Wednesday, 21 Oct 2026 | 11:05 AM

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महायज्ञ के साथ समापन:डबरा में नवग्रह शक्ति पीठ के पट खुले

महायज्ञ के साथ समापन:डबरा में नवग्रह शक्ति पीठ के पट खुले

नवग्रह शक्ति पीठ पर 10 दिनों से चल रहे धार्मिक अनुष्ठान का शुक्रवार को नवग्रह प्राण-प्रतिष्ठा और महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पट श्रद्धालुओं के लिए खोले गए। शारदा पीठ के शंकराचार्य स्वामी सदानंद सरस्वती ने इसे ईश्वरीय कृपा बताते हुए सत्कर्म और मंदिर निर्माण का संदेश दिया।

सभी केस हाईकोर्ट लौटे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-MP में OBC आरक्षण पर फैसला हाईकोर्ट करे

सभी केस हाईकोर्ट लौटे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-MP में OBC आरक्षण पर फैसला हाईकोर्ट करे

मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को मप्र हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले से जुड़ी अपीलें, विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) और हाईकोर्ट से ट्रांसफर हुए सभी केसों पर अब हाईकोर्ट को ही सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि आरक्षण मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) गठित की जाए। यह पीठ तीन माह के भीतर सभी विवादों का अंतिम निपटारा करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति की वैधता की जांच संबंधित राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए हाईकोर्ट ही उपयुक्त मंच है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने यह अधिकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की विशेष पीठ को दिया है कि वह विभिन्न पक्षों द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर निर्णय ले। यानी भर्ती प्रक्रियाओं पर लगी रोक हटेगी या नहीं, इसका फैसला अब हाईकोर्ट की नई स्पेशल बेंच करेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास लंबित सभी याचिकाओं और कार्यवाहियों का निपटारा कर दिया। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने का तर्क देते हुए नियुक्तियों की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा- राज्य की सामाजिक संरचना पर हाईकोर्ट ही करे परीक्षण सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीति राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों पर आधारित होती है। इसलिए छत्तीसगढ़ की स्थिति मप्र के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकती। बिना हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में परीक्षण उचित नहीं है। अभी कहां-कितना आरक्षण क्या है मुख्य विवाद

इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर बहस:कैलाश बोले- भागीरथपुरा मुंबई के धारावी जैसा, लोग अशिक्षित

इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर बहस:कैलाश बोले- भागीरथपुरा मुंबई के धारावी जैसा, लोग अशिक्षित

इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से हुई मौतों पर शुक्रवार को विधानसभा में तीखी बहस हुई। नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने पहली बार सदन में बयान देते हुए भागीरथपुरा की तुलना मुंबई की धारावी से की। उन्होंने कहा कि यह 80-90 साल पुरानी बस्ती है और मिनी धारावी जैसी परिस्थितियां हैं। वहां कुछ अशिक्षित लोग रहते हैं, जिससे नगर निगम के लिए हर दृष्टि से व्यवस्थित काम करना कठिन हो जाता है। इन हालात में कर्मचारी भी प्रॉपर काम नहीं कर पाते थे। मंत्री ने घटना को इंदौर के लिए कलंक और व्यक्तिगत आत्मग्लानि का विषय बताया। उन्होंने माना कि भागीरथपुरा के लोगों और स्थानीय पार्षद ने दूषित पानी की शिकायत की थी। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद काम शुरू होने में देरी हुई। कांग्रेस द्वारा किए गए धरना-प्रदर्शन को उन्होंने अशोभनीय बताते हुए कहा कि जहां मरहम की जरूरत थी, वहां “लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकी गईं।” उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई की गई है और इसमें किसी जाति को नहीं देखा गया। नेता प्रतिपक्ष ने कहा- मंत्री जी, गिनती मत करिए, लेकिन गिल्टी तो फील करिए नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने आरोपों का जवाब देते हुए कहा कि वे संवेदना व्यक्त करने गए थे, राजनीति करने नहीं। इंदौर में घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं, एक रात में 5 करोड़ की सीवर लाइन डल जाती है। हाईकोर्ट ने हालात को हेल्थ इमरजेंसी जैसा बताया और दखल देना पड़ा। 35 से ज्यादा मौतें हुईं, सरकार 22 पर अटकी है। गिनती मत करिए, लेकिन गिल्टी तो फील करिए। आरोप लगाया कि कार्रवाई जाति देखकर की गई। दलित-आदिवासी अधिकारियों को हटाया गया, बाकी को सिर्फ ट्रांसफर किया गया। पार्षद द्वारा एक साल से गंदे पानी पर लिखे पत्रों की अनदेखी का भी मुद्दा उठाया गया। लखन घनघोरिया ने जबलपुर के गंदे पानी के सैंपल दिखाए, जबकि जयवर्धन सिंह ने कहा कि अवॉर्ड लेने में नेता आगे रहते हैं, तो विफलता पर जिम्मेदारी भी लें।

जरूरत की खबर- बच्चों में एकेडमिक स्ट्रेस:इससे बढ़ती जवानी में डिप्रेशन और बीमारियों का रिस्क, डॉक्टर से जानें कैसे करें बचाव

जरूरत की खबर- बच्चों में एकेडमिक स्ट्रेस:इससे बढ़ती जवानी में डिप्रेशन और बीमारियों का रिस्क, डॉक्टर से जानें कैसे करें बचाव

बोर्ड एग्जाम्स शुरू हो गए हैं। ये सीजन आते ही लाखों घरों में सिलेबस, टेस्ट सीरीज, रिवीजन प्लान और रिजल्ट की चिंता का माहौल बन जाता है। पढ़ाई में हल्का-फुल्का तनाव होना सामान्य है, लेकिन जब इसका प्रेशर दिमाग और शरीर, दोनों पर लगातार असर डालने लगे, तो ये गंभीर समस्या बन सकती है। रिसर्च जर्नल ‘द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोल्सेंट हेल्थ’ में पब्लिश हालिया स्टडी के मुताबिक, 15 साल की उम्र में पढ़ाई को लेकर ज्यादा चिंता आगे चलकर डिप्रेशन और सेल्फ-हार्म के जोखिम को बढ़ा सकती है। इसलिए आज जरूरत की खबर में जानेंगे कि- एक्सपर्ट: डॉ. अमिता श्रृंगी, साइकोलॉजिस्ट, फैमिली एंड चाइल्ड काउंसलर, जयपुर डॉ. भास्कर शुक्ला, सीनियर कंसल्टेंट, न्यूरोलॉजी, पीएसआरआई हॉस्पिटल, दिल्ली सवाल- साइकोलॉजी में एक टर्म है ‘एकेडमिक स्ट्रेस।’ ये क्या होता है? जवाब- एकेडमिक स्ट्रेस वह साइकोलॉजिकल प्रेशर है, जो छात्र पढ़ाई के कारण महसूस करते हैं। इसमें ज्यादा सिलेबस, लगातार परीक्षाएं, क्लास में कंपटीशन, अच्छे नंबर लाने का दबाव और माता-पिता या शिक्षकों की अपेक्षाएं शामिल होती हैं। लंबे समय में ये तनाव बच्चे की भावना, सोच और शरीर तीनों को प्रभावित कर सकता है। जैसेकि– जब यह दबाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा के कामकाज को प्रभावित करे, तो इसे एकेडमिक स्ट्रेस कहते हैं। सवाल- एकेडमिक स्ट्रेस को लेकर हाल ही में हुई रिसर्च क्या कहती है? जवाब- जर्नल ‘द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोल्सेंट हेल्थ’ में जो स्टडी पब्लिश हुई, उसमें करीब 5,000 बच्चों को किशोरावस्था से युवावस्था तक ट्रैक किया गया। स्टडी में देखा गया कि 15 साल की उम्र में परीक्षा/स्कूल प्रेशर ज्यादा होने पर 16 साल की उम्र तक डिप्रेशन का जोखिम 25% और सेल्फ-हार्म का रिस्क 8% बढ़ जाता है। यह प्रभाव 20 के दशक यानी 20-30 साल की उम्र तक रहता है। स्टडी में ये भी बताया गया है कि ज्यादा एकेडमिक स्ट्रेस से 24 साल तक सुसाइड अटेम्प्ट का खतरा भी 16% बढ़ता है। सवाल- बच्चों को एकेडमिक स्ट्रेस क्यों होता है? जवाब- बच्चों को एकेडमिक स्ट्रेस अचानक नहीं होता, बल्कि कई छोटे-छोटे कारण मिलकर इसे बढ़ाते हैं। पढ़ाई का दबाव, अपेक्षाएं और लाइफस्टाइल से जुड़ी आदतें मिलकर बच्चे की मानसिक सेहत पर असर डालती हैं। आइए ग्राफिक में समझते हैं कि एकेडमिक स्ट्रेस के प्रमुख कारण क्या हैं। सवाल- किस हद तक एकेडमिक स्ट्रेस का होना नॉर्मल है? यह क्रॉनिक और चिंताजनक कब बन जाता है? जवाब- हल्के से मध्यम स्तर का पढ़ाई का तनाव सामान्य माना जाता है। इसे ‘यू-स्ट्रेस’ कहा जाता है। यह तनाव छात्रों को प्रेरित करता है, याददाश्त को मजबूत बनाता है और परीक्षा के समय प्रदर्शन को बेहतर करता है। लेकिन जब तनाव हफ्तों या महीनों तक लगातार बना रहे, नींद और भूख पर असर डाले, आत्मविश्वास कम कर दे तो यह क्रॉनिक तनाव बन जाता है। ग्राफिक से एकेडमिक स्ट्रेस नॉर्मल है या क्रॉनिक, इसके फर्क को समझते हैं- सवाल- कैसे पता चलेगा कि किसी बच्चे को क्रॉनिक एकेडमिक स्ट्रेस है? जवाब- बच्चे कभी-कभी पढ़ाई को लेकर तनाव महसूस करते हैं। लेकिन जब यह तनाव लंबे समय तक बना रहे और उसकी सेहत व व्यवहार पर असर डालने लगे, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। कुछ फिजिकल और इमोशनल सिग्नल बताते हैं कि बच्चा क्रॉनिक एकेडमिक स्ट्रेस से गुजर रहा है। आइए ग्राफिक में ऐसे ही संकेतों को समझते हैं। सवाल- क्या यंग एज में एकेडमिक स्ट्रेस के कारण आगे चलकर डिप्रेशन का जोखिम बढ़ सकता है? जवाब- हां, लंबे समय तक परफॉर्मेंस प्रेशर, असफलता का डर और सेल्फ डाउट ब्रेन के स्ट्रेस-रिस्पॉन्स सिस्टम को ओवरएक्टिव कर देते हैं, जिससे कॉर्टिसोल (स्ट्रेस हॉर्मोन) का स्तर लगातार बढ़ा रहता है। समय के साथ यह असंतुलन बढ़ता जाता है। बच्चा निराश रहने लगता है। कामों में रुचि कम हो जाती है, थकान बनी रहती है और नकारात्मक सोच हावी होने लगती है। यही लक्षण आगे चलकर डिप्रेशन का जोखिम बढ़ाते हैं। सवाल- डिप्रेशन नॉर्मल स्ट्रेस से अलग कैसे है? दोनों के बीच के फर्क को कैसे पहचानें? जवाब- आइए पॉइंटर्स से दोनों में फर्क को समझते हैं- सवाल- यंग एज में क्रॉनिक एकेडमिक स्ट्रेस बच्चों की ब्रेन फंक्शनिंग को कैसे प्रभावित करता है? जवाब- लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कॉर्टिसोल का स्तर बढ़ा रहता है। यह याददाश्त और सीखने से जुड़े ब्रेन के हिस्से ‘हिप्पोकैंपस’ को कमजोर कर सकता है। साथ ही निर्णय लेने और फोकस के लिए जिम्मेदार ‘प्री फंटल कॉर्टेक्स‘ की फंक्शनिंग घट सकती है, जबकि भावनाओं और डर को नियंत्रित करने वाला ‘एमिगडेला‘ अधिक सक्रिय हो सकता है। इसका असर फोकस, मेमोरी, इमोशनल बैलेंस और आत्मविश्वास पर पड़ता है। इससे लंबे समय में एंग्जाइटी, बर्नआउट या डिप्रेशन का जोखिम बढ़ जाता है। सवाल- क्या सोशल मीडिया का ज्यादा इस्तेमाल भी एकेडमिक स्ट्रेस को बढ़ा सकता है? जवाब- हां, लगातार दूसरों की उपलब्धियों, रिजल्ट्स, ‘परफेक्ट लाइफस्टाइल‘ और तुलना की भावना से परफॉर्मेंस प्रेशर बढ़ता है। इससे सेल्फ डाउट और एंग्जाइटी पैदा हो सकती है। साथ ही देर रात तक स्क्रीन पर समय बिताने से नींद प्रभावित होती है। नोटिफिकेशन और लगातार डिजिटल डिस्ट्रैक्शन पढ़ाई के फोकस को कम करते हैं, जिससे काम अधूरा रह जाता है और डेडलाइन का दबाव और बढ़ जाता है। इससे एकेडमिक स्ट्रेस और बढ़ जाता है। सवाल- एकेडमिक स्ट्रेस के अलावा वो कौन से फैक्टर्स हैं, जो 20s में डिप्रेशन के रिस्क को बढ़ा सकते हैं? जवाब- 20 से 30 साल की उम्र बदलाव, करियर प्रेशर और रिश्तों के उतार-चढ़ाव से भरी होती है। सिर्फ एकेडमिक स्ट्रेस ही नहीं, बल्कि कई लाइफस्टाइल और बिहेवियरल फैक्टर्स भी इस दौरान मानसिक सेहत को प्रभावित करते हैं। आइए ग्राफिक में देखते हैं कि कौन-कौन से कारण डिप्रेशन का रिस्क बढ़ा सकते हैं। सवाल- यंग एज स्ट्रेस से आगे चलकर किन बीमारियों का रिस्क बढ़ जाता है? जवाब- कम उम्र में बार-बार या लंबे समय तक रहने वाला तनाव सिर्फ मानसिक असर तक सीमित नहीं रहता। यह शरीर के हॉर्मोन सिस्टम, नींद और मेटाबॉलिज्म को भी प्रभावित करता है। आइए ग्राफिक में समझते हैं कि यंग एज में ज्यादा तनाव आगे चलकर किन बीमारियों का जोखिम बढ़ा सकता है। सवाल- स्ट्रेस मैनेजमेंट के लिए बच्चों और बड़ों को क्या करना चाहिए? जवाब- स्ट्रेस को पूरी तरह खत्म करना संभव नहीं है। लेकिन

टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब; सूर्या नंबर-3 पर कर सकते हैं बल्लेबाजी

टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब; सूर्या नंबर-3 पर कर सकते हैं बल्लेबाजी

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोश्चेज ने भी माना है कि टीम को टर्निंग पिचों और बड़े मैदानों के लिए बेहतर रणनीति बनाने की जरूरत है। भारत का स्कोरिंग रेट बेहद कम टूर्नामेंट में भारत ने ऑफ स्पिन के खिलाफ सबसे ज्यादा 102 गेंदें खेलीं। 6 से ज्यादा ओवर ऑफ स्पिन खेलने वाली 13 टीमों में भारत का रन रेट केवल 6.23 रहा है। इस मामले में भारत से खराब प्रदर्शन सिर्फ नेपाल और ओमान का रहा। बाकी सभी टीमों ने ऑफ स्पिन के खिलाफ 8 या उससे ज्यादा के रन रेट से बल्लेबाजी की। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में 3 लेफ्ट हैंडर्स हैं। ऑफ स्पिन को टैकल करने के लिए नंबर-3 पर तिलक वर्मा की जगह कप्तान सूर्यकुमार यादव को बैटिंग करनी चाहिए। लेफ्टी बैटर्स के खिलाफ ऑफ स्पिन हथियार भारतीय टीम में ईशान किशन, तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा जैसे लेफ्टी बैटर्स ने विपक्षी कप्तानों का काम आसान कर दिया है। नीदरलैंड के आर्यन दत्त ने 4 ओवर में 19 रन देकर 2 विकेट लिए। उन्होंने अभिषेक शर्मा और ईशान किशन को पवेलियन पर भेजकर टीम इंडिया को शुरुआत में ही मुश्किल में डाल दिया था। अभिषेक बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए थे, जबकि ईशान किशन 7 गेंदों में 18 रन बना कर आउट हुए। वहीं नामीबिया के जेरार्ड इरास्मस ने भी भारतीय टॉप ऑर्डर को काफी परेशान किया। भारत का ऑफ स्पिन के खिलाफ औसत भी मात्र 13.25 का रहा है। यानी टीम इंडिया ऑफ स्पिनर्स के खिलाफ 14 रन बनाने में एक विकेट गंवा दे रही है। अभिषेक शर्मा की खराब शुरुआत अभिषेक शर्मा ने अपने वर्ल्ड कप करियर की शुरुआत बेहद खराब की। वे लगातार तीन पारियों में जीरो पर आउट हुए। इनमें से दो बार वे ऑफ स्पिनर के खिलाफ अटैकिंग शॉट खेलने के चक्कर में विकेट गंवा बैठे। वहीं, नंबर-3 पर खेलने वाले तिलक वर्मा ने अब तक सबसे ज्यादा 31 गेंदें ऑफ स्पिनर की खेली हैं, लेकिन वे केवल 26 रन ही बना पाए। सूर्या और तिलक के बैटिंग ऑर्डर में बदलाव पर चर्चा पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा का मानना है कि ऑफ स्पिन के खतरे से बचने के लिए भारत को नंबर-3 पर तिलक वर्मा की जगह सूर्यकुमार यादव को भेजना चाहिए। टीम इंडिया में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज होने की वजह से टीमें शुरुआती ओवरों में ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। टीमों की प्लानिंग रहती है कि पावरप्ले के शुरुआती 4 ओवर ऑफ स्पिन से कराए जाएं। अगर तीसरे नंबर पर सूर्यकुमार यादव बल्लेबाजी के लिए आते हैं, तो टीमों को अपनी स्ट्रैटजी बदलनी पड़ेगी। इससे भारत काफी हद तक ऑफ स्पिन के दबाव से बाहर निकल सकता है। सूर्या ने भी संघर्ष किया सूर्यकुमार यादव भी इस टूर्नामेंट में ऑफ स्पिन के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने 27 गेंदों में सिर्फ 28 रन बनाए। टीम मैनेजमेंट फिलहाल तिलक को नंबर-3 पर इसलिए बनाए हुए है, क्योंकि वे पावरप्ले में तेज गेंदबाजों के खिलाफ तेजी से रन बना रहे हैं। वहीं, सूर्यकुमार का प्रदर्शन डेथ ओवरों में ज्यादा प्रभावी रहा है, जहां वे लगभग 150 के स्ट्राइक रेट से रन बना रहे हैं। अभिषेक शर्मा को लेकर भी सलाह आकाश चोपड़ा का मानना है कि अभिषेक को ऑफ स्पिन के खिलाफ सीधे शॉट खेलने पर ध्यान देना चाहिए। अगर अभिषेक शुरुआत में एक-दो रन बनाकर खाता खोल लेते हैं, तो उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और वे जल्द ही अपनी लय हासिल कर लेंगे। पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान की भी यही राय है। उनका मानना है कि अभिषेक को अपने मेंटर युवराज सिंह से बात करनी चाहिए और ऑफ स्पिन के खिलाफ सीधे शॉट खेलने की स्ट्रैटजी अपनानी चाहिए, जिससे वे इस चुनौती के सामने बेहतर तरीके से निपट सकें। टेन डोश्चेट ने कहा कि अभिषेक अपनी काबिलियत जानते हैं। मैच से पहले उन्होंने नेट्स पर 90 मिनट तक पसीना बहाया और अपनी लय हासिल की। उन्हें बस थोड़े आत्मविश्वास की जरूरत है, उनका पिछला रिकॉर्ड ही उनकी ताकत है। सुपर-8 में चुनौती और बढ़ेगी भारत के ग्रुप की अन्य टीमें इस कमजोरी को भांप चुकी हैं। सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के पास ऐडन मार्करम, जिम्बाब्वे के पास सिकंदर रजा और वेस्टइंडीज के पास रोस्टन चेज जैसे अनुभवी ऑफ स्पिनर्स हैं। ये टीमें भारत के खिलाफ नई गेंद से भी ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर सकती हैं।

टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब; सूर्या नंबर-3 पर कर सकते हैं बल्लेबाजी

टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर की कमजोरी ऑफ-स्पिन:13 टीमों में भारत का स्कोरिंग रेट सबसे खराब; सूर्या नंबर-3 पर कर सकते हैं बल्लेबाजी

टी-20 वर्ल्ड कप 2026 के ग्रुप स्टेज में टीम इंडिया का प्रदर्शन शानदार रहा, लेकिन एक बड़ी कमजोरी भी सामने आई है। भारतीय टॉप ऑर्डर के पहले आठ बल्लेबाजों में से छह बाएं हाथ के हैं। टीमें इसी का फायदा उठाते हुए भारतीय बल्लेबाजों के खिलाफ लगातार ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। टीम इंडिया के असिस्टेंट कोच रयान टेन डोश्चेज ने भी माना है कि टीम को टर्निंग पिचों और बड़े मैदानों के लिए बेहतर रणनीति बनाने की जरूरत है। भारत का स्कोरिंग रेट बेहद कम टूर्नामेंट में भारत ने ऑफ स्पिन के खिलाफ सबसे ज्यादा 102 गेंदें खेलीं। 6 से ज्यादा ओवर ऑफ स्पिन खेलने वाली 13 टीमों में भारत का रन रेट केवल 6.23 रहा है। इस मामले में भारत से खराब प्रदर्शन सिर्फ नेपाल और ओमान का रहा। बाकी सभी टीमों ने ऑफ स्पिन के खिलाफ 8 या उससे ज्यादा के रन रेट से बल्लेबाजी की। क्रिकेट एक्सपर्ट्स का मानना है कि टीम इंडिया के टॉप ऑर्डर में 3 लेफ्ट हैंडर्स हैं। ऑफ स्पिन को टैकल करने के लिए नंबर-3 पर तिलक वर्मा की जगह कप्तान सूर्यकुमार यादव को बैटिंग करनी चाहिए। लेफ्टी बैटर्स के खिलाफ ऑफ स्पिन हथियार भारतीय टीम में ईशान किशन, तिलक वर्मा और अभिषेक शर्मा जैसे लेफ्टी बैटर्स ने विपक्षी कप्तानों का काम आसान कर दिया है। नीदरलैंड के आर्यन दत्त ने 4 ओवर में 19 रन देकर 2 विकेट लिए। उन्होंने अभिषेक शर्मा और ईशान किशन को पवेलियन पर भेजकर टीम इंडिया को शुरुआत में ही मुश्किल में डाल दिया था। अभिषेक बिना खाता खोले ही पवेलियन लौट गए थे, जबकि ईशान किशन 7 गेंदों में 18 रन बना कर आउट हुए। वहीं नामीबिया के जेरार्ड इरास्मस ने भी भारतीय टॉप ऑर्डर को काफी परेशान किया। भारत का ऑफ स्पिन के खिलाफ औसत भी मात्र 13.25 का रहा है। यानी टीम इंडिया ऑफ स्पिनर्स के खिलाफ 14 रन बनाने में एक विकेट गंवा दे रही है। अभिषेक शर्मा की खराब शुरुआत अभिषेक शर्मा ने अपने वर्ल्ड कप करियर की शुरुआत बेहद खराब की। वे लगातार तीन पारियों में जीरो पर आउट हुए। इनमें से दो बार वे ऑफ स्पिनर के खिलाफ अटैकिंग शॉट खेलने के चक्कर में विकेट गंवा बैठे। वहीं, नंबर-3 पर खेलने वाले तिलक वर्मा ने अब तक सबसे ज्यादा 31 गेंदें ऑफ स्पिनर की खेली हैं, लेकिन वे केवल 26 रन ही बना पाए। सूर्या और तिलक के बैटिंग ऑर्डर में बदलाव पर चर्चा पूर्व क्रिकेटर आकाश चोपड़ा का मानना है कि ऑफ स्पिन के खतरे से बचने के लिए भारत को नंबर-3 पर तिलक वर्मा की जगह सूर्यकुमार यादव को भेजना चाहिए। टीम इंडिया में कई बाएं हाथ के बल्लेबाज होने की वजह से टीमें शुरुआती ओवरों में ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर रही हैं। टीमों की प्लानिंग रहती है कि पावरप्ले के शुरुआती 4 ओवर ऑफ स्पिन से कराए जाएं। अगर तीसरे नंबर पर सूर्यकुमार यादव बल्लेबाजी के लिए आते हैं, तो टीमों को अपनी स्ट्रैटजी बदलनी पड़ेगी। इससे भारत काफी हद तक ऑफ स्पिन के दबाव से बाहर निकल सकता है। सूर्या ने भी संघर्ष किया सूर्यकुमार यादव भी इस टूर्नामेंट में ऑफ स्पिन के खिलाफ संघर्ष करते नजर आए। उन्होंने 27 गेंदों में सिर्फ 28 रन बनाए। टीम मैनेजमेंट फिलहाल तिलक को नंबर-3 पर इसलिए बनाए हुए है, क्योंकि वे पावरप्ले में तेज गेंदबाजों के खिलाफ तेजी से रन बना रहे हैं। वहीं, सूर्यकुमार का प्रदर्शन डेथ ओवरों में ज्यादा प्रभावी रहा है, जहां वे लगभग 150 के स्ट्राइक रेट से रन बना रहे हैं। अभिषेक शर्मा को लेकर भी सलाह आकाश चोपड़ा का मानना है कि अभिषेक को ऑफ स्पिन के खिलाफ सीधे शॉट खेलने पर ध्यान देना चाहिए। अगर अभिषेक शुरुआत में एक-दो रन बनाकर खाता खोल लेते हैं, तो उनका कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और वे जल्द ही अपनी लय हासिल कर लेंगे। पूर्व स्पिनर रविचंद्रन अश्विन और पूर्व तेज गेंदबाज इरफान पठान की भी यही राय है। उनका मानना है कि अभिषेक को अपने मेंटर युवराज सिंह से बात करनी चाहिए और ऑफ स्पिन के खिलाफ सीधे शॉट खेलने की स्ट्रैटजी अपनानी चाहिए, जिससे वे इस चुनौती के सामने बेहतर तरीके से निपट सकें। टेन डोश्चेट ने कहा कि अभिषेक अपनी काबिलियत जानते हैं। मैच से पहले उन्होंने नेट्स पर 90 मिनट तक पसीना बहाया और अपनी लय हासिल की। उन्हें बस थोड़े आत्मविश्वास की जरूरत है, उनका पिछला रिकॉर्ड ही उनकी ताकत है। सुपर-8 में चुनौती और बढ़ेगी भारत के ग्रुप की अन्य टीमें इस कमजोरी को भांप चुकी हैं। सुपर-8 में साउथ अफ्रीका के पास ऐडन मार्करम, जिम्बाब्वे के पास सिकंदर रजा और वेस्टइंडीज के पास रोस्टन चेज जैसे अनुभवी ऑफ स्पिनर्स हैं। ये टीमें भारत के खिलाफ नई गेंद से भी ऑफ स्पिन का इस्तेमाल कर सकती हैं। ——————————- क्रिकेट का कीड़ा है तो सॉल्व कीजिए ये सुपर क्विज क्या आप खुद को क्रिकेट के सुपर फैन मानते हैं? पूरे T20 वर्ल्ड कप टूर्नामेंट के दौरान दैनिक भास्कर के खास गेम ‘SUPER ओवर’ में रोज क्रिकेट से जुड़े 6 सवाल आपका क्रिकेट ज्ञान परखेंगे। जितनी जल्दी सही जवाब देंगे उतने ज्यादा रन बनेंगे। जितने ज्यादा रन बनेंगे, लीडरबोर्ड में उतना ही ऊपर आएंगे। तो रोज खेलिए और टूर्नामेंट का टॉप स्कोरर बनिए। अभी खेलें SUPER ओवर…क्लिक करें ————————————— स्पोर्ट्स की यह खबर भी पढ़ें… T20 वर्ल्डकप सुपर-8 का पहला मैच आज PAK vs NZ:टूर्नामेंट में न्यूजीलैंड पर भारी पड़ा पाकिस्तान; साहिबजादा फरहान टॉप रन स्कोरर टी-20 वर्ल्ड कप में सुपर-8 स्टेज का पहला मैच आज पाकिस्तान और न्यूजीलैंड के बीच खेला जाएगा। मुकाबला कोलंबो के आर प्रेमदासा स्टेडियम में शाम 7 बजे से शुरू होगा। दोनों टीमें ग्रुप स्टेज में अपना आखिरी मैच जीतकर इस राउंड में पहुंचीं। पूरी खबर

ट्रम्प बोले-भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं:पहले से तय समझौते पर बात बढ़ेगी; पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त, वे काफी स्मार्ट हैं

ट्रम्प बोले-भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं:पहले से तय समझौते पर बात बढ़ेगी; पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त, वे काफी स्मार्ट हैं

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले और ट्रम्प के दोबारा नए टैरिफ के ऐलान के बाद भारत-यूएस ट्रेड डील पहले की तरह रहेगी। ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि, भारत के साथ होने जा रहे समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह पहले की तरह आगे बढ़ेगा। दरअसल शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह एक आदेश पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिसके तहत 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ पहले से लगाए जा रहे बेसलाइन टैरिफ के ऊपर होगा। यानी जो टैरिफ अभी लिया जा रहा है, उसके अलावा यह नया 10% एक्स्ट्रा टैरिफ होगा। हालांकि भारत के साथ डील में यह अतिरिक्त टैरिफ शामिल होगा, या पहले से तय 18% में ही एडजस्ट किया जाएगा। इस पर ट्रम्प ने कोई बयान नहीं दिया। ट्रेड डील फरवरी के अंत तक फाइनल होगी वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका के साथ ‘अंतरिम व्यापार समझौता’ फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएगा। मार्च में इस पर हस्ताक्षर होंगे, वहीं अप्रैल से ये समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा। इसके साथ ही भारत आने वाले कुछ महीनों में दुनिया के बड़े देशों साथ व्यापारिक समझौतों पर अंतिम मुहर लगाएगा। अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शुरू होने की उम्मीद है। 23 फरवरी को फाइनल होगा कानूनी ड्राफ्ट 23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिनों की अहम बैठक करेंगे। इस बैठक का मकसद 7 फरवरी को जारी ‘जॉइंट स्टेटमेंट’ के आधार पर कानूनी ड्राफ्ट तैयार करना है।वाणिज्य मंत्रालय के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन भारतीय डेलिगेशन का नेतृत्व करेंगे। उम्मीद है कि टैक्स में 25% से 18% की कमी का आधिकारिक आदेश इसी हफ्ते या अगले हफ्ते तक आ जाएगा। इससे भारत के कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी जैसे सेक्टर को सीधा फायदा होगा। 7 फरवरी को ट्रेड डील का ऐलान हुआ था कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने 7 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के साथ ट्रेड डील की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। पीयूष गोयल ने साफ किया कि इस समझौते में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा- यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपए) के बाजार को खोलेगा। इसके अलावा भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपए) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (ITA ) का फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैक्स 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है। नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे दोनों देश पीयूष गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने फैसला किया है कि वे इसके कुछ नियम तय करेंगे, ताकि इस समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को। भारत और अमेरिका का इस व्यापार समझौते में नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर खास फोकस है। ये बाधाएं टैरिफ नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को मुश्किल बनाती हैं। अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस कंपनियों को भारत में कीमत तय करने के नियम, रजिस्ट्रेशन में देरी जैसी रुकावटों का सामना करना पड़ा रहा था। अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ हुई डील लागू होगी भारत-ब्रिटेन पिछले साल जुलाई में हुए FTA के बाद अब इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। इससे भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटेन में ‘जीरो ड्यूटी’ पर एंट्री मिलेगी। बदले में भारत ब्रिटेन से आने वाली कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स कम करेगा। ओमान के साथ भी अप्रैल में डील लागू होने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों में भारतीय सामान की पहुंच आसान होगी। ओमान ने भारत के 98% से ज्यादा उत्पादों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है। —————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया: कहा- जज देश के लिए कलंक हैं अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह आज एक आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

ट्रम्प बोले-भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं:पहले से तय समझौते पर बात आगे बढ़ेगी; वो टैरिफ देंगे, हम नहीं

ट्रम्प बोले-भारत के साथ ट्रेड डील में कोई बदलाव नहीं:पहले से तय समझौते पर बात बढ़ेगी; पीएम मोदी मेरे अच्छे दोस्त, वे काफी स्मार्ट हैं

अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले और ट्रम्प के दोबारा नए टैरिफ के ऐलान के बाद भारत-यूएस ट्रेड डील पहले की तरह रहेगी। ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि, भारत के साथ होने जा रहे समझौते पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह पहले की तरह आगे बढ़ेगा। दरअसल शुक्रवार को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह एक आदेश पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं, जिसके तहत 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह टैरिफ पहले से लगाए जा रहे बेसलाइन टैरिफ के ऊपर होगा। यानी जो टैरिफ अभी लिया जा रहा है, उसके अलावा यह नया 10% एक्स्ट्रा टैरिफ होगा। हालांकि भारत के साथ डील में यह अतिरिक्त टैरिफ शामिल होगा, या पहले से तय 18% में ही एडजस्ट किया जाएगा। इस पर ट्रम्प ने कोई बयान नहीं दिया। ट्रेड डील फरवरी के अंत तक फाइनल होगी वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को बताया कि अमेरिका के साथ ‘अंतरिम व्यापार समझौता’ फरवरी के अंत तक फाइनल हो जाएगा। मार्च में इस पर हस्ताक्षर होंगे, वहीं अप्रैल से ये समझौता पूरी तरह लागू हो जाएगा। इसके साथ ही आने वाले कुछ महीनों में भारत दुनिया के बड़े देशों साथ व्यापारिक समझौतों पर अंतिम मुहर लगाएगा। अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ भी फ्री ट्रेड एग्रीमेंट शुरू होने की उम्मीद है। 23 फरवरी को फाइनल होगा कानूनी ड्राफ्ट 23 फरवरी से भारत और अमेरिका के अधिकारी अमेरिका में तीन दिनों की अहम बैठक करेंगे। इस बैठक का मकसद 7 फरवरी को जारी ‘जॉइंट स्टेटमेंट’ के आधार पर कानूनी ड्राफ्ट तैयार करना है। वाणिज्य मंत्रालय के चीफ नेगोशिएटर दर्पण जैन भारतीय डेलिगेशन का नेतृत्व करेंगे। उम्मीद है कि टैक्स में 25% से 18% की कमी का आधिकारिक आदेश इसी हफ्ते या अगले हफ्ते तक आ जाएगा। इससे भारत के कपड़ा, चमड़ा और जेम्स-ज्वैलरी जैसे सेक्टर को सीधा फायदा होगा। 7 फरवरी को ट्रेड डील का ऐलान हुआ था कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने 7 फरवरी को प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमेरिका के साथ ट्रेड डील की जानकारी दी थी। उन्होंने बताया था कि भारतीय कृषि उत्पाद अमेरिका में जीरो टैरिफ पर निर्यात किए जाएंगे, जबकि अमेरिका के कृषि उत्पादों को भारत में कोई टैरिफ छूट नहीं दी गई है। पीयूष गोयल ने साफ किया कि इस समझौते में जेनेटिकली मॉडिफाइड (GM) फूड को भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं मिली है। उन्होंने कहा- यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए 30 ट्रिलियन डॉलर (लगभग 27.18 लाख करोड़ रुपए) के बाजार को खोलेगा। अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर के उत्पाद खरीदेगा भारत इसके अलावा भारत ने अगले 5 साल में अमेरिका से 50 हजार करोड़ डॉलर (45 लाख 30 हजार करोड़ रुपए) के उत्पाद खरीदने पर सहमति जताई है। भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को अंतरिम व्यापार समझौते (ITA ) का फ्रेमवर्क जारी किया है। इसके तहत भारतीय सामान पर अमेरिका का टैक्स 50% घटाकर 18% कर दिया गया है। रूस से तेल खरीदने को लेकर भारत पर लगाया गया 25% अतिरिक्त टैक्स भी हटा लिया गया है। नॉन-टैरिफ बाधाओं को दूर करेंगे दोनों देश पीयूष गोयल ने बताया कि दोनों देशों ने फैसला किया है कि वे इसके कुछ नियम तय करेंगे, ताकि इस समझौते का लाभ मुख्य रूप से अमेरिका और भारत को ही मिले, न कि किसी तीसरे देश को। भारत और अमेरिका का इस व्यापार समझौते में नॉन-टैरिफ बैरियर्स को दूर करने पर खास फोकस है। ये बाधाएं टैरिफ नहीं होतीं, लेकिन व्यापार को मुश्किल बनाती हैं। अमेरिकी मेडिकल डिवाइसेस कंपनियों को भारत में कीमत तय करने के नियम, रजिस्ट्रेशन में देरी जैसी रुकावटों का सामना करना पड़ा रहा था। अप्रैल में ब्रिटेन और ओमान के साथ हुई डील लागू होगी भारत-ब्रिटेन पिछले साल जुलाई में हुए FTA के बाद अब इसे अप्रैल से लागू किया जा सकता है। इससे भारत के 99% उत्पादों को ब्रिटेन में ‘जीरो ड्यूटी’ पर एंट्री मिलेगी। बदले में भारत ब्रिटेन से आने वाली कारों और स्कॉच व्हिस्की पर टैक्स कम करेगा। ओमान के साथ भी अप्रैल में डील लागू होने की उम्मीद है, जिससे खाड़ी देशों में भारतीय सामान की पहुंच आसान होगी। ओमान ने भारत के 98% से ज्यादा उत्पादों पर जीरो ड्यूटी की पेशकश की है। —————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने दुनियाभर के देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाया: कहा- जज देश के लिए कलंक हैं अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के टैरिफ रद्द करने के फैसले के 3 घंटे के अंदर डोनाल्ड ट्रम्प ने दुनियाभर पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने का ऐलान कर दिया। उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह आज एक आदेश पर हस्ताक्षर करेंगे, जिसके तहत 10% का ग्लोबल टैरिफ लगाया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…

प्रभारी मंत्री नरेंद्र पटेल का दो दिवसीय बैतूल दौरा:मेहदगांव और जुवाड़ी में स्थानीय कार्यक्रमों में होंगे शामिल

प्रभारी मंत्री नरेंद्र पटेल का दो दिवसीय बैतूल दौरा:मेहदगांव और जुवाड़ी में स्थानीय कार्यक्रमों में होंगे शामिल

मध्यप्रदेश शासन के लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के राज्य मंत्री और बैतूल जिले के प्रभारी मंत्री नरेंद्र शिवाजी पटेल 21 और 22 फरवरी को बैतूल जिले के दौरे पर रहेंगे। इस दौरान वे विभिन्न स्थानीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। जारी कार्यक्रम के अनुसार, प्रभारी मंत्री पटेल 21 फरवरी को सुबह 10:30 बजे भोपाल से बैतूल के लिए प्रस्थान करेंगे। वे दोपहर 1:30 बजे बैतूल सर्किट हाउस पहुंचेंगे। इसके बाद, दोपहर 2 बजे वे ग्राम मेहदगांव में एक स्थानीय कार्यक्रम में शामिल होंगे। शाम 7 बजे, श्री पटेल घोड़ाडोंगरी के जुवाड़ी पोस्ट में आयोजित एक वैवाहिक कार्यक्रम में सम्मिलित होंगे। उनका रात्रि विश्राम बैतूल सर्किट हाउस में रहेगा। 22 फरवरी को, प्रभारी मंत्री पटेल बैतूल में स्थानीय कार्यक्रमों में सहभागिता करेंगे। दोपहर 2 बजे वे बैतूल से भोपाल के लिए रवाना होंगे और शाम 5 बजे भोपाल पहुंचेंगे।

विदिशा में बेतवा मैराथन आज:21 किमी दौड़ में विजेता को मिलेंगे 21 हजार रुपए; पर्यटन को बढ़ावा देने आयोजन

विदिशा में बेतवा मैराथन आज:21 किमी दौड़ में विजेता को मिलेंगे 21 हजार रुपए; पर्यटन को बढ़ावा देने आयोजन

विदिशा जिले में 21 फरवरी शनिवार को बेतवा मैराथन का आयोजन किया जा रहा है। इसका उद्देश्य जिले के ऐतिहासिक और पर्यटन स्थलों का प्रचार-प्रसार करना तथा खेल भावना को बढ़ावा देना है। जिला पुरातत्व, पर्यटन एवं संस्कृति परिषद द्वारा मध्य प्रदेश टूरिज्म के सहयोग से आयोजित इस मैराथन को लेकर युवाओं और खेल प्रेमियों में खासा उत्साह है। यह मैराथन दौड़ तीन श्रेणियों में आयोजित की जा रही है। 21 किलोमीटर हाफ मैराथन, 10 किलोमीटर ओपन रन और 5 किलोमीटर रन फॉर फन। तीनों श्रेणियों में पुरुष और महिला वर्ग के लिए अलग-अलग नकद पुरस्कार घोषित किए गए हैं। 21 किलोमीटर हाफ मैराथन में प्रथम विजेता को 21 हजार रुपए, द्वितीय को 10 हजार और तृतीय को 5 हजार रुपए दिए जाएंगे। 10 किलोमीटर ओपन रन में प्रथम पुरस्कार 10 हजार, द्वितीय 5 हजार और तृतीय 3 हजार रुपए है। वहीं, 5 किलोमीटर रन फॉर फन के लिए प्रथम विजेता को 5 हजार, द्वितीय को 3 हजार और तृतीय को 2 हजार रुपए मिलेंगे। इसके अतिरिक्त, 50 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के वरिष्ठ नागरिकों के लिए 5 किलोमीटर की एक विशेष दौड़ भी आयोजित की जाएगी। मैराथन का शुभारंभ रवीन्द्रनाथ टैगोर सांस्कृतिक भवन ऑडिटोरियम से होगा। 5, 10 और 21 किलोमीटर के प्रतिभागी स्वामी विवेकानंद चौराहा, चरणतीर्थ और उदयगिरि तक दौड़ेंगे और वहीं से वापसी कर ऑडिटोरियम पर समापन करेंगे। 21 किलोमीटर की दौड़ सुबह 6 बजे, 10 किलोमीटर की दौड़ सुबह 6:30 बजे और 5 किलोमीटर की दौड़ सुबह 7 बजे से शुरू होगी। आयोजकों के अनुसार, यह आयोजन खेल, स्वास्थ्य और पर्यटन को एक मंच पर लाने का प्रयास है, जिससे विदिशा की ऐतिहासिक धरोहरों को व्यापक पहचान मिल सके। नागरिकों से इस आयोजन में बड़ी संख्या में भागीदारी करने की अपील की गई है।