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सभी केस हाईकोर्ट लौटे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-MP में OBC आरक्षण पर फैसला हाईकोर्ट करे

सभी केस हाईकोर्ट लौटे:सुप्रीम कोर्ट ने कहा-MP में OBC आरक्षण पर फैसला हाईकोर्ट करे


मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को मप्र हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले से जुड़ी अपीलें, विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) और हाईकोर्ट से ट्रांसफर हुए सभी केसों पर अब हाईकोर्ट को ही सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि आरक्षण मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) गठित की जाए। यह पीठ तीन माह के भीतर सभी विवादों का अंतिम निपटारा करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति की वैधता की जांच संबंधित राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए हाईकोर्ट ही उपयुक्त मंच है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने यह अधिकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की विशेष पीठ को दिया है कि वह विभिन्न पक्षों द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर निर्णय ले। यानी भर्ती प्रक्रियाओं पर लगी रोक हटेगी या नहीं, इसका फैसला अब हाईकोर्ट की नई स्पेशल बेंच करेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास लंबित सभी याचिकाओं और कार्यवाहियों का निपटारा कर दिया। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने का तर्क देते हुए नियुक्तियों की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा- राज्य की सामाजिक संरचना पर हाईकोर्ट ही करे परीक्षण सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीति राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों पर आधारित होती है। इसलिए छत्तीसगढ़ की स्थिति मप्र के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकती। बिना हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में परीक्षण उचित नहीं है। अभी कहां-कितना आरक्षण क्या है मुख्य विवाद

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मध्यप्रदेश में ओबीसी आरक्षण 14% से बढ़ाकर 27% करने के विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने सभी लंबित मामलों को मप्र हाईकोर्ट को वापस भेज दिया है। जस्टिस पी. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने इस मामले से जुड़ी अपीलें, विशेष अनुमति याचिकाएं (एसएलपी) और हाईकोर्ट से ट्रांसफर हुए सभी केसों पर अब हाईकोर्ट को ही सुनवाई करने के निर्देश दिए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने मप्र हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा है कि आरक्षण मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष पीठ (स्पेशल बेंच) गठित की जाए। यह पीठ तीन माह के भीतर सभी विवादों का अंतिम निपटारा करे। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आरक्षण नीति की वैधता की जांच संबंधित राज्य की सामाजिक संरचना के आधार पर होनी चाहिए और इसके लिए हाईकोर्ट ही उपयुक्त मंच है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसने मामले के गुण-दोष (मेरिट) पर कोई टिप्पणी नहीं की है। कोर्ट ने यह अधिकार मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की विशेष पीठ को दिया है कि वह विभिन्न पक्षों द्वारा दायर अंतरिम आवेदनों पर सुनवाई कर निर्णय ले। यानी भर्ती प्रक्रियाओं पर लगी रोक हटेगी या नहीं, इसका फैसला अब हाईकोर्ट की नई स्पेशल बेंच करेगी। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास लंबित सभी याचिकाओं और कार्यवाहियों का निपटारा कर दिया। राज्य सरकार ने प्रशासनिक कामकाज प्रभावित होने का तर्क देते हुए नियुक्तियों की अनुमति मांगी थी। कोर्ट ने कहा- राज्य की सामाजिक संरचना पर हाईकोर्ट ही करे परीक्षण सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि आरक्षण नीति राज्य की सामाजिक और जनसांख्यिकीय परिस्थितियों पर आधारित होती है। इसलिए छत्तीसगढ़ की स्थिति मप्र के लिए बाध्यकारी नहीं हो सकती। बिना हाईकोर्ट के अंतिम निर्णय के सीधे अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट में परीक्षण उचित नहीं है। अभी कहां-कितना आरक्षण क्या है मुख्य विवाद

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