Cool Roof: अब गर्मी में भी नहीं तपेगी घर की छत, भारी बिजली बिल से बचने के लिए तुरंत करें ये छोटा सा काम

29 मार्च 2026 को 20:49 IST पर अपडेट किया गया ठंडी छत: गर्मियों में अक्सर घर की छत सूरज की तेज किरणों की वजह से तपने लगती हैं। लेकिन एक छोटा सा काम है, जिसे करके भारी बिजली बिल बच सकता है और कमरा भी ठंडा रहेगा। (टैग्सटूट्रांसलेट)कूल रूफ पेंट(टी)रूफ कूलिंग सॉल्यूशन(टी)घर की गर्मी कम करें(टी)बिजली बिल बचाएं भारत(टी)ग्रीष्मकालीन घरेलू युक्तियाँ(टी)छत की गर्मी से सुरक्षा(टी)ऊर्जा कुशल घर(टी)सफेद छत पेंट के लाभ(टी)घर को ठंडा करने के विचार भारत
प्रदूषण से डायबीटीज की चपेट में आ रहे लोग? नोएडा से कानपुर तक नई आफत, पता भी नहीं चलेगा हो जाओगे रोगी

Last Updated:March 29, 2026, 20:29 IST Diabetes Causes : डायबिटीज (शुगर) को अब तक गलत खानपान या खराब लाइफस्टाइल से हुई बीमारी माना जाता रहा है, लेकिन अब तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण ने इसे और खतरनाक बना दिया है. हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण सीधे शरीर के अंदर जाकर ऐसी प्रक्रियाएं शुरू कर देते हैं, जो धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं और व्यक्ति को डायबिटीज की ओर धकेल देती हैं. लोकल 18 ने इस बारे में कानपुर के चिकित्सक डॉ. एसके गौतम से बात की. वे बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज के मामलों में जो तेजी आई है, उसमें प्रदूषण की भूमिका अब साफ दिखने लगी है. कानपुर. अब डायबिटीज सिर्फ गलत खानपान या खराब लाइफस्टाइल की बीमारी नहीं रह गई है. तेजी से बढ़ते वायु प्रदूषण ने इस बीमारी को और खतरनाक बना दिया है. डॉक्टरों के अनुसार, हवा में मौजूद धूल और प्रदूषक कण सीधे शरीर के अंदर जाकर ऐसी प्रक्रियाएं शुरू कर देते हैं, जो धीरे-धीरे इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती हैं और व्यक्ति को डायबिटीज की ओर धकेल देती हैं. कानपुर के जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एसके गौतम बताते हैं कि पिछले कुछ वर्षों में डायबिटीज के मामलों में जो तेजी आई है, उसमें प्रदूषण की भूमिका अब साफ दिखाई देने लगी है. पहले जहां इसे सिर्फ खानपान और लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता था, अब हवा की गुणवत्ता भी एक बड़ा कारण बन चुकी है. कैसे करते हैं काम डॉ. एसके गौतम के मुताबिक, हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे बेहद महीन कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं. ये कण इतने छोटे होते हैं कि सीधे फेफड़ों से होते हुए ब्लडस्ट्रीम तक पहुंच जाते हैं. इसके बाद ये शरीर की कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं और उनसे हानिकारक केमिकल रिलीज कराते हैं. यही केमिकल इंसुलिन के काम करने की क्षमता को कमजोर कर देते हैं. नतीजा यह होता है कि शरीर में शुगर का स्तर धीरे-धीरे बढ़ने लगता है और व्यक्ति डायबिटीज की चपेट में आ जाता है. इन शहरों को खतरा ज्यादा जिन शहरों में प्रदूषण का स्तर ज्यादा है, वहां डायबिटीज के मरीजों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है. दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद जैसे शहर इसका बड़ा उदाहरण हैं. यहां की खराब हवा लोगों के शरीर पर लगातार असर डाल रही है. कानपुर जैसे शहरों में भी सर्दियों और गर्मियों में धूल और प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है, जिससे खतरा और बढ़ जाता है. लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने वाले लोग धीरे-धीरे इस बीमारी की ओर बढ़ते जाते हैं, उन्हें इसका पता भी नहीं चलता. फिर करें क्याडॉ. गौतम का कहना है कि इस खतरे से पूरी तरह बच पाना मुश्किल जरूर है, लेकिन सावधानी से जोखिम कम किया जा सकता है. जहां प्रदूषण अधिक हो, वहां मास्क का उपयोग जरूर करना चाहिए. सुबह-शाम जब हवा में धूल ज्यादा हो, उस समय बाहर निकलने से बचना चाहिए. शरीर को मजबूत रखना भी जरूरी है, ताकि प्रदूषण का असर कम हो सके. समय-समय पर जांच कराना और शुगर लेवल पर नजर रखना भी बेहद जरूरी है. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : March 29, 2026, 20:29 IST
खरगोन में क्लिनिक में इलाज के बाद छात्रा की मौत:डॉक्टर अस्पताल में छोड़कर भागा; गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप

खरगोन के बिस्टान में एक निजी क्लिनिक में इलाज के दौरान 16 वर्षीय छात्रा आयुषी पटेल की मौत हो गई। परिजनों ने डॉक्टर पीसी गुप्ता पर गलत इंजेक्शन और सलाइन लगाने का आरोप लगाया है। आरोप है कि छात्रा की हालत बिगड़ने पर डॉक्टर उसे खरगोन के एक निजी अस्पताल में छोड़कर भाग गया। मृतका के पिता गजराज पटेल ने बताया कि रविवार दोपहर को आयुषी को सर्दी-खांसी की शिकायत थी। वे उसे डॉ. पीसी गुप्ता के क्लिनिक पर इलाज के लिए ले गए थे। डॉक्टर ने आयुषी को सलाइन चढ़ाई। सलाइन चढ़ाने के कुछ देर बाद आयुषी को घबराहट और उल्टी होने लगी। उल्टी के बाद डॉक्टर ने उसे एक इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगने के लगभग दो मिनट बाद आयुषी की हालत गंभीर हो गई और उसका शरीर ढीला पड़ गया। आरोप- डॉक्टर अस्पताल में छोड़कर भाग गया छात्रा की गंभीर हालत देखकर डॉक्टर ने उसे खरगोन ले जाने को कहा। परिजन उसे अपने निजी वाहन से खरगोन के एक निजी अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने आयुषी को मृत घोषित कर दिया। परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर पीसी गुप्ता आयुषी को अस्पताल में छोड़कर भाग गया। गजराज पटेल की शिकायत पर बिस्टान थाने में निजी डॉक्टर पीसी गुप्ता के खिलाफ शिकायत दर्ज की गई है। प्रधान आरक्षक सतीशसिंह कुशवाहा ने बताया कि मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने कहा कि कथन और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। एक दिन पहले आया था 9वीं का रिजल्ट आयुषी का शव पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। छात्रा ने हाल ही में कक्षा 9वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी और शनिवार को ही उसका परिणाम आया था। घटना वाले दिन उसने मंदिर में प्रसाद भी चढ़ाया था। उसके पिता अपने पैर में खुजली के इलाज के लिए डॉक्टर के पास गए थे, और आयुषी भी उनके साथ गई थी।
NSE पर 13 अप्रैल से कच्चे तेल की ट्रेडिंग होगी:सेबी से मंजूरी मिली, इंटरनेशनल मार्केट के हिसाब से हेजिंग कर सकेंगे; कैश में सेटलमेंट होगा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट का विस्तार करने जा रहा है। NSE 13 अप्रैल 2026 से डेटेड ब्रेंट क्रूड ऑयल यानी कच्चे तेल के फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करेगा। इसके लिए एक्सचेंज को मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी मिल गई है। इस नए कॉन्ट्रैक्ट के आने से भारतीय ट्रेडर्स और निवेशकों को ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क के साथ तालमेल बिठाने और रिस्क को मैनेज करने का एक नया जरिया मिलेगा। ब्रेंट क्रूड के लिए BRCRUDEOIL सिंबल का इस्तेमाल होगा NSE के जारी सर्कुलर के मुताबिक, इस नए कॉन्ट्रैक्ट को BRCRUDEOIL सिंबल के तहत ट्रेड किया जाएगा। यह कॉन्ट्रैक्ट SP ग्लोबल एनर्जी के डेटेड ब्रेंट असेसमेंट पर आधारित होगा। एक्सचेंज ने बताया कि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों के कैलकुलेशन के लिए ब्रेंट क्रूड को सबसे विश्वसनीय माना जाता है, इसलिए इसे प्लेटफॉर्म पर लाना मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए फायदेमंद होगा। रात 11:55 बजे तक कर सकेंगे ट्रेडिंग NSE ने इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए ट्रेडिंग का समय काफी फ्लेक्सिबल रखा है, ताकि ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाया जा सके। ट्रेडिंग के दिन: सोमवार से शुक्रवार। समय: सुबह 9:00 बजे से लेकर रात 11:30 बजे या 11:55 बजे तक (यह यूएस डेलाइट सेविंग टाइम के आधार पर तय होगा)। लिस्टिंग: ये कॉन्ट्रैक्ट मंथली बेसिस पर लिस्ट किए जाएंगे। रुपयों में सेटलमेंट होगा, RBI रेट का ध्यान रखा जाएगा ट्रेडर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कॉन्ट्रैक्ट कैश-सेटल होंगे। यानी एक्सपायरी के समय कच्चे तेल की फिजिकल डिलीवरी नहीं लेनी होगी। फाइनल सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए डेटेड ब्रेंट क्रूड ऑयल के महीने भर के एवरेज रेट को आधार बनाया जाएगा। इसे भारतीय रुपयों में बदलने के लिए RBI के USD-INR रेफरेंस रेट का इस्तेमाल किया जाएगा। क्यों खास है यह कॉन्ट्रैक्ट? एक्सचेंज का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय बाजार के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेजिंग टूल उपलब्ध कराना है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर पड़ता है। इस फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की मदद से कंपनियां और बड़े निवेशक कीमतों के जोखिम से खुद को बचा सकेंगे। क्वालिटी के लिए कड़े नियम NSE ने स्पष्ट किया है कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स में क्वालिटी स्पेसिफिकेशन वही होंगे जो SP ग्लोबल एनर्जी द्वारा तय किए गए हैं। इससे कॉन्ट्रैक्ट की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय नियमों के बराबर बनी रहेगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि NSE के इस कदम से कमोडिटी सेगमेंट में लिक्विडिटी बढ़ेगी और ट्रेडर्स को MCX के अलावा एक और मजबूत विकल्प मिलेगा। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 कंपनियों में से 7 की वैल्यू ₹1.75 लाख-करोड़ घटी: रिलायंस टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹89 हजार करोड़ घटी; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 1.75 लाख करोड़ रुपए घट गई। मिडिल ईस्ट में तनाव और इजराइल-ईरान जंग की वजह से यह गिरावट आई है। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। रिलायंस का मार्केट कैप 89,720 करोड़ रुपए घटकर ₹18.24 लाख करोड़ पर आ गया। पूरी खबर पढ़ें…
NSE पर 13 अप्रैल से ब्रेंट-क्रूड-ऑयल की ट्रेडिंग होगी:सेबी से मंजूरी मिली, इंटरनेशनल मार्केट के हिसाब से हेजिंग कर सकेंगे; कैश में सेटलमेंट होगा

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) अपने कमोडिटी डेरिवेटिव्स सेगमेंट का विस्तार करने जा रहा है। NSE 13 अप्रैल 2026 से ‘डेटेड ब्रेंट क्रूड ऑयल’ फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट लॉन्च करेगा। इसके लिए एक्सचेंज को मार्केट रेगुलेटर सेबी से मंजूरी मिल गई है। इस नए कॉन्ट्रैक्ट के आने से भारतीय ट्रेडर्स और निवेशकों को ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क के साथ तालमेल बिठाने और रिस्क को मैनेज करने का एक नया जरिया मिलेगा। ब्रेंट क्रूड के लिए BRCRUDEOIL सिंबल का इस्तेमाल होगा NSE के जारी सर्कुलर के मुताबिक, इस नए कॉन्ट्रैक्ट को BRCRUDEOIL सिंबल के तहत ट्रेड किया जाएगा। यह कॉन्ट्रैक्ट SP ग्लोबल एनर्जी के डेटेड ब्रेंट असेसमेंट पर आधारित होगा। एक्सचेंज ने बताया कि दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों के कैलकुलेशन के लिए ब्रेंट क्रूड को सबसे विश्वसनीय माना जाता है, इसलिए इसे प्लेटफॉर्म पर लाना मार्केट पार्टिसिपेंट्स के लिए फायदेमंद होगा। रात 11:55 बजे तक कर सकेंगे ट्रेडिंग NSE ने इस कॉन्ट्रैक्ट के लिए ट्रेडिंग का समय काफी फ्लेक्सिबल रखा है, ताकि ग्लोबल मार्केट के उतार-चढ़ाव का फायदा उठाया जा सके। ट्रेडिंग के दिन: सोमवार से शुक्रवार। समय: सुबह 9:00 बजे से लेकर रात 11:30 बजे या 11:55 बजे तक (यह यूएस डेलाइट सेविंग टाइम के आधार पर तय होगा)। लिस्टिंग: ये कॉन्ट्रैक्ट मंथली बेसिस पर लिस्ट किए जाएंगे। रुपयों में सेटलमेंट होगा, RBI रेट का ध्यान रखा जाएगा ट्रेडर्स के लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ये कॉन्ट्रैक्ट कैश-सेटल होंगे। यानी एक्सपायरी के समय कच्चे तेल की फिजिकल डिलीवरी नहीं लेनी होगी। फाइनल सेटलमेंट प्राइस तय करने के लिए डेटेड ब्रेंट क्रूड ऑयल के महीने भर के एवरेज रेट को आधार बनाया जाएगा। इसे भारतीय रुपयों में बदलने के लिए RBI के USD-INR रेफरेंस रेट का इस्तेमाल किया जाएगा। क्यों खास है यह कॉन्ट्रैक्ट? एक्सचेंज का कहना है कि इस कदम का मुख्य उद्देश्य भारतीय बाजार के खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर का हेजिंग टूल उपलब्ध कराना है। चूंकि भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में वैश्विक कीमतों में होने वाले बदलाव का सीधा असर भारतीय कंपनियों पर पड़ता है। इस फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट की मदद से कंपनियां और बड़े निवेशक कीमतों के जोखिम से खुद को बचा सकेंगे। क्वालिटी के लिए कड़े नियम NSE ने स्पष्ट किया है कि इन कॉन्ट्रैक्ट्स में क्वालिटी स्पेसिफिकेशन वही होंगे जो SP ग्लोबल एनर्जी द्वारा तय किए गए हैं। इससे कॉन्ट्रैक्ट की विश्वसनीयता अंतरराष्ट्रीय नियमों के बराबर बनी रहेगी। मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि NSE के इस कदम से कमोडिटी सेगमेंट में लिक्विडिटी बढ़ेगी और ट्रेडर्स को MCX के अलावा एक और मजबूत विकल्प मिलेगा। ये खबर भी पढ़ें… टॉप-10 कंपनियों में से 7 की वैल्यू ₹1.75 लाख-करोड़ घटी: रिलायंस टॉप लूजर रही, वैल्यू ₹89 हजार करोड़ घटी; HDFC बैंक का मार्केट कैप भी घटा मार्केट कैप के लिहाज से देश की 10 सबसे बड़ी कंपनियों में से 7 की वैल्यू बीते हफ्ते के कारोबार में 1.75 लाख करोड़ रुपए घट गई। मिडिल ईस्ट में तनाव और इजराइल-ईरान जंग की वजह से यह गिरावट आई है। इस दौरान रिलायंस इंडस्ट्रीज की वैल्यू सबसे ज्यादा घटी। रिलायंस का मार्केट कैप 89,720 करोड़ रुपए घटकर ₹18.24 लाख करोड़ पर आ गया। पूरी खबर पढ़ें…
मंडला में महावीर जयंती अवकाश बदला:कलेक्टर ने जारी किए आदेश; 31 मार्च की छुट्टी निरस्त, अब 30 को रहेगी

मंडला जिला प्रशासन ने महावीर जयंती के सार्वजनिक अवकाश की तिथि में संशोधन किया है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी सोमेश मिश्रा द्वारा जारी आदेश के अनुसार, पहले 31 मार्च को घोषित अवकाश अब 30 मार्च (सोमवार) को रहेगा। यह निर्णय मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशों, जनभावनाओं और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। 30 मार्च को जिले में सार्वजनिक अवकाश रहेगा, जबकि 31 मार्च को सभी शासकीय कार्यालय एवं संस्थान सामान्य दिनों की तरह खुले रहेंगे। दरअसल, महावीर स्वामी जयंती पर पहले 31 मार्च को छुट्टी घोषित की गई थी। विभिन्न सामाजिक संगठनों और विधायकों ने प्रदेश सरकार से 31 मार्च के बजाय 30 मार्च को अवकाश घोषित करने की मांग की थी। इसके बाद प्रदेश सरकार ने महावीर जयंती की छुट्टी के संबंध में स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर जिला कलेक्टरों को निर्णय लेने की छूट दी थी। जिला प्रशासन ने सभी संबंधित विभागों को संशोधित आदेश का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू हो गया है।
Beauty Tips : इस जादुई जल की कुछ बूंदों से गर्मियों में चमकेगा चेहरा, ठंडक मिलेगी अलग, जानें तरीका

Last Updated:March 29, 2026, 19:29 IST Skin Care Summer : रोज वॉटर एक नेचुरल टोनर की तरह काम करता है. यह स्किन के पीएच लेवल को संतुलित करता है और डलनेस घटाता है. गर्मियों में इसे अपनी डेली स्किन केयर रूटीन में शामिल कर सकते हैं. चंदौली की डॉ. रिद्धी पांडे लोकल 18 से कहती हैं कि इसे इस्तेमाल करने का तरीका भी आसान है. नियमित उपयोग से पिंपल्स धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. जिन लोगों को गर्मियों में ज्यादा पसीना आता है, उनके लिए भी रोज वॉटर रामबाण से कम नहीं है. चंदौली. गर्मियों की शुरुआत होते ही त्वचा से जुड़ी कई समस्याएं सामने आने लगती हैं. तेज धूप, पसीना, धूल और प्रदूषण के कारण स्किन डल, रूखी और बेजान दिखने लगती है, ऐसे में लोग अपनी त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए कई तरह के उपाय अपनाते हैं. इन्हीं उपायों में से एक बेहद आसान और प्रभावी तरीका रोज वॉटर (गुलाब जल) का इस्तेमाल है. यह न सिर्फ त्वचा को ठंडक पहुंचाता है, बल्कि उसे ताजगी और निखार भी देता है. लोकल 18 से चंदौली की डॉ. रिद्धी पांडे बताती हैं कि रोज वॉटर एक नेचुरल टोनर की तरह काम करता है. यह स्किन के पीएच लेवल को संतुलित करता है और डलनेस को कम करने में मदद करता है. डॉ. रिद्धी कहती हैं कि गर्मियों में इसे अपनी डेली स्किन केयर रूटीन में शामिल करना बेहद फायदेमंद हो सकता है. इसे इस्तेमाल करने का सबसे आसान तरीका है कि आप रोज वॉटर में थोड़ा ग्लिसरीन और नींबू का रस मिलाकर एक स्प्रे तैयार कर लें. इस मिश्रण को सुबह फेस वॉश करने के बाद और रात में सोने से पहले चेहरे पर स्प्रे किया जा सकता है. यह त्वचा को हाइड्रेट रखता है और सीरम की तरह काम करता है. रोज वॉटर के साथ तुलसी डॉ. रिद्धी पांडे कहती हैं कि अगर किसी को पिंपल्स या एक्ने की समस्या है, तो रोज वॉटर के साथ तुलसी का इस्तेमाल काफी असरदार साबित हो सकता है. तुलसी में एंटीऑक्सीडेंट, एंटीबैक्टीरियल और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण होते हैं, जो त्वचा की सूजन और बैक्टीरिया को कम करने में मदद करते हैं. इसके लिए तुलसी के पत्तों का पेस्ट बनाकर उसमें रोज वॉटर और थोड़ा नींबू मिलाएं और इसे चेहरे पर स्प्रे या हल्के हाथ से लगाएं. नियमित उपयोग से पिंपल्स धीरे-धीरे कम होने लगते हैं. जिन लोगों को गर्मियों में ज्यादा पसीना आता है, उनके लिए भी रोज वॉटर बेहद लाभकारी है. यह त्वचा को ठंडक देता है और ताजगी बनाए रखता है. त्वचा के पोर्स को टाइट करने में भी मदद करता है, जिससे ऑयल कंट्रोल रहता है. हर घर का हिस्सा रोज वॉटर एक ऐसा प्राकृतिक उत्पाद है, जो लगभग हर घर में आसानी से उपलब्ध होता है और हर स्किन टाइप के लिए सुरक्षित है. चाहे सुबह की शुरुआत हो या रात की देखभाल, इसे अपने रूटीन में शामिल करके त्वचा को स्वस्थ और चमकदार बनाया जा सकता है. इस गर्मी, महंगे ब्यूटी प्रोडक्ट्स के बजाय रोज वॉटर जैसे सरल और प्राकृतिक उपाय अपनाकर अपनी त्वचा को सुरक्षित और खूबसूरत बनाए रखें. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Chandauli,Uttar Pradesh First Published : March 29, 2026, 19:29 IST
2 लैब में क्रायोनिक्स तकनीक से शवों का संरक्षण:मौत के बाद जीवन की चाह; 2 करोड़ खर्च कर जमा रहे शरीर, उम्मीद- विज्ञान जिंदा कर देगा

मौत को भौतिक रूप से शरीर का अंत मानते हैं। लेकिन दुनिया के कुछ लोग इसे ‘रुकावट’ मानकर भविष्य में फिर से जीने की तैयारी कर रहे हैं। एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रायोनिक्स तकनीक के जरिए लोग अपने शरीर या सिर्फ दिमाग को 196 डिग्री सेल्सियस के तरल नाइट्रोजन में संरक्षित करवा रहे हैं, इस उम्मीद में कि भविष्य में विज्ञान इतना आगे बढ़ जाएगा कि उन्हें फिर जीवित कर दिया जाएगा। क्रायोनिक्स कोई नई तकनीक नहीं है। 1967 में जेम्स बेडफोर्ड पहले व्यक्ति बने, जिन्हें इस तरीके से संरक्षित किया गया। यानी यह तकनीक करीब 60 साल पुरानी है। आज भी उनका शरीर संरक्षित है, हालांकि उस समय की तकनीक सीमित थी और कोशिकाओं को नुकसान ज्यादा होता था। इस प्रक्रिया की शरुआत मौत के तुरंत बाद होती है। शरीर को तेजी से ठंडा किया जाता है, फिर खून की जगह खास केमिकल क्रायो-प्रोटेक्टेंट डाले जाते हैं, ताकि कोशिकाओं में बर्फ न जमे। इसके बाद शरीर को धीरे-धीरे 196° डिग्री सेल्सियस तक ठंडा कर कांच जैसी अवस्था (विट्रिफिकेशन) में रखा जाता है। कुछ लोग पूरा शरीर संरक्षित कराते हैं, जबकि कुछ सिर्फ दिमाग, क्योंकि ये यादों और पहचान से जुड़ा है। भविष्य की तकनीक विकसित हो गई तो दिमाग को नए शरीर या अन्य नेटवर्क में ‘लिंक’ करना संभव होगा। रिसर्चर राल्फ मर्कल का मानना है कि भविष्य में नैनोटेक्नोलॉजी के विकास के साथ यह संभव हो सकता है। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि फ्रीजिंग के दौरान कोशिकाएं और टिश्यू डैमेज हो जाते हैं, खासकर दिमाग जैसे जटिल अंग में। हालांकि आज की तकनीक पहले से बेहतर हो चुकी है, फिर भी रिवाइवल अभी विज्ञान की पहुंच से दूर है। हालांकि कई लोगों का मानना है कि भविष्य में मेडिकल साइंस इसे संभव करेगी। पूरा शरीर संरक्षित कराने में 2 करोड़ रुपए का खर्च दुनिया में अल्कोर लाइफ एक्सटेंशन फाउंडेशन (एरिजोना) और क्रायोनिक्स इंस्टिट्यूट (मिशिगन) जैसी संस्थाएं यह सेवा दे रही हैं। 500 से ज्यादा लोग क्रायोनिक्स के तहत संरक्षित किए जा चुके हैं। हजारों लोग भविष्य के लिए रजिस्ट्रेशन करा चुके हैं। पूरे शरीर को संरक्षित कराने में 1.5 से 2 करोड़ रु. तक लगते हैं। सिर्फ दिमाग (न्यूरो-) के लिए 60-70 लाख रु. खर्च आता है। कई लोग बीमा का सहारा लेते हैं।
गर्मी का कौन सा फल भारत में सबसे ज्यादा उपजता है? आम, तरबूज, नारियल सोच रहे हैं तो गलत हैं आप, ये है खास

Asian Palmyra Palm Benefits : जब भारत में गर्मियों के फलों की बात होती है, तो सबसे पहले आम, तरबूज़, नारियल और खरबूज़ का ही ख्याल आता है. बाज़ार इन बेहतरीन मौसमी फलों से भरे रहते हैं, जो शरीर को हाइड्रेट रखते हैं और पोषक तत्वों से भरपूर होते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत गर्मियों के एक ऐसे फल का सबसे बड़ा उत्पादक है जिसके बारे में ज़्यादा लोग नहीं जानते आइस एप्पल (जिसे ताड़गोला या नुंगू भी कहा जाता है)? यह पोषक तत्वों से भरपूर, जेली जैसा फल है जिसमें कैलोरी भी बहुत कम होती है. आइए जानते हैं इसके बारे में… आइस एप्पल एक ऐसा फल है जिसमें 95% पानी होता है और यह इलेक्ट्रोलाइट्स (पोटेशियम, कैल्शियम), आयरन और विटामिन B-कॉम्प्लेक्स से भरपूर होता है. इसी वजह से गर्मियों के मौसम में ठंडक पहुंचाने के लिए यह एक लोकप्रिय प्राकृतिक फल है. इसकी खेती मुख्य रूप से तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और बिहार में की जाती है, और अप्रैल से जुलाई तक अपने मुख्य मौसम के दौरान, यह ग्रामीण समुदायों के लिए खेती के माध्यम से आजीविका का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनता है. इम्यूनिटी और हड्डियों के स्वास्थ्य रखताएक अध्ययन के अनुसार, आइस एप्पल फ्रूट पल्प एक्सट्रैक्ट मानव पीरियोडोंटल लिगामेंट फाइब्रोब्लास्ट की जीवन-क्षमता को बनाए रखते हैं. यह फल विटामिन A, B और C का, साथ ही जिंक, आयरन, फास्फोरस और कैल्शियम जैसे खनिजों का भी एक स्रोत है. ये पोषक तत्व शरीर के विभिन्न कार्यों में योगदान देते हैं, जिनमें प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना और हड्डियों के स्वास्थ्य को बनाए रखना शामिल है. लू से बचाता हैयह रसीला, हाइड्रेटिंग और प्राकृतिक रूप से ठंडक देने वाला होता है, जो शरीर को अंदरूनी राहत देता है और लू से बचाता है. आयुर्वेद और सिद्ध जैसी पारंपरिक भारतीय चिकित्सा पद्धतियों के अनुसार, आइस एप्पल का उपयोग पित्त दोष को संतुलित करने के लिए किया जाता है, जो गर्मी और सूजन से जुड़ा होता है. यह पाचन तंत्र को आराम देता है, और एसिड रिफ्लक्स, गर्मी के कारण होने वाली अपच और जलन जैसी समस्याओं को दूर करता है. पेट के लिए है फायदेमंदफाइबर से भरपूर होने के कारण, यह पेट के लिए एक फायदेमंद फल है, क्योंकि यह पाचन से जुड़ी आम समस्याओं को नियंत्रित करने में मदद करता है खासकर गर्मियों के महीनों में. इसे मल त्याग को नियमित करने और कब्ज से बचाने में भी सहायक माना जाता है. ( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.)
मैंगो राइस रेसिपी: घर पर सिर्फ 10 मिनट में बनाएं मैंगो राइस, एक बार खाएंगे तो बार-बार मिर्च; नोट करें रेसिपी

मैंगो राइस रेसिपी: गर्मियों का मौसम आते ही मन कुछ ठंडा और ताज़ा खाना लाता है। वैसे तो आम को फलों का शेक राजा कहा जाता है और लोग इसे फलों का शेक के रूप में खाना पसंद करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी आम का इस्तेमाल करके इसका मुख्य भोजन तैयार किया है? दक्षिण भारत का प्रसिद्ध व्यंजन ‘मैंगो पिक्चराना’ या ‘मैंगो राइस’ एक ऐसी ही रेसिपी है जो स्वाद और सेहत में लाजवाब है। अगर आपके पास समय कम है और आप कुछ स्वादिष्ट खाना चाहते हैं, तो यह रेसिपी आपके लिए असरदार है। आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान विधि। मैंगो राइस के लिए आवश्यक सामग्री चावल उगायेकच्चा आममूंहचना दाल और उड़द दालकैरी पत्ताहरी मिर्चराय हल्दी पाउडरनमकतेलहरा धनियाहींग सबसे पहले एक कड़ाही में तेल गरम करें। इसमें राय डालें और उसे चटकने दें। अब हींग, चना दाल, उड़द दाल और मूंगफली। एक्सपोज़ को स्पेक्ट्रम होने से लेकर पोर्टफोलियो तक।अब कटी हुई हरी मिर्च और कैरी के पत्ते डालें। इसके बाद हल्दी पाउडर लगाएं। ध्यान रहे कि हल्दी जलनी नहीं चाहिए।अब कद्दूकस किया हुआ रॉ आम कैडी में डाल दिया गया। इसे 1-2 मिनट तक सलाह दें जब तक कि आम का कच्चापन थोड़ा कम न हो जाए। आम को बहुत ज्यादा गलाना नहीं है, माइक पिक्चर क्रंच बनाना चाहिए।अब सबसे पहले इसमें चावल और स्वाद नमक का लेखा-जोखा दिया गया है। हाथों से पकौड़े ताकि चावल के दाने न टूटे और मसाला समान रूप से मिल जाए।बंद कर दें और ऊपर से ताज़ा कटा हुआ हरा धनिया डालें। अगर आपको तीखा पसंद है तो आप ऊपर से थोड़ा और लाल मिर्च भी छिड़क सकते हैं। (टैग्सटूट्रांसलेट) मैंगो चित्रन्ना रेसिपी (टी) कच्चे आम चावल (टी) दक्षिण भारतीय चावल रेसिपी (टी) कर्नाटक भोजन (टी) ग्रीष्मकालीन स्वस्थ रेसिपी (टी) आसान चावल रेसिपी (टी) आम चित्रन्ना (टी) कच्चा आम चावल (टी) त्वरित भारतीय रेसिपी








