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चैंबर में उतरने से कर्मचारियों की मौत की होगी जांच:महापौर बोले-मृतकों के आश्रितों को नौकरी देंगे, दोषियों पर कार्रवाई करेंगे; चैंबर में बगैर संसाधन-किट नहीं उतरते कर्मचारी

चैंबर में उतरने से कर्मचारियों की मौत की होगी जांच:महापौर बोले-मृतकों के आश्रितों को नौकरी देंगे, दोषियों पर कार्रवाई करेंगे; चैंबर में बगैर संसाधन-किट नहीं उतरते कर्मचारी

इंदौर में सोमवार शाम को सीवर टैंक में उतरने से नगर निगम के दो कर्मचारियों की मौत के मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने जांच के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी और मृत कर्मचारियों के आश्रितों को आउटसोर्स पर नौकरी दी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने निगम कर्मचारियों से कहा है कि वे बिना संसाधन व किट के सीवर टैंक में ना उतरें। जोन 13 में चोइथराम मंडी गेट के पास 30 फीट गहरे सीवर टैंक में करण यादव और अजय डोडियार उतरे थे। टैंक के अंदर जहरीली गैस थी, इस कारण उनकी दम घुटने से मौत हो गई थी। जानकारी के अनुसार कर्मचारियों की ड्यूटी शाम 5 बजे तक थी। उस समय मौके पर तीन कर्मचारी मौजूद थे। शाम करीब 6:30 बजे नगर निगम के आउटसोर्स से कार्यरत दो कर्मचारी जोन-13 क्षेत्र में प्राइमरी मेन लाइन में सेफ्टी टैंक की डीवॉटरिंग की जा रही थी, तभी पाइप का टुकड़ा चैंबर में गिरा था उसे वे निकाल रहे थे, तभी ये हादसा हुआ था। आश्रितों को आउटसोर्स पर नौकरी देंगे महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने बताया कि दोनों कर्मचारी आउटसोर्स पर थे। इसलिए हमने दोनों के आश्रितों को आउटसोर्स पर नौकरी देने के लिए कहा है। इस दुख की घड़ी में नगर निगम की पूरी टीम दोनों परिवार के साथ है। घटनाक्रम क्या है, कैसे हुआ है। इसके पीछे कोई दोषी है, इसकी जांच करने के लिए निर्देश दे दिए हैं। सीएम डॉ.मोहन यादव ने भी इस दुखद घटना का तुरंत संज्ञान लेकर मृतकों के परिवारों को 30-30 लाख रुपए की राहत राशि देने की घोषणा भी की है। चैंबर की सफाई के लिए नहीं उतरे थे कर्मचारी महापौर ने बताया कि दोनों कर्मचारी ड्रेनेज लाइन या चैंबर की सफाई के लिए नहीं उतरे थे, बल्कि प्राइमरी लाइन में सेफ्टी टैंक की डीवॉटरिंग के दौरान पाइप का तुकड़ा चैंबर में गिर गया था, जिसे निकालने के लिए पहले एक कर्मचारी उतरा और जब वह वापस नहीं आया तो दूसरा कर्मचारी उसे देखने के लिए उतर गया और गैस से दोनों की मौत हो गई। इन कर्मचारियों को सफाई के निर्देश भी नहीं दिए गए थे। उन्होंने बताया कि सभी को स्पष्ट निर्देश हैं कि छोटी लाइन हो या बड़ी। चैंबर के अंदर उतरकर किसी भी प्रकार की सफाई नहीं करना है। ड्रेनेज-चैंबर की सफाई के लिए जो प्रॉटोकॉल है, जो संसाधन है, जो किट है, जो प्रक्रिया है उसी अनुरूप टीम उस काम को करती है। ये डीवॉटरिंग का काम किसके निर्देश पर हो रहा था, क्यों हो रहा था इसकी जांच करवाई जा रही है। जांच में जो स्थिति आएगी उस आधार पर सभी दोषियों पर कार्रवाई भी की जाएगी। दोनों को CPR भी दिया था निगम कर्मियों को बचाने के लिए सीवर टैंक में उतरे अमन सेम ने बताया कि मुझे पता चला कि दो लोग चैंबर में डूब गए हैं। मैंने अपनी कमर में रस्सी बांधी और चैंबर में नीचे उतरा। हुक को एक आदमी की बेल्ट से फंसा दिया। इस दौरान मेरे मुंह में गैस भर गई थी, फिर हम दोनों ऊपर आ गए। करण और अजय को बाहर निकाला और उन्हें CPR भी दिया। उनके फेफड़ों में पानी भर गया था। पानी निकालने के बाद उन्हें तुरंत अस्पताल ले गए थे।

होली के बाद बॉडी डिटॉक्स: होली में मजा-पिया तो सेहत का बजेगा बैंड? इन 8 में शामिल करें बॉडी डिटॉक्स

होली के बाद बॉडी डिटॉक्स

होली के बाद बॉडी डिटॉक्स | छवि: ऐ होली के बाद बॉडी डिटॉक्स: होली का त्योहार यानि कि रंगीन की मस्ती, गुझिया की मिठास और सारा सारा चटपटा खाना। लेकिन, जब होली की खुमारी उतरती है तो शरीर में भारीपन, सुस्ती, एसिडिटी और त्वचा के बुरे परिणाम सामने आते हैं। तैलीय व्यंजन और शुगर से बनी मिठाइयों के कारण हमारे शरीर में टॉक्सिन जमा हो जाते हैं। अगर आप भी सोच रहे हैं कि त्योहार की मस्ती के चक्कर में आपकी सेहत का ‘बैंड’ बज गया है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बस कुछ आसान शुरुआत से आप अपने शरीर को फिर से रीसेट और रिचार्ज कर सकते हैं। आइये आपको इस लेख में बॉडी डिटॉक्स करने के लिए कुछ ऐसे पेय पदार्थों के बारे में बताते हैं। जिससे आपको फायदे हो सकते हैं। पानी है सबसे जरूरी डिटॉक्स अटेचमेंट का सबसे पहला और दर्शनीय सिद्धांत निकोलसेड स्टॉक है। होली के दौरान हम अक्सर पानी के पौधे भूल जाते हैं। रिज़ॉर्ट में कम से कम 3-4 लीटर पानी पिएं। यह आपके शरीर से विषैले पदार्थ को पोटेशियम और यूरिन के माध्यम से बाहर निकालने में मदद करेगा। गुनगुने लेजर पानी से शुरू करें सुबह-सुबह ही चाय या कॉफ़ी के बजाय एक गिलास पानी में नींबू का रस मॉड्यूल पिएं। नींबू विटामिन सी से भरपूर होता है और लिवर को साफ करने में मदद करता है। यह आपके मेटाबोलिज्म को किक-स्टार्ट करता है। डिटॉक्स ड्रिंक्स का सहारा लें इनमें शामिल हैं नारियल का पानी, डिटॉक्स का अर्क या एलोवेरा का मिश्रण। ये ड्रिंक्स न केवल शरीर को ठंडक देते हैं, बल्कि इलेक्ट्रोलाइट्स को भी बनाए रखते हैं। आप घर पर खेडा, पुदीना और अदरक का ‘डिटॉक्स वाटर’ बनाकर उसका अल्कोहलिक सेवन कर सकते हैं। विविध से अधिक होवस्तु होली की तली-भुनी नी ने आपके पाचन तंत्र पर काफी लोड डाला होगा। अब इसे नारियल युक्त भोजन के लिए आराम दें। अपने समग्र में हरे पत्तेदार रेगिस्तानी, ओट्स और समुद्री फल शामिल हैं। इससे कब्ज की समस्या दूर होगी और पेट साफ रहेगा। शुगर और कैफीन न लें अगले 3-4 दिनों के लिए चीनी, कोल्ड ड्रिंक और बहुत ज्यादा चाय-कॉफी से दूरी बना लें। ये चीजें शरीर को डाईहाइड्रेट करती हैं और स्टॉक रैंक में रखी जा सकती हैं। इसकी जगह प्लांट टी या ग्रीन टी चुनें। ये भी पढ़ें – विजय-रश्मिका ने छात्रवृत्ति की घोषणा की: विजय-रश्मिका ने बच्चों की शिक्षा के लिए उठाया बड़ा कदम; प्रेमी बोले- ‘जोड़ी हो तो ऐसी’ गहरी नींद लें त्योहार की भाग दौड़ और देर रात तक जागने से शरीर थक जाता है। शरीर को 7-8 घंटे की गहरी नींद रिकवर करना बहुत जरूरी है। नींद के दौरान हमारा शरीर खुद को दुरुस्त करता है और ऊर्जा के स्तर को वापस लाता है। प्रोबायोटिक्स को नहीं मिलता पाचन तंत्र में गुड मार्केट को बढ़ाने के लिए दही या छाछ का सेवन करें। यह पेट की जलन को शांत करता है और भारी भोजन के बाद होने वाली ब्लोटिंग को कम करने में मदद करता है। अस्वीकरण: इस लेख में बताए गए तरीके, तरीके और दावे अलग-अलग विद्वानों पर आधारित हैं। रिपब्लिक भारत लेख में दी गई जानकारी के सही होने का दावा नहीं किया गया है। किसी भी उपचार और सुझाव को पहले डॉक्टर या डॉक्टर की सलाह से अवश्य लें। (टैग्सटूट्रांसलेट)डिटॉक्स टिप्स(टी)हेल्थ(टी)होली 2025(टी)पोस्ट होली डिटॉक्स(टी)होली बॉडी डिटॉक्स(टी)फुल बॉडी डिटॉक्स(टी)पोस्ट-होली डाइट प्लान(टी)फुल बॉडी डिटॉक्स सिरप(टी)आपके शरीर को डिटॉक्स करने के लिए सबसे अच्छा जूस(टी)शुद्ध शरीर को डिटॉक्स करने के लिए क्या करें

‘वज्र’ में दिखेगा हाई-ऑक्टेन एक्शन:टाइगर तैयार, जापान में शूट होगी फिल्म; 2027 में OTT पर भी देंगे दस्तक

‘वज्र’ में दिखेगा हाई-ऑक्टेन एक्शन:टाइगर तैयार, जापान में शूट होगी फिल्म; 2027 में OTT पर भी देंगे दस्तक

एक्शन स्टार टाइगर श्रॉफ ने 2 मार्च को अपने जन्मदिन के मौके पर अपनी अगली फिल्म ‘वज्र’ के टाइटल की आधिकारिक घोषणा कर दी। यह फिल्म निर्देशक राम माधवानी और निर्माता महावीर जैन के साथ मिलकर बनाई जा रही है। ‘नीरजा’ और ‘आर्या’ जैसे कंटेंट-ड्रिवन प्रोजेक्ट्स के लिए पहचाने जाने वाले राम माधवानी के साथ टाइगर का यह सहयोग इंडस्ट्री में खास चर्चा बटोर रहा है। ‘वज्र’ को 2027 की सबसे बड़ी एक्शन फिल्मों में से एक माना जा रहा है, जिसमें हाई-ऑक्टेन एक्शन देखने को मिलेगा। फिल्म की शूटिंग अप्रैल से शुरू करने की है प्लानिंग सूत्रों के मुताबिक ‘वज्र’ एक स्पिरिचुअल एक्शन थ्रिलर होगी, जिसकी शूटिंग अप्रैल से शुरू करने की योजना है। फिल्म का बड़ा हिस्सा जापान में फिल्माया जाएगा, जहां टाइगर विशेष मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षण भी लेंगे। इसे ग्लोबल दर्शकों के लिए नए प्रयोग के रूप में देखा जा रहा है। ‘बागी 5’ भी है बननी, डेवलपमेंट स्टेज में है ‘हीरोपंती 3’ 2027 के लिए टाइगर ने बड़े स्केल पर बदलाव की तैयारी की है। साजिद नाडियाडवाला के बैनर तले बनने वाली ‘बागी 5’ उनकी सफल फ्रेंचाइज का अगला चैप्टर होगी। इसके अलावा ‘हीरोपंती 3’ फिलहाल डेवलपमेंट स्टेज में है और स्क्रिप्ट पर नए सिरे से काम किया जा रहा है, ताकि पिछली किस्त की कमियों को सुधारा जा सके। अंतरराष्ट्रीय स्टंट डायरेक्टर्स के साथ तैयारी हो रही है… डिजिटल स्पेस में टाइगर 2027 में अपना ओटीटी डेब्यू करने की तैयारी में भी हैं। ओटीटी के लिए वे आठ एपिसोड की एक एक्शन सीरीज में दिखेंगे। जिसकी कहानी जासूसी और अंडरकवर ऑपरेशन्स के इर्द-गिर्द है। अंतरराष्ट्रीय स्टंट डायरेक्टर्स के साथ इसकी तैयारी भी हो रही है।

अब कस्टमाइज्ड सिनेमा का दौर:बटन दबाते ही रेगिस्तान में बदलेगा बर्फीले इलाके का दृश्य, IIM-IIT की तर्ज पर क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट; एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट के क्रिएटर होंगे तैयार

अब कस्टमाइज्ड सिनेमा का दौर:बटन दबाते ही रेगिस्तान में बदलेगा बर्फीले इलाके का दृश्य, IIM-IIT की तर्ज पर क्रिएटिव टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट; एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट के क्रिएटर होंगे तैयार

आने वाला समय इंटरएक्टिव, कस्टमाइज्ड और इमर्सिव सिनेमा का है। दर्शक सिर्फ फिल्म देखेंगे नहीं, बल्कि महसूस करेंगे। फर्ज कीजिए थिएटर में एक दृश्य में रेगिस्तान का बैकग्राउंड है। आप इसे लद्दाख की बर्फीली वादियों में देखना चाहते हैं। रिमोट कंट्रोल का बटन दबाते ही दृश्य बदल जाएगा। दृश्य 360 डिग्री घुमाकर किसी भी एंगल से देख सकेंगे। थियेटर में अगर 40 दर्शक हैं तो सब अपनी पसंद के एंगल से फिल्म देख सकेंगे। 8 साल पहले आई हॉलीवुड फिल्म रियल प्लेयर वन में दिखाई विशाल वर्चुअल दुनिया ओएसिस की तरह दर्शक स्पर्श, कंपन, गर्मी, सर्दी, हवा और दूरी का अहसास कर पाएंगे। इसके लिए बॉडी सूट, ग्लव्ज और वीआर हेडसेट पहनने होंगे। यह अभी उपलब्ध 4डी सिनेमा से अलग है, जहां सीट हिलती है, पानी के छींटे पड़ते हैं या खुशबू आती है। इमर्सिव सिनेमा में वर्चुअल एक्शन का असर होगा, जिसमें एवीजीसी एक्सआर (एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट, गेमिंग, कॉमिक्स व एक्सटेंडेट रियलिटी) का हर पहलू शामिल है। मुंबई के एनएफडीसी कैंपस​ स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिएटिव टेक्नोलॉजी (आईआईसीटी) में एवीजीसी एक्सआर के हर पहलू के लिए आधुनिक लैब व स्टूडियो हैं। सीईओ निनाद रायकर कहते हैं कि डीम्ड यूनिवर्सिटी दर्जे के बाद एनिमेशन, गेमिंग जैसे स्पेशलाइज्ड यूजी-पीजी कोर्स शुरू होंगे। अभी 19 डिप्लोमा-सर्टिफिकेट कोर्स हैं। संस्थान ने करिकुलम, रिसर्च व इनोवेशन के लिए नेटफ्लिक्स, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट, एपल, मेटा समेत 24 संस्थानों को भागीदार बनाया है। 2030 तक 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत 2030 तक इस इंडस्ट्री को 20 लाख प्रोफेशनल की जरूरत होगी। ऑरेंज इकोनॉमी के लिए बजट में घोषित 15 हजार स्कूलों व 500 कॉलेजों में छात्रों को एनिमेशन, विजुअल इफैक्ट्स जैसे क्षेत्रों में कुशल बनाने के लिए एवीजीसी कंटेंट क्रिएशन लैब का खाका जल्द तैयार होगा। सरकार की योजना एक मॉडल आईआईसीटी विकसित करने के बाद आईआईटी व आईआईएम की तर्ज पर देश में अलग-अलग जगह आईआईसीटी स्थापित करने की है। हॉलीवुड की 60% फिल्मों का प्रोसेस भारत में- सलिल देशपांडे फैकल्टी, आईआईसीटी भारत में भी एवीजीसी एक्सआर सेक्टर के लैब हैं। हॉलीवुड की 60% फिल्मों के कुछ हिस्से और दुनिया की 10% फिल्मों का एवीजीसी एक्सआर जॉब बैकएंड वर्क भारत में होता है। राजामौली जैसे फिल्मकार हैदराबाद की अन्नपूर्णा लैब इस्तेमाल करते हैं। भारत में अभी रोटोमेशन, रोटोस्कॉपिंग, मैचमूव, ट्रैकिंग, क्लीनअप, पेंट, क्राउड सिमुलेशन, लाइटिंग सपोर्ट का काम होता है। भारत बैकएंड पर काम करता है। करीब 80 लाख लोग जुड़े हैं। पर, भारत कॉन्सेप्ट डिजाइन यानी कहानी, कैरेक्टर, क्रिएटिव कंट्रोल, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (आईपी) पर मालिकाना हक नहीं रखता। ऑरेंज इकोनॉमी में हिस्सेदारी बढ़ाने का लाभ बैकएंड से फ्रंटफुट पर जाने में मिलेगा। आईआईसीटी की क्षमता आज ही अवतार जैसी फिल्मों के 40-50 फीसदी निर्माण की है। अभी आईआईसीटी 10 स्टार्टअप को इंक्यूबेट भी कर रही है।

होली सेलिब्रेशन में बच्चों का रखें खास ख्याल, स्किन और हेयर को रंगों से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

होली सेलिब्रेशन में बच्चों का रखें खास ख्याल, स्किन और हेयर को रंगों से बचाने के लिए अपनाएं ये टिप्स

Last Updated:March 03, 2026, 11:48 IST Holi 2026 Safety Tips: : होली रंगों और उल्लास का त्योहार है, जो बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को खुशियों से भर देता है. यह त्योहार न केवल रंगों के साथ मनाया जाता है, बल्कि इसमें मिठाइयां, गाना-बजाना और दोस्तों व परिवारजनों के साथ मेलजोल भी शामिल होता है. इस त्योहार के लिए सबसे ज्यादा एक्साइटेड बच्चे रहते हैं. इसलिए होली के दौरान बच्चों की सेफ्टी का खास ध्यान रखना बेहद जरूरी है. (रिपोर्ट: वंदना रेवांचल तिवारी/रीवा) होली के त्योहार का इंतजार बड़ो से ज्यादा बच्चों को रहती है. रंग खेलने की खुमारी उनके सिर चढ़ बोलती है. बच्चे अक्सर इस दिन इतने उत्साहित होते हैं कि वे अपनी सेफ्टी को लेकर लापरवाह हो जाते हैं या उन्हें पता नहीं होता कि किस चीज से उन्हें नुकसान पहुंच सकता है. कई बार छोटी-मोटी लापरवाही इस खुशियों के त्यौहार में रंग में भंग डालने का काम कर देती है. ऐसे में माता-पिता की जिम्मेदारी है कि वे बच्चों को सुरक्षित और स्वस्थ रखें. आइए जानते हैं कि रीवा सुपर स्पेशलिस्टी हॉस्पिटल के अधीक्षक डाॅक्टर अक्षय श्रीवास्तव क्या सलाह दे रहें है होली के दौरान बच्चों को किन चीजों से दूर रखना चाहिए. होली के दौरान बाजार में मिलने वाले ज्यादातर रंग केमिकल से बने होते हैं, जो त्वचा और आंखों के लिए हानिकारक हो सकते हैं. बच्चों की त्वचा नाजुक होती है, इसलिए उन्हें ऐसे रंगों से दूर रखना चाहिए. केमिकल वाले रंगों से एलर्जी, खुजली, रैशेज और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अपने शिशु को हल्के रंग के लॉन्ग स्लीव्स, मुलायम और ब्रीदेबल कपड़ों से बने कॉटन पैंट्स पहनाएं. इससे रंगों के सीधे संपर्क में आने से बचाव होगा. होली के दौरान उनकी आंखों को सुरक्षित रखने के लिए बेबी-सेफ गॉगल या धूप के चश्मे लगा सकते हैंय बच्चों के लिए हर्बल या नेचुरल रंगों का इस्तेमाल करें, जो घर पर भी बनाए जा सकते हैं. चुकंदर, हल्दी, पालक और गुलाबजल जैसी प्राकृतिक चीजों से बने रंग ज्यादा सेफ होते हैं. बच्चों को होली खेलने के लिए सुरक्षित जगह चुनें. भीड़भाड़ वाले इलाकों या सड़क किनारे होली खेलने से बचें, क्योंकि इससे दुर्घटना होने का खतरा रहता है. बच्चों को घर के आंगन या पार्क में होली खेलने के लिए प्रोत्साहित करें. छत पर भी होली खेलने के लिए बिना किसी की निगरानी के न भेजें. होली के बाद अपने बच्चों साफ पानी से जरूर नहलाएं.बच्चे की त्वचा को ठंडक पहुंचाने के लिए बेबी लोशन लगाएं. इसके खुजली या रैशेज से बचाव के लिए अपने बच्चे को ध्यान से देखें. किसी भी प्रकार के असामान्य लक्षण नजर आते हैं तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह लें. First Published : March 03, 2026, 11:48 IST

विजय-रश्मिका की संगीत नाइट की तस्वीरें सामने आईं:शादी के 5 दिन बाद कपल ने किया पोस्ट; सेरेमनी में किया रोमांटिक डांस

विजय-रश्मिका की संगीत नाइट की तस्वीरें सामने आईं:शादी के 5 दिन बाद कपल ने किया पोस्ट; सेरेमनी में किया रोमांटिक डांस

रश्मिका मंदाना और विजय देवरकोंडा ने शादी के पांच दिन बाद मंगलवार को अपने संगीत समारोह की कई तस्वीरें और वीडियो इंस्टाग्राम पर शेयर किए। रश्मिका और विजय ने अपनी पोस्ट में इस रात को “प्यार, खुशी के आंसू, हंसी, म्यूजिक और डांस से भरी रात” बताया। उन्होंने लिखा, “यह हमारे लिए सबसे मजेदार रात थी। मैं और विजय एक-दूसरे को सरप्राइज देना चाहते थे। परिवार भी हमें सरप्राइज देना चाहता था। हम सभी को खुलकर डांस करते देख बहुत खुश और हैरान थे। 24.2.26 की रात, जब हम दोनों परिवार और दोस्तों के बीच एक साथ डांस कर रहे थे।” देखें संगीत नाइट की तस्वीरें दोनों का संगीत 24 फरवरी को हुआ था। वहीं, दोनों ने 26 फरवरी को राजस्थान के उदयपुर में शादी की। दोनों की शादी एक प्राइवेट सेरेमनी में आईटीसी ममेंटोस रिसॉर्ट में हुई। शादी दो अलग परंपराओं से संपन्न हुई। सुबह तेलुगु रीति-रिवाजों से विवाह हुआ, जबकि शाम को रश्मिका की कोडवा परंपरा के अनुसार रस्में निभाई गईं। 4 मार्च को हैदराबाद में रिसेप्शन अब दोनों 4 मार्च को हैदराबाद में ग्रैंड वेडिंग रिसेप्शन देने वाले हैं। रविवार को जारी ऑफिशियल अनाउंसमेंट लेटर में कपल ने बताया कि यह रिसेप्शन सिर्फ इनविटेशन वाला इवेंट होगा। इसे खास गैदरिंग के तौर पर प्लान किया गया है। इसमें तेलुगु, हिंदी, तमिल, मलयालम और कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री के लोगों को बुलाया गया है। साथ ही कुछ पॉलिटिकल और एडमिनिस्ट्रेटिव सर्कल के खास मेहमान भी शामिल होंगे। हाई-प्रोफाइल गेस्ट्स के कारण सुरक्षा के खास इंतजाम किए गए हैं। लोकल अधिकारियों से बात कर अतिरिक्त सिक्योरिटी रखी गई है। गेस्ट लिस्ट को सीमित किया गया है। एंट्री सिर्फ वैलिड ऑफिशियल इनविटेशन वाले मेहमानों को ही मिलेगी।

‘चुप्पी ही त्याग है’: संपादकीय में सोनिया गांधी ने खामेनेई की हत्या पर भारत के रुख पर सवाल उठाए | राजनीति समाचार

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आखरी अपडेट:मार्च 03, 2026, 10:57 IST सोनिया गांधी ने तर्क दिया कि इस तरह की चुप्पी संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर आधारित भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति से विचलन को दर्शाती है। कांग्रेस नेता सोनिया गांधी | फ़ाइल छवि जैसे ही पश्चिम एशिया युद्ध चौथे दिन में प्रवेश कर गया, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक संपादकीय में अमेरिकी-इजरायल हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला सैयद अली होसैनी खामेनेई की हत्या पर भारत सरकार की प्रतिक्रिया पर सवाल उठाया। इंडियन एक्सप्रेस. सोनिया गांधी ने क्या कहा? “ईरान नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थ नहीं है, यह त्याग है” शीर्षक वाले अपने लेख में सोनिया गांधी ने लिखा कि ईरान ने 1 मार्च को पुष्टि की कि उसके सर्वोच्च नेता की पिछले दिन संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए गए लक्षित हमले में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने कहा कि चल रही बातचीत के दौरान एक मौजूदा राष्ट्रप्रमुख की हत्या अंतरराष्ट्रीय संबंधों में गंभीर दरार का प्रतीक है, उन्होंने कहा कि नई दिल्ली की चुप्पी इस घटना की तरह ही मजबूती से सामने आई है। उनके अनुसार, भारत सरकार ने हत्या या ईरानी संप्रभुता के उल्लंघन की निंदा करने से परहेज किया। उन्होंने कहा कि प्रधान मंत्री कार्यालय ने हत्या की परिस्थितियों का उल्लेख करने से बचते हुए केवल एक संक्षिप्त शोक संदेश जारी किया, और यह अस्पष्टता बाद में वैश्विक राजनयिक प्रतिक्रियाओं के बावजूद “स्पष्ट शांति” में बदल गई। भारत की विदेश नीति पर सोनिया गांधी गांधी ने तर्क दिया कि इस तरह की चुप्पी संप्रभुता, गैर-हस्तक्षेप और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर आधारित भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति से विचलन को दर्शाती है। उन्होंने लिखा कि भारत ने ऐतिहासिक रूप से पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका सहित सभी क्षेत्रों में लक्षित हत्याओं और बल के अतिरिक्त-क्षेत्रीय उपयोग का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि बातचीत और शांतिपूर्ण संघर्ष समाधान की वकालत करने वाली ग्लोबल साउथ की आवाज के रूप में भारत की विश्वसनीयता कमजोर हो गई है। जिसे कई लोग अंतरराष्ट्रीय मानदंडों का उल्लंघन मानते हैं, उसकी निंदा न करके उन्होंने कहा कि भारत अपने सिद्धांतों में चयनात्मक दिखने का जोखिम उठा रहा है। संपादकीय में कहा गया है कि संकट के दौरान चुप्पी सहयोगियों, विरोधियों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संकेत भेजती है, जिससे पता चलता है कि भूराजनीतिक सुविधा मानदंडों के प्रति प्रतिबद्धताओं से अधिक हो सकती है। गांधी ने चेतावनी दी कि इससे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और नियम-आधारित बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को आकार देने में मदद करने की उसकी महत्वाकांक्षा प्रभावित हो सकती है। उन्होंने रक्षा, प्रौद्योगिकी और राजनीतिक सहयोग में इज़राइल के साथ भारत के गहरे संबंधों को स्वीकार किया, लेकिन तर्क दिया कि साझेदारी मूलभूत सिद्धांतों की कीमत पर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने लिखा, विदेश नीति में संतुलन की आवश्यकता है। सोनिया गांधी ने आगाह किया कि शक्तिशाली देशों को बिना परिणाम के विदेशी नेताओं को खत्म करने की अनुमति देने से अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था प्रतिशोधात्मक हिंसा और अस्थिरता की ओर बढ़ सकती है। उन्होंने कहा, छोटे देश जबरदस्ती और एकतरफा आक्रामकता से सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानून पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के सभ्यतागत लोकाचार और संवैधानिक मूल्य शांति, संवाद और संप्रभुता के सम्मान पर जोर देते हैं और इन सिद्धांतों को छोड़ने से नैतिक प्रतिष्ठा और वैश्विक विश्वास दोनों कमजोर हो सकते हैं। स्पष्टता का आह्वान करते हुए, उन्होंने लिखा कि जब सिद्धांतों का परीक्षण किया जाता है तो लोकतंत्र का मूल्यांकन साहस से किया जाता है और उन्होंने भारत से अपनी आवाज पुनः प्राप्त करने का आग्रह किया, उन्होंने कहा कि चिंता की स्पष्ट अभिव्यक्ति एक न्यायपूर्ण और स्थिर विश्व व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता की पुष्टि करेगी। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि “इस संदर्भ में, चुप्पी विवेक नहीं है। यह त्याग है।” राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ संपादकीय पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या पर भारत की ओर से संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून का कोई स्पष्ट बचाव नहीं होता है, तो यह देश की विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता पर संदेह पैदा करता है। उन्होंने कहा कि भारत को संप्रभुता और शांति के लिए खड़ा होना चाहिए और अपनी नैतिक ताकत को फिर से खोजना चाहिए। “जब किसी विदेशी नेता की लक्षित हत्या से हमारे देश की संप्रभुता या अंतरराष्ट्रीय कानून की कोई स्पष्ट रक्षा नहीं होती है, और निष्पक्षता को छोड़ दिया जाता है, तो यह हमारी विदेश नीति की दिशा और विश्वसनीयता के बारे में गंभीर संदेह पैदा करता है। इस उदाहरण में, चुप्पी नहीं है… pic.twitter.com/LJECs5jPHR– राहुल गांधी (@RahulGandhi) 3 मार्च 2026 शिव सेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने भी इस टिप्पणी का समर्थन किया और कहा कि सरकार की चुप्पी “तटस्थ नहीं” थी और उन्होंने कॉलम को एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया और कहा कि जब भारत किसी चीज के लिए खड़ा होना बंद कर देता है, तो वह किसी भी चीज के लिए गिरने का जोखिम उठाता है। ‘ईरान नेता की हत्या पर सरकार की चुप्पी तटस्थ नहीं है, यह त्याग है’जैसा कि मैंने पहले कहा था, जिस क्षण भारत किसी चीज के लिए खड़ा होना बंद कर देता है वह किसी भी चीज के लिए गिरने को तैयार हो जाता है। इससे अधिक सहमत नहीं हो सकता, अवश्य पढ़ें, श्रीमती सोनिया गांधी का एक महत्वपूर्ण कॉलम। pic.twitter.com/dwSL95g4gO– प्रियंका चतुवेर्दी🇮🇳 (@priyankac19) 3 मार्च 2026 28 फरवरी को पश्चिम एशिया में पूर्ण पैमाने पर युद्ध छिड़ गया, जब अमेरिका और इज़राइल ने संयुक्त रूप से ईरानी रणनीतिक स्थलों पर हमला किया, सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या कर दी और रुकी हुई परमाणु वार्ता के बीच परमाणु, सैन्य और नेतृत्व के आंकड़ों को निशाना बनाया। जगह : दिल्ली, भारत, भारत पहले प्रकाशित: मार्च 03, 2026, 10:57 IST समाचार राजनीति ‘चुप्पी ही त्याग है’: संपादकीय में सोनिया गांधी ने खामेनेई की हत्या पर भारत के रुख पर सवाल उठाए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट

बाथरूम में युवती की लाश, बदन पर चाकू के जख्म:मां के साथ सो रही थी दूसरी बेटी, कौन था हमलावर…खून किसने साफ किया?

बाथरूम में युवती की लाश, बदन पर चाकू के जख्म:मां के साथ सो रही थी दूसरी बेटी, कौन था हमलावर…खून किसने साफ किया?

मध्यप्रदेश क्राइम फाइल्स में आज एक ऐसे मर्डर केस की कहानी, जिसने दो राज्यों में सुर्खियां बटोरीं। मामला नरसिंहपुर जिले में एक युवती की संदिग्ध मौत का था। इसने पुलिस को उलझन में डाल दिया था। परिवार इसे बाथरूम में फिसलकर हुई दुर्घटना बता रहा था, लेकिन जांच में जो सच सामने आया, उसने सभी के होश उड़ा दिए। उसकी हत्या किसने और क्यों की? क्या मां-बेटी ही कातिल थीं या कोई बाहरी कत्ल करके फरार हो चुका था? आखिर क्या था पूरा मामला-पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 22 फरवरी की शाम करीब 4 बजे सुरेंद्र ढिमोले अपने फार्महाउस पर काम कर रहे थे। तभी उनकी भांजी खुशबू का घबराया हुआ फोन आया-“मामा, जल्दी आइए… शिखा बाथरूम में गिर गई है… हालत ठीक नहीं है… अस्पताल ले जाना है।” सुरेंद्र बिना देर किए बहन के घर पहुंचे। घर के भीतर अजीब-सी खामोशी थी। बाथरूम के पास शिखा बेहोश पड़ी थी। शरीर ढीला, चेहरा नीला। सुरेंद्र ने तुरंत एंबुलेंस को कॉल किया और शिखा को लेकर अस्पताल पहुंचे। घर में सिर्फ तीन लोग, दोपहर तक सब सामान्य घर में सिर्फ तीन लोग ही रहते थे। शिखा, खुशबू और उनकी मां बबली। शिखा घर की सबसे छोटी बेटी थी। दोपहर को सभी ने खाना खाया और सोने चले गए। 4 बजे खुशबू की नींद खुली तो वह बाथरूम की तरफ गई, जहां देखा कि शिखा बेहोश पड़ी है। मां और बहन को कुछ समझ नहीं आ रहा था यह सब अचानक कैसे हो गया। परिजन हैरान थे कि बाथरूम में फिसलने से मौत कैसे हो गई? दोपहर तक सबके साथ हंसती-खेलती घर वालों की दुलारी शिखा अब उनके बीच नहीं रही। डॉक्टरों को दिखे संदिग्ध निशान डॉक्टरों ने देखा कि शरीर पर कई जगह चोट के निशान थे। गर्दन के आसपास के घाव सामान्य गिरने जैसे नहीं लग रहे थे। कुछ कटे हुए निशान भी थे। डॉक्टरों को मामला संदिग्ध लगा तो पुलिस को सूचना दी। अस्पताल पहुंची पुलिस को शिखा की मौत संदेहास्पद लगी, लिहाजा शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घर वाले शिखा की मौत बाथरुम में गिरने से बता रहे थे। पुलिस ने घर का निरीक्षण किया। बाथरूम के फर्श पर पानी था, लेकिन खून के स्पष्ट निशान नहीं। शिखा का किसी से विवाद नहीं था पुलिस कों संदेह था कि शिखा की हत्या की गई, लेकिन घर वालों को खुद समझ नहीं आ रहा था कि आखिर शिखा की हत्या कौन और क्यों करेगा? न शिखा का कोई बॉयफ्रेंड था और ना ही कभी उसने किसी ऐसे लड़के के परेशान करने की बात का जिक्र किया था। लिहाजा जांच अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर टिक गई जो सबसे अहम थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से ही शिखा की मौत की असली वजह साफ हो सकती थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने बदली कहानी पोस्टमार्टम रिपोर्ट आई तो उसने कहानी की दिशा ही बदल दी। रिपोर्ट में शरीर पर धारदार हथियार से किए गए कई घाव पाए गए, जिनमें सबसे गंभीर जख्म गर्दन पर थे। गर्दन पर 6 गहरे घाव थे, श्वास नली कटी हुई थी। सिर और चेहरे पर भी बेरहमी से हमला सिर के बाएं हिस्से में घाव और खोपड़ी के अंदर रक्तस्राव मिला। बाएं गाल, आंख, जबड़े और कान पर कटे घाव व सूजन थी। चेहरे पर भी हमला किया गया था। कोहनी, हाथ की अंगुली पर छिले घाव व नीले निशान थे। छाती के बीच में सूजन था। चाकू से कटने का निशान भी था। दोनों पैरों के जोड़ों पर रस्सी से बांधने जैसे निशान थे। हाथ-पैर बांधकर चाकू मारा गया पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर ने अपना मत दिया कि लड़की की मौत फिसलने से नहीं हुई, बल्कि उसकी बर्बर तरीके से हत्या की गई है। उसके हाथ-पैर बांधकर उसकी गर्दन पर कई बार चाकू मारा गया। फिर पत्थर जैसी वस्तु पर उसे पटका गया। क्या घर के भीतर ही छिपा था राज? अब यह साफ हो चुका था कि यह कोई साधारण हादसा नहीं है, बल्कि शिखा की बेरहमी से हत्या की गई। अब सवाल ये था कि अगर यह हत्या है, तो हत्यारा कौन है? घर में जबरन किसी के घुसने के निशान नहीं थे। लूटपाट नहीं तो क्या हत्यारा घर का ही कोई था? पुलिस ने मां और बहन से पूछताछ की। मां ने बताया कि दोपहर करीब 12 बजे खाना खा कर सो गई थी, करीब चार बजे जब उठी तो देखा कि शिखा बाथरूम में बेसुध हालत में गिरी है। खुशबू ने भी बेहोशी की हालत में शिखा को देखने के बाद मामा को फोन कर घर आने और शिखा को अस्पताल ले जाने की बात कही। दोनों का बयान एक जैसा था- ‘वह बाथरूम में फिसल गई थी।’ कॉल डिटेल में मिला नया सुराग पुलिस ने कॉल डिटेल खंगालनी शुरू की, वह किससे बात करती थी? घटना के समय लोकेशन पर कौन-कौन मौजूद था, पुलिस ने रिकॉर्ड मोबाइल कंपनी से निकलवाया। तो एक ऐसे शख्स का सुराग हाथ लगा जिसकी मोबाइल लोकेशन इससे पहले उस इलाके में कभी नहीं पाई गई थी। ये हादसा अब एक पहेली बन चुका था। इन सवालों के जवाब जानिए पार्ट 2 में- – क्या इस दौरान कोई बाहरी आदमी आया था? – शिखा की हत्या किसने और क्यों की? – शिखा का कत्ल घर के अंदर बेरहमी से किया गया तो उसकी मां और बहन खुशबू को पता क्यों नहीं चला। – क्या उसकी जिंदगी में कोई ऐसा राज था जो अब तक सामने नहीं आया? – वह कौन था जिसकी लोकेशन उस इलाके में पहली बार पाई गई थी?

मशहद में दफनाए जाएंगे खामेनेई, दिन-तारीख तय नहीं:सुप्रीम लीडर का ऐलान अगले हफ्ते संभव; इजराइल का दावा- 4 दिन में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट

मशहद में दफनाए जाएंगे खामेनेई, दिन-तारीख तय नहीं:सुप्रीम लीडर का ऐलान अगले हफ्ते संभव; इजराइल का दावा- 4 दिन में ईरान के 300 मिसाइल लॉन्चर नष्ट

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मशहद में दफनाया जाएगा। हालांकि दिन-तारीख तय नहीं है। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी फार्स के मुताबिक खामेनेई को इमाम रजा (अलैहिस्सलाम) की दरगाह के पास सुपुर्दे खाक किया जाएगा। खामेनेई का जन्म भी मशहद में ही 1939 में हुआ था। ईरान के अगले सुप्रीम लीडर का ऐलान खामेनेई को दफनाने के बाद ही किया जाएगा। मंगलवार को खबर आई थी कि कोम में असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने सुप्रीम लीडर के चुनाव के लिए वोटिंग की है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स में 88 सदस्य होते हैं, जो देश के सुप्रीम लीडर को चुनते हैं। दरअसल, 28 फरवरी को US-इजराइल के हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई थी। तब से पद खाली है। हालांकि ईरानी अपोजिशन से जुड़े ईरान इंटरनेशनल का दावा है कि असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने IRGC के दबाव में खामेनेई के बेटे मोजतबा को अगला सुप्रीम लीडर चुन लिया है। इधर, इजराइल की सेना (IDF) ने दावा किया है शनिवार से अबतक इजराइली हवाई हमलों में 300 से ज्यादा ईरानी बैलिस्टिक मिसाइल लॉन्चर नष्ट कर दिए हैं। जंग में ईरान का नुकसान… इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें… भास्कर कार्टूनिस्ट की नजर से ईरान-इजराइल और अमेरिका जंग… इजराइल-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स पढ़ने के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

फिजिकल हेल्थ- हेल्थ के लिए क्रिटिकल बायोटिन:शरीर में करता ये 10 जरूरी काम, डेफिशिएंसी के 11 संकेत, पूर्ति के लिए खाएं ये चीजें

फिजिकल हेल्थ- हेल्थ के लिए क्रिटिकल बायोटिन:शरीर में करता ये 10 जरूरी काम, डेफिशिएंसी के 11 संकेत, पूर्ति के लिए खाएं ये चीजें

हेयरफॉल, स्किन पर रैशेज और थकान को अक्सर लोग कॉमन समस्या मानकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन ये लक्षण कुछ मामलों में बायोटिन की कमी का संकेत भी हो सकते हैं। बायोटिन हमारे शरीर में इन तीन कामों में क्रिटिकल भूमिका निभाता है– ‘नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ’ के मुताबिक, हर 100 में से 30 प्रेग्नेंट महिलाओं को बायोटिन डेफिशिएंसी होती है। बायोटिन डेफिशिएंसी के साथ बड़ी समस्या ये है कि इसके लक्षण इतने कॉमन होते हैं कि इन्हें समझना मुश्किल होता है। इसलिए फिजिकल हेल्थ में आज बायोटिन की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि- सवाल- बायोटिन क्या है? यह विटामिन है या मिनरल? जवाब- बायोटिन मिनरल नहीं, बल्कि एक विटामिन है। ‘विटामिन B7’ को बायोटिन कहते हैं। यह एक वॉटर-सॉल्यूबल विटामिन है। यह शरीर में कार्बोहाइड्रेट, फैट और प्रोटीन के मेटाबॉलिज्म (भोजन को एनर्जी में बदले की प्रक्रिया) में अहम भूमिका निभाता है। सवाल- बायोटिन शरीर में क्या काम करता है? जवाब- बायोटिन एंजाइम्स को एक्टिव करके भोजन को एनर्जी में बदलने की प्रक्रिया को सपोर्ट करता है। बायोटिन बाल, स्किन और नाखूनों को हेल्दी बनाए रखने में भी अहम भूमिका निभाता है। इसके अलावा, यह नर्वस सिस्टम के सही कामकाज में मददगार होता है। इसके सभी जरूरी काम ग्राफिक में देखिए- सवाल- बायोटिन शरीर के लिए जरूरी क्यों है? जवाब- शरीर को हर फंक्शन के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। इस ऊर्जा को बनाने में बायोटिन शरीर की मदद करता है। इसकी कमी से- सवाल- हमारा शरीर बायोटिन को एनर्जी में कैसे बदलता है? जवाब- बायोटिन खुद ऊर्जा नहीं देता, बल्कि को-एंजाइम की तरह काम करता है। सवाल- शरीर में बायोटिन डेफिशिएंसी क्यों होती है और किन लोगों को इसका रिस्क ज्यादा होता है? जवाब- इन सभी कंडीशंस में शरीर में बायोटिन की कमी हो सकती है- किन लोगों को बायोटिन डेफिशिएंसी का रिस्क ज्यादा होता है, ग्राफिक में पूरी लिस्ट देखिए- सवाल- क्या लंबे समय तक एंटीबायोटिक दवाइयां लेने से भी बायोटिन डेफिशिएंसी हो सकती है? जवाब- हां, लंबे समय तक एंटीबायोटिक्स लेने से बायोटिन की कमी हो सकती है। सवाल- बायोटिन डेफिशिएंसी होने पर क्या लक्षण या संकेत दिखाई देते हैं? जवाब- बायोटिन की कमी होने पर बाल झड़ना, स्किन पर रैश, नाखून कमजोर होने और थकान जैसे लक्षण दिख सकते हैं। सभी लक्षण ग्राफिक में देखिए- सवाल- एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति को रोजाना कितनी मात्रा में बायोटिन की जरूरत होती है? जवाब- स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन औसतन 30 माइक्रोग्राम (mcg) बायोटिन पर्याप्त माना जाता है। इतनी मात्रा से शरीर की सामान्य जरूरतें पूरी हो जाती हैं। अगर कोई महिला ब्रेस्टफीडिंग करा रही है तो उसे लगभग 35 mcg की जरूरत हो सकती है। सवाल- क्या ज्यादा बायोटिन लेने से भी कोई नुकसान हो सकता है? जवाब- अगर भोजन के जरिए सामान्य से ज्यादा बायोटिन लिया गया है तो यह आमतौर पर सुरक्षित माना जाता है। सवाल- बायोटिन की पूर्ति के लिए डाइट में कौन से फूड शामिल करने चाहिए? जवाब- बायोटिन की पूर्ति के लिए डाइट में बादाम, अखरोट, मूंगफली और सूरजमुखी के बीज जैसे नट्स और सीड्स शामिल करने चाहिए। बायोटिन के सभी सोर्स ग्राफिक में देखिए- सवाल- किन लक्षणों पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए? जवाब- इन सभी कंडीशंस में डॉक्टर से कंसल्ट करना जरूरी है- बायोटिन सप्लीमेंट से जुड़े कॉमन सवाल-जवाब सवाल- क्या सिर्फ डाइट से बायोटिन की जरूरत पूरी हो जाती है या सप्लीमेंट लेना जरूरी है? जवाब- ज्यादातर लोगों में संतुलित डाइट से बायोटिन की जरूरत पूरी हो जाती है। सप्लीमेंट तब जरूरी होता है, जब डेफिशिएंसी या कोई मेडिकल कंडीशन हो। सवाल- बायोटिन सप्लीमेंट किसे लेना चाहिए? जवाब- इन्हें बायोटिन सप्लीमेंट लेना चाहिए- सवाल- बायोटिन सप्लीमेंट कितनी मात्रा में लेना चाहिए? जवाब- आमतौर पर 30-100 mcg पर्याप्त होता है, लेकिन सही डोज डॉक्टर व्यक्ति की जरूरत के अनुसार तय करते हैं। सवाल- क्या बायोटिन सप्लीमेंट रोज ले सकते हैं? जवाब- हां, जरूरत होने पर रोज लिया जा सकता है, लेकिन लंबे समय तक लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी है। सवाल- बायोटिन सप्लीमेंट लेने का सही समय और तरीका क्या है? जवाब- इसे खाने के बाद पानी के साथ लेना बेहतर होता है, ताकि अवशोषण अच्छा रहे और पेट पर असर न पड़े। इसे ब्रेकफास्ट या लंच के बाद लेना चाहिए, डिनर के बाद नहीं। सवाल- क्या खाली पेट बायोटिन सप्लीमेंट ले सकते हैं? जवाब- हां, ले सकते हैं, लेकिन कुछ लोगों में हल्की गैस या असहजता हो सकती है। इसलिए भोजन के साथ लेना बेहतर है। सवाल- क्या अन्य विटामिन्स के साथ बायोटिन सप्लीमेंट ले सकते हैं? जवाब- हां, बायोटिन को अन्य बी-विटामिन्स या मल्टीविटामिन्स के साथ लिया जा सकता है, पर ओवरडोज ध्यान रखें कि किसी सप्लीमेंट का ओवरडोज न हो। ………………….. फिजिकल हेल्थ से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए फिजिकल हेल्थ- सलमान के पिता को हुआ ब्रेन हेमरेज: न्यूरोलॉजिस्ट से जानें क्या है ये मेडिकल कंडीशन, शुरुआती संकेत, किसे ज्यादा रिस्क बॉलीवुड के दिग्गज स्क्रिप्ट राइटर और सलमान खान के पिता सलीम खान को हाल ही में ब्रेन हेमरेज हुआ। ब्रेन हेमरेज का मतलब ‘ब्रेन की नस का फटना है।’ नस फटने पर ब्रेन के अंदर खून जमा होने लगता है, जिससे बने दबाव के कारण ब्रेन के सभी हिस्सों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। यह जानलेवा मेडिकल इमरजेंसी है। पूरी खबर पढ़िए…