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बेहरुजबेक टूचिव की जटिल स्पाइन सर्जरी मैक्स हॉस्पिटल में सफल.

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उज्बेकिस्तान के 16 वर्षीय बेहरुजबेक टूचिव रीढ़ की हड्डी की सफल सर्जरी की गई है. इस लड़के को पर‍िवारी बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल लेकर आया था. जहां डॉ. जितेश मंगवानी की टीम ने सफल सर्जरी कर राहत दी.

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द‍िल्‍ली मैक्‍स में उज्‍बेक‍िस्‍तान से आए मरीज की सफल सर्जरी की गई.

कुछ दिन पहले उज्बेकिस्तान से 16 साल का लड़का बेहरुजबेक टूचिव भारत आया. वह अपने परिवार के साथ यहां घूमने नहीं आया था बल्कि एक बेहद जटिल बीमारी को लेकर आया, जिसमें उसकी रीढ़ की हड्डी मुड़ गई थी और उसकी पीठ पर एक कूबड़ उभर आया था. उसकी हालत इतनी खराब थी कि न तो वह चल सकता था और न ही सीधा खड़ा हो सकता था. यहां तक कि दर्द के चलते वह बिस्तर पर पीठ के बल सो भी नहीं सकता था.

भारत के अस्पतालों और डॉक्टरों के बारे में जानकारी करने के बाद यहां दिल्ली आया परिवार शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचा, जहां मरीज को देखकर एकबारगी डॉक्टरों को भी अचंभा हुआ क्योंकि इस मरीज की कमर पिछले पांच साल से ज्यादा समय से मुड़ी हुई थी और दो बार उज्बेकिस्तान में र्की गई सर्जरी फेल हो गई थीं. दूसरी सर्जरी के बाद भी हड्डी का मुड़ना बंद नहीं हो रहा था.ऐसे में यह बड़ी चुनौती थी कि पहले से दो बार ऑपरेट हो चुकी स्पाइन को पूरी तरह ठीक किया जाए.

हालांकि मरीज को देखने के बाद ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. जितेश मंगवानी और डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि उसकी रीढ़ की हड्डी बहुत सख्त और मुड़ी हुई (काइफोस्कोलिओसिस) थी, जिसके कारण कूबड़ निकल गया था और शारीरिक संतुलन बिगड़ गया था. रीढ़ की हड्डी को सीधा करने के लिए प्लान्ड रिवीजन डीफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी कराने की सलाह दी गई. इस बार चुनौती इसलिए भी ज्यादा बड़ी थी, क्योंकि उनकी रीढ़ की हड्डी पर पहले ही दो बार ऑपरेशन हो चुका था. इन ऑपरेशंस के कारण हड्डी बहुत सख्त हो गई थी और चारों ओर स्कार टिश्यू बन गए थे. सर्जरी के दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधा और स्थिर करने के लिए विशेष स्क्रू एवं रॉड का प्रयोग किया गया. साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग की गई.

इसके बाद उसकी रीढ़ (स्पाइन) की बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. अस्पताल में हुई सफल सर्जरी से अब वह किशोर फिर से सीधे खड़े होने और चलने में सक्षम हो गया. इतना ही नहीं उसे लगातार दर्द से राहत मिली और उसके लिए सामान्य जीवन में लौटना और आत्मविश्वास के साथ चलना भी संभव हुआ.

इस मामले को लेकर डॉ. जितेश मंगवानी ने कहा , ‘स्पाइन सर्जरी के मामले में पहले हो चुकी सर्जरी के बाद रिवीजन स्पाइन डीफॉर्मिटी करेक्शन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे मामलों में पहले की सर्जरी के कारण रीढ़ की हड्डी सख्त हो जाती है और महत्वपूर्ण जगहों पर स्कार टिश्यू बन जाते हैं. इससे खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. इस मामले में सावधानी के साथ योजना बनाते हुए, सटीक तकनीक की मदद से और लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग करते हुए हम रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित तरीके से सीधा करने में सक्षम रहे. सर्जरी के अगले ही दिन मरीज सीधा खड़ा होने और चलने में सक्षम हो गया. इससे उसे आराम, संतुलन और आत्मविश्वास वापस मिला.’

सर्जरी के बाद, एक्स-रे से पता चला कि मरीज के शोल्डर एवं पेल्विस का अलाइनमेंट सही हो गया है. अगले ही दिन वह बिना किसी सहारे के चलने लगा. सर्जरी के तुरंत बाद फिजियोथेरेपी, सांस से संबंधित कुछ व्यायाम और पोश्चर ट्रेनिंग की शुरुआत कर दी गई और स्थिति स्थिर होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. किशोर को पोश्चर का ध्यान रखने और फॉलो-अप को लेकर स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं. रीढ़ की हड्डी से संबंधित ऐसे जटिल उपचारों (कॉम्प्लेक्स स्पाइन करेक्शन) के साथ मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने स्पाइन डीफॉर्मिटी के चुनौतीपूर्ण मामलों के मैनेजमेंट में अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ाया है. इससे मरीजों को अधिक आरामदायक एवं सक्रिय जीवन देना संभव हुआ है.

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प्रिया गौतमSenior Correspondent

प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें

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बेहरुजबेक टूचिव की जटिल स्पाइन सर्जरी मैक्स हॉस्पिटल में सफल.

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उज्बेकिस्तान के 16 वर्षीय बेहरुजबेक टूचिव रीढ़ की हड्डी की सफल सर्जरी की गई है. इस लड़के को पर‍िवारी बीमारी के इलाज के लिए दिल्ली के मैक्स हॉस्पिटल लेकर आया था. जहां डॉ. जितेश मंगवानी की टीम ने सफल सर्जरी कर राहत दी.

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द‍िल्‍ली मैक्‍स में उज्‍बेक‍िस्‍तान से आए मरीज की सफल सर्जरी की गई.

कुछ दिन पहले उज्बेकिस्तान से 16 साल का लड़का बेहरुजबेक टूचिव भारत आया. वह अपने परिवार के साथ यहां घूमने नहीं आया था बल्कि एक बेहद जटिल बीमारी को लेकर आया, जिसमें उसकी रीढ़ की हड्डी मुड़ गई थी और उसकी पीठ पर एक कूबड़ उभर आया था. उसकी हालत इतनी खराब थी कि न तो वह चल सकता था और न ही सीधा खड़ा हो सकता था. यहां तक कि दर्द के चलते वह बिस्तर पर पीठ के बल सो भी नहीं सकता था.

भारत के अस्पतालों और डॉक्टरों के बारे में जानकारी करने के बाद यहां दिल्ली आया परिवार शालीमार बाग स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल पहुंचा, जहां मरीज को देखकर एकबारगी डॉक्टरों को भी अचंभा हुआ क्योंकि इस मरीज की कमर पिछले पांच साल से ज्यादा समय से मुड़ी हुई थी और दो बार उज्बेकिस्तान में र्की गई सर्जरी फेल हो गई थीं. दूसरी सर्जरी के बाद भी हड्डी का मुड़ना बंद नहीं हो रहा था.ऐसे में यह बड़ी चुनौती थी कि पहले से दो बार ऑपरेट हो चुकी स्पाइन को पूरी तरह ठीक किया जाए.

हालांकि मरीज को देखने के बाद ऑर्थोपेडिक स्पाइन सर्जरी के प्रिंसिपल कंसल्टेंट और यूनिट हेड डॉ. जितेश मंगवानी और डॉक्टरों की टीम ने जांच में पाया कि उसकी रीढ़ की हड्डी बहुत सख्त और मुड़ी हुई (काइफोस्कोलिओसिस) थी, जिसके कारण कूबड़ निकल गया था और शारीरिक संतुलन बिगड़ गया था. रीढ़ की हड्डी को सीधा करने के लिए प्लान्ड रिवीजन डीफॉर्मिटी करेक्शन सर्जरी कराने की सलाह दी गई. इस बार चुनौती इसलिए भी ज्यादा बड़ी थी, क्योंकि उनकी रीढ़ की हड्डी पर पहले ही दो बार ऑपरेशन हो चुका था. इन ऑपरेशंस के कारण हड्डी बहुत सख्त हो गई थी और चारों ओर स्कार टिश्यू बन गए थे. सर्जरी के दौरान रीढ़ की हड्डी को सीधा और स्थिर करने के लिए विशेष स्क्रू एवं रॉड का प्रयोग किया गया. साथ ही सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग की गई.

इसके बाद उसकी रीढ़ (स्पाइन) की बेहद जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. अस्पताल में हुई सफल सर्जरी से अब वह किशोर फिर से सीधे खड़े होने और चलने में सक्षम हो गया. इतना ही नहीं उसे लगातार दर्द से राहत मिली और उसके लिए सामान्य जीवन में लौटना और आत्मविश्वास के साथ चलना भी संभव हुआ.

इस मामले को लेकर डॉ. जितेश मंगवानी ने कहा , ‘स्पाइन सर्जरी के मामले में पहले हो चुकी सर्जरी के बाद रिवीजन स्पाइन डीफॉर्मिटी करेक्शन करना और भी चुनौतीपूर्ण हो जाता है. ऐसे मामलों में पहले की सर्जरी के कारण रीढ़ की हड्डी सख्त हो जाती है और महत्वपूर्ण जगहों पर स्कार टिश्यू बन जाते हैं. इससे खतरा ज्यादा बढ़ जाता है. इस मामले में सावधानी के साथ योजना बनाते हुए, सटीक तकनीक की मदद से और लगातार न्यूरो मॉनिटरिंग करते हुए हम रीढ़ की हड्डी को सुरक्षित तरीके से सीधा करने में सक्षम रहे. सर्जरी के अगले ही दिन मरीज सीधा खड़ा होने और चलने में सक्षम हो गया. इससे उसे आराम, संतुलन और आत्मविश्वास वापस मिला.’

सर्जरी के बाद, एक्स-रे से पता चला कि मरीज के शोल्डर एवं पेल्विस का अलाइनमेंट सही हो गया है. अगले ही दिन वह बिना किसी सहारे के चलने लगा. सर्जरी के तुरंत बाद फिजियोथेरेपी, सांस से संबंधित कुछ व्यायाम और पोश्चर ट्रेनिंग की शुरुआत कर दी गई और स्थिति स्थिर होने के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई. किशोर को पोश्चर का ध्यान रखने और फॉलो-अप को लेकर स्पष्ट निर्देश भी दिए गए हैं. रीढ़ की हड्डी से संबंधित ऐसे जटिल उपचारों (कॉम्प्लेक्स स्पाइन करेक्शन) के साथ मैक्स हॉस्पिटल, शालीमार बाग ने स्पाइन डीफॉर्मिटी के चुनौतीपूर्ण मामलों के मैनेजमेंट में अपनी क्षमताओं को लगातार बढ़ाया है. इससे मरीजों को अधिक आरामदायक एवं सक्रिय जीवन देना संभव हुआ है.

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प्रिया गौतम Hindi.News18.com में बतौर सीन‍ियर हेल्‍थ र‍िपोर्टर काम कर रही हैं. इन्‍हें प‍िछले 14 साल से फील्‍ड में र‍िर्पोर्टिंग का अनुभव प्राप्‍त है. इससे पहले ये ह‍िंदुस्‍तान द‍िल्‍ली, अमर उजाला की कई लोकेशन…और पढ़ें

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