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पीएम मोदी ने कहा कि डीएमके ‘वैज्ञानिक भ्रष्टाचार मॉडल’ चला रही है, तमिलनाडु को ‘एक परिवार के लिए एटीएम’ में बदल रही है | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 11, 2026, 18:59 IST पीएम मोदी ने डीएमके सरकार पर लोगों के जनादेश के साथ विश्वासघात करने का आरोप लगाया और तमिलनाडु को एक परिवार के लिए एटीएम बनाने का आरोप लगाया। पीएम मोदी तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को कहा कि तमिलनाडु ने सत्तारूढ़ द्रमुक सरकार को “उखाड़ फेंकने” का फैसला किया है, और कहा कि लोग एक ऐसी सरकार चाहते हैं जो हर परिवार के लिए काम करे, न कि केवल एक परिवार के लिए। तिरुचिरापल्ली में एक सार्वजनिक कार्यक्रम को अंग्रेजी में संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “पूरे राज्य ने डीएमके को सरकार से बाहर करने का मन बना लिया है. लोग ऐसी सरकार चाहते हैं जो सिर्फ एक परिवार के लिए नहीं बल्कि हर परिवार के लिए काम करे.” उन्होंने तिरुचिरापल्ली को साहस और विश्वास की भूमि बताया और कहा कि जब तमिलनाडु और इसकी संस्कृति का सम्मान करने की बात आती है तो भाजपा सरकार हमेशा सबसे आगे रही है। उन्होंने कहा, “यह गर्व की बात है कि तमिलनाडु के बेटे सीपी राधाकृष्णन हमारे उपराष्ट्रपति हैं।” उन्होंने कहा, “एनडीए सरकार के लिए, तमिलनाडु की प्रगति बेहद महत्वपूर्ण है। 2014 के बाद से, केंद्र सरकार ने अकेले हस्तांतरण के लिए 3 लाख करोड़ रुपये दिए हैं। यह पिछली कांग्रेस-डीएमके सरकार के दौरान की राशि से कई गुना अधिक है।” “एनडीए सरकार ने राज्य में राष्ट्रीय राजमार्गों पर लगभग 57,000 करोड़ रुपये खर्च किए हैं, जो 2004-14 तक कांग्रेस-डीएमके सरकार द्वारा खर्च की गई राशि का चार गुना है।” ‘डीएमके ने जनादेश के साथ विश्वासघात किया’ उन्होंने द्रमुक सरकार पर लोगों के जनादेश के साथ विश्वासघात करने का भी आरोप लगाया। उन्होंने टिप्पणी की, “डीएमके शासन में, सब कुछ एक परिवार के साथ शुरू और समाप्त होता है। मंत्री बदल सकते हैं, विधायक बदल सकते हैं, लेकिन सत्ता केवल एक राजवंश के पास रहती है। डीएमके उनके वैज्ञानिक भ्रष्टाचार मॉडल के पक्ष में है। आज, उसी मॉडल का उपयोग तमिलनाडु को उस परिवार के लिए एटीएम बनाने के लिए किया जा रहा है।” उन्होंने कहा कि किसान तमिलनाडु की खाद्य सुरक्षा की रीढ़ हैं और अच्छी सुविधाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे के हकदार हैं। पीएम ने इस बात पर प्रकाश डाला कि डीएमके ने अनाज गोदाम बनाने का वादा किया था, लेकिन किसान अभी भी इन गोदामों की तलाश कर रहे हैं जो कहीं नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने कहा, “डीएमके ने धान के लिए एमएसपी में बड़ी वृद्धि का वादा किया था। किसान पूछ रहे हैं – इन वादों का क्या हुआ? अवैध रेत खनन नदियों को नष्ट कर रहा है और पर्यावरण को खतरे में डाल रहा है, फिर भी जिम्मेदार लोग डीएमके के संरक्षण का आनंद ले रहे हैं।” प्रधानमंत्री चुनावी राज्य केरल में लगभग 11,000 करोड़ रुपये की कई विकास पहलों का उद्घाटन करने के बाद आधिकारिक यात्रा के लिए तमिलनाडु पहुंचे। इससे पहले सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने त्रिची में डीएमके सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “राज्य हमेशा बीजेपी और एनडीए के लिए नो-एंट्री जोन रहेगा। लड़ाई तमिलनाडु के लोगों और एनडीए के बीच है।” यह भी पढ़ें: ‘एनडीए बनाम तमिलनाडु’: पीएम मोदी के दौरे से पहले तमिलनाडु में छिड़ा पोस्टर युद्ध पीएम मोदी की टिप्पणी तब आई जब राज्य विधानसभा चुनाव के करीब पहुंच रहा है। इस बार एनडीए को राज्य में बढ़त बनाने की उम्मीद है. जगह : तिरुचिरापल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 11, 2026, 18:59 IST समाचार राजनीति पीएम मोदी ने कहा, DMK ‘वैज्ञानिक भ्रष्टाचार मॉडल’ चला रही है, तमिलनाडु को ‘एक परिवार के लिए एटीएम’ में बदल रही है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पीएम मोदी तमिलनाडु(टी)डीएमके सरकार(टी)बीजेपी सरकार(टी)तमिलनाडु की राजनीति(टी)एनडीए सरकार(टी)तमिलनाडु विधानसभा चुनाव(टी)डीएमके भ्रष्टाचार(टी)तमिलनाडु विकास

भोपाल के रचना टॉवर पहुंचे मंत्री विश्वास सारंग:निरीक्षण किया, कैम्पस में होगा सौंदर्यीकरण; पार्क, ओपन जिम-पोल लाइट भी लगेगी

भोपाल के रचना टॉवर पहुंचे मंत्री विश्वास सारंग:निरीक्षण किया, कैम्पस में होगा सौंदर्यीकरण; पार्क, ओपन जिम-पोल लाइट भी लगेगी

भोपाल के रचना नगर स्थित रचना टॉवर पर बुधवार को मंत्री विश्वास कैलाश सारंग पहुंचे। उन्होंने रचना टॉवर परिसर का दौरा कर क्षेत्र की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों से चर्चा कर क्षेत्र की समस्याओं और आवश्यकताओं की जानकारी ली। रहवासियों ने बेहतर सार्वजनिक सुविधाओं और सौंदर्यीकरण की मांग की। इस पर मंत्री सारंग ने अधिकारियों को रचना टॉवर के समक्ष स्थित पेविंग के समीप सौंदर्यीकरण कार्य कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इस स्थान को व्यवस्थित और आकर्षक रूप देने के लिए यहां पार्क का विकास किया जाएगा। जिससे क्षेत्र के नागरिकों को स्वच्छ और हरित वातावरण मिल सके। यह भी निर्देश दिए मंत्री सारंग ने निर्देश दिए कि पार्क के साथ ही यहां ओपन जिम की भी व्यवस्था की जाए। ताकि क्षेत्र के नागरिक नियमित रूप से व्यायाम कर सकें और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिल सके। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बढ़ती आबादी को देखते हुए इस प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि पार्क और ओपन जिम क्षेत्र की फेंसिंग कर उसे सुरक्षित और व्यवस्थित बनाया जाए। पोल भी लगेंगे मंत्री सारंग ने क्षेत्र में बेहतर प्रकाश व्यवस्था तय करने के लिए रचना टॉवर के समक्ष पोल लाइट लगाने के भी निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रचना टॉवर परिसर के सौंदर्यीकरण से संबंधित सभी कार्यों की कार्ययोजना तैयार कर शीघ्रता से कार्य प्रारंभ किया जाए। ताकि क्षेत्र के नागरिकों को जल्द से जल्द इन सुविधाओं का लाभ मिल सके।

hair transplant News| cosmetic treatment Risk| skin treatment news| सोशल मीडिया के झांसे से बचें, सुंदर दिखने की चाहत में डॉक्टरों की चेतावनी.

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Hair transplant-Cosmetic surgery Risk: सुंदर और स्मार्ट दिखना कौन नहीं चाहता. खूबसूरत बनने के लिए लोग धुआंधार पैसा उड़ाने से भी गुरेज नहीं करते. लोगों की इसी कमजोरी को भुनाने का धंधा आज खूब फल-फूल रहा है, लेकिन इस धंधे से अलग कहीं ऐसा न हो कि आपकी सुंदर दिखने की चाहत आपको ले डूबे और आप अपने बालों और वास्तविक चेहरे से भी हाथ धो बैठें. सोशल मीडिया पर ऐसा ही शातिर खेल चल रहा है, जिसे लेकर डॉक्टरों की कई बड़ी संस्थाओं ने लोगों के लिए न केवल वॉर्निंग जारी की है, बल्कि इस पर लगाम लगाने की भी मांग की है. देश की बड़ी मेडिकल बॉडीज में शुमार इंडियन एसोसिएशन ऑफ डर्मेटोलॉजिस्ट, वेनेरोलॉजिस्ट एंड लेप्रोलॉजिस्ट (IADVL) और एसोसिएशन ऑफ प्लास्टिक सर्जन्स ऑफ इंडिया (APSI) ने सोशल मीडिया पर आ रही डॉक्टरों के सफल उपचार के दावों की बाढ़ और मरीजों को ग्राहक समझकर दिए जा रहे एस्थेटिक और हेयर रेस्टोरेशन प्रोसीजरों में मरीजों की सुरक्षा और ट्रेनिंग स्टैंडर्ड्स को लेकर गहरी चिंता जताई है. डॉक्टरों ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े युवा डेमोग्राफिक्स में से एक है और हाल के वर्षों में स्किन, बाल और अन्य एस्थेटिक प्रोसीजर जैसे बोटॉक्स, हेयर ट्रांसप्लांट और थ्रेड लिफ्ट की मांग तेजी से बढ़ी है. यही वजह है कि भारत के युवा एस्थेटिक और डर्मेटोलॉजिकल मार्केटिंग के टार्गेट कंज्यूमर बन गए हैं और शातिर लोग इसका फायदा उठाने के लिए तमाम हथकंडे अपना रहे हैं. सोशल मीडिया पर ऐसे बहुत सारे विज्ञापन दावों के साथ चल रहे हैं और मरीज उनके शिकार भी बन रहे हैं, जो कि बड़ी चिंता की बात है. कहां से शुरू हुआ झोल? दोनों संस्थाओं से जुड़े डॉक्टरों ने कहा कि डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) द्वारा डेंटिस्ट्स एक्ट, 1948 के प्रावधानों के तहत MDS डेंटल सर्जनों को कुछ एस्थेटिक प्रोसीजर और हेयर ट्रांसप्लांटेशन करने की अनुमति दे दी थी. जिसके बाद से यह मामला और भी महत्वपूर्ण हो गया है. मेडिकल बॉडीज के मुताबिक, लोगों के चेहरे, स्किन और बाल आदि से संबंधित ये सर्जिकल प्रोसीजर पारंपरिक रूप से नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के रेगुलेटरी फ्रेमवर्क के तहत ट्रेंड डर्मेटोलॉजिस्ट और प्लास्टिक सर्जन जैसे स्पेशलिस्ट द्वारा किए जाते रहे हैं. हेयर ट्रांसप्लांट, स्किन ग्राफ्टिंग, बोटोक्स हैं टिपिकल सजर्री एपीएसआई से जुड़े डॉक्टरों ने कहा कि ऐसे सर्जिकल प्रोसीजर के लिए स्किन की बायोलॉजी, बालों के डिसऑर्डर, इन्फेक्शन मैनेजमेंट और संभावित कॉम्प्लीकेशंस को संभालने की गहरी समझ होना बेहद जरूरी है. चूंकि हेयर ट्रांसप्लांट एक मॉडर्न मेडिकल प्रोसीजर है और इसे केवल रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर्स (RMPs) द्वारा ही किया जाना चाहिए जो इस क्षेत्र में विशेषज्ञता रखते हों. जान जाने से लेकर आंखों की रोशनी तक गई डॉक्टरों ने कहा कि देखा जा रहा है कि पिछले कुछ साल से ऐसे मामलों की संख्या बढ़ी है, जिनमें बिना पर्याप्त योग्यता वाले लोगों पर एस्थेटिक मेडिकल प्रोसीजर करने के आरोप लगे हैं. कानपुर हेयर ट्रांसप्लांट केस इसका एक बड़ा उदाहरण है, जिसमें हेयर ट्रांसप्लांट के बाद दो इंजीनियरों की मौत हो गई थी.आरोप है कि यह प्रोसीजर एक डेंटल सर्जन द्वारा किया गया था. देश के कई हिस्सों में बिना योग्य मेडिकल प्रैक्टिशनर्स द्वारा एस्थेटिक प्रोसीजर करने के अन्य मामले भी सामने आए हैं, जिनमें किसी को गंभीर संक्रमण हो गया तो किसी की आंखों की रोशनी चली गई. मेडिकल एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी कि स्किन की बीमारियों, बालों के डिसऑर्डर और सर्जिकल कॉम्प्लीकेशंस के मैनेजमेंट में पर्याप्त मेडिकल ट्रेनिंग के बिना प्रोफेशनल्स को ऐसे प्रोसीजर करने की अनुमति देने से ट्रेनिंग के स्टैंडर्ड कम हो सकते हैं और मरीजों के लिए रिस्क बढ़ सकता है. एमबीबीएस की डिग्री नहीं काफी आईएडीवीएल के अध्यक्ष डॉ. विनय सिंह का कहना है कि हेयर ट्रांसप्लांट जैसे प्रोसीजर करने के लिए एस्थेटिक प्रोसीजर और डर्मेटोलॉजी में एक्स्ट्रा ट्रेनिंग की जरूरत होती है. एमबीबीएस डिग्री के अलावा, डर्मेटोलॉजिस्ट ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत मान्यता प्राप्त मेडिकल स्कूलों में डर्मेटोलॉजी में पोस्टग्रेजुएट स्तर पर तीन साल की रेजिडेंसी करनी होती है. इस ट्रेनिंग में त्वचा की विभिन्न बीमारियों, बालों की समस्याओं और डर्मेटोलॉजी से जुड़े एडवांस्ड प्रोसीजर का अध्ययन शामिल होता है. सोशल मीडिया के डॉक्टर खतरनाक डॉ. सिंह ने कहा कि आजकल स्किन और बालों से जुड़ी समस्याओं को लेकर सोशल मीडिया का गलत इस्तेमाल हो रहा है और लोग केमिस्ट या अन्य गैर-चिकित्सकीय प्रशिक्षित व्यक्तियों की सलाह पर दवाओं का इस्तेमाल करने लगते हैं. सोशल मीडिया पर फ्रॉड मार्केटिंग लिस्टिंग भी चल रही है. कई वेबसाइटें पेड ऐड प्लेसमेंट के जरिए डर्मेटोलॉजिस्ट के रूप में ऐसे लोगों को प्रमोट करती हैं, जिनके पास प्रैक्टिस के लिए बहुत कम या कोई सत्यापित मेडिकल क्वालिफिकेशन नहीं होती. यह स्थिति लोगों की सेहत के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. एड और मार्केटिंग को रोकना जरूरी एसोसिएशनों ने कहा कि मेडिकल प्रैक्टिस के विज्ञापन और मार्केटिंग को नियंत्रित करने के लिए बेहतर औपचारिक और कानूनी नियंत्रण प्रणाली की जरूरत है. IADVL की तमिलनाडु ब्रांच (रिट पिटीशन नंबर 36164 और 12044 ऑफ 2024) ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया की 06 दिसंबर 2022 की गाइडलाइंस को चुनौती देते हुए मद्रास हाई कोर्ट में कानूनी कार्रवाई शुरू की है. इन गाइडलाइंस में ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जनों को कुछ एस्थेटिक और हेयर ट्रांसप्लांट प्रोसीजर करने की अनुमति दी गई थी. हाल ही में कोर्ट ने दिया आदेश 21 जनवरी 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया और नेशनल मेडिकल कमीशन के बीच रेगुलेटरी टकराव पर ध्यान दिया और केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय को मामले की जांच कर मरीजों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट रेगुलेटरी दिशा-निर्देश सुनिश्चित करने के लिए अपना जवाब देने का निर्देश दिया है. वहीं अब एसोसिएशन ने सरकार से मांग की है कि पूरी गाइडलाइंस जारी की जाएं और मौजूदा नियमों को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि झोलाछाप डॉक्टरों पर रोक लगाई जा सके और लोगों की सेहत की बचाई जा सके. आम लोगों को दी विशेष सलाह डॉक्टरों ने कहा कि कोर्ट और सरकारें अपना काम कर रही हैं लेकिन इसके लिए आम लोगों को जागरुक होने की बेहद जरूरत है, ताकि मरीज ऐसे जाल में न फंसें. अगर आप कोई भी स्किन, कॉस्मेटिक या हेयर ट्रीटमेंट लेने जा रहे हैं और आपने सोशल

गर्मी में भी नहीं सूखेगा गला! पेट के लिए ‘फ्रीज’ से कम नहीं यह देसी सब्जी, कई बीमारियों में फायदेमंद

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Last Updated:March 11, 2026, 18:11 IST Health Tips: भीषण गर्मी और तेज धूप के कारण लोगों के शरीर में पानी की कमी हो जाती है. इससे बचाव के लिए खीरा बेहद कारगर है, जो कई गुणों से भरपूर है. आइए एक्सपर्ट ने खीरे के फायदे के बारे में जानते हैं. अब तेज धूप होने लगा है और लोगों का बाहर निकलना मुश्किल हो रहा है. हालांकि, गर्मी में अक्सर शरीर में पानी की कमी हो जाती है, जिससे थकान और कमजोरी महसूस होती है. ऐसे में खीरा बेहद लाभकारी और गुणकारी साबित हो सकती हैं. इसको खाने से शरीर में पानी की पूर्ति होती है और डिहाइड्रेशन से बचाव होता है. इसलिए डॉक्टर भी गर्मियों में खीरा खाने की राय देते हैं. आज के दौर में अधिकतर लोगों को वजन की दिक्कत है. जो लोग वजन कम करना चाहते हैं, उनके लिए खीरा बेहतरीन फल है. इसमें कैलोरी बहुत कम और फाइबर ज्यादा होता है. इसको खाने से पेट लंबे समय तक भरा रहता है और बार-बार भूख नहीं लगती है. यह बहुत सेहतमंद माना गया है. खीरे में फाइबर पाया जाता है, जो पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में बहुत सहायता करता है. यह पेट को साफ रखने में मदद करता है और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. यह त्वचा के लिए भी बेहद उपयोगी साबित होता है. Add News18 as Preferred Source on Google राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी चिकित्साधिकारी डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, खीरे में पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी खनिज पाए जाते हैं. ये शरीर में ब्लड प्रेशर को संतुलित रखने में मदद करते हैं और दिल की सेहत के लिए भी फायदेमंद माने जाते हैं. आजकल शुगर की समस्या तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में खीरा कैलोरी और पोषक तत्वों से भरपूर होता है. इसलिए इसे डायबिटीज के मरीज भी अपनी डाइट में आसानी से शामिल कर सकते हैं. खीरा ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है. अगर आप आंख या त्वचा की समस्या से परेशान हैं, तो खीरे में एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन मौजूद होते हैं, जो त्वचा को हेल्दी और चमकदार बनाए रखने में मदद करते हैं. इसके अलावा, आंखों पर खीरे के टुकड़े रखने से थकान और डार्क सर्कल्स कम हो सकते हैं. कुल मिलाकर खीरा सेहत का खजाना है. खीरा शरीर से विषैले तत्वों को भी बाहर निकालने में मदद करता है. हालांकि, बेहतर पाचन के लिए इसे रात में खाने से बचना चाहिए. सही समय पर खाया गया खीरा सेहत के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित हो सकता है. अगर आप किसी गंभीर रोग से ग्रस्त हैं, तो किसी आयुर्वेदिक चिकित्सक से परामर्श जरूर लें. First Published : March 11, 2026, 18:11 IST

प्रियंका चोपड़ा ने बताई बॉलीवुड छोड़ने की वजह:कहा- खराब माहौल में रहना पसंद नहीं था, ऐश्वर्या राय बच्चन और मिंडी कलिंग से मिली प्रेरणा

प्रियंका चोपड़ा ने बताई बॉलीवुड छोड़ने की वजह:कहा- खराब माहौल में रहना पसंद नहीं था, ऐश्वर्या राय बच्चन और मिंडी कलिंग से मिली प्रेरणा

‘’खराब माहौल में रहना पसंद नहीं करती।” यह कहना है एक्ट्रेस प्रियंका चोपड़ाका, जिन्होंने हाल ही में बताया कि आखिर उन्होंने बॉलीवुड छोड़कर हॉलीवुड का रुख क्यों किया। प्रियंका ने कहा कि वह भी ऐश्वर्या राय बच्चन और अमेरिकी अभिनेत्री मिंडी कलिंग की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना चाहती थीं और इसी वजह से उन्होंने नए मौके तलाशने का फैसला लिया। ‘Not Skinny But Not Fat’ पॉडकास्ट में प्रियंका ने अपने करियर के शुरुआती दिनों को याद किया। उन्होंने बताया कि उन्होंने महज 18 साल की उम्र में फिल्मों में कदम रखा था। उनकी पहली फिल्म तमिल भाषा की Thamizhan थी, जिसमें उनके साथ साउथ सुपरस्टार विजय नजर आए थे। प्रियंका ने बताया कि उस समय उन्हें पहली बार स्टारडम की असली ताकत देखने को मिली थी, जब विजय को देखने के लिए सेट पर भारी भीड़ जुट जाती थी। प्रियंका के मुताबिक, करियर की शुरुआत में उन्हें लगता था कि फिल्म इंडस्ट्री का मतलब सिर्फ फेम और लोकप्रियता हासिल करना है। लेकिन समय के साथ उनका नजरिया बदला और उन्होंने समझा कि एक्टिंग सिर्फ शोहरत नहीं, बल्कि एक गंभीर कला भी है। उन्होंने कहा कि अब तक वह करीब 70 फिल्मों में काम कर चुकी हैं और हर प्रोजेक्ट से उन्हें नया अनुभव मिला है। एक्ट्रेस ने यह भी स्वीकार किया कि एक समय ऐसा आया जब उन्हें बॉलीवुड में खुद को सीमित महसूस होने लगा था। उन्हें लगा कि अगर वह एक ही जगह पर रुक गईं तो नए अवसर नहीं मिल पाएंगे। इसी सोच ने उन्हें हॉलीवुड में किस्मत आजमाने के लिए प्रेरित किया। प्रियंका ने कहा कि उस दौर में अंतरराष्ट्रीय फिल्म और टीवी इंडस्ट्री में भारतीय कलाकारों की मौजूदगी बहुत कम थी। हालांकि ऐश्वर्या राय बच्चन और मिंडी कलिंग जैसी हस्तियां ऐसी थीं जिन्होंने ग्लोबल लेवल पर अपनी पहचान बनाई। प्रियंका के लिए यह उदाहरण प्रेरणा की तरह था कि भारतीय कलाकार भी दुनिया के मंच पर अपनी जगह बना सकते हैं। प्रियंका का मानना है कि जीवन में कई बार कठिन हालात आते हैं, लेकिन उन परिस्थितियों में फंसे रहना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि अगर इंसान लंबे समय तक खराब माहौल में रहता है तो वह उसे सामान्य मानने लगता है, इसलिए समय रहते बदलाव करना जरूरी होता है। आज प्रियंका हॉलीवुड और बॉलीवुड दोनों में सक्रिय हैं और एक ग्लोबल स्टार के तौर पर अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं।

परीक्षा देने जा रहे छात्र की रास्ते में मौत:कटनी में फिट आने से बिगड़ी तबीयत; अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

परीक्षा देने जा रहे छात्र की रास्ते में मौत:कटनी में फिट आने से बिगड़ी तबीयत; अस्पताल पहुंचने से पहले ही तोड़ा दम

कटनी जिले के बड़वारा थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह कक्षा छठवीं की वार्षिक परीक्षा देने स्कूल जा रहा छात्र रास्ते में अचानक दौरे पड़ने से सड़क पर गिर पड़ा। इसके बाद अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसकी मौत हो गई। रास्ते में अचानक आए मिर्गी के दौरे छात्र की पहचान अटारिया गांव निवासी कमलेश कोल के पुत्र लवकुश कोल (13) के रूप में हुई है। बुधवार सुबह लवकुश अपनी वार्षिक परीक्षा में शामिल होने के लिए घर से निकला था। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि अटारिया और बिजौरी गांवों के बीच उसे अचानक तेज दौरे पड़े और वह अचेत होकर जमीन पर गिर गया। मुंह से झाग निकलता देख परिजनों को दी सूचना राहगीरों ने बालक को तड़पते देख तुरंत उसके पिता को सूचित किया। पिता कमलेश कोल ने बताया कि जब वे मौके पर पहुंचे, तो लवकुश के मुंह से झाग निकल रहा था। परिजन उसे आनन-फानन में बड़वारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे, लेकिन वहां डॉक्टरों ने परीक्षण के उपरांत उसे मृत घोषित कर दिया। बचपन से चल रहा था इलाज परिजनों ने बताया कि लवकुश को बचपन से ही मिर्गी के दौरे (फिट) आने की समस्या थी, जिसके लिए उसका नियमित उपचार भी चल रहा था। बुधवार को नियति ने उसे परीक्षा केंद्र तक पहुंचने का समय भी नहीं दिया और रास्ते में ही उसकी सांसें थम गईं। डॉक्टर नीरज विश्वकर्मा ने बताया- बालक को मृत अवस्था में अस्पताल लाया गया था। परिजनों द्वारा दी गई जानकारी और प्रथम दृष्टया साक्ष्यों के आधार पर मौत का मुख्य कारण मिर्गी के गंभीर दौरे पड़ना ही प्रतीत हो रहा है।

बांग्लादेश ने पाकिस्तान को सिर्फ 15.1 ओवर में हराया:पहले वनडे में 8 विकेट से जीत हासिल की; नाहिद राणा ने 5 विकेट लिए

बांग्लादेश ने पाकिस्तान को सिर्फ 15.1 ओवर में हराया:पहले वनडे में 8 विकेट से जीत हासिल की; नाहिद राणा ने 5 विकेट लिए

बांग्लादेश ने पाकिस्तान को पहले वनडे में 8 विकेट से हराकर तीन मैचों की सीरीज में 1-0 की बढ़त ले ली। ढाका के शेर-ए-बांग्ला नेशनल स्टेडियम में खेले गए मुकाबले में पाकिस्तान की टीम 114 रन पर ऑलआउट हो गई थी। बांग्लादेशी पेसर नाहिद राणा ने 5 विकेट लिए थे। जवाब में बांग्लादेश ने 115 रन का लक्ष्य सिर्फ 15.1 ओवर में 2 विकेट खोकर हासिल कर लिया। तंजिद हसन तमीम ने नाबाद 67 रन की तेज पारी खेली। तंजिद हसन की फिफ्टी 115 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए बांग्लादेश की शुरुआत ज्यादा अच्छी नहीं रही और सैफ हसन 4 रन बनाकर शाहीन अफरीदी का शिकार बने। इसके बाद तंजिद हसन तमीम और नजमुल हुसैन शांतो ने दूसरे विकेट के लिए 82 रन की साझेदारी कर मैच लगभग एकतरफा कर दिया। तंजिद हसन ने 42 गेंद में 7 चौके और 5 छक्के की मदद से नाबाद 67 रन बनाए। वहीं नजमुल हुसैन शांतो ने 33 गेंद में 27 रन बनाए। अंत में लिटन दास 3 रन बनाकर नाबाद लौटे और टीम ने 15.1 ओवर में लक्ष्य हासिल कर लिया। नाहिद राणा के 5 विकेट इससे पहले टॉस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी पाकिस्तान की टीम 30.4 ओवर में 114 रन पर सिमट गई। बांग्लादेश के तेज गेंदबाज नाहिद राणा ने शानदार गेंदबाजी करते हुए 7 ओवर में 24 रन देकर 5 विकेट झटके। कप्तान मेहदी हसन मिराज ने भी 10 ओवर में 29 रन देकर 3 विकेट लिए। इसके अलावा तस्कीन अहमद और मुस्तफिजुर रहमान को एक-एक विकेट मिला। अच्छी शुरुआत के बाद बिखरी पाकिस्तान की पारी पाकिस्तान की शुरुआत ठीक रही और पहले विकेट के लिए साहिबजादा फरहान और माज सादाकत ने 41 रन जोड़े। फरहान ने 27 और सादाकत ने 18 रन बनाए, लेकिन इसके बाद टीम लगातार विकेट गंवाती रही। नाहिद राणा ने फरहान को आउट कर पाकिस्तान को पहला झटका दिया। इसके बाद उन्होंने शामिल हुसैन, मोहम्मद रिजवान और सलमान आगा को भी पवेलियन भेज दिया। उनकी गेंदबाजी के सामने पाकिस्तान का टॉप और मिडिल ऑर्डर पूरी तरह बिखर गया। फहीम अशरफ के 37 रन पाकिस्तान के मध्यक्रम के बल्लेबाज बड़ी पारी नहीं खेल सके। हुसैन तलत 4, अब्दुल समद 0 और कप्तान शाहीन अफरीदी 4 रन बनाकर आउट हो गए। आखिर में ऑलराउंडर फहीम अशरफ ने 47 गेंद में 6 चौके और एक छक्के की मदद से 37 रन बनाए, जो टीम की ओर से सबसे बड़ी पारी रही। आखिरी विकेट के लिए 32 रन की साझेदारी पाकिस्तान की टीम एक समय 82 रन पर 9 विकेट गंवा चुकी थी। इसके बाद फहीम अशरफ और अबरार अहमद ने आखिरी विकेट के लिए 32 रन की साझेदारी कर टीम का स्कोर 114 तक पहुंचाया। अबरार अहमद 10 गेंद में खाता खोले बिना नाबाद रहे। पाकिस्तान के चार खिलाड़ियों का वनडे डेब्यू इस मैच में पाकिस्तान की ओर से चार खिलाड़ियों ने वनडे डेब्यू किया। टीम के लिए अब्दुल समद, माज सादाकत, साहिबजादा फरहान और शामिल हुसैन ने पहली बार वनडे मैच खेला। हालांकि डेब्यू मैच में ये खिलाड़ी बड़ी पारी नहीं खेल सके। फरहान ने 27 रन बनाकर टीम की ओर से सबसे ज्यादा रन बनाए, जबकि माज सादाकत ने 18 रन बनाए। वहीं शामिल हुसैन 4 रन और अब्दुल समद बिना खाता खोले आउट हो गए। बॉयकॉट के बाद पहला मैच खेल रही बांग्लादेश टीम बांग्लादेश की टीम टी-20 वर्ल्ड कप के बॉयकॉट के बाद पहली बार किसी इंटरनेशनल मैच में उतरी है। टूर्नामेंट से पहले बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड और खिलाड़ियों ने सुरक्षा चिंताओं के कारण भारत यात्रा से इनकार कर दिया था। टीम का कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों में खिलाड़ियों की सुरक्षा और यात्रा को लेकर चिंताएं हैं, इसलिए टूर्नामेंट में हिस्सा लेना संभव नहीं है। इसके बाद बांग्लादेश को वर्ल्ड कप से हटा दिया गया और उसकी जगह स्कॉटलैंड को शामिल किया गया। पाकिस्तान के खिलाफ ढाका में खेला गया यह वनडे उसी फैसले के बाद बांग्लादेश का पहला इंटरनेशनल मुकाबला रहा। ———————– स्पोर्ट्स से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ईरानी टीम फुटबॉल वर्ल्डकप खेलने अमेरिका जा सकेगी ईरान फुटबॉल टीम ने फरवरी में अमेरिका के एरिजोना में वर्ल्ड कप की तैयारियां करनी शुरू कर दी थी। टीम ने 7वीं बार फीफा वर्ल्ड कप के लिए क्वालिफाई किया है। टीम अब तक 3 मैच ही जीत सकी है। पढ़ें पूरी खबर…

शतरंज का नन्हा जादूगर; दुनिया का नंबर-1 खिलाड़ी:तमिज अमुधन 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी, आठ साल की उम्र में जीती कार

शतरंज का नन्हा जादूगर; दुनिया का नंबर-1 खिलाड़ी:तमिज अमुधन 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी, आठ साल की उम्र में जीती कार

तमिलनाडु के तमिज अमुधन इस समय विश्व शतरंज जगत में चर्चा का केंद्र है। मात्र 9 साल की उम्र में तमिज न केवल अंडर-9 कैटेगरी में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बन गए हैं, बल्कि वे इस उम्र में 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी हैं। तमिज ने महज चार साल की उम्र में चचेरे भाइयों को देखकर शतरंज सीखना शुरू किया था। उनके भीतर खेल की सहज समझ इतनी गहरी थी कि एक जिला स्तरीय टूर्नामेंट के दौरान कल्लाकुरिची के एक बस ड्राइवर रविचंद्रन की नजर उन पर पड़ी। रविचंद्रन पार्ट-टाइम शतरंज कोचिंग भी देते थे। उन्होंने देखा कि बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के भी इस छोटे से बच्चे ने अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। एथेंस ऑफ द ईस्ट शतरंज टूर्नामेंट में रविचंद्रन ने ​सिल्वर मेडल जीता रविचंद्रन ने तमिज की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें मुफ्त में कोचिंग देने का फैसला किया। इसके बाद तमिज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 6 साल की उम्र में उन्होंने स्टेट अंडर-9 टूर्नामेंट में 9 में से 9 अंक हासिल कर सबको हैरान कर दिया। यह उनके करियर का पहला बड़ा ‘ब्रेक’ था। तमिज के करियर का सबसे यादगार पल पिछले साल आया। ‘एथेंस ऑफ द ईस्ट’ शतरंज टूर्नामेंट में उन्होंने ​सिल्वर मेडल जीता। पुरस्कार के रूप में इस 8 साल के बच्चे को कार दी गई। किसी भी एथलीट के लिए इतनी कम उम्र में ऐसा पुरस्कार जीतना एक दुर्लभ उपलब्धि है। तमिज की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का असाधारण बलिदान है। पिता सरकारी नौकरी में हैं और साधारण कृषि पृष्ठभूमि से आते हैं। तमिज की बेहतर ट्रेनिंग के लिए परिवार ने एक कठिन फैसला लिया। तमिज की मां उनके साथ 350 किलोमीटर दूर दूसरे शहर में रहती हैं ताकि ट्रेनिंग बाधित न हो। वहीं, पिता घर पर 10 साल की बेटी उथिशा के साथ रहते हैं। तमिज के पिता स्वीकार करते हैं कि शतरंज महंगा खेल है। यात्रा, रहने, एंट्री फीस और कोचिंग का खर्च उठाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। तमिज के पिता का कहना है कि अगर उन्हें पहले पता होता कि इस क्षेत्र में इतना खर्च आता है, तो शायद वे इस खेल को नहीं चुनते। लेकिन अब जब वह नंबर-1 खिलाड़ी है, तो हम उसे बीच रास्ते में नहीं छोड़ सकते। तमिज की इस यात्रा को जारी रखने के लिए अब उन्हें किसी बड़े प्रायोजक की जरूरत है। आर्थिक तंगी के कारण वे कई बार नेशनल और इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे।

शेयर बाजार में आ सकती है इतिहास की सबसे बड़ी:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

शेयर बाजार में आ सकती है इतिहास की सबसे बड़ी:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। कियोसाकी ने कहा है कि शेयर बाजार में इतिहास का सबसे बड़ी गिरावट अब आने ही वाली है। वैसे उन्होंने 2013 में आई अपनी किताब ‘रिच डैड्स प्रोफेसी’ में ही इस बड़े संकट का जिक्र कर दिया था। कियोसाकी का मानना है कि 2008 के वित्तीय संकट के मूल कारण आज भी जड़ें जमाए हुए हैं। दुनिया में बढ़ता कर्ज और फाइनेंशियल सिस्टम की कमजोरियां नए संकट की आशंका बढ़ा रही हैं। कियोसाकी के मुताबिक, ब्लैकरॉक का प्राइवेट क्रेडिट मॉडल संकट की वजह बन सकता है। यदि यह होता है, तो पूरी दुनिया में ‘बेबी बूमर्स’ (62-80 के बुजुर्ग) की रिटायरमेंट बचत पूरी तरह खत्म हो जाएगी, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब ऐसे कर्ज के बोझ तले दबी है, जिसे चुकाना नामुमकिन है। मौजूदा भू-राजनैतिक तनाव के बीच कियोसाकी ने आम निवेशकों को एक सख्त और व्यावहारिक सलाह दी है। उनका कहना है कि वित्तीय शिक्षा की शुरुआत हमेशा छोटे कदमों से होती है। यदि आपके पास निवेश के लिए 10 डॉलर (करीब 900 रुपए) की अतिरिक्त राशि भी नहीं है, तो एक दिन का खाना छोड़ दें, लेकिन निवेश करना न छोड़ें। यह छोटी राशि भी चांदी खरीदने में लगाएं। यह न केवल धन संचय का सुरक्षित माध्यम है, बल्कि डीलर से बाजार की व्यावहारिक समझ पाने का भी अच्छा जरिया है। कियोसाकी के अनुसार, डीलर के साथ लंबे समय तक जुड़ने से निवेशकों को भविष्य के वित्तीय जोखिम समझने में बहुत मदद मिलती है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच मंगलवार को घरेलू सराफा बाजार में चांदी में तेजी रही। आईबीजेए के मुताबिक, मंगलवार को चांदी 10,888 रुपए महंगी हुई और औसत कीमत 4.2% बढ़कर 2,70,944 रुपए किलो हो गई। 29 जनवरी को चांदी 3,79,988 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर थी। इस साल मंगलवार तक चांदी 40,524 रुपए (17.6%) चढ़ चुकी है। यानी निवेश बढ़ रहा है। बीते साल 31 दिसंबर को चांदी 2,30,420 रुपए प्रति किलो थी। रणनीति: जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा, सोने-चांदी के दाम बढ़ते जाएंगे रॉबर्ट कियोसाकी का मानना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में पारंपरिक वित्तीय साधनों के मुकाबले सोने-चांदी जैसे फिजिकल एसेट्स कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं। वे लगातार सोना, चांदी, बिटकॉइन, इथेरियम और कच्चे तेल के कुओं में हिस्सेदारी खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनके अनुसार, जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा और महंगाई बढ़ेगी, इन फिजिकल एसेट्स की कीमतें आसमान छुएंगी। वे चांदी को औद्योगिक इस्तेमाल और महंगाई के खिलाफ सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर शुरुआती विकल्प मानते हैं। कियोसाकी का मानना है कि आम आदमी को छोटी-छोटी बचत कर ऐसी संपत्तियां अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना शुरू करना चाहिए।

शेयर बाजार में आ सकती है सबसे बड़ी गिरावट:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

शेयर बाजार में आ सकती है सबसे बड़ी गिरावट:रिच डैड पुअर डैड के लेखक ने चेताया; चांदी जरूर खरीदें, भले एक वक्त का खाना न खाएं

मशहूर किताब ‘रिच डैड पुअर डैड’ के लेखक रॉबर्ट कियोसाकी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। कियोसाकी ने कहा है कि शेयर बाजार में इतिहास का सबसे बड़ी गिरावट अब आने ही वाली है। वैसे उन्होंने 2013 में आई अपनी किताब ‘रिच डैड्स प्रोफेसी’ में ही इस बड़े संकट का जिक्र कर दिया था। कियोसाकी का मानना है कि 2008 के वित्तीय संकट के मूल कारण आज भी जड़ें जमाए हुए हैं। दुनिया में बढ़ता कर्ज और फाइनेंशियल सिस्टम की कमजोरियां नए संकट की आशंका बढ़ा रही हैं। कियोसाकी के मुताबिक, ब्लैकरॉक का प्राइवेट क्रेडिट मॉडल संकट की वजह बन सकता है। यदि यह होता है, तो पूरी दुनिया में ‘बेबी बूमर्स’ (62-80 के बुजुर्ग) की रिटायरमेंट बचत पूरी तरह खत्म हो जाएगी, क्योंकि वैश्विक अर्थव्यवस्था अब ऐसे कर्ज के बोझ तले दबी है, जिसे चुकाना नामुमकिन है। मौजूदा भू-राजनैतिक तनाव के बीच कियोसाकी ने आम निवेशकों को एक सख्त और व्यावहारिक सलाह दी है। उनका कहना है कि वित्तीय शिक्षा की शुरुआत हमेशा छोटे कदमों से होती है। यदि आपके पास निवेश के लिए 10 डॉलर (करीब 900 रुपए) की अतिरिक्त राशि भी नहीं है, तो एक दिन का खाना छोड़ दें, लेकिन निवेश करना न छोड़ें। यह छोटी राशि भी चांदी खरीदने में लगाएं। यह न केवल धन संचय का सुरक्षित माध्यम है, बल्कि डीलर से बाजार की व्यावहारिक समझ पाने का भी अच्छा जरिया है। कियोसाकी के अनुसार, डीलर के साथ लंबे समय तक जुड़ने से निवेशकों को भविष्य के वित्तीय जोखिम समझने में बहुत मदद मिलती है। वैश्विक उथल-पुथल के बीच मंगलवार को घरेलू सराफा बाजार में चांदी में तेजी रही। आईबीजेए के मुताबिक, मंगलवार को चांदी 10,888 रुपए महंगी हुई और औसत कीमत 4.2% बढ़कर 2,70,944 रुपए किलो हो गई। 29 जनवरी को चांदी 3,79,988 रुपए के रिकॉर्ड स्तर पर थी। इस साल मंगलवार तक चांदी 40,524 रुपए (17.6%) चढ़ चुकी है। यानी निवेश बढ़ रहा है। बीते साल 31 दिसंबर को चांदी 2,30,420 रुपए प्रति किलो थी। रणनीति: जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा, सोने-चांदी के दाम बढ़ते जाएंगे रॉबर्ट कियोसाकी का मानना है कि मौजूदा आर्थिक हालात में पारंपरिक वित्तीय साधनों के मुकाबले सोने-चांदी जैसे फिजिकल एसेट्स कहीं ज्यादा सुरक्षित हैं। वे लगातार सोना, चांदी, बिटकॉइन, इथेरियम और कच्चे तेल के कुओं में हिस्सेदारी खरीदने की सलाह दे रहे हैं। उनके अनुसार, जैसे-जैसे करेंसी का अवमूल्यन होगा और महंगाई बढ़ेगी, इन फिजिकल एसेट्स की कीमतें आसमान छुएंगी। वे चांदी को औद्योगिक इस्तेमाल और महंगाई के खिलाफ सुरक्षा के लिए सबसे बेहतर शुरुआती विकल्प मानते हैं। कियोसाकी का मानना है कि आम आदमी को छोटी-छोटी बचत कर ऐसी संपत्तियां अपने पोर्टफोलियो में जोड़ना शुरू करना चाहिए।