टाटा संस के चंद्रशेखरन के तीसरे टर्म पर फैसला टला:मीटिंग में चेयरमैन बोले- ट्रस्ट-बोर्ड में तालमेल जरूरी; नोएल टाटा ने कार्यकाल बढ़ाने के लिए रखीं 4 शर्तें

टाटा संस की बोर्ड मीटिंग में मंगलवार को चेयरमैन एन चंद्रशेखरन के तीसरे कार्यकाल को लेकर हुई चर्चा बेनतीजा रही। मीटिंग के दौरान मतभेद उभरने के बाद खुद चंद्रशेखरन ने अपना कार्यकाल बढ़ाने के प्रस्ताव को टालने की बात कही। उन्होंने कहा कि टाटा ग्रुप तभी सबसे अच्छा काम करता है जब टाटा संस और टाटा ट्रस्ट्स के फैसले एक समान हों। नोएल टाटा ने नए बिजनेस के घाटे पर जताई चिंता इकनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने मीटिंग के दौरान ग्रुप के कुछ नए बिजनेस में हो रहे घाटे का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस पर विस्तार से चर्चा की मांग की। हालांकि, बोर्ड के अन्य निदेशकों ने चंद्रशेखरन का समर्थन करते हुए कहा कि ये घाटे ‘ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स’ (नए शुरू किए गए प्रोजेक्ट्स) से जुड़े हैं। ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स को मुनाफा देने में थोड़ा समय लगता है और यह पहले से तय योजना का हिस्सा है। कार्यकाल विस्तार के लिए नोएल टाटा की 4 शर्तें माना जा रहा है कि टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल को आगे बढ़ाने के लिए चार प्रमुख शर्तें सामने रखी हैं: चंद्रशेखरन को जून में रिटायरमेंट नियमों से चाहिए होगी छूट एन चंद्रशेखरन इस साल जून में 63 वर्ष के हो जाएंगे। टाटा संस के नियमों के मुताबिक, नॉन-एग्जीक्यूटिव पदों के लिए रिटायरमेंट की उम्र 65 साल तय है। अगर उनका कार्यकाल फरवरी 2027 के बाद भी आगे बढ़ाया जाता है, तो इसके लिए बोर्ड को एक स्पेशल रेजोल्यूशन पास करना होगा और रिटायरमेंट नियमों में छूट देनी होगी। निदेशकों ने की वोटिंग की पेशकश, चेयरमैन ने टाला फैसला बोर्ड की पुनर्नियुक्ति समिति की प्रमुख अनीता जॉर्ज ने चंद्रशेखरन के कार्यकाल विस्तार का समर्थन किया। उन्होंने तर्क दिया कि नए प्रोजेक्ट्स में शुरुआती घाटे सामान्य बात है। चर्चा के बाद जब कुछ निदेशकों ने इस मुद्दे पर वोटिंग कराने का प्रस्ताव दिया, तो चंद्रशेखरन ने खुद इसे फिलहाल टालने का सुझाव दिया। उनका मानना है कि टाटा संस और मुख्य शेयरहोल्डर टाटा ट्रस्ट्स के बीच पूर्ण सहमति होना ग्रुप के भविष्य के लिए जरूरी है। टाटा ग्रुप में विवाद, सरकार को दखल देना पड़ा रतन टाटा के निधन के बाद अक्टूबर 2024 में उनके सौतेले भाई नोएल टाटा को टाटा ट्रस्ट का चेयरमैन बनाया गया। वहीं नवंबर 2024 में नोएल को टाटा संस के बोर्ड में भी शामिल किया गया। लेकिन कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया यह फैसला ट्रस्ट के भीतर एकमत नहीं था। इससे टाटा संस को कंट्रोल करने वाले टाटा ट्रस्ट्स में बोर्ड सीट को लेकर सीधा-सीधा बंटवारा हो गया। एक गुट बोर्ड मेंबर नोएल टाटा के साथ है, तो दूसरा गुट मेहली मिस्त्री के साथ। मिस्त्री का कनेक्शन शापूरजी पल्लोनजी फैमिली से है जिसकी टाटा संस में 18.37% हिस्सेदारी है। टाटा संस की बोर्ड सीट को लेकर हुए विवाद के बीच 7 अक्टूबर को सीनियर लीडरशिप ने गृहमंत्री अमित शाह के घर पर 45 मिनट की मीटिंग की। एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार ने कहा कि घरेलू झगड़े को जल्द निपटा लिया जाए, ताकि कंपनी पर असर न हो। मीटिंग में गृहमंत्री शाह, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण के साथ टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा, वाइस-चेयरमैन वेणु श्रीनिवासन, टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन और ट्रस्टी डेरियस खंबाटा शामिल हुए। टाटा ग्रुप में टाटा संस की 66% हिस्सेदारी टाटा ग्रुप की स्थापना जमशेदजी टाटा ने 1868 में की थी। यह भारत की सबसे बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी है, 10 अलग-अलग बिजनेस में इसकी 30 कंपनियां दुनिया के 100 से ज्यादा देशों में कारोबार करती हैं। टाटा संस टाटा कंपनियों की प्रिंसिपल इन्वेस्टमेंट होल्डिंग और प्रमोटर है। टाटा संस की 66% इक्विटी शेयर कैपिटल टाटा के चैरिटेबल ट्रस्ट के पास हैं, जो एजुकेशन, हेल्थ, आर्ट एंड कल्चर और लाइवलीहुड जनरेशन के लिए काम करता है। 2023-24 में टाटा ग्रुप की सभी कंपनियों का टोटल रेवेन्यू 13.86 लाख करोड़ रुपए था। यह 10 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देती है। इसके प्रोडक्ट्स सुबह से शाम तक हमारी जिंदगी में शामिल है। कंपनी चाय पत्ती से लेकर घड़ी, कार और एंटरटेनमेंट सर्विसेज देती है।
कोकिलाबेन अंबानी ने नाथद्वारा में मनाया 92वां जन्मदिन:बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी सहित पूरा परिवार रहा मौजूद; एकलिंगनाथ मंदिर में भी दर्शन किए

नाथद्वारा के श्रीनाथजी की हवेली में बिजनेसमैन मुकेश और अनिल अंबानी की मां कोकिलाबेन ने 92वां जन्मदिन मनाया। इस मौके पर पूरा अंबानी परिवार मौजूद रहा। सभी ने श्रीनाथजी के दर्शन किए और युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा से आशीर्वाद लिया। अंबानी परिवार मंगलवार शाम 4 बजे मंदिर में पहुंचा, सभी लोग संध्या आरती में शामिल हुए। श्रीनाथ जी के दर्शन के बाद युवाचार्य विशाल बावा ने परिवार के सदस्यों को फेंटा बांधकर, रजाई एवं ऊपरना ओढ़ाकर प्रसाद और आशीर्वाद दिया। परिवार ने युवाचार्य गोस्वामी विशाल बावा के पिता तिलकायत गोस्वामी इंद्रदमन महाराज और मा राजेश्वरी गोस्वामी से वीडियो कॉल पर आशीर्वाद प्राप्त किया। तिलकायत ने कोकिला बेन अंबानी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दी। अंबानी परिवार ढाई घंटे तक मंदिर में रहा। दोनों भाई समेत पूरा परिवार मौजूद रहा कोकिला बेन के जन्मदिन पर मुकेश अंबानी, अनिल अंबानी, आकाश अंबानी, अनंत अंबानी, श्लोका मेहता अंबानी, राधिका अंबानी, अंशुल अंबानी, अनमोल अंबानी, नीना कोठारी, दीप्ती सालगांवकर सहित परिवारजन मौजूद रहे। उनके साथ उद्योगपति धनराज नाथवानी भी मौजूद रहे। बता दें कि कोकिला बेन अंबानी मंदिर मंडल नाथद्वारा की उपाध्यक्ष भी हैं। मोती महल चौक में हुई भजन संध्या इस अवसर पर महाप्रभुजी की बैठक में 51 वेदपाठी ब्राह्मणों द्वारा स्वस्ति वाचन और मंगलाचरण के पाठ किए गए। मोती महल चौक में भजन संध्या का आयोजन कर जन्मदिन की शुभकामनाएं दी गईं। नाथद्वारा आने से पूर्व अंबानी परिवार ने मेवाड़ के प्रमुख आराध्य देव एकलिंगनाथ मंदिर मे भी दर्शन किए। कोकिलाबेन को माना जाता है अंबानी परिवार का मुखिया 24 फरवरी 1934 को जामनगर, गुजरात में जन्मी कोकिलाबेन को अंबानी परिवार की मुखिया माना जाता है। उन्हें न केवल रिलायंस इंडस्ट्रीज के संस्थापक स्वर्गीय धीरूभाई अंबानी की पत्नी के रूप में, बल्कि इस तेजी से बदलते दौर में परिवार का मार्गदर्शन और समर्थन करने में उनकी भूमिका के लिए भी सम्मान दिया जाता है। कोकिलाबेन परिवार को एकजुट रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। कोकिलाबेन बड़े पैमाने पर समाज सेवा के कार्यों में भी शामिल हैं। मुंबई स्थित कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल का नाम उनके नाम पर ही रखा गया है।
मसाले के रूप में रसोई में रखी ये लकड़ी, बड़े पैमाने पर काम का, प्रवासियों से लेकर उच्च रेलवे तक की छुट्टियों में है राहत; जानिए कैसे उपयोग किया जाता है

24 फरवरी 2026 को 21:09 IST पर अद्यतन किया गया पियानो वुड की छात्रा जैसी दिखती है। लेकिन ये सिर्फ चाय और सब्जी का स्वाद नहीं बल्कि मसाले और चॉकलेट को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है, जानें कैसे। लेकिन सही तरीके से इस्तेमाल जरूरी है।
मऊगंज में गोवंश हत्या, आरोपी गिरफ्तार:घर से 10 किलो मांस और धारदार हथियार मिला; केस दर्ज

मऊगंज के वार्ड नंबर 12 स्थित तेलियान टोला घुरेहटा में गोवंश की हत्या का मामला सामने आया है। पुलिस ने खबर मिलते ही मौके पर दबिश दी और एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के घर से करीब 10 किलो मांस, गोवंश का एक पैर और मांस काटने वाला धारदार गड़ासा बरामद हुआ है। पुलिस को सूचना मिली थी कि स्थानीय निवासी मोहम्मद शरीफ उर्फ शरीफ खान अपने घर में गोवंश की हत्या कर रहा है। मऊगंज थाना प्रभारी संदीप भारतीय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और आरोपी को हिरासत में ले लिया। पुलिस फिलहाल आरोपी से पूछताछ कर रही है। मांस के नमूने जांच के लिए भेजे गए पकड़े गए मांस की पुष्टि के लिए पशु चिकित्सा विभाग को जानकारी दे दी गई है। मांस के नमूने लैब में परीक्षण के लिए भेजे जा रहे हैं। पुलिस ने मंगलवार 24 फरवरी को शाम 4 बजे केस दर्ज कर लिया है और यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस काम में और कौन-कौन शामिल है।
नकली शकरकंद: सावधान! बाजार में बिक रहा नकली शकरकन्द, घर पर ऐसे करें असली की पहचान

नकली शकरकंद | छवि: फ्रीपिक नकली शकरकंद: शकरकंद को आम तौर पर हेल्थमंद और मशरिक आहार माना जाता है, लेकिन अब यही सुपरफूड उत्पाद की वजह से चर्चा में चल रहा है। बहुउद्देश्यीय सामानों के बाजार में नकली और केमिकल मिले शकरकन्द सोलन जाने की खबरें सामने आई हैं। भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण एफएसएसएआई ने चेतावनी दी है कि शक्रकंद में खतरनाक केमिकल रोडामिन बी के उत्पाद जा रहे हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद नुकसानदेह है। आइए जानते हैं कि नकली शकरकन्द को घर पर कैसे पहचाना जा सकता है। रोडामिन बी क्या होता है? बीमामिन एक रसायनिक रंग है, जिसका उपयोग कपड़ा, कागज, सामान और प्रयोगशाला में किया जाता है। ये ख़ज़ाना नहीं चलता. FSSAI के अनुसार इस रसायन का सेवन गंभीर खतरा का कारण बन सकता है। इससे कैंसर, कैंसर और किडनी को नुकसान जैसे खतरे हो सकते हैं। इसलिए खाद्य वस्तुओं में इसका उपयोग पूरी तरह से असुरक्षित माना जाता है। घर पर ऐसे करें शकरकन्द की जांच उत्पादी शकरकन्द की पहचान घर पर काफी आसान तरीके से की जा सकती है। इसके लिए थोड़ा सा पानी या वनस्पति तेल लें और इसमें रुई सोर्स लें। अब इस रुई को शकरकन्द के ऊपर थोड़ी देर तक राँगें। अगर शक्रकंद नहीं आया तो रुई का रंग नहीं बदलेगा। लेकिन अगर इसमें रोडामिन बी मिला हुआ है तो रुई लाल या ब्लू कलर की होगी। पोषण से भरपूर होता है शकरकंद शकरकन्द कई आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होता है। 100 ग्राम शकरकन्द में लगभग 80 से 86 कैलोरी, 20 ग्राम कार्बोहाइड्रेट, 4 ग्राम कार्बोहाइड्रेट और 1 से 2 ग्राम प्रोटीन होता है। इसमें विटामिन ए के अलावा विटामिन सी, कैल्शियम और कैल्शियम की अच्छी मात्रा पायी जाती है। शकरकंद में कई तरह के तत्व शामिल किये जा सकते हैं- शकरकंद चिप्सआदर्श वाक्य में विजिबिलिटी एयर फ्राई या मोटोरोला द्वारा रेडिएशन तैयार किया जा सकता है। शकरकन्द स्टुटमसाले को टमाटर, प्याज और मसालों की ग्रेवी के साथ पकाकर मिशिगन स्टूडियो बनाया जा सकता है। फिर हुआ शकरकन्दइसे कुरकुरे से बनाया जा सकता है। शहद पोनी शकरकंदकच्चे माल को शहद और दालचीनी के साथ मिश्रित और मोर्टार से तैयार किया जा सकता है। भरवां शकरकन्दचीज़, प्लांटेशन और प्लास्टिक की फिलिंग के साथ यह एक भरपेट और मैकेनिकल विकल्प बन जाता है। यह भी पढ़ें:गोविंद नामदेव ने प्लास्टिक बॉलीवुड इंडस्ट्री की पोल, फ्रैंक की बात
श्रद्धालुओं का बैग चुराने वाले पति-पत्नी गिरफ्तार:ओंकारेश्वर में 4.5 लाख के गहने-मोबाइल किए थे पार; 100 CCTV फुटेज खंगालने पर खुला राज

ओंकरेश्वर की ब्रह्मपुरी पार्किंग में एक श्रद्धालु के बैग से 4 लाख 50 हजार रुपए कीमत के सोने-चांदी के आभूषण, मोबाइल और नकदी चोरी करने वाले आरोपी पति-पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। 20 फरवरी 2026 को हुई इस वारदात के बाद मांधाता पुलिस ने खरगोन जिले से दोनों को पकड़ा और उनके पास से चोरी गया पूरा माल (मशरूका) बरामद कर लिया है। फिलहाल, दोनों आरोपियों को कोर्ट में पेश करने के बाद खंडवा की जिला जेल भेज दिया गया है। पुलिस के अनुसार, राजस्थान के सीकर जिले (थाना जीवन नगर, ग्राम दुजोद) निवासी 34 वर्षीय अविनाश ने 21 फरवरी को थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि 20 फरवरी को दोपहर करीब 3.15 बजे वे परिवार के साथ ओंकारेश्वर की ब्रह्मपुरी पार्किंग में मौजूद थे। तभी गोवर्धन होटल के पास रखा उनकी पत्नी साक्षी का लाल रंग का हैंडपर्स कोई अज्ञात व्यक्ति चुरा ले गया। इस पर्स में सोने की चार अंगूठियां, मंगलसूत्र, सोने की चेन, चांदी की पायल, एप्पल व मोटोरोला कंपनी के मोबाइल और नकदी रखी थी। 100 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाले, तब हुई पहचान शिकायत मिलने पर मांधाता थाना पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। पुलिस अधीक्षक मनोज राय, एएसपी राजेश रघुवंशी और एसडीओपी मनोहर गवली के निर्देशन में थाना प्रभारी अनोख सिंह सिंदया की एक टीम बनाई गई। टीम ने घटनास्थल और आसपास के करीब 100 से ज्यादा स्थानों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाले। फुटेज में संदिग्ध गतिविधियां दिखने पर साइबर सेल की मदद ली गई, जिससे आरोपियों की सटीक पहचान सुनिश्चित हो सकी। खरगोन के सिरलाय गांव से हुई गिरफ्तारी, आरोपी का पुराना रिकॉर्ड पहचान होने के बाद पुलिस ने खरगोन जिले के बड़वाह थाना क्षेत्र स्थित ग्राम सिरलाय से 40 वर्षीय गोवर्धन पिता श्रवण चौहान और उसकी 37 वर्षीय पत्नी उमाबाई को गिरफ्तार कर लिया। इनके कब्जे से चोरी किए गए 14 हजार रुपए नकद, चार सोने की अंगूठियां, एक सोने की चेन, एक मंगलसूत्र और चांदी की पायल बरामद कर ली गई है। पुलिस के मुताबिक, मुख्य आरोपी गोवर्धन के खिलाफ पहले भी धारा 420 और 511 के तहत आपराधिक मामले दर्ज हैं। कार्रवाई में इन पुलिसकर्मियों की रही भूमिका आरोपियों को पकड़ने और चोरी का माल बरामद करने की इस अहम कार्रवाई में टीआई अनोख सिंह सिंदया, एएसआई सतीश सोहनी, प्रधान आरक्षक भगवान धनगर, आरक्षक रवि, जितेंद्र, पवन महाजन, रोहित रघुवंशी और अनिल बारिया की विशेष भूमिका रही।
‘डब्ल्यू को हमेशा अंत में कहा जाता है’: ‘केरलम’ के बाद, सीएम ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल को ‘बांग्ला’ क्यों होना चाहिए | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:24 फ़रवरी 2026, 19:51 IST सीएम ममता बनर्जी ने “केरल के भाइयों और बहनों” को नाम परिवर्तन की सफलता के लिए बधाई देते हुए एक बार फिर पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने की ओर ध्यान आकर्षित किया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र के राजनीतिक दोहरे मानकों और उसके “बंगाली विरोधी” रुख की निंदा की। (छवि: पीटीआई/फ़ाइल) केरल का नाम बदलने को केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी के तुरंत बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को भाजपा के नेतृत्व वाले केंद्र के राजनीतिक दोहरे मानकों और उसके “बंगाली विरोधी” रुख की निंदा की। ‘केरलम’. बनर्जी ने कहा कि पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर ‘बांग्ला’ करने का लंबे समय से लंबित प्रस्ताव रुका हुआ है और राज्य वर्णमाला की कमी से जूझ रहा है, जो इसके लोगों के लिए पेशेवर बाधाओं का कारण बनता है। राज्य का नाम बदलने से यह आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और असम के बाद सूची में सबसे नीचे से चौथे स्थान पर पहुंच जाएगा। बनर्जी ने “केरल के भाइयों और बहनों” को उनकी सफलता के लिए बधाई देते हुए एक बार फिर ध्यान आकर्षित किया पश्चिम बंगाल का नाम बदलना. बनर्जी ने कहा, “मैं केरल के भाइयों और बहनों को राज्य का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने के फैसले पर बधाई देना चाहती हूं। संबंधित राज्य सरकारों द्वारा ऐसे प्रस्तावों का समर्थन किए जाने के बाद कई राज्यों के नाम बदल दिए जाते हैं। हालांकि, पश्चिम बंगाल के साथ ऐसा नहीं हुआ है।” उन्होंने कहा, “जब हमारे छात्र परीक्षा या साक्षात्कार के लिए जाते हैं, तो उन्हें अंत में बुलाया जाता है क्योंकि राज्य का नाम ‘डब्ल्यू’ से शुरू होता है, जो वर्णमाला के अंत की ओर है। मुझे भी इसी समस्या का सामना करना पड़ता है और बोलने का मौका हमेशा अंत में आता है क्योंकि मैं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री हूं।” बनर्जी ने कहा कि राज्य का नाम बदलने का प्रयास बंगाल की सांस्कृतिक पहचान को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करने और 1947 के विभाजन की ऐतिहासिक विरासत से आगे बढ़ने की इच्छा में गहराई से निहित है। उन्होंने कहा, “राज्य की संस्कृति के आधार पर, हम पश्चिम बंगाल का नाम बदलकर बांग्ला करना चाहते थे। इस संबंध में, हमने विधान सभा में दो बार प्रस्ताव पारित किया है। जब हमें बताया गया कि राज्य का नाम हिंदी, बंगाली और अंग्रेजी में एक ही होना चाहिए, तो हमने राज्य का नाम तीनों भाषाओं में बांग्ला करने के लिए फिर से एक प्रस्ताव पारित किया।” विशेषज्ञों ने तर्क दिया है कि उपसर्ग “पश्चिम” एक दर्दनाक युग की अप्रचलित याद दिलाता है, विशेष रूप से “पूर्वी बंगाल” अब अस्तित्व में नहीं है, जो पूर्वी पाकिस्तान बन गया है और बाद में बांग्लादेश का स्वतंत्र राष्ट्र बन गया है। यह भी पढ़ें | केरलम लोड हो रहा है: कैसे संविधान केरल का नाम बदलने को नियंत्रित करता है | व्याख्या की ‘बंगाली विरोधी, बीजेपी और सीपीआईएम के बीच बढ़ रहा गठबंधन’ बनर्जी ने भाजपा पर कटाक्ष करते हुए पार्टी पर ”बंगाली विरोधी” होने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मुद्दे को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के समक्ष बार-बार उठाने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने कहा, “वे बंगाल के प्रतीकों और दूरदर्शी लोगों का अनादर करते हैं। वे चुनावी लाभ पाने के लिए चुनावों के दौरान केवल ‘बांग्ला’ शब्द का इस्तेमाल करते हैं।” उन्होंने दावा किया कि केरल के नाम परिवर्तन को मंजूरी भाजपा और सीपीआईएम के बीच बढ़ते गठबंधन के कारण मिली है। उन्होंने कहा, “केरल का नाम बदल दिया गया है क्योंकि वहां बीजेपी और सीपीआईएम के बीच गठबंधन बढ़ रहा है।” उन्होंने कहा कि यह साझेदारी “अब अलिखित नहीं है”। मुख्यमंत्री ने सवाल किया कि बंगाल को हमेशा अभाव का सामना क्यों करना पड़ता है और विश्वास जताया कि भविष्य में नाम परिवर्तन सफल होगा। उन्होंने कहा, “एक दिन, आप (भाजपा) सत्ता में नहीं रहेंगे। हम नाम बदल देंगे।” क्या है ‘बांग्ला’ मांग का इतिहास? 1999: पश्चिम बंगाल का नाम बदलने की यात्रा 1999 से शुरू होती है, जब ज्योति बसु के नेतृत्व वाली वाम मोर्चा सरकार सत्ता में थी। राज्य का नाम ‘बांग्ला’ करने का प्रस्ताव – विडंबना यह है कि तत्कालीन कांग्रेस विधायक सौगत रॉय ने सुझाव दिया था – सर्वसम्मति से पारित किया गया। तत्कालीन एनडीए सरकार ने पड़ोसी देश बांग्लादेश के साथ संभावित भ्रम का हवाला देते हुए इस कदम को रोक दिया। 2011: 2011 में पहली बार सत्ता में आने पर, ममता बनर्जी की सरकार ने सभी भाषाओं में ‘पश्चिमबंगा’ नाम का इस्तेमाल करने का प्रस्ताव रखा, लेकिन केंद्रीय स्तर पर इसे भी रोक दिया गया। 2016: राज्य ने 2016 में एक अद्वितीय तीन-नाम समाधान प्रस्तावित किया: बंगाली में ‘बांग्ला’, अंग्रेजी में ‘बंगाल’ और हिंदी में ‘बंगाल’। हालाँकि, केंद्र ने इसे इस आधार पर खारिज कर दिया कि एक ही राज्य के अलग-अलग भाषाओं में कई आधिकारिक नाम नहीं हो सकते। 2018: केंद्र की प्रतिक्रिया के बाद, बंगाल विधानसभा ने जुलाई 2018 में राज्य का नाम बदलकर तीनों भाषाओं में ‘बांग्ला’ करने के लिए एक नया प्रस्ताव पारित किया। लेकिन उस संबंध में कुछ भी नहीं किया गया है, केंद्र सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बांग्लादेश के साथ ध्वन्यात्मक समानता पर चिंताओं का हवाला दिया है। पहले प्रकाशित: 24 फ़रवरी 2026, 19:41 IST समाचार राजनीति ‘डब्ल्यू को हमेशा अंत में कहा जाता है’: ‘केरलम’ के बाद, सीएम ममता ने कहा कि पश्चिम बंगाल को ‘बांग्ला’ क्यों होना चाहिए अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल का नाम बदलना(टी)ममता बनर्जी(टी)बांग्ला नाम बदलना(टी)बंगाली विरोधी रुख(टी)बीजेपी केंद्र के दोहरे मापदंड(टी)केरल केरलम का नाम बदलना(टी)वर्णमाला संबंधी नुकसान पश्चिम बंगाल(टी)बंगाल सांस्कृतिक पहचान
‘तुम कभी मां नहीं बन सकती’, 16 की उम्र में सुना था ये दर्दनाक सच, बिना यूटरस के फिर कैसे हुई प्रेगनेंट?

Last Updated:February 24, 2026, 19:31 IST ब्रिटेन में एक ऐसी खुशखबरी सामने आई है जिसे लोग मेडिकल चमत्कार कह रहे हैं. जन्म से गर्भाशय न होने के बावजूद एक महिला ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया है. यह संभव हो पाया एक मृत डोनर द्वारा दान किए गए गर्भाशय की मदद से. इस अनोखी सफलता ने न सिर्फ डॉक्टरों को गर्व महसूस कराया है, बल्कि हजारों महिलाओं के दिल में नई उम्मीद भी जगा दी है. ख़बरें फटाफट ब्रिटेन में एक ऐसी घटना हुई है जिसे लोग सच में चमत्कार मान रहे हैं. एक महिला, जिनके पास जन्म से गर्भाशय नहीं था, आज एक स्वस्थ बच्चे की मां बन चुकी हैं. यह संभव हो पाया क्योंकि उन्हें एक मृत महिला द्वारा दान किया गया गर्भाशय सर्जरी के जरिए लगाया गया था. ब्रिटेन में यह पहला मामला है जब इस तरह किसी मृत डोनर की मदद से महिला ने बच्चे को जन्म दिया है. SkyNews की रिपोर्ट के अनुसार, इस बच्चे का नाम ह्यूगो पावेल रखा गया है. उसका जन्म दिसंबर में लंदन के एक अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए हुआ. जन्म के समय उसका वजन करीब 3 किलो था. बच्चे की मां ग्रेस बेल को 16 साल की उम्र में पता चला था कि उन्हें एक दुर्लभ समस्या है, जिसमें गर्भाशय ठीक से बना ही नहीं था. उस समय डॉक्टरों ने साफ कह दिया था कि वह कभी खुद से गर्भधारण नहीं कर पाएंगी. ग्रेस के लिए यह खबर बहुत बड़ा झटका थी. वह बताती हैं कि उस दिन वह अस्पताल के वॉशरूम में जाकर खूब रोई थीं. उन्हें लगा था कि मां बनने का सपना हमेशा के लिए खत्म हो गया है. लेकिन समय के साथ उन्होंने हिम्मत नहीं हारी. जब उन्होंने विदेश में हुए ऐसे सफल इलाज के बारे में पढ़ा, तो उनके मन में फिर से उम्मीद जगी. बाद में जब उनके देश में भी यह इलाज शुरू हुआ, तो उन्होंने इसमें हिस्सा लेने का फैसला किया. About the Author Vividha Singh विविधा सिंह न्यूज18 हिंदी (NEWS18) में पत्रकार हैं. इन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में बैचलर और मास्टर्स की डिग्री हासिल की है. पत्रकारिता के क्षेत्र में ये 3 वर्षों से काम कर रही हैं. फिलहाल न्यूज18…और पढ़ें Location : New Delhi,Delhi First Published : February 24, 2026, 19:31 IST
डायबिटीज मरीज भी रख सकते हैं रोजा? किन बातों का रखें ध्यान, वरना दिन में दिखेंगे तारे, डॉक्टर से जानें

Last Updated:February 24, 2026, 18:17 IST रोजे में खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. रोजे के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. लोकल 18 ने इस बारे में अलीगढ़ के डायबिटीज स्पेशलिस्ट डॉ. हामिद अशरफ से बात की. वे बताते हैं कि अगर रमजान में डायबिटीज मरीज रोजे रख रहे हैं तो कुछ बातों का ध्यान रखें. ऐसा करना क्यों जरूरी है, आइये जानते हैं. अलीगढ़. रमजान का पवित्र महीना 19 फरवरी से शुरू हो चुका है, जिसमे पूरे 30 रोजे रखे जाएंगे. इन 30 दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है. इस्लाम को मानने वाले सभी लोग इस दौरान उपवास रखते हैं, जिसे रोजा कहा जाता है. पवित्र कुरान के अनुसार, बीमार लोगों को उपवास करना जरूरी नहीं है, लेकिन कई लोग डायबिटीज होने पर भी पूरे महीने रोजा रखते हैं. वैसे तो शुगर की समस्या होने पर खाने-पीने के साथ कोई समझौता नहीं करना चाहिए. लेकिन कुछ बातों का ध्यान रखकर डायबिटीज के मरीज भी रोजा रख सकते हैं. सबसे पहले ये काम रमजान में रोजा कितने घंटे का होगा यह सूर्योदय और सूर्यास्त पर निर्भर करता है. रोजे में सुबह की पहली किरण से लेकर सूरज डूबने तक कुछ भी नहीं खाया जाता है. खाने के बीच लंबा अंतराल शरीर के अंदर पाचन तंत्र में बदलाव ला सकता है, जो डायबिटीज मरीजों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. ऐसी समस्या से बचने के लिए डायबिटीज मरीज डॉक्टर से सलाह ले सकते हैं. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के डायबिटीज के स्पेशलिस्ट डॉक्टर हामिद अशरफ बताते हैं कि शुगर रोगी भी रोजे रख सकते हैं, मगर इसके लिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है ताकि स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर न पड़े. डॉ. हामिद बताते हैं कि उपवास के दौरान शुगर स्तर में काफी बदलाव आ जाता है. इससे मरीज को हाइपोग्लाइसीमिया हो सकता है. यह अचानक ब्लड शुगर कम होने का संकेत होता है और मरीज बेहोश हो सकता है. इसका मतलब होता है कि खून में शुगर का अचानक बढ़ जाना जिससे कमजोरी, प्यास, सिर दर्द और नजर में धुंधलापन आ सकता है. इस समस्या को इंसुलिन की उचित मॉनिटरिंग करके स्थिति को संभाल जा सकता है. रमजान के दौरान डायबिटीज के मरीज अगर रोजे रखे जा रहे हैं तो शुरुआत से पहले ब्लड शुगर की जांच जरूर करें. उपवास में डिहाइड्रेशन एक सामान्य और गंभीर जोखिम है, जिसका सामना विशेष रूप से मधुमेह के रोगियों को करना पड़ता है. ऐसे में नींबू पानी, छाछ, नारियल का पानी, खरबूजे, कम चीनी वाले ताजे फलों का रस, गुलाब के शरबत का पर्याप्त सेवन करें. टाइप वन व टाइप टू मधुमेह रोगी अथवा जिन्हें निरंतर इंसुलिन लेने की जरूरत होती है, उनके लिए थोड़े-थोड़े अंतराल के बाद अपने रक्त में ग्लूकोज की निगरानी करना जरूरी है. अगर मरीज का शुगर 70 से कम हो या 300 से अधिक पहुंच जाए तो उसे तुरंत रोजा खोल लेना चाहिए. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें Location : Aligarh,Uttar Pradesh First Published : February 24, 2026, 18:17 IST
लोकसभा अध्यक्ष ने 64 पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स बनाए:हर ग्रुप में एक लीडर समेत 11 सांसद; फ्रांस में थरूर, जापान में अखिलेश यादव नेतृत्व करेंगे

लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने मंगलवार को 64 देशों के साथ पार्लियामेंट्री फ्रेंडशिप ग्रुप्स (PFG) का गठन किया है। इन ग्रुप्स का मकसद दूसरे देशों के साथ संसदीय कूटनीति को मजबूत करना और वैश्विक मंच पर भारत की संसद की एकजुट लोकतांत्रिक आवाज पेश करना है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि ऑपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद PM मोदी ने भारत और अन्य देशों के बीच संवाद बढ़ाने के लिए PFG बनाने का प्रस्ताव दिया था। अब लोकसभा अध्यक्ष ने इसका गठन किया है। 64 ग्रुप्स में लोकसभा और राज्यसभा के कुल 704 सांसद हैं। हर ग्रुप में एक लीडर और 10 सदस्य हैं। इनमें भाजपा के सबसे ज्यादा 30 ग्रुप लीडर हैं। कांग्रेस के 10, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 3-3 सांसद ग्रुप लीडर बनाए गए हैं। भाजपा की तरफ से ग्रुप लीडर्स में हेमा मालिनी, मनोज तिवारी, निशिकांत दूबे जैसे बड़े नाम शामिल हैं। कांग्रेस से शशि थरूर, TMC से अभिषेक बनर्जी और AIMIM चीफ असदुद्दीन औवेसी भी ग्रुप लीडर बनाए गए हैं। हालांकि, PFG के सदस्य कैसे काम करेंगे, अभी इसकी औपचारिक जानकारी नहीं दी गई है। ऑपरेशन सिंदूर : 59 सदस्यों का डेलिगेशन 33 देशों में गया था केंद्र सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के बाद दुनियाभर में भारत का पक्ष रखने के लिए 17 मई 2025 को 59 सदस्यों वाले डेलिगेशन की घोषणा की थी। इसमें 51 नेता और 8 राजदूत थे। NDA के 31 और 20 दूसरे दलों के नेता थे, जिसमें 3 कांग्रेस नेता भी थे। ये डेलिगेशन दुनिया के 33 देशों, खासकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के सदस्य देशों में गया और वहां ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर भारत का पक्ष रखा। इस डेलिगेशन को 7 ग्रुप में बांटा गया था। हर ग्रुप में एक सांसद को लीडर बनाया गया। प्रत्येक ग्रुप 8 से 9 सदस्य थे। इनमें 6-7 सांसद, सीनियर लीडर (पूर्व मंत्री) और राजदूत शामिल थे। 7 डेलिगेशन ने दुनिया को 5 संदेश दिए आतंकवाद पर जीरो टॉलरेंस : इसमें बताया कि ऑपरेशन सिंदूर आतंकी गुटों और उनके ढांचों के खिलाफ था। आतंकी अड्डों को नपी-तुली कार्रवाई में निशाना बनाया गया। पाक सेना ने इसे खुद के खिलाफ हमला माना और पलटवार किया। पाक आतंक का समर्थक : सांसद कुछ सबूत लेकर गए, जिनमें उन्होंने बताया कि पहलगाम हमले में पाक समर्थित आतंकी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) की भूमिका थी। इससे पहले हुए हमलों का भी पूरा चिट्ठा सांसद लेकर गए थे। भारत जिम्मेदार और संयमित : भारत ने सैन्य कार्रवाई में भी जिम्मेदारी और संयम का परिचय दिया। यह सुनिश्चित किया कि पाक के किसी निर्दोष नागरिक की जान न जाए। पाक ने कार्रवाई रोकने का जब आग्रह किया तो भारत ने उसे तत्परता से स्वीकारा। आतंक के खिलाफ विश्व एकजुट हो : सांसद ने इन देशों से आतंकवाद के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने और इससे निपटने के लिए सहयोग व समर्थन की मांग की। अपील की कि भारत-पाक के विवाद को आतंकवाद के खिलाफ युद्ध के तौर पर देखें। पाक को लेकर हमारी नीति : यह बताया कि पाक के खिलाफ भारत ने अपना बदला हुआ दृष्टिकोण उजागर किया है। भारत सीमा पार से पैदा होने वाले खतरे को लेकर उदासीन रहने के बजाए प्रो-एक्टिव रवैया अपनाएगा और आतंकी हमलावरों को पहले ही निष्क्रय करेगा। ——————— ये खबर भी पढ़ें… केरल का नाम अब केरलम, कैबिनेट की मंजूरी: सेवातीर्थ में पहली मीटिंग; रेल-मेट्रो और एयरपोर्ट प्रोजेक्ट्स के लिए ₹12,236 करोड़ मंजूर पीएम नरेंद्र मोदी के नए ऑफिस सेवा तीर्थ में मंगलवार को केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक हुई। इसमें कुल 12,236 करोड़ के प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है। कैबिनेट ने मध्य प्रदेश, बिहार और झारखंड में तीन रेल प्रोजेक्ट समेत कुल 8 फैसले लिए हैं। बैठक में पावर सेक्टर में सुधारों पर पॉलिसी से जुड़े फैसले हुए और केरल सरकार के राज्य का नाम बदलकर केरलम करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई। पूरी खबर पढ़ें…







