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तमिल में ‘थलापति’ की एंट्री! विजय का रोडशो, चकित की भीड़- क्या बन रहे हैं अगला बड़ा चेहरा?

तमिल में 'थलापति' की एंट्री! विजय का रोडशो, चकित की भीड़- क्या बन रहे हैं अगला बड़ा चेहरा?

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में अब फिल्मी स्टार से नेता बने विजय के प्रवेश द्वार ने यूनिट को पूरी तरह से बदल दिया है। तमिलगा वेट्री कडगम (टीवीके) के प्रमुख विजय ने सोमवार (30) को नामांकित नामांकन करने के बाद नामांकन रोड शो किया, जिसमें विपक्ष पर तूफान जनसैलाब राज्य की राजनीति में नया अध्याय लिखने का साफ संकेत दे रहा था। विजय इस बार पेरंबूर और त्रिची पूर्व, दो पंचायत से चुनावी लड़ाई चल रही हैं। यह निर्णय आपके लिए एक बड़ा राजनीतिक संकेत है, क्योंकि दो विधानसभा क्षेत्रों में आम तौर पर बड़े नेताओं की रणनीति मानी जाती है। इससे यह भी संदेश देने की कोशिश की जाती है कि विजय सिर्फ चुनाव नहीं लड़ी जा रही है, बल्कि सत्य की ओर इशारा किया जा रहा है। ‘भविष्य के नेता उभर रहे हैं विजय प्राप्त कर रहे हैं’ टीवीके नेता केई सेनगोट्टैयन ने जीत को लेकर बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा, ‘विजय ऐसे भविष्य के नेता के रूप में उभर रहे हैं जो तमिल का नेतृत्व करने में सक्षम हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि विजय की गति तेजी से बढ़ती जा रही है और लोग उन्हें एक मजबूत विकल्प के रूप में देख रहे हैं। उनका कहना है कि कोई भी ताकत जनता के फैसले पर रोक नहीं लगा सकती और 2026 में बदलाव तय है। हर सीट पर उम्मीदवार, बड़ा दांव टीवीके ने इस बार तमिल की सभी 234 असेंबली पार्टियाँ पर प्रतियोगी निकले हैं, साथ ही पुडुचेरी की 30 असेंबली पर भी पार्टियाँ खेली हैं। ऐसा दावा किया गया है कि पार्टी का कोई सीमित उपयोग नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में मजबूत उपस्थिति का इरादा मैदान में है। सेनगोट्टैयन का दावा है कि टीवीके ही क्लिंजली और रेज़ॉलूशन दे सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी महिलाओं की सुरक्षा और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर फोकस कर रही है जो चुनाव में स्थिर साबित हो सकते हैं। #घड़ी | तमिलनाडु चुनाव 2026 | चेन्नई: टीवीके प्रमुख विजय ने अपना नामांकन दाखिल किया. वह पेरम्बूर और त्रिची पूर्व निर्वाचन क्षेत्रों से राज्य विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। pic.twitter.com/wLA1aXHrtt – एएनआई (@ANI) 30 मार्च 2026 जनता में बदलाव की चाहत? राज्य में स्थिर राजनीतिक सूत्रों के बीच एक बड़ा सवाल उभर कर सामने आ रहा है कि जनता क्या बदलाव चाहती है? सेनगोट्टैयन के मुताबिक लोग अब नई सरकार और नए नेतृत्व की उम्मीद कर रहे हैं। रोड शो में मैराथन भीड़ और युवाओं का उत्साह इस दावे को कुछ हद तक प्रदर्शित भी करता है। विशेष रूप से शहरी क्षेत्र में विजय की अपील तेजी से बढ़ती दिख रही है। #घड़ी | तमिलनाडु चुनाव 2026 | चेन्नई: टीवीके प्रमुख विजय ने नामांकन दाखिल करने के बाद रोड शो किया। वह पेरम्बूर और त्रिची पूर्व निर्वाचन क्षेत्रों से राज्य विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं। (वीडियो स्रोत: टीवीके) pic.twitter.com/SMh9nmfix7 – एएनआई (@ANI) 30 मार्च 2026 दो प्राथमिक से चुनावी रणनीति या मजबूरी? विजय के दो प्रिवेंशन से चुनावी लड़ाई पर भी चर्चा तेज है। इस पर सेनगोट्टैयन ने कहा, ‘निवासियों की दो छुट्टियों से जुड़ी आम बात है। यहां तक ​​कि पूर्व मुख्यमंत्री इंजीनियर ने भी दो बार चुनावी लड़ाई लड़ी थी।’ यह बयान साफ ​​करता है कि पार्टी इसे एक सामान्य राजनीतिक रणनीति के रूप में पेश कर रही है न कि किसी असमंजस के तौर पर। प्लगइन का गेमप्ले क्या बदलें? तमिल की राजनीति अब तक डीएमके और एआईएडीएमके के गठबंधन-घूमती रही है, लेकिन विजय के प्रवेश ने इस पारंपरिक पहलू को चुनौती दी है। अगर टीवीके को युवा और पहली बार वोट देने वाले कोलोराडो का समर्थन कर सकते हैं तो यह चुनावी त्रिकोणीय चर्च में बदल गया है जो कि दर्शक को पूरी तरह से मजबूत बनाता है। 23 अप्रैल को होने वाली वोटिंग और 4 मई को आने वाले नतीजे तय करेंगे कि विजय का यह राजनीतिक दांव सफल होता है। हालाँकि इतना तो तय है कि इस बार के चुनाव में सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि नए नेतृत्व का औचित्य भी है। ये भी पढ़ें: समझाया: बिहार आसान नहीं, बंगाल से जीतना, 5% वोट से पलटना पासा! बीजेपी ने 6 सांसदों-विधायकों को हराया पटखनी

एक फल, दो बड़े फायदे! घर में ही मिल रहा ‘नेचुरल मेडिसिन’, रखे शुगर और ब्लड प्रेशर पर नजर

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Kathal Khane Ke Fayde: गर्मी भरी धूप में अक्सर लोग ठंडा पानी, कोकोनट पानी या अचार की ओर रुख करते हैं, पर एक मौसमी फल है जो न सिर्फ़ ज़ायका बना देता है बल्कि स्वास्थ्य के कई पहलुओं को भी सुदृढ़ करता है. लोकल 18 के साथ बातचीत में डॉक्टर नागेंद्र नारायण शर्मा ने कटहल के पोषण‑गुणों को विस्तार से बताया. पोषक तत्वों की भरमारडॉक्टर के अनुसार कटहल में कार्बोहाइड्रेट, डाइटरी फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक फैट का संतुलित मिश्रण मिलता है.साथ ही इसमें फ्रुक्टोज, ग्लूकोज़, सुक्रोज, कैल्शियम, आयरन, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, जिंक, कॉपर, मैंगनीज, पोटैशियम और सोडियम की पर्याप्त मात्रा मौजूद है.विटामिन सी के साथ राइबोफ्लेविन, नियासिन, विटामिन बी‑6 जैसे जलवायु‑सुरक्षित एंटीऑक्सीडेंट भी इस फल में भरपूर हैं. गर्मी में हाइड्रेशनकटहल के अंदर पानी की मात्रा होती है, इसलिए गर्मियों में इसका सेवन शरीर को हाइड्रेट रखता है और पसीने से खोए हुए इलेक्ट्रोलाइट्स को पुनः भरता है.साथ ही फाइबर‑समृद्ध होने के कारण यह पाचन को सुगम बनाता, पेट‑भरे रहने की भावना देता और डाइट में शामिल करने पर दीर्घकालिक ऊर्जा के स्रोत के रूप में काम करता है. इम्युनिटी बूस्ट और रोग‑रोधी गुणविटामिन‑सी की उच्च मात्रा शरीर की प्रतिरक्षा क्षमता को बढ़ाती है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट्स स्ट्रेस‑के कारण उत्पन्न मुक्त कणों को निष्क्रिय कर, कोशिकाओं को नष्ट होने से बचाते हैं.डॉक्टर ने आगे बताया की कटहल में एंटी‑माइक्रोबियल, एंटी‑फंगल और एंटी‑इन्फ्लेमेटरी गुण होते हैं जो घाव भरने, सूजन घटाने और संक्रमण रोकने में मददगार हैं. कटहल को नियमित आहार में शामिल करने से न केवल स्वाद का आनंद मिलता है, बल्कि यह शरीर को फिट, हाइड्रेटेड और रोग‑प्रतिरोधी बनाता है.इसलिए, अगली बार जब बाज़ार की भीड़ में कटहल दिखे, तो उसे सिर्फ़ फलों की भीड़ नहीं, बल्कि सेहत‑सुरक्षा का खजाना समझकर अपनी रसोई में लाए.

ईरान-इजरायल वॉर के बीच किंग का शूटिंग शेड्यूल बिगड़ा:दुबई में शूट होना था शाहरुख, सुहाना और अनिल का एक्शन सीक्वेंस, सुरक्षा कारणों से मुंबई में बनेगा सेट

ईरान-इजरायल वॉर के बीच किंग का शूटिंग शेड्यूल बिगड़ा:दुबई में शूट होना था शाहरुख, सुहाना और अनिल का एक्शन सीक्वेंस, सुरक्षा कारणों से मुंबई में बनेगा सेट

ईरान-इजरायल वॉर के बढ़ते तनाव का असर शाहरुख खान की फिल्म किंग पर पड़ा है। एक बड़ा एक्शन सीक्वेंस दुबई के रेगिस्तान में शाहरुख खान, सुहाना खान और अनिल कपूर के साथ शूट होना था, लेकिन सुरक्षा कारणों से शेड्यूल रद्द कर दिया गया। अब मुंबई में रेगिस्तान का सेट बनाया जा रहा है। मिड-डे की रिपोर्ट के अनुसार, किंग की दुबई शूटिंग का शेड्यूल महीनों पहले तय था और सभी परमिशन व फॉर्मेलिटीज पूरी हो चुकी थीं। शूटिंग 9 अप्रैल से एक हफ्ते के लिए शुरू होने वाली थी, लेकिन सुरक्षा को देखते हुए डायरेक्टर ने इसे रद्द कर दिया। रिपोर्ट के अनुसार, दुबई के सीन अब मुंबई के विले पार्ले स्थित स्टूडियो में शूट होंगे, जहां प्रोडक्शन टीम ने रेगिस्तान का वैसा ही सेट तैयार किया है जैसा डायरेक्टर सिद्धार्थ आनंद चाहते थे। स्टूडियो शूट से एक्शन और लाइटिंग पर बेहतर फोकस संभव होगा। किंग 24 दिसंबर 2026 को रिलीज होगी सिद्धार्थ आनंद के निर्देशन में बन रही किंग 24 दिसंबर 2026 को क्रिसमस पर रिलीज होगी। फिल्म की शूटिंग मई 2025 से शुरू हुई और बड़ा हिस्सा मुंबई के महबूब स्टूडियो में शूट हुआ। जेल सीक्वेंस 200 स्टंटमैन के साथ फिल्माया गया है। जुलाई 2025 में विले पार्ले की गोल्डन टोबेको फैक्ट्री में एक्शन सीक्वेंस के दौरान शाहरुख खान घायल हुए थे, जिसके बाद वह इलाज के लिए यूनाइटेड स्टेट गए और 6 हफ्ते शूटिंग रुकी रही। एक एक्शन सीन पर 50 करोड़ रुपए खर्च हुए फिल्म में शाहरुख खान, सुहाना खान, अनिल कपूर के साथ अभिषेक बच्चन और दीपिका पादुकोण भी अहम भूमिकाओं में हैं। अभिषेक बच्चन नेगेटिव रोल में हैं। शाहरुख और अभिषेक के बीच बड़े एक्शन सीक्वेंस की यूरोप में शूटिंग पर 50 करोड़ रुपए खर्च हुए हैं।

रुपया 95.58 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर:इस वित्त वर्ष डॉलर के मुकाबले 11% गिरा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर

रुपया 95.58 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर:इस वित्त वर्ष डॉलर के मुकाबले 11% गिरा, कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर

भारतीय रुपया आज यानी 30 मार्च को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 88 पैसे कमजोर होकर 95.22 प्रति डॉलर के स्तर पर आ गया है। अमेरिका-इजाराइल की ईरान से चल रही जंग और कच्चे तेल की कीमतों में आए उछाल की वजह से रुपए में लगातार तीसरे दिन गिरावट आई है। एक महीने में रुपया करीब 4% गिरा, जबकि FY 2025-26 में 10% से ज्यादा टूट चुका है। यह पिछले 14 सालों की सबसे बड़ी गिरावट है। विदेशी ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन के मुताबिक, ईरान युद्ध जारी रहा तो रुपया 98 तक जा सकता है। हालांकि, रिजर्व बैंक (RBI) ने बैंकों के फॉरेक्स पोजीशन लिमिट को सख्त कर रुपये को संभालने की कोशिश की, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली के चलते बाजार में इसका असर बहुत कम समय के लिए दिखा।

सिवनी में फ्लाई ऐश से भरा डंपर पलटा:नेशनल हाईवे पर हादसा; चालक-परिचालक सुरक्षित बचे

सिवनी में फ्लाई ऐश से भरा डंपर पलटा:नेशनल हाईवे पर हादसा; चालक-परिचालक सुरक्षित बचे

सिवनी जिले के लखनादौन थाना क्षेत्र में सोमवार दोपहर एक बड़ा सड़क हादसा टल गया। नेशनल हाईवे-34 पर बंजर गांव के पास फ्लाई ऐश (राख) से भरा एक डंपर अनियंत्रित होकर पलट गया। इस घटना में डंपर चालक और परिचालक सुरक्षित बच गए, जिससे कोई जनहानि नहीं हुई। यह घटना सोमवार दोपहर करीब 12 बजे हुई। फ्लाई ऐश से लदा डंपर हाईवे-34 से गुजर रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वाहन तेज गति में था। बंजर गांव के पास पहुंचते ही चालक ने वाहन पर से नियंत्रण खो दिया, जिसके परिणामस्वरूप डंपर सड़क किनारे पलट गया। डंपर पलटने की तेज आवाज सुनकर ग्रामीण और राहगीर तुरंत मौके पर पहुंचे। ये थे ट्रक में सवार हादसे के बाद घटनास्थल पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी मच गई। शुरुआत में चालक और परिचालक के घायल होने की आशंका थी, लेकिन वे दोनों सुरक्षित बाहर निकल आए। चालक की पहचान सुखदेव मर्सकोले (38 वर्ष) और परिचालक की पहचान अमन यादव (29 वर्ष) के रूप में हुई है। स्थानीय लोगों ने राहत कार्यों में सहयोग किया। दुर्घटना की सूचना मिलने पर लखनादौन पुलिस मौके पर पहुंची और यातायात व्यवस्था को नियंत्रित किया। डंपर के सड़क किनारे पलटने से हाईवे पर कुछ देर के लिए आवागमन बाधित हुआ। बाद में क्रेन की मदद से डंपर को हटाया गया और यातायात सामान्य कर दिया गया। दुर्घटना के कारणों का पता लगा रहे हैं लखनादौन थाना प्रभारी केपी धुर्वे ने बताया कि डंपर पलटने की सूचना मिली थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है और दुर्घटना के कारणों का पता लगाया जा रहा है। राहत की बात यह रही कि हादसे के समय डंपर के आसपास कोई अन्य वाहन या राहगीर मौजूद नहीं था। यदि ऐसा होता तो दुर्घटना अधिक गंभीर हो सकती थी।

सूजी पनीर रोल: शाम के बाजार में घर पर तैयार सूजी वाले पनीर रोल, बच्चों से लेकर तक बड़े भूल जाएंगे का स्वाद; नोट करें रेसिपी

सूजी पनीर रोल: शाम के बाजार में घर पर तैयार सूजी वाले पनीर रोल, बच्चों से लेकर तक बड़े भूल जाएंगे का स्वाद; नोट करें रेसिपी

30 मार्च 2026 को 15:07 IST पर अपडेट किया गया सूजी रोल रेसिपी: सूजी पनीर रोल एक अनोखा स्वाद है, जो घर पर आसानी से बन जाता है और स्वाद में बिल्कुल बाजार जैसा लगता है। आप इसे एक बार खुद ही बना लेंगे, तो अगली बार आप इसे आसानी से बना लेंगे। (टैग अनुवाद करने के लिए)सूजी पनीर रोल रेसिपी(टी)पनीर रोल(टी)सूजी पनीर रोल(टी)रोल रेसिपी(टी)सूजी पनीर(टी)सूजी रोल(टी)सूजी रोल

जिम में जाकर आपको भी लगता है डर? आखिर इसकी क्या है वजह, जिम एंजायटी से कैसे पाएं छुटकारा

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Last Updated:March 30, 2026, 14:50 IST Gym Anxiety Causes: जिम जॉइन करने वाले अधिकतर लोग शुरुआत में एंजायटी महसूस करते हैं. ऐसा अक्सर नए माहौल, मशीनों की जानकारी न होने या दूसरों के सामने असहज महसूस करने के कारण होता है. इससे निपटने के लिए वर्कआउट की पहले से योजना बनाना, ट्रेनर की मदद लेना और छोटे लक्ष्यों से शुरुआत करना प्रभावी साबित होता है. अगर जिम जाना बहुत मुश्किल लगे, तो घर पर वर्कआउट या आउटडोर एक्टिविटी जैसे विकल्प भी अपनाए जा सकते हैं. जिम में एंजायटी से बचने के लिए वर्कआउट के दौरान ट्रेनर की मदद लेनी चाहिए. Tips To Get Rid of Gym Anxiety: फिटनेस को लेकर लोगों में गजब का क्रेज देखने को मिल रहा है. बड़ी संख्या में लोग सुबह-शाम जिम में जाकर वर्कआउट कर रहे हैं. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में फिट रहना हर किसी की जरूरत बन गया है. कई लोग जिम जॉइन कर लेते हैं, लेकिन वहां वर्कआउट करने में अनकंफर्टेबल महसूस करते हैं. तमाम लोग जिम में एंजायटी से जूझते हैं और उन्हें अजीब सा डर लगने लगता है. क्या आपने कभी जिम के दरवाजे पर खड़े होकर घबराहट महसूस की है या भारी मशीनों और वहां मौजूद फिट लोगों को देखकर खुद को कमतर आंका है? अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं. यह एक कॉमन समस्या है और कुछ आसान तरीकों से इससे छुटकारा भी पाया जा सकता है. सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक एक्सरसाइज न केवल शारीरिक स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है, बल्कि मानसिक सुकून के लिए भी जरूरी है. इसलिए जिम से जुड़े डर को पहचानना और उससे निपटने के तरीके सीखना बेहद जरूरी है. जिम में घबराहट होने के पीछे कई कारण हो सकते हैं. अगर आप पहली बार जिम जा रहे हैं, तो अनजान मशीनों और माहौल को देखकर घबराहट होना स्वाभाविक है. इसे सिचुएशनल एंजायटी कहते हैं. पुराने जिम को छोड़कर नए स्थान पर जाने पर वहां के रास्तों, लॉकर रूम और मशीनों की जगह का पता न होना तनाव पैदा कर सकता है. कई बार हम जिम में कोई मशीन इस्तेमाल करना चाहते हैं, लेकिन उसकी सेटिंग समझ नहीं आती. दूसरों के सामने मजाक बनने के डर से हम अक्सर उस मशीन का उपयोग ही छोड़ देते हैं. पब्लिक लॉकर रूम में भी असहजता महसूस होती है. कपड़ों को दूसरों के सामने बदलना कई लोगों के लिए काफी असहज और शर्मिंदगी भरा अनुभव हो सकता है. इसके अलावा वजन उठाना या कोई नया वर्कआउट शुरू करते समय यह डर सताता है कि क्या मैं सही तरीके से वर्कआउट कर रहा हूं. ये सभी बातें एंजायटी पैदा कर देती हैं. कई लोग एंजायटी के कारण जिम जाना छोड़ देते हैं और फिटनेस रूटीन बिगाड़ लेते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. जिम में एंजायटी और डर को दूर किया जा सकता है. इसके लिए जिम में जाकर चीजों से बारे में पूरी जानकारी जुटाएं. पहले जिम की वेबसाइट देखें, वहां का दौरा करें और स्टाफ से बात करें. माहौल से परिचित होने पर डर कम हो जाता है. पहले ही दिन भारी वर्कआउट का लक्ष्य न रखें. केवल 15 मिनट कार्डियो या स्ट्रेचिंग करें और घर लौट आएं. धीरे-धीरे अपना समय बढ़ाएं. कम से कम एक सेशन के लिए पर्सनल ट्रेनर हायर करें. वे आपको मशीनों का सही इस्तेमाल और सही पोस्चर सिखाएंगे, जिससे आपका आत्मविश्वास बढ़ेगा. एक अनुभवी दोस्त या परिवार के सदस्य के साथ जिम जाना आपको मानसिक सहारा देता है और आप अकेलेपन या डर को भूलकर वर्कआउट पर ध्यान दे पाते हैं. अगर आप सामाजिक रूप से घबराते हैं, तो ग्रुप क्लास आपके लिए अच्छी हो सकती है. वहां इंस्ट्रक्टर को फॉलो करना आसान होता है और आप कम्यूनिटी का हिस्सा महसूस करते हैं. इसके अलावा आप जिम जाने से पहले ही तय कर लें कि आपको कौन सी एक्सरसाइज किस क्रम में करनी है. इससे आप वहां पहुंचकर भ्रमित नहीं होंगे. घबराहट होने पर गहरी सांस लें. अपनी नकारात्मक सोच को बदलें. यह सोचने के बजाय कि लोग मुझे देख रहे हैं, यह सोचें कि हर कोई अपनी एक्सरसाइज में व्यस्त है और मैं यहां अपनी सेहत के लिए आया हूं. अगर आपकी एंजायटी बहुत ज्यादा है और जिम जाने से डर लगता है, तो आप कुछ अन्य विकल्पों को चुन सकते हैं. यूट्यूब या फिटनेस ऐप्स की मदद से बिना किसी उपकरण के भी घर पर एक्सरसाइज की जा सकती है. पार्क में टहलना, दौड़ना, साइकिल चलाना या तैराकी करना भी बेहतरीन विकल्प हैं. बड़े और भीड़भाड़ वाले जिम के बजाय किसी छोटे और शांत जिम को चुनें. याद रखें जिम में मौजूद हर व्यक्ति कभी न कभी बिगिनर था. आपकी सेहत सबसे ऊपर है और आपको वहां होने का पूरा हक है. अगर इन सब कोशिशों के बाद भी आपकी घबराहट कम नहीं हो रही है और यह आपके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित कर रही है, तो किसी थेरेपिस्ट या विशेषज्ञ से सलाह लेना एक बेहतर है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 30, 2026, 14:50 IST

नीतीश कुमार के जाने के बाद बिहार में क्या बदलाव? 5 बड़े राजनीतिक बदलावों की व्याख्या | व्याख्याकार समाचार

RBSE 12th Result 2026 Date Live: Scorecards soon at rajeduboard.rajasthan.gov.in.

आखरी अपडेट:मार्च 30, 2026, 14:46 IST भाजपा के संभावित अधिग्रहण से लेकर जद (यू) के अनिश्चित भविष्य और जातिगत समीकरणों में मंथन तक, नीतीश कुमार के बाहर निकलने के बाद बिहार में बड़े राजनीतिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। जदयू सुप्रीमो नीतीश कुमार (फाइल तस्वीर/पीटीआई) बिहार एक निर्णायक राजनीतिक परिवर्तन में प्रवेश कर रहा है। दो दशकों से अधिक समय तक राज्य में एक प्रमुख शक्ति रहे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के राज्य विधानमंडल से हटने और राज्यसभा में जाने के साथ, यह बदलाव सिर्फ एक नेता की भूमिका बदलने के बारे में नहीं है। यह उस युग के संभावित अंत का संकेत देता है जिसने बिहार की राजनीतिक संरचना, सामाजिक गठबंधन और शासन मॉडल को परिभाषित किया। कुमार का यह कदम, लंबे समय से चली आ रही संसदीय आकांक्षा की पूर्ति के रूप में माना जाता है, मुख्यमंत्री के रूप में रिकॉर्ड दसवीं बार शपथ लेने के चार महीने बाद आया है। एनडीए द्वारा समर्थित और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा समर्थित, राष्ट्रीय राजनीति में उनका परिवर्तन अपने पीछे एक शून्य छोड़ गया है जिससे बिहार के राजनीतिक और प्रशासनिक परिदृश्य में दूरगामी बदलाव आने की संभावना है। इसके बाद बिहार में पांच बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 1. बिहार नीतीश-केंद्रित गठबंधन की राजनीति से आगे बढ़कर सीधे भाजपा के प्रभुत्व की ओर बढ़ सकता है वर्षों से, बिहार की राजनीति एक अनोखी व्यवस्था के तहत काम करती रही है, जहां नीतीश कुमार केंद्रीय व्यक्ति बने रहे, तब भी जब उनकी पार्टी, जेडी (यू) अकेली सबसे बड़ी ताकत नहीं थी। वह संतुलन अब बदलने वाला प्रतीत होता है। कुमार के हटने से, भाजपा – जो मजबूत चुनावी प्रदर्शन के बावजूद बिहार में स्वतंत्र रूप से हावी होने के लिए लंबे समय से संघर्ष कर रही है – अब बढ़त लेने की स्थिति में है। पार्टी, जिसके पास विधानसभा में 89 सीटें हैं, से उम्मीद की जाती है कि वह धीरे-धीरे सरकार पर अधिक नियंत्रण हासिल कर लेगी, संभावित रूप से अपने ही खेमे से एक मुख्यमंत्री भी स्थापित कर सकती है। पिछले दो विधानसभा चुनावों में भी, भाजपा सीटों के मामले में मजबूत होकर उभरी थी, लेकिन शासन की धुरी के रूप में कुमार को विस्थापित नहीं कर सकी। उनके बाहर निकलने से अंततः हिंदी पट्टी में भाजपा के लिए “सीमांत” राज्य के रूप में बिहार की स्थिति समाप्त हो सकती है, जिससे उसे राजनीति और शासन दोनों को पहले की तुलना में अधिक सीधे आकार देने की अनुमति मिल जाएगी। 2. बिहार की त्रिकोणीय राजनीति और अधिक द्विध्रुवीय दिखने लग सकती है एक और तात्कालिक बदलाव यह हो सकता है कि बिहार की राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को कैसे संरचित और समझा जाता है। वर्षों तक, राज्य की राजनीति तीन प्रमुख ध्रुवों – भाजपा, जद (यू) और राष्ट्रीय जनता दल – के इर्द-गिर्द घूमती रही, जहां किन्हीं दो के बीच गठबंधन प्रभावी रूप से तीसरे को घेर सकता था। नीतीश कुमार की उपस्थिति ने सुनिश्चित किया कि यह त्रिकोणीय संतुलन बरकरार रहे. उनके राज्य की सक्रिय राजनीति से बाहर जाने से वह ढांचा कमजोर होना शुरू हो सकता है। यह मुकाबला अब सीधे भाजपा बनाम राजद की लड़ाई के रूप में सामने आ सकता है। प्रकाशिकी में यह बदलाव बिहार में चुनावी प्रतियोगिताओं को फिर से परिभाषित कर सकता है। हालांकि राजद को अपने पारंपरिक मुस्लिम-यादव आधार से आगे विस्तार करने का अवसर मिल सकता है, लेकिन ऐसा करने की उसकी क्षमता अनिश्चित बनी हुई है। साथ ही, बीजेपी को शुरुआती बढ़त मिल सकती है, खासकर विपक्ष के हालिया चुनावी प्रदर्शन को देखते हुए। 3. जद(यू) अपने सबसे नाजुक दौर में प्रवेश कर सकती है शायद नीतीश कुमार के बाहर जाने का सबसे तात्कालिक प्रभाव उनकी अपनी पार्टी के भीतर महसूस किया जाएगा। 2003 में अपने गठन के बाद से कुमार के नेतृत्व में बनी और टिकी जद (यू) को अब एक संरचनात्मक चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि विधानसभा में इसके 85 विधायक और लोकसभा में 12 सांसद हैं, लेकिन इसके पास संगठन को एकजुट रखने के लिए तुलनीय राज्यव्यापी अपील वाले नेता का अभाव है। इससे पार्टी के भविष्य पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. एक केंद्रीय व्यक्ति के बिना, जो जाति समूहों और क्षेत्रों में वोट-प्राप्तकर्ता के रूप में कार्य कर सकता है, जद (यू) दल-बदल और विभाजन सहित आंतरिक अस्थिरता के प्रति संवेदनशील हो सकता है। भाजपा को अपने पदचिह्न का विस्तार करने की उम्मीद के साथ, कुमार के बाहर निकलने से पार्टी के भीतर राजनीतिक क्षरण की प्रक्रिया तेज हो सकती है। उस अर्थ में, यह परिवर्तन न केवल नेतृत्व परिवर्तन का प्रतीक हो सकता है, बल्कि उस पार्टी के लिए और अधिक नाजुक चरण की शुरुआत हो सकती है जो दो दशकों से अधिक समय से बिहार की राजनीति के केंद्र में रही है। 4. जातीय समीकरण और नीतीश का सामाजिक गठबंधन फिर से बन सकता है पार्टी संरचनाओं से परे, सबसे परिणामी परिवर्तनों में से एक बिहार के सामाजिक और चुनावी अंकगणित में सामने आ सकता है। नीतीश कुमार की राजनीतिक ताकत सावधानी से बनाए गए गठबंधन पर टिकी थी जिसमें अत्यंत पिछड़ा वर्ग (जनसंख्या का लगभग एक चौथाई), कुर्मी-कोइरी या लव-कुश मतदाता, अन्य पिछड़ा वर्ग के वर्ग और महिला मतदाताओं का एक बड़ा आधार शामिल था। इस संयोजन ने जद (यू) को राजनीतिक रूप से निर्णायक बने रहने की अनुमति दी, तब भी जब वह सबसे बड़ी पार्टी नहीं थी। महत्वपूर्ण रूप से, जबकि उत्तर और मध्य भारत के अधिकांश ईबीसी प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के तहत भाजपा की ओर स्थानांतरित हो गए, बिहार एक अपवाद रहा जहां कुमार ने इन समूहों पर प्रभाव बनाए रखा। कुमार के पीछे हटने के साथ, यह सामाजिक गठबंधन अब मुकाबले के लिए तैयार है। भाजपा द्वारा इन क्षेत्रों में अपनी पहुंच बढ़ाने की संभावना है, जबकि राजद महिलाओं, महादलितों और ईबीसी सहित कुमार के मतदाता आधार के वर्गों को लक्षित करके मुसलमानों और यादवों के बीच अपने पारंपरिक समर्थन से परे अपना आधार बढ़ाने का प्रयास कर सकता है। इन समूहों का पुनर्गठन आने वाले वर्षों में बिहार के चुनावी गणित को महत्वपूर्ण रूप से बदल सकता है। 5. एक नई नेतृत्व प्रतियोगिता बिहार की राजनीति को नया

39 डिग्री में तपा रायसेन, सांची स्तूप पर सन्नाटा:तेज गर्मी से पर्यटकों की संख्या घटी; दोपहर में परिसर लगभग खाली, कारोबार पर असर

39 डिग्री में तपा रायसेन, सांची स्तूप पर सन्नाटा:तेज गर्मी से पर्यटकों की संख्या घटी; दोपहर में परिसर लगभग खाली, कारोबार पर असर

रायसेन जिले में इस सीजन में पहली बार दिन का अधिकतम तापमान 39 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। भीषण गर्मी के कारण लोगों की दिनचर्या प्रभावित हुई है। दोपहर के समय शहर की सड़कें सूनी नजर आईं, वहीं विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सांची स्तूप पर भी सन्नाटा पसरा रहा। तापमान 39 डिग्री के पार पहुंचते ही सांची स्तूप पर पर्यटकों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। कुछ दिन पहले तक जहां हजारों की संख्या में सैलानी पहुंच रहे थे, वहीं अब यह संख्या बेहद कम रह गई है। खासतौर पर दोपहर के समय स्तूप परिसर लगभग खाली नजर आता है। छाते और छांव का सहारा ले रहे पर्यटक जो इक्का-दुक्का पर्यटक यहां पहुंच रहे हैं, वे तेज धूप और गर्म हवाओं से बचने के लिए छाते का उपयोग कर रहे हैं। पर्यटक छांव तलाशते हुए और खुद को पूरी तरह ढंककर गर्मी से बचाव करते दिखाई दे रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार, सर्दियों में सांची में रोजाना 3 से 4 हजार पर्यटक पहुंचते थे, जबकि सामान्य दिनों में यह संख्या करीब 2 हजार रहती है। जनवरी में 30,162 भारतीय और 415 विदेशी पर्यटक आए थे। फरवरी में यह संख्या घटकर 24,436 भारतीय और 541 विदेशी पर्यटक रह गई। पर्यटन कारोबार पर भी असर तेज गर्मी और चिलचिलाती धूप ने सांची घूमने के उत्साह को कम कर दिया है। इसका सीधा असर स्थानीय पर्यटन उद्योग और छोटे कारोबारियों पर पड़ रहा है। होटल, गाइड और अन्य सेवाओं से जुड़े लोगों की आमदनी प्रभावित हो रही है।

इंदौर में टेलीग्राम रेटिंग के नाम पर ठगी:होटल की फाइव स्टार रेंटिग करने के लिए कमीशन के नाम पर 3.12 लाख ऐंठे

इंदौर में टेलीग्राम रेटिंग के नाम पर ठगी:होटल की फाइव स्टार रेंटिग करने के लिए कमीशन के नाम पर 3.12 लाख ऐंठे

शहर में ऑनलाइन ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। लसूड़िया क्षेत्र में टेलीग्राम के जरिए होटल और प्रॉपर्टी को 5 स्टार रेटिंग देने के नाम पर एक युवक से लाखों रुपए की ठगी कर ली गई। मामला साइबर सेल तक पहुंच गया है और जांच जारी है। लसूड़िया पुलिस के मुताबिक पिंक सिटी निवासी विनय कुमार को 23 नवंबर 2025 को बजाज फिनसर्व कंपनी के नाम से मैसेज मिला। इसमें रोजाना रेटिंग देने पर कमीशन देने का लालच दिया गया। शुरुआत में छोटे अमाउंट डलवाए गए और फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम जमा करवाई गई। इंसेंटिव का झांसा, बढ़ती गई रकम आरोपियों ने पहले करीब 1.62 लाख रुपए खाते में डलवाए। इसके बाद इंसेंटिव का लालच देकर और पैसे मांगते रहे। प्रीति नाम की महिला ने 1 लाख रुपए और डालने पर पूरा पैसा इंसेंटिव के साथ लौटाने की बात कही। शक हुआ तो बैंक और साइबर सेल पहुंचा मामला शक होने पर विनय ने एचडीएफसी बैंक में कॉल कर ट्रांजेक्शन रुकवाने की कोशिश की और साइबर सेल में शिकायत दर्ज कराई। पीड़ित के मुताबिक वह अब तक करीब 3 लाख 12 हजार रुपए आरोपियों को दे चुका है। बाद में आरोपियों ने उसे व्हाट्सएप और टेलीग्राम पर ब्लॉक कर दिया। युवती से 19 लाख की ठगी, जान-पहचान का फायदा उठाया एक अन्य मामले में युवती के साथ करीब 19 लाख रुपए की ठगी सामने आई है। पुलिस के मुताबिक पारुल नाम की युवती ने शिकायत दर्ज कराई है कि शुभम गुप्ता नाम के व्यक्ति ने कई ट्रांजेक्शन के जरिए उसके खाते से करीब 18.81 लाख रुपए ट्रांसफर कर लिए। इस मामले में भी साइबर सेल ने जांच शुरू कर दी है और एफआईआर दर्ज कर ली गई है।