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531 प्रेजेंटेशन में सुनाए गए 870 चुटकुलों पर आधारित रिपोर्ट:वैज्ञानिकों के 66% जोक्स फ्लॉप, सिर्फ 9% पर खुलकर हंसी: स्टडी

531 प्रेजेंटेशन में सुनाए गए 870 चुटकुलों पर आधारित रिपोर्ट:वैज्ञानिकों के 66% जोक्स फ्लॉप, सिर्फ 9% पर खुलकर हंसी: स्टडी

वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर जितने गंभीर होते हैं, कॉन्फ्रेंस टॉक्स में उनके जोक्स (चुटकुले) उतने ही कम असरदार निकल रहे हैं। प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी में छपी एक स्टडी के मुताबिक 14 बायोलॉजी कॉन्फ्रेंस के 531 प्रेजेंटेशन में की गई हंसी-मजाक की 66% कोशिशें फ्लॉप रहीं। इन पर दर्शकों ने या तो हल्की-सी शिष्टाचार वाली मुस्कान दी या फिर कोई रिएक्शन नहीं दिया। स्टडी में कुल 870 जोक्स दर्ज किए गए। इनमें से सिर्फ 9% जोक्स पर पूरी ऑडियंस खुलकर हंसी। करीब 24% मौकों पर जोक्स को मध्यम सफलता मिली, यानी लगभग आधे लोग हंसे। स्टडी की सह-लेखिका विक्टोरिया स्टाउट के अनुसार वैज्ञानिक मजाक को जरूरी स्किल नहीं मानते। उनका कहना है कि ह्यूमर से लोग आपको ज्यादा याद रखते हैं और सहयोग की संभावना भी बढ़ती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों ने अधिक जोक्स किए अध्ययन के अनुसार, महिला वैज्ञानिकों के मुकाबले पुरुषों ने मंच पर अधिक जोक्स सुनाए और मजाक करने का रिस्क लिया। कुल प्रेजेंटेशन में से लगभग 60% में कम से कम एक बार हंसी का माहौल बनाने की कोशिश की गई। वहीं, 40% वैज्ञानिकों ने अपनी बात पूरी तरह गंभीर रखी, ताकि जोक फेल होने का कोई खतरा न रहे। बोरियत से शुरू हुई नोटिंग, फिर बन गई स्टडी सह-लेखिका विक्टोरिया स्टाउट ने पीएचडी की बोरियत दूर करने के लिए वक्ताओं के जोक्स नोट किए, जो बाद में रिसर्च का आधार बने। उन्होंने इटली के स्टेफानो मैमोला के साथ 2022-24 के बीच 14 बायोलॉजी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। टीम ने यह भी रिकॉर्ड किया कि मजाक करने के बाद वक्ता दर्शकों की हंसी के लिए कितनी देर तक इंतजार करते हैं। खुद की गलतियों पर बने सबसे ज्यादा मजाक वैज्ञानिकों के जोक्स में सबसे ज्यादा चर्चा खुद की गलतियों और तकनीकी दिक्कतों की रही, जिसे शोधकर्ताओं ने मानवीय पहलू माना। रिसर्च टॉपिक व फील्ड वर्क के किस्से भी कॉमेडी का जरिया बने। साइंस राइटर टायलर सोडरबोर्ग ने कहा कि बायोलॉजिस्ट्स का जोक्स के प्रति यह उत्साह अच्छी बात है, भले ही वे हर बार दर्शकों को हंसाने में पूरी तरह सफल न हो पाए हों।

मछुआ नीति में बदलाव को रोकने छतरपुर में ज्ञापन सौंपा:मछुआरों की आजीविका पर असर, सरकार को चेतावनी- नीलामी की तैयारी से विरोध करेंगे

मछुआ नीति में बदलाव को रोकने छतरपुर में ज्ञापन सौंपा:मछुआरों की आजीविका पर असर, सरकार को चेतावनी- नीलामी की तैयारी से विरोध करेंगे

प्रदेश में मछुआ नीति 2008 में बदलाव की संभावनाओं के बीच मांझी (निषाद) समाज में आक्रोश बढ़ रहा है। इसी क्रम में मंगलवार को छतरपुर जिले में समाज के लोगों ने मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। इसमें नीति में किसी भी प्रकार का परिवर्तन न करने की मांग की गई है। समाज के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि वर्ष 2008 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने वंशानुगत मछुआरों के हितों की रक्षा के लिए यह मछुआ नीति लागू की थी। इस नीति के तहत, तालाबों का संचालन पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों द्वारा किया जाता है, जिससे पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने वाले परिवारों को आजीविका मिलती है। हालांकि, अब सरकार इस व्यवस्था में बदलाव करने और तालाबों की खुली नीलामी कराने की तैयारी कर रही है। वंशानुगत अधिकार छिनने का डर समाज का आरोप है कि इस बदलाव से वंशानुगत मछुआरों का अधिकार छिन जाएगा और बाहरी ठेकेदारों का प्रभाव बढ़ेगा। इससे उनकी आजीविका पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इसी बीच, पूरे प्रदेश में निषाद समाज गुहराज निषाद की जयंती मना रहा है। इस अवसर पर समाज के लोगों ने अपनी परंपरा और भगवान श्रीराम से जुड़े इतिहास का हवाला देते हुए सरकार से अपनी आजीविका के अधिकारों को सुरक्षित रखने की मांग दोहराई है। छतरपुर में सौंपे गए ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि मछुआ नीति 2008 में कोई बदलाव न किया जाए। ऐसा न होने पर प्रदेशभर में आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी गई है।

बदलता दौर या कुछ और.. सुनामी की तरह देश में क्यों फैल रही हैं ये 2 खतरनाक बीमारी? डॉक्टर ने बताए कारण

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आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा में डायबिटीज और ब्लड प्रेसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है. चिकित्सक ने बताया कि यह एक चिंता का विषय है कि दोनों ही बीमारी भारत में तेजी से फैल रही है. डायबिटीज और बीपी अब कम उम्र और बच्चों में भी देखने को मिल रही है. चिकित्सक ने बताया कि बदलते समय के साथ बदलती जीवनशैली और अनहेल्दी फूड इन सब बीमारियों का मुख्य कारण है. चिकित्सक ने कहा कि पहले लोग पैदल और शारीरिक मेहनत करते थे, लेकिन अब हर किसी के पास बाइक, कार और अन्य वाहन है, कोई भी पैदल नहीं चलना चाहता है. मेहनत की जगह अब कई तरह के इलेक्ट्रॉनिक आइटम आ गए हैं, जिससे लोग आलसी होते जा रहे हैं. बाजार का खाना, जंग फूड, पैकट फूड लोगों को बीमार कर रहा है. जंक फूड से बनाएं दूरीउन्होंने कहा कि यही सभी कारण है कि लोग ब्लड प्रेसर, डायबिटीज और मोटापे के शिकार हो रहे हैं. चिकित्सक ने कहा कि इससे बचने के लिए सबसे अच्छा और बेहतर उपाय शारीरिक मेहनत, सुबह के समय वॉक, हेल्दी फूड और जंग फूड से दूरी बनाना है. उन्होंने कहा कि घर का बना शुद्ध खाना ही खाना चाहिए. मोमोज, चाउमीन, बर्गर और अन्य सभी इस तरह के फूड से बचना चाहिए. सुनामी की तरह फैल रही है ये बीमारीआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक ने बताया कि डायबिटीज और बीपी की बीमारी सुनामी की तरह फैलती जा रही है. उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य ने अपनी लाइफस्टाइल नहीं बदली, तो यह बीमारी आम हो जाएगी और हर व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है. इससे बचना बेहद जरूरी है और उसके लिए सही खान-पान और शारीरिक मेहनत करना जरूरी है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि डायबिटीज (शुगर) और हार्ड ब्लड प्रेशर से बचने के लिए स्वस्थ जीवनशैली अपनाना सबसे जरूरी है. उन्होंने कहा कि प्रतिदिन 30 मिनट का व्यायाम, कम नमक और चीनी वाला संतुलित आहार, पर्याप्त नींद (कम से कम 7 से 8 घंटे) लेनी चाहिए. डॉ. ने कहा कि स्वस्थ्य रहने के लिए धुम्रपान, शराब और पान मसाले से दूरी बनाकर रखनी चाहिए. उन्होंने कहा कि मनुष्य को अपने वजन को नियंत्रण में रखना चाहिए. उन्होंने कहा कि साल में कम से कम 6-6 महीने के अंतराल में अपना शारीरिक जांच कराते रहना चाहिए. अनहेल्दी फूड से करें बचावआगरा के वरिष्ठ चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि बीमारियों से बचने के लिए अनहेल्दी फ़ूड से बचना चाहिए. उन्होंने कहा कि जंक फूड, फास्ट फूड और प्रोसेस्ड फूड में चीनी, नमक, खराब फैट और कैलोरी बहुत ज्यादा होती है, जो शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचाने का कार्य करती है. अनहेल्दी फ़ूड से पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा उन्होंने कहा कि इस अनहेल्दी फ़ूड के कारण मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, फैटी लीवर और पाचन संबंधी समस्याओं का खतरा बहुत ज्यादा बढ़ जाता है. चिकित्सक आशीष मित्तल ने बताया कि हेल्दी फ़ूड हेल्थ के लिए बेहद फायदेमंद होता है. हेल्दी प्रोटीन युक्त भोजन मांसपेशियों को मजबूत बनाता है. इसके सेवन से वजन नियंत्रित रहता है. डॉ. आशीष मित्तल ने बताया कि हेल्दी फ़ूड खाने से यह त्वचा, बाल और नाखूनों के स्वास्थ्य को सुधारने के साथ-साथ हड्डियों को मजबूत और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का भी कार्य करता है, जिससे आसानी से व्यक्ति बीमार नहीं पड़ता है. Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल में शनिवार को डिमोना और नजदीकी‎ शहर अराद पर गिरी ईरान की दो बैलिस्टिक ‎मिसाइलों ने इजराइलियों को स्तब्ध कर दिया है। ‎इजराइल के दक्षिण नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर ‎से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित उसके प्रमुख‎ परमाणु रिसर्च सेंटर और रिएक्टर के मुकाबले कुछ ‎ही स्थान ऐसे होंगे जो इनसे ज्यादा सुरक्षित हों।‎ इसलिए तीन घंटे के अंतर से गिरी दो ईरानी‎ मिसाइलों ने इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम‎ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।‎ विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि पिछले साल‎ईरान से 12 दिन के युद्ध में इनका जखीरा खत्म ‎हो गया होगा। यह चिंता आने वाले सप्ताहों में‎ और गहरी होगी। इजराइल के सैनिक अधिकारियों ‎ने बताया, वे जांच कर रहे हैं कि गड़बड़ी कहां हुई‎ है। लेकिन विस्तृत ब्योरे पर चुप्पी साध रखी है।‎ रविवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ‎प्रभावित स्थानों का दौरा करने के बाद‎ इजराइलियों से कहा कि वे बेफिक्र न रहें। मिसाइल ‎अलर्ट आने पर बम शेल्टर में शरण लें।‎ इजराइली सेना ने ईरान की बैलिस्टिक‎ मिसाइलों को रोकने की दर 90% बताई है। ‎अधिकारियों का कहना है कि डिफेंस सिस्टम ‎रोकथाम की 100% क्षमता कभी हासिल नहीं ‎कर सकते हैं। इजराइली एयर और मिसाइल ‎डिफेंस सिस्टम के पूर्व कमांडर ब्रिगेडियर जनरल‎ रैन कोचाव ने बताया कि डिमोना बहुस्तरीय ‎इजराइली और अमेरिकी डिफेंस सिस्टम से‎ सुरक्षित था। यह ऑपरेशनल नाकामी है।‎ इजराइल के मिसाइल डिफेंस में आयरन डोम‎ प्रमुख है। लेकिन इसे हमास की कम दूरी की‎ मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है।‎ बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का उसका सबसे ‎आधुनिक हथियार एरो-3 है, लेकिन एरो-3‎‎सिस्टम महंगा है। उसे बनाने में समय लगता है।‎ इजराइली मीडिया ने रविवार को बताया कि अराद‎ और डिमोना में एरो-3 तैनात नहीं था। इजराइल ‎और अमेरिका द्वारा तैयार एंटीबैलिस्टिक मिसाइल‎ सिस्टम धरती के वातावरण के बाहर अंतरिक्ष में ‎मिसाइलों को रोकता है। इजराइल में अमेरिका का‎ थाड सिस्टम भी तैनात है।‎ अधिक इंटरसेप्टर की मांग‎ इजराइली रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल अमीर‎ बराम इस माह अधिक इंटरसेप्टर और गोला-बारूद ‎सप्लाई करने की मांग करने वाशिंगटन गए थे। नाम‎न बताने की शर्त पर तीन इजराइली अधिकारियों ने‎ यह जानकारी दी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं ‎हुआ है कि क्या अमेरिका अधिक सप्लाई के लिए‎ सहमत हो गया है।‎ क्लस्टर मिसाइलों से खतरा‎ जमीन से कुछ किलोमीटर ऊपर फटने वाली ‎ईरान की क्लस्टर मिसाइलें घातक साबित हो‎ रही हैं। अराद, डिमोना, तेल अवीव और ‎यरूशलम के पास बेट शेमेश पर हमलों के‎ अलावा अन्य इलाकों में बड़े मिसाइल के‎ हिस्सों या क्लस्टर मिसाइलों से कई बिल्डिंग‎ और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।‎ इजराइल के सेफ्टी सिस्टम के कमजोर होने पर चिंता‎ पिछले साल जून में 12 दिन के युद्ध की‎समाप्ति के बाद इजराइली सेना ने चिंता‎जताई थी कि क्या देश का मिसाइल एयर‎डिफेंस सिस्टम ईरान की बैलिस्टिक‎मिसाइल खत्म होने से पहले ही चुक‎जाएगा। उस वक्त अधिकारियों ने कहा था‎कि इजराइल को अपने इंटरसेप्टर बचा कर‎खर्च करना होंगे। उसे सामरिक इंफ्रास्ट्रक्चर‎को अहमियत देना पड़ेगी। वैसे इजराइली‎ सेना ने इन बातों का खंडन किया है।‎

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल में शनिवार को डिमोना और नजदीकी‎ शहर अराद पर गिरी ईरान की दो बैलिस्टिक ‎मिसाइलों ने इजराइलियों को स्तब्ध कर दिया है। ‎इजराइल के दक्षिण नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर ‎से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित उसके प्रमुख‎ परमाणु रिसर्च सेंटर और रिएक्टर के मुकाबले कुछ ‎ही स्थान ऐसे होंगे जो इनसे ज्यादा सुरक्षित हों।‎ इसलिए तीन घंटे के अंतर से गिरी दो ईरानी‎ मिसाइलों ने इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम‎ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।‎ विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि पिछले साल‎ईरान से 12 दिन के युद्ध में इनका जखीरा खत्म ‎हो गया होगा। यह चिंता आने वाले सप्ताहों में‎ और गहरी होगी। इजराइल के सैनिक अधिकारियों ‎ने बताया, वे जांच कर रहे हैं कि गड़बड़ी कहां हुई‎ है। लेकिन विस्तृत ब्योरे पर चुप्पी साध रखी है।‎ रविवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ‎प्रभावित स्थानों का दौरा करने के बाद‎ इजराइलियों से कहा कि वे बेफिक्र न रहें। मिसाइल ‎अलर्ट आने पर बम शेल्टर में शरण लें।‎ इजराइली सेना ने ईरान की बैलिस्टिक‎ मिसाइलों को रोकने की दर 90% बताई है। ‎अधिकारियों का कहना है कि डिफेंस सिस्टम ‎रोकथाम की 100% क्षमता कभी हासिल नहीं ‎कर सकते हैं। इजराइली एयर और मिसाइल ‎डिफेंस सिस्टम के पूर्व कमांडर ब्रिगेडियर जनरल‎ रैन कोचाव ने बताया कि डिमोना बहुस्तरीय ‎इजराइली और अमेरिकी डिफेंस सिस्टम से‎ सुरक्षित था। यह ऑपरेशनल नाकामी है।‎ इजराइल के मिसाइल डिफेंस में आयरन डोम‎ प्रमुख है। लेकिन इसे हमास की कम दूरी की‎ मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है।‎ बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का उसका सबसे ‎आधुनिक हथियार एरो-3 है, लेकिन एरो-3‎‎सिस्टम महंगा है। उसे बनाने में समय लगता है।‎ इजराइली मीडिया ने रविवार को बताया कि अराद‎ और डिमोना में एरो-3 तैनात नहीं था। इजराइल ‎और अमेरिका द्वारा तैयार एंटीबैलिस्टिक मिसाइल‎ सिस्टम धरती के वातावरण के बाहर अंतरिक्ष में ‎मिसाइलों को रोकता है। इजराइल में अमेरिका का‎ थाड सिस्टम भी तैनात है।‎ अधिक इंटरसेप्टर की मांग‎ इजराइली रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल अमीर‎ बराम इस माह अधिक इंटरसेप्टर और गोला-बारूद ‎सप्लाई करने की मांग करने वाशिंगटन गए थे। नाम‎न बताने की शर्त पर तीन इजराइली अधिकारियों ने‎ यह जानकारी दी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं ‎हुआ है कि क्या अमेरिका अधिक सप्लाई के लिए‎ सहमत हो गया है।‎ क्लस्टर मिसाइलों से खतरा‎ जमीन से कुछ किलोमीटर ऊपर फटने वाली ‎ईरान की क्लस्टर मिसाइलें घातक साबित हो‎ रही हैं। अराद, डिमोना, तेल अवीव और ‎यरूशलम के पास बेट शेमेश पर हमलों के‎ अलावा अन्य इलाकों में बड़े मिसाइल के‎ हिस्सों या क्लस्टर मिसाइलों से कई बिल्डिंग‎ और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।‎ इजराइल के सेफ्टी सिस्टम के कमजोर होने पर चिंता‎ पिछले साल जून में 12 दिन के युद्ध की‎समाप्ति के बाद इजराइली सेना ने चिंता‎जताई थी कि क्या देश का मिसाइल एयर‎डिफेंस सिस्टम ईरान की बैलिस्टिक‎मिसाइल खत्म होने से पहले ही चुक‎जाएगा। उस वक्त अधिकारियों ने कहा था‎कि इजराइल को अपने इंटरसेप्टर बचा कर‎खर्च करना होंगे। उसे सामरिक इंफ्रास्ट्रक्चर‎को अहमियत देना पड़ेगी। वैसे इजराइली‎ सेना ने इन बातों का खंडन किया है।‎

सीने में दर्द को न करें नजरअंदाज | symptoms of heart attack

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Last Updated:March 24, 2026, 14:58 IST सीने में अचानक होने वाला दर्द एक गंभीर संकेत हो सकता है, जिसे नजरअंदाज करना जानलेवा साबित हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार, यह समस्या युवाओं में भी तेजी से बढ़ रही है और समय पर इलाज न मिलने पर हार्ट अटैक का कारण बन सकती है. मऊ. अक्सर देखा जाता है छोटी-छोटी समस्याओं को लोग नजर अंदाज करते हैं, लेकिन उन्हें या नहीं पता कि छोटी सी लापरवाही उनकी जान ले सकती है. वर्तमान में देखा जा रहा है लोगों के सीने में दर्द अधिक हो रहा है और इस दर्द को नजर अंदाज करना लोगों को भारी पड़ जा रहा है. इस बीमारी को लेकर एक्सपर्ट क्या सलाह दे रहे हैं. लोकल 18 से बात करते हुए प्रेमा मल्टी स्पेशलिटी हॉस्पिटल के डॉक्टर अरमान अली बताते हैं कि सीने में दर्द कई कारणों से अचानक शुरू हो रही हैं, जिसमें ज्यादा शिकार युवा हो रहे हैं. यह समस्या हर उम्र के लोगों में देखी जा रही है और यह बड़ी बीमारी बनती चली जा रही है और छोटी सी लापरवाही इस बीमारी में जान तक ले रह रही है, क्योंकि इस बीमारी में सीने में तीव्र गति से अचानक दर्द शुरू हो रहा है. इसमें लोगों को पसीना अधिक आना शुरू हो जा रहा है और उनकी सांस फूलने लगा रही हैं. यदि आप के सीने में अचानक दर्द शुरू हो रहा है तो किसी नजदीकी योग्य चिकित्सक को दिखाकर अपना इलाज शुरू कर दें नहीं आपकी समस्या बढ़ सकती है. छोटी सी लापरवाही में जा सकती है जानयदि इस बीमारी में आप लापरवाही बढ़ाते हैं तो अचानक सीने का दर्द हार्ट अटैक हो सकता है और दिल की गड़बड़ी की वजह से अचानक हृदय गति रुक सकती है और मौत भी हो सकती है. सीने के दर्द को हल्के में ना ले किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें, नहीं तो छोटी सी लापरवाही आपकी जान ले सकती है. यदि आप बीपी, थायराइड या शुगर जैसी बीमारी से ग्रसित हो तो इस बीमारी में आप सावधानी बरतना जरूरी हैं क्योंकि इन बीमारियों में यह समस्या तेजी से आती है और लोगों के सीने में अचानक दर्द होने लगता है जो हृदय गति को रोक देता है. सीने में दर्द से बचने के लिए शुगर बीपी को करें मेंटेनइस समस्या से बचने के लिए यदि आप शुगर के पेशेंट हैं तो शुगर के अनुसार अपना खान-पान रखें, शुगर को मेंटेन रखें. यदि बीपी के मरीज है तो नमक कम खाएं यदि कोलेस्ट्रॉल ज्यादा रहता है तो नियमित व्यायाम करें. हाई-फाई डाइट को अवॉइड करें और हरी सब्जियों का ज्यादा सेवन करें.  सीने का दर्द अचानक शुरू होता है और बहुत तीव्र गति से पहुंचता है यह दर्द अधिकतर कुछ सेकंड या मिनट का होता है, लेकिन कुछ लोगों का दर्द घंटे चला जाता है. जिसमें मरीज की हालत गंभीर बन जाती है और कभी-कभी जान चली जाती है. यदि छाती में दर्द के साथ पसीने आए तो यह हार्ट अटैक के कारण बन सकते हैं. ऐसे में सावधान रहें यदि सेने में दर्द शुरू हो तो किसी योग्य चिकित्सक को दिखाकर इलाज शुरू कर दें. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Mau,Uttar Pradesh First Published : March 24, 2026, 14:58 IST

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल में वोटर लिस्ट पर मतदान! आधी रात जारी की गई ऐतिहासिक सूची से बढ़ा तनाव, कितने नाम जुड़े-कटे अब भी रहस्य

पश्चिम बंगाल चुनाव 2026: बंगाल में वोटर लिस्ट पर मतदान! आधी रात जारी की गई ऐतिहासिक सूची से बढ़ा तनाव, कितने नाम जुड़े-कटे अब भी रहस्य

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सांस्कृतिक कलाकारों की सूची ने राज्य की राजनीति में नया तूफ़ान खड़ा कर दिया है। चुनाव आयोग ने सोमवार 23 मार्च की आधी रात को सबसे पहले एसआईआर मतदाता सूची जारी की, लेकिन अब तक साफ नहीं किया गया कि कुल कितने जिलों का नाम जोड़ा या हटाया गया है, इस अनिश्चितता ने राजनीतिक समीकरण के बीच आरोप-प्रत्यारोप की जंग को तेजी से कर दिया है। 28 फरवरी को जारी अंतिम कलाकार सूची में करीब 60 लाख नाम एडजुडिकेशन के तहत कलाकार दिए गए थे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर 705 शहीद अधिकारियों के इन मामलों की समीक्षा के लिए सुझाव दिया गया है। मुख्य अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि अब तक लगभग 29 लाख लाख का निर्णय लिया जा चुका है, जबकि शेष मामलों की प्रक्रिया जारी है। गॉडफादर ने सवाल उठाया रूढ़िवादी कांग्रेस ने इस प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। कोलकाता के मेयर और मंत्री फिरहाद हकीम ने लगाया आरोप. उन्होंने कहा, ‘देखा गया है कि भवानीपुर विधानसभा क्षेत्र में करीब 40 फीसदी आबादी के ताले गिरे हुए हैं. संविधान हमें वोट देने का अधिकार देता है और जो संविधान विरोध करता है, वह भारत का है। अगर चुनाव आयोग भारत के खिलाफ है तो हम उच्च न्यायालय का रुख करेंगे और उसे हटाने की मांग करेंगे, क्योंकि चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है कि हर नागरिक को मतदान का अवसर मिले।’ भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार का जवाब भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुकांत मजूमदार ने भी इस प्रक्रिया को मंदिर पर्यवेक्षण में बताया। उन्होंने कहा, ‘प्रतिनिधि सूची सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और कोलकाता उच्च न्यायालय के अधिकारियों की जांच की तैयारी की जा चुकी है। नामकरण स्तर पर नवीन के साथ क्षेत्र-वार नामांकन पर बैठकें हो रही हैं। इन बैठकों में सीमित पुस्तकालयों को बुलाया जा रहा है और विशेष क्षेत्रों व विभागों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।’ भाजपा प्रत्याशी प्रत्याशी टिबरेवाल ने सूची जारी करते हुए कहा, “नाम आधी रात के बाद के हैं, नाम नहीं हैं। आप सुबह देखिए या शाम को, वही नाम रहते हैं। जो समर्थक शामिल थे, उन्हें अब हटा दिया गया है। लोकतंत्र में केवल वैध समर्थकों को वोट देने का अधिकार है, अवैध लोगों को नहीं।” सूची पर राजनीति फ्लोरिडा को अपना स्टेटस जांचने के लिए बूथ-स्टार की सूची डाउनलोड करने को कहा गया है, लेकिन कई लोगों ने तकनीकी समस्याओं की शिकायत की है। जिन अभियोजकों का नाम उजागर किया गया है, उन्हें 15 दिनों के भीतर न्यायिक न्यायाधिकरण में अपील करने का अधिकार दिया गया है। सूची सूची यह विवाद राजनीति को और तीखा बना सकती है। एक ओर बीजेपी इसे ‘फर्जी वोटरों की सफ़ाई’ बता रही है, वहीं टीएमसी इसे लोकतांत्रिक अधिकार पर हमला दे रही है। अब संस्था चुनाव आयोग के अगले कदम पर गौर कर रही है। अंतिम आँकड़े और आगे जारी करने वाली योजनाएँ ही तय करती हैं कि यह विवाद थमेगा या अल्पमत बॉट को और तेज़ करेगा। इस्लामिक यूरोपियन को देखते हुए राज्य भर में सुरक्षा एपिसोड जारी किया गया है। 294 अरुणाचल प्रदेश के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को होना है, जबकि प्राथमिक 4 मई को होगा। ये भी पढ़ें: हैदराबाद पेट्रोल संकट: पेट्रोल पंप पर नो स्टॉक के बिल, देश के राज्यों में ईरान जंग का असर, पढ़ें पूरी रिपोर्ट (टैग्सटूट्रांसलेट)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल मतदाता सूची विवाद(टी)एसआईआर अनुपूरक सूची(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)चुनाव आयोग भारत(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)वेस्ट बंगाल चुनावी सूची(टी)एसआईआर लिस्ट(टी)टीएमसी बनाम बीजेपी(टी)चुनाव आयोग भारत(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026

फतेहगढ़ साहिब के वकील की कनाडा में मौत:कार चलाते समय आया हार्ट अटैक, तीन साल पहले परिवार के साथ विदेश गए

फतेहगढ़ साहिब के वकील की कनाडा में मौत:कार चलाते समय आया हार्ट अटैक, तीन साल पहले परिवार के साथ विदेश गए

फतेहगढ़ साहिब के 42 वर्षीय वकील हर्षविंदर सिंह चीमा का कनाडा में निधन हो गया है। उनकी मृत्यु दिल का दौरा पड़ने से हुई। इस खबर से फतेहगढ़ साहिब के अधिवक्ताओं और उनके परिचितों में शोक की लहर फैल गई है। हर्षविंदर सिंह चीमा लगभग तीन साल पहले अपने परिवार के साथ कनाडा चले गए थे, जहां उनकी पत्नी और बच्चे भी उनके साथ रह रहे थे। कार चलाते समय हर्षविंदर सिंह को अचानक दिल का दौरा पड़ा, जिससे उनकी मौके पर ही मृत्यु हो गई। उनके पैतृक शहर और साथी वकीलों तक यह खबर पहुंचने पर गहरा शोक व्यक्त किया। कोर्ट कॉम्प्लेक्स में श्रद्धांजलि सभा इस दुखद घटना के बाद, फतेहगढ़ साहिब कोर्ट कॉम्प्लेक्स में वकीलों ने शोक व्यक्त किया। बार एसोसिएशन ने शोक प्रस्ताव पारित किया और बार रूम में दिवंगत आत्मा की शांति के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया। वकीलों ने दो मिनट का मौन रखकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। शोक के तौर पर आज अदालतों में ‘नो वर्क’ रखा गया। एडवोकेट अमरदीप सिंह धारणी ने बताया कि हर्षविंदर सिंह चीमा एक मेहनती और मिलनसार अधिवक्ता थे, जिन्होंने फतेहगढ़ साहिब में लंबे समय तक वकालत की और अपनी पहचान बनाई। उन्होंने उनके आकस्मिक निधन को एक अपूरणीय क्षति बताया। परिवार के सदस्यों के अनुसार, उनका अंतिम संस्कार कनाडा में ही किया जाएगा, क्योंकि उनका पूरा परिवार वहीं रहता है।

लाल-काले शहतूत ने खींचा ध्यान, गर्मियों में सिर्फ 20 दिन मिलता ये खास फल; गजब के फायदे

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Last Updated:March 24, 2026, 14:21 IST Mulberry Benefits: विटामिन सी से भरपूर होने के चलते शहतूत शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है. फाइबर की वजह से गैस, कब्ज और अपच से राहत मिलती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड सर्कुलेशन सुधारने में मददगार हैं. खंडवा. मध्य प्रदेश के खंडवा में गर्मी की शुरुआत होते ही बाजारों में शहतूत लोगों को खूब आकर्षित कर रहा है. लाल और काले रंग का यह छोटा सा फल भले ही दिखने में साधारण लगे लेकिन इसके फायदे इतने जबरदस्त हैं कि लोग सालभर इसका इंतजार करते हैं. शहतूत एक मौसमी फल है, जो गर्मियों में करीब 15 से 20 दिन ही बाजार में देखने को मिलता है. यही वजह है कि इसका सीजन आते ही इसकी मांग तेजी से बढ़ जाती है. यह फल ज्यादातर जंगलों या पेड़ों पर प्राकृतिक रूप से उगता है और सीमित मात्रा में ही बाजार तक पहुंच पाता है. शहतूत का स्वाद मीठा, हल्का खट्टा और थोड़ा कसैला होता है, जो इसे और भी खास बनाता है. इसमें छिलका या बड़े बीज नहीं होते, इसलिए इसे सीधे खा सकते हैं. बच्चे हों या बड़े, हर किसी को इसका स्वाद पसंद आता है. सेहत का खजाना शहतूतडॉक्टर अनिल पटेल के अनुसार, शहतूत में विटामिन सी, आयरन, फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं. यह फल शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ कई बीमारियों से बचाने में मदद करता है. शहतूत के फायदेशहतूत विटामिन सी से भरपूर होने के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत करता है. फाइबर की वजह से कब्ज, गैस और अपच से राहत मिलती है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड सर्कुलेशन सुधारते हैं. शहतूत में मौजूद तत्व शुगर लेवल को संतुलित रखने में मदद करते हैं. यह स्किन को ग्लो देता है और आंखों की रोशनी बढ़ाने में भी मददगार है. वहीं कम कैलोरी और ज्यादा फाइबर होने से वजन घटाने में मदद मिलती है. शरीर को देता है ठंडकगर्मी में शरीर को ठंडा रखना सबसे जरूरी होता है. ऐसे में शहतूत काफी फायदेमंद माना जाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जिससे शरीर को राहत मिलती है और डिहाइड्रेशन से भी बचाव होता है. विशेषज्ञों के अनुसार, रोजाना आधा से एक कप ताजा शहतूत खाना सुरक्षित और फायदेमंद माना जाता है. शहतूत सिर्फ एक फल नहीं बल्कि गर्मियों का नैचुरल हेल्थ टॉनिक है. कम समय के लिए मिलने वाला यह फल स्वाद और सेहत दोनों का जबरदस्त कॉम्बिनेशन है, इसलिए मौका मिले तो इसे जरूर ट्राई करें. About the Author Rahul Singh राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं. Location : Khandwa,Madhya Pradesh First Published : March 24, 2026, 14:21 IST

घर की चारदीवारी से निकलकर मैदान में उतरेंगे 150 दिव्यांग-खिलाड़ी:27 मार्च से दून में शुरू होंगे पैरालंपिक गेम्स; सभी 13 जिलों से खिलाड़ी करेंगे प्रतिभाग

घर की चारदीवारी से निकलकर मैदान में उतरेंगे 150 दिव्यांग-खिलाड़ी:27 मार्च से दून में शुरू होंगे पैरालंपिक गेम्स; सभी 13 जिलों से खिलाड़ी करेंगे प्रतिभाग

उत्तराखंड के दिव्यांग खिलाड़ियों (पैरा एथलीट्स) के लिए अच्छी खबर है। पैरालंपिक एसोसिएशन ऑफ उत्तराखंड के तत्वावधान में 27 से 29 मार्च तक देहरादून के महाराणा प्रताप स्पोर्ट्स स्टेडियम में तीसरे ‘उत्तराखंड राज्य पैरालंपिक गेम्स’ का आयोजन होने जा रहा है। इस राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में प्रदेश के सभी 13 जिलों से लगभग 150 पैरा खिलाड़ी अपना दमखम दिखाएंगे। आयोजन की खास बात यह है कि इस बार पेट्रोलियम स्पोर्ट्स प्रमोशन बोर्ड (PSPB) इन खेलों को प्रायोजित कर रहा है, जिससे सीमित संसाधनों वाले पहाड़ के पैरा खिलाड़ियों को एक बड़ा मंच मिलेगा। प्रतियोगिता की 4 खास बातें पहाड़ के दिव्यांग बच्चों को मिल रही नई जिंदगी आयोजन सचिव प्रेम कुमार ने बताया कि पैरालंपिक एसोसिएशन पिछले 20 सालों से राज्य में पैरा स्पोर्ट्स के विकास के लिए काम कर रहा है। अब तक राज्य के 300 से ज्यादा दिव्यांगजनों को पैरालंपिक खेलों से जोड़ा जा चुका है। उन्होंने बताया, “दिव्यांग लोगों को अमूमन घरों से बाहर ही नहीं निकाला जाता। इन खेलों के माध्यम से पहाड़ के बच्चे घर की चारदीवारी से बाहर निकले हैं। आज ये बच्चे बेंगलुरु, चेन्नई, गांधीनगर और दिल्ली जैसे शहरों में जा रहे हैं और जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करना सीख रहे हैं।” केंद्र के उपक्रमों का मिल रहा साथ, राज्य सरकार से भी सहयोग की अपील एसोसिएशन ने बताया कि पिछले आयोजनों में ONGC का सहयोग मिला था, वहीं इस बार PSPB आगे आया है। आयोजकों का कहना है कि वे केंद्र सरकार के बड़े उपक्रमों का पैसा राज्य के हित और गरीब बच्चों के खेलों के लिए ला रहे हैं। वहीं, इस आयोजन के लिए उत्तराखंड सरकार को भी पत्र लिखकर सहयोग मांगा गया है और सरकार की तरफ से सकारात्मक मदद की उम्मीद जताई जा रही है।