किए गए इस शोध ने यह स्पष्ट किया कि बच्चे के जन्म के शुरुआती महीनों में पिता अपेक्षाकृत सामान्य और स्थिर नजर आते हैं. इसका मुख्य कारण यह है कि उस समय उनका पूरा ध्यान मां और नवजात की देखभाल पर होता है. वे अपनी नींद, थकान और मानसिक दबाव को पीछे छोड़कर परिवार की जिम्मेदारियां निभाने में जुट जाते हैं. लेकिन धीरे-धीरे यही अनदेखा किया गया तनाव उनके अंदर जमा होने लगता है. 9 से 12 महीने बाद बढ़ता है सबसे ज्यादा मानसिक दबावसमय बीतने के साथ जब जिम्मेदारियां और बढ़ती हैं, तो मानसिक दबाव भी बढ़ने लगता है. रिसर्च के मुताबिक, बच्चे के जन्म के 9 से 12 महीने के बीच का समय सबसे ज्यादा संवेदनशील होता है. इस दौरान पिता को लगातार नींद की कमी का सामना करना पड़ता है, काम और परिवार के बीच संतुलन बनाना मुश्किल हो जाता है, आर्थिक जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं और रिश्तों में भी बदलाव आने लगते हैं. इन सभी कारणों का संयुक्त असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ता है, जो आगे चलकर डिप्रेशन या स्ट्रेस डिसऑर्डर के रूप में सामने आ सकता है. क्यों छिपी रह जाती है पिता की मानसिक परेशानी?इस अध्ययन का एक अहम निष्कर्ष यह भी है कि पिता अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त नहीं करते. समाज में पुरुषों से मजबूत बने रहने की अपेक्षा और भावनाएं छिपाने की आदत के कारण वे अपनी मानसिक स्थिति के बारे में बात करने से बचते हैं. कई बार वे खुद भी यह स्वीकार नहीं कर पाते कि उन्हें मदद की जरूरत है. यही वजह है कि उनकी परेशानी तब सामने आती है जब स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है. इसलिए जरूरी है कि पिता के मानसिक स्वास्थ्य को भी उतनी ही अहमियत दी जाए जितनी मां के लिए दी जाती है, ताकि उन्हें समय रहते सही समर्थन और समझ मिल सके. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : March 30, 2026, 21:43 IST

राजगढ़ में खड़ी बस को ट्राले ने मारी टक्कर:सवारी उतारते वक्त हादसा, दो किशोर घायल; टक्कर मारकर भागा ड्राइवर

राजगढ़ में खड़ी बस को ट्राले ने मारी टक्कर:सवारी उतारते वक्त हादसा, दो किशोर घायल; टक्कर मारकर भागा ड्राइवर

राजगढ़ जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र में सोमवार शाम 7:30 बजे ढाबला जोड़ पर एक सड़क हादसा हो गया। यहां सवारी उतार रही राजस्थान रोडवेज की बस को पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्राले ने टक्कर मार दी। इस हादसे में बस में सवार दो किशोर यात्री घायल हो गए। घायलों की पहचान भोपाल निवासी निकेश पिता जगदीश (15) और निकेश पिता प्रभुलाल (16) के रूप में हुई है। दोनों को प्राथमिक उपचार के लिए खिलचीपुर अस्पताल ले जाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। टक्कर इतनी भीषण थी कि बस का पिछला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। सड़क किनारे खड़ी थी बस जानकारी के अनुसार, राजस्थान रोडवेज की बस (क्रमांक RJ14 PE 5046) कोटा से लगभग 30 सवारियां लेकर ब्यावरा की ओर जा रही थी। ढाबला जोड़ के पास कुछ यात्रियों को उतारने के लिए ड्राइवर ने बस सड़क किनारे खड़ी की थी। इसी दौरान पीछे से आ रहे ट्राले ने बस को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर के बाद ट्राला ड्राइवर वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। दूसरी बस में बैठाकर सवारियों को रवाना किया घटना की सूचना मिलते ही टीआई उमाशंकर मुकाती ने त्वरित कार्रवाई की। पुलिस ने ढाबला क्षेत्र के सरपंच ढाबे के पास से टक्कर मारकर भाग रहे ट्राले को पकड़ लिया और उसे थाने ले आई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टक्कर की आवाज इतनी तेज थी कि आसपास के लोगों को लगा जैसे कोई विस्फोट हुआ हो। हादसे के बाद बस में सवार यात्रियों में अफरा-तफरी मच गई। क्षतिग्रस्त बस को चालक और कंडक्टर खिलचीपुर ले गए, जबकि अन्य सवारियों को दूसरी बस में बैठाकर उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया। पुलिस ने मामले में शिकायत दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है।

रायसेन: 16 यात्री और 5 बाइक से लदी नाव पलटी:चार युवकों ने नर्मदा नदी में कूदकर सभी को बचाया; रमपुरा से रिछावर घाट जा रही थी नाव

रायसेन: 16 यात्री और 5 बाइक से लदी नाव पलटी:चार युवकों ने नर्मदा नदी में कूदकर सभी को बचाया; रमपुरा से रिछावर घाट जा रही थी नाव

रायसेन जिले के देवरी थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम रमपुरा घाट पर सोमवार को नर्मदा नदी में बड़ा हादसा टल गया। यहां 16 यात्रियों और 5 मोटरसाइकिलों से लदी एक नाव अचानक अनियंत्रित होकर नदी में पलट गई। नाव रमपुरा घाट से रिछावर घाट (जिला नरसिंहपुर) की ओर जा रही थी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नाव में क्षमता से अधिक लोग और वाहन सवार थे, जिसके चलते यह हादसा हुआ। बताया जा रहा है कि अधिक भार के कारण नाव संतुलन खोने लगी और उसमें धीरे-धीरे पानी भरने लगा। यात्रियों को स्थिति का अंदाजा होता, उससे पहले ही नाव डगमगाई और अचानक पलट गई। देखते ही देखते सभी यात्री और बाइक नदी में गिर गए, जिससे मौके पर अफरा-तफरी मच गई। चार युवकों ने दिखाई बहादुरी, नदी में कूदकर बचाईं जानें हादसे के दौरान स्थानीय चार युवकों ने साहस का परिचय देते हुए बिना देर किए नर्मदा नदी में छलांग लगा दी। तेज बहाव के बीच उन्होंने एक-एक कर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। नाव में सवार लोगों में बच्चे, महिलाएं और पुरुष शामिल थे। युवकों की तत्परता और सूझबूझ के चलते सभी 16 यात्रियों की जान बच गई और एक बड़ा हादसा टल गया। बाइक नदी में डूबीं, तीन निकाली गईं, बाकी की तलाश जारी हादसे में नाव पर रखी सभी 5 मोटरसाइकिलें नदी में डूब गईं। स्थानीय लोगों और प्रशासन की मदद से अब तक 3 बाइक को बाहर निकाल लिया गया है, जबकि बाकी 2 की तलाश जारी है। नदी में सर्चिंग अभियान चलाया जा रहा है। घटना के तुरंत बाद सभी यात्रियों को देवरी के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उनका प्राथमिक उपचार किया गया। डॉक्टरों के अनुसार सभी यात्री सुरक्षित हैं और किसी को गंभीर चोट नहीं आई है। बचाने वाले युवकों का होगा सम्मान प्रशासन ने हादसे के दौरान साहस दिखाने वाले चारों युवकों को सम्मानित करने की घोषणा की है। उनकी बहादुरी और तत्परता के चलते 16 जिंदगियां सुरक्षित बच सकीं। यह है 4 बहादुर युवक… प्रशासन मौके पर पहुंचा, लिया घटनास्थल का जायजा घटना की सूचना मिलते ही देवरी तहसीलदार जयपाल उइके और थाना प्रभारी जयदीप भदोरिया मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरे घटनाक्रम का जायजा लिया और स्थानीय लोगों से जानकारी जुटाई। प्रशासन ने घटना की जांच शुरू कर दी है। इस हादसे के बाद नदी में संचालित नावों की सुरक्षा व्यवस्था और ओवरलोडिंग को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि घाटों पर क्षमता से अधिक सवारी बैठाने पर कोई सख्ती नहीं होती, जिससे ऐसे हादसों का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि घाटों पर नाव संचालन के नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

फेसबुक पर जर्सी गाय दिखाकर युवक के पैसे हड़पे:मैहर में पीड़ित ने थाने में की शिकायत, आरोपियों ने भरोसे में लेने फर्जी दस्तावेज भेजे

फेसबुक पर जर्सी गाय दिखाकर युवक के पैसे हड़पे:मैहर में पीड़ित ने थाने में की शिकायत, आरोपियों ने भरोसे में लेने फर्जी दस्तावेज भेजे

मैहर जिले में फेसबुक के जरिए गाय बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का एक मामला सामने आया है। ताला थाना क्षेत्र के आमीन गांव के एक युवक को सस्ती जर्सी गाय खरीदने के चक्कर में हजारों रुपए की चपत लग गई। ठगों ने गाड़ी के खर्चे और जीपीएस के नाम पर पैसे ऐंठ लिए। सोमवार को पीड़ित अक्लेन्द्र सिंह ने बताया कि उन्होंने फेसबुक पर गायों की सप्लाई से जुड़ा एक विज्ञापन देखा था। दिए गए नंबर पर बात करने पर सामने वाले व्यक्ति ने खुद को गायों का व्यापारी बताया और व्हाट्सएप पर कई फोटो भेज दीं। अक्लेन्द्र को एक जर्सी गाय पसंद आ गई। ठग ने उसकी कीमत 30 हजार रुपए बताई, लेकिन बाद में सौदा सिर्फ 15 हजार रुपए में तय हो गया। एडवांस और जीपीएस के नाम पर वसूली सौदा पक्का होते ही ठग ने गाय भेजने के लिए गाड़ी के इंतजाम के नाम पर 2,000 रुपए एडवांस मांग लिए। अक्लेन्द्र ने भरोसा करके पैसे ऑनलाइन भेज दिए। करीब चार घंटे बाद ठग का फिर फोन आया और उसने कहा कि अब जीपीएस लगाने के नाम पर 9,999 रुपए और भेजने होंगे। शक होते ही ठग ने बंद किया फोन जब ठग ने दोबारा करीब 10 हजार रुपए मांगे, तो अक्लेन्द्र को गड़बड़ी का अहसास हुआ। उन्होंने और पैसे देने से मना कर दिया। जैसे ही युवक ने इनकार किया, ठग ने फोन काट दिया और अपना नंबर बंद कर लिया। पीड़ित ने अब मुकुंदपुर चौकी में इसकी शिकायत दर्ज कराई है। चौकी प्रभारी नागेश्वर मिश्रा का कहना है कि शिकायत मिल गई है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।

पेट गैस का इलाज: पेट की गैस का ‘इमरजेंसी’ इलाज, डॉक्टर ने दी सलाह, ये पेय पदार्थ ही मिनटों में लें आराम

पेट गैस का इलाज: पेट की गैस का 'इमरजेंसी' इलाज, डॉक्टर ने दी सलाह, ये पेय पदार्थ ही मिनटों में लें आराम

30 मार्च 2026 को 20:29 IST पर अपडेट किया गया पेट गैस के उपाय: यहां देखें भागदौड़ भरी जिंदगी और खान-पान के कारण ब्लोटिंग या पेट में गैस रुकना एक आम समस्या बन गई है। कई बार ऐसा होता है कि गैस शरीर से बाहर नहीं निकल पाती, सीने में जलन, पेट में भारीपन और कमजोरी दिखाई देती है। अगर आप भी इस अटकी हुई गैस से परेशान हैं, तो ये कुछ घरेलू नुस्खे अपना सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट)ब्लोटिंग(टी)पेट गैस उपचार(टी)गैस निकालने का सबसे तेज़ तरीका(टी)गर्म पानी पीने से गैस से राहत(टी)पेट में बहुत अधिक गैस का इलाज कैसे करें(टी)वयस्कों के लिए गैस से राहत(टी)पेट से गैस को तुरंत कैसे दूर करें दवा(टी)क्या गर्म पानी पीने से गैस से राहत मिलती है(टी)पेट गैस के लिए आपातकालीन उपचार

सिवनी में भूकंप से बचाव के लिए ट्रेनिंग:एसडीईआरएफ ने कहा- आपदा के वक्त झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें

सिवनी में भूकंप से बचाव के लिए ट्रेनिंग:एसडीईआरएफ ने कहा- आपदा के वक्त झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें

सिवनी में सोमवार, 30 मार्च को जिला आपदा प्रबंधन की ओर से भूकंप से बचाव और तैयारी को लेकर एक दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम रखा गया। सरकारी कर्मचारियों, स्कूली बच्चों और एनसीसी कैडेट्स को मुसीबत के समय जान बचाने के तरीके सिखाए गए। होमगार्ड और एसडीईआरएफ की टीम ने बताया कि भूकंप आने पर घबराने के बजाय समझदारी से काम लेना चाहिए। ट्रेनिंग में मुख्य रूप से इन बातों पर जोर दिया गया। भूकंप के दौरान सुरक्षा कैसे करें इस दौरान “Drop, Cover, Hold” तकनीक सिखाई गई—झुकें, सुरक्षित स्थान लें, और पकड़कर रहें। भारी सामान को दीवार से सटाकर फिक्स रखना और टॉर्च, दवाइयां, सूखा खाना जैसी जरूरी चीजों की एक इमरजेंसी किट तैयार रखना। अगर आप घर से बाहर हैं, तो ऊंची इमारतों, बिजली के खंभों और पेड़ों से दूर किसी खुले मैदान में चले जाएं। घर बनाते समय ऐसी तकनीक का इस्तेमाल करें जिससे वह भूकंप के झटके झेल सके। घायल लोगों को तुरंत प्राथमिक इलाज देने और मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के तरीके भी सिखाए गए। लाइव डेमो और प्रदर्शनी ट्रेनिंग के दौरान टीम ने एक नकली अभ्यास (मॉक ड्रिल) करके दिखाया। इसमें दिखाया गया कि ऊंची बिल्डिंग में फंसे घायल व्यक्ति को रस्सी और औजारों की मदद से सुरक्षित कैसे नीचे लाया जाता है। इसके अलावा आग बुझाने वाले सिलेंडर को चलाने का सही तरीका भी बताया गया। जागरूकता ही बचाव है कार्यक्रम के आखिर में आपदा के समय काम आने वाले मशीनों और औजारों की प्रदर्शनी लगाई गई। जानकारों ने बताया कि बिजली गिरने, सांप के काटने या आग लगने जैसी घटनाओं में तुरंत क्या कदम उठाने चाहिए। इस पूरी ट्रेनिंग का मकसद लोगों और सरकारी स्टाफ को इतना तैयार करना है कि किसी भी मुसीबत के समय कम से कम नुकसान हो और लोगों की जान बचाई जा सके।

गर्मियों में शरीर के लिए AC है ये भूरा बीज! खोई हुई ताकत लौटाएगा वापस, जानें आयुर्वेदिक फायदे

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Last Updated:March 30, 2026, 19:43 IST गर्मियों के मौसम में शरीर को ठंडा और ऊर्जावान बनाए रखना बेहद जरूरी होता है. ऐसे में अलसी (फ्लैक्ससीड) का सेवन एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है. अलसी में ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. आइए आपको अलसी के फायदों के बारे में बताते हैं. पुराने समय में लोग गर्मियों में शरीर को ठंडा बनाए रखने के लिए कई ऐसी चीजों का सेवन करते थे, जो उन्हें धूप से बचने के साथ शरीर में ताकत बनाए रखने में भी काफी सहयोग करती थी. उनमें से एक है अलसी के दाने, यह छोटे दाने शरीर को गर्मियों में ठंडक के साथ शरीर को कई तरह के फायदे भी पहुंचते हैं. इसका प्रयोग करने से किसी प्रकार की समस्या नहीं होती है. डॉ. आतिफ हसन के अनुसार, अलसी कोई साधारण दाने नहीं बल्कि सेहत के लिए किसी आयुर्वेदिक दवा से कम नहीं है. अलसी के पानी का सेवन एक तरह का डिटॉक्स ड्रिंक माना जाता है. इसका प्रयोग करने के लिए एक गिलास पानी लें उसमें 1 चम्मच अलसी के बीज रातभर भिगो दें, फिर सुबह इसे छानकर खाली पेट पिएं. इससे को शरीर ठंडक मिलेगी और पाचन बेहतर होगा. पहले के समय में लोग धूप में खेतों में जाकर काम किया करते थे. ऐसे में वह लोग अलसी के दाने से बने शरबत का भी प्रयोग अपने शरीर को ठंडा बनाए रखने के लिए करते थे. अलसी के दाने से एक बेहतरीन शरबत भी तैयार करने के लिए अलसी को भिगोकर रख दें. फिर भिगोई हुई अलसी को पानी में उबालें. इसे ठंडा होने पर उसमें नींबू का रस और शहद मिलाकर पीने से गर्मी से राहत और शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google उन्होंने कहा कि अलसी के साथ दही खाने का भी काफी फायदा होता है. इसका सेवन करने के लिए एक कटोरी दही में 1 चम्मच भुनी हुई अलसी का पाउडर मिलाकर खाएं. ये पेट को ठंडक और पाचन में सुधार करने में मदद करता है. वही अलसी पाउडर से एक स्वादिष्ट चटनी भी तैयार की जा सकती है, जिसमें अलसी को भूनकर पीस लें. इसके बाद इसके साथ लहसुन, हरी मिर्च और नमक को भी पीसकर एक कटोरी में रखकर थोड़ा-थोड़ा पानी मिलाकर एक गाढ़ा पेस्ट बना लें. यह चटनी खाने में बेहद स्वादिष्ट लगती है और पेट के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. अलसी में ओमेगा 3 फैटी एसिड फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर के लिए काफी फायदेमंद होते हैं. अलसी के दाने को भूनकर इसका पाउडर बनाकर रख लें. इसका सेवन सुबह करने से काफी फायदे मिलते हैं. इसका सेवन करने के लिए रोज सुबह 1 चम्मच गुनगुने पानी के साथ इसे पीएं. ये शरीर में कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल और शरीर को ऊर्जा प्रदान करने में मदद करता है और यह देसी उपाय किसी भी प्रकार से हानिकारक भी नहीं होता है. अलसी का प्रयोग चाट मसाले की तरह भी किया जा सकता है. यह स्वाद के साथ सेहत को भी बहुत लाभ पहुंचता है. इसका प्रयोग करने के लिए इसे भूनकर पीस लें और एक और ऐरटाइट डब्बे में रख लें. फिर इसे खीरा, टमाटर और अन्य सलाद में ऊपर से अलसी पाउडर को छिड़ककर खाने से शरीर में फाइबर की मात्रा बढ़ती है और जिन लोगों को बार-बार भूख लगना महसूस होता है, वह इसका सेवन जरूर करें, क्योंकि इसके सेवन से पेट लंबे समय तक भरा रहता है. डॉ. आतिफ हसन ने बताया कि अलसी दाने का प्रयोग मीठे के तौर पर भी किया जा सकता है. इसकी ठंडी खीर स्वाद के साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. इसे बनाने के लिए दूध में अलसी पाउडर डालकर पकाएं, फिर ठंडा होने पर थोड़ा गुड़ मिलाकर इसका सेवन करें. इससे शरीर में भरपूर पोषण मिलता है और शरीर को ठंडक भी मिलती है. First Published : March 30, 2026, 19:43 IST

गर्मी में क्यों बार-बार हो रही है थकान और पेट खराब? इसका देसी इलाज है ये खास शर्बत…

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गर्मी का मौसम आते ही शरीर में कई तरह की परेशानियां बढ़ने लगती हैं, जैसे थकान, कमजोरी, पेट खराब होना और डिहाइड्रेशन. तेज धूप और लू के कारण शरीर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे एनर्जी लेवल भी गिरने लगता है. ऐसे समय में अगर आप प्राकृतिक और देसी उपाय अपनाते हैं, तो शरीर को राहत मिलती है. इन्हीं में से एक बेहद असरदार और पारंपरिक ड्रिंक है बेल का शर्बत, जिसे गर्मियों का नेचुरल कूलर भी कहा जाता है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि कई स्वास्थ्य समस्याओं से भी बचाने में मदद करता है. स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बेल का नियमित सेवन गर्मियों में शरीर को संतुलित रखने का एक आसान और सस्ता तरीका है. आजकल लोग बाजार में मिलने वाले कोल्ड ड्रिंक्स और शुगर से भरपूर जूस पर ज्यादा निर्भर हो गए हैं, जो शरीर को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसके मुकाबले घर पर बना बेल का शर्बत पूरी तरह नेचुरल होता है और इसमें किसी तरह के केमिकल या प्रिजर्वेटिव नहीं होते. यह शरीर को अंदर से ठंडा रखने के साथ-साथ लंबे समय तक हाइड्रेटेड भी रखता है, जिससे गर्मी का असर कम महसूस होता है. भारत सरकार के आयुष मंत्रालय के अनुसार, बेल एक ऐसा फल है जिसमें फाइबर, विटामिन C, आयरन, कैल्शियम और एंटीऑक्सीडेंट्स अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. यही वजह है कि यह गर्मियों में शरीर को कई तरह से फायदा पहुंचाता है. बेल का शर्बत पीने से प्यास जल्दी बुझती है और शरीर में पानी की कमी पूरी होती है. साथ ही यह इलेक्ट्रोलाइट बैलेंस बनाए रखने में भी मदद करता है, जिससे बार-बार होने वाली कमजोरी और चक्कर आने की समस्या कम होती है. गर्मी में ज्यादा पसीना आने से शरीर में जरूरी मिनरल्स की कमी हो जाती है, लेकिन बेल का शर्बत इस कमी को पूरा करने में सहायक होता है. पाचन तंत्र के लिए बेल का शर्बत किसी वरदान से कम नहीं है. इसमें मौजूद फाइबर पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज, गैस, अपच जैसी समस्याओं से राहत दिलाता है. अगर किसी को दस्त या डायरिया की समस्या हो, तो बेल का शर्बत बहुत फायदेमंद माना जाता है, क्योंकि यह आंतों को मजबूत करता है और पाचन प्रक्रिया को संतुलित बनाए रखता है. यह पेट की सूजन को कम करता है और खाना जल्दी पचाने में मदद करता है, जिससे पेट हल्का और आरामदायक महसूस होता है. दिल की सेहत के लिए भी बेल काफी लाभकारी माना जाता है. इसका नियमित सेवन शरीर में कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जिससे हार्ट से जुड़ी बीमारियों का खतरा कम हो सकता है. इसके अलावा, बेल में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर से टॉक्सिन बाहर निकालने में मदद करते हैं और खून को साफ रखते हैं. इसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है, जिससे स्किन ज्यादा साफ, हेल्दी और ग्लोइंग नजर आती है. महिलाओं के लिए भी बेल का शर्बत काफी फायदेमंद होता है, खासकर प्रसव के बाद. यह शरीर को ताकत देने के साथ-साथ पोषण की कमी को पूरा करता है और दूध बढ़ाने में भी मदद कर सकता है. साथ ही, यह शरीर को अंदर से ठंडा रखता है, जिससे हार्मोनल बैलेंस बेहतर बना रहता है. बेल का शर्बत बनाना भी बहुत आसान है. सबसे पहले पके हुए बेल को तोड़कर उसका गूदा निकाल लें और उसे अच्छे से मसल या पीस लें. फिर इसमें ठंडा पानी मिलाकर छान लें. इसके बाद स्वाद के अनुसार काला नमक, भुना जीरा पाउडर और थोड़ा सा गुड़ या शहद मिलाएं. चाहें तो इसमें कुछ पुदीना पत्तियां भी डाल सकते हैं, जिससे इसका स्वाद और भी ताजगी भरा हो जाता है. गर्मियों में रोज एक गिलास बेल का शर्बत पीने से शरीर दिनभर ठंडा, एनर्जेटिक और फ्रेश महसूस करता है.

न्यूयॉर्क में बनेगा ‘राजस्थान भवन’:50 करोड़ की मदद से इंडो-यूएस फ्रेंडशिप सेंटर की घोषणा; राजस्थानी भाषा के लिए उठी मांग

न्यूयॉर्क में बनेगा ‘राजस्थान भवन’:50 करोड़ की मदद से इंडो-यूएस फ्रेंडशिप सेंटर की घोषणा; राजस्थानी भाषा के लिए उठी मांग

राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) की ओर से न्यूयॉर्क में आयोजित 77वें राजस्थान दिवस और होली स्नेह मिलन समारोह में बड़ी घोषणा की गई। कार्यक्रम का आयोजन भारत के वाणिज्य दूतावास न्यूयॉर्क में किया गया। समारोह में RANA के अध्यक्ष प्रेम भंडारी ने बताया- संगठन के संस्थापक सदस्य और पूर्व अध्यक्ष के. के. मेहता और चंद्रा मेहता के मेहता फैमिली ट्रस्ट की ओर से 5 मिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब 50 करोड़ रुपए) की प्रारंभिक राशि इंडो–यूएस फ्रेंडशिप सेंटर के निर्माण के लिए दी जाएगी। यह केंद्र न्यूयॉर्क में विकसित किया जाएगा, जिसमें राजस्थान भवन, योग और आयुर्वेद केंद्र, कन्वेंशन सेंटर और वरिष्ठ नागरिकों के लिए सोशल सेंटर शामिल होंगे। इस महत्वाकांक्षी परियोजना की जिम्मेदारी भी मेहता परिवार ने प्रेम भंडारी को सौंपी है। इस पहल के पीछे एम्बेसडर बिनय के. प्रधान की महत्वपूर्ण भूमिका बताई गई, जिन्होंने पहले RANA दीप महोत्सव के दौरान इस विचार की नींव रखी थी। कार्यक्रम में प्रेम भंडारी ने राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने और राजस्थान में इसे द्वितीय भाषा का दर्जा देने की मांग भी उठाई। कोविड के दौरान भी निभाई बड़ी भूमिका कोविड महामारी के समय के. के. मेहता ने न्यूयॉर्क स्थित अपने होटल में छात्रों के लिए 100 कमरे उपलब्ध कराए थे और वंदे भारत मिशन-2 के दौरान Air India की टीम की मेजबानी भी की थी। राजस्थान रत्न सम्मान कार्यक्रम में कई प्रतिष्ठित प्रवासी राजस्थानियों को “राजस्थान रत्न” से सम्मानित किया गया। इनमें डॉ. समीन शर्मा, डॉ. नरिंदर कुकर, डॉ. राज बंसल, अशोक संचेती और जुगल किशोर लड़्डा प्रमुख हैं। साथ ही नंद टोडी को भी सम्मान दिया गया। उन्होंने हाल ही फिलाडेल्फिया में बेघर लोगों के लिए 1 मिलियन डॉलर दान किए हैं। टीम ऐड को विशेष सम्मान टीम एआईडी के संस्थापक मोहन नन्नापननी और उनकी टीम को विशेष सम्मान दिया गया। टीम ऐड ने वर्ष 2017 से अब तक 27 देशों में 5000 से अधिक पार्थिव शरीरों की स्वदेश वापसी में मदद की है। 365 दिन खुला रहेगा दूतावास प्रेम भंडारी ने न्यूयॉर्क भारतीय वाणिज्य दूतावास की 365 दिन सेवा देने की पहल की सराहना की। इससे 20 लाख से अधिक भारतीयों को लाभ मिल रहा है। इस मॉडल को अब बोस्टन में भी लागू करने की घोषणा की गई, जहां नए कौंसुल जनरल एस. रघुराम ने इसे अपनाने की बात कही। राजस्थानी भाषा के लिए उठी मांग कार्यक्रम में प्रेम भंडारी ने राजस्थानी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने और राजस्थान में इसे द्वितीय भाषा का दर्जा देने की मांग भी उठाई। इस दौरान उन्होंने जगदीश चंद्र और पवन अरोड़ा को राजस्थानी न्यूज चैनल “गणगौर” के पुनः लॉन्च के लिए बधाई दी गई। सांस्कृतिक रंग और सामाजिक पहल कार्यक्रम में फूलों की होली, सांस्कृतिक नृत्य और कवि अभिनव शुक्ला का काव्य पाठ आकर्षण का केंद्र रहा। RANA कोषाध्यक्ष नीलम मोदी ने स्वागत भाषण दिया, जबकि सचिव रवि जरगढ़ ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। जयपुर फुट कैंप की घोषणा कार्यक्रम में जयपुर फुट के नए कैंप की घोषणा भी की गई, जिसे अजय पटेल के नेतृत्व में आयोजित किया जाएगा। पिछला कैंप पूर्व विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ था।

अनूपपुर में कांग्रेस का महंगाई, ईंधन कमी पर प्रदर्शन:हाथ ठेले पर बाइक-सिलेंडर रखकर जताया विरोध, कहा- गलत नीतियों से जनता परेशान

अनूपपुर में कांग्रेस का महंगाई, ईंधन कमी पर प्रदर्शन:हाथ ठेले पर बाइक-सिलेंडर रखकर जताया विरोध, कहा- गलत नीतियों से जनता परेशान

अनूपपुर जिला मुख्यालय में सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी ने पेट्रोल-डीजल की कमी और बढ़ती महंगाई के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष गुड्डू चौहान की अगुवाई में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इंदिरा तिराहे से स्टेशन चौक तक रैली निकाली। प्रदर्शन के दौरान अनोखा नजारा देखने को मिला, जब कार्यकर्ताओं ने हाथ ठेले पर मोटरसाइकिल और गैस सिलेंडर रखकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों के प्रति अपना गुस्सा जाहिर किया। कांग्रेस कार्यकर्ताओं का कहना था कि सरकार की गलत नीतियों की वजह से जनता बेहाल है। महंगाई और किल्लत से जनता परेशान जिला अध्यक्ष गुड्डू चौहान ने कहा कि पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ रहे हैं और इनकी कमी ने लोगों की मुसीबतें और बढ़ा दी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि महंगाई सातवें आसमान पर है, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग के लिए घर चलाना मुश्किल हो गया है। बिजली के बढ़ते बिलों पर भी घेरा कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केवल पेट्रोल-डीजल ही नहीं, बल्कि बिजली की बढ़ती कीमतों का भी विरोध किया। उनका कहना था कि एक तरफ तो लोग तेल और गैस के दामों से परेशान हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार बिजली महंगी करके जनता पर दोहरी मार मार रही है। तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन रैली के आखिर में स्टेशन चौक पर कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा गया। इसमें मांग की गई कि पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई ठीक की जाए और बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाकर जनता को राहत दी जाए। इस मौके पर पूर्व विधायक मनोज अग्रवाल समेत कांग्रेस के कई बड़े नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।