Saturday, 17 Oct 2026 | 12:15 PM

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गांवों में 45 दिन बाद मिलेगा दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर:जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 दिन समय बढ़ाया; MP में ऑनलाइन बुकिंग ठप

गांवों में 45 दिन बाद मिलेगा दूसरा घरेलू LPG सिलेंडर:जमाखोरी रोकने के लिए सरकार ने 20 दिन समय बढ़ाया; MP में ऑनलाइन बुकिंग ठप

अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग की वजह से देशभर में LPG की किल्लत हो गई है। गैस एजेंसियों के बाहर लम्बी लाइनें हैं। गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और जमाखोरी भी हो रही है, जिसे रोकने के लिए सरकार ने बुकिंग के नियमों में फिर से बदलाव किया है। अब ग्रामीण क्षेत्रों में सिलेंडर लेने के बाद अगला सिलेंडर 45 दिन बाद बुक किया जा सकेगा। पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने संसद में बताया कि यह फैसला सप्लाई को बेहतर तरीके से मैनेज करने और बेवजह होने वाली ‘पैनिक बुकिंग’ को रोकने के लिए किया है। LPG सिलेंडर बुकिंग के नियम 6 दिन में तीन बार बदले 55 दिन की बजाय 15 दिन में बुक करा रहे लोग गांवों में औसतन एक परिवार सालभर में करीब 5 सिलेंडर ही इस्तेमाल करता है। ऐसे में जल्दी दोबारा बुकिंग की जरूरत नहीं पड़ती थी। हाल ही में देखा गया कि लोग अफवाहों की वजह से जरूरत न होने पर भी जल्दी-जल्दी सिलेंडर बुक करके स्टॉक कर रहे थे। मंत्रालय की ओर से बताया गया कि जो लोग पहले औसतन 55 दिनों में सिलेंडर बुक कराते थे, उन्होंने अचानक 15-15 दिनों के अंतर पर बुकिंग शुरू कर दी थी। इस तरह की एडवांस और जल्दबाजी में की जा रही बुकिंग से सिस्टम पर दबाव बढ़ रहा था। अब अलग-अलग राज्यों की रिपोर्ट पढ़ें… मध्य प्रदेश: LPG की ऑनलाइन बुकिंग ठप…वेटिंग 7-8 दिन बढ़ी मध्य प्रदेश में LPG सिलेंडर की ऑनलाइन बुकिंग ठप जैसी है। सर्वर डाउन होने से भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, उज्जैन, जबलपुर समेत पूरे प्रदेश में लोग सिलेंडर की बुकिंग नहीं कर पा रहे हैं। वेटिंग 7 से 8 दिन तक पहुंच गई है। गैस एजेंसियों में सुबह से शाम तक लोगों की भीड़ लगी हुई है। इधर गैस की किल्लत के बीच इंडक्शन की कीमतें दोगुनी हो गई हैं। भोपाल में इसकी बिक्री 7 गुना तक बढ़ गई है। वहीं 50 हजार होटल-रेस्टॉरेंट में गैस खत्म होने के कगार पर है। होटल, रेस्टॉरेंट को 4 दिन से कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिले हैं। भोपाल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष तेजकुल पाल सिंह पाली के मुताबिक, भोपाल के करीब 2 हजार होटल-रेस्टोरेंट को 4 दिन में एक भी सिलेंडर नहीं मिला। पूरी खबर पढ़ें… राजस्थान: रेस्टोरेंट बंद कर कर्मचारियों को घर भेजा जा रहा होटल-रेस्टोरेंट में गैस का स्टॉक खत्म होने से बिजनेस ठप होने लगे हैं। चित्तौड़गढ़ में रेस्टोरेंट बंद कर कर्मचारियों को घर भेज दिया है। सवाई माधोपुर में भी रेस्टोरेंट बंद होने लगे हैं। जैसलमेर के सम में 150 रिसॉर्ट को बंद करने की तैयारी है। जयपुर में चाय की थड़ी, मिठाई की दुकानों और ढाबों पर कॉमर्शियल की जगह घरेलू सिलेंडर का उपयोग करने लगे हैं। कोटा में गैस सिलेंडर की कमी के चलते लकड़ी और कोयले की भट्ठी की मांग बढ़ गई है। मेस और हॉस्टलों के लिए 35 से 40 किलो वजन की भट्ठियां बनाई जा रही हैं। पूरी खबर पढ़ें… उत्तर प्रदेश: ब्लैक में 1600 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा सिलेंडर लखनऊ में दिन-दिनभर लाइन में खड़े रहने पर भी लोगों को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा है। लोगों का दावा है कि इन सबके बावजूद 950 रुपए वाला सिलेंडर 1600 रुपए देने पर तुरंत मिल रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर भी 3500 रुपए में आसानी से उपलब्ध है। पूरी खबर पढ़ें… फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हुए गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन’ ने कहा कि LPG की किल्लत के कारण जोमैटो और स्विगी जैसे प्लेटफॉर्म्स पर फूड डिलीवरी के ऑर्डर 50 से 60% तक कम हो गए हैं। इससे डिलीवरी पार्टनर्स और इस सेक्टर से जुड़े दूसरे वर्कर्स की कमाई पर संकट खड़ा हो गया है। यूनियन ने केंद्रीय श्रम मंत्री को पत्र लिखकर तुरंत दखल देने की मांग की है। यूनियन की मांग है कि जोमैटो, स्विगी और दूसरे प्लेटफॉर्म्स प्रभावित होने वाले हर वर्कर को तुरंत 10,000 रुपए की राहत राशि दें। वर्कर्स की ID बंद करने पर 3 महीने की रोक लगे। सरकार ने तैयारियों का लेखा-जोखा पेश किया सरकार रोजाना 50 लाख सिलेंडर बांट रही पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने कहा, “हम अपनी जरूरत की लगभग 60% LPG बाहर से मंगवाते हैं और इसका करीब 90% हिस्सा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से आता है। स्थिति थोड़ी मुश्किल है, लेकिन सरकार घरेलू उपभोक्ताओं को सप्लाई सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है।” उन्होंने कहा, “हम हर दिन लगभग 50 लाख सिलेंडर डिलीवर करते हैं। डिस्ट्रीब्यूशन के स्तर पर फिलहाल कहीं भी किल्लत की कोई खबर नहीं है। लेकिन घबराहट की वजह से बुकिंग कई गुना बढ़ गई है। राज्य सरकारों से लाभार्थियों की लिस्ट तैयार करने को कहा है ताकि सिलेंडर की डिलीवरी प्राथमिकता के आधार पर की जा सके।” सरकार ने अब तक 5 जरूरी कदम उठाए 1. हाई-लेवल कमेटी बनाई: संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने तीन तेल कंपनियों के कार्यकारी निदेशकों की एक हाई-लेवल कमेटी बनाई है, जो सप्लाई की समीक्षा करेगी। 2. एसेंशियल कमोडिटी एक्ट लागू: गैस की सप्लाई को कंट्रोल करने के लिए केंद्र सरकार ने देशभर में ‘एसेंशियल कमोडिटी एक्ट 1955’ लागू कर दिया है। 3. 25 दिन बाद होगी LPG बुकिंग: घरेलू सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में बदलाव किया है। उपभोक्ता एक सिलेंडर डिलीवर होने के बाद दूसरा सिलेंडर 25 दिन बाद ही बुक कर सकेंगे। 4. OTP और बायोमेट्रिक अनिवार्य: गैस की जमाखोरी रोकने के लिए डिलीवरी एजेंट OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन का सख्ती से इस्तेमाल कर रहे हैं। 5. LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश: सरकार ने सभी ऑयल रिफाइनरीज को LPG उत्पादन बढ़ाने का आदेश दिया था। अब उत्पादन 28% बढ़ गया है। सप्लाई संकट की 2 वजह 1. होर्मुज स्ट्रेट का लगभग बंद होना भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का बंद होना है। ये करीब 167 किमी लंबा जलमार्ग है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। ईरान जंग के कारण यह रूट अब सुरक्षित नहीं रहा है। खतरे को देखते हुए कोई भी तेल टैंकर वहां से नहीं गुजर रहा। दुनिया के कुल पेट्रोलियम का 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है। सऊदी अरब, इराक और कुवैत जैसे देश भी

जरूरत की खबर- ‘मच्छर अगरबत्तियों’ में खतरनाक केमिकल्स:खरीदने से पहले चेक करें ये 7 चीजें, नेचुरल तरीकों से मच्छर भगाने के 11 टिप्स

जरूरत की खबर- 'मच्छर अगरबत्तियों' में खतरनाक केमिकल्स:खरीदने से पहले चेक करें ये 7 चीजें, नेचुरल तरीकों से मच्छर भगाने के 11 टिप्स

बीते महीने महाराष्ट्र सरकार ने मच्छर भगाने वाली दो बड़ी अगरबत्ती कंपनियों को प्रतिबंधित कर दिया। हम अक्सर मच्छर अगरबत्ती या मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स जलाकर चैन की नींद सो जाते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनका धुआं हमारी सेहत पर भारी पड़ सकता है? महाराष्ट्र सरकार ने ‘मच्छर अगरबत्तियों’ की जांच में पाया कि इनमें डाइमेफ्लुथ्रिन (Dimefluthrin) जैसे खतरनाक केमिकल्स का इस्तेमाल हो रहा है। ये सांस के जरिए शरीर में जाकर हमारे फेफड़ों और नर्वस सिस्टम को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIBRC) की मंजूरी के बिना बाजार में बिकने वाले ऐसे प्रोडक्ट्स बच्चों, बुजुर्गों और अस्थमा के मरीजों के लिए किसी ‘साइलेंट किलर’ से कम नहीं हैं। इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में बात मच्छर भगाने वाली अगरबत्तियों की। साथ ही जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. संदीप कटियार, सीनियर कंसल्टेंट, पल्मोनोलॉजी, अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल, कानपुर सवाल- ‘मच्छर अगरबत्तियों’ पर बैन क्यों लगाया गया? जवाब- इसके पीछे कई कारण हैं- सवाल- इन अवैध ‘मच्छर अगरबत्तियों’ में कौन से केमिकल्स मिले थे? ये केमिकल्स कितने खतरनाक हैं? जवाब- इसका जवाब पॉइंटर्स में समझिए- सवाल- इन केमिकल्स का धुआं लंग्स और ओवरऑल सेहत को कैसे प्रभावित करता है? जवाब- मच्छर अगरबत्तियों के केमिकल्स का धुआं हमारी सेहत को इस तरह प्रभावित करता है- सवाल- इससे किन लोगों को ज्यादा जोखिम हो सकता है? जवाब- मच्छर अगरबत्ती के धुएं से कुछ लोगों को ज्यादा रिस्क होता है। इसे ग्राफिक में देखिए- इसे विस्तार से समझिए बच्चे- उनके लंग्स डेवलपिंग स्टेज में होते हैं, तो धुआं ज्यादा नुकसान करता है। बुजुर्ग- कमजोर इम्यूनिटी और पहले से मौजूद बीमारियों के कारण रिस्क ज्यादा होता है। अस्थमा या COPD मरीज- जिन्हें क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज और अस्थमा जैसी सांस संबंधी बीमारियां हैं, उनके लिए अगरबत्ती का धुआं ज्यादा नुकसानदायक है। एलर्जेटिक लोग- केमिकल्स से एलर्जिक रिएक्शन बढ़ सकता है। गर्भवती महिलाएं- धुआं प्रेग्नेंट महिला और गर्भस्थ शिशु, दोनों की सेहत को प्रभावित कर सकता है। हार्ट पेशेंट्स- प्रदूषित हवा हार्ट पर अतिरिक्त दबाव डालती है। इनडोर रहने वाले लोग- बंद कमरों में धुआं ज्यादा जमा होता है, जिससे एक्सपोजर बढ़ता है। सवाल- मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स खरीदते समय क्या-क्या चेक करना जरूरी है? जवाब- मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स खरीदते समय कुछ बातों का खास ख्याल रखना चाहिए। इन्हें ग्राफिक में देखिए- अब ये सभी पॉइंट्स विस्तार से समझिए- CIBRC रजिस्ट्रेशन नंबर: केवल वही प्रोडक्ट लें, जिन्हें सरकार से स्वीकृति मिली हुई है। एक्टिव केमिकल्स: लेबल पर लिखे केमिकल्स (जैसे एल्थ्रिन आदि) की जानकारी देखें। निर्माता की जानकारी: कंपनी का नाम, पता और लाइसेंस नंबर स्पष्ट होना चाहिए। एक्सपायरी डेट: प्रोडक्ट की एक्सपायरी डेट जरूर चेक करें। इस्तेमाल के इंस्ट्रक्शन: सही और सुरक्षित इस्तेमाल के निर्देश पढ़ें। सेफ्टी इंस्ट्रक्शन: बच्चों और पालतू जानवरों के लिए सावधानियां देखें। सील और पैकेजिंग: नकली या खुले पैक न खरीदें। सवाल- इन प्रोडक्ट्स पर सेंट्रल इंसेक्टिसाइड्स बोर्ड एंड रजिस्ट्रेशन कमेटी (CIBRC) का रजिस्ट्रेशन नंबर चेक करना क्यों जरूरी है? जवाब- CIBRC नंबर उपभोक्ता सुरक्षा की गारंटी है। इसलिए इसे चेक करना जरूरी है- सवाल- अवैध या संदिग्ध प्रोडक्ट की शिकायत कहां कर सकते हैं? जवाब- इसकी शिकायत इन जगहों पर लिखित या ऑनलाइन कर सकते हैं – सवाल- नेचुरल तरीके से मच्छर भगाने के कुछ घरेलू नुस्खे बताएं? जवाब- केमिकल कॉइल्स और मॉस्किटो वेपोराइजर सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। ऐसे में मच्छरों से बचाव के लिए कुछ सुरक्षित और प्राकृतिक तरीके नीचे ग्राफिक में देखें- इन पॉइंट्स को विस्तार से समझिए- कपूर: कमरे की खिड़कियां बंद करके 20 मिनट के लिए कपूर जलाएं या खुले बर्तन में कपूर की टिकिया रखें। इसकी गंध मच्छरों को दूर भगाती है। नीम का तेल: नीम का तेल केमिकल वेपोराइजर से अधिक प्रभावी और सुरक्षित है। इसे नारियल तेल में मिलाकर शरीर पर लगाने से मच्छर नहीं काटते हैं। नींबू और लौंग: आधे कटे नींबू में लौंग गाड़कर कमरे के कोनों में रखें। इन दोनों की मिक्स स्मेल मच्छरों को नापसंद होती है। लहसुन का स्प्रे: लहसुन की कलियों को पानी में उबालकर स्प्रे बोतल में भर लें। इसे घर में छिड़कने से मच्छर नहीं आते हैं। पुदीना (मिंट) ऑयल: पुदीने के तेल का छिड़काव करें या इसके पौधे को कमरे में रखें। इसकी तेज गंध मच्छरों को भगाने में कारगर है। एसेंशियल ऑयल्स: लैवेंडर, टी-ट्री और सिट्रोनेला तेल को पानी में मिलाकर नेचुरल स्प्रे की तरह इस्तेमाल करें। नीलगिरी तेल: नीलगिरी के तेल में एंटी-मॉस्किटो गुण होते हैं। इसे डिफ्यूजर में या पानी में मिलाकर छिड़कें। तुलसी का पौधा: घर की बालकनी या आंगन में तुलसी लगाएं। इसके औषधीय गुण और सुगंध मच्छरों को रोकने में मदद करते हैं। लेमनग्रास: इसमें सिट्रोनेला (एसेंशियल ऑयल) होता है, जो मच्छर भगाने वाले प्रोडक्ट्स का मुख्य बेस है। इसे बालकनी या बगीचे में लगाने से मच्छर अंदर नहीं आते हैं। ……………… ये खबर भी पढ़िए जरूरत की खबर- आंखों की रोशनी कैसे बढ़ाएं: रेगुलर करें ये 8 आई एक्सरसाइज, डाइट में शामिल करें ये हेल्दी चीजें, न करें 8 गलतियां मौजूदा वक्त में मोबाइल, लैपटॉप और टीवी हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा हैं। ये चीजें जिंदगी में इस कदर हावी हो गई हैं कि हम अपनी नींद भी पूरी नहीं कर पाते हैं। इसका सीधा असर आंखों पर पड़ता है। नतीजतन आंखों की रोशनी कम हो रही है। आगे पढ़िए…

अमेरिका ने एच-1बी वीजा देने की प्रक्रिया में बदलाव किया:अब सैलरी के आधार पर होगा चयन; 1 अप्रैल से नया फार्म I-129 लागू होगा

अमेरिका ने एच-1बी वीजा देने की प्रक्रिया में बदलाव किया:अब सैलरी के आधार पर होगा चयन; 1 अप्रैल से नया फार्म I-129 लागू होगा

अमेरिका ने एच-1बी वीजा प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया है। अब लाभार्थियों का चयन रैंडम लॉटरी के बजाय वेतन के आधार पर होगा। इसके लिए अमेरिकी इमिग्रेशन एजेंसी ने फॉर्म I-129 का नया सिस्टम बनाया है, जिसे 1 अप्रैल 2026 से अनिवार्य कर दिया जाएगा। कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए दाखिल याचिका में नौकरी से जुड़ी जानकारी देनी होगी। इससे पहले की तुलना में ज्यादा अनुभवी और हाई सैलरी पाने वाले प्रोफेशनल्स को वीजा मिलने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी। नए सिस्टम में आवेदकों को चार वेतन स्तरों में बांटा जाएगा। जिस पद का वेतन स्तर जितना ऊंचा होगा, चयन प्रक्रिया में उसे उतने अधिक मौके मिलेंगे। मसलन, लेवल-4 के उम्मीदवार को चार मौके मिलेंगे, जबकि लेवल-1 को सिर्फ एक मौका मिलेगा। फॉर्म I-129 का उपयोग अस्थायी कामगारों को अमेरिका बुलाने के लिए किया जाता है। अमेरिका का श्रम विभाग हर पेशे और शहर के लिए एक मानक वेतन तय करता है। उसी के आधार पर नौकरी को लेवल-1 से लेवल-4 में रखा जाता है। 70% एच-1 बी वीजा भारतीयों को मिलता है एच-1 बी पर ट्रम्प की कभी हां, कभी ना ट्रम्प का एच-1 बी वीजा पर 9 साल में कभी हां, कभी ना वाला रवैया रहा है। पहले कार्यकाल में 2016 में ट्रम्प ने इस वीजा को अमेरिकी हितों के खिलाफ कहा था। 2019 में इस वीजा का एक्सटेंशन सस्पेंड किया। पिछले महीने ही यू-टर्न लेते हुए कहा- हमें टैलेंट की जरूरत है। गोल्ड कार्ड में हमेशा रहने का अधिकार मिलेगा ट्रम्प ने H-1B में बदलाव के अलावा 3 नए तरह के वीजा कार्ड लॉन्च किए थे। ‘ट्रम्प गोल्ड कार्ड’, ‘ट्रम्प प्लेटिनम कार्ड’ और ‘कॉर्पोरेट​​​​​ गोल्ड कार्ड’ जैसी सुविधाएं भी शुरू की गई हैं। ट्रम्प गोल्ड कार्ड (8.8 करोड़ कीमत) व्यक्ति को अमेरिका में अनलिमिटेड रेसीडेंसी (हमेशा रहने) का अधिकार देगा। टेक कंपनियां सबसे ज्यादा H-1B स्पॉन्सर करती हैं भारत हर साल लाखों इंजीनियरिंग और कंप्यूटर साइंस के ग्रेजुएट तैयार करता है, जो अमेरिका की टेक इंडस्ट्री में बड़ी भूमिका निभाते हैं। इंफोसिस, TCS, विप्रो, कॉग्निजेंट और HCL जैसी कंपनियां सबसे ज्यादा अपने कर्मचारियों को H-1B वीजा स्पॉन्सर करती हैं। कहा जाता है कि भारत अमेरिका को सामान से ज्यादा लोग यानी इंजीनियर, कोडर और छात्र एक्सपोर्ट करता है। अब फीस महंगी होने से भारतीय टैलेंट यूरोप, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, मिडिल ईस्ट के देशों की ओर रुख करेगा।

डिहाइड्रेशन फूड्स से बचें: गर्मी में बढ़ने से हो सकता है डायहाइड्रेशन का खतरा, इन 5 से कम दूरी और सबसे सस्ते हैं ये फूड्स

निर्जलीकरण से बचने के लिए खाद्य पदार्थ

निर्जलीकरण से बचने के लिए खाद्य पदार्थ | छवि: एआई निर्जलीकरण से बचने के लिए खाद्य पदार्थ: मार्च माह शुरू होते ही अचानक गर्मी बढ़ जाती है। तेज़ धूप और बढ़ती ठंड के कारण लोग अब घर में एयर एंबेसेडेड बने हुए हैं। इसके साथ ही फर्म में ठंडा पानी रखना भी शुरू हो गया है। ऐसे मौसम में शरीर को स्टॉक रखना अत्यंत आवश्यक हो जाता है। अगर समय पर शरीर में पानी की कमी पूरी न की जाए तो डायरिया की समस्या गंभीर रूप ले सकती है। इसके साथ ही ये समस्या इतनी बढ़ जाती है कि अस्पताल तक जाने की नौबत भी आ सकती है। इसलिए समंदर में बर्तनों पर खास ध्यान देना जरूरी है। कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिनसे शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जबकि कुछ खाद्य पदार्थ ऐसे होते हैं जिन्हें शरीर में जमा करके रखने में मदद मिलती है। कैफीन वाली नवजात से बढ़ सकती है प्यास गर्मी के मौसम में चाय और कॉफी जैसी कैफीन वाली चाय का सेवन करने से बचना चाहिए। कैफीन ड्यूरेटिक होता है, जिससे बार-बार यूरिन आने की समस्या हो सकती है। इससे शरीर में पानी की तेजी से बाहरी वृद्धि और ग्लूकोज आहार का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए गर्मियों में कैफीन वाली ड्रिंक्स का सेवन कम ही करना बेहतर माना जाता है। उच्च प्रोटीन पदार्थों में पानी की सबसे ज्यादा जरूरत प्रोटीन शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्व है, लेकिन अधिक मात्रा में प्रोटीन पचाने से शरीर को पानी की अत्यधिक आवश्यकता होती है। जिम या सैर करने वाले लोग अक्सर उच्च प्रोटीन सामग्री लेते हैं। ऐसे में अगर पर्याप्त मात्रा में पानी न पिया जाए तो शरीर में पानी की कमी हो सकती है। प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों के साथ पानी का सेवन भी जरूरी है। स्ट्रॉबेरी को भी बढ़ावा दिया जा सकता है बाजार में मिलने वाले कई वैशिष्ट्य में मात्रा की मात्रा अधिक होती है। ऐसे खाद्य पदार्थ खाने से ज्यादा पैसे मिलते हैं और शरीर का पानी का स्तर प्रभावित हो सकता है। स्टिची, ऑक्सफ़ोर्ड स्टॉकिंग्स या स्टैटिस्टिक्स-भुने फूड्स समरलैण्ड में शरीर पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं और चिन्च पचाने के लिए भी शरीर को सबसे ज्यादा पानी की जरूरत होती है। मैदा और सुपरमार्केट से सावधान रहें मैदा से बनी वस्तुएं जैसे पिज्जा, बर्गर या अन्य फास्ट फूड पचाने में मुश्किल होती है क्योंकि इनका आटा बहुत कम होता है। वैक्सिन के बाद बार-बार अधिकांश पायस पाए जाते हैं। मैदा में छुपी हुई चीज़ को पचाने के लिए शरीर में पानी की बहुत अधिक आवश्यकता होती है। इसके अलावा रेड मीट, इलेक्ट्रिक फूड्स और डीफ़्राई फूड्स से भी शरीर में डायहाइड्रेशन बढ़ने का कारण बन सकता है। गर्मी में क्या प्रभावी है गर्मियों में शरीर को गोदाम में रखने के लिए खाद्य पदार्थों में पानी की मात्रा अधिक होती है। खेडा, ककड़ी, टमाटर और तरबूज जैसे फल और औषधि शरीर को ठंडक देने में मदद करते हैं। इसके अलावा नारियल पानी को भी शरीर को स्टॉकहोम में रखने का स्थान माना जाता है। समसामयिक पानी पीने के साथ-साथ इन खाद्य पदार्थों में शामिल करने से गर्मियों में शरीर को स्वस्थ और सीमेंटयुक्त रखा जा सकता है। यह भी पढ़ें: कुछ नया खाने का है मन? जापानी तरीके से तैयार करें शकरकन्द (टैग्सटूट्रांसलेट)डिहाइड्रेशन से बचने के लिए खाद्य पदार्थ(टी)ग्रीष्मकालीन हाइड्रेशन युक्तियाँ(टी)निर्जलीकरण का कारण बनने वाले खाद्य पदार्थ(टी)कैफीन निर्जलीकरण प्रभाव(टी)उच्च प्रोटीन आहार हाइड्रेशन(टी)नमकीन स्नैक्स निर्जलीकरण(टी)ग्रीष्म ऋतु में स्वस्थ भोजन युक्तियाँ(टी)ग्रीष्म ऋतु के लिए हाइड्रेटिंग खाद्य पदार्थ(टी)नारियल पानी के लाभ(टी)ग्रीष्मकालीन आहार युक्तियाँ

शाजापुर में वाहन की टक्कर से दो युवक गंभीर घायल:दोनों ग्राम बड़ागांव के रहने वाले, बाइक से सफर कर रहे थे

शाजापुर में वाहन की टक्कर से दो युवक गंभीर घायल:दोनों ग्राम बड़ागांव के रहने वाले, बाइक से सफर कर रहे थे

शाजापुर जिले के मोहन बड़ोदिया थाना क्षेत्र में गुरुवार रात करीब 9:15 बजे वाहन की टक्कर से दो बाइक सवार युवक बुरी तरह घायल हो गए। यह हादसा ग्राम मोहना जोड़ के पास हुआ, जिसके बाद डायल 112 की टीम ने मौके पर पहुंचकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया। अभी तक ये पता नहीं चल पाया है कि टक्कर किस वाहन ने मारी है। पुलिस वाहन चालक की तलाश कर रही है। हादसे में घायल हुए युवकों की पहचान जितेंद्र (22 वर्ष) और पवन (27 वर्ष) के रूप में हुई है। दोनों ग्राम बड़ागांव के रहने वाले हैं। सूचना मिलते ही डायल 112 के पायलट जगदीश चंद्र सोनी और पुलिस टीम के विजय गवली और केशव शर्मा ने घायलों को तुरंत मोहन बड़ोदिया स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। हालत गंभीर, जिला अस्पताल रेफर अस्पताल में मौजूद डॉक्टर अक्षत डोडिया ने बताया कि एक युवक के सिर में गहरी चोट आई है, वहीं दूसरे युवक का पैर बुरी तरह जख्मी हुआ है। प्राथमिक इलाज के बाद दोनों की गंभीर हालत को देखते हुए रात करीब 10:20 बजे उन्हें बेहतर इलाज के लिए शाजापुर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया।

समर दही रेसिपी: समर दही में शामिल करें दही की ये 2 रेसिपी, पेट में ठंडक के साथ दही भी रहेगा बेहतर

समर दही रेसिपी: समर दही में शामिल करें दही की ये 2 रेसिपी, पेट में ठंडक के साथ दही भी रहेगा बेहतर

ग्रीष्मकालीन दही रेसिपी: गर्मी का मौसम शुरू हो गया है, जिसमें ऐसी चीजें शामिल होनी चाहिए, जो पेट को ठंडक देने के साथ ही डॉज के लिए भी शानदार साबित हो सकती हैं। इस मौसम में दही को सबसे बड़े गोदामों में से एक माना जाता है। दही में प्रोटीन और कैल्शियम की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो शरीर को पोषण देने के साथ वजन नियंत्रित करने में भी मदद करती है। इसके अलावा दही में प्रोबायोटिक्स मौजूद होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं और पेट को बनाए रखने में मदद करते हैं। ऐसे में गर्मियों के मौसम में दही से बनने वाली कुछ आसान रेसिपीज शामिल हो सकती हैं। यहां हम आपको दो ऐसी रेसिपीज के बारे में बता रहे हैं, जो गर्मियों में शरीर को ठंडक देने में मदद करती हैं। डॉलरी रायता गर्मियों में खाने के लिए एक आसान और प्रभावशाली माना जाता है। इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता और यह रोजाना के हिसाब से आसानी से बनाया जा सकता है। गाढ़े दही और लकड़ी भीगी हुई ड्रमी से तैयार यह रायता स्वाद में भी अच्छा लगता है और पाचन के लिए भी हानिकारक माना जाता है। सबसे पहले एक बाउल में दही को अच्छी तरह फेंट लें ताकि वह पसंद हो जाए। अगर काशी बहुमत हो तो इसमें थोड़ा सा पानी समग्र कंसिस्टेंसी सही कर लें। इसके बाद 2 से 3 मिनट के लिए बूंदी को 2 से 3 मिनट के लिए गर्म पानी में डुबोएं और फिर पतले हाथ से अतिरिक्त पानी निकाल दें। अब रासायनिक पदार्थ और मिश्रण में जीरा पाउडर, काली मिर्च और नमक शामिल हैं। सभी बच्चों को अच्छी तरह मिलाने के बाद ऊपर से हरा धनिया और पुदीना दाल दें। इसे लगभग 20 मिनट के लिए फ़िरोज़ में रखें और फिर ठंडा करें। दही पकौड़ा दही और बेसन से बनाया जाता है, जो स्वाद के साथ-साथ पोषण के लिए भी लाजवाब होता है। दही में प्रोबायोटिक्स मौजूद होते हैं, जो पाचन के लिए हानिकारक होते हैं, वहीं बेसन में प्रोटीन मौजूद होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने में मदद करते हैं। स्वादिष्ट पकौड़े के साथ बनी कढ़ी खाने में स्वादिष्ट होती है और पेट के लिए ज्यादा भारी भी नहीं होती. सबसे पहले एक बाउल में दही और बेसन को अच्छी तरह से फेंट लें, ताकि इसमें आंत न रहें। इसके बाद पानी में एलाईटिक नासा तैयार कर लें। अब एक पैन में तेल गर्म करें और इसमें जीरा और कद्दूकस शामिल हैं, जो कि टुकड़ों में बँटे हुए हैं। इसके बाद दही वाला मिटर पैन में शामिल हो गया और लगातार मोर्टार में रुक गया। अब इसमें हल्दी और आर्किटेक्चरल आर्किटेक्चरल सीमेंट पर सीमेंट का ढांचा बनाया गया है, जब तक कढ़ी ढीली गाढ़ी न हो जाए। (टैग्सटूट्रांसलेट) ग्रीष्मकालीन दही रेसिपी (टी) बूंदी रायता रेसिपी (टी) कढ़ी पकौड़ा रेसिपी (टी) स्वस्थ दही रेसिपी (टी) गर्मियों में ठंडा करने वाले खाद्य पदार्थ (टी) पाचन के लिए प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ (टी) भारतीय ग्रीष्मकालीन रेसिपी (टी) आसान घर का बना रायता (टी) दही आधारित व्यंजन (टी) स्वस्थ भारतीय रेसिपी

प्राकृतिक होम कूलिंग: भीषण गर्मी में भी बिना एसी के ठंडा रहता है घर, जानें कूलिंग नियंत्रण बनाए रखने वाले स्मार्ट डिजाइनिंग ट्रिक्स

प्राकृतिक होम कूलिंग: भीषण गर्मी में भी बिना एसी के ठंडा रहता है घर, जानें कूलिंग नियंत्रण बनाए रखने वाले स्मार्ट डिजाइनिंग ट्रिक्स

12 मार्च 2026 को 21:26 IST पर अपडेट किया गया प्राकृतिक घरेलू शीतलता: भीषण गर्मी में भी बिना एसी के घर ठंडा रहता है। जान लें आने वाले सीजन में घर को बनाने की डिजाइनिंग ट्रिक्स। (टैग्सटूट्रांसलेट) होम कूलिंग डिज़ाइन (टी) क्रॉस वेंटिलेशन हाउस डिज़ाइन (टी) रूफ गार्डन फ़ायदे (टी) प्राकृतिक कूलिंग होम (टी) हीट रेसिस्टेंट हाउस डिज़ाइन (टी) इको फ्रेंडली होम डिज़ाइन (टी) पैसिव कूलिंग आर्किटेक्चर (टी) गर्मियों के लिए भारतीय हाउस डिज़ाइन (टी) टिकाऊ होम डिज़ाइन (टी) हीटवेव होम सॉल्यूशंस

भारतीय फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने पाकिस्तानी क्रिकेटर को खरीदा:अबरार अहमद पर काव्या मारन ने ₹2.34 करोड़ की बोली लगाई; द हंड्रेड लीग में खेलेंगे

भारतीय फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने पाकिस्तानी क्रिकेटर को खरीदा:अबरार अहमद पर काव्या मारन ने ₹2.34 करोड़ की बोली लगाई; द हंड्रेड लीग में खेलेंगे

भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी सनराइजर्स लीड्स ने गुरुवार को पाकिस्तान के मिस्ट्री स्पिनर अबरार अहमद पर बोली लगाई। सनराइजर्स की CEO काव्या मारन ने खुद उन्हें 1.90 लाख पाउंड (करीब 2.34 करोड़ रुपए) में खरीदा। इसी के साथ अबरार 21 जुलाई से शुरू हो रही द हंड्रेड लीग में किसी भारतीय मालिकाना हक वाली फ्रेंचाइजी से जुड़ने वाले पहले पाकिस्तानी खिलाड़ी बन गए। भारत और पाकिस्तान के बीच तनावपूर्ण रिश्तों के कारण आईपीएल फ्रेंचाइजियों ने 2009 के बाद से किसी पाकिस्तानी खिलाड़ियों को साइन नहीं किया है। चेन्नई की मीडिया कंपनी सन ग्रुप ने पिछले साल नॉर्दर्न सुपरचार्जर्स में पहले 49% हिस्सेदारी ECB से और बाकी 51% यॉर्कशायर काउंटी क्लब से करीब 10 करोड़ पाउंड में खरीदी थी। इसके बाद टीम का नाम बदलकर सनराइजर्स लीड्स रखा गया। सन ग्रुप IPL में सनराइजर्स हैदराबाद और SA20 में सनराइजर्स ईस्टर्न केप की भी मालिक है, लेकिन इन टीमों में अभी कोई पाकिस्तानी खिलाड़ी नहीं है। सनराइजर्स लीड्स की पोस्ट देखिए… उस्तान तारिक 1.72 करोड़ रुपए में बिके इस नीलामी में बिकने वाले दूसरे पाकिस्तानी खिलाड़ी मिस्ट्री स्पिनर उस्मान तारिक रहे, जिन्हें बर्मिंघम फीनिक्स ने 1.40 लाख पाउंड (लगभग 1.72 करोड़ रुपए) में खरीदा। हालांकि, पाकिस्तान के तेज गेंदबाज हारिस रऊफ और ऑफ स्पिन ऑलराउंडर सैम अयूब अनसोल्ड रहे। बांग्लादेश के मुस्तफिजुर रहमान पर विवाद हुआ था IPL की फ्रेंचाइजी कोलकाता नाइट राइडर्स (IPL) ने 16 दिसंबर 2025 को अबू धाबी में IPL 2026 के मिनी ऑक्शन में बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को 9.20 करोड़ रुपए में खरीदा था। इसके बाद बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं के कारण भारत में इसका विरोध होने लगा। इस पर BCCI के कहने पर KKR ने रहमान को रिलीज कर दिया है। इससे नाराज बांग्लादेशी सरकार ने अपने देश में IPL के प्रसारण पर रोक लगा दी थी। इतना ही नहीं, बांग्लादेश ने भारत में टी-20 वर्ल्ड कप खेलने से इनकार कर दिया था। ऐसे में ICC ने बांग्लादेश को टी-20 वर्ल्ड कप से ही बाहर कर दिया गया था। बांग्लादेश की जगह स्कॉटलैंड को टी-20 वर्ल्ड कप में शामिल किया गया था। पाकिस्तान ने भारत से मैच का बॉयकॉट किया था पाकिस्तानी सरकार ने टी-20 वर्ल्ड कप में भारत से मैच का बॉयकॉट कर दिया था। हालांकि, श्रीलंकाई राष्ट्रपति के हस्तक्षेप के बाद पाकिस्तानी सरकार ने भारत से मैच के लिए मंजूरी दी थी। कोलंबो में 15 फरवरी को खेले गए इस मैच में भारतीय टीम ने 61 रनों के अंतर से जीता था। पाकिस्तान के खिलाफ ईशान किशन ने फिफ्टी लगाई थी। ——————————————————– क्रिकेट से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… अब नेट्स शेयर नहीं कर सकेंगी IPL टीमें, BCCI ने प्रैक्टिस सेशन की गाइडलाइन जारी की BCCI ने IPL टीमों के प्रैक्टिस सेशन को लेकर नई गाइडलाइन जारी की हैं। इसके अनुसार कोई भी टीम उस नेट या पिच पर प्रैक्टिस नहीं कर सकेगी, जिस पर दूसरी टीम पहले अभ्यास कर चुकी हो। हर टीम को अभ्यास के लिए अलग और नए नेट उपलब्ध कराए जाएंगे। पढ़ें पूरी खबर

गर्मियों में ठंडक और हाइड्रेशन के लिए गन्ने का जूस – फायदे और सावधानियां

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Last Updated:March 12, 2026, 21:14 IST मार्च से बढ़ती गर्मी के बीच गन्ने का जूस बन गया लोगों का पसंदीदा पेय. यह न सिर्फ शरीर को अंदर से ठंडक और ताजगी देता है, बल्कि पाचन, हाइड्रेशन और लिवर की सेहत के लिए भी फायदेमंद है. लेकिन उच्च ब्लड शुगर वाले लोगों को इसका सेवन सावधानी से करना चाहिए. रायबरेली. मार्च की शुरुआत से ही गर्मी का असर दिखाई देने लगा है, तापमान में हो रही लगातार बढ़ोत्तरी से आम जनजीवन भी प्रभावित हो रहा है. बढ़ी हुई गर्मी के कारण लोगों को बार-बार प्यास लगने जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है. गर्मी के मौसम में तेज धूप की वजह से लोगों को थकान सुस्ती महसूस होती है इस दौरान लोग अपने शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए कई तरह के पेय पदार्थ का सेवन करते हैं. जो गर्मी के मौसम में शरीर में हाइड्रेट रखने के साथ ही तरोताजा बनाए रखने में भी कारगर होते हैं. गर्मी के मौसम में शरीर को हाइड्रेट बनाए रखने के साथ ही अंदर से शीतलता प्रदान करने में गन्ने का जूस भी बड़ा ही लाभदायक है. गन्ने के जूस की तासीर ठंडी होती है जो शरीर को अंदर से शीतलता प्रदान करती है. यह आपको गर्मी के मौसम में चलने वाली तेज लू से भी बचाने में कारगर होता है. इन तत्वों से भरपूर रायबरेली जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शिवगढ़ की आयुष चिकित्सक डॉ. आकांक्षा दीक्षित (एम डी आयुर्वेद नेशनल इंस्टीट्यूट आफ आयुर्वेद जयपुर ,राजस्थान) लोकल 18 से बात करते हुए बताती हैं कि गन्ने के जूस में जिंक, आयरन, पोटैशियम, कैल्शियम, मैंगनीज, मैग्नीशियम सहित कई अन्य पोषक तत्व भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो हमारी सेहत के लिए बेहद फायदेमंद हैं. अगर आपका पाचन तंत्र कमजोर है, तो आपको गन्ने का रस पीना चाहिए. गन्ने के रस में मौजूद पोटैशियम पेट में पीएच लेवल को संतुलित करता है. गन्ने का रस लोगों को हाइड्रेटेड रखता है और इससे कब्ज की समस्या से आराम मिलता है. इनके लिए फायदा आकांक्षा दीक्षित के मुताबिक जिन लोगों को पीलिया की समस्या हो जाती है, उनके लिए गन्ने का जूस किसी अमृत से कम नहीं होता है, क्योंकि गन्ने के जूस में एंटीऑक्सीडेंट होता है ,जो लीवर को संक्रमित होने से बचाते हैं. आगे की जानकारी देते हुए बताती है कि गन्ने का जूस उन लोगों को भूलकर भी नहीं पीना चाहिए. जिनका ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ हो क्योंकि यह उनके लिए नुकसानदायक होता है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें Location : Rae Bareli,Uttar Pradesh First Published : March 12, 2026, 21:14 IST

फिल्म कैलेंडर का ट्रेलर लॉन्च, महिला जीवन की भावनात्मक कहानी:मूवी के माध्यम से समाज में संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की नई पहल

फिल्म कैलेंडर का ट्रेलर लॉन्च, महिला जीवन की भावनात्मक कहानी:मूवी के माध्यम से समाज में संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत शुरू करने की नई पहल

मुंबई में आगामी फिल्म ‘कैलेंडर’ की टीम ने रिलीज से पहले प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर फिल्म के कॉन्सेप्ट और कहानी के बारे में मीडिया को जानकारी दी। रनिंग हॉर्स क्रिएशन्स के बैनर तले बनी इस फिल्म के निर्माता और लीड एक्टर आदर्श गुंडूराज हैं। खास बात यह है कि ‘कैलेंडर’ मूल रूप से कन्नड़ फिल्म है, जिसे अब हिंदी में भी रिलीज किया जा रहा है ताकि यह देशभर के दर्शकों तक पहुंच सके। चार्टर्ड अकाउंटेंट से फिल्ममेकर बने आदर्श गुंडूराज ने प्रेस मीट में कहा कि इस फिल्म की कहानी महिलाओं के जीवन से जुड़े भावनात्मक पहलुओं को सामने लाने की कोशिश करती है। उन्होंने बताया कि फिल्म सिर्फ मनोरंजन ही नहीं, बल्कि समाज में संवेदनशील मुद्दों पर बातचीत शुरू करने का भी प्रयास है। फिल्म की कहानी महिलाओं के जीवन में आने वाले भावनात्मक उतार-चढ़ाव, रिश्तों पर उनके असर और रोजमर्रा की जिंदगी में आने वाली चुनौतियों को दर्शाती है। मेकर्स का कहना है कि ‘कैलेंडर’ एक मजबूत कहानी के साथ दर्शकों को सोचने पर मजबूर करेगी। फिल्म में आदर्श गुंडूराज के अलावा रमेश इंदिरा, प्रकाश थुमिनाडु, गुरुनंदन, मालाश्री, सुचेंद्रप्रसाद, चंद्रप्रभा, शिव प्रदीप, सुष्मिता नायक, निविश्का पाटिल और अमृथा जैसे कलाकार नजर आएंगे। फिल्म का निर्देशन नवीन शक्ति ने किया है, जबकि संगीत सुनाद गौतम ने तैयार किया है। सिनेमैटोग्राफी रमेश कोइरा और एडिटिंग सुरेश अरुमुगम ने संभाली है। वहीं एक्शन सीक्वेंस को राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता और ‘KGF’ व ‘कांतारा’ फेम एक्शन डायरेक्टर विक्रम मोर ने डिजाइन किया है। फिल्म की कहानी और निर्माण आदर्श गुंडूराज ने किया है, जबकि शिव प्रदीप सह-निर्माता और महंताश आर सह-निर्देशक हैं। ‘कैलेंडर’ 3 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी, जिसका वितरण वीके फिल्म्स (विजय किरागंदूर फिल्म्स) द्वारा किया जा रहा है।