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बड़ा गुणकारी है ये गूलर का पेड़, पत्ती से लेकर जड़ तक में औषधीय गुण, जानें इसके कमाल के फायदे

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X बड़ा गुणकारी है ये गूलर का पेड़, पत्ती से लेकर जड़ तक में औषधीय गुण, जानें   Health Tips: विंध्य क्षेत्र की वादियों में कई ऐसी औषधीय वनस्पतियां पाई जाती हैं, जो स्वास्थ्य के लिए किसी वरदान से कम नहीं हैं. इन्हीं में से एक है गूलर का पेड़, जिसे आयुर्वेद में अत्यंत उपयोगी माना गया है. सीधी के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह के अनुसार, शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए गूलर का विशेष रूप से उपयोग किया गया था. गूलर के पत्तों, फलों और तने का सेवन कई प्रकार की बीमारियों में लाभकारी साबित होता है. आयुर्वेद में इसे अंजीर के समान गुणकारी माना गया है. गूलर की शाखाएं मोटी होती हैं और इसके पत्ते दिल के आकार और खुरदरी सतह वाले होते हैं. इसके फल लगभग 2 से 3 सेंटीमीटर व्यास के होते हैं, जो पकने पर हरे से पीले या लाल रंग में बदल जाते हैं. इस पेड़ पर सालभर फूल और फल लगते हैं, हालांकि जुलाई से दिसंबर के बीच इसकी पैदावार अधिक होती है. इसके पके फलों का सेवन शरीर को ताकत देता है और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक माना जाता है.

क्या आपको हमेशा अपने पैरों में महसूस होती है जलन? इन गंभीर स्वास्थ्य समस्या का हो सकता है संकेत!

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Last Updated:March 10, 2026, 12:07 IST Health Tips : हम अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में कई हेल्थ प्रॉब्लम का सामना करते हैं. ये शायद इतनी सीरियस न लगें कि इनके बारे में चिंता की जाए, इसलिए हम इनके लक्षणों को हल्के में लेते हैं. खासकर पैरों में दर्द या जलन जैसी दिक्कतों को हम पूरी तरह से नज़रअंदाज़ कर देते हैं, यह सोचकर कि ये फिजिकल मेहनत या किसी और वजह से हो रही हैं. हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं आती हैं. ये इतनी बड़ी नहीं लगतीं कि डरना पड़े, इसलिए हम इनके लक्षणों को हल्के में ले लेते हैं. खासकर पैरों में दर्द या जलन जैसी समस्याओं को तो हम बिल्कुल नजरअंदाज कर देते हैं. हमें लगता है कि ये शारीरिक मेहनत की वजह से हो रही हैं या कोई और वजह होगी. अगर पैरों में बार-बार जलन महसूस होती है तो देर नहीं करनी चाहिए, ऐसा विशेषज्ञों का कहना है. ये शरीर में किसी खतरनाक बीमारी का लक्षण हो सकता है, इसलिए सतर्क रहना जरूरी है. तो पैरों में जलन किस चीज की ओर इशारा करती है? इस समस्या को कम करने के लिए क्या करना चाहिए, आइए जानते हैं. कारण क्या है? पैरों में जलन महसूस होने का असली कारण शरीर में विटामिन B, फोलिक एसिड और कैल्शियम की कमी है. विटामिन B12, B6, B9 कम होने से पैरों में जलन या झनझनाहट होती है. ये सिर्फ कुछ उम्र के लोगों को ही नहीं, बल्कि लगभग हर किसी में देखने को मिलती है. Add News18 as Preferred Source on Google उम्र से कोई संबंध नहीं है, लेकिन जिन लोगों में जरूरी पोषक तत्वों की कमी होती है, उन्हें पैरों में जलन होती है. शराब का ज्यादा सेवन, जहरीले पदार्थ या कुछ दवाओं के साइड इफेक्ट्स से नसें खराब हो जाती हैं. इससे नर्वस सिस्टम पर असर पड़ता है और पैरों में जलन महसूस होती है. खतरनाक बीमारियों का खतरा पैरों में सूजन या जलन होना विशेषज्ञों के मुताबिक गंभीर बीमारियों का संकेत हो सकता है. जिन लोगों को किडनी की समस्या होती है, उनमें ये लक्षण आम तौर पर दिखते हैं. थायराइड हार्मोन का स्तर कम होना भी इसका कारण बन सकता है. इसके अलावा, फंगल इंफेक्शन भी पैरों में जलन पैदा कर सकता है. जिन लोगों की रक्त नलिकाओं में इंफेक्शन होता है, उनमें ये लक्षण अक्सर दिखते हैं. अगर ये लक्षण कई दिनों तक कम नहीं होते या बार-बार ज्यादा हो जाते हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है. सही इलाज करवाकर और समय पर ट्रीटमेंट लेने से खतरे से बचा जा सकता है. इन्हें अपनाकर देखें. पैरों में जलन कम करने के लिए कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं. लेकिन एक्सपर्ट्स कहते हैं कि घरेलू उपायों से भी इस समस्या को कम किया जा सकता है. जलन कम करने के लिए ठंडा पानी इस्तेमाल करना एक अच्छा तरीका है. रोज अपने पैरों को ठंडे पानी के टब में रखें. इससे पैरों की नसों को आराम मिलेगा और परेशानी कम होगी. इससे ब्लड सर्कुलेशन भी बेहतर होता है. गर्म पानी में एप्सम सॉल्ट डालकर पैरों को रखने से मांसपेशियां रिलैक्स हो जाती हैं. दूसरी तरफ, शरीर में ब्लड सर्कुलेशन सुधारने के लिए नारियल तेल से मसाज कर सकते हैं. हल्दी और एलोवेरा मिलाकर पेस्ट बनाकर पैरों पर लगाने से अच्छा असर होता है. हल्दी में मौजूद एंटी-इन्फ्लेमेटरी गुण पैरों की जलन को कम कर सकते हैं. First Published : March 10, 2026, 12:07 IST

मूड को बनाना है बेहतर, रोज सुबह उठकर करें यह काम, गर्मी के मौसम में भी रहेंगे कूल-कूल !

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The Science of Happy Mood: गर्मियों की शुरुआत हो चुकी है और अब धूप में ज्यादा देर रुकना मुश्किल हो गया है. अक्सर लोग गर्मियों की शुरुआत होते ही धूप से पूरी तरह दूरी बना लेते हैं, लेकिन हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि सूरज की रोशनी शरीर के लिए उतनी ही जरूरी है जितनी कि हवा और पानी. सूरज की किरणें न केवल हमें गर्माहट देती हैं, बल्कि यह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने का सबसे आसान जरिया हैं. नेशनल हेल्थ मिशन के अनुसार धूप का सही तालमेल हमारी इम्यूनिटी को बढ़ाने से लेकर हड्डियों को मजबूत रखने तक में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि गर्मियों में धूप लेने का तरीका सर्दियों से बिल्कुल अलग होना चाहिए, ताकि हम इसके फायदों का आनंद ले सकें और नुकसान से बच सकें. सूरज की रोशनी शरीर में विटामिन डी D उत्पादन को सक्रिय करने का एकमात्र प्राकृतिक स्रोत है. जब सुबह की हल्की किरणें हमारी त्वचा पर पड़ती हैं, तो शरीर में मेटाबॉलिक फंक्शन बेहतर होते हैं, जिससे न केवल हड्डियां मजबूत होती हैं, बल्कि जोड़ों के दर्द में भी राहत मिलती है. विटामिन डी कैल्शियम के अवशोषण के लिए जरूरी है, जिसके बिना शरीर की संरचना कमजोर हो सकती है. इसके अलावा नियमित रूप से सही समय पर धूप लेने से दिल की सेहत में सुधार होता है और ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है. यह वजन प्रबंधन और शरीर की आंतरिक हीलिंग प्रक्रिया को भी तेज करता है, जो बिना किसी दवा के शरीर को भीतर से मजबूत बनाता है. धूप का असर सिर्फ शरीर पर ही नहीं, बल्कि हमारे ब्रेन पर भी गहरा पड़ता है. सुबह की सुनहरी धूप में समय बिताने से शरीर में सेरोटोनिन नामक हार्मोन का स्तर बढ़ता है, जिसे फील-गुड हार्मोन भी कहा जाता है. यह हार्मोन सीधे तौर पर हमारे मूड को बेहतर बनाने, डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने और एंजायटी से राहत दिलाने में सहायक होता है. जो लोग सुबह की धूप का आनंद लेते हैं, उनमें एनर्जी लेवल दिन भर बना रहता है और उनकी एकाग्रता की क्षमता भी बढ़ती है. मानसिक शांति और खुशहाली के लिए सूरज की रोशनी एक प्राकृतिक एंटी-डिप्रेसेंट की तरह काम करती है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. गर्मियों में धूप के फायदे उठाने के लिए सही समय जरूरी है. विशेषज्ञों के अनुसार सूर्योदय के बाद से लेकर सुबह 9 बजे तक की धूप विटामिन डी के लिए सबसे प्रभावी और सुरक्षित मानी जाती है. इस दौरान अल्ट्रावॉयलेट बी किरणें कम हानिकारक होती हैं. गर्मियों में केवल 10 से 20 मिनट की धूप ही पर्याप्त होती है, इससे अधिक समय तक धूप में रहने से सनबर्न, त्वचा में जलन या एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है. धूप लेते समय अपने हाथ, पैर और चेहरे को खुला रखें, ताकि त्वचा किरणों को अवशोषित कर सके, लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि ओवर एक्सपोजर से बचने के लिए कम समय ही काफी है. गर्मियों की दोपहर यानी 12 बजे से शाम 4 बजे तक की तेज धूप से बचना अत्यंत आवश्यक है, क्योंकि इस समय किरणें सबसे ज्यादा हानिकारक होती हैं. धूप का लाभ लेने के लिए सुबह की सैर करें या बालकनी में बैठें. बाहर निकलते समय हल्के रंग के सूती कपड़े पहनें, चेहरे पर सनस्क्रीन लगाएं और आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा या टोपी का इस्तेमाल करें. चूंकि धूप शरीर में गर्मी बढ़ाती है, इसलिए भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें ताकि डिहाइड्रेशन न हो. इन छोटी-छोटी सावधानियों को अपनाकर आप गर्मियों में भी सूरज की रोशनी का वरदान पा सकते हैं और अपनी सेहत व मूड दोनों को शानदार बना सकते हैं. (Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

नवजातों के लिए ‘पहला टीका’ बनेगा मां का दूध:सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक; हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नवजातों के लिए ‘पहला टीका’ बनेगा मां का दूध:सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक; हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई बार बीमारी या अन्य कारणों से मां अपने नवजात को स्तनपान नहीं करा पाती। ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है। हमीदिया अस्पताल में यह नई सुविधा शुरू करने की टेंटेटिव डेट 17 मार्च तय की गई है। इसके अनुसार ही तैयारियां चल रहीं हैं। इसके शुरू होते ही भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया का अकेला शहर होगा, जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक होंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द शुरू होगी नई सुविधा राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां सिविल वर्क तेजी से चल रहा है और अगले लगभग 10 दिनों में इसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद आवश्यक मशीनें और उपकरण स्थापित कर मिल्क बैंक को शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक मार्च माह के भीतर इस सुविधा को शुरू करने की योजना है, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर मां के दूध का लाभ मिल सकेगा। कब नवजात को दिया जाता है मिल्क बैंक का दूध भोपाल में होंगे तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 2018 में भोपाल और इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि शुरुआत केवल भोपाल के जेपी अस्पताल में ही हो सकी। इसके बाद एम्स भोपाल में भी यह सुविधा शुरू की गई। अब हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक शुरू होने के साथ राजधानी भोपाल देश का ऐसा शहर बन जाएगा जहां तीन सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नवजातों की देखभाल और पोषण व्यवस्था और मजबूत होगी। सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद बनी योजना दरअसल, सुलतानियां अस्पताल को हमीदिया परिसर में स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां नवजात और मातृत्व सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल में आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर शुरू करने की भी योजना है। ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंक ह्यूमन मिल्क बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूध को लगभग -30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। एक मिल्क बैंक में करीब 50 से 60 लीटर तक दूध संरक्षित किया जा सकता है। यहां मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, मिल्क स्टोरेज यूनिट और आधुनिक स्टरलाइजेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस बैंक में महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पोषण मिल सके। किन बच्चों को दिया जाता है यह दूध ह्यूमन मिल्क बैंक में संग्रहित दूध उन नवजात शिशुओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी होता है जो समय से पहले यानी प्री-मेच्योर पैदा होते हैं। इसके अलावा एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती बच्चों को भी यह दूध दिया जाता है। यदि किसी मां को गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में रखना पड़े और वह अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सके, तब भी मिल्क बैंक का दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है। मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे नवजात शिशु का पहला टीका भी कहा जाता है। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है। हर अस्पताल में नहीं खुल सकता मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के अनुसार किसी भी अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक तभी खोला जा सकता है, जब उस अस्पताल में हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए केंद्र स्तर से अनुमति मिलती है और अस्पताल के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि हमीदिया अस्पताल में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है, इसलिए जल्द ही यहां मिल्क बैंक की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नवजातों के लिए बनेगा जीवनदायी सहारा ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा शुरू होने से उन नवजात शिशुओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है। राजधानी में तीन सरकारी मिल्क बैंक शुरू होने से भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर सकता है। नवजात के जरूरी मां का दूध

फर्नीचर का राजा और दवा का खजाना है शीशम! पत्ते-बीज भी आते हैं कई रोगों में काम, जानें फायदे

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Last Updated:March 10, 2026, 11:36 IST Sheesham ke Fayde: शीशम का पेड़ सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए ही नहीं बल्कि अपने औषधीय गुणों के लिए भी जाना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार इसके पत्ते, बीज और लकड़ी से निकलने वाला तेल कई बीमारियों में उपयोगी माना जाता है. पेट की समस्याओं, त्वचा रोग और अनीमिया जैसी परेशानियों में इसके उपयोग से राहत मिल सकती है. इसके साथ ही शीशम की खेती किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरिया बन सकती है क्योंकि इसकी लकड़ी की बाजार में काफी मांग रहती है. जानिए शीशम के फायदे, औषधीय उपयोग और इसकी खेती से जुड़ी पूरी जानकारी. Sheesham Tree Benefits: मध्य प्रदेश के विंध्य क्षेत्र में शीशम का पेड़ आसानी से देखने को मिल जाता है. आमतौर पर लोग इसे सिर्फ मजबूत लकड़ी के लिए जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि यह पेड़ औषधीय गुणों से भी भरपूर होता है. दरअसल शीशम का इस्तेमाल सिर्फ फर्नीचर या घर बनाने में ही नहीं, बल्कि आयुर्वेद में भी कई समस्याओं के इलाज के लिए किया जाता है. इसके पत्ते, बीज, जड़ और लकड़ी तक कई तरह से उपयोगी माने जाते हैं. मजबूत लकड़ी की वजह से रहती है भारी मांगआयुर्वेदिक चिकित्साधिकारी डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि शीशम का पेड़ देश के लगभग हर हिस्से में पाया जाता है. इसकी लकड़ी काफी मजबूत और टिकाऊ होती है. इसी वजह से इसका इस्तेमाल दरवाजे, खिड़कियां, फर्नीचर और सजावटी लकड़ी के सामान बनाने में बड़े पैमाने पर किया जाता है. शीशम की लकड़ी की खास बात यह है कि इस पर पानी और दीमक का असर बहुत कम होता है, इसलिए बाजार में इसकी मांग हमेशा बनी रहती है. कई बीमारियों में फायदेमंद माना जाता हैडॉ. विपिन सिंह के मुताबिक शीशम में कई तरह के औषधीय गुण भी पाए जाते हैं. इसके बीज और लकड़ी से निकलने वाले तेल का उपयोग पेट से जुड़ी कई समस्याओं में किया जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह दस्त, हैजा और बवासीर जैसी परेशानियों में राहत देने में मदद कर सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण पेट में होने वाले अल्सर में भी लाभकारी माना जाता है. पत्ते भी शरीर के लिए फायदेमंदशीशम के पत्ते भी स्वास्थ्य के लिए काफी उपयोगी माने जाते हैं. डॉ. विपिन सिंह बताते हैं कि इसके पत्तों का सेवन करने से शरीर को पोषण मिलता है और अनीमिया जैसी समस्या में भी फायदा हो सकता है. इसके अलावा शीशम का तेल घाव भरने में मदद करता है. अगर त्वचा पर खुजली, जलन या ड्राइनेस की समस्या हो तो इसका तेल लगाने से आराम मिल सकता है. इस्तेमाल करना भी है बेहद आसानशीशम का इस्तेमाल करना ज्यादा मुश्किल नहीं है. इसके ताजे पत्तों को चबाकर निगलने से भी फायदा मिल सकता है. इसके अलावा बीजों का चूर्ण बनाकर सेवन किया जा सकता है. वहीं लकड़ी से निकाला गया तेल भी कई समस्याओं में उपयोग किया जाता है. किसानों के लिए भी कमाई का अच्छा जरियाऔषधीय गुणों के साथ-साथ शीशम किसानों के लिए कमाई का अच्छा विकल्प भी बन सकता है. इसकी लकड़ी की मांग फर्नीचर इंडस्ट्री और निर्माण कार्यों में हमेशा बनी रहती है. एक बार शीशम का पौधा लगाने के बाद यह करीब 10 से 12 साल में पूरी तरह तैयार हो जाता है. किसान चाहें तो इसकी शाखाओं को काटकर हर 4 से 5 साल में भी लकड़ी बेच सकते हैं, जिससे समय-समय पर अच्छी आमदनी होती रहती है. एक हेक्टेयर में लग सकते हैं 500 पौधेकृषि विशेषज्ञों के अनुसार एक हेक्टेयर जमीन में लगभग 400 से 500 शीशम के पौधे लगाए जा सकते हैं. जब पेड़ पूरी तरह विकसित हो जाता है तो एक पेड़ से करीब 3 से 5 क्यूबिक फीट लकड़ी मिल सकती है. इसी वजह से शीशम की खेती किसानों के लिए लंबे समय में अच्छा मुनाफा देने वाला विकल्प बन सकती है. About the Author Shweta Singh Shweta Singh, currently working with News18MPCG (Digital), has been crafting impactful stories in digital journalism for more than two years. From hyperlocal issues to politics, crime, astrology, and lifestyle,…और पढ़ें Location : Sidhi,Madhya Pradesh First Published : March 10, 2026, 11:36 IST

क्या बैंगन, शिमला मिर्च और पत्तागोभी में नुकसानदायक लेड पाया जाता है? ये सेफ्टी टिप्स जो आपको करने चाहिए फॉलो

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Last Updated:March 10, 2026, 10:56 IST Health Tips: सब्जियों को अक्सर हेल्दी डाइट का एक ज़रूरी हिस्सा माना जाता है. लेकिन क्या वे हमेशा सेफ़ होती हैं? हाल ही में हुई एक स्टडी ने गंभीर चिंताएं जताई हैं. बेंगलुरु और उसके आस-पास के बाज़ारों से इकट्ठा किए गए 72 सब्जियों के सैंपल में से 19 में लेड पाया गया, जो एक ज़हरीला हेवी मेटल है और इंसानी सेहत के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है. Health Tips : सब्जियों के सैंपल का एनालिसिस फ़ूड सेफ़्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ़ इंडिया (FSSAI) की देखरेख वाली लैब में किया गया. क्वेश्चनेयर में 11 हेवी मेटल, 3 ज़रूरी मिनरल और लगभग 230 तरह के पेस्टिसाइड का टेस्ट किया गया. जिन सब्जियों में सेफ़ लेवल से ज़्यादा लेड पाया गया, उनमें बैंगन में सबसे ज़्यादा कंसंट्रेशन था. दूसरी सब्जियों में लौकी, मूली, चुकंदर, पत्तागोभी, शिमला मिर्च, मिर्च, खीरा, जूट के पत्ते, नोल खोल और कद्दू शामिल थे. लेड टेस्टिंग के अलावा, 70 सब्जियों के सैंपल का पेस्टिसाइड के लिए भी टेस्ट किया गया। चिंता की बात यह है कि इनमें से 10 सैंपल में पेस्टिसाइड का लेवल तय लिमिट से ज़्यादा था, जिससे फ़ूड सेफ़्टी को लेकर और चिंताएं बढ़ गईं. अनुभवी लोगों ने बताया कि जब लेड मिट्टी या पानी को गंदा करता है, तो पौधे इसे अपनी सब्ज़ियों के ज़रिए सोख लेते हैं. एक बार निगल जाने पर, यह मेटल सब्ज़ियों के बीजों का हिस्सा बन जाता है, जिसका मतलब है कि सिर्फ़ धोने या छीलने से इसे हटाया नहीं जा सकता. Add News18 as Preferred Source on Google लेड इंसानों के लिए बहुत ज़हरीला होता है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइज़ेशन (WHO) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 2021 में दुनिया भर में लेड के संपर्क में आने से 1.5 मिलियन से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए, जिनमें से कई दिल की बीमारियों से जुड़े थे। बच्चों को खास तौर पर खतरा होता है, क्योंकि लेड का ज़्यादा लेवल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुँचा सकता है, दिमाग के विकास में रुकावट डाल सकता है और सोचने-समझने की क्षमता को कम कर सकता है. लेड के संपर्क को कम करने के कुछ सेफ़्टी उपाय. सब्ज़ियों से अंदर की गंदगी को पूरी तरह से हटाना हमेशा मुमकिन नहीं होता, लेकिन उन्हें अच्छी तरह धोने से ऊपर की धूल और कुछ नुकसानदायक बचे हुए हिस्से हटाने में मदद मिल सकती है. माता-पिता को यह भी पक्का करना चाहिए कि उनके बच्चों को आयरन, कैल्शियम और विटामिन C से भरपूर बैलेंस्ड डाइट मिले, क्योंकि ये न्यूट्रिएंट्स शरीर पर लेड के नुकसानदायक असर को कम करने में मदद करते हैं. रेगुलर हेल्थ चेकअप और समय पर टेस्टिंग बहुत ज़रूरी है, खासकर अगर खराब खाना या पानी पीने की संभावना हो. First Published : March 10, 2026, 10:56 IST

किसान की बेटी की शादी में पहुंचे राहुल गांधी:सोनीपत में बालूशाही देखकर बोले- ये क्या है, चूरमा खाया, ब्याह के गीत सुने

किसान की बेटी की शादी में पहुंचे राहुल गांधी:सोनीपत में बालूशाही देखकर बोले- ये क्या है, चूरमा खाया, ब्याह के गीत सुने

कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार सुबह सोनीपत के मदीना गांव में एक किसान की बेटी की शादी में शामिल होने पहुंचे। ये वही किसान संजय मलिक हैं, जिनके खेत में राहुल ने तीन साल पहले ट्रैक्टर चलाया था। साथ ही धान रोपाई की थी। सुबह करीब सवा 10 बजे जैसे ही राहुल गांव में अपनी कार से उतरे उनके हाथ से मोबाइल गिर गया। सिक्योरिटी टीम के साथ राहुल ने झुककर उसे उठाया। यहां, रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा समेत कई नेता और मेजबान घराती बुके लेकर स्वागत के लिए खड़े थे। राहुल का हरियाणवी पगड़ी पहना कर स्वागत किया गया। जब राहुल शादी वाले घर में जाने लगे तो दरवाजे पर खड़े युवकों ने जोर से कहा- राहुल भाई राम-राम। राहुल हाथ जोड़कर मुस्कराए और आगे बढ़ गए। राहुल करीब एक घंटे तक रुके। इस दौरान दूध के साथ चूरमा खाया। किसान की बेटी के हाथों मिस्सी रोटी भी खाई। महिलाओं के ब्याह के गीत सुने। अब देखिए राहुल के दौरे से जुड़े PHOTOS… मदीना में सुबह 10ः10 बजे पहुंचे, एक घंटा रुके किसान संजय की बेटी तनु की शादी में राहुल सुबह 10 बजकर 10 मिनट पर पहुंचे। यहां करीब एक घंटा रुके। बीकॉम पास तनु की बारात मंगलवार शाम को रोहतक के सुंदरनगर से आएगी। तनु की शादी सुनील के साथ तय है। एमए (इंग्लिश) पास सुनील क्रिकेटर भी हैं। तुन की छोटी बहन सारिता और भाई दीपक हैं। 3 पॉइंट में पढ़िए राहुल के दौरे की खास बातें… उम्मीद नहीं थी राहुल आएंगे किसान संजय 25 फरवरी को बड़े भाई और गांव के सरपंच के साथ दिल्ली में राहुल गांधी को शादी का न्योता देकर आए थे। भांजी कीर्ति जाखड़ बोलीं- हमें उम्मीद नहीं थी कि राहुल गांधी आएंगे। अचानक उनके आने का कार्यक्रम पता चला। उस वक्त हम शगुन के गीत गा रहीं थी। सारे मेहमान राहुल को देखकर खुश हो गए। राहुल का पूरा मान-सम्मान किया और हरियाणवी सम्मान का प्रतीक पगड़ी पहनाई। राहुल ने काफी देर सिर पर पगड़ी रखी। गिफ्ट में 55 इंच की LED टीवी और शगुन दिया राहुल गांधी की ओर से एक दिन पहले ही शादी के गिफ्ट के तौर पर 55 इंच की LED टीवी पहुंचाया गया था। मंगलवार को उन्होंने लिफाफे में तनु को शगुन भी दिया। तनु की मम्मी सुनीता ने कहा कि उनके लिए यही बहुत बड़ी बात है कि राहुल हमारे यहां आए। तनु से पूछा- कहां शादी कर रहे हो, क्या पढ़ाई कर रहे तुन ने बताया कि राहुल ने मुझे पूछा- कहां शादी हो रही है। क्या पढ़ाई कर रहे हो। पहले दूध के साथ चूरमा खाया। फिर टैंट में गए, जहां प्रीति-भोज का इंतजाम था। इस दौरान राहुल ने तनु के हाथों से मिस्सी रोटी का कोर भी खाया। राहुल ने बालूशाही व लाडू (लड्डू) खाया। राहुल ने कहा-खुश रहना। दामण-कुर्ता के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान उन्हें शादी समारोह में बन रही जलेबी भी देखी। अपने हाथ से दीपेंद्र हुड्डा और तनु के पिता संजय को जलेबी खिलाई। दीपेंद्र बोले- राहुल गांधी ने अपना वचन निभाया रोहतक सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा कि राहुल गांधी ने साधारण किसान की बेटी की शादी में पहुंचकर अपना वचन निभाया है। धनाढ्य लोगों की शादी में तो सभी नेता पहुंच जाते हैं, लेकिन एक साधारण किसान के घर पहुंचकर राहुल ने अपनी सोच दिखाई है। दीपेंद्र ने बताया कि संजय भाई सिर्फ आधा एकड़ जमीन के मालिक हैं। राहुल ने उनसे खेती-बाड़ी पर भी चर्चा की। कहने लगे कि आजकल खेतों में पेस्टिसाइड्स ज्यादा डालने लगे हैं, जिससे खान-पान अच्छा नहीं रहा है। राहुल की पोस्ट- परिवार वाली मोहब्बत और बहुत ही स्वादिष्ट खाना शादी समारोह से लौटने के बाद राहुल गांधी ने सोशल मीडिया एकाउंट पर फोटो शेयर करते हुए लिखा- ”हरियाणा में किसान भाई संजय मलिक जी की बेटी, तनु की शादी में उनके निमंत्रण पर पहुंचा। बहुत आत्मीय स्वागत, परिवार वाली मोहब्बत और बहुत ही स्वादिष्ट खाना – वो तो होना ही था, अन्नदाता के घर का भोज जो था। नवविवाहित दंपत्ति को ढेर सारा प्यार और शुभकामनाएं। उनके खुशहाल वैवाहिक जीवन की कामना करता हूं। संजय जी और पूरे परिवार को बहुत बहुत बधाई।’ अब देखिए राहुल के 3 साल पुराने दौरे के PHOTOS… अब पढ़िए…गांव से कैसे हुआ राहुल का संपर्क

क्या है टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज, ये कितनी खतरनाक, अधिकतर लोग इस बारे में जानते ही नहीं !

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All About Type 3 and 4 Diabetes: डायबिटीज एक क्रोनिक डिजीज है, जिससे दुनियाभर में करोड़ों लोग जूझ रहे हैं. अक्सर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज की चर्चा होती है. टाइप 1 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन नहीं बना पाता है और टाइप 2 डायबिटीज में शरीर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता है. इन दोनों ही कंडीशन में ब्लड शुगर लेवल अनकंट्रोल होने लगता है. टाइप 2 डायबिटीज को लाइफस्टाइल डिजीज भी माना जाता है. अधिकतर लोग इन दोनों डायबिटीज के बारे में जानते हैं, लेकिन क्या आपने कभी टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज के बारे में सुना है? अगर आपने इन दोनों बीमारियों के बारे में नहीं सुना है, तो आज आपको इस बारे में विस्तार से बता रहे हैं. इन दोनों परेशानियों के बारे में जानना भी बेहद जरूरी है. क्या है टाइप 3 डायबिटीज? सेहत से जुड़ी प्रमाणिक जानकारी देने वाली वेबसाइट हेल्थलाइन की रिपोर्ट के मुताबिक टाइप 3 डायबिटीज एक ऐसा शब्द है, जिसका इस्तेमाल अल्जाइमर डिजीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस के बीच संबंध बताने के लिए किया जाता है. जब हमारे ब्रेन की सेल्स इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो ब्रेन को पर्याप्त एनर्जी नहीं मिल पाती है. इंसुलिन न केवल ब्लड शुगर को कंट्रोल करता है, बल्कि यह ब्रेन की कोशिकाओं के बीच कम्युनिकेशन और याददाश्त के लिए भी जरूरी है. जब ब्रेन में इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा होता है, तो वहां हानिकारक प्रोटीन जमा होने लगते हैं, जो याददाश्त खोने और भ्रम की स्थिति पैदा करते हैं. इस कंडीशन को आधिकारिक तौर पर टाइप 3 डायबिटीज नहीं कहा जाता है, लेकिन यह एक प्रचलित शब्द बन चुका है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. क्या है टाइप 4 डायबिटीज? जब बुजुर्ग लोगों में इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण डायबिटीज की कंडीशन पैदा हो जाती है, तब उसे टाइप 4 डायबिटीज कहा जाता है. कई बुजुर्गों का वजन भी कम होता है और उनकी लाइफस्टाइल भी ठीक होती है, लेकिन फिर भी वे इंसुलिन रेजिस्टेंस के शिकार हो जाते हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार यह स्थिति उम्र बढ़ने के कारण पैदा होती है. जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, शरीर में टी-रेगुलेटरी सेल्स की संख्या बढ़ने लगती है, जो शरीर के फैट टिश्यू में इंसुलिन के काम को बाधित करती हैं. यह टाइप 2 डायबिटीज से इसलिए अलग है, क्योंकि इसमें मोटापा कारण नहीं होता, बल्कि शरीर की आंतरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता में उम्र के साथ होने वाले बदलाव जिम्मेदार होते हैं. ये डायबिटीज कितनी खतरनाक हैं? हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो ये दोनों ही बीमारियां इसलिए खतरनाक हैं, क्योंकि इनके लक्षण सामान्य टाइप 1 और 2 डायबिटीज जैसे नहीं होते हैं. टाइप 3 डायबिटीज सीधे तौर पर डिमेंशिया और अल्जाइमर की ओर ले जाती है, जिसका वर्तमान में कोई सटीक इलाज नहीं है. वहीं टाइप 4 डायबिटीज को अक्सर लोग बुढ़ापे की सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे धीरे-धीरे शरीर के महत्वपूर्ण अंग जैसे किडनी और हार्ट प्रभावित होने लगते हैं. इनके बारे में आम लोगों में जागरुकता कम है, इसलिए इनका डायग्नोसिस अक्सर बहुत देरी से होता है, जब स्थिति गंभीर हो चुकी होती है. किस टेस्ट से लगाया जाता है पता? टाइप 3 और टाइप 4 डायबिटीज की पहचान करना सामान्य ब्लड शुगर टेस्ट या HbA1c से थोड़ा जटिल हो सकता है. टाइप 3 के मामले में व्यक्ति का शरीरिक शुगर लेवल सामान्य हो सकता है, लेकिन उसके ब्रेन में इंसुलिन का स्तर गड़बड़ हो सकता है, जिसके लिए कॉग्निटिव टेस्ट और स्पेशल इमेजिंग की जरूरत होती है. टाइप 4 के मरीजों में अक्सर लीन डायबिटीज देखी जाती है, जहां व्यक्ति दुबला-पतला होने के बावजूद हाई शुगर का शिकार होता है. एक्सपर्ट्स की मानें तो अगर उम्र के साथ याददाश्त कमजोर हो रही है या बिना किसी कारण के शुगर लेवल बढ़ रहा है, तो इस बारे में डॉक्टर से कंसल्ट करना चाहिए.

लाइव कॉन्सर्ट में रो पड़ीं सुनिधि चौहान:गले में खराश की वजह से आवाज खराब हुई, फैंस से मांगी माफी; कहा- 100% देना चाहती थी

लाइव कॉन्सर्ट में रो पड़ीं सुनिधि चौहान:गले में खराश की वजह से आवाज खराब हुई, फैंस से मांगी माफी; कहा- 100% देना चाहती थी

भारत की मशहूर सिंगर सुनिधि चौहान इन दिनों अपने इंडिया म्यूजिकल टूर पर हैं। इसी दौरान लखनऊ में हुए एक कॉन्सर्ट में वे स्टेज पर रो पड़ीं। तबीयत खराब होने और गले में गंभीर समस्या के बावजूद सुनिधि परफॉर्मेंस देने पहुंची थीं, लेकिन आवाज साथ नहीं देने पर उनकी आंखों से आंसू निकल आए। सुनिधि ने हजारों की भीड़ के सामने अपनी खराब परफॉर्मेंस के लिए माफी भी मांगी। 7 मार्च को लखनऊ के कूलब्रीज रिसॉर्ट्स में सुनिधि का ‘आई एम होम इंडिया टूर 2025-26 का इवेंट था। सुनिधि ब्लैक कलर के बॉडीसूट में स्टेज पर आईं, लेकिन गले में खराश के कारण उन्हें गाने में काफी दिक्कत हो रही थी। अब उनके रोने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि सुनिधि गाते-गाते रुक जाती हैं और रोने लगती हैं। हालांकि, फैंस ने उनका हौसला बढ़ाने के लिए लगातार चीयर किया। सुनिधि बोलीं- आज मेरी आवाज बहुत खराब सुनिधि ने स्टेज से फैंस को संबोधित करते हुए कहा, ‘मेरा गला बहुत खराब है। आज मेरी आवाज बहुत ज्यादा खराब है, लेकिन मुझे पता है कि आप मेरे साथ हैं। मेरे साथ ऐसा पहले कभी नहीं हुआ, यह बहुत शर्मनाक है। मुझे बहुत खेद है, मैं हमेशा अपना 100% देना चाहती हूं।’ सुनिधि ने आगे कहा कि वे कोशिश कर रही हैं, लेकिन शायद परफॉर्मेंस वैसी न हो पाए जैसा उन्होंने सोचा था। मुंबई से शुरू हुआ था ‘आई एम होम’ टूर सुनिधि का यह ‘आई एम होम’ इंडिया टूर 24 दिसंबर 2025 को मुंबई से शुरू हुआ था। इसके तहत वे अब तक दिल्ली, बेंगलुरु, अहमदाबाद और चेन्नई जैसे बड़े शहरों में लाइव शो कर चुकी हैं। लखनऊ के इस कॉन्सर्ट को लेकर फैंस काफी एक्साइटेड थे, लेकिन सुनिधि की खराब सेहत ने इस शाम को मुश्किल बना दिया। दो दशक से इंडस्ट्री की टॉप सिंगर हैं सुनिधि सुनिधि चौहान पिछले 20 सालों से बॉलीवुड की टॉप सिंगर्स में शामिल हैं। उन्होंने ‘शीला की जवानी’, ‘कमली’ और ‘बीड़ी जलइले’ जैसे कई सुपरहिट गाने दिए हैं। सुनिधि की पर्सनल लाइफ की बात करें तो उन्होंने साल 2012 में हितेश सोनिक से शादी की थी और 2018 में उनके घर बेटे का जन्म हुआ।

कोठीबाजार में 40 दुकानदारों पर कार्रवाई:बैतूल में सड़क घेरकर दुकान चलाने पर केस दर्ज

कोठीबाजार में 40 दुकानदारों पर कार्रवाई:बैतूल में सड़क घेरकर दुकान चलाने पर केस दर्ज

बैतूल शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए कोतवाली पुलिस ने सोमवार देर रात कोठी बाजार क्षेत्र में कार्रवाई की। इस दौरान सड़क पर दुकान का सामान फैलाकर रास्ता बाधित करने वाले करीब 40 दुकानदारों के खिलाफ मध्यप्रदेश पुलिस अधिनियम की धारा 34 के तहत प्रकरण दर्ज किए गए। थाना चौक से बस स्टैंड तक हुआ निरीक्षण पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन के निर्देश पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कमला जोशी और एसडीओपी सुनील लाटा के मार्गदर्शन में कोतवाली थाना प्रभारी देवकरण डेहरिया ने पुलिस बल के साथ कोठी बाजार में थाना चौक से बस स्टैंड तक निरीक्षण किया। जांच के दौरान कई दुकानदार अपनी दुकानों का सामान सड़क तक फैलाकर रखते पाए गए, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा था। पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने शहर के व्यापारियों और नागरिकों से यातायात व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि दुकानदार अपना सामान दुकान की सीमा के भीतर ही रखें और सड़क पर सामान या बोर्ड रखकर रास्ता बाधित न करें। अतिक्रमण पर होगी कार्रवाई एसपी ने कहा कि सड़क पर अतिक्रमण से लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ जाता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर कोई भी व्यक्ति सड़क पर अतिक्रमण कर यातायात में बाधा उत्पन्न करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।