Thursday, 15 Oct 2026 | 09:14 AM

Trending :

EXCLUSIVE

30-35 की उम्र में याददाश्त कमजोर क्यों हो रही है? क्या यह दिमागी बीमारी का संकेत, डॉक्टर से जानिए सच

authorimg

The Science of Brain Fog: जब व्यक्ति बुजुर्ग हो जाता है, तब उसकी याददाश्त कमजोर होने लगती है. यह उम्र का एक असर होता है और कई अन्य कारण भी इस परेशानी को बढ़ा देते हैं. मगर आजकल 30 से 40 साल की उम्र के लोग छोटी-छोटी चीजों को भूल रहे हैं और उनकी याददाश्त कमजोर होती दिख रही है. लोग अपने ऑफिस की चीजों से लेकर घर के कई जरूरी काम भूल जाते हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या यह ब्रेन से जुड़ी किसी बीमारी का संकेत है? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो युवाओं में भूलने की समस्या आमतौर पर कोई बीमारी नहीं होती है. आजकल की मॉडर्न लाइफस्टाइल और वर्कलोड के कारण ऐसा हो रहा है. अत्यधिक तनाव, अधूरी नींद और डिजिटल ओवरलोड के कारण हमारा ब्रेन थका हुआ महसूस कर रहा है. जयपुर के सीके बिरला हॉस्पिटल के न्यूरोसाइंसेस डिपार्टमेंट के डायरेक्ट डॉ. अंजनी कुमार शर्मा ने TOI को बताया कि आज के दौर में हमारा ब्रेन सूचनाओं की बाढ़ से घिरा हुआ है. 90 के दशक में एक कर्मचारी के पास सीमित डिजिटल इनपुट होते थे, लेकिन आज हर कुछ मिनटों में नोटिफिकेशन, ईमेल, व्हाट्सएप मैसेज और सोशल मीडिया अलर्ट्स ध्यान भंग करते हैं. याददाश्त बनाने के लिए एकाग्रता जरूरी है. जब हमारा ध्यान बार-बार डिस्टर्ब होता है, तो ब्रेन जानकारी को ठीक से एनकोड नहीं कर पाता. 30 की उम्र में याददाश्त की शिकायतें अक्सर एकाग्रता की कमी, विटामिन B12 की कमी, थायराइड डिसऑर्डर और स्क्रीन के ओवर एक्सपोजर के कारण होती हैं. अधिकतर मामलों में ऐसा किसी दिमागी बीमारी के कारण नहीं होता है. डॉक्टर के मुताबिक तनाव केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि बायोलॉजिकल प्रक्रिया है. जब हम लगातार तनाव में रहते हैं, तो शरीर कोर्टिसोल नामक हार्मोन रिलीज करता है. कोर्टिसोल की ज्यादा मात्रा ब्रेन के हिप्पोकैम्पस हिस्से को प्रभावित करती है, जो याददाश्त का मुख्य केंद्र है. आज के युवा करियर, फाइनेंशियल प्रेशर और सामाजिक तुलना के बीच लगातार सर्वाइवल मोड में रहते हैं. इस मोड में मस्तिष्क नई यादें जमा करने के बजाय केवल खतरों को पहचानने को प्राथमिकता देता है. बार-बार मल्टीटास्किंग करने से जानकारी को गहराई से सहेजने की क्षमता कम हो जाती है, जिसे अक्सर लोग मेमोरी लॉस समझते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. याददाश्त को बेहतर बनाए रखने के लिए अच्छी नींद जरूरी है. गहरी नींद के दौरान ब्रेन दिन भर की जानकारियों को प्रोसेस और स्टोर करने का काम करता है. एक वयस्क को रोज कम से कम 7 घंटे की नींद की जरूरत होती है, लेकिन अधिकांश कामकाजी लोग केवल 5 से 6 घंटे ही सो पाते हैं. नींद की यह कमी सबसे पहले वर्किंग मेमोरी को प्रभावित करती है, जिससे हाल की बातचीत, अपॉइंटमेंट या निर्देश याद रखने में कठिनाई होती है. अगर नींद की क्वालिटी खराब है, तो ब्रेन नई जानकारी को बचाने में असमर्थ हो जाता है, जिससे सोचने की क्षमता भी धीमी पड़ जाती है. आज हम फोन नंबर याद नहीं रखते और नेविगेशन के लिए पूरी तरह ऐप्स पर निर्भर हैं. इस डिजिटल निर्भरता ने हमारे मस्तिष्क को स्कैनिंग और स्क्रॉलिंग का आदी बना दिया है, लेकिन डीप रिकॉल की क्षमता को कम कर दिया है. इसके अलावा डिप्रेशन और एंजायटी जैसे फैक्टर्स की याददाश्त को प्रभावित करते हैं. मानसिक तनाव सीधे तौर पर निर्णय लेने और एकाग्रता की शक्ति को कम कर देता है. जब व्यक्ति का मूड बेहतर होता है, तो उसकी याददाश्त भी अपने आप सुधरने लगती है. इसके अलावा कम उम्र में ही हाई बीपी, डायबिटीज और मोटापे जैसी बीमारियों का बढ़ना मस्तिष्क की सेहत के लिए चिंताजनक है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आप चाबियां कहीं रखकर भूल जाते हैं, तो यह सामान्य है, लेकिन अगर आप चाबियों का इस्तेमाल करना ही भूल जाएं, तो यह गंभीर चेतावनी हो सकती है. डॉक्टर का कहना है कि 30 की उम्र में होने वाले कॉग्निटिव स्ट्रेन को रिवर्स किया जा सकता है. दरअसल यह मस्तिष्क की कमजोरी नहीं, बल्कि इसके अति-उत्तेजित होने का संकेत है. नियमित और गहरी नींद, डिजिटल डिटॉक्स, एरोबिक एक्सरसाइज, संतुलित पोषण और तनाव प्रबंधन के जरिए कुछ ही महीनों में याददाश्त में काफी सुधार किया जा सकता है. अगर हम अपने मस्तिष्क का सही ख्याल रखें, तो वह पूरी क्षमता के साथ प्रतिक्रिया देता है. अगर सभी चीजें ठीक होने के बावजूद अगर आपको याददाश्त से जुड़ी समस्याएं पैदा होती हैं, तो इस बारे में डॉक्टर से मिलकर कंसल्ट करें.

हाईकोर्ट ने रेप केस में वॉइस सैंपल जांच सही ठहराई:निष्पक्ष ट्रायल के लिए इसे जरूरी बताया, पीड़िता की याचिका खारिज

हाईकोर्ट ने रेप केस में वॉइस सैंपल जांच सही ठहराई:निष्पक्ष ट्रायल के लिए इसे जरूरी बताया, पीड़िता की याचिका खारिज

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बलात्कार और एससी-एसटी एक्ट से जुड़े मामले में कॉल रिकॉर्डिंग और वॉइस सैंपल की एफएसएल जांच को सही ठहराया है। कोर्ट ने पीड़िता की याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा। ट्रायल कोर्ट ने 1 मई 2024 को दी थी अनुमति ग्वालियर के विशेष न्यायाधीश (अत्याचार) ने 1 मई 2024 को आरोपी के आवेदन पर पेन ड्राइव में मौजूद कॉल रिकॉर्डिंग की जांच और आरोपी व पीड़िता के वॉइस सैंपल की एफएसएल जांच की अनुमति दी थी। निष्पक्ष सुनवाई के लिए साक्ष्य का अधिकार जरूरी जस्टिस मिलिंद रमेश फड़के की एकलपीठ ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई के लिए आरोपी को अपने बचाव में साक्ष्य प्रस्तुत करने का अधिकार है। केवल ट्रायल शुरू होने के आधार पर जांच से इनकार नहीं किया जा सकता। पीड़िता ने जांच को बताया अनावश्यक देरी पीड़िता की ओर से कहा गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और बयान दर्ज हो चुके हैं। ऐसे में वॉइस सैंपल जांच की अनुमति ट्रायल को अनावश्यक रूप से लंबा करने का प्रयास है। याचिका में कहा गया कि आरोपी का आवेदन स्पष्ट नहीं है। कॉल रिकॉर्डिंग की तारीख, समय और उसकी प्रामाणिकता का उल्लेख नहीं किया गया, इसलिए जांच की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए थी।

गोआंग, कर्नाटक समेत 4 राज्यों में राजस्थान के लिए बीजेपी ने निकाली लॉटरी, कोलोराडो की लिस्ट जारी, जानिए किस पर दांव

गोआंग, कर्नाटक समेत 4 राज्यों में राजस्थान के लिए बीजेपी ने निकाली लॉटरी, कोलोराडो की लिस्ट जारी, जानिए किस पर दांव

उद्योग ने गोएग, नागालैंड, कर्नाटक और त्रिपुरा में होने वाले विधानसभा के लिए अपने पैमाने के नाम की घोषणा कर दी है। पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया. ये स्केल्स उन पार्सल पर हो रहे हैं जहां पर स्टैट्स का निधन हो गया था। वोटिंग 9 अप्रैल 2026 को आएगी और नतीजे 4 मई 2026 को आएंगे। किस नेता को मिला किस सीट से मौका? बीजेपी ने स्थानीय स्तर के मजबूत और लोकप्रिय टिकटों की डिलीवरी का निर्णय लिया है। पार्टी महासचिव का कहना है कि स्थानीय संगठन का चयन में राय को काफी महत्व दिया गया है. पार्टी ने गोआ की पोंडा सीट से रितेश नायक को उम्मीदवार बनाया है. यह सीट संख्या 21 है और यहां पर एक साधारण कार्यकर्ता की मृत्यु हो गई थी। नागालैंड की कोरिडांग (अनुसूचित जनजाति) सीट से दाओचियर इल इंचेन को टिकट दिए गए हैं। यह सीट नंबर 28 है और यहां किसी भी नेता की मौत का कारण गंभीर हो रहा है। कर्नाटक में दो रेज़्यूमे पर उम्मीदवार घोषित किये गये हैं। बागलकोट सीट से श्री वीरभद्रैया चारन्तिमठ को उम्मीदवार बनाया गया है, जो सीट नंबर 24 है। वहीं दावणगेरे साउथ सीट से श्रीनिवास टी. दासाकिरप्पा को टिकटें मिलीं। यह सीट नंबर 107 है और यहां किसी भी नेता की मृत्यु के बाद मृत्यु हो जाती है। त्रिपुरा की धर्मनगर सीट से श्री जवाहरलाल नेहरू सीट के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। यह सीट नंबर 56 है और यहां नेताओं के निधन के कारण चुनाव हो रहा है। बीजेपी की चुनाव समिति की बैठक में हुआ फैसला भारतीय जनता पार्टी की केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक 18 मार्च 2026 को नई दिल्ली में हुई, जिसमें पीएम मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। बैठक में विश्वनाथ पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गणेश ने की। इस बैठक में 2026 के लिए ग्रेनाइट के नाम पर अंतिम मुहर लगाई गई।

‘सीएम के साथ आराम’: कर्नाटक कांग्रेस में दरार बढ़ी क्योंकि शिवकुमार ने विधायक अनुशासन प्रश्न को टाल दिया | राजनीति समाचार

Stock Market Crash LIVE

आखरी अपडेट:मार्च 19, 2026, 09:32 IST डीके शिवकुमार ने कहा, ”कांग्रेस विधायक दल में शामिल विधायकों के बीच अनुशासन सुनिश्चित करने की मुझसे ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी सीएम सिद्धारमैया की है।” कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार. (न्यूज़18) कर्नाटक कांग्रेस के भीतर आंतरिक सत्ता संघर्ष तेज हो गया है क्योंकि उपमुख्यमंत्री और केपीसीसी अध्यक्ष डीके शिवकुमार ने पार्टी विधायकों के आचरण के संबंध में एक तीखा बयान दिया है। कैबिनेट में जगह पाने की मांग कर रहे विधायकों के विभिन्न गुटों द्वारा आयोजित “रात्रिभोज बैठकों” में वृद्धि के बीच, शिवकुमार ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के भीतर व्यवस्था बनाए रखने की प्राथमिक जिम्मेदारी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की है। शिवकुमार ने पार्टी के संगठनात्मक विंग को आंतरिक लॉबिंग की हालिया लहर से प्रभावी ढंग से दूर करते हुए कहा, “विधायकों को प्रबंधित करने की जिम्मेदारी सीएम की है क्योंकि वह विधायक दल के नेता हैं।” उपमुख्यमंत्री ने सरकार के भीतर प्राधिकार के पदानुक्रम पर जोर देते हुए कहा कि “मुख्यमंत्री विधायकों को नियंत्रित करते हैं। कांग्रेस विधायक दल का हिस्सा रहे विधायकों के बीच अनुशासन सुनिश्चित करने की मुझसे ज्यादा बड़ी जिम्मेदारी मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की है।” यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब पहली बार चुनकर आए और वरिष्ठ विधायकों के बीच स्पष्ट अशांति है। मंगलवार की रात, पहली और दूसरी बार के लगभग 45 विधायक मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व की मांग पर समन्वय करने के लिए बेंगलुरु के एक लक्जरी होटल में एकत्र हुए। इन कनिष्ठ विधायकों ने कथित तौर पर पार्टी आलाकमान के सामने अपनी शिकायतें रखने के लिए जल्द ही नई दिल्ली की यात्रा की योजना बनाई है। इसके साथ ही, बेंगलुरु विकास प्राधिकरण (बीडीए) के अध्यक्ष एनए हारिस सहित वरिष्ठ विधायकों के एक अलग समूह ने संभावित कैबिनेट फेरबदल में खुद को शामिल करने के लिए दबाव बनाने के लिए मुख्यमंत्री से मुलाकात की। निजी बैठकों की इस झड़ी ने मुख्यमंत्री के प्रति वफादार लोगों और नेतृत्व में बदलाव या अधिक सत्ता-साझाकरण चाहने वालों के बीच गहराते विभाजन को उजागर किया है। जबकि शिवकुमार ने सार्वजनिक रूप से धैर्य का रुख बनाए रखा है, उनकी हालिया टिप्पणियाँ एक रणनीतिक बदलाव का संकेत देती हैं, जिससे “डिनर डिप्लोमेसी” को नियंत्रित करने का बोझ पूरी तरह से सिद्धारमैया के कंधों पर आ गया है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का सुझाव है कि ये घटनाक्रम उस एकीकृत मोर्चे में टूट का संकेत देते हैं जिसे पार्टी ने 2028 के विधानसभा चुनावों से पहले पेश करने का प्रयास किया है। स्थिति अस्थिर बनी हुई है क्योंकि पार्टी के वरिष्ठ और कनिष्ठ दोनों गुट आने वाले हफ्तों में अपनी मांगों को राष्ट्रीय नेतृत्व तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। कर्नाटक विधानसभा के चल रहे बजट सत्र के बाद, कैबिनेट में बदलाव के लिए दबाव बढ़ने की उम्मीद है, जिससे अनुशासन का और परीक्षण होगा, जिस पर शिवकुमार जोर देकर कहते हैं कि इसे बनाए रखना मुख्यमंत्री का कर्तव्य है। पहले प्रकाशित: मार्च 19, 2026, 09:32 IST समाचार राजनीति ‘सीएम के साथ आराम’: कर्नाटक कांग्रेस में दरार बढ़ी क्योंकि शिवकुमार ने विधायक अनुशासन प्रश्न को टाल दिया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कर्नाटक कांग्रेस सत्ता संघर्ष(टी)कर्नाटक कांग्रेस(टी)डीके शिवकुमार(टी)मुख्यमंत्री सिद्धारमैया(टी)कांग्रेस विधायक दल(टी)आंतरिक लॉबिंग(टी)कैबिनेट बर्थ(टी)जूनियर विधायक

खंडवा में गुड़ी पड़वा पर भगवा यात्रा आज:सकल हिंदू समाज निकालेगा वाहन रैली, भवानी माता मंदिर से होगी शुरू; बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस स्थगित किया

खंडवा में गुड़ी पड़वा पर भगवा यात्रा आज:सकल हिंदू समाज निकालेगा वाहन रैली, भवानी माता मंदिर से होगी शुरू; बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस स्थगित किया

गुड़ी पड़वा और हिंदू नववर्ष के अवसर पर आज (गुरुवार) सकल हिंदू समाज द्वारा एक विशाल भगवा वाहन रैली निकाली जाएगी। यह रैली शाम 4 बजे भवानी माता मंदिर प्रांगण से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए इंदिरा चौक के पास समाप्त होगी। आयोजन को देखते हुए पुलिस ने शहर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है, वहीं नववर्ष के आयोजनों के चलते बिजली कंपनी ने भी आज का अपना प्रस्तावित मेंटेनेंस कार्य स्थगित कर दिया है। हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक माधव झा और आयोजन की अध्यक्षता कर रहे राकेश बंसल ने बताया कि हिंदू नववर्ष के उपलक्ष्य में यह वाहन रैली निकाली जा रही है। इस रैली में हजारों लोग अपने हाथों में भगवा झंडा थामे वाहनों से शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरेंगे। इन प्रमुख मार्गों से होकर गुजरेगी रैली वाहन रैली गौशाला, अंजनी टॉकीज होते हुए दुबे कॉलोनी और जीडीसी कॉलेज से पड़ावा पहुंचेगी। यहां से रैली मेडिकल चौराहा, शिवाजी चौक, मोघट थाना, शक्कर तालाब, मरी माता मंदिर से रामेश्वर पुलिस चौकी जाएगी। इसके बाद बड़ाबम के रास्ते तीन पुलिया, रेलवे स्टेशन, बॉम्बे बाजार, घंटाघर, नगर निगम, जलेबी चौक, बजरंग चौक, मछली बाजार, टपालचाल और बस स्टैंड से ओवरब्रिज क्रॉस करके इंदिरा चौक माता मंदिर पर समाप्त होगी। बिजली कंपनी ने स्थगित किया मेंटेनेंस गुड़ी पड़वा पर बाजार क्षेत्र में बिजली कंपनी ने मेंटेनेंस शेड्यूल तय किया था। जिसे आयोजनों और नववर्ष को देखते हुए कैंसिल कर दिया गया है। सहायक यंत्री (मेंटेनेंस) महेश कुमार सोलंकी ने बताया कि, “आज सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली कंपनी की ओर से मेंटेनेंस कार्य किया जाना था, जिसे कि स्थगित कर दिया गया हैं।” इस मेंटेनेंस कार्य के तहत शहर के बॉम्बे बाजार, बुधवारा बाजार और घंटाघर क्षेत्र की बिजली प्रभावित होने वाली थी।

इंदौर EV हादसा, पड़ोसी को आवाज लगाई- बचाओ-बचाओ:जो जिस हालत में था, जल गया; 30 साल पहले राजस्थान से इंदौर आए थे मनोज पुगलिया

इंदौर EV हादसा, पड़ोसी को आवाज लगाई- बचाओ-बचाओ:जो जिस हालत में था, जल गया; 30 साल पहले राजस्थान से इंदौर आए थे मनोज पुगलिया

इंदौर के तिलक नगर क्षेत्र की ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में हुए भीषण अग्निकांड ने एक परिवार की सारी खुशियां छीन लीं। रबर कारोबारी मनोज पुगलिया के घर में लगी आग में 8 लोगों की मौत हो गई। बुधवार शाम को सभी का अंतिम संस्कार किया गया। सबसे ज्यादा दिल को झकझोर देने वाली तस्वीर तब सामने आई, जब हादसे में जान गंवा चुके विजय सेठिया की छोटी बेटी ने अपने ही परिजन को मुखाग्नि दी। इस दौरान वहां मौजूद हर शख्स की आंखें छलक पड़ीं। हादसे से बचकर निकले मनोज पुगलिया के बेटे सौमिल अब भी उस खौफनाक मंजर को याद कर सहम जाते हैं। उन्होंने बताया कि आग लगते ही पूरे घर में तेजी से धुआं भर गया था। चारों तरफ अंधेरा और घुटन थी, कुछ भी दिखाई नहीं दे रहा था। ऐसे हालात में बड़े भाई सौरभ ने हिम्मत दिखाते हुए सभी को आवाज देकर जगाया। किसी तरह सौरभ, मां सुनीता, छोटा भाई हर्षित और सौमिल बालकनी तक पहुंचे। वहां से उन्होंने पड़ोसियों को मदद के लिए बचाओ-बचाओ पुकारा। पड़ोसियों ने जालियां तोड़कर सीढ़ी लगाईं, जिसके सहारे चारों किसी तरह बाहर निकल पाए। लेकिन बाहर आने के बाद भी उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ। उन्होंने अंदर फंसे अपने लोगों को बचाने की कोशिश की, लेकिन आग की लपटें और घना धुआं उन्हें वापस अंदर जाने नहीं दे सका। एक पल में सब कुछ बदल गया…और पीछे रह गईं सिर्फ यादें और अपनों को खोने का दर्द। जब बचाने की कोशिश भी नाकाम हो गई… मनोज के बड़े बेटे सौरभ ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया कि जैसे ही इलेक्ट्रिक कार में आग लगी, कुछ ही पलों में मुख्य गेट आग की चपेट में आ गया। बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो चुका था। ऐसे हालात में सौरभ ने हिम्मत दिखाई और किसी तरह अपनी मां और दोनों भाइयों को बाहर निकाल लिया। लेकिन अंदर बाकी लोग फंसे हुए थे… और उन्हें बचाने की उम्मीद अभी बाकी थी। सौरभ दोबारा घर के अंदर गए, लेकिन तब तक पूरा घर घने धुएं से भर चुका था। सांस लेना मुश्किल हो रहा था, कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। हालात इतने खराब थे कि अंदर फंसे लोग आवाज तक नहीं लगा पा रहे थे। पत्नी सिमरन, मामा, उनके बच्चे और पिता—सब अंदर ही फंस गए। कोई भाग नहीं सका, कोई मदद के लिए पुकार नहीं सका। जो जहां था, वहीं ठहर गया। सबसे दर्दनाक तस्वीर सिमरन की थी…वह बैठी हुई अवस्था में ही रह गईं, जैसे आखिरी पल तक इंतजार कर रही हों कि कोई उन्हें बचा लेगा। एक बेटे और पति के सामने उसका पूरा परिवार उसकी आंखों के सामने ही छिन गया… और वह कुछ नहीं कर सका। यही बेबसी इस हादसे की सबसे बड़ी त्रासदी बन गई। रेस्क्यू के दौरान सीढ़ियों पर तीन लोगों के शव मिले हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस, एफएसएल और एसडीआरएफ की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। रेस्क्यू के दौरान दूसरी मंजिल की ओर जाने वाली सीढ़ियों पर तीन लोगों के शव मिले। इससे अंदाजा लगाया गया कि ये लोग जान बचाने के लिए छत की तरफ भाग रहे थे। लेकिन रास्ते में लगा चैनल गेट बंद था, जिससे वे बाहर नहीं निकल सके। इसी बीच पूरे घर में धुआं भर गया और दम घुटने से उनकी मौत हो गई। यह दृश्य देखकर रेस्क्यू टीम भी भावुक हो गई, क्योंकि साफ था कि ये लोग आखिरी पल तक बचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन एक बंद दरवाजे ने उनकी जिंदगी छीन ली। प्लायवुड के कारण तेजी से आग घर में फैल गई पुलिस जांच में सामने आया है कि मनोज पुगलिया का घर पूरी तरह फर्निश्ड था। खासतौर पर फर्स्ट फ्लोर पर प्लायवुड और लकड़ी के फर्नीचर से इंटीरियर किया गया था। जब फर्स्ट फ्लोर पर आग लगी, तो इन ज्वलनशील चीजों की वजह से आग बहुत तेजी से फैल गई और देखते ही देखते पूरे घर को अपनी चपेट में ले लिया। जांच में पोर्च में शॉर्ट सर्किट के निशान भी मिले हैं। यहीं पर घर में खड़ी बुलेट, करीब 17 लाख रुपए की हायाबुसा बाइक और एक स्कूटर जलकर खाक हो गए। घर में कुछ केमिकल भी रखे हुए थे, जिससे आग और ज्यादा भड़क गई। इन सभी कारणों ने मिलकर आग को बेहद खतरनाक बना दिया, जिससे बचाव का मौका भी बहुत कम मिल पाया। मेहनत से खड़ा किया था सब कुछ… एक पल में सब खत्म मनोज पुगलिया मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले थे। करीब 30 साल पहले वह बेहतर जिंदगी और सपनों को पूरा करने के लिए इंदौर आए थे। शुरुआत आसान नहीं थी…। सियागंज में एक छोटी सी दुकान से उन्होंने इंडस्ट्रियल सप्लाई का काम शुरू किया। दिन-रात मेहनत करके धीरे-धीरे अपने कारोबार को बढ़ाया और एक मजबूत पहचान बनाई। सालों की मेहनत से उन्होंने न सिर्फ व्यापार खड़ा किया, बल्कि अपने परिवार के लिए एक बेहतर भविष्य भी तैयार किया। उनकी कंपनी का एक ऑफिस सियागंज में था, जिसे बड़ा बेटा सौरभ संभालता था। वहीं पीथमपुर में दूसरा ऑफिस था, जहां मंझला बेटा सौमिल और छोटा बेटा हर्षित काम देखते थे। पूरा परिवार मिलकर इस कारोबार को आगे बढ़ा रहा था, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर। जिस घर और कारोबार को मनोज ने अपनी पूरी जिंदगी लगाकर खड़ा किया, वह एक ही हादसे में बिखर गया। आज पीछे रह गई हैं तो सिर्फ उनकी मेहनत की कहानियां…और अपनों को खोने का गहरा दर्द। हादसे में सबसे ज्यादा विजय के परिवार को नुकसान इस हादसे में मनोज पुगलिया और उनकी बहू सिमरन के साथ-साथ मनोज के साले विजय सेठिया और उनके परिवार के लोगों की भी जान चली गई। घर में अभी हाल ही में खुशियों का माहौल था। 23 जनवरी को मनोज के बेटे सौमिल की शादी हुई थी। शादी के बाद घर में छोटे-छोटे कार्यक्रम चल रहे थे, इसी वजह से रिश्तेदारों का आना-जाना लगा हुआ था। इन्हीं खुशियों के बीच विजय सेठिया भी अपने परिवार के साथ इंदौर आए थे। उन्हें जबड़े का कैंसर था और इलाज के लिए वे यहां ठहरे हुए थे। शादी के समय से ही

मंदसौर में जानलेवा हमले के दोषियों को 6-6 साल कारावास:परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह से हुआ था विवाद, आरोपियों ने की था फायरिंग

मंदसौर में जानलेवा हमले के दोषियों को 6-6 साल कारावास:परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह से हुआ था विवाद, आरोपियों ने की था फायरिंग

मंदसौर में निकाह को लेकर उपजी रंजिश में जानलेवा हमला करने के मामले में न्यायालय ने तीन आरोपियों को दोषी करार देते हुए प्रत्येक को 6-6 वर्ष के कठोर कारावास एवं जुर्माने की सजा सुनाई है। यह निर्णय प्रथम अपर सत्र न्यायाधीश आसिफ अब्दुल्लाह की अदालत ने सुनाया। परिवार की मर्जी के खिलाफ निकाह बना विवाद की वजह अभियोजन के अनुसार, 22 जुलाई 2024 को फरियादी इसराईल ने परिवार की इच्छा के विरुद्ध सन्नो से निकाह किया था। इस निकाह से नाराज होकर सन्नो के भाई आफताब और शाहरुख इसराईल से रंजिश रखने लगे। निकाह के बाद इसराईल रतलाम में रहने लगा था, लेकिन घटना से तीन दिन पहले वह अपने दादा के कार्यक्रम में शामिल होने मुल्तानपुरा आया हुआ था। दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या का प्रयास घटना के दिन दोपहर करीब 3:15 बजे इसराईल अपने चाचा के घर के बाहर बैठा हुआ था। इसी दौरान सोहेल टांडिया मोटरसाइकिल से वहां पहुंचा। मौके पर मौजूद शाहरुख ने उसे इसराईल पर गोली चलाने के लिए उकसाया। जान बचाने के लिए इसराईल घर के अंदर भागा, लेकिन आफताब ने उसका पीछा कर पिस्टल से फायर कर दिया। गोली लगने से इसराईल मौके पर गिर पड़ा। शोर सुनकर लोग इकट्ठा हुए, तब तक तीनों आरोपी मौके से फरार हो चुके थे। पुलिस की कार्रवाई और मजबूत साक्ष्य घटना के बाद थाना वाय.डी. नगर पुलिस ने अपराध क्रमांक 256/2024 दर्ज कर जांच शुरू की। मामले की विवेचना उप निरीक्षक कपिल सौराष्ट्रीय द्वारा की गई, जिन्होंने साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ मजबूत केस तैयार कर न्यायालय में चालान प्रस्तुत किया। अभियोजन पक्ष ने सुनवाई के दौरान 12 साक्षियों के बयान और 31 दस्तावेज न्यायालय के समक्ष पेश किए। न्यायालय ने सुनाया सख्त फैसला प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने सोहेल टांडिया, शाहरुख और आफताब को दोषी ठहराया। अदालत ने तीनों को 6-6 वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई। इस प्रकरण में शासन की ओर से अपर लोक अभियोजक भगवतीलाल शर्मा एवं भगवान सिंह चौहान ने प्रभावी पैरवी करते हुए आरोपियों को सजा दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

लड्‌डू गोपाल की मूर्ति खोई, थाने पहुंची महिला:पुलिस से कहा- मां की धरोहर थी, ढूंढकर ला दो; पता बताने वाले को इनाम देने तैयार

लड्‌डू गोपाल की मूर्ति खोई, थाने पहुंची महिला:पुलिस से कहा- मां की धरोहर थी, ढूंढकर ला दो; पता बताने वाले को इनाम देने तैयार

ग्वालियर में लड्‌डू गोपाल की मूर्ति खो गई तो महिला थाने जा पहुंची। पुलिस से मूर्ति को ढूंढने की गुहार लगाई। कहा- लिखित शिकायत दर्ज मत कीजिए क्योंकि अगर कानूनी कार्रवाई होगी तो हमारे भगवान को थाने या कोर्ट में पेश होना पड़ेगा। मैं नहीं चाहती कि भगवान को इस तरह का कोई भी कष्ट हो। मामला ग्वालियर के अलकापुरी में 29 जनवरी का है। करीब दो महीने तक तलाश करने के बावजूद मूर्ति नहीं मिली तो महिला ने 18 मार्च को इसे ढूंढकर लाने वाले को इनाम देने की घोषणा की है। हालांकि, इनाम की राशि का खुलासा नहीं किया है। फरियादी विजया शर्मा ने बताया कि वे 29 जनवरी को अपनी बहन के साथ खरीदारी करने बाजार गई थीं। लड्‌डू गोपाल को साथ ले गई थीं। बाजार में घूमने के दौरान मूर्ति कहीं गिरकर खो गई। 30 साल पहले मां ने दी थी मूर्ति विजया ने कहा- यह मूर्ति मेरे लिए सिर्फ धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मां की यादों से जुड़ी अनमोल धरोहर है। करीब 30 साल पहले मां ने लड्डू गोपाल की यह मूर्ति दी थी। 5 साल पहले मां का निधन हो गया। जिसके बाद यह मूर्ति ही उनकी सबसे खास निशानी बन गई थी। मुझे इस बात का गहरा दुख है कि मां की आखिरी निशानी को संभाल नहीं पाई। कई दिनों तक अपने स्तर पर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में तलाश की, लेकिन जब कोई सफलता नहीं मिली तो मैंने कोतवाली जाकर मदद मांगी है। देखिए, चार तस्वीरें… ढूंढने में मदद कर रही पुलिस विजया ने बताया कि एक नंबर साइज की इस मूर्ति को वे छोटी डोली में रखती थीं। फिलहाल, इलाके में उसे ढूंढने की कोशिश में जुटी है। वे फोटो दिखाकर लोगों से अपील करती हैं कि किसी को यह लड्डू गोपाल की मूर्ति मिले या उसके बारे में कोई जानकारी हासिल हो तो उसे लौटाने में मदद करें। वहीं, सीएसपी मनीष यादव ने कहा- इस तरह के मामलों में मूर्ति का पता लगाना चुनौतीपूर्ण है। फिर भी आसपास के क्षेत्र में जानकारी जुटाने की कोशिश की जा रही है। ये खबर भी पढ़ें… स्कूल बैग गुमा तो पुलिस अंकल के पास पहुंची मासूम शुजालपुर में तीसरी क्लास की बच्ची की मासूमियत और पढ़ाई के प्रति लगन ने पुलिस का दिल जीत लिया। उसका गुमा हुआ बैग ढूंढने के लिए खास टीम बनाई गई। पुलिसकर्मियों ने पूरी मुस्तैदी से ड्यूटी निभाई और उसका बैग ढूंढ़ निकाला। पूरी खबर पढ़ें…

केरल- 70% विधायकों पर क्रिमिनल-केस, आधे से ज्यादा करोड़पति:तमिलनाडु- PMK का 1-2 दिन में NDA में शामिल होने का फैसला; भाजपा की चुनाव को लेकर बैठक

केरल- 70% विधायकों पर क्रिमिनल-केस, आधे से ज्यादा करोड़पति:तमिलनाडु- PMK का 1-2 दिन में NDA में शामिल होने का फैसला; भाजपा की चुनाव को लेकर बैठक

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में मौजूदा विधायकों में से लगभग 70 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार आधे से ज्यादा विधायक करोड़पति हैं। वहीं तमिलनाडु की पट्टाली मक्कल काची (PMK) पार्टी दो गुटों में बंटी हुई है। पार्टी के संस्थापक डॉ. एस. रामदास के बेटे डॉ. अंबुमणि के नेतृत्व वाला गुट AIADMK के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा बन गया। दूसरे गुट का नेतृत्व करने वाले जी.के. मणि ने कहा कि इसको लेकर हमने दो बार बैठक की। इस पर फैसला एक से दो दिन में किया जाएगा। इधर, दिल्ली में BJP की केंद्रीय चुनाव समिति ने बुधवार को एक बैठक की। इसमें असम और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में संबंधित राज्यों की इकाइयों द्वारा सुझाए गए उम्मीदवारों के नामों के पैनल पर विस्तार से चर्चा की गई। 132 विधायकों के हलफनामों की जांच ADR और केरल इलेक्शन वॉच के इस एनालिसिस में 132 मौजूदा विधायकों के हलफनामों की जांच की गई और पाया गया कि 92 विधायकों पर आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से 33 विधायकों, यानी 25 प्रतिशत ने गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े आरोप शामिल हैं। बंगाल में ₹1 लाख कैश के साथ व्यकित हिरासत में विधानसभा चुनावों से पहले, दक्षिण 24 परगना जिले में वाहनों की चेकिंग के दौरान बुधवार को पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। उसके पास से 1 लाख रुपए से ज्यादा की नकदी जब्त की गई। यह घटना बारुईपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के तहत जयतला इलाके में हुई। पुलिस ने बताया कि नाका चेकिंग के दौरान, एक बाइक सवार संदिग्ध लगा और उसे पहचान की पुष्टि के लिए रोका गया। पुलिस ने मोटरसाइकिल की तलाशी ली और नकदी से भरा एक बैग बरामद किया। पैसे के सोर्स की जांच की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि उस व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। राज्यवार विधानसभा चुनाव शेड्यूल… 4 राज्यों में SIR, तमिलनाडु में सबसे ज्यादा नाम कटे जिन पांच राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं, उनमें SIR के बाद तमिलनाडु से सबसे ज्यादा वोटर्स के नाम कटे हैं। चुनाव आयोग ने बताया कि 27 अक्टूबर 2025 को SIR प्रक्रिया शुरू होने के दौरान राज्य में कुल 6,41,14,587 वोटर थे। करीब चार महीने चली SIR में 74,07,207 लोगों के नाम हटाए गए हैं। राज्य में अब 5,67,07,380 मतदाता पंजीकृत हैं। वहीं पश्चिम बंगाल दूसरे नंबर पर है जहां करीब 58 लाख लोगों के नाम कटे हैं। फिर केरल में 8 लाख, असम में 2 लाख और पुडुचेरी में सबसे कम 77 हजार लोगों के नाम SIR प्रक्रिया के बाद मतदाता सूची से हटाए गए। असम में स्पेशल रिवीजन (SR) कराया गया था। अब 5 राज्यों में चुनौती और मौजूदा स्थिति पश्चिम बंगाल- 3 बार से ममता बनर्जी ही मुख्यमंत्री: 14 साल से CM ममता के सामने BJP मुख्य चुनौती है। 2026 के चुनाव में टीएमसी जीती तो ममता बनर्जी लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनेंगी। वे ऐसा करने वाली देश पहली महिला होंगी। जयललिता के नाम 5 बार तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड है। हालांकि, वह 1991 से 2016 तक अलग-अलग कार्यकाल (लगातार नहीं) में मुख्यमंत्री पद पर रहीं। तमिलनाडु- भाजपा-कांग्रेस 60 साल से यहां सत्ता में नहीं आ सकीं: आजादी के बाद लगभग दो दशक तक यहां कांग्रेस की सरकार रही। 1967 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस हार गई और इसके साथ ही राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव आया। 1967 के बाद से तमिलनाडु की राजनीति मुख्य रूप से AIADMK और DMK के बीच घूमती रही है। फिलहाल तमिलनाडु में एमके स्टालिन की अगुवाई में DMK की सरकार है, जो 2021 के विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता में आई। पार्टी ने कांग्रेस, वीसीके और वामपंथी दल के साथ गठबंधन किया है। बीजेपी ने कई चुनावों में AIADMK जैसे दलों के साथ गठबंधन जरूर किया, लेकिन राज्य में उसकी अपनी सरकार नहीं रही। केरल- दक्षिण का इकलौता राज्य जहां लेफ्ट सत्ता में: देश का इकलौता राज्य है, जहां आज भी लेफ्ट सत्ता में है। यहां सत्ता बदलने की परंपरा रही है, लेकिन 2021 में वाम मोर्चा (LDF) ने इस ट्रेंड को तोड़ते हुए लगातार दूसरी बार सरकार बनाई। कांग्रेस गठबंधन की कोशिश इस बार एंटी इनकम्बेंसी को कैश करानी की रहेगी। वहीं, BJP अब तक केरल में एक भी विधानसभा सीट जीत पाई है। पिछले लोकसभा चुनाव में यहां उसने त्रिशूर लोकसभा सीट जीती थी। इसके अलावा दिसंबर 2025 में भी BJP ने पहली बार त्रिवेंद्रम (तिरुवनंतपुरम) नगर निगम का चुनाव जीता। असम- कांग्रेस ने किया 8 पार्टियों से अलायंस: राज्य में 10 साल से भाजपा की सरकार है। पार्टी तीसरे चुनाव की तैयारियों में जुटी है। पीएम मोदी 6 महीने में 3 बार राज्य का दौरा कर चुके हैं। यहां पार्टी ने 126 सीटों में से 100+ सीटें जीतने का टारगेट रखा है। असम में बांग्लादेश, घुसपैठियों/सीमा सुरक्षा, असमिया पहचान जैसे मुद्दे हैं। भाजपा को रोकने के लिए कांग्रेस ने 10 पार्टियों के साथ गठबंधन किया है। इसमें वामपंथी और क्षेत्रीय दल शामिल हैं। पुडुचेरी- सबसे कम सीटों वाली विधानसभा: 2021 में कांग्रेस सरकार गिरने के बाद AINRC-BJP गठबंधन ने सत्ता हासिल की और एन. रंगास्वामी एक बार फिर मुख्यमंत्री बने। यह पहली बार था जब BJP सत्ता में सीधे तौर पर भागीदार बनी। इस बार कांग्रेस DMK के साथ गठबंधन में वापसी की कोशिश कर रही है और सरकार गिरने के मुद्दे को एंटी-इनकम्बेंसी में बदलना चाहती है। गुजरात-महाराष्ट्र सहित 6 राज्यों की 8 सीटों पर उपचुनाव

केरल- 70% विधायकों पर क्रिमिनल-केस, आधे से ज्यादा करोड़पति:तमिलनाडु- PMK का 1-2 दिन में NDA में शामिल होने का फैसला; भाजपा की चुनाव को लेकर बैठक

केरल- 70% विधायकों पर क्रिमिनल-केस, आधे से ज्यादा करोड़पति:तमिलनाडु- PMK का 1-2 दिन में NDA में शामिल होने का फैसला; भाजपा की चुनाव को लेकर बैठक

एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, केरल में मौजूदा विधायकों में से लगभग 70 प्रतिशत ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले होने की घोषणा की है। रिपोर्ट के अनुसार आधे से ज्यादा विधायक करोड़पति हैं। वहीं, तमिलनाडु की पट्टाली मक्कल काची (PMK) पार्टी दो गुटों में बंटी हुई है। पार्टी के संस्थापक डॉ. एस. रामदास के बेटे डॉ. अंबुमणि के नेतृत्व वाला गुट AIADMK के नेतृत्व वाले NDA का हिस्सा बन गया। दूसरे गुट का नेतृत्व करने वाले जी.के. मणि ने कहा कि इसको लेकर हमने दो बार बैठक की। इस पर फैसला एक से दो दिन में किया जाएगा। इधर, दिल्ली में BJP की केंद्रीय चुनाव समिति ने बुधवार को एक बैठक की। इसमें असम और पुडुचेरी में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों के लिए पार्टी के उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की गई। सूत्रों के अनुसार, इस बैठक में संबंधित राज्यों की इकाइयों द्वारा सुझाए गए उम्मीदवारों के नामों के पैनल पर विस्तार से चर्चा की गई। 132 विधायकों के हलफनामों की जांच ADR और केरल इलेक्शन वॉच के इस एनालिसिस में 132 मौजूदा विधायकों के हलफनामों की जांच की गई और पाया गया कि 92 विधायकों पर आपराधिक मामले लंबित हैं। इनमें से 33 विधायकों, यानी 25 प्रतिशत ने गंभीर आपराधिक मामलों की घोषणा की है, जिनमें हत्या और हत्या के प्रयास से जुड़े आरोप शामिल हैं। बंगाल में ₹1 लाख कैश के साथ व्यकित हिरासत में विधानसभा चुनावों से पहले, दक्षिण 24 परगना जिले में वाहनों की चेकिंग के दौरान बुधवार को पुलिस ने एक व्यक्ति को हिरासत में लिया। उसके पास से 1 लाख रुपए से ज्यादा की नकदी जब्त की गई। यह घटना बारुईपुर पुलिस स्टेशन क्षेत्र के तहत जयतला इलाके में हुई। पुलिस ने बताया कि नाका चेकिंग के दौरान, एक बाइक सवार संदिग्ध लगा और उसे पहचान की पुष्टि के लिए रोका गया। पुलिस ने मोटरसाइकिल की तलाशी ली और नकदी से भरा एक बैग बरामद किया। पैसे के सोर्स की जांच की जा रही है। अधिकारी ने बताया कि उस व्यक्ति को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। राज्यवार विधानसभा चुनाव शेड्यूल…