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नवजातों के लिए ‘पहला टीका’ बनेगा मां का दूध:सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक; हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नवजातों के लिए ‘पहला टीका’ बनेगा मां का दूध:सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक; हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई बार बीमारी या अन्य कारणों से मां अपने नवजात को स्तनपान नहीं करा पाती। ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है। हमीदिया अस्पताल में यह नई सुविधा शुरू करने की टेंटेटिव डेट 17 मार्च तय की गई है। इसके अनुसार ही तैयारियां चल रहीं हैं। इसके शुरू होते ही भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया का अकेला शहर होगा, जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक होंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द शुरू होगी नई सुविधा
राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां सिविल वर्क तेजी से चल रहा है और अगले लगभग 10 दिनों में इसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद आवश्यक मशीनें और उपकरण स्थापित कर मिल्क बैंक को शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक मार्च माह के भीतर इस सुविधा को शुरू करने की योजना है, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर मां के दूध का लाभ मिल सकेगा। कब नवजात को दिया जाता है मिल्क बैंक का दूध भोपाल में होंगे तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 2018 में भोपाल और इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि शुरुआत केवल भोपाल के जेपी अस्पताल में ही हो सकी। इसके बाद एम्स भोपाल में भी यह सुविधा शुरू की गई। अब हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक शुरू होने के साथ राजधानी भोपाल देश का ऐसा शहर बन जाएगा जहां तीन सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नवजातों की देखभाल और पोषण व्यवस्था और मजबूत होगी। सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद बनी योजना
दरअसल, सुलतानियां अस्पताल को हमीदिया परिसर में स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां नवजात और मातृत्व सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल में आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर शुरू करने की भी योजना है। ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंक ह्यूमन मिल्क बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूध को लगभग -30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। एक मिल्क बैंक में करीब 50 से 60 लीटर तक दूध संरक्षित किया जा सकता है। यहां मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, मिल्क स्टोरेज यूनिट और आधुनिक स्टरलाइजेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस बैंक में महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पोषण मिल सके। किन बच्चों को दिया जाता है यह दूध ह्यूमन मिल्क बैंक में संग्रहित दूध उन नवजात शिशुओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी होता है जो समय से पहले यानी प्री-मेच्योर पैदा होते हैं। इसके अलावा एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती बच्चों को भी यह दूध दिया जाता है। यदि किसी मां को गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में रखना पड़े और वह अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सके, तब भी मिल्क बैंक का दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है। मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे नवजात शिशु का पहला टीका भी कहा जाता है। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है। हर अस्पताल में नहीं खुल सकता मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के अनुसार किसी भी अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक तभी खोला जा सकता है, जब उस अस्पताल में हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए केंद्र स्तर से अनुमति मिलती है और अस्पताल के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि हमीदिया अस्पताल में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है, इसलिए जल्द ही यहां मिल्क बैंक की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नवजातों के लिए बनेगा जीवनदायी सहारा ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा शुरू होने से उन नवजात शिशुओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है। राजधानी में तीन सरकारी मिल्क बैंक शुरू होने से भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर सकता है। नवजात के जरूरी मां का दूध

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नवजातों के लिए ‘पहला टीका’ बनेगा मां का दूध:सेंट्रल इंडिया में भोपाल अकेला शहर जहां 3 सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक; हमीदिया अस्पताल में इसी महीने शुरू

नवजात शिशु के लिए मां का दूध किसी अमृत से कम नहीं माना जाता। इसमें मौजूद पोषक तत्व और एंटीबॉडी बच्चे को शुरुआती संक्रमणों से बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं। लेकिन कई बार बीमारी या अन्य कारणों से मां अपने नवजात को स्तनपान नहीं करा पाती। ऐसे में बच्चों को वैकल्पिक दूध देना पड़ता है। इसी समस्या को देखते हुए राजधानी भोपाल में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा को विस्तार दिया जा रहा है। एम्स और जेपी अस्पताल के बाद अब हमीदिया अस्पताल में भी ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू होने जा रहा है। हमीदिया अस्पताल में यह नई सुविधा शुरू करने की टेंटेटिव डेट 17 मार्च तय की गई है। इसके अनुसार ही तैयारियां चल रहीं हैं। इसके शुरू होते ही भोपाल देश के उन चुनिंदा शहरों में शामिल होगा जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक उपलब्ध होंगे। इसके साथ ही सेंट्रल इंडिया का अकेला शहर होगा, जहां तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक होंगे। हमीदिया अस्पताल में जल्द शुरू होगी नई सुविधा
राजधानी भोपाल के हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की तैयारी अंतिम चरण में है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार यहां सिविल वर्क तेजी से चल रहा है और अगले लगभग 10 दिनों में इसके पूरा होने की संभावना है। इसके बाद आवश्यक मशीनें और उपकरण स्थापित कर मिल्क बैंक को शुरू कर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक मार्च माह के भीतर इस सुविधा को शुरू करने की योजना है, जिससे नवजात शिशुओं को समय पर मां के दूध का लाभ मिल सकेगा। कब नवजात को दिया जाता है मिल्क बैंक का दूध भोपाल में होंगे तीन सरकारी ह्यूमन मिल्क बैंक
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत 2018 में भोपाल और इंदौर में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने की योजना बनाई गई थी। हालांकि शुरुआत केवल भोपाल के जेपी अस्पताल में ही हो सकी। इसके बाद एम्स भोपाल में भी यह सुविधा शुरू की गई। अब हमीदिया अस्पताल में मिल्क बैंक शुरू होने के साथ राजधानी भोपाल देश का ऐसा शहर बन जाएगा जहां तीन सरकारी अस्पतालों में ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा उपलब्ध होगी। इससे नवजातों की देखभाल और पोषण व्यवस्था और मजबूत होगी। सुलतानियां अस्पताल के शिफ्ट होने के बाद बनी योजना
दरअसल, सुलतानियां अस्पताल को हमीदिया परिसर में स्थानांतरित किए जाने के बाद यहां नवजात और मातृत्व सेवाओं का विस्तार किया गया है। इसी को ध्यान में रखते हुए हमीदिया अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक शुरू करने का प्रस्ताव तैयार किया गया था। यह प्रस्ताव लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग को भेजा गया था, जिसे स्वीकृति मिलने के बाद अब इसे जमीन पर उतारा जा रहा है। इसके साथ ही हमीदिया अस्पताल में आईवीएफ यानी टेस्ट ट्यूब बेबी सेंटर शुरू करने की भी योजना है। ऐसे काम करता है ह्यूमन मिल्क बैंक ह्यूमन मिल्क बैंक में माताओं द्वारा दान किए गए दूध को सुरक्षित तरीके से संग्रहित किया जाता है। इसके लिए विशेष डीप फ्रीजर का उपयोग किया जाता है, जिसमें दूध को लगभग -30 डिग्री सेल्सियस तापमान पर सुरक्षित रखा जाता है। एक मिल्क बैंक में करीब 50 से 60 लीटर तक दूध संरक्षित किया जा सकता है। यहां मेकेनाइज्ड ब्रेस्ट पम्प, मिल्क स्टोरेज यूनिट और आधुनिक स्टरलाइजेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस बैंक में महिलाएं स्वेच्छा से अपना दूध दान कर सकती हैं, जिससे जरूरतमंद नवजात शिशुओं को पोषण मिल सके। किन बच्चों को दिया जाता है यह दूध ह्यूमन मिल्क बैंक में संग्रहित दूध उन नवजात शिशुओं को दिया जाता है, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। यह दूध विशेष रूप से उन बच्चों के लिए उपयोगी होता है जो समय से पहले यानी प्री-मेच्योर पैदा होते हैं। इसके अलावा एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) में भर्ती बच्चों को भी यह दूध दिया जाता है। यदि किसी मां को गंभीर बीमारी के कारण आईसीयू में रखना पड़े और वह अपने बच्चे को स्तनपान नहीं करा सके, तब भी मिल्क बैंक का दूध नवजात के लिए जीवनदायी साबित होता है। मां का दूध नवजात के लिए सबसे जरूरी विशेषज्ञों के अनुसार मां के दूध में प्राकृतिक एंटीबॉडी और पोषक तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। यही कारण है कि इसे नवजात शिशु का पहला टीका भी कहा जाता है। मां का दूध बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करता है और उसे कई संक्रमणों से बचाता है। इसके अलावा यह बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए भी बेहद जरूरी माना जाता है। हर अस्पताल में नहीं खुल सकता मिल्क बैंक हमीदिया अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सुनीत टंडन के अनुसार किसी भी अस्पताल में ह्यूमन मिल्क बैंक तभी खोला जा सकता है, जब उस अस्पताल में हर साल कम से कम 10 हजार से अधिक डिलीवरी होती हों। इसके लिए केंद्र स्तर से अनुमति मिलती है और अस्पताल के डॉक्टरों को विशेष प्रशिक्षण भी दिया जाता है। उन्होंने बताया कि हमीदिया अस्पताल में इन सभी प्रक्रियाओं को पूरा कर लिया गया है, इसलिए जल्द ही यहां मिल्क बैंक की सुविधा शुरू कर दी जाएगी। नवजातों के लिए बनेगा जीवनदायी सहारा ह्यूमन मिल्क बैंक की सुविधा शुरू होने से उन नवजात शिशुओं को बड़ा लाभ मिलेगा, जिन्हें किसी कारण से अपनी मां का दूध नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों का मानना है कि इस सुविधा से नवजात मृत्यु दर को कम करने में भी मदद मिल सकती है। राजधानी में तीन सरकारी मिल्क बैंक शुरू होने से भोपाल नवजात स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनकर उभर सकता है। नवजात के जरूरी मां का दूध

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