23 देशों में फैला कोविड का नया वेरिएंट सिकाडा, इस पर वैक्सीन भी बेअसर ! क्या आपको भी इसका खतरा?

Last Updated:March 30, 2026, 17:46 IST BA.3.2 Omicron Subvariant: अमेरिका के बाद कोरोना का नया वेरिएंट BA.3.2 कई अन्य देशों तक फैल गया है. अब तक 23 देशों में इस वेरिएंट के मरीज मिले हैं. एक्सपर्ट्स ने इसे सिकाडा नाम दिया है और यह वेरिएंट बेहद तेजी से फैलता है. इसमें 70 से ज्यादा म्यूटेशन पाए गए हैं, जिसकी वजह से यह कोरोना की मौजूदा वैक्सीन को चकमा दे सकता है. कोविड का नया वेरिएंट सिकाडा तेजी से फैल रहा है. New Cicada Variant Symptoms: जब भी कोरोना वायरस खत्म होने की कगार पर होता है, तब कोई नया वेरिएंट फैल जाता है और लोगों को तेजी से अपना शिकार बना देता है. पिछले कुछ सप्ताह से दुनियाभर में कोरोना के ओमिक्रॉन वेरिएंट का नया सब-वेरिएंट BA.3.2 तेजी से फैल रहा है. दक्षिण अफ्रीका में पहली बार पहचान किए जाने के बाद यह वेरिएंट अब तक अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया के 23 देशों में पैर पसार चुका है. हेल्थ एक्सपर्ट्स ने इस वेरिएंट को सिकाडा (Cicada) नाम दिया गया है. सिकाडा वेरिएंट की सबसे चौंकाने वाली बात इसमें मौजूद म्यूटेशन की संख्या है. इसमें करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे पिछले सभी वेरिएंट्स से ज्यादा संक्रामक बना सकती है. मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक सिकाडा वेरिएंट में लगभग 70 से 75 म्यूटेशन देखे गए हैं, जो मुख्य रूप से इसके स्पाइक प्रोटीन में स्थित हैं. वैज्ञानिकों का मानना है कि म्यूटेशन की यह असामान्य संख्या इसे मौजूदा वैक्सीन को चकमा देने में सक्षम बनाती है. अमेरिका के 25 राज्यों में इसके मामले पाए गए हैं और वहां एयरपोर्ट के वेस्ट वॉटर और पैसेंजर्स के सैंपल्स में इसकी पुष्टि हुई है. इतनी अधिक म्यूटेशन दर के कारण ही इसे वेरिएंट अंडर वॉच की कैटेगरी में रखा गया है. राहत की बात यह है कि अभी तक सिकाडा वेरिएंट से संक्रमित होने पर गंभीर कॉम्प्लिकेशन के मामले नहीं देखे जा रहे हैं. अधिकांश मामले हल्के से मध्यम श्रेणी के हैं. अस्पताल में भर्ती होने की दर में भी कोई असामान्य वृद्धि दर्ज नहीं की गई है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. सिकाडा वेरिएंट के लक्षणों की बात करें, तो इसके लक्षण काफी हद तक पिछले ओमिक्रॉन वेरिएंट जैसे ही हैं. इससे संक्रमित व्यक्तियों में मुख्य रूप से गले में खराश, अत्यधिक थकान, बुखार, खांसी और बदन दर्द जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं. अधिकतर लोगों को संक्रमित होने पर गले की खराश की समस्या सबसे ज्यादा हो रही है. कुछ रेयर मामलों में रात में पसीना आना, त्वचा पर चकत्ते और स्वाद या गंध का जाना भी रिपोर्ट किया गया है. अगर आपको ऐसे लक्षण महसूस हों, तो तुरंत जांच करानी चाहिए. राहत की बात यह है कि सिकाडा वेरिएंट तेजी से फैल रहा है, लेकिन अभी तक यह दुनिया भर में डोमिनेंट स्ट्रेन नहीं बना है. भारत की बात करें तो फिलहाल घबराने की कोई जरूरत नहीं है. देश में अभी सिकाडा वेरिएंट का कोई मरीज नहीं देखा गया है. हालांकि अंतरराष्ट्रीय ट्रैवलिंग के कारण यह वेरिएंट फैल सकता है. ऐसे में सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत की बड़ी आबादी को वैक्सीन लग चुका है, जिससे इससे बचाव में मदद मिल सकती है. अभी भी मौजूदा वैक्सीन गंभीर बीमारी और मौत के जोखिम को कम करने में अत्यधिक प्रभावी हैं. इससे बचने के लिए भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें, घर से बाहर जाते वक्त मास्क पहनें, हाथों को बार-बार धोएं और लक्षण दिखने पर जल्द से जल्द जांच कराएं. सतर्क रहकर हम कोरोना के किसी भी नए खतरे को टाल सकते हैं. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 30, 2026, 17:46 IST
सागर में मकान से पकड़ाया 4 फीट लंबा कोबरा:शादी में मिली टीवी के बॉक्स में छिपा था कोबरा, पकड़ते ही मारी फुफकार

सागर के लेहदरा नाका स्थित एक मकान में कोबरा घुस गया। सांप घर में रखे टीवी के बॉक्स में छिपा बैठा था। परिवार के लोगों ने देखा तो हड़कंप मच गया। सूचना पर स्नेक कैचर बबलू पवार मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू कर सांप को पकड़ लिया। जानकारी के अनुसार, लेहदरा नाका निवासी रूपचंद्र पटेल के मकान में शादी में मिले उपहार का सामान रखा था। सोमवार को वह कमरे से सामान हटा रहे थे। तभी उन्होंने टीवी के बॉक्स में सांप देखा। सांप देखते हुए परिवार के लोग घबरा गए। उन्होंने स्नेक कैचर बबलू पवार को सूचना दी। स्नेक कैचर मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू शुरू किया। कुछ देर की मशक्कत के बाद सांप को सुरक्षित पकड़ लिया गया। स्नेक कैचर बबलू ने बताया कि रेस्क्यू में पकड़ाया सांप कोबरा प्रजाति का है जो करीब 4 फीट लंबा है। सांप घर में रखे टीवी के बॉक्स में छिपा था। वर्तमान में गर्मी पड़ रही है। जिस कारण जीव-जंतु ठंडे स्थानों पर पहुंचने लगे हैं। संभवत: यह सांप भी ठंडक की तलाश में घर में पहुंचा होगा। सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ा जाएगा।
तेलंगाना में ‘पैरेंटल सपोर्ट बिल’ पास:मां-बाप को बेसहारा छोड़ा तो कटेगी 15 फीसदी सैलरी; पहली बार विधायक-सांसद भी कानून की जद में

तेलंगाना सरकार बुढ़ापे में माता-पिता को ‘बोझ’ समझने वाले बच्चों पर अब तक की सबसे बड़ी सख्ती करने जा रही है। राज्य विधानसभा ने रविवार को ‘पैरेंटल सपोर्ट बिल, 2026’ सर्वसम्मति से पास कर दिया। इसके तहत, यदि कोई कर्मचारी अपने माता-पिता की देखभाल नहीं करता, तो उसकी कुल सैलरी में से 15% या ₹10,000 (जो भी कम हो) की कटौती की जाएगी। देश में पहली बार ऐसा कानून बना है जिसमें सरकारी के साथ ही प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों, विधायकों, सांसदों और सरपंचों तक को जवाबदेह बनाया गया है। खास बात यह है कि माता-पिता को इसके लिए कोर्ट नहीं जाना होगा, वे सीधे जिला कलेक्टर के पास आवेदन कर सकेंगे। जांच में शिकायत सही मिलने पर कलेक्टर सीधे कंपनी या विभाग को सैलरी काटकर माता-पिता के खाते में भेजने का आदेश देंगे। विधेयक पेश करते हुए मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी भावुक हो गए। उन्होंने बताया, “मैं एक ऐसे जनप्रतिनिधि को जानता हूं जिसके पिता की कैंसर से मौत हो गई, लेकिन बेटे ने सुध तक नहीं ली। जब माता-पिता की आंखों में आंसू होते हैं, तो वह समाज के पतन का संकेत है। समाज को ऐसे लोगों का सामाजिक बहिष्कार करना चाहिए जो सक्षम होकर भी अपनों को छोड़ देते हैं।” केरल और असम में भी हैं ऐसे कानून केरल (2023) – यहां 25% तक कटौती का प्रावधान है। मुख्य रूप से उन लोगों पर लागू होता है जिन्हें ‘’अनुकंपा नियुक्ति’’ मिली है। असम (2017) – पहला राज्य जिसने ‘’प्रणाम एक्ट’’ लागू किया। सरकारी कर्मचारियों के वेतन से 10 से 15% कटौती का नियम है।
डेवलपमेंटल डिसप्लेसिया डीडीएच लक्षण: क्या है वीडियो डिस्प्लेसिया? जानिए वरुण की बेटी को क्यों हो रही है बेरोजगारी में परेशानी; जानें

30 मार्च 2026 को 17:18 IST पर अपडेट किया गया विकासात्मक डिसप्लेसिया डीडीएच लक्षण: आसान भाषा में कहा गया है तो डीडीएच कूल्हे की हड्डी एक ऐसी ही जुड़ी हुई समस्या है, जिसमें बच्चे के कूल्हे की हड्डी अपनी सही जगह पर नहीं बैठती है। आम तौर पर फूल का जोड़ ‘बॉल और कार्ड’ जैसा होता है। डीडीएच की स्थिति में यह इतना गहरा नहीं होता कि हड्डी की बॉल को सही से पकड़ सके, जिससे जोड़ जुड़ जाता है या अपनी जगह से खिसक जाता है। (टैग्सटूट्रांसलेट)डीडीएच अर्थ(टी)हिप का विकासात्मक डिसप्लेसिया हिंदी(टी)हिप डिसप्लेसिया शिशु लक्षण(टी)वरुण धवन बेटी स्वास्थ्य समाचार(टी)डीडीएच उपचार शिशु(टी)बच्चे की चलने में समस्या कारण(टी)हिप संयुक्त विकार बच्चा(टी)डीडीएच जागरूकता(टी)लाइफस्टाइल समाचार
अंगोला से गैस खरीदने की तैयारी में भारतीय कंपनियां:सरकारी स्तर पर भी बातचीत जारी, होर्मुज संकट की वजह से भारत नए ऑप्शन तलाश रहा

भारत में गैस की कमी की वजह से सरकारी तेल और गैस कंपनियां अब नए देशों से सप्लाई का ऑप्शन तलाश रही हैं। इसी कड़ी में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड, हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और गेल (इंडिया) लिमिटेड अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल से रसोई गैस (LPG) और प्राकृतिक गैस (LNG) खरीदने के लिए बात कर रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल के साथ लंबी अवधि के समझौते (टर्म कॉन्ट्रैक्ट) करने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और सरकार से सरकार के स्तर पर भी चर्चा जारी है। यह हालात इसलिए बने हैं क्योंकि मिडिल ईस्ट में चल रही जंग की वजह से होर्मुज स्ट्रेट बंद हो गया है। यह रास्ता दुनिया में तेल और गैस सप्लाई के लिए बहुत अहम माना जाता है। इसके बंद होने से भारत समेत कई देशों की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत दुनिया का दूसरा बड़ा LPG उपभोक्ता भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 60% इंपोर्ट करता है। वहीं, करीब 50% LNG भी इंपोर्ट करता है। अभी तक भारत को ज्यादातर गैस मिडिल ईस्ट के देशों, खासकर कतर और UAE से मिलती रही है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने के कारण भारत की करीब 90% LPG आयात पर असर पड़ा है। इसी वजह से सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए गैस सिलेंडर की बुकिंग के नियम सख्त कर दिए हैं। अब शहरों में 25 दिन और गांवों में 45 दिन के अंतराल पर ही सिलेंडर बुक किया जा सकता है। अंगोला पहली बार भारत को LPG कर सकता है एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफ्रीका से गैस सप्लाई अमेरिका की तुलना में 10 से 15 दिन जल्दी भारत पहुंच सकती है। ऐसे में अंगोला भारत के लिए एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है। अगर यह करार होता है, तो अंगोला पहली बार भारत को रसोई गैस सप्लाई करेगा। भारतीय कंपनियां LPG के लिए करीब एक साल और LNG के लिए कम से कम 10 साल का करार करने पर विचार कर रही हैं। अंगोला के पास करीब 4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है और वह पहले से ही भारत को कच्चा तेल और LNG सप्लाई करता रहा है। वित्त वर्ष 2025 में अंगोला भारत का पांचवां सबसे बड़ा LNG सप्लायर था। ऑस्ट्रेलिया-अल्जीरिया और रूस से भी LPG खरीदने की तैयारी भारत सिर्फ अंगोला ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस इंपोर्ट के ऑप्शन तलाश रहा है, ताकि किसी एक रीजन पर निर्भरता कम की जा सके। इस गैस संकट का असर उर्वरक (फर्टिलाइजर) और स्टील सेक्टर जैसे उद्योगों पर भी पड़ सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं और भारत को महंगे दामों पर गैस -खरीदनी पड़ सकती है। पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में दो बड़े जहाज करीब 94 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत की ओर रवाना हुए हैं। भारत की 92% LPG खाड़ी के 4 देशों से आती है भारत का ज्यादातर LPG आयात फारस की खाड़ी के देशों UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है। खास बात यह है कि इन सभी देशों से आने वाली गैस एक ही रास्ते, होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। यह सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है, लेकिन दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार यहीं से होता है। 2024-25 में भारत के करीब 92% LPG आयात इन्हीं चार खाड़ी देशों से आए। इनमें यूएई सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, जिसकी हिस्सेदारी बढ़कर 40% से ज्यादा हो गई है। वहीं, कतर और सऊदी अरब की हिस्सेदारी में गिरावट आई है। भारत में LPG की मांग बढ़ी लेकिन उत्पादन नहीं भारत में LPG की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन लगभग नहीं बढ़ रहा। यही वजह है कि देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाना पड़ रहा है, जिससे सप्लाई को लेकर जोखिम भी बढ़ गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने साल 2024-25 में 20.67 मिलियन टन LPG आयात किया, जो 2019-20 के 14.81 मिलियन टन के मुकाबले करीब 40% ज्यादा है। यानी सिर्फ पांच साल में आयात में बड़ी बढ़ोतरी हुई है। भारत का घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है। 2019-20 में देश ने 12.82 मिलियन टन LPG का उत्पादन किया था, जो 2024-25 में घटकर करीब 12.79 मिलियन टन रह गया। यानी उत्पादन में कोई खास बढ़ोतरी नहीं हुई। 2024-25 में भारत ने 31.32 मिलियन टन LPG का इस्तेमाल किया, जो 2019-20 के मुकाबले करीब 19% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में गैस कनेक्शन बढ़ने की वजह से हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों को LPG कनेक्शन दिए गए हैं। अब देश में 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव गैस कनेक्शन हैं, जिससे मांग लगातार बढ़ रही है।
इछावर में पानी संकट पर युवक टंकी पर चढ़ा:एक घंटे तक मचाया हंगामा; पुलिस की समझाइश के बाद उतरा नीचे

सीहोर जिले में जल संकट के बीच एक युवक पानी की मांग को लेकर इछावर के आजाद चौक स्थित पानी की टंकी पर चढ़ गया। उसने करीब एक घंटे तक हंगामा किया और प्रशासन से पेयजल उपलब्ध कराने की मांग की। जानकारी के अनुसार, युवक टंकी पर चढ़कर जोर-जोर से चिल्ला रहा था और पानी की समस्या को उजागर कर रहा था। जब स्थानीय लोगों की समझाइश के बाद भी वह नीचे नहीं उतरा, तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी। इछावर पुलिस मौके पर पहुंची और युवक को काफी देर तक समझाया। पुलिस की समझाइश के बाद अधेड़ व्यक्ति पानी की टंकी से नीचे उतर आया। यह घटना सीहोर जिले में बढ़ते जल संकट की गंभीरता को दर्शाती है। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
गर्मियों में प्याज खाने के क्या फायदे हैं? किन लोगों को करना चाहिए परहेज, एक्सपर्ट की क्या है सलाह

Last Updated:March 30, 2026, 16:52 IST Health Benefits of Onion: गर्मियों में प्याज को सुपरफूड माना जाता है, क्योंकि यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करता है. डाइटिशियन कामिनी सिन्हा के अनुसार प्याज को हीट स्ट्रोक से बचाने में भी असरदार माना जाता है. प्याज पाचन तंत्र को सुधारने और ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी असरदार होता है. हालांकि एसिडिटी के मरीजों को इसका सेवन कम करना चाहिए. गर्मियों में कच्चा प्याज खाने से इम्यूनिटी मजबूत हो सकती है. Onions Benefits in Summer: गर्मियों में खान-पान का विशेष ध्यान रखने की जरूरत होती है, ताकि सेहत ठीक बनी रहे. गर्मी के मौसम में पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ जाती है और ऐसे में पाचन दुरुस्त करने वाले फूड्स का सेवन करने की सलाह दी जाती है. हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो गर्मियों में प्याज का सेवन करना बेहद फायदेमंद माना जाता है. आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान दोनों में प्याज को गर्मियों के लिए सुपरफूड माना गया है. प्याज खाने से गर्मियों में हीट स्ट्रोक से बचाव होता है और कई समस्याओं से बचाव होता है. गर्मी में कच्चा प्याज खाना सेहत के लिए सबसे अच्छा माना जाता है. नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि गर्मियों में कच्चा प्याज खाने से हीट स्ट्रोक का बचाव हो सकता है. प्याज में मौजूद कुछ तत्व शरीर के तापमान को कंट्रोल करने में मदद करते हैं और लू से बचाते हैं. प्याज में भरपूर मात्रा में पानी और फाइबर होता है, जो शरीर को हाइड्रेटेड रखता है. प्याज पाचन तंत्र के लिए बेहद गुणकारी है. इसमें इनुलिन नामक फाइबर होता है, जो पेट में अच्छे बैक्टीरिया को बढ़ाता है. गर्मियों में अक्सर पाचन संबंधी समस्याएं जैसे कब्ज या अपच हो जाती है, जिसे कच्चा प्याज काफी हद तक दूर करता है. प्याज में मौजूद विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर की इम्यूनिटी को बढ़ाते हैं, जिससे मौसमी संक्रमणों का खतरा कम हो जाता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. डाइटिशियन ने बताया कि प्याज का सेवन करने से ब्लड शुगर लेवल को स्टेबल रखने में मदद मिल सकती है. इस वजह से प्याज को डायबिटीज के मरीजों के लिए फायदेमंद माना जाता है. प्याज में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करने की क्षमता होती है. ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने में भी प्याज लाभकारी है. अगर आप इसका नियमित रूप से सेवन करेंगे, तो हार्ट हेल्थ बेहतर हो जाएगी और दिल से जुड़ी समस्याओं का खतरा कम हो जाएगा. गर्मियों में प्याज का अधिकतम लाभ उठाने के लिए इसे कच्चा सलाद के रूप में खाना सबसे अच्छा है. इसे नींबू और काला नमक छिड़क कर खाने से इसके पोषक तत्व शरीर में बेहतर तरीके से अवशोषित होते हैं. एक्सपर्ट ने बताया कि जिन लोगों को अक्सर एसिडिटी या सीने में जलन की समस्या रहती है, उन्हें कच्चा प्याज कम खाना चाहिए, क्योंकि यह समस्या बढ़ा सकता है. इसके अलावा जिन लोगों को प्याज से एलर्जी है या जिनका पेट बहुत ज्यादा सेंसिटिव है, उन्हें एक्सपर्ट की सलाह लेने के बाद ही इसका सेवन करना चाहिए. ज्यादा मात्रा में प्याज खाने से पेट फूलने की समस्या भी हो सकती है. डाइटिशियन यह भी सलाह देती हैं कि कटा हुआ प्याज लंबे समय तक बाहर न रखें, क्योंकि यह जल्दी बैक्टीरिया के संपर्क में आ जाता है. हमेशा ताजा कटा हुआ प्याज ही अपनी डाइट में शामिल करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : March 30, 2026, 16:52 IST
कटनी पीजी कॉलेज में छात्राओं को फेल करने की धमकी:अतिरिक्त फीस वसूली का विरोध किया, स्टूडेंट्स ने थाने में की शिकायत

कटनी जिले के विजयराघवगढ़ में स्थित श्री द्वारका प्रसाद आर्ट्स एंड साइंस पीजी कॉलेज (DPCT) की छात्राओं ने कॉलेज मैनेजमेंट पर ज्यादा फीस वसूलने का आरोप लगाया है। छात्राओं का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें फेल करने की धमकी दी जा रही है। सोमवार को इस मामले में पीड़ित छात्राओं ने विजयराघवगढ़ थाने में शिकायत की है। कॉलेज की सेकंड ईयर की छात्रा भूमि पाठक ने अपनी सहेलियों खुशबू भगत, ईशू तिवारी और श्वेता के साथ मिलकर पुलिस को लिखित आवेदन दिया है। छात्राओं ने बताया कि उन्होंने साल 2024 में कॉलेज में एडमिशन लिया था, लेकिन उस वक्त स्टाफ ने फीस को लेकर कोई साफ जानकारी नहीं दी थी। आरोप है कि छात्राओं से 8 से 10 हजार रुपए तक की फीस लेकर रसीदें थमा दी गईं। अतिरिक्त फीस का दबाव शिकायत में कहा गया है कि अब कॉलेज मैनेजमेंट बिना किसी ठोस वजह या कागज के 1,000 रुपए एक्स्ट्रा मांग रहा है। जब छात्राओं ने इस फालतू खर्चे का विरोध किया, तो कॉलेज प्रशासन उन पर दबाव बनाने लगा। फेल करने की धमकी छात्राओं का आरोप है कि उन्हें डराया जा रहा है कि अगर पैसे नहीं दिए, तो परीक्षा में फेल कर दिया जाएगा और एग्जाम फॉर्म भी नहीं भरने देंगे। छात्राओं के मुताबिक, कॉलेज के इस डर की वजह से कई छात्र पहले ही यह एक्स्ट्रा पैसे जमा कर चुके हैं। अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है। कॉलेज प्रबंधन ने नहीं दिया कोई जवाब इस मामले में कॉलेज का पक्ष जानने के लिए जब कॉलेज प्राचार्य और संचालक दोनों से ही फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। थाना प्रभारी बोले- शिकायत मिली है विजयराघवगढ़ थाना प्रभारी रितेश शर्मा ने बताया कि छात्राओं की ओर से शिकायत प्राप्त हुई है। पुलिस ने मामले को संज्ञान में ले लिया है और आरोपों की बारीकी से जांच कराई जा रही है। जांच के बाद नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी। विजयराघवगढ़ एसडीएम विवेक गुप्ता ने कहा कि आपके माध्यम से जानकारी प्राप्त हुई है। अगर शिकायत प्राप्त होती है तो मामले की जांच कराई जाएगी और नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
महिला के शरीर में कितने अंडे होते हैं? आजकल 30 साल में ही महिलाओं अंडों का रिजर्व क्यों कम होने लगता? न्यूट्रिशन ने बताई सच्ची बात

Last Updated:March 30, 2026, 16:37 IST Why Fertility Decline: आज से सिर्फ 2 दशक पहले तक महिलाएं 40 साल की उम्र तक आराम से कंसीव कर लेती थी. मुश्किल से ही किसी महिला को इसके लिए डॉक्टर के पास जाना पड़ता था लेकिन आजकल 30 साल के बाद तेजी से महिलाओं में फर्टिलिटी या प्रजनन क्षमता कम होने लगती है और अधिकांश महिलाओं को आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर वह क्या कारण है कि 30 साल की उम्र से ही महिलाओं में फर्टिलिटी कम होने लगती है. एक महिला के जीवनकाल में कुल कितने अंडों का रिजर्व होता है. आइए इसके बारे में जानते हैं. महिलाओं में ओवेरियन रिजर्व का क्या मतलब. Why Fertility Decline: महिला का शरीर प्रकृति की कारीगरी का नायाब नमूना है. इसमें इतनी कारीगरी है कि इसे अब तक पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है. लेकिन कुतरत में हस्तक्षेप की वजह से महिलाओं का बायलॉजिकल चक्र कमजोर पड़ने लगा है. महज 15 से 20 साल पहले तक 40 साल की उम्र तक महिलाओं को कंसीव करने में शायद ही दिक्कतों का सामना करना पड़ता था लेकिन आज 30 साल क्रॉस करते ही महिलाओं के प्रजनन स्वास्थ्य में कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है और अधिकांश महिलाओं को बच्चा पैदा करने के लिए आईवीएफ का सहारा लेना पड़ता है. आखिर ऐसा क्यों होता कि महिलाओं में अंडों का रिजर्व कम होने लगा है. महिलाओं कितने अंडों का रिजर्व होताआइए पहले ये जानते हैं कि एक महिला के शरीर में कितने अंडों का रिजर्व होता है. पहले तो यह जानकर आपको हैरानी होगी कि जन्म के बाद महिला के शरीर में एक भी नया अंडा नहीं बनता. जो भी अंडा होता है वह जन्म से पहले मां के पेट में ही बन जाता है. हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक जब मादा भ्रुण मां के गर्भ में होता है तब दो अंडाणु बनता है. इन्हीं अंडाणु में अंडा बनता है और मादा भ्रुण एक दो महीने का होता है तभी अंडा बनना शुरू हो जाता है. गर्भ में ही महिला के शरीर में 60 लाख अंडे बन जाते हैं. इसके बाद से तेजी से इनकी संख्या घटती जाती है. जन्म के समय महिला के शरीर में 10 से 20 लाख अंडों का रिजर्व रहता है. हर दिन यह रिजर्व घटता जाता है. प्यूबर्टी यानी पहला पीरियड आते ही अंडों की संख्या घटकर 3 से 4 लाख तक रह जाती है. अब अंडों का रिजर्व एकदम सीमित हो जाता है. हर महीने पीरियड्स आने से पहले सिर्फ 1 अंडा परिपक्व होकर कंसीव के लिए तैयार होता है और इसी अंडे से अगर शुक्राणु को मिलन हो गया तो यह भ्रुण बनता है. अगर भ्रुण नहीं बना तो 28 दिनों के बाद इसका विखंडन हो जाता है और यही पीरियड्स के दौरान निकल जाता है. पीरियड शुरू होने के समय जो अंडे रिजर्व में रहता है उनमें से हर महीने करीब 1000 परिपक्व नहीं होता है और वह मर जाता है. इस तरह एक महिला के जीवन काल में 450 से 500 पीरियड्स आते हैं और हर महीने सिर्फ 1 अंडे मैच्योर होता है. लेकिन आजकल इसी रिजर्व में कमी आने लगी है. आखिर इसका क्या कारण है. क्यों घटने लगा है अंडों का रिजर्व न्यूट्रिशनिस्ट अवंती देशपांडे सोशल मीडिया पर बताती है कि कई शोध हुए हैं जिनमें कहा गया है कि कुछ साल पहले तक महिलाओं को 40 साल की उम्र तक कंसीव करने में कोई परेशानी नहीं होती थी लेकिन आजकल 30 साल होते ही महिलाओं को फर्टिलिटी संबंधी समस्याएं होने लगी है. उनका ओवेरियन रिजर्व यानी अंडों का रिजर्व कम होने लगा है. इसके वैसे तो कई कारण है लेकिन इसके लिए लाइफस्टाइल के साथ-साथ पर्यावरण भी जिम्मेदार है. उन्होंने कहा कि अब फर्टिलिटी सिर्फ उम्र पर नहीं बल्कि शरीर की कोशिकाओं की सेहत और लाइफस्टाइल पर भी निर्भर करती है. आज भारत में करीब 10–15% दंपति बांझपन की समस्या से जूझ रहे हैं और शहरों में 35 साल से कम उम्र की महिलाएं भी इलाज के लिए पहुंच रही हैं. ये कारण हैं जिम्मेदार आजकल कम उम्र से महिलाएं इंसुलिन रेजिस्टेंस का शिकार हो रही है. इसके कारण प्रीडायबिटीज हो जाता है. वहीं ओवरी की बीमारी पीसीओसी बढ़ रही हैं जिससे ओव्यूलेशन और अंडों की गुणवत्ता प्रभावित होती है. देर रात तक जागना और ज्यादा स्क्रीन देखने से मेलाटोनिन हार्मोन बिगड़ता है. मेलोटोनिन हार्मोन के कम होने से अंडों की सेहत कमजोर होती है. प्लास्टिक, प्रदूषण और हॉर्मोन को प्रभावित करने वाले केमिकल्स शरीर के सामान्य हार्मोन संतुलन को खराब करते हैं. प्रोसेस्ड खाना जैसे कि पिज्जा, बर्गर, पैकेटबंद फूड, फास्ट फूड, मोमोज, नूडल्स आदि से इंफ्लामेशन बढ़ता है. इससे भी ज्यादा परेशानी तनाव से है. तनाव से पूरे शरीर में सूजन बढ़ जाती हैं, जिससे ओवरी पर असर पड़ता है. कई महिलाएं कैरियर को प्राथमिकता देते हुए गर्भधारण में देरी करती हैं, लेकिन समय रहते अपनी सेहत (जैसे मेटाबॉलिक या थायरॉयड) की जांच नहीं करातीं. फिर क्या करना चाहिए कि कंसीव में दिक्कत न हो हर वयस्क महिला को हर साल नियमित रूप से कुछ टेस्ट कराना चाहिए. इनमें फास्टिंग इंसुलिन, HbA1c, विटामिन D, थायरॉयड और AMH, ओविरयन रिजर्व टेस्ट, लिपिड प्रोफाइल आदि की जांच प्रमुख करें. अगर किसी तरह की दिक्कत है तो तुरंत डॉक्टर से इसका इलाज कराएं. प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें. प्लास्टिक फर्टिलिटी पर असर डाल सकता है. इसकी जगह स्टील जैसे सुरक्षित विकल्प अपनाएं. सही तरह से कंसीव करने के लिए मांसपेशियां को मजबूत बनाना जरूरी है. मांसपेशियों को मजबूत करने के लिए नियमित रूप से एक्सरसाइज करना चाहिए. साथ ही पौष्टिक फूड भी जरूरी है. नियमित एक्सरसाइज से ओवरऑल हेल्थ सुधरती है. आंत की सेहत का ध्यान रखें, इससे सूजन कम होती है. वहीं हार्मोन संतुलित रहते हैं और फर्टिलिटी बेहतर होती है. इसके लिए आपको रोज हरी पत्तीदार सब्जियां, दाल, साबुत अनाज, फल, सीड्स आदि का सेवन करें. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें
50 साल बाद नासा का चंद्र मिशन:आर्टेमिस-2 मिशन की पहली महिला होंगी क्रिस्टीना; टीम में 4 अंतरिक्ष यात्री

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा का आर्टेमिस-2 मिशन चांद की ओर 50 साल बाद पहली मानव यात्रा की तैयारी के अंतिम चरण में पहुंच गया है। चार अंतरिक्ष यात्री फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर पहुंच चुके हैं, जहां से उनका लगभग 10 दिन का मिशन लॉन्च होगा। यह मिशन चांद के चारों ओर उड़ान भरकर पृथ्वी पर लौटेगा और ओरियन यान की क्षमता का परीक्षण करेगा। बता दें कि आर्टेमिस-2 मिशन की लॉन्चिंग 1 अप्रैल के आसपास निर्धारित है, हालांकि अंतिम तारीख तकनीकी तैयारियों पर निर्भर करेगी। रीड वाइजमैन (कमांडर) – 50 वर्षीय पूर्व नेवी पायलट, 165 दिन अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर बिता चुके हैं। दो बेटियों के पिता वाइजमैन इस मिशन का नेतृत्व कर रहे हैं। विक्टर ग्लोवर (पायलट) – 49 वर्षीय ग्लोवर पहले ब्लैक अंतरिक्ष यात्री होंगे जो चांद के पास जाएंगे। नेवी के अनुभवी पायलट हैं। क्रिस्टीना कोच (मिशन विशेषज्ञ) – 47 वर्षीय इंजीनियर, 328 दिन अंतरिक्ष में रहने का रिकॉर्ड। चांद के पास जाने वाली पहली महिला होंगी। जेरमी हैनसेन (कनाडा) – 50 वर्षीय फाइटर पायलट, पहली बार अंतरिक्ष यात्रा करेंगे और चांद के लिए जाने वाले पहले गैर-अमेरिकी होंगे।








