Tuesday, 20 Oct 2026 | 01:07 PM

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लंढौरा राजघराने के 'चैंपियन' का 350 कमरों वाला रंगमहल:खेल से मिली पहचान, चार बार विधायक बने; विवादों से हमेशा सुर्खियों में रहे

लंढौरा राजघराने के 'चैंपियन' का 350 कमरों वाला रंगमहल:खेल से मिली पहचान, चार बार विधायक बने; विवादों से हमेशा सुर्खियों में रहे

उत्तराखंड की राजनीति में कुंवर प्रणव सिंह ‘चैंपियन’ ऐसा नाम है, जो लंढौरा राजघराने की विरासत, शाही ठाठ और हथियारों के शौक के साथ-साथ 350 कमरों वाले ‘रंगमहल’ और अपनी अलग जीवनशैली के कारण भी चर्चा में रहा है। राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी के रूप में पहचान बनाने के बाद वे राजनीति में उतरे और चार बार विधायक बने। हालांकि उनका राजनीतिक सफर उपलब्धियों के साथ-साथ विवादों से भी घिरा रहा। बगावत, पार्टी बदलने, फायरिंग और हथियारों से जुड़े वीडियो ने उन्हें हमेशा सुर्खियों में बनाए रखा। लंढौरा की गुजर रियासत के राजपरिवार से ताल्लुक रखने वाले कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का बचपन रुड़की के पास स्थित पारिवारिक आवास ‘रंग महल’ में बीता। उनके पिता राजा नरेंद्र सिंह भी लक्सर से विधायक रहे और उन्हीं से उन्हें राजनीति की प्रेरणा मिली। शुरुआत में चैंपियन ने खेल को करियर बनाया और कुश्ती व आर्म रेस्लिंग में राष्ट्रीय स्तर पर पदक जीते, जिससे उन्हें ‘चैंपियन’ नाम मिला। वर्ष 2002 में उन्होंने निर्दलीय चुनाव जीतकर राजनीति में एंट्री की और इसके बाद कांग्रेस व भाजपा दोनों से चुनाव जीतते हुए चार बार विधायक बने। उनकी पहचान मजबूत जनाधार वाले नेता के रूप में बनी, लेकिन विवादों ने भी उनके करियर को लगातार प्रभावित किया। ‘चैंपियन’ के शाही पृष्ठभूमि, संपत्ति और परिवार से जुड़े तथ्य… 1. राजघराने की विरासत और ‘रंग महल’ से शाही पहचान कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन लंढौरा की गुजर रियासत के राजपरिवार से आते हैं, जिससे उनकी पहचान सिर्फ एक राजनेता नहीं बल्कि शाही विरासत से जुड़े चेहरे के रूप में भी रही है। रुड़की के पास स्थित उनका पारिवारिक आवास ‘रंग महल’ लंबे समय से चर्चा में रहा है। इसे उनकी पारंपरिक हैसियत और शाही जीवनशैली का प्रतीक माना जाता है, जो उनकी राजनीतिक छवि को भी अलग पहचान देता है। 2. घोषित संपत्ति 1.88 करोड़, कृषि भूमि-मकान शामिल 2017 के विधानसभा चुनाव हलफनामे के अनुसार चैंपियन ने अपनी कुल संपत्ति करीब 1.88 करोड़ रुपए घोषित की थी। इसमें हरिद्वार के लंढौरा क्षेत्र में 12 एकड़ कृषि भूमि, देहरादून में आवासीय मकान और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। उनकी संपत्ति का बड़ा हिस्सा पारिवारिक विरासत और अचल संपत्ति के रूप में दर्ज है, जबकि ‘रंग महल’ को लेकर अक्सर उनकी शाही पृष्ठभूमि की चर्चा होती रही है। 3. पत्नी राजनीति में सक्रिय, बेटे ने खेल में दिलाया सम्मान चैंपियन का परिवार भी राजनीति और खेल दोनों क्षेत्रों में सक्रिय रहा है। उनकी पत्नी देवयानी सिंह 2022 में भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ चुकी हैं, जबकि उनके बेटे दिव्य प्रताप सिंह ने अंतरराष्ट्रीय निशानेबाजी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक जीतकर परिवार को नई पहचान दिलाई। समर्थक उन्हें निडर और प्रभावशाली नेता मानते हैं, जबकि विरोधी उनकी आक्रामक शैली और विवादों को लेकर आलोचना करते रहे हैं। यही विरोधाभास उनकी राजनीतिक छवि को हमेशा चर्चा में बनाए रखता है। 5 प्वाइंट्स में पढ़िए खेल से राजनीति तक ऐसे बने चैंपियन… 1. राष्ट्रीय खिलाड़ी के रूप में बनाई पहली पहचान कुंवर प्रणव सिंह ने युवा अवस्था में कुश्ती और आर्म रेस्लिंग में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाई। वर्ष 1989 से 1994 के बीच उन्होंने कई राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में हिस्सा लिया और पदक जीते। खेल के मैदान में मिली इस सफलता ने उन्हें अलग पहचान दिलाई और यहीं से उन्होंने अपने नाम के साथ ‘चैंपियन’ उपनाम जोड़ लिया, जो बाद में उनकी स्थायी पहचान बन गया। 2. खेल छोड़कर सार्वजनिक जीवन और राजनीति में एंट्री 1995 में सक्रिय खेल करियर छोड़ने के बाद उन्होंने सामाजिक और स्थानीय गतिविधियों में भाग लेना शुरू किया। राजघराने की पृष्ठभूमि और जनसंपर्क के कारण वे जल्द ही क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय हो गए। लोगों के बीच उनकी मजबूत पकड़ और आक्रामक शैली ने उन्हें एक उभरते हुए युवा नेता के रूप में पहचान दिलाई। 3. निर्दलीय जीत से शुरू हुआ विधायक बनने का सफर वर्ष 2002 में उत्तराखंड के पहले विधानसभा चुनाव में उन्होंने लक्सर सीट से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में जीत दर्ज कर राजनीति में मजबूत एंट्री की। इसके बाद 2007 में कांग्रेस के टिकट पर फिर लक्सर से विधायक बने। 2012 में सीट बदलकर खानपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की, जिससे उनका राजनीतिक प्रभाव और बढ़ गया। 4. भाजपा से चौथी जीत, कैबिनेट रैंक का पद भी मिला 2017 में भाजपा के टिकट पर खानपुर से चुनाव जीतकर वे चौथी बार विधायक बने। इससे पहले 2012 में कांग्रेस सरकार के दौरान उन्हें वन विकास निगम का अध्यक्ष बनाया गया, जिसे कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था। इस पद पर रहते हुए उन्होंने वन विभाग और क्षेत्रीय विकास से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। 5. बगावत, निष्कासन और वापसी ने बनाए रखा चर्चा में 2016 में उन्होंने कांग्रेस सरकार के खिलाफ बगावत कर दी, जिसके बाद उन्हें विधायक पद से अयोग्य घोषित किया गया। बाद में भाजपा में शामिल होकर उन्होंने फिर चुनाव जीता। हालांकि 2019 में हथियारों के साथ वायरल वीडियो के बाद भाजपा ने उन्हें निष्कासित कर दिया, लेकिन लिखित माफी के बाद उनकी पार्टी में वापसी हुई। इन घटनाओं ने उनके राजनीतिक करियर को लगातार चर्चा में बनाए रखा। हाल के वर्षों में इन विवादों से घिरे… हथियार लहराते हुए नाचने का वीडियो सामने आया 2019 में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें चैंपियन हथियार लहराते हुए नाचते नजर आए। इस वीडियो के बाद भाजपा ने उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया था। हालांकि बाद में उन्होंने लिखित माफी दी और पार्टी में उनकी वापसी हुई। खानपुर विधायक के कार्यालय में फायरिंग का आरोप जनवरी 2025 में चैंपियन पर खानपुर विधायक उमेश कुमार के कैंप कार्यालय में समर्थकों के साथ पहुंचकर फायरिंग करने का आरोप लगा। घटना के बाद दोनों पक्षों के खिलाफ मुकदमे दर्ज हुए और पुलिस ने चैंपियन को गिरफ्तार भी किया। इस विवाद ने राज्यभर में राजनीतिक माहौल गर्म कर दिया। समर्थकों के बीच नोट उड़ाने का वीडियो वायरल 2026 में एक कार्यक्रम के दौरान कुंवर प्रणव सिंह चैंपियन का समर्थकों के बीच नोट उड़ाते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। इस घटना के बाद उनकी जीवनशैली और सार्वजनिक आचरण को लेकर नई बहस छिड़ गई। समर्थकों ने इसे जश्न का हिस्सा बताया, जबकि विरोधियों ने इसे राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ

मासूम शर्मा ने पूरी की दूसरी मास्टर डिग्री:अमृतसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक में MA की; बोले- अचीवमेंट फैंस को समर्पित

मासूम शर्मा ने पूरी की दूसरी मास्टर डिग्री:अमृतसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक में MA की; बोले- अचीवमेंट फैंस को समर्पित

हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच विवाद के बीच अपनी दूसरी मास्टर डिग्री पूरी कर ली है। सोशल मीडिया अकाउंट पर उन्होंने दीक्षांत समारोह में डिग्री के साथ कई फोटोज भी शेयर किए हैं। मासूम शर्मा ने अमतृसर के खालसा कॉलेज से म्यूजिक सब्जेक्ट में MA की है। करीब डेढ़ साल पहले ही उन्होंने अपनी मास्टरर्स पूरी कर ली थी, लेकिन 23 फरवरी को हुए दीक्षांत समारोह में उन्हें ये डिग्री मिली। मासूम ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा- गायकी मेरा इश्क है, पढ़ाई मेरी ताकत। दो मास्टर डिग्री पूरी करने की अचीवमेंट अपने हर एक फैन को समर्पित करता हूं। अब पढ़िए…मासूम का स्कूल से लेकर यूनिवर्सिटी तक का सफर गांव के स्कूल से की दसवीं की पढ़ाई मासूम शर्मा का जन्म जींद के गांव ब्राह्मणवास गांव में 27 मार्च 1991 को हुआ था। मासूम ने दसवीं तक की पढ़ाई हिंदू स्कूल जुलाना से पूरी की। इसके बाद उन्होंने 12वीं की पढ़ाई एसडी स्कूल किलाजफरगढ़ से की। स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने ग्रेजुएशन के लिए रोहतक का रुख किया। पंडित लख्मीचंद कॉलेज से फिल्म एंड एक्टिंग में उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। मास कम्युनिकेशन में पहली डिग्री की ग्रेजुएशन के बाद मासूम शर्मा ने 2019 में मास कम्युनिकेशन एंड मीडिया प्रोडक्शन में MA की पढ़ाई पूरी की। यह डिग्री भी उन्होंने पंडित लख्मीचंद यूनिवर्सिटी से ही हासिल की। 2019 में ही पंडित लख्मीचंद कॉलेज में मास्टर डिग्री का पहला बैच शुरू हुआ था। मासूम इसी बैच के स्टूडेंट थे। मासूम शर्मा ने अपनी दूसरी मास्टर डिग्री वर्ष 2024 में म्यूजिक विषय में पूरी की थी। बड़ा बेटा फर्स्ट क्लॉस में पढ़ाई कर रहा मासूम शर्मा के के दो बेटे और एक बेटी है। जिनमें से एक एलकेजी और दूसरा बच्चा फर्स्ट क्लास में पढ़ाई करता है। जबकि छोटा बेटा अभी तीन साल का है। 18 फरवरी को जींद में पूर्व सरपंच से विवाद हुआ 18 फरवरी को जींद में मासूम शर्मा का बहनोई धर्मवीर आर्य की 25वीं सालगिराह के दौरान हुए कार्यक्रम में पूर्व सरपंच से विवाद हुआ था। मासूम शर्मा ने लाइव शो के दौरान स्टेज पर पूर्व सरपंच राजेंद्र शर्मा को देखकर भड़क गए थे। मासूम ने यहां तक कह दिया था कि मेरे गाने के प्रोग्राम के बीच में कोई सरपंच हो, कोई एमएलए हो, कोई मंत्री हो, मैं किसी ने कुछ नहीं मानता। आप चाहे सरपंच हो मेरा परफॉर्मेंस नीचे बैठकर देखो। इसके बाद विवाद बढ़ा तो पूर्व पूर्व सरपंच ने उन्हें पंच का चुनाव तक लड़ने की चुनौती दे डाली। इसके बाद मासूम के बड़े भाई विकास शर्मा ने मुआना गांव में पूर्व सरपंच के सामने बैठकर मामले में मासूम की गलती स्वीकार की थी, लेकिन विवाद फिर भी नहीं रुका। हालांकि, मासूम ने एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में अपने शब्द वापस लेने की बात कही थी, लेकिन उसके साथ यह भी कहा था कि एक व्यक्ति के कहने पर पंचायत नहीं होती। ————– पूर्व सरपंच विवाद की ये खबरें भी पढ़िए… हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा ने सरपंच को धमकाया, VIDEO:मंच से उतारकर बोले- MLA-मंत्री तक को कुछ नहीं समझता, भीड़ से भी धक्का-मुक्की की हरियाणवी सिंगर मासूम शर्मा की मुश्किलें बढ़ीं: दोस्त मुकेश जाजी ने गलती मानी, सरपंचों ने किया बहिष्कार; प्रदेश प्रभारी बोले- मौत के कार्यक्रम में भी नचा लो पूर्व सरपंच बोले-पैसे देकर मासूम शर्मा को कहीं नचवा लो:पंच चुनाव जीतकर दिखाए, जींद में महापंचायत की तैयारी; सिंगर ने स्टेज से उतारा था फतेहाबाद में सरपंचों की मासूम शर्मा को चेतावनी:माफी मांगने की मांग; बोले- वरना कोई भी इवेंट्स नहीं होने देंगे

ब्रूक शतक लगाने वाले पहले कप्तान:बाबर लोएस्ट स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज, इंग्लैंड लगातार 5वीं बार सेमीफाइनल में

ब्रूक शतक लगाने वाले पहले कप्तान:बाबर लोएस्ट स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज, इंग्लैंड लगातार 5वीं बार सेमीफाइनल में

इंग्लैंड ने टी-20 वर्ल्ड कप में इतिहास रचते हुए लगातार 5वीं बार सेमीफाइनल में जगह बना ली। मंगलवार रात पाकिस्तान को 2 विकेट से हराकर टीम इस एडिशन के नॉकआउट में पहुंचने वाली पहली टीम बनी। इंग्लैंड के कप्तान हैरी ब्रूक बतौर कप्तान टी-20 वर्ल्ड कप में शतक लगाने वाले पहले बल्लेबाज बन गए। वहीं पाकिस्तान के बाबर आजम इस टूर्नामेंट में सबसे कम स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाजों में शामिल हो गए। पढ़िए ENG Vs PAK मैच के टॉप रिकॉर्ड्स… 1. इंग्लैंड लगातार 5वीं बार सेमीफाइनल में इंग्लैंड टी-20 वर्ल्ड कप में लगातार पांचवीं बार सेमीफाइनल में पहुंच गया है। टीम 2016 से 2026 तक लगातार पांच बार सेमीफाइनल में पहुंची है। इससे पहले पाकिस्तान और श्रीलंका चार-चार बार लगातार अंतिम चार में पहुंचे थे, लेकिन इंग्लैंड अब इस मामले में सबसे आगे निकल गया है। 2. ब्रूक शतक लगाने वाले पहले कप्तान हैरी ब्रूक ने कप्तान रहते हुए पाकिस्तान के खिलाफ 100 रन की पारी खेलकर इतिहास रच दिया। वह टी-20 वर्ल्ड कप में शतक लगाने वाले पहले कप्तान बने। इससे पहले क्रिस गेल का 98 रन सर्वोच्च स्कोर था। ब्रूक टी-20 वर्ल्ड कप रन चेज में शतक लगाने वाले चौथे बल्लेबाज भी बने। 3. ब्रूक दूसरा सबसे तेज शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैरी ब्रूक ने 50 गेंदों में शतक लगाकर टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास का दूसरा सबसे तेज शतक जड़ा। वह सिर्फ क्रिस गेल (47 गेंद) से पीछे हैं। साथ ही ब्रूक इंग्लैंड के लिए तीनों फॉर्मेट में शतक लगाने वाले तीसरे खिलाड़ी भी बने। उनसे पहले जोस बटलर, डेविड मलान ऐसा कर चुके हैं। 4. बाबर आजम सबसे कम स्ट्राइक रेट वाले बल्लेबाज टी-20 वर्ल्ड कप में जहां बल्लेबाजों से तेज रन बनाने की उम्मीद होती है, वहीं बाबर आजम का स्ट्राइक रेट 111.5 रहा है, जो 500 से ज्यादा रन बनाने वाले खिलाड़ियों में सबसे कम है। इस लिस्ट में हफीज, संगकारा और विलियमसन जैसे बड़े नाम भी हैं, लेकिन बाबर सबसे नीचे हैं। 5. शाहीन पावरप्ले में सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज शाहीन अफरीदी नई गेंद से टी-20 वर्ल्ड कप इतिहास के सबसे खतरनाक गेंदबाज साबित हुए हैं। उन्होंने पावरप्ले में 18 विकेट लेकर इस फेज में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड बनाया। 6. शाहीन सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले पाकिस्तानी बॉलर पाकिस्तान के लिए टी-20 इंटरनेशनल में सबसे ज्यादा विकेट लेने का रिकॉर्ड अब शाहीन अफरीदी के नाम है। उन्होंने 102 मैचों में 135 विकेट लेकर हारिस रऊफ को पीछे छोड़ा, जिनके नाम 133 विकेट हैं। शादाब खान तीसरे स्थान पर हैं, जबकि मोहम्मद नवाज और दिग्गज ऑलराउंडर शाहिद अफरीदी भी इस सूची में शामिल हैं। 7. फरहान एक सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने वाले पाकिस्तानी पाकिस्तान के लिए एक टी-20 वर्ल्ड कप सीजन में सबसे ज्यादा सिक्स लगाने का रिकॉर्ड अब साहिबजादा फरहान के नाम हो गया है। उन्होंने 2026 एडिशन में 13 छक्के जड़कर मोहम्मद रिजवान का रिकॉर्ड तोड़ा, जिन्होंने 2021 सीजन में 12 सिक्स लगाए थे।

मंदसौर में मॉडिफाइड साइलेंसर वाली 12 बाइक जब्त:तेज आवाज और पटाखों पर पुलिस का एक्शन; बुलेट चलाने वालों पर विशेष नजर

मंदसौर में मॉडिफाइड साइलेंसर वाली 12 बाइक जब्त:तेज आवाज और पटाखों पर पुलिस का एक्शन; बुलेट चलाने वालों पर विशेष नजर

मंदसौर जिले में पटाखे जैसी तेज आवाज निकालने वाले और मॉडिफाइड साइलेंसर लगे वाहनों के खिलाफ पुलिस ने मंगलवार शाम से बड़ा अभियान शुरू किया है। एसपी विनोद कुमार मीना के निर्देश पर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में की गई कार्रवाई के दौरान अब तक 12 मोटरसाइकिलें जब्त की गई हैं। इनमें 10 रॉयल एनफील्ड (बुलेट) और दो अन्य बाइक शामिल हैं। फिलहाल, पुलिस इन वाहनों को जब्त कर थाना परिसर में खड़ा कर रही है और यह कार्रवाई पूरे जिले में निरंतर जारी रहेगी। यातायात पुलिस द्वारा मंदसौर शहर के रामटेकरी, पुलिस पेट्रोल पंप के पास और सरदार वल्लभ भाई पटेल चौराहे पर विशेष चेकिंग पॉइंट लगाए गए हैं। वहीं सिटी कोतवाली पुलिस ने प्रतापगढ़ पुलिया और 10 नंबर नाका सहित विभिन्न संवेदनशील इलाकों में सर्चिंग तेज कर दी है। जिले के अन्य थाना क्षेत्रों में भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई की जा रही है। बुलेट के साइलेंसर की बारीकी से जांच इस अभियान के दौरान पुलिस का विशेष फोकस रॉयल एनफील्ड (बुलेट) मोटरसाइकिलों पर है। अधिकारी खुद वाहनों के साइलेंसर की जांच कर रहे हैं कि उनसे पटाखे जैसी आवाज या चिंगारियां तो नहीं निकल रही हैं। जिन भी वाहनों में नियमों के विरुद्ध मॉडिफाइड साइलेंसर पाए जा रहे हैं, उन्हें मौके पर ही जब्त किया जा रहा है। पुलिस की चेतावनी- जारी रहेगी सख्ती यातायात सूबेदार शैलेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि एसपी के निर्देश पर यह अभियान शुरू किया गया है, जो पूरे जिले में लगातार चलेगा। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि ध्वनि प्रदूषण फैलाने वाले और नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध आगे भी इसी तरह की कठोर कार्रवाई की जाएगी।

एक ही गांव में 5 घंटे में दो सुसाइड:राजगढ़ के राजपुरा में युवक ने खाया जहर, युवती ने लगाई फांसी

एक ही गांव में 5 घंटे में दो सुसाइड:राजगढ़ के राजपुरा में युवक ने खाया जहर, युवती ने लगाई फांसी

राजगढ़ जिले के खिलचीपुर थाना क्षेत्र स्थित राजपुरा गांव में मंगलवार की सुबह दो दुखद घटनाओं से मातम छा गया। यहां महज पांच घंटे के अंतराल में एक युवक और एक युवती ने आत्महत्या कर ली। 25 वर्षीय युवक भगवान तंवर ने जहां सल्फास खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली, वहीं 18 वर्षीय एक युवती ने बगीचे में फांसी लगा ली। फिलहाल पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है और एक ही गांव में हुई दो जवान मौतों से ग्रामीण स्तब्ध हैं। पुलिस के अनुसार, राजपुरा निवासी 25 वर्षीय भगवान तंवर ने सोमवार तड़के करीब 4 बजे अपने घर पर सल्फास का सेवन कर लिया था। तबीयत बिगड़ने और उल्टियां होने पर परिजन उसे तत्काल खिलचीपुर अस्पताल लेकर पहुंचे। यहां डॉक्टरों ने उसका उपचार शुरू किया, लेकिन उसे बचाया नहीं जा सका। पुलिस ने मंगलवार सुबह शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया है। पारिवारिक विवाद और दो शादियों का मामला प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि मृतक भगवान तंवर की दो पत्नियां हैं। पहली पत्नी ममता बाई पिछले करीब 7 वर्षों से अपने मायके में रह रही है। वहीं, दूसरी पत्नी पीरी बाई वर्तमान में गर्भवती बताई जा रही है। खास बात यह है कि दूसरी पत्नी ने भगवान तंवर के खिलाफ खिलचीपुर थाने में धारा 498 (दहेज प्रताड़ना) के तहत मामला दर्ज करा रखा है। पुलिस अब इस पारिवारिक विवाद और तनाव को आत्महत्या की मुख्य वजह मानकर जांच कर रही है। बगीचे में मिला युवती का शव युवक की मौत की खबर के बीच ही गांव की एक 18 वर्षीय युवती द्वारा बगीचे में फांसी लगाकर सुसाइड करने की जानकारी सामने आई। एक ही गांव में महज कुछ घंटों के भीतर हुई इन दो घटनाओं ने सनसनी फैला दी है। पुलिस इस मामले में भी परिजनों के बयान दर्ज कर रही है ताकि आत्महत्या के कारणों का पता लगाया जा सके।

ग्वालियर में जीवाजी यूनिवर्सिटी की छत से गिरा माली, मौत:अस्पताल ले जाते वक्त कहा- इलाज मत कराओ, मुझे मरना है; 19 दिन पहले हुआ था तबादला

ग्वालियर में जीवाजी यूनिवर्सिटी की छत से गिरा माली, मौत:अस्पताल ले जाते वक्त कहा- इलाज मत कराओ, मुझे मरना है; 19 दिन पहले हुआ था तबादला

ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय की सेंट्रल लाइब्रेरी की छत से गिरकर एक व्यक्ति की मौत हो गई। घटना मंगलवार शाम की है। 50 वर्षीय अंगद जाटव थाटीपुर के विवेक नगर के निवासी थे। वे जीवाजी विश्वविद्यालय में माली के पद पर कार्यरत थे। घटना से पहले दोपहर में अंगद ने पत्नी से फोन पर बात की थी। उन्होंने कहा था कि उन्होंने रजिस्टर पर हस्ताक्षर कर ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। घटना के बाद अंगद को घायल अवस्था में जीवाजी विश्वविद्यालय में पढ़ने वाली एक छात्रा के भाई लक्ष्य गुर्जर ने अस्पताल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। मेरा इलाज मत कराओ मुझे मरना है लक्ष्य गुर्जर ने बताया कि जब हम उन्हें अस्पताल ला रहे थे तब अंगद जाटव का कहना था कि मेरा इलाज मत कराओ मुझे मरना है। मुझे 19 दिन हो गए हैं, ये लोग ज्वाइनिंग नहीं दे रहे हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पोस्टमार्टम के बाद बुधवार को शव परिजनों को सौंप दिया जाएगा। पुलिस ने यह भी बताया कि इस मामले में जीवाजी विश्वविद्यालय के अधिकारियों से भी पूछताछ की जाएगी। 19 दिन पहले ही हुआ था तबादला हालांकि, सूत्रों के अनुसार, अंगद का तबादला 19 दिन पहले सेंट्रल लाइब्रेरी से भाषा अध्ययन विभाग में कर दिया था। आरोप है कि उन्हें 19 दिनों से नई जगह पर जॉइनिंग नहीं दी जा रही थी, जिसके कारण वह तनाव में थे और संभवतः इसी वजह से उन्होंने यह कदम उठाया। परिजनों की ओर से अभी तक किसी पर कोई औपचारिक आरोप नहीं लगाया है।

दावा- नॉर्वे के पूर्व PM ने आत्महत्या की कोशिश की:एपस्टीन फाइल में नाम आया था; भ्रष्टाचार केस में 10 साल जेल हो सकती है

दावा- नॉर्वे के पूर्व PM ने आत्महत्या की कोशिश की:एपस्टीन फाइल में नाम आया था; भ्रष्टाचार केस में 10 साल जेल हो सकती है

नॉर्वे के पूर्व प्रधानमंत्री थोरब्योर्न जगलैंड को कथित तौर पर आत्महत्या की कोशिश के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह घटना पिछले हफ्ते हुई। कुछ खबरों में दावा किया गया कि नॉर्वेजियन एडिटर्स एसोसिएशन ने उनके वकील के साथ मिलकर इस मामले को सार्वजनिक न करने पर सहमति जताई थी। हालांकि कुछ मीडिया प्लेटफॉर्मस पर उनकी गंभीर हालत का हवाला देते हुए यह खबर सामने आई। यह पूरा मामला यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से उनके संबंधों को लेकर चल रही जांच से जुड़ा है। जगलैंड पर ‘एग्रेवेटेड करप्शन’ यानी गंभीर भ्रष्टाचार का भी आरोप है, जिसमें अधिकतम 10 साल की जेल हो सकती है। उनके वकील की फर्म एल्डेन लॉ फर्म ने CNN को पुष्टि की कि उन पर गंभीर भ्रष्टाचार का आरोप तय हुआ है, लेकिन उन्होंने सभी आरोपों से इनकार किया है। क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी मामले की जांच कर रही नॉर्वे की आर्थिक अपराध जांच एजेंसी ‘ओकोक्रिम’ इस मामले की जांच कर रही है। एजेंसी के डायरेक्टर पॉल लोनसेथ ने कहा कि उनके खिलाफ जांच की मजबूत वजह मिली है। जांच के तहत ओस्लो स्थित उनके घर और दो अन्य प्रॉपर्टी की तलाशी ली गई। एजेंसी ने यह भी कहा कि वह इस बात की जांच कर रही है कि क्या उन्हें अपने पद के दौरान गिफ्ट, यात्राएं, कर्ज या अन्य फायदे मिले थे। तलाशी के बाद उन्हें औपचारिक रूप से संदिग्ध का दर्जा दे दिया गया है और अब उनसे पूछताछ की जाएगी। जगलैंड ने कहा था- एपस्टीन से रिश्ता गलत फैसला था जगलैंड 1996-1997 के बीच नॉर्वे के प्रधानमंत्री रहे। इसके अलावा वे विदेश मंत्री, नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के चेयरमैन (2009-2015) और यूरोप की मानवाधिकार संस्था काउंसिल ऑफ यूरोप के महासचिव (2009-2019) भी रह चुके हैं। जगलैंड ने कहा है कि एपस्टीन से उनके संबंध ‘गलत फैसला’ या ‘खराब समझ’ का नतीजा थे, लेकिन उन्होंने कोई गैरकानूनी काम नहीं किया। उन्होंने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और चाहते हैं कि सच्चाई पूरी तरह सामने आए। कई बार एपस्टीन के घर गए थे जगलैंड अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट की तरफ से 30 जनवरी को जारी दस्तावेजों से पता चला कि जगलैंड और उनका परिवार कई बार एपस्टीन की पेरिस, न्यूयॉर्क और पाम बीच वाली प्रॉपर्टी पर गए थे। यह भी सामने आया कि एपस्टीन ने उनसे बड़े नेताओं, जैसे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात कराने में मदद मांगी थी। साथ ही उसने कुछ अपने कारोबारी और वित्तीय प्लान आगे बढ़ाने के लिए भी मदद चाहता था। दस्तावेजों में जगलैंड को ‘नोबेल बिग शॉट’ कहा गया। इसमें यह भी लिखा था कि दोनों के रिश्ते ऐसे थे जिनमें एक तरफ जगलैंड का रसूख और पहचान काम आ रही थी, तो दूसरी तरफ एपस्टीन उन्हें लग्जरी ट्रिप, तोहफे और दूसरी सुविधाएं दे रहा था। हालांकि जांच एजेंसियों ने साफ कर दिया है कि जगलैंड का नाम एपस्टीन के यौन अपराधों से नहीं जुड़ा है। जांच सिर्फ इस बात पर हो रही है कि क्या उन्हें अपने पद का इस्तेमाल करके कोई गलत फायदा मिला। यह जांच उस समय से जुड़ी है जब जगलैंड 2009 से 2015 तक नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी के अध्यक्ष थे और 2009 से 2019 तक काउंसिल ऑफ यूरोप के महासचिव रहे। जांच ठीक से हो सके, इसके लिए उनकी डिप्लोमेटिक छूट हटाने की प्रक्रिया भी शुरू की गई। एपस्टीन फाइल्स-10 देशों में इस्तीफे, 80 ताकतवर लोगों की जांच अमेरिकी जस्टिस डिपार्टमेंट ने करीब 30 लाख पेज के डॉक्यूमेंट्स 30 जनवरी को जारी किए हैं। इसके बाद 10 देशों में 15 से ज्यादा बड़े अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा है। 80 से ज्यादा ताकतवर लोगों पर जांच चल रही है। इन फाइलों में नेता, राजदूत, अरबपति और शाही परिवारों के नाम शामिल हैं। ईमेल, फ्लाइट लॉग और संपर्क रिकॉर्ड में 700 से 1000 असरदार लोगों का जिक्र है। कई मामलों में नाबालिग लड़कियों के यौन शोषण के आरोप भी हैं। दस्तावेजों में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, पूर्व राष्ट्रपति बिल क्लिंटन और हिलेरी क्लिंटन जैसे हाई-प्रोफाइल नाम अलग-अलग संदर्भों में सामने आए हैं। ब्रिटेन में सबसे ज्यादा इस्तीफे हुए एपस्टीन खुलासे के बाद सबसे ज्यादा हड़कंप यूरोप में है। करीब 10 देशों में इस्तीफों का दौर शुरू हो गया है। सबसे ज्यादा ब्रिटेन में 3 अधिकारियों को पद छोड़ना पड़ा। पूर्व राजदूत पीटर मैंडेलसन, सलाहकार एडम पेरी और पीएम कीर स्टार्मर के चीफ ऑफ स्टाफ मॉर्गन मैकस्वीनी ने इस्तीफा दिया। स्लोवाकिया में पूर्व विदेश मंत्री और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार मीरोस्लाव लाइचाक ने 300 से अधिक ईमेल और आपत्तिजनक चैट सामने आने पर इस्तीफा दिया। स्वीडन की सीनियर डिप्लोमेट जोआना रुबिनस्टीन ने पद छोड़ा। नॉर्वे की राजदूत मोना जूल, अमेरिका में लेबर मिनिस्टर एलेक्स एकोस्टा और MIT लैब प्रमुख जोइची इतो ने इस्तीफा दिया। पढ़ें पूरी खबर… कौन था जेफ्री एपस्टीन? जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी। उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली। उसकी पार्टनर गिस्लेन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है। —————– यह खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन में किंग चार्ल्स के भाई एंड्रयू गिरफ्तार:12 घंटे बाद घर जाने दिया; एपस्टीन मामले में नाम, 17 साल की लड़की से रेप का आरोप अमेरिकी यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन फाइल्स के खुलासे के 2 महीने बाद दुनिया में पहली गिरफ्तारी हुई। ब्रिटिश पुलिस ने गुरुवार सुबह किंग चार्ल्स के छोटे भाई एंड्रयू माउंटबेटन-विंडसर को गिरफ्तार किया। करीब 12 घंटे की गिरफ्तारी के बाद भारतीय समयानुसार रात 1:15 बजे पुलिस ने एंड्रयू को उनके घर जाने दिया। पढ़ें पूरी खबर…

नसबंदी कैंप में सर्जन ने ऑपरेशन नहीं किए:कहा- यहां सुविधाएं और सामान नहीं, लोग बोले- जब व्यवस्था नहीं थी, तो प्रचार क्यों किया?

नसबंदी कैंप में सर्जन ने ऑपरेशन नहीं किए:कहा- यहां सुविधाएं और सामान नहीं, लोग बोले- जब व्यवस्था नहीं थी, तो प्रचार क्यों किया?

बालाघाट जिले के लालबर्रा में 24 फरवरी को नसबंदी शिविर में भारी अव्यवस्था देखने को मिली। स्वास्थ्य विभाग की तैयारी पूरी न होने के कारण शिविर को रद्द करना पड़ा, जिससे दूर-दराज से आए दर्जनों महिला-पुरुष बिना ऑपरेशन कराए ही लौट गए। मंगलवार को यह शिविर छात्रावास भवन में चल रहे अस्थाई अस्पताल में लगाया गया था। सुबह से ही लोग ऑपरेशन के लिए लाइन में लगे थे, लेकिन दोपहर करीब 3-4 बजे मंडला से आए सर्जन डॉ. गौरव जेटली ने हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने बताया कि अस्पताल में ऑपरेशन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं और सामान मौजूद नहीं था। ऐसे में ऑपरेशन करना मरीज की जान के लिए जोखिम भरा हो सकता था। लोगों में नाराजगी और विभाग पर सवाल शिविर रद्द होने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। अपनी पत्नी का ऑपरेशन कराने पहुंचे सागर और कांग्रेस नेता मनीष कुशवाहा ने विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जब अस्पताल में सुविधाएं ही नहीं थीं, तो गरीबों को परेशान करने के लिए शिविर का प्रचार क्यों किया गया? बीएमओ का आश्वासन इस मामले पर बीएमओ डॉ. रीतु धुर्वे ने कहा कि लोगों को परेशान होने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि या तो इसी भवन में व्यवस्था सुधार कर दोबारा शिविर लगाया जाएगा, या फिर स्वास्थ्य विभाग खुद की गाड़ियों से लोगों को बालाघाट ले जाकर वहां ऑपरेशन करवाएगा।

टाटा संस के चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म पर फैसला टला:मीटिंग में चेयरमैन बोले- ट्रस्ट-बोर्ड में तालमेल जरूरी; नोएल टाटा ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए रखीं 4 शर्तें

टाटा संस के चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म पर फैसला टला:मीटिंग में चेयरमैन बोले- ट्रस्ट-बोर्ड में तालमेल जरूरी; नोएल टाटा ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए रखीं 4 शर्तें

टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में मंगलवार को चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर हुई चर्चा बेनतीजा रही। मीटिंग के दौरान मतभेद उभरने के बाद खुद चंद्रशेखरन ने अपना कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को टालने की बात कही। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप तभी सबसे अच्छा काम करता है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के फैसले एक समान हों। नोएल टाटा ने नए बिजनेस के घाटे पर जताई चिंता इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने मीटिंग के दौरान ग्रुप के कुछ नए बिजनेस में हो रहे घाटे का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा की मांग की। हालांकि, बोर्ड के अन्य निदेशकों ने चंद्रशेखरन का समर्थन करते हुए कहा कि ये घाटे ‘ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स’ (नए शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स) से जुड़े हैं। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को मुनाफा देने में थोड़ा समय लगता है और यह पहले से तय योजना का हिस्सा है। कार्यकाल विस्तार के लिए नोएल टाटा की 4 शर्तें माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए चार प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं: चंद्रशेखरन को जून में रिटायरमेंट नियमों से चाहिए होगी छूट एन चंद्रशेखरन इस साल जून में 63 वर्ष के हो जाएंगे। टाटा संस के नियमों के मुताबिक, नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल तय है। अगर उनका कार्यकाल फरवरी 2027 के बाद भी आगे बढ़ाया जाता है, तो इसके लिए बोर्ड को एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास करना होगा और रिटायरमेंट नियमों में छूट देनी होगी। निदेशकों ने की वोटिंग की पेशकश, चेयरमैन ने टाला फैसला बोर्ड की पुनर्नियुक्ति समिति की प्रमुख अनीता जॉर्ज ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि नए प्रोजेक्ट्स में शुरुआती घाटे सामान्य बात है। चर्चा के बाद जब कुछ निदेशकों ने इस मुद्दे पर वोटिंग कराने का प्रस्ताव दिया, तो चंद्रशेखरन ने खुद इसे फिलहाल टालने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि टाटा संस और मुख्य शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स के बीच पूर्ण सहमति होना ग्रुप के भविष्य के लिए जरूरी है। टाटा ग्रुप में विवाद, सरकार को दखल देना पड़ा रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया। वहीं नवंबर 2024 में नोएल को टाटा संस के बोर्ड में भी शामिल किया गया। लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया यह फैसला ट्रस्ट के भीतर एकमत नहीं था। इससे टाटा संस को कंट्रोल करने वाले टाटा ट्रस्ट्स में बोर्ड सीट को लेकर सीधा-सीधा बंटवारा हो गया। एक गुट बोर्ड मेंबर नोएल टाटा के साथ है, तो दूसरा गुट मेहली मिस्त्री के साथ। मिस्त्री का कनेक्शन शापूरजी पल्लोनजी फैमिली से है जिसकी टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। टाटा संस की बोर्ड सीट को लेकर हुए विवाद के बीच 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने गृहमंत्री अमित शाह के घर पर 45 मिनट की मीटिंग की। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि घरेलू झगड़े को जल्द निपटा लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो। मीटिंग में गृहमंत्री शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए। टाटा ग्रुप में टाटा संस की 66% हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1868 में की थी। यह भारत की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है, 10 अलग-अलग बिजनेस में इसकी 30 कंपनियां दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करती हैं। टाटा संस टाटा कंपनियों की प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट होल्डिंग और प्रमोटर है। टाटा संस की 66% इक्विटी शेयर कैपिटल टाटा के चैरिटेबल ट्रस्ट के पास हैं, जो एजुकेशन, हेल्थ, आर्ट एंड कल्चर और लाइवलीहुड जनरेशन के लिए काम करता है। 2023-24 में टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों का टोटल रेवेन्यू 13.86 लाख करोड़ रुपए था। यह 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है। इसके प्रोडक्ट्स सुबह से शाम तक हमारी जिंदगी में शामिल है। कंपनी चाय पत्ती से लेकर घड़ी, कार और एंटरटेनमेंट सर्विसेज देती है।

कोकिलाबेन अंबानी ने नाथद्वारा में मनाया 92वां जन्मदिन:बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी सहित पूरा परिवार रहा मौजूद; एकलिंगनाथ मंदिर में भी दर्शन किए

कोकिलाबेन अंबानी ने नाथद्वारा में मनाया 92वां जन्मदिन:बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी सहित पूरा परिवार रहा मौजूद; एकलिंगनाथ मंदिर में भी दर्शन किए

नाथद्वारा के श्रीनाथजी की हवेली में बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी की मां कोकिलाबेन ने 92वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर पूरा अंबानी परिवार मौजूद रहा। सभी ने श्रीनाथजी के दर्शन किए और युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा से आशीर्वाद लिया। अंबानी परिवार मंगलवार शाम 4 बजे मंदिर में पहुंचा, सभी लोग संध्या आरती में शामिल हुए। श्रीनाथ जी के दर्शन के बाद युवाचार्य विशाल बावा ने परिवार के सदस्यों को फेंटा बांधकर, रजाई एवं ऊपरना ओढ़ाकर प्रसाद और आशीर्वाद दिया। परिवार ने युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा के पिता तिलकायत गोस्वामी इंद्रदमन महाराज और मा राजेश्वरी गोस्वामी से वीडियो कॉल पर आशीर्वाद प्राप्त किया। तिलकायत ने कोकिला बेन अंबानी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। अंबानी परिवार ढाई घंटे तक मंदिर में रहा। दोनों भाई समेत पूरा परिवार मौजूद रहा कोकिला बेन के जन्मदिन पर मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, आकाश अंबानी, अनंत अंबानी, श्लोका मेहता अंबानी, राधिका अंबानी, अंशुल अंबानी, अनमोल अंबानी, नीना कोठारी, दीप्ती सालगांवकर सहित परिवारजन मौजूद रहे। उनके साथ उद्योगपति धनराज नाथवानी भी मौजूद रहे। बता दें कि कोकिला बेन अंबानी मंदिर मंडल नाथद्वारा की उपाध्यक्ष भी हैं। मोती महल चौक में हुई भजन संध्या इस अवसर पर महाप्रभुजी की बैठक में 51 वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा स्वस्ति वाचन और मंगलाचरण के पाठ किए गए। मोती महल चौक में भजन संध्या का आयोजन कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं। नाथद्वारा आने से पूर्व अंबानी परिवार ने मेवाड़ के प्रमुख आराध्य देव एकलिंगनाथ मंदिर मे भी दर्शन किए। कोकिलाबेन को माना जाता है अंबानी परिवार का मुखिया 24 फरवरी 1934 को जामनगर, गुजरात में जन्मी कोकिलाबेन को अंबानी परिवार की मुखिया माना जाता है। उन्हें न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी की पत्नी के रूप में, बल्कि इस तेजी से बदलते दौर में परिवार का मार्गदर्शन और समर्थन करने में उनकी भूमिका के लिए भी सम्मान दिया जाता है। कोकिलाबेन परिवार को एकजुट रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। कोकिलाबेन बड़े पैमाने पर समाज सेवा के कार्यों में भी शामिल हैं। मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का नाम उनके नाम पर ही रखा गया है।