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VIDEO: युवी से पावर हिटिंग सीख रहे पंत:IPL से पहले स्टांस बदला, पिछले सीजन में 269 रन ही बना सके थे

VIDEO: युवी से पावर हिटिंग सीख रहे पंत:IPL से पहले स्टांस बदला, पिछले सीजन में 269 रन ही बना सके थे

IPL के पिछले सीजन में खराब प्रदर्शन के बाद ऋषभ पंत अब युवराज सिंह से पावर हिटिंग की ट्रेनिंग कर रहे हैं। उन्होंने गुरुवार को अपने इंस्टाग्राम में एक वीडियो पोस्ट किया, जिसमें पंत मुंबई के क्रिकेट क्लब ऑफ इंडिया में युवराज की निगरानी में बड़े-बड़े शॉर्ट खेलने की प्रैक्टिस कर रहे हैं। इस वीडियो में युवराज सिंह उनकी तकनीक को ध्यान से देख रहे हैं। इतना ही नहीं, वे उन्हें बल्लेबाजी से जुड़े सुझाव भी देते नजर आ रहे हैं। पंत के लिए IPL का पिछला सीजन काफी खराब रहा था। वे एक शतकीय पारी के बावजूद महज 269 रन ही बना सके थे। पंत की ट्रेनिंग का वीडियो देखिए… GIF में पंत की प्रैक्टिस लेफ्टी बॉलर्स के खिलाफ स्टांस बदला इस ट्रेनिंग सेशन में पंत ने ओपन स्टांस लिया यानी कि वे बाएं हाथ के गेंदबाजों के खिलाफ थोड़े खुले पैरों के साथ बैटिंग करते दिखे। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि इस बदलाव से उन्हें ऑफ-साइड में बड़े शॉट खेलने और बेहतर एंगल कवर करने में मदद मिलेगी। पंत चोट से वापसी कर रहे हैं। वे 11 जनवरी को भारत-न्यूजीलैंड वनडे सीरीज से ठीक पहले चोटिल हो गए थे। ट्रेनिंग सेशन के दौरान थ्रोडाउनर की बॉल पंत की दाहिनी पसलियों पर लगी थी। वे इस सीरीज से बाहर हो गए थे। उन्होंने पिछला इंटरनेशनल मैच साउथ अफ्रीका के खिलाफ गुवाहाटी में 22 से 26 नवंबर 2025 को खेला था। उस टेस्ट मैच को साउथ अफ्रीका ने 408 रन से जीता था। युवाओं के मेंटर बन चुके हैं युवराज युवराज सिंह पिछले कुछ वर्षों में युवा खिलाड़ियों के लिए बेहतरीन मेंटर साबित हुए हैं। उन्होंने शुभमन गिल, अभिषेक शर्मा और प्रभसिमरन सिंह जैसे खिलाड़ियों को ट्रेनिंग दी है। इन खिलाड़ियों ने युवराज के साथ अभ्यास के बाद टी-20 क्रिकेट में शानदार प्रदर्शन किया है। पंत से पहले खराब फॉर्म से गुजर रहे संजू सैमसन ने टी-20 वर्ल्ड कप से पहले दिग्गज बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर से मदद ली थी। उन्होंने न्यूजीलैंड के खिलाफ 96 रनों से फाइनल मैच जीतने के बाद कहा था कि सचिन ने उनकी फॉर्म वापसी में काफी मदद की थी। ———————————————— IPL से जुड़ी यह खबर भी पढ़िए… IPL के शुरुआती 20 मैच का शेड्यूल जारी; 28 मार्च को बेंगलुरु में RCB-SRH का ओपनिंग मैच IPL 2026 के शुरुआती 20 मैचों का शेड्यूल बुधवार को जारी कर दिया गया है। ओपनिंग मैच 28 मार्च को डिफेंडिंग चैंपियन रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) और सनराइजर्स हैदराबाद (SRH) के बीच खेला जाएगा। पढ़ें पूरी खबर

गर्मियों में बच्चों के बाल तेजी से बढ़ाने के लिए कैस्टर ऑयल के साथ मिलाएं ये 5 हल्के हेयर ऑयल, बाल बनेंगे मजबूत और हेल्दी

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Kids Hair Care Tips: गर्मियों का मौसम बच्चों के बालों के लिए अक्सर चुनौती भरा होता है. तेज धूप, पसीना, धूल मिट्टी, प्रदूषण और स्विमिंग पूल का क्लोरीन बालों को कमजोर बना सकता है. इस वजह से बच्चों के बाल रूखे, बेजान और टूटने वाले हो जाते हैं. कई बार माता पिता यह भी शिकायत करते हैं कि गर्मियों में बच्चों के बालों की ग्रोथ धीमी हो जाती है या बाल ज्यादा झड़ने लगते हैं. ऐसे में सही हेयर केयर बहुत जरूरी हो जाता है. खासकर तेल से मालिश यानी चंपी बच्चों के बालों के लिए बहुत फायदेमंद मानी जाती है. अगर आप बालों की मालिश के लिए कैस्टर ऑयल यानी अरंडी का तेल इस्तेमाल करते हैं तो यह बालों की जड़ों को मजबूत करने में मदद करता है. लेकिन कैस्टर ऑयल काफी गाढ़ा होता है, इसलिए इसे अकेले लगाने की बजाय हल्के तेलों के साथ मिलाकर लगाना ज्यादा अच्छा माना जाता है. इससे तेल आसानी से बालों में समा जाता है और बालों को पूरा पोषण मिलता है. गर्मियों में कुछ ऐसे हल्के तेल हैं जो कैस्टर ऑयल के साथ मिलकर बच्चों के बालों के लिए बहुत अच्छे साबित हो सकते हैं. आइए जानते हैं ऐसे ही पांच तेलों के बारे में जो गर्मियों में बालों की ग्रोथ और हेल्थ दोनों को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. 1. नारियल तेलनारियल तेल बालों की देखभाल में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तेल है. यह हल्का होता है और बालों की जड़ों तक आसानी से पहुंच जाता है. नारियल तेल बालों में नमी बनाए रखने में मदद करता है और धूप से होने वाली रूखापन की समस्या को कम करता है. अगर आप कैस्टर ऑयल के साथ नारियल तेल मिलाकर लगाते हैं तो यह मिश्रण बालों को गहराई से पोषण देता है. इसके लिए एक चम्मच कैस्टर ऑयल में दो चम्मच नारियल तेल मिलाएं और बच्चों के सिर की हल्के हाथों से मालिश करें. 2. आर्गन ऑयलआर्गन ऑयल को अक्सर लिक्विड गोल्ड भी कहा जाता है. इसमें विटामिन ई, एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी फैटी एसिड होते हैं जो बालों को मजबूत बनाने में मदद करते हैं. कैस्टर ऑयल के साथ आर्गन ऑयल मिलाने से बालों को अतिरिक्त पोषण मिलता है. यह बालों को मुलायम बनाता है, फ्रिज कम करता है और बालों में प्राकृतिक चमक लाता है. गर्मियों में जब बाल जल्दी रूखे हो जाते हैं, तब यह मिश्रण काफी फायदेमंद साबित हो सकता है. 3. बादाम तेलबादाम का तेल भी बालों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है. इसमें विटामिन ई, मैग्नीशियम और फैटी एसिड होते हैं जो बालों की जड़ों को मजबूत करते हैं. अगर बच्चों के बाल जल्दी टूटते हैं या दो मुंहे बाल की समस्या है तो बादाम तेल और कैस्टर ऑयल का मिश्रण मदद कर सकता है. बराबर मात्रा में दोनों तेल मिलाकर सप्ताह में दो बार बच्चों के सिर पर हल्के हाथों से मालिश करें. 4. जैतून का तेलजैतून का तेल यानी ऑलिव ऑयल सदियों से बालों की देखभाल में इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसमें मॉइस्चराइजिंग और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जो बालों को मुलायम बनाते हैं. गर्मियों में पसीना और धूप की वजह से बाल उलझने लगते हैं. ऐसे में जैतून का तेल बालों को स्मूद बनाने में मदद करता है. इसके लिए दो चम्मच जैतून तेल में एक चम्मच कैस्टर ऑयल मिलाकर सिर की पांच मिनट तक मालिश करें और फिर बाल धो लें. 5. जोजोबा तेलजोजोबा ऑयल को हल्का और स्कैल्प फ्रेंडली तेल माना जाता है. यह हमारे स्कैल्प के प्राकृतिक तेल यानी सेबम जैसा होता है. यह स्कैल्प में तेल का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है और बालों की जड़ों को बंद नहीं होने देता. गर्मियों में जब पसीने की वजह से स्कैल्प में खुजली या चिपचिपाहट होती है तब जोजोबा ऑयल और कैस्टर ऑयल का मिश्रण बहुत अच्छा काम करता है. बच्चों के बालों में तेल लगाने के फायदेबच्चों के बालों में नियमित तेल लगाने से कई फायदे मिलते हैं. इससे स्कैल्प को पोषण मिलता है, बाल मजबूत होते हैं और बालों की ग्रोथ भी बेहतर होती है. तेल से मालिश करने से ब्लड सर्कुलेशन भी अच्छा होता है जिससे बालों की जड़ों को जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं. यही वजह है कि पुराने समय से बच्चों के बालों की चंपी करने की परंपरा चली आ रही है. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

नो गैस कुकिंग: ना गैस की जरूरत, ना घंटों की मेहनत! बिना गैस के मिनटों में तैयार ये 5 ग्रेडर रेसिपी

भारत में एलपीजी संकट, बिना गैस के खाना पकाने, स्वस्थ भोजन रेसिपी, आहार युक्तियाँ जानें

बिना गैस की बनी डिश | छवि: एआई/फ्रीपिक स्वस्थ नाश्ता और स्नैक रेसिपी: यहां देखें भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास खाना बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता। कई बार ऐसी स्थिति भी हो जाती है जब गैस उपलब्ध नहीं होती या जल्दी में कुछ प्रभाव-फुल्का और तकनीशियन का मन हो जाता है। ऐसे में कुछ ऐसी रेसिपी बेहद काम की हैं जिन्हें बनाने के लिए गैस की जरूरत नहीं है और ये मिनटों में तैयार हो जाती हैं। तो जानें ऐसी ही 5 आसान और क्लासिक रेसिपी के बारे में। वेजिटेबल असेंबली वेजिटेबल अनैच्छिक एक बेहद आसान और वेस्ट इंडिकेटर है। कैसे? बेडरूम पर बटर या मेयोनीज़ बेडरूम। इसके ऊपर खेडा, टमाटर, प्याज और आलू की पूर्ति की आवश्यकता है। स्वाद के लिए नमक, काली मिर्च और चाट मसाला। ऊपर से दूसरी ब्रेडेडी रेस्तरां तैयार कर लें। यह झटपट बनने वाला टेस्टी और पेट रिजर्वेशन वाला है। स्पोट्ज़ कीज़ स्प्राउट्स यानी अनमोल दालें स्वास्थ्य के लिए बहुत ही आकर्षक हैं। कैसे? एक बाउल में स्मारक मूंग या चना लें। इसमें प्याज, टमाटर, खीरा और हरी मिर्च डालें। ऊपर से नींबू का रस, नमक और थोड़ा सा चाट मसाला स्टाव। यह प्रोटीन से भरपूर और बहुत सारी मिसाइलें होती है। दही का कटोरा अगर आपके पास कुछ मिठाई और मशीनरी खाना है तो दही बाउल बाउल बेहतरीन विकल्प है। कैसे? एक मसाले में ताज़ा दही लें। कटे हुए सेब, केला, पपीता या अवशेष। ऊपर से लिटिल हनी या फ़्लोरिंग डॉल डे। यह रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ शरीर को ऊर्जा भी देती है। पीनट बटर बनाना रोल यह बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है। कैसे? एक रोटी या ब्रेडर पर पीनट बटर बटर। इसके ऊपर केला सुपरमार्केट रोल बना लें। यात्रा तो ऊपर से थोड़ा शहद भी डाल सकते हैं। यह झटपट बनने वाला परमाणु ऊर्जा देता है जो तुरंत ऊर्जा देता है। चना चाट चना चाट भी बिना गैस के बनने वाला, स्वादिष्ट और स्वादिष्ट विकल्प है। कैसे? सब्ज़े चने एक बाउल में लें। इसमें प्याज, टमाटर, हरा धनियां और हरी मिर्च शामिल हैं। ऊपर से नमक, चाट मसाला और नींबू का रस मठ से मिश्रण कर लें। यह चैट टेस्टी के साथ-साथ पेट के लिए भी मज़ेदार है। यह अवश्य पढ़ें: पनीर सलाद रेसिपी: मिनट में निश्चित हरे मटर और पनीर वाला हाई प्रोटिन क्यूज़, वेट लॉस के लिए है परफेक्ट बॅट रेसिपी

क्या ILBS अस्पताल में अब सबको फ्री मिलेगा ल‍िवर का इलाज? हाईकोर्ट में PIL दायर, क्या की गई है मांग, जानें

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होमताजा खबरDelhi क्या ILBS अस्पताल में अब सबको फ्री मिलेगा ल‍िवर का इलाज? हाईकोर्ट में PIL दायर Last Updated:March 12, 2026, 17:38 IST द‍िल्‍ली सरकार के इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज नई दिल्ली के खिलाफ सोशल ज्‍यूर‍िस्‍ट एडवोकेट अशोक अग्रवाल ने जनहित याचिका दायर की है. पीआईएल में अस्पताल की पॉलिसी को मनमानी और भेदभावकारी बताया है और सरकारी अस्‍पताल होने के बावजूद सबको मुफ्त इलाज न म‍िलने पर सवाल उठाया है. केस की 18 मार्च को सुनवाई होगी. द‍िल्‍ली हाईकोर्ट में आईएलबीएस अस्‍पताल के ख‍िलाफ पीआईएल दायर की गई है. ILBS Hospital news: इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज नई दिल्ली को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गई है. याचिका में कहा गया है कि इस अस्पताल में इकॉनोमिकली वीकर सेक्शन के तहत मुफ्त इलाज लेने वालों के लिए आईपीडी यानि भर्ती होने वाले मरीजों के लिए 10 फीसदी बेड और ओपीडी में 25 फीसदी मरीजों को देखने का कोटा तय किया गया है. जबकि यह सुपर स्पेशलिटी अस्पताल दिल्ली सरकार के द्वारा स्थापित किया गया था और इसका मालिकाना हक भी राज्य के ही पास है. यहां तक कि यह पूरी तरह सरकार के ही द्वारा फंडेड और नियंत्रित है बावजूद इसके इसे स्वायत्त संस्था के तौर पर घोषित किया हुआ है और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए इलाज की सीमाएं तय कर दी गई हैं जो किसी भी तरह से वैध नहीं है. याचिका में कहा गया है कि इस अस्पताल को सरकार की ओर से लिवर की गंभीर बीमारियों जैसे हैपेटाइटिस, सिरोसिस, लिवर कैंसर आदि के स्पेशलाइज्ड इलाज करने के लिए बनाया गया था और आज तक सरकार के ही द्वारा पैसा दिया जाता है बावजूद इसके इसमें ऐसी पॉलिसी अपनाई गई है जो इसे सरकारी अस्पताल के बजाय प्राइवेट हेल्थकेयर इंस्टीट्यूशन ज्यादा बनाती है. जहां तकरीबन 90 फीसदी बेड पैसे का भुगतान करने वाले मरीजों के लिए आरक्षित हैं. यह इस जनहित याचिका को दायर करने वाले एडवोकेट अशोक अग्रवाल कहते हैं कि याचिका में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह सरकारी फंडेड अस्पताल की यह पॉलिसी पूरी तरह मनमानी, भेदभावकारी और भारतीय संविधान के आर्टिकल 14 और 21 का उल्लंघन है. यह नीति पब्लिक के पैसों से बने अस्पताल में उन्हें मिलने वाले लाइफ सेविंग इलाज में जबरन बाधा पैदा कर रही है. अस्पताल का यह तरीका सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के भी खिलाफ है. एडवोकेट अशोक ने बताया कि देश में कहीं भी ऐसा कोई सरकारी अस्पताल नहीं है जहां सब कुछ सरकार का है लेकिन मरीजों का इलाज पैसे लेकर होता है और गरीब मरीजों को धक्के खाने पड़ते हैं. यह अस्पताल सरकारी होते हुए भी प्राइवेट अस्पताल की तरह काम कर रहा है जो इसकी वैधता पर सवाल उठाता है. उन्होंने कहा कि इस जनहित याचिका को दिल्ली हाईकोर्ट में लिस्ट करा दिया गया है और 18 मार्च बुधवार को इसकी सुनवाई होनी है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें First Published : March 12, 2026, 17:38 IST

फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% हुई:खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; इजराइल-ईरान जंग से ये और बढ़ सकती है

फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% हुई:खाने-पीने की चीजें महंगी होने का असर; इजराइल-ईरान जंग से ये और बढ़ सकती है

फरवरी में रिटेल महंगाई बढ़कर 3.21% पहुंच गई है। इससे पहले जनवरी में यह 2.74% थी। आज 12 मार्च को ये आंकड़े जारी किए गए हैं। महंगाई में यह बढ़ोतरी ऐसे समय में हुई है जब इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग चल रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह जंग लंबी चली तो कच्चे तेल के दाम 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकते हैं। इससे पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है, जिससे माल ढुलाई का खर्च बढ़ेगा और फल-सब्जी समेत हर जरूरी सामान की कीमतें बढ़ जाएंगी। वित्त वर्ष 2025-2026 में रिटेल महंगाई दर खाने-पीने की चीजों के दाम चढ़ने से महंगाई बढ़ी फरवरी में लहसुन 31% और प्याज 28% तक हुआ सस्ता चांदी के गहनों की महंगाई दर 160% से ज्यादा नए तरीके से मापी जा रही महंगाई, OTT शामिल यह महंगाई के नए फॉर्मूले (2024 बेस ईयर) के तहत जारी दूसरा आंकड़ा है। सरकार ने महंगाई नापने के बास्केट में भी बदलाव किया है। खाने-पीने की चीजों का वजन 45.9% से घटाकर 36.75% कर दिया गया है, जबकि हाउसिंग और बिजली-गैस का वजन बढ़ा दिया गया है। RBI का अनुमान: 4% के पार जा सकती है महंगाई रिजर्व बैंक ने वित्त वर्ष 2026 के लिए औसत महंगाई दर 2.1% रहने का अनुमान लगाया है। हालांकि, अप्रैल-जून (Q1 FY27) की तिमाही में यह बढ़कर 4% और अगली तिमाही में 4.2% तक जा सकती है। फिलहाल महंगाई आरबीआई के तय लक्ष्य (4%) के भीतर ही है, जिससे बाजार को उम्मीद है कि नीतिगत दरों में तुरंत कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। नॉलेज बॉक्स: महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है? महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी। 3.21% महंगाई दर का क्या मतलब है? 1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल) जब हम कहते हैं कि फरवरी 2026 में महंगाई 3.21% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना फरवरी 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 3.21% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं: 2. ₹100 की चीज़ अब ₹103.21 की हो गई इसका गणित बहुत सीधा है। अगर फरवरी 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान फरवरी 2026 में ₹103.21 का हो गया है।

‘भगवान ने मुझे बचाया’: फारूक अब्दुल्ला ने हत्या के प्रयास के लिए ‘देश में गहरी जड़ें जमा चुकी नफरत’ को जिम्मेदार ठहराया | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 12, 2026, 16:01 IST जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री बुधवार की रात 63 वर्षीय स्थानीय व्यक्ति कमल सिंह जामवाल द्वारा लाइसेंसी पिस्तौल से करीब से गोली चलाने के बाद बाल-बाल बच गए। फारूक अब्दुल्ला पर एक शादी समारोह में एक बंदूकधारी ने हमला कर दिया। (फाइल फोटो) नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने अपने जीवन पर हुए हमले को “देश में गहरी जड़ें जमा चुकी नफरत” से जोड़ा है। अब्दुल्ला ने जम्मू के ग्रेटर कैलाश इलाके में एक शादी समारोह के दौरान उन पर हत्या के असफल प्रयास के एक दिन बाद यह बात कही। मीडिया से बात करते हुए, अब्दुल्ला ने अपने जीवित रहने के लिए आभार व्यक्त किया और बताया कि जब उसकी दाढ़ी कटी तो क्या हुआ। फारूक अब्दुल्ला ने कहा, “सबसे बड़ी त्रासदी यह है कि देश में नफरत की जड़ें गहरी हो गई हैं। कोई भी धर्म नफरत नहीं सिखाता; सभी धर्म प्यार और सम्मान सिखाते हैं और मुझे लगता है कि हमने वह धर्म छोड़ दिया है।” उन्होंने कहा, ”भगवान ने मुझे बचा लिया,” उन्होंने कहा कि शुरू में उन्होंने गलती से गोली को पटाखा समझा। उन्होंने कार्यक्रम स्थल से बाहर निकलते समय आवाज सुनने और उनकी टीम द्वारा तुरंत सुरक्षित स्थान पर ले जाने का वर्णन किया। सुरक्षा व्यवस्था पर उन्होंने कहा कि पुलिस की तैनाती खराब है और इस मामले की जांच होनी चाहिए. उन्होंने कहा, ”ऐसी घटनाएं इसलिए हो रही हैं क्योंकि हम नफरत के युग में जी रहे हैं।” हमलावर के बारे में अब्दुल्ला ने कहा कि उसकी किसी से कोई व्यक्तिगत दुश्मनी नहीं है। दिग्गज नेता ने कहा, ”मेरे दिल में कभी किसी के लिए नफरत नहीं आई, मुझे नहीं पता कि मेरे प्रति उनकी नाराजगी क्या थी।” उन्होंने आगे कहा, “चाहे आप कितनी भी सुरक्षा बढ़ा लें, हत्यारे को हमेशा फायदा होता है। समस्या यह है कि हम ऐसे युग में रहते हैं जहां आतंकवाद आसमान पर है और हम इसे नियंत्रित नहीं कर सकते।” एनसी प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए अपना आह्वान दोहराया और अधिकारियों से यह जांच करने का आग्रह किया कि क्या क्षेत्र में दावा की गई सामान्य स्थिति वास्तव में मौजूद है। बुधवार की रात कमल सिंह जम्वाल नाम के एक 63 वर्षीय स्थानीय व्यक्ति ने लाइसेंसी पिस्तौल से उन पर करीब से गोली चला दी, जिसके बाद अब्दुल्ला बाल-बाल बच गए। सुरक्षाकर्मियों ने गोली की दिशा बदल दी और हमलावर को काबू में कर लिया, जिसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया। सभी दलों के नेताओं ने घटना की निंदा की और सुरक्षा चूक की गहन जांच की मांग की। जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और उनके बेटे उमर अब्दुल्ला ने इसे ‘क्लोज शेव’ बताया और सवाल उठाया कि फारूक अब्दुल्ला की Z+ सुरक्षा के बावजूद हमलावर इतने करीब कैसे पहुंच गया। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना जगह : श्रीनगर, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 12, 2026, 16:01 IST समाचार राजनीति ‘भगवान ने मुझे बचाया’: फारूक अब्दुल्ला ने हत्या के प्रयास के लिए ‘देश में गहरी जड़ें जमा चुकी नफरत’ को जिम्मेदार ठहराया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)जम्मू(टी)फारूक अब्दुल्ला(टी)नेशनल कॉन्फ्रेंस(टी)जम्मू-कश्मीर(टी)नफरत(टी)आतंक(टी)हत्या का प्रयास

मुरैना में एक लाख दो हजार की अवैध शराब जब्त:लकड़ी की गुमठी से हो रही थी बिक्री, एक गिरफ्तार

मुरैना में एक लाख दो हजार की अवैध शराब जब्त:लकड़ी की गुमठी से हो रही थी बिक्री, एक गिरफ्तार

कैलारस थाना पुलिस ने बुधवार रात क्वारी बिलगांव के पास सड़क किनारे एक लकड़ी की गुमठी पर छापा मारकर 1 लाख 2 हजार रुपए की अवैध शराब (देशी और अंग्रेजी) जब्त की है। पुलिस ने मौके से एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जो इस गुमठी में शराब का स्टॉक रखकर ग्रामीण इलाकों में बेच रहा था। पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। कैलारस पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि क्वारी बिलगांव में सड़क किनारे रखी एक लकड़ी की गुमठी में अवैध शराब का भारी मात्रा में भंडारण किया गया है। इसी गुमठी से इलाके में शराब की बिक्री भी की जा रही है। सूचना की तस्दीक करने के बाद पुलिस ने बुधवार रात मौके पर जाकर चेकिंग की। जब पुलिस की टीम मौके पर पहुंची तो आरोपी उसी गुमठी पर बैठा हुआ था। गुमठी की तलाशी लेने पर वहां से बड़ी मात्रा में शराब बरामद हुई। आरोपी पर पहले से दर्ज हैं कई अपराध पुलिस ने मौके से क्वारी बिलगांव निवासी आरोपी अरविंद कुशवाह पुत्र दीवान सिंह कुशवाह को गिरफ्तार कर लिया है। अवैध शराब भंडारण के मामले में पकड़े गए इस आरोपी पर शराब तस्करी के पहले भी कई अपराध दर्ज हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, आरोपी अरविंद कुशवाह इससे पहले भी कई बार अवैध शराब की तस्करी करने और उसे बेचने के आरोप में पकड़ा जा चुका है। टीआई बोले- अवैध शराब जब्त कर आरोपी को पकड़ा कैलारस थाना प्रभारी सतेंद्र कुशवाह ने बताया, “पुलिस को सूचना मिली कि जो क्वारी बिलगांव के पास सड़क किनारे लकड़ी की गुमठी है उसमें शराब का भंडारण किया गया है।” उन्होंने आगे कहा, “शराब वही से बेची जा रही है। इस पर कार्यवाही करते हुए हमने अवैध शराब जब्त की है, आरोपी को भी गिरफ्तार किया है।”

राज्यसभा जाने के लिए अप्रैल में इस्तीफा दे सकते हैं नीतीश कुमार; बिहार के नए मुख्यमंत्री का चयन 16 मार्च के बाद | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 12, 2026, 14:12 IST सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर प्रस्तावित व्यवस्था के हिस्से के रूप में, कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने की उम्मीद है। जद (यू) प्रमुख नीतीश कुमार आखिरी बार 1998 से 2004 के बीच तत्कालीन प्रधान मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार में कार्यरत थे। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) सूत्रों के मुताबिक, योजनाबद्ध राजनीतिक बदलाव के तहत नीतीश कुमार 8 या 9 अप्रैल को बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं, जिसके तहत उन्हें राज्यसभा में भेजा जाएगा। सूत्रों ने कहा कि कुमार राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने से पहले बिहार विधान परिषद से भी इस्तीफा देंगे। उनके 16 मार्च को औपचारिक रूप से उच्च सदन के लिए चुने जाने की उम्मीद है, जिसके बाद राज्य में नेतृत्व परिवर्तन आगे बढ़ेगा। सूत्रों ने संकेत दिया कि बिहार के नए मुख्यमंत्री का चयन 16 मार्च के बाद होने की संभावना है। सत्तारूढ़ गठबंधन के भीतर प्रस्तावित व्यवस्था के हिस्से के रूप में, कुमार के बेटे निशांत कुमार को उपमुख्यमंत्री नियुक्त किए जाने की उम्मीद है। इसके अलावा, नई सरकार के गठन में जनता दल (यूनाइटेड) को एक और उपमुख्यमंत्री मिलने की संभावना है। सूत्रों ने कहा कि अगली सरकार में गृह विभाग भारतीय जनता पार्टी के पास रहेगा। पिछले हफ्ते, कुमार ने बिहार से राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया, जिससे राज्य में संभावित नेतृत्व परिवर्तन के बारे में अटकलें शुरू हो गईं। नामांकन राज्य में सत्तारूढ़ गठबंधन के समर्थन से आया था, जिसमें जनता दल (यूनाइटेड) और उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी ने उच्च सदन सीट के लिए उनकी उम्मीदवारी का समर्थन किया था। राज्य विधानमंडल में गठबंधन को पूर्ण बहुमत प्राप्त होने के कारण, कुमार का राज्यसभा के लिए चुनाव व्यापक रूप से एक औपचारिकता के रूप में देखा जाता है। पहले प्रकाशित: मार्च 12, 2026, 14:12 IST समाचार राजनीति राज्यसभा जाने के लिए अप्रैल में इस्तीफा दे सकते हैं नीतीश कुमार; बिहार के नए मुख्यमंत्री का चयन 16 मार्च के बाद अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)नीतीश कुमार(टी)बिहार के मुख्यमंत्री(टी)राज्यसभा(टी)बिहार विधान परिषद(टी)निशांत कुमार(टी)उपमुख्यमंत्री(टी)जनता दल (यूनाइटेड)(टी)भारतीय जनता पार्टी

दफ्तरों में जॉब हगिंग का ट्रेंड:लोगों के लिए अब वेतन वृद्धि से ज्यादा जरूरी पक्की नौकरी; धीमी हायरिंग, महंगाई-छंटनी का डर और एआई का असर भी वजह

दफ्तरों में जॉब हगिंग का ट्रेंड:लोगों के लिए अब वेतन वृद्धि से ज्यादा जरूरी पक्की नौकरी; धीमी हायरिंग, महंगाई-छंटनी का डर और एआई का असर भी वजह

बदलते आर्थिक माहौल में अब कर्मचारी ‘जॉब हॉपिंग’ (नौकरी बदलना) के बजाय ‘जॉब हगिंग’ को अपना रहे हैं। लोग नई और बेहतर नौकरी तलाशने के बजाय अपनी मौजूदा नौकरी को ही मजबूती से पकड़े हुए हैं। इसकी बड़ी वजह ज्यादा सैलरी नहीं, बल्कि भविष्य की सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता है। भर्ती की सुस्त रफ्तार, बढ़ती महंगाई और छंटनी के डर ने लोगों का आत्मविश्वास कम किया है। इसके साथ ही एआई और ऑटोमेशन के बढ़ते असर ने भी रोजगार को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक कर्मचारी सतर्कता के कारण एक ही जगह टिके हुए हैं। उनके लिए जॉब सिक्योरिटी भावनात्मक सुरक्षा कवच की तरह बन गई है, जो आर्थिक झटके से बचाने में मदद करती है 75% कर्मचारियों ने 2027 तक नौकरी न बदलने की बात कही अमेरिकी रोजगार प्लेटफॉर्म मॉन्स्टर 2025 रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिका में 75% कर्मचारियों ने कहा कि वे कम से कम 2027 तक मौजूदा नौकरी में बने रहना चाहते हैं। इनमें 48% ने माना कि रुकने की वजह जॉब संतुष्टि नहीं, आर्थिक अनिश्चितता और बदलाव का डर है। उम्रदराज कर्मचारी नौकरी की सुरक्षा को देते हैं तरजीह सर्वे में 55% का माना कि उम्रदराज कर्मचारी नौकरी से ज्यादा मजबूती से जुड़े रहते हैं। सिर्फ 25% लोगों का मानना है कि युवा कर्मचारी भी इसी तरह व्यवहार कर रहे हैं। आर्थिक वजहों से 26% लोग नौकरी की गारंटी को सबसे ऊपर रखते हैं। 94% पेशेवर: एक ही रोल में टिके रहने से रुकेगी तरक्की एक ही रोल में लंबे समय तक रहने से प्रोफेशनल ग्रोथ रुक सकती है। सर्वे में 94% लोगों ने माना कि लंबे समय तक एक जगह टिके रहने से बेहतर वेतन, और नए अनुभव छूट सकते हैं, जो आगे चलकर बर्नआउट की वजह बनता है। एक ही कंपनी में रहकर ग्रोथ कैसे करें विशेषज्ञों के मुताबिक एक जगह टिकने का मतलब ग्रोथ रोकना नहीं है। कर्मचारी नई जिम्मेदारियां लें, नए स्किल्स सीखें, दूसरे डिपार्टमेंट के साथ प्रोजेक्ट करें। इंडस्ट्री नेटवर्क मजबूत रखें, ताकि हालात बदलने पर मौके कम न पड़ें।

भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा

भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा

अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत अपने 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू कर दी है। ‘सेक्शन 301’ अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैक्स बढ़ाने की शक्ति देता है, जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहे हो। पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध बताने के बाद, प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों से टैरिफ का दबाव वापस बनाने की तैयारी में है। यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के कारण इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं। सवाल जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: अमेरिका ने किन देशों के खिलाफ जांच शुरू की है? जवाब: ट्रम्प प्रशासन ने कुल 16 ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू की है। इनमें भारत, चीन, यूरोपीय संघ (EU), जापान, दक्षिण कोरिया, मैक्सिको, वियतनाम, ताइवान, थाईलैंड, मलेशिया, कंबोडिया, सिंगापुर, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, स्विट्जरलैंड और नॉर्वे शामिल हैं। सवाल 2: यह जांच अचानक क्यों शुरू की गई है? जवाब: 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प द्वारा लगाए गए ग्लोबल टैरिफ को अवैध करार दिया था। इसके बाद ट्रम्प ने 150 दिनों के लिए 10% का अस्थाई टैरिफ लगाया था। अब प्रशासन ‘सेक्शन 301’ का इस्तेमाल कर रहा है ताकि ट्रेडिंग पार्टनर्स पर टैरिफ का खतरा बरकरार रहे और उन्हें बातचीत की मेज पर लाया जा सके। सवाल 3: ‘सेक्शन 301’ क्या है और यह कितना पावरफुल है? जवाब: यह ‘ट्रेड एक्ट ऑफ 1974’ का एक हिस्सा है। यह अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव को यह ताकत देता है कि अगर कोई देश ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practices) करता है, तो अमेरिका उस पर जवाबी टैरिफ या अन्य प्रतिबंध लगा सकता है। सवाल 4: जांच का मुख्य फोकस किन बातों पर है? जवाब: अमेरिका उन देशों की जांच कर रहा है जो अपनी जरूरत से कहीं ज्यादा सामान बना रहे हैं और खपत न होने पर उस माल को सस्ते दामों पर अमेरिकी बाजारों में डंप कर रहे हैं। अमेरिका यह देखना चाहता है कि क्या ये देश जानबूझकर अपनी एक्सेस कैपेसिटी का इस्तेमाल करके अमेरिकी कंपनियों और वहां के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को चोट तो नहीं पहुंचा रहे। इसे एक फैक्ट्री के उदाहरण से समझें… मान लीजिए किसी देश में जूतों की एक ऐसी फैक्ट्री है जो साल में 100 जूते बना सकती है, लेकिन उस देश के लोगों को सिर्फ 20 जूतों की जरूरत है। अब वह फैक्ट्री बंद न हो, इसलिए वहां की सरकार उसे सब्सिडी या मदद देकर पूरे 100 जूते बनवाती है। अब जो 80 जूते बचे हैं, उन्हें वह देश बहुत कम कीमत पर दूसरे देशों के बाजारों में उतार देता है। इससे वहां की अपनी कंपनियों को नुकसान होता है, क्योंकि वे इतनी सस्ती कीमत का मुकाबला नहीं कर पातीं। अमेरिका इसी ‘जरूरत से ज्यादा उत्पादन’ की जांच कर रहा है। सवाल 5: क्या भारत के लिए ये चिंता की बात है? जवाब: 2024 में अमेरिका के साथ भारत का गुड्स ट्रेड सरप्लस 58,216 मिलियन डॉलर (₹5.37 लाख करोड़) था। ये 2025 में 45,801 मिलियन डॉलर (₹4.23 लाख करोड़) रह गया। इसमें कमी आई है। फिर भी भारत उन 16 देशों की सूची में है, जिनकी जांच होगी। अगर जांच में भारत की नीतियां ‘अनुचित’ पाई गईं तो भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लग सकता है। सवाल 6: चीन के साथ अमेरिका का व्यापार घाटा कितना बड़ा है? जवाब: चीन इस लिस्ट में सबसे ऊपर है। 2024 में चीन का ट्रेड सरप्लस 202,071 मिलियन डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 295,515 मिलियन डॉलर हो गया। यानी एक साल में ही करीब 93,444 मिलियन डॉलर का बड़ा उछाल आया है। सवाल 7: फोर्स्ड लेबर को लेकर कौन सी अलग जांच हो रही है? जवाब: ग्रीर ने बताया कि वे ‘सेक्शन 301’ के तहत एक और जांच शुरू कर रहे हैं, जिसका मकसद फोर्स्ड लेबर से बने सामानों के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाना है। अमेरिका पहले ही उइगर फोर्स्ड लेबर प्रोटेक्शन एक्ट के तहत चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले सोलर पैनल और दूसरे सामानों पर एक्शन ले चुका है। अब इस तरह की कार्रवाई दूसरे देशों पर भी की जा सकती है। अमेरिका चाहता है कि दूसरे देश भी बंधुआ मजदूरी या जबरन श्रम से बने सामानों पर बैन लगाएं। सवाल 8: इस पूरी प्रक्रिया की टाइमलाइन क्या है? जवाब: 15 अप्रैल तक आम लोगों और कंपनियों से सुझाव मांगे गए हैं। इसके बाद 5 मई के आसपास सार्वजनिक सुनवाई होगी। लक्ष्य यह है कि जुलाई में अस्थाई टैरिफ खत्म होने से पहले ही इस जांच के नतीजे और नए टैरिफ के प्रस्ताव तैयार कर लिए जाएं। सवाल 9: क्या ट्रम्प प्रशासन टैरिफ लगाने पर अड़ा हुआ है? जवाब: हां, जेमिसन ग्रीर ने साफ कहा कि राष्ट्रपति ट्रम्प टैरिफ लगाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। वे व्यापार घाटे को कम करने और अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग को बचाने के लिए हर संभव रास्ता और टूल अपनाएंगे। उन्होंने ट्रेडिंग पार्टनर्स को मौजूदा समझौतों का पालन करने की चेतावनी दी। सवाल 10: व्यापार घाटे के मामले में अन्य देशों की क्या स्थिति है? जवाब: यूरोपीय संघ के साथ अमेरिका का घाटा 2025 में बढ़कर 235,874 मिलियन डॉलर हो गया है। मैक्सिको के साथ भी घाटा 171,491 मिलियन डॉलर के स्तर पर है। ताइवान और वियतनाम जैसे देशों के घाटे में हालांकि कमी आई है, फिर भी वे जांच के घेरे में हैं। रीडर के लिए टिप्स अगर आप एक्सपोर्ट-इंपोर्ट बिजनेस में हैं, तो अमेरिकी पॉलिसी पर नजर रखें। जुलाई के बाद टेक्सटाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग गुड्स की कीमतों में बड़े बदलाव आ सकते हैं। ————————— ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प के टैरिफ पर इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट का फैसला: कंपनियों को टैरिफ के 14.5 लाख करोड़ रुपए लौटाने होंगे, सुप्रीम कोर्ट भी लगा चुका फटकार अमेरिका की इंटरनेशनल ट्रेड कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन को आदेश दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा लगाए गए टैरिफ का पैसा कंपनियों को लौटाया जाए। टैरिफ से दिसंबर तक 10.79 लाख करोड़ रुपए वसूले गए थे और कुल रिफंड 14.5 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच सकता है। जज रिचर्ड ईटन ने लंबित मामलों में टैरिफ