जबलपुर में रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय की कार्यपरिषद बैठक में हंगामा:ऑनलाइन सेंटर प्रभारी और सदस्य में नोकझोंक, सदस्यों ने वॉकआउट भी किया

रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय (रादुविवि) की कार्यपरिषद बैठक शुक्रवार को हंगामे की भेंट चढ़ गई। इस दौरान ऑनलाइन सेंटर प्रभारी आरके गुप्ता और कार्यपरिषद सदस्य वेदप्रकाश तिवारी के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद कुछ सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार कर वॉकआउट कर दिया। बैठक में यूआईसीएसए विभाग की विभागाध्यक्ष ने कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और अन्य संसाधनों की कमी पर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि प्रशासन को कई बार अवगत कराने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे छात्रों और अभिभावकों के सवालों का जवाब देना मुश्किल हो रहा है। विरोध के बीच चल रही बैठक में तीखी बहस और आंतरिक असंतोष की स्थिति बन गई। स्थिति तनावपूर्ण होने पर कुछ कार्यपरिषद सदस्यों ने बैठक का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया। कुलगुरु ने सदस्यों को मनाने का प्रयास किया, लेकिन उनका आक्रोश शांत नहीं हुआ और वे परिसर से बाहर निकल गए। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने भी विश्वविद्यालय प्रशासन पर सवाल उठाए हैं। एबीवीपी के केंद्रीय कार्यसमिति सदस्य माखन शर्मा ने बताया कि कृषि, बीसीए और एमसीए सहित कई पाठ्यक्रमों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। उन्होंने प्रयोगशालाओं और संसाधनों की कमी को छात्रों के भविष्य के साथ अन्याय बताया। महानगर मंत्री आर्यन पुंज ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालय प्रशासन विद्यार्थियों के प्रति असंवेदनशील है और उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब देने में असमर्थ है। इस प्रदर्शन के दौरान माखन शर्मा, आर्यन पुंज, अनमोल सोनकर, ऐश्वर्य सोनकर, शोभित मिश्रा, अक्षत ताम्रकार, भास्कर पटेल, प्रफुल तिवारी, दिव्यांक पचौरी, लखन मांझी, आशुतोष पटेल, आयुष बारी, कृष्ण ग्वालवंश, यश पटेल, आयुष पटेल, अंकित सिंह, पुष्कर शुक्ला, सोम यादव, आदि पावर, प्रक्ष सिसोदिया, अनिकेत श्रीवास्तव, राज नेमा और आभास दुबे सहित अनेक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
गलत सिलेबस का पेपर मिला, परीक्षा प्रभावित:ग्वालियर के स्कूल में छात्रों का भविष्य अधर में, परिजनों का हंगामा

ग्वालियर के डॉन बॉस्को पब्लिक स्कूल में शुक्रवार को पांचवीं और आठवीं बोर्ड कक्षा के छात्रों और उनके अभिभावकों ने हंगामा किया। उन्होंने स्कूल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया, जिसके कारण छात्रों को अंग्रेजी की परीक्षा में गलत सिलेबस का प्रश्नपत्र मिला। इससे उनकी परीक्षा प्रभावित हुई और साल बर्बाद होने की आशंका जताई जा रही है। घटना वायुनगर स्थित सनराइज पब्लिक हायर सेकेंडरी स्कूल में हुई, जहां डॉन बॉस्को स्कूल के छात्रों का परीक्षा केंद्र था। शुक्रवार दोपहर 2 बजे जब छात्र अंग्रेजी की परीक्षा देने पहुंचे, तो उन्हें पहले एमपी बोर्ड इंग्लिश मीडियम का सामान्य प्रश्नपत्र दिया गया। कुछ देर बाद वह प्रश्नपत्र वापस ले लिया गया और एनसीईआरटी सिलेबस का अंग्रेजी पेपर दिया गया, जो छात्रों को पढ़ाए गए पाठ्यक्रम से भिन्न था। इस अचानक बदलाव से छात्र घबरा गए और उन्होंने परीक्षा नियंत्रक से आपत्ति दर्ज कराई। छात्रों ने बताया कि उन्हें पूरे साल एमपी बोर्ड का सामान्य सिलेबस पढ़ाया गया था। हालांकि, परीक्षा फॉर्म भरते समय स्कूल प्रबंधन ने इंग्लिश मीडियम के साथ एनसीईआरटी सिलेबस का विकल्प चुन लिया था। छात्रों के अनुसार, परीक्षा के अंतिम 15 मिनट में उन्हें फिर से एमपी बोर्ड का प्रश्नपत्र दिया गया, जिससे वे ठीक से उत्तर नहीं लिख पाए। कुछ छात्रों ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें अतिरिक्त उत्तर पुस्तिकाएं नहीं दी गईं। परीक्षा के बाद बच्चे रोते हुए स्कूल पहुंचे और अभिभावकों को पूरी घटना बताई। इसके बाद अभिभावक स्कूल में जमा हो गए। अभिभावकों ने आरोप लगाया कि प्राचार्य ने समस्या का समाधान करने के बजाय यह कह दिया कि सभी बच्चों को पास कर दिया जाएगा। इस बयान से अभिभावकों में और अधिक नाराजगी फैल गई, क्योंकि उनका मानना है कि मेहनती और कमजोर छात्रों को समान अंक देना उचित नहीं है। कुछ अभिभावकों ने आगामी परीक्षाओं को लेकर भी चिंता व्यक्त की है। उनका आरोप है कि स्कूल प्रबंधन ने बच्चों को इंटरनेट से एनसीईआरटी सिलेबस पढ़कर अगली परीक्षा देने की सलाह दी है। इस मामले में जब प्राचार्य से बात करने का प्रयास किया गया, तो वे मुंह ढंककर निकल गईं। उप-प्राचार्य ने भी इस मामले में अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया।
राजस्थान में बोलेरो-बाइक टकराए, 4 की मौत:मृतकों में मंदसौर के तीन लोग; एमपी आते समय झालावाड़ में हादसा

राजस्थान के झालावाड़ में बोलेरो और बाइक की आमने-सामने की भिड़ंत में 4 लोगों की मौत हो गई। इनमें एमपी के मंदसौर के तीन लोग शामिल हैं। बाइक सवार चारों लोग राजस्थान से मध्य प्रदेश आ रहे थे। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शवों को चौमहला अस्पताल में मॉर्च्युरी में रखवाया। बैग में मिले आधार कार्ड से 3 व्यक्तियों की पहचान हुई है, जो मंदसौर के रहने वाले थे। दस्तावेज नहीं मिलने के कारण एक अन्य मृतक की पहचान नहीं हो पाई है। हादसा शुक्रवार देर शाम करीब 7:30 बजे गंगधार थाना क्षेत्र में हुआ। हादसे की 3 तस्वीर देखिए… एक ही बाइक पर बैठे थे 4 लोग डीएसपी हेमंत गौतम ने बताया- डग-चौमहला रोड पर करनपुरा गांव के पास बोलेरो और बाइक में भिड़ंत हो गई। हादसे में 4 लोगों की मौत हो गई। बाइक डग से गंगधार की तरफ आ रही थी, जबकि बोलेरो गंगधार से डग की तरफ जा रही थी। इसी दौरान करनपुरा गांव के पास दोनों गाड़ियों की आमने-सामने की भिड़ंत हो गई। भिड़ंत में दोनों वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने बताया कि मरने वाले चारों लोग एक ही बाइक पर सवार थे। बैग से 3 आधार कार्ड मिले, मध्यप्रदेश के निवासी डीएसपी ने बताया- मृतकों के बैग से 3 आधार कार्ड मिले हैं। इनकी पहचान मंदसौर निवासी राजपाल पुत्र परबत सिंह निवासी झांगरिया गांव, थाना सीतामऊ, जवाहरलाल पुत्र रामचंद्र निवासी झांगरिया गांव, थाना सीतामऊ और नरेश पुत्र कालूलाल निवासी उदयपुर गांव के रूप में हुई है। परिजन को दी हादसे की जानकारी हेमंत गौतम ने बताया- थाना अधिकारी अमरनाथ योगी ने आधार कार्ड में लिखे पते पर परिजन से संपर्क किया और हादसे की जानकारी दी। मृतकों के परिजन के चौमहला पहुंचने के बाद ही उनकी अधिकृत पहचान हो पाएगी। हादसे के कारणों की भी जांच की जा रही है।
हड्डियों के दर्द का काल है ये पत्ता! सीने में दर्द हो या सूखी खांसी, खाज-खुजली, त्वचा रोग में भी कारगर – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:33 IST सफेद चंपा एक ऐसा पेड़ है, जो धरती पर आसानी से पाया जाने वाला अद्भुत औषधीय गुणों से भरपूर है. इसके न केवल पत्ते, बल्कि सभी अंग संजीवनी के समान माने जाते हैं. यह पेड़ अल्सर, कुष्ठ रोग, सूजन, गठिया, अस्थमा, बुखार, और कब्ज़ जैसी कई बीमारियों में बेहद लाभकारी साबित होता है. इसके फूलों का उपयोग नारियल के तेल को सुगंधित करने के लिए भी किया जाता है, और इसकी पत्तियां पुराने घावों को भरने में सक्षम मानी जाती हैं. सफेद चंपा की छाल को पीसकर लेप बनाने की परंपरा पुरानी है. इससे पुराने घाव, खुजली और कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में राहत मिलती है. इसके प्राकृतिक तत्व त्वचा को शांत करने और संक्रमण के जोखिम को कम करने में मददगार होते हैं. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग इसे घरेलू उपचार के रूप में अपनाते हैं, लेकिन संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को सावधान से प्रयोग करना चाहिए. राजकीय आयुर्वेदिक चिकित्सालय नगर बलिया की पांच साल अनुभवी आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना तिवारी के अनुसार, चंपा की छाल का लेप प्रभावित हिस्से पर लगाने से सूजन में कमी और आराम मिल सकता है. यह रक्त संचार को बेहतर करने में सहायक होता है. हालांकि, गंभीर गठिया या अन्य रोगों में चिकित्सकीय जांच आवश्यक है. चंपा की जड़ का उपयोग पेट संबंधी समस्याओं में भी किया जाता रहा है. इसे पेट के अल्सर के लिए लाभकारी माना गया है. जड़ से तैयार काढ़ा पाचन तंत्र को संतुलित करने में सहायक बताया जाता है. हालांकि, अल्सर जैसी गंभीर स्थिति में स्वयं उपचार के बजाय डॉक्टर की सलाह जरूरी है, ताकि स्थिति खराब न हो सके. Add News18 as Preferred Source on Google पारंपरिक उपचार पद्धतियों में चंपा की जड़ का काढ़ा बहुत ही उपयोगी माना गया है. यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद कर सकता है. हालांकि, बहुत तेज बुखार या लंबे समय तक रहने वाले बुखार में चिकित्सकीय जांच अनिवार्य है. प्राकृतिक उपाय केवल सहायक रूप में ही अपनाना उचित होता है. सफेद चंपा के फूलों की सुगंध मन को शांति देने के लिए जानी जाती है. इसकी खुशबू सिरदर्द में राहत पहुंचा सकती है और तनाव कम करने में सहायक मानी जाती है. फूलों से बने तेल का उपयोग आरामदायक नींद के लिए किया जाता है. अरोमाथेरेपी में भी इसकी सुगंध को सकारात्मक प्रभाव वाला माना गया है. चंपा के फूलों का लेप छाती के दर्द और पुरानी खांसी में राहत देने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. इसके लाभकारी तत्व सूजन कम करने और श्वसन मार्ग को आराम देने में सहायक हो सकते हैं. लेकिन हमेशा ध्यान रखें कि, दमा या गंभीर फेफड़ों की बीमारी में यह केवल पूरक उपाय है, मुख्य उपचार का विकल्प नहीं है. चंपा का रस पथरी और मूत्र संबंधी समस्याओं में बेहद लाभकारी और गुणकारी है. इसे मूत्र मार्ग को साफ रखने और जलन कम करने के लिए प्रयोग में लाया जाता है. पथरी जैसी स्थिति में आयुर्वेद एक्सपर्ट की राय बेहद जरूरी है. प्राकृतिक उपचारों को अपनाने से पहले आयुर्वेदिक विशेषज्ञ से परामर्श करना हमेशा सुरक्षित और समझदारी भरा कदम साबित होता रहा है. First Published : February 20, 2026, 23:33 IST
बीमारियों का काल है ये हरा पत्ता, रोजाना चबाइए 5 पत्ते, फैटी लिवर से लेकर कैंसर तक में लाभकारी – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:17 IST नीम को आयुर्वेद में सर्वरोग निवारणी कहा गया है. यानी एक ऐसी जड़ी-बूटी जो कई बीमारियों को जड़ से खत्म करने की क्षमता रखती है. डॉक्टर के मुताबिक नीम सिर्फ दातुन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारी पूरी बॉडी को अंदर से मजबूत बनाने में बड़ी भूमिका निभाता है. डॉक्टर का कहना है कि आज भी नीम की एंटीबैक्टीरियल प्रॉपर्टी का कोई तोड़ नहीं है. इसलिए इसे रोजमर्रा की लाइफ में जरूर शामिल करना चाहिए. रायबरेलीः मौसम में बदलाव के साथ सर्दी, खांसी, जुकाम और वायरल संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने लगते हैं. ऐसे समय में शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत रखना बेहद जरूरी हो जाता है. आयुर्वेद में नीम को प्राकृतिक औषधि का दर्जा दिया गया है. सुबह खाली पेट नीम की कोमल पत्तियों का सीमित मात्रा में सेवन करने से शरीर को कई तरह के लाभ मिल सकते है. दरअसल, रायबरेली जिले के आयुष विशेषज्ञ गौरव कुमार लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि नीम में एंटीबैक्टीरियल, एंटीवायरल और एंटीफंगल गुणों से भरपूर होता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर को संक्रमण से लड़ने की ताकत देते हैं. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी लोग बदलते मौसम में नीम की पत्तियां चबाने की परंपरा निभाते है. इम्युनिटी बढ़ाने में सहायक: गौरव कुमार के मुताबिक नीम की पत्तियों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने में मदद करते हैं. नियमित और सीमित सेवन से वायरल संक्रमण का खतरा कम हो सकता है. खून की सफाई और त्वचा के लिए लाभकारी: नीम को रक्त शुद्ध करने वाला माना जाता है. सुबह खाली पेट 4-5 कोमल पत्तियां चबाने से शरीर के विषैले तत्व बाहर निकलने में मदद मिलती है।.इसका असर त्वचा पर भी दिखाई देता है और मुंहासे या फोड़े-फुंसी जैसी समस्याओं में राहत मिल सकती है. पाचन तंत्र को रखे दुरुस्त: नीम की पत्तियां पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में भी सहायक मानी जाती हैं. यह गैस, अपच और पेट के कीड़ों की समस्या में लाभ पहुंचा सकती हैं. ध्यान रखें ये सावधानियां: हालांकि नीम प्राकृतिक औषधि है, लेकिन इसका अत्यधिक सेवन नुकसानदायक हो सकता है.गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इसका सेवन नहीं करना चाहिए. कड़वाहट के कारण इसे अधिक मात्रा में लेने से उल्टी या पेट दर्द की समस्या भी हो सकती है. Location : Rae Bareli,Uttar Pradesh First Published : February 20, 2026, 23:16 IST
पानी में उगने वाले इस फूल का तना है बेहद पौष्टिक, सेवन से मिलेंगे ये जबरदस्त फायदे, खून की कमी है तो जरूर खाएं – Uttar Pradesh News

Last Updated:February 20, 2026, 23:09 IST आप अक्सर हरी और ताजी सब्जियां खाते होंगे. कुछ सब्जियां देखने में बिल्कुल सब्जी नहीं लगती है, लेकिन उनमें पौष्टिक तत्व ग्रीन वेजिटेबल्स से भी अधिक होते हैं. ऐसी ही एक सब्जी है कमल ककड़ी. जिसे इंग्लिश में लोटस स्टेम कहते हैं. कमल ककड़ी में पोषक तत्वों का खजाना होता है. ये देखने में बेशक आपको सूखी लकड़ी लगे, लेकिन स्वाद जबरदस्त होता है. इससे कई तरह की चीजें बनाई जाती हैं जैसे ग्रेवी वाली सब्जी, कोफ्ता, अचार. आपको बता दें कि यह कमल के फूल की जड़ से आता है और इसका स्वाद हल्का और मीठा होता है. सेहतमंद रहने के लिए संतुलित आहार बेहद जरूरी है.सर्दियों के मौसम में बाजार में मिलने वाली कमल ककड़ी पोषण से भरपूर सब्जी मानी जाती है. कमल के तने से मिलने वाली यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ औषधीय गुणों से भी भरपूर है. आयुर्वेद में इसे शरीर को ताकत देने और कई रोगों से बचाव करने वाली प्राकृतिक औषधि के रूप में देखा जाता है. दरअसल रायबरेली जिले के आयुष चिकित्सक गौरव कुमार (बीएएमएस लखनऊ विश्वविद्यालय) लोकल 18 से बात करते हुए बताते है कि कमल ककड़ी फाइबर, आयरन, पोटैशियम और विटामिन-सी का अच्छा स्रोत है.इसका नियमित सेवन पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत दिलाता है. इसमें मौजूद फाइबर आंतों की सफाई में मदद करता है, जिससे शरीर में जमा विषैले तत्व बाहर निकलते है. कमल ककड़ी खून की कमी दूर करने में भी सहायक होती है.इसमें मौजूद आयरन हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद करता है, जिससे शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और कमजोरी दूर होती है.जिन लोगों को थकान या एनीमिया की समस्या रहती है, उनके लिए यह सब्जी फायदेमंद मानी जाती है. Add News18 as Preferred Source on Google गौरव कुमार के मुताबिक कमल ककड़ी दिल की सेहत के लिए भी लाभकारी है.इसमें पाया जाने वाला पोटैशियम रक्तचाप को नियंत्रित रखने में मदद करता है.यह शरीर में सोडियम के प्रभाव को संतुलित कर हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है.विटामिन-सी और एंटीऑक्सीडेंट तत्व इम्यूनिटी बढ़ाते हैं, जिससे शरीर मौसमी बीमारियों से बचा रहता है. कमल ककड़ी का सेवन सब्जी, अचार या सूप के रूप में किया जा सकता है.हालांकि इसे अच्छी तरह साफ कर और पकाकर ही खाना चाहिए.जिन लोगों को गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं, वे इसे नियमित आहार में शामिल करने से पहले विशेषज्ञ से सलाह जरूर लें. वह बताते हैं कि कमल ककड़ी एक पौष्टिक और गुणकारी सब्जी है, जो पाचन सुधारने, खून बढ़ाने, दिल को स्वस्थ रखने और शरीर को ऊर्जा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है. नियमित और संतुलित मात्रा में इसका सेवन सेहत के लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है. First Published : February 20, 2026, 23:09 IST
दमोह पुलिस ने शहर में निकाला फ्लैग मार्च:घंटाघर, पुराना थाना, कसाई मंडी समेत कई इलाकों से गुजरा, कहा- त्योहार शांति से मनाएं

दमोह पुलिस ने शुक्रवार रात शहर के प्रमुख रास्तों पर फ्लैग मार्च निकालकर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। आने वाले होली, रमजान और अन्य त्योहारों के दौरान शहर में शांति और सुरक्षा का माहौल बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया है। यह फ्लैग मार्च कोतवाली थाने से शुरू हुआ। पुलिस का यह दल शहर के भीड़भाड़ वाले और संवेदनशील इलाकों जैसे घंटाघर, पुराना थाना, कसाई मंडी, बिलवारी मोहल्ला और पठानी मोहल्ला से होते हुए गुजरा। मार्च का समापन वापस कोतवाली थाने पर हुआ। भाईचारे के साथ त्योहार मनाने की अपील फ्लैग मार्च के दौरान पुलिस अधिकारियों ने आम जनता से बात की और अपील की कि सभी त्योहार आपसी प्रेम और भाईचारे के साथ मनाएं। इस मार्च के जरिए पुलिस ने यह संदेश भी दिया कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने वाले तत्वों पर पुलिस की पैनी नजर है। भारी संख्या में तैनात रहा पुलिस बल सीएसपी एचआर पांडे के नेतृत्व में निकले इस मार्च में कोतवाली टीआई मनीष कुमार, देहात थाना प्रभारी रचना मिश्रा और शहर की विभिन्न चौकियों के प्रभारी शामिल रहे। बड़ी संख्या में पुलिस बल की मौजूदगी ने नागरिकों में सुरक्षा का भाव जगाया।
जनपद सीईओ से अभद्रता कर गालियां दीं, FIR:राजगढ़ में विधायक को भी अपशब्द कहे; अवैध खनन शिकायत करने पहुंचा था

खिलचीपुर जनपद पंचायत कार्यालय में अवैध खनन की शिकायत लेकर पहुंचे एक युवक ने गुरुवार को हंगामा कर दिया। घटना का वीडियो शुक्रवार शाम सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मामला चर्चा में आ गया। दुआखेड़ी निवासी हेमराज दांगी अवैध खनन की शिकायत लेकर कार्यालय पहुंचा था। जनपद सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने उसे संबंधित प्रकरण में एसडीएम कार्यालय में शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी। इसी बात पर युवक नाराज हो गया। बताया जा रहा है कि वह नशे की हालत में था। सीईओ चेंबर में अभद्रता आरोप है कि युवक सीधे सीईओ के चेंबर में घुस गया और ऊंची आवाज में बहस करते हुए अभद्रता करने लगा। स्थिति बिगड़ती देख मौजूद लोगों ने उसे चेंबर से बाहर निकाल दिया। बाहर आने के बाद भी युवक शांत नहीं हुआ। उसने सीईओ और स्थानीय विधायक के खिलाफ आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए गाली-गलौज की। इसी दौरान किसी ने पूरी घटना का वीडियो बना लिया, जो बाद में वायरल हो गया। जनपद सीईओ की शिकायत पर खिलचीपुर थाने में युवक के खिलाफ गाली-गलौज और शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की धाराओं में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस के अनुसार आरोपी की तलाश जारी है और मामले की जांच की जा रही है। सीईओ बोले- सलाह देने पर भड़का, विधायक को अपशब्द कहे सीईओ गोविंद सिंह सोलंकी ने बताया कि युवक अवैध खनन की शिकायत लेकर आया था, लेकिन उसे संबंधित प्राधिकरण के पास जाने की सलाह देने पर वह भड़क गया। उन्होंने कहा कि युवक 10–20 प्रतिशत जैसी बातें कर रहा था और विधायक के संबंध में भी अपशब्द कह रहा था। स्थिति बिगड़ने की आशंका को देखते हुए पुलिस को सूचना दी गई और बाद में एफआईआर दर्ज करवाई गई।
126 जोड़ों का विवाह, बेटियों को 49 हजार की सहायता:मंदसौर में वक्ता बोले-विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कारों का मिलन है

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत मन्दसौर के ग्राम बेहपुर में शुक्रवार को 126 जोड़ों का सामूहिक विवाह समारोह आयोजित हुआ। इनमें से 60 जोड़ों ने योजना का लाभ प्राप्त किया। इसके तहत प्रत्येक वधू को राज्य सरकार की ओर से 49 हजार रुपए की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। समारोह में बड़ी संख्या में ग्रामीणजन, वर-वधू के परिजन, जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम में साधु-संतों का सान्निध्य भी मिला। जिला पंचायत अध्यक्ष दुर्गा विजय पाटीदार, पूर्व विधायक यशपाल सिंह सिसोदिया, जिला योजना समिति सदस्य राजेश दीक्षित, जनपद अध्यक्ष बसंत शर्मा, नानालाल अटोलिया सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने इस अवसर पर भाग लिया। विवाह हमारी संस्कृति की आधारशिला इस अवसर पर वक्ताओं ने कहा कि विवाह भारतीय संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, जो समाज और परिवार की आधारशिला है। सामूहिक विवाह सम्मेलन आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए सहयोग एवं संबल का प्रतीक हैं। उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा के 16 संस्कारों में पाणिग्रहण संस्कार अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण माना गया है। विवाह केवल दो व्यक्तियों का नहीं, बल्कि दो परिवारों और संस्कारों का मिलन है, जो समाज में सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करता है। बेटियों के सशक्तिकरण की दिशा में पहल मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का उद्देश्य बेटियों को सम्मानपूर्वक विदा करने के साथ उनके नए जीवन की शुरुआत को आर्थिक संबल प्रदान करना है। योजना के माध्यम से जरूरतमंद परिवारों को राहत मिल रही है और बेटियों के सशक्तिकरण को बढ़ावा मिल रहा है। कार्यक्रम के अंत में सभी नवविवाहित जोड़ों को सुखद दांपत्य जीवन की शुभकामनाएं दी गईं। नवविवाहिता जोड़ों को शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ लेकर आत्मनिर्भर जीवन जीने के लिए प्रेरित किया गया।
'यादव जी की लव स्टोरी’ पर रोक लगाने की मांग:विदिशा में यादव समाज कलेक्टर से मिला; डायरेक्टर, प्रोड्यूसर पर FIR की अपील

यादव समाज ने प्रस्तावित बॉलीवुड फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के नाम को लेकर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। समाज के पदाधिकारियों और सदस्यों ने एकजुट होकर मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। इसमें फिल्म के प्रदर्शन पर तत्काल रोक लगाने और इसके डायरेक्टर व प्रोड्यूसर के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। ज्ञापन में बताया गया है कि फिल्म के पोस्टर, ट्रेलर और सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री में यादव समाज की छवि को आपत्तिजनक तरीके से दिखाया गया है। समाज के प्रतिनिधियों का तर्क है कि किसी विशेष जाति को फिल्म के शीर्षक में इस तरह प्रस्तुत करना सामाजिक सौहार्द के लिए उचित नहीं है। उनका आरोप है कि इससे समाज में गलत संदेश जा सकता है और उसकी गरिमा को ठेस पहुंच सकती है। समाजजनों ने इस बात पर जोर दिया कि यादव समाज ने हमेशा राष्ट्र निर्माण, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ऐसी किसी भी प्रस्तुति को स्वीकार नहीं किया जाएगा जो समाज की छवि को नकारात्मक रूप में दर्शाती हो। प्रतिनिधियों ने पूर्व में आई फिल्म ‘120 बहादुर’ को लेकर हुए विवाद का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ कुछ फिल्मों के नाम बदले जाते हैं, वहीं दूसरी ओर जाति विशेष के नाम पर फिल्में बनाई जा रही हैं। इसे उन्होंने दोहरे मापदंड की नीति करार दिया। यादव समाज के प्रतिनिधि रविंद्र यादव ने चेतावनी दी कि समाज की भावनाओं को बार-बार ठेस पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो समाज आंदोलन करने के लिए मजबूर होगा।








