बैतूल में नाबालिग का अपहरण और दुष्कर्म:10 दिन बाद आरोपी गिरफ्तार; पुलिस ने घटना वाले दिन ही कर लिया था पीड़िता का रेस्क्यू

बैतूल बाजार पुलिस ने एक नाबालिग लड़की का अपहरण कर उसके साथ दुष्कर्म करने के आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस ने घटना की सूचना मिलने वाले दिन ही पीड़िता को सुरक्षित बरामद कर लिया था, जबकि फरार आरोपी को 10 दिन बाद घेराबंदी कर पकड़ा गया। आरोपी को आज (बुधवार) न्यायालय में पेश किया जाएगा। बैतूल बाजार थाने में 1 मार्च को सूचना मिली थी कि एक नाबालिग बालिका को कोई अज्ञात व्यक्ति बहला-फुसलाकर ले गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत अपहरण की एफआईआर दर्ज की और संभावित स्थानों पर तलाश शुरू कर दी। ससुंद्रा जोड़ हाईवे पर मिली थी पीड़िता, बताई आपबीती थाना प्रभारी अंजना धुर्वे के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सक्रियता दिखाते हुए उसी दिन नाबालिग को ससुंद्रा जोड़ हाईवे के पास से सुरक्षित बरामद कर लिया था। पूछताछ के दौरान बालिका ने पुलिस को बताया कि उमनपेठ निवासी ओमप्रकाश धुर्वे उसे बहला-फुसलाकर ले गया था और उसके साथ दुष्कर्म किया। पीड़िता के बयानों के आधार पर पुलिस ने मामले में दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट की धाराएं बढ़ाईं। मुखबिर की सूचना पर गांव से पकड़ाया फरार आरोपी घटना के बाद से ही आरोपी ओमप्रकाश धुर्वे पुलिस से छिपकर फरार चल रहा था। 10 मार्च की सुबह पुलिस को मुखबिर से सटीक सूचना मिली कि आरोपी अपने घर (ग्राम उमनपेठ) आया हुआ है। सूचना की तस्दीक होते ही पुलिस टीम ने गांव पहुंचकर घेराबंदी की और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई में इन पुलिसकर्मियों की रही भूमिका इस पूरी कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक अंजना धुर्वे, उपनिरीक्षक रश्मि ठाकुर, महिला आरक्षक अंकिता शर्मा, आरक्षक नितिन चौहान, अनिरुद्ध यादव, माखनपाल (थाना बैतूल बाजार), प्रधान आरक्षक राजकुमार, आरक्षक विनोद साहू और सैनिक मुंशीलाल (थाना साईखेड़ा) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
राची शर्मा ने ऑनलाइन स्कैम से बचने की सलाह दी:कहा- डिजिटल दुनिया में इमोशनल कनेक्शन से पहले सतर्क रहें, भरोसा खतरनाक हो सकता है

डिजिटल दौर में रिश्तों का तरीका तेजी से बदल रहा है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के जरिए लोग एक-दूसरे से जुड़ते हैं, दोस्ती करते हैं और कई बार प्यार भी हो जाता है। लेकिन इसी डिजिटल दुनिया में फ्रॉड और स्कैम के खतरे भी उतनी ही तेजी से बढ़े हैं। इसी मुद्दे को केंद्र में रखकर कलर्स के शो ‘दो दुनिया एक दिल’ में एक ऐसी कहानी दिखाई जा रही है, जहां भावनाएं और डिजिटल सच आमने-सामने आते हैं। इस शो में अभिनेत्री राची शर्मा, आध्या का किरदार निभा रही हैं, जो दो अलग-अलग दुनियाओं के बीच उलझी हुई लड़की है। दैनिक भास्कर से खास बातचीत में राची ने डिजिटल रिलेशनशिप्स, ऑनलाइन फ्रॉड और आज के युवाओं के लिए जरूरी सावधानियों पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि कैसे लोग सोशल मीडिया के जरिए जल्दी इमोशनली कनेक्ट हो जाते हैं और क्यों ऐसे समय में जागरूक और सतर्क रहना बेहद जरूरी है। पेश है बातचीत के कुछ खास अंश: सवाल: ‘दो दुनिया एक दिल’ में आपका किरदार आध्या एक ऐसी लड़की का है जो दो दुनियाओं के बीच फंसी है। अगर रियल लाइफ में किसी को ऑनलाइन प्यार हो जाए और बाद में पता चले कि वो फ्रॉड है, तो आप क्या सलाह देंगी? जवाब: मेरे साथ तो ऐसा कभी नहीं हुआ, लेकिन मेरी कुछ फ्रेंड्स के साथ जरूर हुआ है। आजकल लोग ज्यादातर ऑनलाइन ही मिलते हैं और वहीं से बातचीत शुरू होती है। धीरे-धीरे लोग इमोशनली कनेक्ट भी हो जाते हैं। लेकिन ऐसे मामलों में बहुत जरूरी है कि आप सतर्क रहें। सोशल मीडिया पर हर चीज पर तुरंत भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी पर भरोसा करने से पहले उसे अच्छे से समझना और वेरिफाई करना बहुत जरूरी है। सवाल: क्या आपके साथ या आपके किसी जान-पहचान वाले के साथ कभी डिजिटल फ्रॉड या ऑनलाइन स्कैम हुआ है? अगर हां, तो उस सिचुएशन को कैसे हैंडल किया? जवाब: काफी समय पहले मेरी एक फ्रेंड के साथ ऐसा हुआ था। उस समय उसे स्कैम के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं थी, इसलिए वह इसका शिकार हो गई। मेरे साथ भी एक बार कोशिश की गई थी। किसी ने मुझे फोन करके कहा कि मेरे पापा ने उसे कॉल किया है और मुझे उसे पैसे दे देने चाहिए। लेकिन मैंने तुरंत अपने पापा को फोन करके कन्फर्म किया। तब पता चला कि ऐसा कोई कॉल उन्होंने नहीं किया था। इस तरह मैं बच गई। आजकल बैंक या दूसरी जगहों से भी ऐसे कॉल आते हैं, लेकिन अब हम एड्स और अवेयरनेस कैंपेन के जरिए काफी सतर्क हो गए हैं। सवाल: अगर आपको आज के युवाओं को डिजिटल रिलेशनशिप्स को लेकर एक चेतावनी देनी हो, तो आप क्या कहना चाहेंगी? जवाब: आज हमारी जिदगी का बड़ा हिस्सा डिजिटल हो गया है। सोशल मीडिया और ऑनलाइन दुनिया हमारे लिए बहुत अहम बन चुकी है। इसलिए सबसे जरूरी चीज है अवेयरनेस। जहां अच्छी चीजें हैं, वहीं खतरे भी हैं। ऐसे में बैलेंस बनाकर चलना और हर स्थिति को समझदारी से हैंडल करना बहुत जरूरी है। डिजिटल दुनिया में स्मार्ट रहना ही सबसे बड़ी सुरक्षा है।
‘एक दिन’ का ट्रेलर रिलीज:साई पल्लवी-जुनैद खान की सुकून भरी लव स्टोरी की झलक, 1 मई 2026 को सिनेमाघरों में आएगी फिल्म

हफ्तों के इंतजार के बाद आमिर खान प्रोडक्शंस ने फिल्म ‘एक दिन’ का ट्रेलर रिलीज कर दिया है। ट्रेलर में साई पल्लवी और जुनैद खान की फ्रेश जोड़ी एक सुकून भरी और इमोशनल लव स्टोरी लेकर आती नजर आ रही है। ट्रेलर की शुरुआत एक शांत और दिल को छू लेने वाले माहौल से होती है, जो धीरे-धीरे एक जादुई प्रेम कहानी की झलक देता है। ट्रेलर में जुनैद खान एक ‘फॉर्च्यून बेल’ यानी किस्मत की घंटी का जिक्र करते दिखाई देते हैं। उनका कहना है कि अगर इस घंटी को सच्चे दिल से बजाया जाए तो प्यार की मुराद पूरी हो सकती है। इसी दौरान वह साई पल्लवी के किरदार मीरा की तरफ देखते हैं और मन ही मन यह दुआ करते हैं कि काश वह उनकी हो जाएं,चाहे सिर्फ एक दिन के लिए ही क्यों न हो। यही भावना फिल्म की कहानी की बुनियाद बनती दिख रही है। ट्रेलर में दोनों कलाकारों की केमिस्ट्री बेहद नैचुरल और फ्रेश लग रही है। स्क्रीन पर उनकी मौजूदगी एक अलग ही जादू पैदा करती है। जुनैद खान एक मासूम, थोड़ा झिझकने वाले और सरल स्वभाव के लड़के के किरदार में दिखाई दे रहे हैं, जबकि साई पल्लवी का किरदार आत्मविश्वासी और शांत नजर आता है। दोनों के स्वभाव का यह अंतर उनकी ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री को और दिलचस्प बना देता है। फिल्म का ट्रीटमेंट भी पारंपरिक रोमांटिक फिल्मों की याद दिलाता है। कहानी कहने के अंदाज में एक क्लासिक आकर्षण और इमोशनल ईमानदारी नजर आती है, जो आज के दौर की फिल्मों में कम देखने को मिलती है। यही वजह है कि ट्रेलर देखने के बाद सोशल मीडिया पर फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ गई है। इससे पहले फिल्म का टाइटल ट्रैक भी रिलीज किया गया था, जिसे सिंगर अरिजीत सिंह के होमटाउन में शूट किया गया है। गाने को दर्शकों का अच्छा रिस्पॉन्स मिला और अरिजीत की आवाज ने इसमें अलग ही भावनात्मक गहराई जोड़ दी। खास बात यह भी है कि ‘एक दिन’ साई पल्लवी की पहली हिंदी फिल्म है। साउथ सिनेमा में अपनी दमदार एक्टिंग के लिए मशहूर साई पल्लवी को हिंदी दर्शक कितना पसंद करेंगे, यह देखना दिलचस्प होगा। यह फिल्म आमिर खान और फिल्ममेकर मंसूर खान के लंबे समय बाद साथ आने का मौका भी है। दोनों की जोड़ी पहले ‘कयामत से कयामत तक’, ‘जो जीता वही सिकंदर’, ‘अकेले हम अकेले तुम’ और ‘जाने तू… या जाने ना’ जैसी यादगार फिल्में दे चुकी है। आमिर खान प्रोडक्शंस के बैनर तले बनी इस फिल्म का निर्देशन सुनील पांडे ने किया है। फिल्म के प्रोड्यूसर आमिर खान, मंसूर खान और अपर्णा पुरोहित हैं। ‘एक दिन’ 1 मई 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज होगी।
रोजर्स ने बताए टेक सेक्टर में नौकरी पाने के गुर:अनुभवी सीईओ की सलाह- बड़ी कंपनियों के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखें

बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच एपल, मेटा जैसी टेक कंपनियों में नौकरी करने के इच्छुक युवाओं को एक सीईओ की सलाह काम आ सकती है। 1.8 अरब डॉलर (16,500 करोड़ रुपए) वैल्युएशन वाली वर्कफ्लो सॉफ्टवेयर कंपनी असाना के नए सीईओ डैन रोजर्स खुद भी माइक्रोसॉफ्ट, डेल, अमेजन वेब सर्विसेज, सेल्सफोर्स और सर्विसनाउ सहित प्रमुख तकनीकी कंपनियों में काम कर चुके हैं। रोजर्स का कहना है कि पहले की पीढ़ी के मुकाबले जेन जी के लिए सिलिकॉन वैली में नौकरी पाना ज्यादा आसान है। सबसे अच्छा रास्ता बड़ी कंपनियों की जरूरत के मुताबिक तकनीकी कौशल सीखना है। बड़ी टेक कंपनियां ऐसे लोगों को पसंद करती हैं जो पहले से किसी छोटी या मध्यम कंपनी में अनुभव हासिल करके आते हैं। ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो रोजर्स कहते हैं, ‘भले ही इसमें कुछ साल लग जाएं और कम प्रतिष्ठित कंपनियों में काम करना पड़े। लेकिन आपके रेज्यूमे में दर्ज आपके अनुभव और कौशल को खारिज कर पाना एआई के लिए भी आसान नहीं होगा। हो सकता है कि सीधे मुख्य द्वार के बजाय थोड़ा घूमकर टेक सेक्टर की बड़ी कंपनियों में प्रवेश मिले, लेकिन ऐसा होगा जरूर।’ सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं है अगर आप छोटी उम्र से ही धीरे-धीरे कौशल विकसित करते हैं, तो अच्छा वेतन और पद बाद में अपने आप मिल जाएंगे। यह किसी अचानक होने वाले कारनामे से धीमा लेकिन ज्यादा भरोसेमंद है। आप जितना ज्यादा सीखेंगे उतनी ही अच्छी नौकरी पाने के अवसर ज्यादा बनेंगे। सफल होने के लिए आवश्यक कौशल हासिल करने का कोई शॉर्टकट नहीं है।’ डैन रोजर्स के सुझाव सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट, तकनीकी कौशल और वास्तविक काम का अनुभव दिखाएं। करियर की शुरुआत छोटे रोल से करें और धीरे-धीरे अपनी विश्वसनीयता बनाएं। सीधे बड़ी कंपनियों में प्रवेश की बजाय अलग-अलग भूमिकाओं का अनुभव लेकर टेक ईकोसिस्टम में जगह बनाएं। ऐसा रिजूमे बनाएं जिसे नजरअंदाज करना मुश्किल हो
ईरान की टॉप लीडरशिप खत्म, फिर कैसे जंग लड़ रहा:7 टुकड़ों में ताकत बांट रखी; हर पद के लिए 4 उत्तराधिकारी पहले से तय

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में कहा कि देश ने दो दशकों तक अमेरिका के युद्धों का अध्ययन किया है। ताकि ऐसा सुरक्षा ढांचा बनाया जा सके जो राजधानी पर हमला होने के बाद भी लड़ाई जारी रख सके। इसके लिए ईरान ने एक खास स्ट्रेटजी बनाई, जिसका नाम रखा ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस’। मोजेक का मतलब टाइल्स (छोटे-छोटे टुकड़ों) से बना हुआ डाइग्राम होता है। ठीक वैसे ही इस रणनीति में ईरान की पूरी सैन्य कमान और क्षमता को केंद्रीकृत नहीं रखा जाता, बल्कि 7 छोटे-छोटे, स्वतंत्र हिस्सों में बांट दिया जाता है। इससे अगर दुश्मन टॉप लीडरशिप, सेंट्रल कमांड सेंटर, या बड़े हेडक्वार्टर पर हमला करके उन्हें नष्ट भी कर दे, तब भी बाकी सिस्टम टूटता नहीं है और लड़ाई जारी रख सकता है। ईरान की इसी रणनीति का एक हिस्सा उत्तराधिकार योजना भी है। रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम लीडर अली खामेनेई ने मौत से पहले निर्देश दिया था कि हर अहम सैन्य और प्रशासनिक पद के लिए कम से कम 4 संभावित उत्तराधिकारी तय किए जाएं। लंबी जंग के लिए तैयार खुद को तैयार करती है ईरानी सेना ‘डिसेंट्रलाइज्ड मोजेक डिफेंस’ इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) से सबसे ज्यादा जुड़ी हुई है। यह पूर्व कमांडर मोहम्मद अली जाफरी (2007-2019) के समय विकसित हुई। इस ढांचे में IRGC, बसीज मिलिशिया, नियमित सेना, मिसाइल यूनिट, नौसेना और स्थानीय कमांड संरचनाएं एक नेटवर्क की तरह काम करती हैं। संचार टूटने की स्थिति में भी स्थानीय यूनिट्स को कार्रवाई की स्वतंत्रता रहती है। ईरान ने 8 ग्रुप में सेना को बांटा ईरान ने अलग-अलग संस्थाओं को अलग-अलग रोल दिए हैं। ईरान ने यह क्यों अपनाई रणनीति? 2001 में अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया और 2003 में इराक पर हमला किया। इससे सद्दाम हुसैन का हाईली सेंट्रलाइज्ड रिजीम कुछ ही दिनों में ढह गया। कमांड स्ट्रक्चर पर हमला हुआ और सब कुछ बिखर गया। ईरान ने देखा और सीखा कि सेंट्रल कमांड पर निर्भर रहना खतरनाक हो सकता है। ईरान ने अपनी सेना को और सेंट्रलाइज्ड नहीं बनाया, बल्कि छोटे-छोटे हिस्सों में बांटा। ईरान जानता है कि दुश्मन की कन्वेंशनल ताकत (एयर पावर, टेक्नोलॉजी, इंटेलिजेंस) ज्यादा होगी, इसलिए उसने सीधे मुकाबले के बजाए सर्वाइवल यानी जंग को लंबी खींचने और दुश्मन को थकाने वाली स्ट्रेटजी अपनाई। 1979 की इस्लामिक रिवॉल्यूशन के बाद मोजाहिदीन -ए-खल्क जैसे ग्रुप्स के अटैक्स और 1980-88 की ईरान-इराक वॉर (8 साल की एट्रिशन जंग) ने भी इसे मजबूत किया। चीन के प्रोलॉन्ग्ड वॉर थ्योरी से स्ट्रेटजी बनाई ईरान के हथियार भी इसमें अहम रोल निभाते हैं। ईरान सस्ते हथियार बनाता है, जैसे शाहेद ड्रोन (कुछ हजार डॉलर में)। दुश्मन को इन्हें रोकने के लिए महंगे इंटरसेप्टर मिसाइल्स इस्तेमाल करने पड़ते हैं। इससे समय के साथ दुश्मन का खर्च बहुत बढ़ जाता है। जंग जितनी लंबी, उतना आर्थिक और राजनीतिक दबाव। ईरान का फोकस क्विक विक्ट्री नहीं, बल्कि दुश्मन को थकाकर और महंगा पड़ने पर मजबूर करना है। ईरान की यह सोच चीनी नेता माओ त्से-तुंग की “प्रोलॉन्ग्ड वॉर” यानी लंबे युद्ध की अवधारणा से मिलती-जुलती है। इस सिद्धांत के मुताबिक कमजोर पक्ष को ताकतवर दुश्मन को तुरंत हराने की जरूरत नहीं होती। वह शुरुआती झटका झेलकर युद्ध को लंबा कर सकता है और धीरे-धीरे दुश्मन की इच्छाशक्ति और संसाधनों को कमजोर कर सकता है। इसे सिद्धांत को ईरान में IRGC के चीफ स्टेटिजिस्ट हसन अब्बासी लेकर आए थे। वहीं, मोहम्मद अली जाफरी ने इन विचारों को सैन्य ढांचे में लागू करने में अहम भूमिका निभाई। ईरान ने हर पद के लिए चार उत्तराधिकारी तय कर रखे ईरान ने कई सैन्य और प्रशासनिक पद के लिए पहले से उत्तराधिकारी तय रखे हैं। कई मामलों में चार-चार उत्तराधिकारी रखने की बात कही गई, जिसे “फोर्थ सक्सेसर” की अवधारणा कहा जाता है। इसका मकसद यह है कि अगर किसी नेता की हत्या हो जाए या संपर्क टूट जाए, तब भी व्यवस्था चलती रहे। ईरानी सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की मौत के बाद उनके बेटे मुजतबा खामेनेई उत्तराधिकारी बने क्यों महत्वपूर्ण है यह रणनीति अमेरिका और इजराइल की सैन्य रणनीति अक्सर तेज और सटीक हमलों के जरिए दुश्मन के नेतृत्व और कमांड सिस्टम को खत्म करने पर फोकस्ड रही है। ईरान की “मोजेक डिफेंस” इसी रणनीति का जवाब मानी जाती है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि भारी हमलों और बड़े नुकसान के बाद भी सैन्य और राजनीतिक ढांचा पूरी तरह बर्बाद न हो। ईरान की इस सोच के मुताबिक युद्ध का फैसला केवल शुरुआती सैन्य ताकत से नहीं होता। समय, सहनशक्ति और संगठन की क्षमता भी उतनी ही अहम भूमिका निभाती है। अराघची ने हाल ही में कहा था कि ईरान पर बमबारी से जंग की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ा है और ईरान तय करेगा कि जंग कब और कैसे खत्म होगी ———————————— ये खबर भी पढ़ें… ईरान जंग- लोग पालतू कुत्ते-बिल्ली छोड़कर भाग रहे: बिना खाना-पानी दिए खंभे से बांधा, नोट लिखा- सॉरी देश छोड़ रहा हूं; 25 PHOTOS मिडिल ईस्ट में बढ़ते इजराइल-ईरान तनाव के बीच संयुक्त अरब अमीरात (UAE) में लोग देश छोड़ने की तैयारी में अपने पालतू कुत्तों, बिल्लियों और दूसरे जानवरों को सड़कों या शेल्टर में छोड़ रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…
महिला की हत्या और नाबालिग से रेप का आरोपी गिरफ्तार:डिंडौरी पुलिस ने कटनी से पकड़ा; पैदल ले जाकर कोर्ट में पेश किया

डिंडौरी जिले में महिला की हत्या और नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मुख्य आरोपी हरिओम चौधरी को शहपुरा पुलिस ने कटनी से गिरफ्तार कर लिया है। बुधवार को पुलिस ने आरोपी को थाने से पैदल ले जाकर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। लिव-इन पार्टनर ने की थी हत्या पुलिस जांच के अनुसार, 26 फरवरी को हुई इस वारदात का मुख्य आरोपी हरिओम चौधरी पिछले तीन माह से मृतका के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहा था। पीड़िता (नाबालिग) घटना से एक माह पूर्व ही अपनी मां के पास रहने के लिए आई थी। मामले का सह-आरोपी छोटू उर्फ देवेंद्र चौधरी 4 मार्च को ही गिरफ्तार किया जा चुका है। कटनी में दोस्त की झोपड़ी में छिपा था आरोपी थाना प्रभारी अनुराग जामदार ने बताया कि वारदात के बाद से हरिओम लगातार अपनी लोकेशन बदल रहा था। पुलिस ने कटनी जिले में घेराबंदी कर उसे उस समय दबोचा जब वह अपने एक मित्र की झोपड़ी में छिपा हुआ था। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी वहां ऑटो चलाकर फरारी काट रहा था। विशेष टीम ने पकड़ा आरोपी को पकड़ने में सब इंस्पेक्टर ताकेश्वरी मरकाम, एएसआई विपिन जोशी और राकेश यादव सहित 10 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पुलिस अब इस मामले में कानूनी औपचारिकताओं को पूरा कर त्वरित सुनवाई की तैयारी कर रही है।
‘एनडीए बनाम तमिलनाडु’: पीएम मोदी के दौरे से पहले तमिलनाडु में छिड़ा पोस्टर युद्ध | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:मार्च 11, 2026, 13:57 IST डीएमके ने इस चुनाव को एनडीए और तमिलनाडु राज्य के बीच संघर्ष के रूप में तैयार किया है। पीएम मोदी के दौरे से पहले तमिलनाडु में एनडीए पर हमला करने वाले पोस्टर दिखे. (छवि: न्यूज18) जैसा कि प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को तमिलनाडु का दौरा करने वाले हैं, मदुरै जिले में पोस्टर दिखाई दिए हैं जिनमें घोषणा की गई है कि 2026 का चुनाव एनडीए और तमिलनाडु के बीच मुकाबला होगा। डीएमके ने इस चुनाव को एनडीए और तमिलनाडु राज्य के बीच संघर्ष के रूप में तैयार किया है। इससे पहले सोमवार को तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने त्रिची में डीएमके सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “राज्य हमेशा बीजेपी और एनडीए के लिए नो-एंट्री जोन रहेगा। लड़ाई तमिलनाडु के लोगों और एनडीए के बीच है।” स्टालिन ने कहा, “तमिलनाडु हर चीज के लिए पूछता है, एनडीए के लिए जो हर चीज के लिए ‘नहीं’ कहता है, तमिलनाडु भी ‘नहीं’ कहेगा। आपके लिए यहां प्रवेश हमेशा ‘नहीं’ है। आपके ‘डप्पा इंजन’ के लिए, तमिलनाडु हमेशा ‘नो एंट्री’ कहेगा।” स्टालिन की टिप्पणी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बुधवार को राज्य की निर्धारित यात्रा से पहले आई है। पीएम मोदी आज तिरुचिरापल्ली में लगभग 5,650 करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने वाले हैं। बीजेपी का पलटवार स्टालिन की टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, भाजपा ने द्रमुक पर पलटवार किया और केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि द्रमुक प्रमुख ऐसी टिप्पणियां कर रहे हैं क्योंकि वह असहज स्थिति में हैं क्योंकि उनकी स्थिति को उनके अपने बेटे से खतरा है। गोयल ने कहा, “मुझे यकीन है कि एमके स्टालिन असहज महसूस कर रहे हैं क्योंकि उनकी खुद की स्थिति को उनके बेटे से खतरा है। मुझे संदेह है कि एमके स्टालिन को उदयनिधि स्टालिन द्वारा मुख्यमंत्री बनाया जाएगा। जब वह इस तरह की गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियों से गेंद उछालने की कोशिश करते हैं तो उनकी असुरक्षाएं झलकती हैं।” केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एमके स्टालिन समझ गए हैं कि तमिलनाडु के सीएम बनने के मामले में उनका अंतिम खेल करीब आ रहा है। उन्होंने कहा, “पार्टी के भीतर उदयनिधि स्टालिन उनके लिए सबसे बड़ा खतरा हैं। तमिलनाडु के लोग कभी भी तमिल विरोधी व्यक्ति को स्वीकार नहीं करेंगे, कोई ऐसा व्यक्ति जो तमिल गौरव को नहीं समझ सकता, कोई ऐसा व्यक्ति जो पूरी तरह से तमिल संस्कृति के खिलाफ है। उदयनिधि स्टालिन तमिलनाडु के लोगों को स्वीकार्य नहीं हैं।” जैसे-जैसे राज्य विधानसभा चुनाव के करीब पहुंच रहा है, डीएमके और बीजेपी के बीच जुबानी जंग लगातार बढ़ती जा रही है। इस बार एनडीए को राज्य में बढ़त बनाने की उम्मीद है. जगह : तमिलनाडु, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 11, 2026, 13:57 IST समाचार राजनीति ‘एनडीए बनाम तमिलनाडु’: पीएम मोदी के दौरे से पहले तमिलनाडु में पोस्टर युद्ध छिड़ गया है अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें
अंजीर दूध के फायदे: दूध में अंजीर का दूध पीने से क्या होता है? जानें कब और कैसे लें

अंजीर दूध के फायदे | छवि: फ्रीपिक अंजीर दूध के फायदे: हम विभिन्न प्रकार के रसायनों और सामग्रियों का सहारा लेते हैं, लेकिन हमारे आयुर्वेद और उपकरणों में कुछ ऐसे संयोजन बताए गए हैं जो किसी भी औषधि से अधिक प्रभावशाली होते हैं। ऐसा ही एक कॉम्बिनेशन दूध और स्टूडियो का है। दूध को आप में संपूर्ण आहार माना जाता है, और जब इसमें गुणवत्ता वाले समकक्षों को नाम दिया जाए, तो यह एक शक्तिशाली ‘स्वास्थ्य टॉनिक’ बन जाता है। आइए जानते हैं कि रोजाना दूध में स्टांप स्टॉलकर पीने से शरीर में क्या बदलाव आते हैं और इसे लेने का सही तरीका क्या है। पाचन तंत्र के लिए रामबाण दूध और ग्लूकोज छात्रों में गणित की प्रचुरता होती है। जिन लोगों को पुराने पाचन या पाचन संबंधी विकार होते हैं, उनके लिए दूध किसी चमक से कम नहीं है। दूध में सॉसेज का नाम मिलता है, जिससे इसका गुण दूध में मिल जाता है। यह पेट को साफ करने और मेटाबॉलिज्म को बनाए रखने में मदद करता है। जोड़ों को मजबूत बनाने में हड्डियों को स्वस्थ बनाए रखने के लिए कैल्शियम, मैग्नीशियम और मैग्नीशियम की आवश्यकता होती है। दूध कैल्शियम का मुख्य स्रोत है और शोधकर्ताओं में ये त्रि ही तत्व पाए जाते हैं। यह मेल ऑस्टियोपोरोसिस नामक बीमारी को कम करता है और जोड़ों के दर्द से राहत देता है। छात्रों के दूध और शरीर का निर्माण एनर्जेटिक है विटामिन आयरन और विटामिन का अच्छा स्रोत है। अगर आपको गंभीर थकान महसूस होती है या शरीर में खून की कमी है, तो दूध पीने से शरीर को तुरंत ऊर्जा मिलती है और हीमोग्लोबिन का स्तर बढ़ जाता है। छात्र और दूध इन्सिनोमा से परे है यहाँ का भाग भारी दौड़ जिंदगी में इन्नासा एक आम समस्या है। दूध में ‘ट्रिप्टोफैन’ होता है, जो स्टूडेंट के साथ मिलकर बॉडी को रिलैक्स करता है। रात को सोने से पहले इसके सेवन से दिमाग शांत होता है और गहरी नींद आती है। छात्र दूध और दिल की सेहत के लिए बढ़िया छात्रों में मौजूद पोटैशियम और एंटीऑक्सीडेंट्स ब्लड स्टूडियो को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। यह शरीर से खराब कोलेस्ट्रॉल को बनाए रखता है और हृदय की धमनियों को स्वस्थ रखता है। दूध और दूध का सेवन और कब करें? एक टिप्पणियाँ दूध में 2 से 3 गिरजाघरों की पेशकश। इसे मीडियम अचंल पर तब तक लेवलें जब तक दूध लिटिल डायनासोर न हो जाए और स्टूडेंट पूरी तरह से नैयर न पड़ जाएं। छात्र वाले का दूध पीने का सबसे सही समय रात को सोने से 30 मिनट पहले है। इससे यह रात भर शरीर की भर्ती में मदद मिलती है। यदि आप दूध का मिश्रण नहीं चाहते हैं तो रात भर विद्यार्थियों को पानी में डुबोकर रखें और सुबह उस विद्यार्थी को दूध के साथ खा लें। ये भी पढ़ें – खाड़ी पेट्रोल की कीमत: यहां पानी से भी सस्ता है पेट्रोल; 50 रुपये में बाइक तो 100 रुपये में कार का मंज़िल फुल, जानिए किस नंबर पर कौन सा देश छात्रों को दूध और सेवन के दौरान बरतें सावधानी जरूर बरतें छात्रों की तासीर गर्म होती है, इसलिए गर्मी के मौसम में इसका अधिक मात्रा में सेवन न करें। साथ ही, यदि आप व्यावसायिक रोगी हैं, तो उद्योगों में प्राकृतिक मिलावट अधिक होने के कारण डॉक्टर की सलाह के बाद ही इसे अपनी सामग्री में शामिल करें। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)अंजीर दूध(टी)अंजीर दूध रेसिपी(टी)अंजीर दूध के फायदे हिंदी में(टी)गर्म दूध के साथ अंजीर के फायदे(टी)अंजीर के साथ गर्म दूध(टी)अंजीर दूध के स्वास्थ्य लाभ(टी)अंजीर के स्वास्थ्य लाभ हिंदी में(टी)अंजीर के फायदे(टी)अंजीर खाने का तारिका(टी)अंजीर को दूध के साथ खाने के फायदे
न्यूक्लियर इमरजेंसी की तैयारी में खाड़ी देश:चंडीगढ़ की दवा कंपनी से 1 करोड़ कैप्सूल की क्षमता पूछी, कई देशों में सप्लाई की संभावना

ईरान-इजराइल जंग के बीच खाड़ी देशों ने संभावित न्यूक्लियर इमरजेंसी से निपटने की तैयारी तेज कर दी है। बहरीन स्थित एक फार्मा लायजनिंग एजेंट ने चंडीगढ़ की एक दवा कंपनी से संपर्क कर परमाणु आपदा में इस्तेमाल होने वाले प्रशियन ब्लू कैप्सूल के बारे में जानकारी मांगी है। एजेंट ने कंपनी से पूछा है कि क्या वह 1 करोड़ कैप्सूल बना सकती है। साथ ही अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों के लिए इसकी डोज कितनी होती है और कंपनी की उत्पादन क्षमता क्या है, जैसे कई सवाल भी पूछे गए हैं। कंपनी की डायरेक्टर डॉ. वैशाली अग्रवाल के अनुसार, इस विषय पर बातचीत जारी है। फिलहाल एजेंट अपने देश के स्वास्थ्य मंत्रालय से इस बारे में चर्चा कर रहा है। अगर समझौता हो जाता है तो इन दवाओं की सप्लाई बहरीन, कुवैत, कतर और जॉर्डन जैसे खाड़ी देशों में की जा सकती है। कंपनी का मुख्यालय चंडीगढ़ में है, जबकि इसकी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट हिमाचल प्रदेश के बद्दी में स्थित है। इससे पहले जून 2025 में इजराइल-ईरान तनाव के दौरान भी इस दवा की मांग सामने आई थी, लेकिन 12 दिन में संघर्ष खत्म होने के बाद बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई थी। जानिए, कैसे काम करती है प्रशियन ब्लू प्रशियन ब्लू परमाणु हमले या रेडियोलॉजिकल आपदा के दौरान इस्तेमाल होने वाली महत्वपूर्ण दवा है। यह शरीर में प्रवेश कर चुके रेडियोएक्टिव तत्व सीजियम-137 और थैलियम के प्रभाव को कम करती है। यह कैप्सूल आंतों में इन रेडियोएक्टिव तत्वों से जुड़कर उन्हें मल के जरिए शरीर से बाहर निकालने में मदद करता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे रेडियोलॉजिकल और न्यूक्लियर इमरजेंसी में उपयोग होने वाली जरूरी दवाओं की सूची में शामिल किया है। अमेरिका और यूरोप में यह दवा पहले से बनाई जाती रही है, जबकि भारत में इसका कॉमर्शियल उत्पादन लगभग दो साल पहले शुरू हुआ है। यह दवा डीआरडीओ की दिल्ली स्थित लैब आईएनएमएएस (इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड अलाइड साइंसेस) की तकनीक पर आधारित है। डीसीजीआई ने भारत की दो कंपनियों को इसके निर्माण और मार्केटिंग का लाइसेंस दिया है। इसमें अहमदाबाद की कंपनी को कच्चा माल उपलब्ध कराने और चंडीगढ़ की कंपनी को उत्पादन की जिम्मेदारी दी गई है। पोटेशियम आयोडाइड की भी बड़ी मांग बहरीन के एजेंट ने पोटेशियम आयोडाइड (केआई) टैबलेट को लेकर भी जानकारी मांगी है। इसके लिए करीब 1.2 करोड़ टैबलेट की संभावित मांग जताई गई है। पोटेशियम आयोडाइड का उपयोग न्यूक्लियर इमरजेंसी में थायराइड ग्रंथि को रेडिएशन से बचाने के लिए किया जाता है। इसके अलावा इसका इस्तेमाल हाइपरथायरायडिज्म के इलाज और फेफड़ों में जमा बलगम को ढीला करने में भी किया जाता है।
Medicinal Plants for Home Garden | Low Maintenance Medicinal Plants | घर में लगाने वाले औषधीय पौधे | घर के आस पास कौनसे पौधे लगाएं |

Last Updated:March 11, 2026, 13:01 IST Medicinal Plants for Home Garden: आजकल लोग घरों के आसपास हरियाली बढ़ाने के साथ-साथ ऐसे पौधों को प्राथमिकता दे रहे हैं जो दिखने में सुंदर होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर हों. आंगन, छत या बालकनी में छोटे-छोटे गमलों में उगने वाले ये पौधे न केवल वातावरण को ताजा रखते हैं, बल्कि जरूरत पड़ने पर घरेलू उपचार के रूप में किसी रामबाण औषधि से कम नहीं होते. हम आपको कुछ ऐसे ही पौधों के बारे में बताएंगे जिन्हें आप आसानी से अपने घर के आस-पास लगा सकते हैं और ये आपके बेहद काम आने वाले हैं. आजकल लोग अपने घरों के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए पौधे लगाना पसंद करते हैं. अगर ये पौधे औषधीय गुणों से भरपूर हों तो यह सेहत के लिए और भी फायदेमंद हो जाते हैं. कई ऐसे पौधे हैं जिन्हें आप अपने घर के आंगन, छत या बालकनी में गमलों में आसानी से उगा सकते हैं. ये पौधे ज्यादा देखभाल नहीं मांगते और जरूरत पड़ने पर घरेलू उपचार के रूप में भी काम आते हैं. खास बात यह है कि कम जगह में भी ये पौधे अच्छी तरह बढ़ते हैं और घर के वातावरण को भी ताजा बनाए रखते हैं. गृहणी दीपा जोशी बताती हैं कि ये पौधे उन्होंने घर में लगाए जो उन्हें समय समय पर काफी अच्छा फायदा देते है स्वास्थ से लेकर बालों के लिए, स्किन के लिए भी वो इनका इस्तेमाल करते है . पुदीना एक बहुत ही उपयोगी और जल्दी बढ़ने वाला पौधा है. इसे गमले या छोटे से बगीचे में आसानी से लगाया जा सकता है. पुदीना अपने ठंडक देने वाले गुणों के लिए जाना जाता है. गर्मियों में पुदीने की चटनी, शरबत या पुदीना पानी पीने से शरीर को ठंडक मिलती है और ताजगी बनी रहती है. इसके अलावा पुदीना पेट से जुड़ी समस्याओं जैसे गैस, अपच और एसिडिटी में भी राहत देता है. कई लोग पुदीने की पत्तियों को चाय में डालकर भी पीते हैं, जिससे स्वाद और सेहत दोनों का फायदा मिलता है. तुलसी को भारतीय घरों में बहुत पवित्र और औषधीय पौधा माना जाता है. लगभग हर घर के आंगन में तुलसी का पौधा देखने को मिल जाता है. तुलसी की पत्तियां सर्दी-खांसी, गले की खराश और बुखार में काफी फायदेमंद होती हैं. रोज सुबह तुलसी की कुछ पत्तियां खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी मजबूत होती है. इसके अलावा तुलसी का काढ़ा या चाय पीने से भी कई स्वास्थ्य लाभ मिलते हैं. तुलसी का पौधा घर के वातावरण को भी शुद्ध करने में मदद करता है. Add News18 as Preferred Source on Google एलोवेरा एक ऐसा पौधा है जिसे आजकल लगभग हर घर में लगाया जाता है. इसकी देखभाल करना भी काफी आसान होता है. एलोवेरा की मोटी पत्तियों के अंदर पाया जाने वाला जेल त्वचा और बालों के लिए बहुत फायदेमंद माना जाता है. यह त्वचा को ठंडक देने, जलन कम करने और छोटे-मोटे घाव भरने में मदद करता है. कई लोग एलोवेरा जेल का इस्तेमाल फेस पैक या हेयर पैक के रूप में भी करते हैं. इसके अलावा एलोवेरा को सेहत के लिए भी उपयोगी माना जाता है. रोजमेरी एक सुगंधित पौधा है जो आजकल घरों और किचन गार्डन में तेजी से लोकप्रिय हो रहा है. इसकी खुशबू बहुत ताजगी भरी होती है. रोजमेरी की पत्तियों का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजनों में भी किया जाता है. इसके अलावा रोजमेरी बालों की देखभाल में भी उपयोगी मानी जाती है. कई लोग रोजमेरी का पानी या तेल बनाकर बालों में लगाते हैं, जिससे बालों की ग्रोथ बेहतर होती है और बाल मजबूत बनते हैं. यह पौधा घर की सजावट में भी सुंदर लगता है. करी पत्ता एक ऐसा पौधा है जिसका इस्तेमाल अक्सर खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए किया जाता है. दक्षिण भारत के कई व्यंजनों में करी पत्ते का खास महत्व होता है. लेकिन स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी फायदेमंद होता है. करी पत्ता पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है और इसमें कई पोषक तत्व भी पाए जाते हैं. इसके अलावा कई लोग बालों को मजबूत और घना बनाने के लिए भी करी पत्ते का इस्तेमाल करते हैं. अजवाइन का पौधा भी घर में आसानी से उगाया जा सकता है. इसकी पत्तियां हल्की खुशबूदार होती हैं और इनमें कई औषधीय गुण पाए जाते हैं. अजवाइन का इस्तेमाल खासतौर पर पाचन से जुड़ी समस्याओं में किया जाता है. गैस, पेट दर्द और अपच जैसी परेशानियों में अजवाइन काफी राहत देती है. कई लोग इसकी पत्तियों से चाय या काढ़ा भी बनाते हैं, जो सर्दी-खांसी में फायदेमंद माना जाता है. इसलिए यह पौधा घर के लिए बहुत उपयोगी माना जाता है. First Published : March 11, 2026, 13:01 IST








