Saturday, 17 Oct 2026 | 11:55 PM

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रेफ्रिजरेटर का उपयोग करने के टिप्स: गर्मी के बर्तन देती हैं ही फ्रिज में कर लें ये अहम सेटिंग, बचेगी बिजली और बढ़ेगी कूलिंग

रेफ्रिजरेटर का उपयोग करने के टिप्स: गर्मी के बर्तन देती हैं ही फ्रिज में कर लें ये अहम सेटिंग, बचेगी बिजली और बढ़ेगी कूलिंग

रेफ्रिजरेटर युक्तियाँ: जैसे-जैसे गर्मी का एहसास हो रहा है, वैसे ही घरों में फ़र्ज़ी का इस्तेमाल बढ़ रहा है। ठंडा पानी, फल-सब्जियां और खाने को सुरक्षित रखने के लिए फ़िरोज़ को अब दिन रात का ऑर्डर दिया जा रहा है। लेकिन हीट आ जाए तो आपको अपनी फर्म में कुछ सेटिंग ठीक करनी होती है, ताकि आसानी से कूलिंग हो सके और बिजली की गृहस्थी बनी रहे। तो जानिए कुछ आसान बदलावों से आप अपने फ़र्ज़ी की सलाह को बेहतर बना सकते हैं। समरसाइन फ़र्ज़ी को सही जगह पर रखना भी बहुत ज़रूरी है। जी हाँ, आपको फ़र्ज़ी दीवार से कम से कम 5-10 सेमी दूर रखना चाहिए, ताकि हवा का संचार ठीक से हो सके। सीधे धूप या गर्म स्थान से दूर रखने से भी कूलिंग सिस्टम पर कम दबाव होता है। इसी तरह की कुछ खास जानकारी के बारे में आपको पता होना चाहिए, इससे आपका बिजली का बिल भी बचेगा और फ्रिज की कूलिंग भी बिल्कुल सही होगी। समर में फ़र्ज़ी का टेम्प्रेचर डिविजन से थोड़ा अधिक कूलिंग पर सेट करें। सैमसंग और वोल्टास कंपनी के अनुसार, फ़ोर्स का तापमान 3 डिग्री से 5 डिग्री और रेफ़्रिजरेटर का -18 डिग्री से -20 डिग्री तक रखना सही माना जाता है। इससे खाने की चीज़ें ताज़ा रहती हैं और बिजली की बचत भी होती है। बहुत कम तापमान सेट करने से लेकर मूवी पर ज्यादा भार पड़ सकता है। फ़्रिज़ को बार-बार आर्केस्ट्रा से यूनिवर्सल हवा बाहर निकलती है, जिससे मशीन कोमाइल कूलिंग बनाने में अधिक ऊर्जा मिलती है। सलाह दी गई है कि फ़ेरी का दरवाज़ा केवल तभी खोला और जल्दी बंद किया जा सके। गरम खाना सीधे फरी में न रखें कई बार्रा एक्ट हॉट हॉट खानी सीधे ही फ़िरज़ी में रख देते हैं, ऐसे में हॉट एक्टर की वजह से फ़िरोज़ के अंदर का तापमान बढ़ता है और ठंडक प्रभावित होती है। सबसे अच्छा है कि खाना पकाने के कमरे के तापमान पर आने के बाद ही स्थान पर रहें। फ़र्ज़ी के कोचिंग के लिए विशेष टिप्स फ़र्ज़ी को ओवरफ़िल न करें: अधिकांश सामान की आपूर्ति से हवा का घूमना मुश्किल होता है, जिससे शीतलन बाधा उत्पन्न होती है। सामान को प्रमाणित करना ताकि यूक्रेन तक हर कोने तक सामान पहुंचाया जा सके।सफाई पर ध्यान दें: रबर सील, ट्रे और वेंट को नियमित साफ करें। डिफ्रॉस्टिंग भी जरूरी है ताकि बर्फ जमा न हो।निवेश सुनिश्चित करें: फ़्रिज़ के पीछे और आसपास खाली जगहें। इससे गर्म हवा आसानी से बाहर निकलती है। इन टिप्स को अपनाकर आप सिर्फ कूलिंग ही बेहतर नहीं बल्कि बिजली की बचत भी कर पाएंगे। भारत में गर्मी जहां तापमान 40 डिग्री पार कर जाता है, वहां फ़रिश्ता की उचित देखभाल से भोजन की स्थिरता रुक सकती है। (टैग्सटूट्रांसलेट)रेफ्रिजरेटर युक्तियाँ(टी)ग्रीष्मकालीन कूलिंग(टी)फ्रिज सेटिंग्स(टी)ऊर्जा दक्षता(टी)भारतीय ग्रीष्मकालीन हैक्स(टी)फ्रिज(टी)रेफ्रिजरेटर सेटिंग्स(टी)फ्रिज ग्रीष्मकालीन हैक्स

सतना में परिवार ने खाया जहर, बेटे की मौत:पति-पत्नी और 3 साल का बेटा गंभीर, झगड़े के बाद खाने में मिलाया जहरीला पदार्थ

सतना में परिवार ने खाया जहर, बेटे की मौत:पति-पत्नी और 3 साल का बेटा गंभीर, झगड़े के बाद खाने में मिलाया जहरीला पदार्थ

सतना जिले के रामपुर बघेलान थाना क्षेत्र में सोमवार रात पत्नी ने पति से झगड़े के बाद खाने में जहर मिला दिया। यह खाना पूरे परिवार ने खा लिया। घटना बांधा गांव की है, जहर खाने से 6 साल के बेटे की मौत हो गई। वहीं पति-पत्नी और 3 साल का बेटे की हालत गंभीर है, जिनका अस्पताल में इलाज चल रहा है। कथित रूप से पत्नी ने पूरे परिवार को जहर मिलाकर खाना खिला दिया। जानकारी के अनुसार बांधा गांव निवासी कुंदन शर्मा अपनी पत्नी ज्योति शर्मा और दो बच्चों के साथ रहते हैं। सोमवार शाम करीब 7 बजे पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद बताया जा रहा है कि ज्योति शर्मा ने खाने में जहरीला पदार्थ मिला दिया। बताया गया कि पहले दोनों बच्चों को वही खाना खिलाया गया। इसके बाद ज्योति शर्मा ने खुद भी खाया और बाद में कुंदन शर्मा ने भी वही भोजन कर लिया। कुछ देर बाद सभी की तबीयत बिगड़ने लगी। 3 साल का बच्चा पड़ोसियों के पास पहुंचा इसी दौरान परिवार का छोटा बेटा अभिषेक शर्मा (करीब 3 साल) किसी तरह घर से निकलकर पड़ोसियों के पास पहुंचा रोते हुए उसने घर में सभी के बीमार होने की बात कही। पड़ोसी तुरंत घर पहुंचे तो देखा कि कुंदन शर्मा, ज्योति शर्मा और बड़ा बेटा आकाश शर्मा (6 साल) अचेत पड़े थे। ग्रामीणों की मदद से सभी को तुरंत इलाज के लिए रीवा के संजय गांधी अस्पताल ले जाया गया। वहां इलाज के दौरान आकाश शर्मा की मौत हो गई। जबकि कुंदन शर्मा, ज्योति शर्मा और छोटा बेटा अभिषेक की हालत गंभीर बनी हुई है और उनका इलाज चल रहा है। पुलिस जांच में जुटी परिजनों का कहना है कि पति-पत्नी के बीच विवाद के कारण यह कदम उठाया गया होगा। हालांकि घटना की असली वजह अभी साफ नहीं हो सकी है। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है और घटना के सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

शिवराज बोले-ममता दीदी को 'प्रधानमंत्री' के नाम से आपत्ति:बंगाल में रोकीं केंद्र की योजनाएं; जलने वाले जलें, हम किसानों का भाग्य बदलकर रहेंगे

शिवराज बोले-ममता दीदी को 'प्रधानमंत्री' के नाम से आपत्ति:बंगाल में रोकीं केंद्र की योजनाएं; जलने वाले जलें, हम किसानों का भाग्य बदलकर रहेंगे

लोकसभा में प्रश्नकाल के दौरान मंगलवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला। शिवराज ने सीधे शब्दों में कहा कि बंगाल की सरकार को जनहित से ज्यादा राजनीति प्यारी है। उन्होंने कहा, “विपक्ष तख्तियां लेकर हाय-हाय करता रहे, लेकिन दुनिया भारत की कृषि नीतियों की वाह-वाह कर रही है। जलने वाले जला करें, हम किसानों का भाग्य बदलकर ही दम लेंगे।” सदन में जो लोग नारे लगा रहे हैं, उन्होंने बंगाल में प्राकृतिक खेती मिशन तक लागू नहीं किया। उन्हें किसानों के पसीने की कद्र नहीं है। बंगाल की जनता ममता बनर्जी को इस धोखे के लिए कभी माफ नहीं करेगी। हेडलाइन के मुख्य 3 तीखे पॉइंट्स: नाम की राजनीति: ‘प्रधानमंत्री’ शब्द से परहेज शिवराज ने आरोप लगाया कि पश्चिम बंगाल में ‘प्रधानमंत्री कृषि धन धान्य’ जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं सिर्फ इसलिए लागू नहीं की गईं क्योंकि उनके नाम के आगे ‘प्रधानमंत्री’ जुड़ा है। उन्होंने इसे किसानों के साथ “खुला अन्याय और पाप” करार दिया। वोट बैंक बनाम किसान की सेहत मंत्री ने सदन में कहा कि टीएमसी सरकार को मिट्टी की उर्वरता और जनता के स्वास्थ्य की कोई चिंता नहीं है। प्राकृतिक खेती मिशन को ठंडे बस्ते में डालना इस बात का सबूत है कि उन्हें सिर्फ अपने वोट बैंक को साधना है। चीन को पछाड़ा, गोदाम भरे शिवराज ने गर्व से कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़ दिया है। देश का खाद्यान्न उत्पादन 357 मिलियन टन के रिकॉर्ड स्तर पर है। उन्होंने तंज कसा— “एक समय था जब हम अनाज मांगते थे, आज चिंता यह है कि रिकॉर्ड पैदावार को रखें कहां!”

हॉल ऑफ फेम में शामिल दिग्गज कोच के लीडरशिप मंत्र:अमेरिका के फुटबॉल कोच मैक ब्राउन 50 साल तक कोच रहे; बोले- टीम जीत रही हो तो लगाम कसें, टूटने पर सहारा दें

हॉल ऑफ फेम में शामिल दिग्गज कोच के लीडरशिप मंत्र:अमेरिका के फुटबॉल कोच मैक ब्राउन 50 साल तक कोच रहे; बोले- टीम जीत रही हो तो लगाम कसें, टूटने पर सहारा दें

अमेरिका के दिग्गज कोच मैक ब्राउन को खेल जगत के सबसे सफल और सम्मानित कोचों में गिना जाता है। 50 साल के कोचिंग करियर में उन्होंने 288 मैच जीते। वे 2005 में टेक्सास यूनिवर्सिटी को नेशनल चैम्पियन बनाने वाले कोच रहे और हॉल ऑफ फेम में भी शामिल हैं। उनकी सफलता केवल स्कोरबोर्ड तक सीमित नहीं रही। कोचिंग अनुभव के आधार पर ब्राउन ने लीडरशिप से जुड़े चार सबक बताए, जो मैदान से लेकर कॉर्पोरेट ऑफिस तक हर लीडर के काम के हैं। लीडर की असली जिम्मेदारी टीम को यह बताना कि वे जीत सकते हैं 1984 में अपनी टीम के खराब खेलने पर उन्होंने खिलाड़ियों को फटकारा था। टीम वह मैच हार गई। तब दिग्गज कोच बैरी स्विट्जर ने कहा था कि तुमने टीम से कहा कि वे हार जाएंगे और वे हार गए। ब्राउन कहते हैं, ‘जब टीम ऊंचाइयों पर हो और आत्ममुग्ध हो रही हो, तब उन पर दबाव डालें। लेकिन जब मुश्किल में हों और आत्मविश्वास गिरा हुआ हो, तब उन्हें प्रेरित कर बताना चाहिए कि वे जीत सकते हैं।’ काम के तनाव के बीच आपस में हंसी-मजाक होना भी बहुत जरूरी है 2005 के रोज बाउल मैच से पहले ब्राउन की टीम काफी दबाव में थी। खिलाड़ी आपस में बात तक नहीं कर रहे थे। ब्राउन को एहसास हुआ कि अगर तनाव बना रहा, तो हार जाएंगे। उन्होंने खिलाड़ियों के साथ जोक्स शेयर कर तनाव कम करने का तरीका अपनाया। ब्राउन कहते हैं, ‘लीडर को पता होना चाहिए कि माहौल को कब हल्का करना है। तनाव में काम बिगड़ता है, खुशी में टीम पूरी क्षमता से प्रदर्शन करती है।’ हारने के बाद शब्दों का काफी सोच-समझकर चयन करना चाहिए ब्राउन का मानना है कि एक लीडर के शब्द बहुत शक्तिशाली होते हैं, खासकर हार के बाद। कोच गुस्से में ऐसी बातें कह देते हैं जिनसे बाद में उन्हें पश्चाताप होता है। जब टीम जीते, तो खिलाड़ियों की तारीफ करें जबकि हार की जिम्मेदारी खुद लें। ब्राउन कहते हैं कि हार के बाद मीडिया या टीम से बात करते समय आपकी बॉडी लैंग्वेज मायने रखती है। आप निराश दिख सकते हैं, लेकिन पराजित नहीं। मानवता और सहानुभूति, जीत-हार के नतीजों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण 1999 में टेक्सास बनाम टेक्सास ए एंड एम मैच से पहले ए एंड एम यूनिवर्सिटी में भीषण हादसा हुआ, जिसमें 12 छात्रों की मौत हो गई। ब्राउन ने टीम के साथ मिलकर रक्तदान शिविर लगाया और विरोधी के प्रति संवेदना व्यक्त की। टेक्सास मैच हार गया, लेकिन ब्राउन को मलाल नहीं था। ब्राउन कहते हैं, ‘लीडर को संवेदनशील और भावनात्मक होना चाहिए। कई बार मानवता और सहानुभूति, जीत-हार के नतीजों से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण होती है।’

देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

देवास में शीतला सप्तमी पर मंदिरों में भीड़:महिलाओं ने एक दिन पहले बनाकर रखा भोजन, बासी प्रसाद के रूप में करेंगे ग्रहण

देवास शीतला सप्तमी के अवसर पर मंगलवार को शहर के शीतला माता मंदिरों में महिलाओं की भीड़ उमड़ पड़ी। महिलाओं ने सुबह मंदिर पहुंचकर माता शीतला की पूजा-अर्चना की और ठंडे भोजन का भोग अर्पित किया। शहर के गोया स्थित शीतला माता मंदिर में भी बड़ी संख्या में महिलाएं दर्शन और पूजा के लिए पहुंचीं। महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा की और आरती उतारी। इस पर्व पर एक दिन पहले बनाया गया भोजन माता को अर्पित करने की परंपरा होती है। एक रात पहले बनाकर रखती हैं खाना, अगले दिन खाती हैं पूजा करने पहुंची श्वेता चौधरी ने बताया कि शीतला सप्तमी के दिन महिलाएं एक रात पहले ही भोजन बनाकर रखती हैं और अगले दिन ठंडा होने पर माता शीतला को भोग लगाती हैं। इसके बाद परिवार के लोग वही प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। मान्यता है कि शीतला सप्तमी का व्रत रखने और पूजा करने से परिवार में सुख-समृद्धि आती है। महिलाएं अपने बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य और परिवार की खुशहाली के लिए यह व्रत रखती हैं।

राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग, इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने; 2018 में 1.08 लाख, 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने अपना देश छोड़ा

राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग, इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने; 2018 में 1.08 लाख, 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने अपना देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’

राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग; इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने, 2018 में 1.08 लाख और 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने देश छोड़ा

राजनीति और टैक्स से परेशान अरबपति छोड़ रहे अपना देश:ब्रिटेन-अमेरिका से मोहभंग; इटली, पुर्तगाल और सिंगापुर नए ठिकाने बने, 2018 में 1.08 लाख और 2025 में 1.42 लाख अमीरों ने देश छोड़ा

दुनिया के सबसे अमीर परिवारों के बीच इन दिनों अपना देश छोड़कर दूसरे देशों में बसने की लहर सी चल रही है। विशेषज्ञ इसे इतिहास का ‘सबसे बड़ा निजी संपत्ति प्रवास’ बता रहे हैं। कभी टैक्स लाभ की तलाश में होने वाला यह पलायन अब ‘रक्षात्मक’ हो गया है। अमीर अब अपनी संपत्ति बचाने, पीढ़ियों की सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता से बचने के लिए ‘गोल्डन वीसा’ और विदेशी नागरिकता का सहारा ले रहे हैं। स्विस बैंक यूबीएस ने अपने 87 अरबपति ग्राहकों के सर्वेक्षण में पाया कि 2025 में 36% अरबपति कम से कम एक बार अपना निवास स्थान बदल चुके हैं, जबकि 9% अन्य इस पर विचार कर रहे हैं। विशेष रूप से 54 वर्ष से कम उम्र के 44% युवा अरबपति पिछले साल दूसरे देश शिफ्ट हुए हैं। निवेश प्रवास फर्म ‘हेनली एंड पार्टनर्स’ के पास साल-दर-साल आवेदनों में 28% की भारी वृद्धि दर्ज की गई है। हेनले एंड पार्टनर्स की ‘प्राइवेट वेल्थ माइग्रेशन रिपोर्ट’ के मुताबिक 2018 में जहां करीब 1.08 लाख अरबपतियों ने देश बदला था, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 1.34 लाख और 2025 में रिकॉर्ड 1.42 लाख पहुंच गया और इस साल यानी 2026 में और ज्यादा माइग्रेशन का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, टैक्स एफिशिएंसी अमीरों के फैसले की बड़ी वजह है। इटली में नए रेजीडेंट्स के लिए €2 लाख सालाना फ्लेट टैक्स स्कीम 15 साल तक विदेशी आय पर टैक्स को कैप करती है, जो अमीरों के लिए आकर्षक है। पुर्तगाल ने पुराने ‘गोल्डन वीसा’ और नई स्कीम के तहत 20% टैक्स छूट और रिसर्च/इनोवेशन इंसेंटिव देकर धनी प्रवासियों को खींचा है। सिंगापुर ने भी इसी तरह की कई रियायतें घोषित की हैं। हेनले रिपोर्ट कहती है कि 2025 में इटली में 3,600, पुर्तगाल में 1,400 और ग्रीस में 1,200 नए अरबपति बसे हैं। दूसरी तरफ ब्रिटेन लगातार नेट आउटफ्लो झेल रहा है, जहां हाई टैक्स और ब्रेग्जिट के बाद की अनिश्चितता से पैसे वाले परिवार विकल्प तलाश रहे हैं। टेक्नोलॉजी ने अमीरों को ‘जहां चाहो, वहीं रहो’ की आजादी दी माइग्रेशन सलाहकार जेरमी सेवरी कहते हैं, ‘टेक्नोलॉजी ने अमीरों के लिए दुनिया को खुला मैदान बना दिया है। अब आप कंपनी सिंगापुर, परिवार इटली और संपत्ति दुबई में रख सकते हैं।’ हेनले की रिपोर्ट भी मानती है कि रिमोट वर्क, डिजिटल बिजनेस और फिनटेक टूल्स ने देश छोड़ना आसान बनाया है। हेनले के सीईओ डॉ. युर्ग स्टेफन कहते हैं, ‘पुरानी वेल्थ राजधानी जैसे ब्रिटेन और अमेरिका से पलायन और दक्षिण यूरोप, एशिया की ओर अरबपतियों के बसने का झुकाव नई हकीकत है।’

बेहरुजबेक टूचिव की जटिल स्पाइन सर्जरी मैक्स हॉस्पिटल में सफल.

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Last Updated:March 10, 2026, 12:51 IST उज्बेकिस्तान के 16 वर्षीय बेहरुजबेक टूचिव रीढ़ की हड्डी की सफल सर्जरी की गई है. इस लड़के को पर‍िवारी बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल लेकर आया था. जहां डॉ. जितेश मंगवानी की टीम ने सफल सर्जरी कर राहत दी. द‍िल्‍ली मैक्‍स में उज्‍बेक‍िस्‍तान से आए मरीज की सफल सर्जरी की गई. कुछ दिन पहले उज्बेकिस्तान से 16 साल का लड़का बेहरुजबेक टूचिव भारत आया. वह अपने परिवार के साथ यहां घूमने नहीं आया था बल्कि एक बेहद जटिल बीमारी को लेकर आया, जिसमें उसकी रीढ़ की हड्डी मुड़ गई थी और उसकी पीठ पर एक कूबड़ उभर आया था. उसकी हालत इतनी खराब थी कि न तो वह चल सकता था और न ही सीधा खड़ा हो सकता था. यहां तक कि दर्द के चलते वह बिस्तर पर पीठ के बल सो भी नहीं सकता था. भारत के अस्पतालों और डॉक्टरों के बारे में जानकारी करने के बाद यहां दिल्ली आया परिवार शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचा, जहां मरीज को देखकर एकबारगी डॉक्टरों को भी अचंभा हुआ क्योंकि इस मरीज की कमर पिछले पांच साल से ज्यादा समय से मुड़ी हुई थी और दो बार उज्बेकिस्तान में र्की गई सर्जरी फेल हो गई थीं. दूसरी सर्जरी के बाद भी हड्डी का मुड़ना बंद नहीं हो रहा था.ऐसे में यह बड़ी चुनौती थी कि पहले से दो बार ऑपरेट हो चुकी स्पाइन को पूरी तरह ठीक किया जाए. हालांकि मरीज को देखने के बाद ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. जितेश मंगवानी और डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि उसकी रीढ़ की हड्डी बहुत सख्त और मुड़ी हुई (काइफोस्कोलिओसिस) थी, जिसके कारण कूबड़ निकल गया था और शारीरिक संतुलन बिगड़ गया था. रीढ़ की हड्डी को सीधा करने के लिए प्लान्ड रिवीजन डीफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी कराने की सलाह दी गई. इस बार चुनौती इसलिए भी ज्यादा बड़ी थी, क्योंकि उनकी रीढ़ की हड्डी पर पहले ही दो बार ऑपरेशन हो चुका था. इन ऑपरेशंस के कारण हड्डी बहुत सख्त हो गई थी और चारों ओर स्कार टिश्यू बन गए थे. सर्जरी के दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधा और स्थिर करने के लिए विशेष स्क्रू एवं रॉड का प्रयोग किया गया. साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग की गई. इसके बाद उसकी रीढ़ (स्पाइन) की बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. अस्पताल में हुई सफल सर्जरी से अब वह किशोर फिर से सीधे खड़े होने और चलने में सक्षम हो गया. इतना ही नहीं उसे लगातार दर्द से राहत मिली और उसके लिए सामान्य जीवन में लौटना और आत्मविश्वास के साथ चलना भी संभव हुआ. इस मामले को लेकर डॉ. जितेश मंगवानी ने कहा , ‘स्पाइन सर्जरी के मामले में पहले हो चुकी सर्जरी के बाद रिवीजन स्पाइन डीफॉर्मिटी करेक्शन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे मामलों में पहले की सर्जरी के कारण रीढ़ की हड्डी सख्त हो जाती है और महत्वपूर्ण जगहों पर स्कार टिश्यू बन जाते हैं. इससे खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. इस मामले में सावधानी के साथ योजना बनाते हुए, सटीक तकनीक की मदद से और लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग करते हुए हम रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित तरीके से सीधा करने में सक्षम रहे. सर्जरी के अगले ही दिन मरीज सीधा खड़ा होने और चलने में सक्षम हो गया. इससे उसे आराम, संतुलन और आत्मविश्वास वापस मिला.’ सर्जरी के बाद, एक्स-रे से पता चला कि मरीज के शोल्डर एवं पेल्विस का अलाइनमेंट सही हो गया है. अगले ही दिन वह बिना किसी सहारे के चलने लगा. सर्जरी के तुरंत बाद फिजियोथेरेपी, सांस से संबंधित कुछ व्यायाम और पोश्चर ट्रेनिंग की शुरुआत कर दी गई और स्थिति स्थिर होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. किशोर को पोश्चर का ध्यान रखने और फॉलो-अप को लेकर स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं. रीढ़ की हड्डी से संबंधित ऐसे जटिल उपचारों (कॉम्प्लेक्स स्पाइन करेक्शन) के साथ मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने स्पाइन डीफॉर्मिटी के चुनौतीपूर्ण मामलों के मैनेजमेंट में अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ाया है. इससे मरीजों को अधिक आरामदायक एवं सक्रिय जीवन देना संभव हुआ है. About the Author प्रिया गौतमSenior Correspondent प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें First Published : March 10, 2026, 12:51 IST

नहर में डूबे नाबालिग का 45 घंटे बाद शव मिला:दूसरे बच्चे की तलाश जारी, बहते हुए 10 किमी दूर पहुंचा

नहर में डूबे नाबालिग का 45 घंटे बाद शव मिला:दूसरे बच्चे की तलाश जारी, बहते हुए 10 किमी दूर पहुंचा

सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र अंतर्गत चोरमारी गांव से निकली बाणसागर परियोजना की पुरवा नहर में रविवार दोपहर डूबे दो नाबालिग बच्चों में से एक का शव लगभग 45 घंटे बाद मंगलवार सुबह बरामद कर लिया गया। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम ने यह शव रामपुर बाघेलान के नेमुआ गांव के पास नहर में तलाशी अभियान के दौरान पाया, जो घटना स्थल से करीब 10 किलोमीटर दूर है। जानकारी के अनुसार, चोरमारी गांव निवासी दो नाबालिग बच्चे रविवार को पुरवा नहर में नहाने के लिए गए थे। इसी दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे तेज बहाव में बह गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचित किया। एक बच्चे का शव मिला दूसरे की तलाश जारी इसके बाद प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से खोजबीन शुरू की गई। लगातार करीब दो दिनों तक चले सर्च ऑपरेशन के बाद मंगलवार को एक बच्चे का शव बरामद किया गया। मृतक की पहचान 13 वर्षीय आयुष विश्वकर्मा के रूप में हुई है। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। वहीं, दूसरे बच्चे 15 वर्षीय आर्यन मिश्रा की तलाश अभी भी जारी है। पुलिस, एसडीआरएफ और स्थानीय गोताखोरों की टीम नहर के विभिन्न हिस्सों में लगातार सर्च ऑपरेशन चला रही है। प्रशासन ने आसपास के ग्रामीणों से भी अपील की है कि यदि नहर में किसी प्रकार की जानकारी मिले तो तत्काल पुलिस को सूचित करें। इस मामले से जुड़ी यह खबर पढ़ें… सतना की पुरवा नहर में दो नाबालिग डूबे सतना जिले के रामपुर बाघेलान थाना क्षेत्र के ग्राम चोरमारी स्थित पुरवा नहर में रविवार दोपहर करीब 2 बजे नहाते समय दो नाबालिग डूब गए। 15 वर्षीय आर्यन और 13 वर्षीय आयुष क्रिकेट खेलने के बाद नहाने उतरे थे और गहरे पानी में चले गए। पूरी खबर पढ़ें…

निमाड़ में गणगौर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में:14 मार्च से जवारे बोए जाएंगे, 22 को माता की होगी विदाई

निमाड़ में गणगौर पर्व की तैयारियां अंतिम चरण में:14 मार्च से जवारे बोए जाएंगे, 22 को माता की होगी विदाई

बड़वानी जिले के अंजड़ नगर सहित समूचे निमाड़ अंचल में प्रमुख आस्था पर्व गणगौर को लेकर श्रद्धा और उत्साह का माहौल है। पर्व के आगमन से पहले ही श्रद्धालु माता के स्वागत की प्रतीक्षा कर रहे हैं। गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार करने का काम भी अंतिम चरण में पहुंच गया है। अंजड़ के कारीगर हिमांशु चौहान पिछले दो-तीन वर्षों से गणगौर माता और ईश्वर राजा के रथ तैयार कर रहे हैं। वे पीओपी और लकड़ी की सहायता से आकर्षक रथ बनाते हैं और उन्हें पारंपरिक ढंग से सजाते हैं। उनके द्वारा बनाए गए रथों की मांग निमाड़ के कई कस्बों और शहरों में रहती है। बड़वानी और खरगोन जिले के ठीकरी, खरगोन, सनावद सहित अन्य स्थानों से भी श्रद्धालु रथ लेने पहुंचते हैं। हिमांशु चौहान ने बताया कि एक रथ की कीमत करीब 7 हजार रुपये रखी गई है। यदि कोई श्रद्धालु गणगौर माता और ईश्वर राजा के दोनों रथ एक साथ लेता है, तो उन्हें 13 हजार रुपये में उपलब्ध कराए जाते हैं। पर्व के नजदीक आते ही रथों की मांग बढ़ जाती है और कारीगर इन्हें समय पर तैयार करने में जुटे रहते हैं। गणगौर पर्व निमाड़ क्षेत्र की आस्था और परंपरा से जुड़ा एक प्रमुख त्योहार है। पूरे निमाड़ अंचल में सैकड़ों स्थानों पर गणगौर माता की मूठ स्थापित की जाती है, जहां श्रद्धालु पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। इस वर्ष पर्व की परंपराओं के अनुसार 14 मार्च को जवारे बोए जाएंगे। इसके बाद सात दिनों तक पंडितों द्वारा माता की सेवा की जाएगी और जवारों को सींचा जाएगा। इस अवधि में प्रतिदिन सुबह और शाम श्रद्धालु सामूहिक रूप से माता की पूजा-अर्चना करेंगे। इसके बाद 21 मार्च को बाड़ी के पट श्रद्धालुओं के लिए खोले जाएंगे। इस दिन भक्त रथ लेकर माता के दर्शन करने पहुंचेंगे और विधि-विधान से पूजा कर माता को अपने घर ले जाएंगे। इसी दिन रथ बौड़ाने की परंपरा भी निभाई जाएगी। श्रद्धालु अपनी मन्नत पूरी होने पर माता की पूजा कर जोड़े जिमाने की परंपरा का पालन करेंगे। पर्व का समापन 22 मार्च को गणगौर घाट पर माता के विसर्जन के साथ होगा।