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शतरंज का नन्हा जादूगर; दुनिया का नंबर-1 खिलाड़ी:तमिज अमुधन 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी, आठ साल की उम्र में जीती कार

शतरंज का नन्हा जादूगर; दुनिया का नंबर-1 खिलाड़ी:तमिज अमुधन 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले दुनिया के सबसे युवा खिलाड़ी, आठ साल की उम्र में जीती कार

तमिलनाडु के तमिज अमुधन इस समय विश्व शतरंज जगत में चर्चा का केंद्र है। मात्र 9 साल की उम्र में तमिज न केवल अंडर-9 कैटेगरी में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी बन गए हैं, बल्कि वे इस उम्र में 2000 ईलो रेटिंग पार करने वाले सबसे युवा खिलाड़ी भी हैं। तमिज ने महज चार साल की उम्र में चचेरे भाइयों को देखकर शतरंज सीखना शुरू किया था। उनके भीतर खेल की सहज समझ इतनी गहरी थी कि एक जिला स्तरीय टूर्नामेंट के दौरान कल्लाकुरिची के एक बस ड्राइवर रविचंद्रन की नजर उन पर पड़ी। रविचंद्रन पार्ट-टाइम शतरंज कोचिंग भी देते थे। उन्होंने देखा कि बिना किसी औपचारिक ट्रेनिंग के भी इस छोटे से बच्चे ने अनुभवी खिलाड़ियों के खिलाफ शानदार प्रदर्शन किया। एथेंस ऑफ द ईस्ट शतरंज टूर्नामेंट में रविचंद्रन ने ​सिल्वर मेडल जीता रविचंद्रन ने तमिज की प्रतिभा को पहचान लिया और उन्हें मुफ्त में कोचिंग देने का फैसला किया। इसके बाद तमिज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। 6 साल की उम्र में उन्होंने स्टेट अंडर-9 टूर्नामेंट में 9 में से 9 अंक हासिल कर सबको हैरान कर दिया। यह उनके करियर का पहला बड़ा ‘ब्रेक’ था। तमिज के करियर का सबसे यादगार पल पिछले साल आया। ‘एथेंस ऑफ द ईस्ट’ शतरंज टूर्नामेंट में उन्होंने ​सिल्वर मेडल जीता। पुरस्कार के रूप में इस 8 साल के बच्चे को कार दी गई। किसी भी एथलीट के लिए इतनी कम उम्र में ऐसा पुरस्कार जीतना एक दुर्लभ उपलब्धि है। तमिज की इस सफलता के पीछे उनके माता-पिता का असाधारण बलिदान है। पिता सरकारी नौकरी में हैं और साधारण कृषि पृष्ठभूमि से आते हैं। तमिज की बेहतर ट्रेनिंग के लिए परिवार ने एक कठिन फैसला लिया। तमिज की मां उनके साथ 350 किलोमीटर दूर दूसरे शहर में रहती हैं ताकि ट्रेनिंग बाधित न हो। वहीं, पिता घर पर 10 साल की बेटी उथिशा के साथ रहते हैं। तमिज के पिता स्वीकार करते हैं कि शतरंज महंगा खेल है। यात्रा, रहने, एंट्री फीस और कोचिंग का खर्च उठाना उनके लिए चुनौतीपूर्ण है। तमिज के पिता का कहना है कि अगर उन्हें पहले पता होता कि इस क्षेत्र में इतना खर्च आता है, तो शायद वे इस खेल को नहीं चुनते। लेकिन अब जब वह नंबर-1 खिलाड़ी है, तो हम उसे बीच रास्ते में नहीं छोड़ सकते। तमिज की इस यात्रा को जारी रखने के लिए अब उन्हें किसी बड़े प्रायोजक की जरूरत है। आर्थिक तंगी के कारण वे कई बार नेशनल और इंटरनेशनल टूर्नामेंट्स में हिस्सा नहीं ले पाए थे।

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