पड़ोसी, पेरेंट्स और पुलिस, 3P से कोरियन गेम में जान गंवाने वाली बहनों का आएगा असली सच, क्या थी कूदने की थ्योरी? – ghaziabad sisters fell to death korean game princesses cops investigation 3P will reveal real truth theory behind jump

Last Updated:February 05, 2026, 12:08 IST Proof of love for K-Pop: गाजियाबाद में तीन सगी बहनों की आत्महत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया है. के-पॉप (K-Pop) और कोरियन कल्चर के प्रति दीवानगी इस कदर बढ़ी कि 12, 14 और 16 साल की बच्चियों ने अपनी जान दे दी. गाजिाबाद पुलिस घटना के इतने घंटे के बाद अब 3-P फॉर्मूले पर जांच का एंगल घुमा दिया है. तीनों का सुसाइड नोट में कोरियन एक्टर से शादी न कर पाने का तनाव और सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट होने का दर्द छलका था. गाजियाबाद पुलिस अब एक्सपर्ट्स की मदद ले रही है. कोरियन गेम की लत में जान गंवाने वाली तीनों बहनें क्या एक साथ कूदी थी? गाजियाबाद : गाजियाबाद पुलिस ने कोरियन गेम की लत की शिकार हुई तीनों बहनों की मौत की जांच की दिशा बदल दी है. अब गाजियाबाद पुलिस अब हर एंगल से जांच कर रही है. जांच के दायरे में अब कई लोग आ सकते हैं. क्योंकि, गाजियाबाद पुलिस अब 3-P फॉर्मूला पर काम कर रही है. गाजियाबाद की एक गगनचुंबी इमारत की नौवीं मंजिल से जब बुधवार की तड़के तीन चीखें गूंजीं, तो किसी ने नहीं सोचा था कि यह अंत एक ऐसी दीवानगी का होगा जिसे हम और आप अक्सर बचपना समझकर नजरअंदाज कर देते हैं. 12, 14 और 16 साल की तीन सगी बहनों ने एक साथ मौत को गले लगा लिया. यह घटना उस मां-बाप के लिए दिल को झकझोर देने वाला सबक है, जिनके बच्चे मोबाइल की आभासी दुनिया को ही हकीकत मान बैठे हैं. क्या नाबालिग बच्चों में कोरियन गेम फेमस हो रहा है? क्या के-ड्रामा और के-पॉप प्यार पारिवारिक भावनाओं पर आधारित होते हैं? गाजियाबाद पुलिस अब 3-P फ़ॉर्मूले पर जांच कर रही है. जानिए असली सच कैसे आएगा? यूपी पुलिस को जांच के दौरान कई पन्नों का एक सुसाइड नोट मिला है, जिसे पढ़कर पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो जाएं. सुसाइड नोट के शब्द बच्चियों के दिमाग में चल रहे उस गहरे द्वंद्व को बयां करते हैं, जिसे उनके माता-पिता कभी समझ ही नहीं पाए. नोट में लिखा था- हमें माफ कर देना, हमें के-पॉप संगीत से बहुत गहरा लगाव था. शायद आप कभी नहीं समझ पाए कि हमारे लिए इसका क्या मतलब था. हमें उन एक्टर्स और संगीत से एक मजबूत भावनात्मक जुड़ाव महसूस होता था. कभी-कभी हमें लगता था कि वह दुनिया हमारे आसपास की दुनिया से कहीं ज्यादा मायने रखती है.’ नोट की फॉरेंसिक जांच सबसे चौंकाने वाली बात नोट का वह हिस्सा था जिसमें उन्होंने लिखा कि किसी भारतीय से शादी करने के विचार ने उन्हें भारी तनाव और उलझन में डाल दिया था, क्योंकि वे किसी कोरियन से ही शादी करना चाहती थीं. अब इस सुसाइड नोट की फॉरेंसिक जांच करवाएगी गाजियाबाद पुलिस. मोबाइल छिना, तो टूट गई जीने की आस पुलिस की जांच में सामने आया कि तीनों बहनों ने सोशल मीडिया पर अलीजा, सिंडी और मारिया जैसे पश्चिमी नामों से फर्जी अकाउंट बना रखे थे, जहां उनके हजारों फॉलोअर्स थे. करीब 10 दिन पहले जब उनके पिता चेतन कुमार को इस बात का पता चला, तो उन्होंने डांटते हुए उनके फोन छीन लिए और सोशल मीडिया अकाउंट डिलीट कर दिए. पुलिस का मानना है कि मोबाइल और कोरियन कंटेंट से अचानक दूर होना उन बच्चियों के लिए ‘संसार उजड़ने’ जैसा था. वे पिछले दो साल से स्कूल भी नहीं जा रही थीं और चौबीसों घंटे घर पर रहकर सिर्फ कोरियन ड्रामा और संगीत की दुनिया में डूबी रहती थीं. इस घटना में एक रहस्य यह भी है कि क्या तीनों बहनें अपनी मर्जी से कूदीं? जहां कुछ रिपोर्ट्स कहती हैं कि दो बहनों ने हाथ पकड़कर छलांग लगाई और तीसरी खिड़की से कूदी, वहीं एक चश्मदीद ने चौंकाने वाला दावा किया है. चश्मदीद के अनुसार, उसने देखा कि दो लड़कियां कूदने की कोशिश कर रही थीं, जबकि तीसरी उन्हें पीछे खींचकर रोकने की कोशिश कर रही थी. लेकिन अफसोस, वो उन्हें रोक नहीं पाई और तीनों ही काल के गाल में समा गईं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Ghaziabad,Uttar Pradesh First Published : February 05, 2026, 12:08 IST
MP की ‘लेडी गैंग’ चांदनी चौक में मारा बड़ा हाथ, हाईकोर्ट के एक बड़े वकील का ही उड़ाया कीमती हार, हो गए अब गिरफ्तार – delhi police arrest three women gang mp rajgarh diamond gold necklace recovery high court lawyer

होमताजा खबरDelhi MP की ‘लेडी गैंग’ ने एक बड़े वकील का उड़ाया कीमती हार, ट्रेन से आती थी दिल्ली Last Updated:February 04, 2026, 19:20 IST दिल्ली पुलिस ने चांदनी चौक के किनारी बाजार में हुई एक बड़ी चोरी की गुत्थी को महज 72 घंटों में सुलझा लिया है. मध्य प्रदेश के राजगढ़ से आई शातिर महिला चोरों ने हाई कोर्ट की एक वकील का हीरा-सोना जड़ित हार और झुमके चोरी किए थे. सीसीटीवी और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से पुलिस ने मयूर विहार के चिल्ला गांव से तीन महिलाओं को गिरफ्तार कर शत-प्रतिशत रिकवरी की है. पढ़ें इन तीनों महिला चोर की 12 साल की कहानी. नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के सबसे व्यस्त चांदनी चौक में सुरक्षा और सतर्कता को चुनौती देते हुए एक ‘लेडी गैंग’ ने बड़ी वारदात को अंजाम दे दिया. तीन औरतों का यह गैंग दिल्ली हाईकोर्ट के वकील का सारा माल गायब कर दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की ने कुशलता का परिचय देते हुए इस मामले को महज 3 दिनों के भीतर सुलझा लिया है. पकड़ी गई तीनों महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली हैं, जो विशेष रूप से भीड़भाड़ वाले बाजारों में चोरी करने के लिए दिल्ली का रुख करती थीं. हाथ साफकर फिर दिल्ली से एमपी के तरफ चली जाती थीं. पढ़िए कैसे और किस तरह से दिल्ली पुलिस ने इन तीन महिलाओं को गिरप्तार किया. मामले की शुरुआत 28 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली हाई कोर्ट की एक महिला अधिवक्ता सुश्री एस. गर्गा अपने सोने और हीरे के गहनों की मरम्मत कराने के लिए पुरानी दिल्ली के मशहूर किनारी बाजार आईं थीं. उन्होंने अपना कीमती नेकलेस और झुमके एक बैग में रखे हुए थे. दोपहर के समय जब वह गहने ठीक कराकर बाजार से बाहर निकल रही थीं, तभी भीड़ का फायदा उठाकर किसी ने उनके बैग से गहने पार कर दिए. 72 घंटों का सस्पेंस और ‘चिल्ला गांव’ का कनेक्शन पीड़िता ने तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दी और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से ई-एफआईआर दर्ज कराई. मामला एक प्रतिष्ठित वकील और लाखों के गहनों से जुड़ा था, इसलिए पुलिस ने इसे सर्वोच्च प्राथमिकता पर लिया. उत्तरी जिला पुलिस के एडिशनल डीसीपी सुमित कुमार झा के अनुसार, कोतवाली थाने के एसएचओ इंस्पेक्टर सुमन कुमार और इंस्पेक्टर ज्ञान प्रकाश के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई. इस टीम में पीएसआई प्रीति और महिला कांस्टेबलों को भी शामिल किया गया. 12 साल से चल रहा था खेल पुलिस ने किनारी बाजार और आसपास के इलाकों में लगे दर्जनों कैमरों की फुटेज खंगाली. एक फुटेज में दो संदिग्ध महिलाएं वकील के बैग से हार निकालते हुए साफ नजर आईं. पुलिस ने इन महिलाओं का पीछा जारी रखा. सीसीटीवी मैपिंग से पता चला कि चोरी के बाद इन महिलाओं ने अपनी पहचान छिपाने के लिए कई बार ऑटो-रिक्शा बदले. तकनीकी सर्विलांस से पता चला कि ये महिलाएं मयूर विहार के चिल्ला गांव में रुकी हुई हैं. जाल बिछाकर गिरफ्तारी 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने चिल्ला गांव में दबिश दी और प्रीति और अनमोल को धर दबोचा. तलाशी के दौरान अनमोल के पास से चोरी के हार के 28 पत्थर बरामद हुए. पूछताछ में उन्होंने अपनी तीसरी साथी ‘सन्नो’ का नाम उगला, जिसके पास बाकी के गहने थे. पुलिस ने उसी दिन सन्नो को भी दबोच लिया. दिल्ली पुलिस की पूछताछ के दौरान जो खुलासे हुए, उन्होंने पुलिस को भी हैरान कर दिया. ये महिलाएं मध्य प्रदेश के राजगढ़ जिले के गुलखेड़ी जाटखेड़ी गांव की रहने वाली हैं. यह गांव पहले भी ऐसी आपराधिक गतिविधियों के लिए चर्चा में रहा है. ये महिलाएं अक्सर ट्रेन से दिल्ली आती हैं और कुछ दिनों या महीनों के लिए किराए पर कमरा लेती हैं. इनका मुख्य निशाना चांदनी चौक, सदर बाजार और पुरानी दिल्ली के अन्य भीड़भाड़ वाले इलाके होते हैं जहाँ लोगों का ध्यान अपने सामान पर कम और खरीदारी पर ज्यादा होता है. 10-12 साल से यह गिरोह इसी तरह काम कर रहा है. चोरी की कुछ वारदातों को अंजाम देने के बाद ये वापस अपने गांव लौट जाती हैं ताकि पुलिस की नजरों से बच सकें. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi First Published : February 04, 2026, 19:20 IST
राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से चंद सेकंड में उड़ गया लैपटॉप, फोन कॉल पर लगा था शख्स, चोरों ने लगा दिया चूना – dmrc action delhi police arrest laptop theft rajiv chowk metro station gate 5 security check cctv footage

नई दिल्ली. अगर आप दिल्ली मेट्रो में सफर कर रहे हैं और वो भी राजीव चौक मेट्रो स्टेशन पर तो जरा होशियार हो जाएं. दिल्ली पुलिस ने एक ऐसे चोर को गिरफ्तार किया है, जो आपके आंखों के सामने से आपका सामान गायब कर देता था. दिल्ली का सबसे व्यस्त और दिल कहा जाने वाला राजीव चौक मेट्रो स्टेशन अपनी भीड़भाड़ के लिए जाना जाता है. लेकिन इसी भीड़ का फायदा उठाकर अपराधी मासूम यात्रियों को अपना निशाना बना रहे हैं. यहां पर एक ऐसी वारदात सामने आई है जहां एक यात्री की महज चंद सेकंड की फोन कॉल की व्यस्तता ने उसका कीमती लैपटॉप चोरी करवा दिया. हालांकि, दिल्ली पुलिस की मेट्रो यूनिट ने अपनी तकनीकी कुशलता और सीसीटीवी की मदद से आरोपी को धर दबोचा है. यह मामला 30 जनवरी 2026 का है. पीड़ित यात्री राजीव चौक मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर 5 और 6 के पास बने सिक्योरिटी चेक पॉइंट पर पहुंचा. सुरक्षा नियमों के मुताबिक, उसने अपना लैपटॉप बैग एक्स-बीआईएस (X-BIS) मशीन पर स्कैनिंग के लिए रखा. इसी दौरान पीड़ित के मोबाइल पर एक फोन कॉल आ गई. वह फोन पर बात करने में इतना मशगूल हो गया कि उसने मशीन की दूसरी तरफ से अपना बैग उठाना याद नहीं रहा. इसी चंद सेकंड की लापरवाही का फायदा पास खड़े एक शातिर चोर ने उठा लिया. चोर ने बड़ी सफाई से मशीन से बैग उठाया और चंपत हो गया. बैग में एक महंगा एचपी (HP) लैपटॉप और उसका चार्जर मौजूद था. पुलिस की जांच और सीसीटीवी का सुराग जब यात्री को अपनी भूल का अहसास हुआ, तब तक बैग गायब हो चुका था. मामले की शिकायत तुरंत राजीव चौक मेट्रो थाना पुलिस को दी गई. 1 फरवरी 2026 को पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2) के तहत ई-एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की. दिल्ली पुलिस के मेट्रो डीसीपी कुशल पाल सिंह के निर्देश पर एक विशेष टीम का गठन किया गया. जांच टीम ने सबसे पहले घटना स्थल के सीसीटीवी कैमरों को खंगालना शुरू किया. फुटेज की बारीकी से जांच करने पर एक संदिग्ध युवक बैग उठाते हुए साफ नजर आया. हालांकि, आरोपी ने अपनी पहचान छिपाने के लिए चेहरे पर मास्क लगा रखा था. पुलिस ने हार नहीं मानी और आरोपी के आने-जाने के रास्तों का तकनीकी विश्लेषण किया. विश्लेषण से एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया. आरोपी अक्सर सुबह 8:30 से 9:30 बजे के बीच राजीव चौक मेट्रो स्टेशन से बाहर निकलता था. जाल बिछाकर ऐसे हुई गिरफ्तारी पुलिस टीम ने आरोपी को पकड़ने के लिए 3 फरवरी की सुबह ट्रैप लगाया. सादे कपड़ों में तैनात पुलिसकर्मी राजीव चौक के एएफसी गेट्स और निकास द्वारों पर तैनात हो गए. सुबह करीब 9:30 बजे, पुलिस की नजर एक युवक पर पड़ी जो पीठ पर एक बैग लटकाए बाहर निकलने की कोशिश कर रहा था. उसकी कद-काठी सीसीटीवी में दिखे संदिग्ध से हूबहू मिल रही थी. पुलिस ने उसे तुरंत हिरासत में लिया. जब उसके बैग की तलाशी ली गई, तो उसमें से वही चोरी किया गया एचपी लैपटॉप और चार्जर बरामद हुआ. आरोपी का प्रोफाइल और कबूलनामा पकड़े गए आरोपी की पहचान 29 वर्षीय सुमित कुमार के रूप में हुई है, जो दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके का रहने वाला है. पूछताछ के दौरान सुमित ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह मेट्रो स्टेशनों पर ऐसे यात्रियों की तलाश में रहता था जो सुरक्षा जांच के दौरान फोन या अन्य कामों में व्यस्त हो जाते थे. पुलिस अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि क्या सुमित ने पहले भी ऐसी वारदातों को अंजाम दिया है. आरोपी को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से उसे 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. मेट्रो यात्रियों के लिए पुलिस की चेतावनी इस घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मेट्रो यात्रियों के लिए एक विशेष गाइडलाइन जारी की है: स्कैनिंग के समय ध्यान रखें: जब भी आप अपना बैग एक्स-रे मशीन पर रखें, तो उसे दूसरी तरफ से निकलने तक अपनी नजरों से ओझल न होने दें. फोन का इस्तेमाल कम करें: सुरक्षा जांच और भीड़भाड़ वाले इलाकों में फोन पर बात करने से बचें, क्योंकि यह अपराधियों को मौका देता है. मास्क के पीछे छिपे चेहरे: कोरोना के बाद अब अपराधी मास्क का इस्तेमाल अपनी पहचान छिपाने के लिए कर रहे हैं, इसलिए अपने आसपास के संदिग्धों पर नजर रखें. तुरंत रिपोर्ट करें: किसी भी सामान के गायब होने पर तुरंत नजदीकी मेट्रो स्टेशन के कंट्रोल रूम या पुलिस डेस्क को सूचित करें. राजीव चौक मेट्रो स्टेशन की यह घटना हमें याद दिलाती है कि सावधानी हटी, तो दुर्घटना घटी. दिल्ली पुलिस की इस त्वरित कार्रवाई ने न केवल एक चोरी का मामला सुलझाया है, बल्कि अन्य अपराधियों को भी सख्त संदेश दिया है.
बिहार का वह डॉन जिसका श्रीप्रकाश शुक्ला बना था ड्राइवर, जरायम की दुनिया में आज भी क्यों होते हैं दोनों के चर्चे? | sriprakash shukla | sri prakash shukla godfather driver | sriprakash shukla surajbhna singh friendship | suraj bhan singh | up police | ghaziabad encounter story

Sriprakash Shukla Crime Story: 90 के दशक में उत्तर प्रदेश में एक जुमला बड़ा मशहूर था- शाम के बाद घर से मत निकलो, कहीं श्रीप्रकाश शुक्ला की गोली का शिकार न हो जाओ. यह वो दौर था जब यूपी की पुलिस के पास पुरानी थ्री-नॉट-थ्री (303) राइफलें हुआ करती थीं और एक 25 साल का लड़का सड़कों पर 30 गाड़ियों से चलता, जिसमें 25 गाड़ियों में राइफल शीशे से बाहर निकली होती थी. कैसे शिव प्रकाश शुक्ला श्रीप्रकाश शुक्ला बना? श्रीप्रकाश शुक्ला को एके-47 राइफल सबसे पहले किसने थमाई? कैसे गोरखपुर के मामखौर गांव एक साधारण ब्राह्मण परिवार का लड़का जुर्म की दुनिया का पोस्टर बॉय बन गया? उस अधिकारी से समझेंगे, जो श्रीप्रकाश शुक्ला के एनकाउंटर में शामिल था. श्रीप्रकाश शुक्ला वह नाम था, जिसने पहली बार उत्तर प्रदेश पुलिस को अपनी ताकत के आगे घुटने टेकने पर मजबूर कर दिया था. जानेंगे बिहार के उस डॉन के यहां वाकई में श्रीप्रकाश शुक्ला क्या करता था? मामखौर गांव के लोगों का कहना है कि श्रीप्रकाश शुक्ला कोई पैदाइशी अपराधी नहीं था. वह एक अखाड़े का पहलवान हुआ करता था, जो पांच-पांच लीटर दूध अकेले पी जाता था. लेकिन 1993 में एक घटना ने उसे अपराधी बना दिया. एक मनचले ने उसकी बहन को देखकर सीटी बजा दी थी. पहलवानी के जोश और खून की गर्मी में श्रीप्रकाश ने उस शख्स को पीट-पीटकर मार डाला. पुलिस से बचने के लिए बिहार भाग गया. जहां उसको बिहार के मोकामा के एक बाहुबली सूरजभान सिंह ने उसे संरक्षण दिया. श्रीप्रकाश शुक्ला सूरजभान सिंह का दाहिना हाथ बन गया. फिर बाद में वह बैंकॉक भाग गया, लेकिन जब लौटा तो वह शिव प्रकाश शुक्ला नहीं, बल्कि जरायम जगत का उभरता हुआ डॉन श्रीप्रकाश शुक्ला बन चुका था. बिहार का ठिकाना और सूरजभान सिंह से यारी एसटीएफ में शामिल एक अधिकारी के मुताबिक, यूपी में पुलिस का दबाव बढ़ा तो श्रीप्रकाश ने बिहार का रुख किया. बिहार उस वक्त बाहुबलियों और गैंगवार का गढ़ था. श्रीप्रकाश शुक्ला की मुलाकात वहां मोकामा के डॉन सूरजभान सिंह से हुई. सूरजभान को एक ऐसे शूटर की तलाश थी जो बिना पलक झपकाए ट्रिगर दबा सके और श्रीप्रकाश को चाहिए था सियासी और बाहुबली संरक्षण. श्रीप्रकाश शुक्ला का मोकामा और बेगूसराय कनेक्शन श्रीप्रकाश बिहार के मोकामा और बेगूसराय इलाकों में काफी समय तक रहा. वह सूरजभान सिंह के लिए काम करने लगा. बिहार में रहते हुए उसने रेलवे के ठेकों और कोयले के काले कारोबार में अपनी पैठ बनाई. सूरजभान और श्रीप्रकाश की जोड़ी ने बिहार के अंडरवर्ल्ड में खलबली मचा दी थी. कहा जाता है कि श्रीप्रकाश शुक्ला ही वो शख्स था जिसने बिहार के अपराधियों को एके-47 की ‘लज्जत’ चखाई थी. बृज बिहारी प्रसाद हत्याकांड बिहार में श्रीप्रकाश शुक्ला के नाम की दहशत तब फैली जब उसने 1998 में बिहार के कद्दावर मंत्री बृज बिहारी प्रसाद की हत्या कर दी. बृज बिहारी उस वक्त पटना के आईजीआईएमएस अस्पताल में भर्ती थे और भारी सुरक्षा के बीच टहल रहे थे. श्रीप्रकाश और उसके साथियों ने अस्पताल के परिसर में ही अपनी लाल बत्ती वाली गाड़ी से उतरकर एके-47 से गोलियों की ऐसी बौछार की कि सुरक्षाकर्मी देखते रह गए. इस हत्याकांड ने पूरे देश को हिला दिया था क्योंकि यह पहली बार था जब किसी मंत्री को इतने हाई-प्रोफाइल जोन में घुसकर मारा गया था. इश्क, मोबाइल फोन और एसटीएफ का जाल कहते हैं कि अपराधी चाहे कितना भी शातिर हो, कोई न कोई कमजोरी उसे ले डूबती है. श्रीप्रकाश की कमजोरी थी उसका इश्क और फोन. उस दौर में मोबाइल फोन बहुत महंगे होते थे और बहुत कम लोग इसका इस्तेमाल करते थे. श्रीप्रकाश की एक प्रेमिका गाजियाबाद में रहती थी. वह पुलिस से बचने के लिए जगह-जगह ठिकाने बदलता था, लेकिन अपनी प्रेमिका से लंबी बातें करना नहीं छोड़ता था. एसटीएफ का गठन इसी दौरान, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सरकार ने अपराधियों के खात्मे के लिए STF यानी Special Task Force का गठन किया. एसटीएफ के पहले बड़े टारगेट के रूप में श्रीप्रकाश शुक्ला का नाम था. एसटीएफ ने मोबाइल टावर लोकेशन और कॉल इंटरसेप्शन की तकनीक का इस्तेमाल किया. पुलिस को पता चला कि श्रीप्रकाश अपनी प्रेमिका को दिल्ली और गाजियाबाद के नंबरों पर फोन करता है. यही कॉल रिकॉर्ड्स उसकी मौत का वारंट बने. जब सीएम की ‘सुपारी’ लेकर की बड़ी गलती श्रीप्रकाश के अंत की शुरुआत तब हुई जब उसने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की सुपारी लेने की जुर्रत की. इंटेलिजेंस को खबर मिली कि श्रीप्रकाश ने 6 करोड़ रुपये में सीएम को मारने का ठेका लिया है. यह खबर पुलिस के लिए किसी सदमे से कम नहीं थी. इसके बाद आदेश साफ था ‘श्रीप्रकाश जिंदा नहीं बचना चाहिए’. गाजियाबाद में वो आखिरी एनकाउंटर 23 सितंबर 1998 का दिन था. एसटीएफ को पक्की सूचना मिली कि श्रीप्रकाश गाजियाबाद के वसुंधरा इलाके से गुजरने वाला है. पुलिस ने जाल बिछाया. जैसे ही श्रीप्रकाश की नीले रंग की सिएलो कार दिखाई दी, पुलिस ने उसे चारों तरफ से घेर लिया. श्रीप्रकाश ने अपनी आदत के मुताबिक गोलियां चलानी शुरू कर दीं, लेकिन इस बार उसका सामना यूपी के सबसे जांबाज पुलिस अधिकारियों से था. कुछ ही मिनटों की मुठभेड़ के बाद गाजियाबाद की सड़क पर श्रीप्रकाश शुक्ला का लहूलुहान शव पड़ा था. महज 25 साल की उम्र में जुर्म की ऊंचाइयों को छूने वाले श्रीप्रकाश शुक्ला का अंत हो चुका था. उसके पास से वही विदेशी हथियार और मोबाइल फोन मिले, जो कभी उसकी शान हुआ करते थे. उसकी कहानी आज भी यूपी-बिहार के अपराध जगत में सुनाई जाती है. कहा जाता है कि आज भी सूरजभान सिंह उसके परिवार का ख्याल रखता है. सूरजभान सिंह बाद में बलिया के सांसद बने और हाल ही में बिहार विधानसभा चुनाव में उनकी पत्नी वीणा देवी बाहुबली अनंत सिंह के खिलाफ लड़ी थी. हालांकि वह अनंत सिंह से हार गईं. लेकिन श्रीप्रकाश शुक्ला और सूरजभान सिंह में काफी नजदीकी थी.
तेलंगाना निकाय चुनाव: तेलंगाना निकाय चुनाव में 13 हजार से ज्यादा ताकतवर मुकाबले, 11 को वोट को लेकर पूरा।

नगर निगम निकाय चुनाव में लेकर राजनीतिक तापमान चरम पर है, जहां सत्ता की गलियों से लेकर झीलों तक तेलंगाना तट की घोषणा की जा रही है। राज्य के 7 नगर निगमों और 116 नगर निगमों में होने वाले इस ओलंपिक महाकुंभ में कुल 12,993 अभ्यर्थी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 2,996 वार्डों में इस चुनाव के लिए सभी खंडों को शामिल किया गया है, जहां प्रति वार्ड औसत चार ग्रीन के बीच कड़ी टक्कर को देखने को मिलता है। मतदान 11 तारीख को सुबह से शुरू होगा और 13 को प्रारंभिक के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा। रणनीतिकारों के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में आबादी के मैदान में उतरने का मतलब यह है कि कोई भी बैठना आसान नहीं है और हर वार्ड में प्रतिस्पर्धा दिलचस्प होने वाली है। पॉलिटिकल ने चुनावी प्रचार को अपने चरम पर पहुंचा दिया है और 9 तारीख को प्रचार अवधि समाप्त होने से पहले वे वोटर्स को नारे लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। पोलिंग आयोग ने आदर्श आचार संहिता के पालन के निर्देश दिए हैं, ताकि वोटिंग प्रक्रिया के दौरान मतदान करने वालों की संख्या कम हो सके। राजनीतिक के लिए अहम् परीक्षा यह चुनाव केवल स्थानीय डायनासोर के लिए नहीं, बल्कि राज्य के बड़े राजनीतिक चरित्र के लिए भी एक अहम परीक्षा की तरह है। मूर्तिकला से लेकर शहरी विकास तक, इस बार कई मुद्दों पर चर्चाओं में शामिल हैं। खैर ये चुनावी स्थानीय शास्त्रीय लड़ाई तो है, लेकिन इसके नतीजों का असर राज्य की राजनीति पर भी देखने को मिलता है। अब सभी परस्पर विरोधी 11 तारीख को मतदान प्रतिशत पर टिकी हैं, क्योंकि अधिकतर वोट होंगे, लोकतंत्र को समूह ही मजबूत माना जाएगा। सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद कर दी गयी चुनाव आयोग ने चाक-चौबंद के लिए फिलीस्तीन मतदान के लिए सुरक्षा व्यवस्था शुरू की है और लोगों को डराने या धमकाने के लिए अपने मताधिकार का प्रयोग करने की अपील की है। 13 तारीख को आने वाले नतीजे यह तय करेंगे कि आम जनता किसे अपना प्रतिनिधि चुनती है और राज्य के शहरी क्षेत्र का विकास किस दिशा में होगा। ये भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट में सबसे पीछे की कुर्सी पर बैठे हैं ममता बनर्जी, कर रही खुद सर के मुकदमे की लड़ाई (टैग्सटूट्रांसलेट)चुनाव(टी)तेलंगाना(टी)तेलंगाना नागरिक चुनाव(टी)तेलंगाना नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना स्थानीय निकाय चुनाव(टी)तेलंगाना राजनीति समाचार(टी)नगर निगम चुनाव(टी)वार्ड चुनाव तेलंगाना(टी)चुनाव(टी)तेलंगाना(टी)तेलंगाना नगर निगम चुनाव(टी)तेलंगाना नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना स्थानीय नगरपालिका चुनाव(टी)तेलंगाना राजनीति समाचार(टी)नगर निगम चुनाव(टी)वार्ड चुनावतेलंगाना
2.50 लाख को 2.50 करोड़ बनाने का झांसा, बिलासपुर में तांत्रिक गिरफ्तार

बिलासपुर/कोरिया. तंत्र-मंत्र के नाम पर ठगी का एक ऐसा सनसनीखेज मामला छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में सामने आया है, जिसने न सिर्फ पुलिस बल्कि आम लोगों को भी हैरान कर दिया है. यहां एक कथित तांत्रिक ने अनुष्ठान और चमत्कार के नाम पर 2.50 लाख रुपए को 2.50 करोड़ बनाने का दावा किया. इस झांसे को सच साबित करने के लिए बाकायदा पूजा-पाठ का नाटक रचा गया. नोटों की गड्डियों के सामने नारियल, अगरबत्ती और मंत्रोच्चार के साथ ऐसा माहौल बनाया गया, जैसे किसी फिल्म का सीन हो. इसी दौरान ऊपर से पैसों की बारिश होती दिखाई गई, जिसका वीडियो अब सामने आया है. यही वीडियो ठगी की सबसे बड़ी कड़ी बन गया. इस वीडियो को देखकर कोरिया जिले के चार युवक झांसे में आ गए और कथित तांत्रिक को ढाई लाख रुपए सौंप दिए. लेकिन जब उन्हें ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने अपने पैसे वापस मांगे, तो कहानी ने नया मोड़ ले लिया. तांत्रिक और उसके साथी पैसे लेकर फरार हो गए. इसके बाद पीड़ित युवकों ने खुद कानून हाथ में ले लिया. हाईवे पर बीच सड़क पर तांत्रिक को पकड़कर उसकी पिटाई की गई और लूटपाट की घटना भी सामने आई. अब इस पूरे मामले में ठगी और लूट, दोनों एंगल पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू कर दी है. कैसे रचा गया पैसों की बारिश का नाटकपुलिस जांच में सामने आया है कि यह पूरा खेल पहले से स्क्रिप्टेड था. बिल्हा थाना क्षेत्र के संबलपुरी गांव में कांग्रेस समर्थित सरपंच पति के घर अनुष्ठान का आयोजन किया गया. कथित तांत्रिक विजय कुमार राज ने पूजा स्थल सजाया. सामने नोटों की गड्डियां रखी गईं. मंत्र पढ़े गए और कैमरे के सामने अचानक ऊपर से नोट गिरते दिखाए गए. इस वीडियो को चमत्कार बताकर संभावित शिकारों को दिखाया गया. यही वीडियो देखकर कोरिया के चार युवक भरोसे में आ गए. कौन है कथित तांत्रिक विजय कुमार राजविजय कुमार राज उम्र 48 साल कोरबा जिले के दीपका का रहने वाला है. वह खुद को तांत्रिक बताता था और तंत्र विद्या से पैसा बढ़ाने का दावा करता था. पुलिस के मुताबिक उसके साथ इस ठगी में तीन महिलाएं और एक सरपंच पति शामिल था. महिलाएं लोगों को लालच देने और भरोसा जीतने का काम करती थीं. सरपंच पति स्थानीय स्तर पर व्यवस्था और संपर्क का जिम्मा संभालता था. ठगी से लूट तक पहुंचा मामला30 जनवरी को कोरिया के चार युवक ढाई लाख रुपए लेकर बिल्हा पहुंचे. अनुष्ठान के बाद पैसे विजय को सौंप दिए गए. अगले दिन जब युवकों को ठगी का शक हुआ और उन्होंने पैसे लौटाने की मांग की, तो तांत्रिक टालमटोल करने लगा. 31 जनवरी की रात करीब साढ़े तीन बजे विजय कार से जा रहा था. रतनपुर क्षेत्र में ढाबे के पास कार रोकी. तभी दो कारों में सवार पीड़ित युवक वहां पहुंचे और मारपीट शुरू कर दी. आरोप है कि इसके बाद तांत्रिक की कार, तीन मोबाइल और करीब 8 हजार रुपए कैश लूट लिया गया. SSP के निर्देश पर बनी विशेष टीमघटना की जानकारी मिलते ही SSP रजनेश सिंह के निर्देश पर विशेष पुलिस टीम गठित की गई. मोबाइल लोकेशन और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीम अंबिकापुर और कोरिया तक पहुंची. 2 फरवरी को मारपीट और लूट के चार आरोपियों को गिरफ्तार कर बिलासपुर लाया गया. उनके पास से लूटी गई कार, मोबाइल फोन, नकदी और वारदात में इस्तेमाल की गई क्रेटा और अर्टिगा कार भी जब्त की गई. तांत्रिक भी निकला ठगी का आरोपीजांच में यह भी सामने आया कि कथित तांत्रिक विजय कुमार राज ने शुरू में पुलिस से ठगी की बात छिपाई. लेकिन साक्ष्यों के आधार पर उसे भी आरोपी बनाया गया. पुलिस ने उसके खिलाफ बिल्हा थाने में धोखाधड़ी का केस दर्ज किया है. वहीं लूट और मारपीट के मामले में पीड़ित युवक भी आरोपी बने हैं. दोनों पक्षों पर अलग-अलग धाराओं में कार्रवाई जारी है. पुलिस की चेतावनी और आगे की कार्रवाई पुलिस अफसरों ने की अपीलASP मधुलिका सिंह ने बताया कि तंत्र-मंत्र से पैसा दोगुना करने का दावा करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. SSP रजनेश सिंह ने आम नागरिकों से अपील की है कि ऐसे चमत्कारी दावों के झांसे में न आएं. पुलिस का कहना है कि इस तरह के मामलों में लालच ही सबसे बड़ी कमजोरी बनता है.
सावधान! घर बैठे कमाई का लालच पड़ सकता है भारी, 12वीं पास साइबर ठग ने इस शख्स से झटके में कूट लिए 17 लाख रुपये | delhi police cyber crime arrest pathan uzef khalil khan maharashtra jalna work from home fraud case

नई दिल्ली. डिजिटल इंडिया के इस दौर में जहां इंटरनेट ने हमारे जीवन को सुगम बनाया है, वहीं साइबर अपराधियों ने इसे ठगी का नया हथियार बना लिया है. दिल्ली पुलिस की नॉर्थ-वेस्ट जिला साइबर सेल ने एक ऐसे ही अंतरराष्ट्रीय स्तर के साइबर सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है, जो वर्क फ्रॉम होम यानी घर बैठे काम के नाम पर मासूम लोगों की मेहनत की कमाई डकार रहा था. इस मामले में पुलिस ने महाराष्ट्र के जालना जिले से 25 वर्षीय एक युवक को गिरफ्तार किया है, जो इस पूरे खेल का मुख्य किरदार था. इस सनसनीखेज मामले की शुरुआत नए साल के पहले ही दिन यानी 1 जनवरी 2026 को हुई, जब दिल्ली के त्रिनगर के केशव पुरम निवासी राहुल सैनी ने पुलिस में एक शिकायत दर्ज कराई. राहुल ने बताया कि उसे घर बैठे ऑनलाइन टास्क पूरा करने के बदले मोटी कमाई का झांसा दिया गया था. शुरुआत में उसे कुछ छोटे-मोटे टास्क दिए गए और बदले में पैसे भी मिले, जिससे उसका भरोसा जीत लिया गया. लेकिन जैसे ही उसने बड़े निवेश वाले टास्क शुरू किए, साइबर ठगों ने उसे अपने जाल में फंसा लिया. राहुल से अलग-अलग बहानों और टैक्स के नाम पर कुल 17,16,777 रुपये ठग लिए गए. जब राहुल को अहसास हुआ कि उसके साथ धोखा हुआ है, तब तक काफी देर हो चुकी थी. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर-पश्चिमी जिला पुलिस ने एक विशेष टीम का गठन किया. इस टीम का नेतृत्व इंस्पेक्टर दिनेश दहिया कर रहे थे, जिसमें एसआई आरएन अशांग, हेड कांस्टेबल अमित, सोहन और संदीप शामिल थे. पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की पड़ताल शुरू की जिनमें राहुल ने पैसे ट्रांसफर किए थे. जांच के दौरान एक चौंकाने वाला मनी ट्रेल सामने आया. ठगी की गई रकम को कई म्यूल अकाउंट्स में घुमाया गया था ताकि पुलिस को भ्रमित किया जा सके. तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल फुटप्रिंट्स के आधार पर पुलिस को पता चला कि इस गिरोह का एक मुख्य सदस्य महाराष्ट्र के जालना में बैठकर अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है. पुलिस टीम ने तुरंत महाराष्ट्र का रुख किया और जालना में डेरा डाल दिया. कड़ी मेहनत और तकनीकी निगरानी के बाद आरोपी पठान उजेफ खलील खान को उसके ठिकाने से दबोच लिया गया. कौन है पठान उजेफ और क्या था उसका काम? 25 वर्षीय पठान उजेफ खलील खान केवल 12वीं पास है और पेशे से एक निजी होटल में शेफ का काम करता था. पूछताछ में उसने खुलासा किया कि वह अपनी विलासितापूर्ण जीवनशैली और माता-पिता की खराब आर्थिक स्थिति के कारण इस अपराध की दुनिया में शामिल हुआ. पुलिस के अनुसार, उजेफ इस गिरोह का वह ‘वर्टिकल’ था जो ठगी के पैसे को लिक्विडेट (नकद में बदलना) करता था. गिरोह के अन्य सदस्य जब शिकार को फंसा लेते थे तो पैसे उजेफ द्वारा प्रबंधित खातों में आते थे. उजेफ इन पैसों को ‘सेल्फ चेक’ के जरिए बैंक से निकालता था और फिर अपना कमीशन काटकर मुख्य सरगनाओं तक पहुंचा देता था. गिरफ्तारी से बचने के लिए वह लगातार अपने मोबाइल नंबर और ठिकाने बदलता रहता था. पुलिस ने उसके पास से अपराध में इस्तेमाल किया गया मोबाइल फोन भी बरामद किया है. कैसे काम करता है वर्क फ्रॉम होम स्कैम? यह स्कैम आमतौर पर टेलीग्राम या व्हाट्सएप मैसेज से शुरू होता है. ठग खुद को किसी बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी या मार्केटिंग फर्म का प्रतिनिधि बताते हैं. लुभावना ऑफर: आपको यूट्यूब वीडियो लाइक करने या होटल रिव्यू देने जैसे आसान काम दिए जाते हैं. भरोसा जीतना: पहले दो-तीन टास्क के लिए आपको 200-500 रुपये का भुगतान किया जाता है. बड़ा निवेश: इसके बाद आपको ‘वीआईपी टास्क’ के लिए पैसे जमा करने को कहा जाता है, जहाँ से ठगी का असली खेल शुरू होता है. पैसे की लेयरिंग: ठगी गई रकम को एक खाते से दूसरे खाते में भेजा जाता है ताकि पुलिस मुख्य अपराधी तक न पहुँच सके. दिल्ली पुलिस के एडिशनल कमिश्नर नॉर्थ-वेस्ट जिला भीष्म सिंह ने कहा है कि किसी भी अज्ञात नंबर से आए ‘वर्क फ्रॉम होम’ के ऑफर्स पर भरोसा न करें. यदि कोई भी व्यक्ति या संस्था काम देने से पहले आपसे पैसे की मांग करती है, तो वह निश्चित रूप से एक फ्रॉड है. पुलिस अब उजेफ से पूछताछ कर रही है ताकि इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पता लगाया जा सके. उजेफ को ट्रांजिट रिमांड पर दिल्ली लाया गया है और पुलिस को उम्मीद है कि उससे पूछताछ के बाद कई और बड़े खुलासे होंगे.
jashanpreet singh punjabi devils motorcycle club | guilty plea firearms machine gun illegal weapons | america fbi | कौन है ‘पंजाबी डेविल्स’ गैंग का सरगना जशनप्रीत सिंह, जिसको लेकर अमेरिका में मचा है बवाल?

जशनप्रीत सिंह अमेरिका में उन भारतीय युवाओं में से एक था, जो कैलिफोर्निया की सड़कों पर बाइक कल्चर में कूद पड़ा. अमेरिकी शहर स्टॉकटन में रहते हुए उसने पंजाबी डेविल्स (Punjabi Devils) नाम का एक मोटरसाइकिल क्लब बनाया, जो पंजाबी-सिख आइडेंटिटी से प्रेरित था. क्लब के सदस्य अक्सर गुरुद्वारे जाते, चैरिटी राइड्स करते, लेकिन अंदर से यह एक आउटलॉ गैंग था, जो नियम कायदा नहीं मानता था और जो हेल्स एंजेल्स जैसे बड़े गैंग से प्रभावित था. इस गैंग का लोगो एक दाढ़ी वाले शैतान की तस्वीर वाला था, जो पंजाबी टोपी पहने था. पंजाबी डेविल्स बाइक रैलियां, मीटिंग्स और सदस्यों को संगठित करता था. लेकिन जल्दी ही यह क्लब अवैध गतिविधियों में फंस गया. जून 2025 में जशनप्रीत सिंह ने एक अंडरकवर अधिकारी को हथियार बेचने की कोशिश में आरोपी बनाया गया और भारत भागते वक्त एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया. जशनप्रीत सिंह की कहानी एक छोटे बाइकर क्लब से शुरू होकर अवैध हथियारों का बड़े तस्कर के तौर पर उभर गया. बाद में भारत भागने की कोशिश में अमेरिकी जेल तक पहुंच गई. इस शख्स ने अमेरिका की धरती पर न केवल अपना गैंग बनाया, बल्कि वह खतरनाक हथियारों की तस्करी और घातक विस्फोटकों के काले कारोबार में भी शामिल हो गया. हम बात कर रहे हैं 27 वर्षीय जशनप्रीत सिंह की, जिसने हाल ही में अमेरिकी संघीय अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया है. कौन है ‘पंजाबी डेविल्स’ का संस्थापक जशनप्रीत सिंह? अमेरिकी अटॉर्नी एरिक ग्रांट के अनुसार, जशनप्रीत सिंह ने हथियारों के अवैध व्यापार और मशीन गन रखने के गंभीर आरोपों में अपनी गलती मान ली है. यह मामला न केवल हथियारों की तस्करी से जुड़ा है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भागने की एक नाकाम कोशिश की फिल्मी कहानी भी शामिल है. जशनप्रीत सिंह ने कैलिफोर्निया के स्टॉकटन शहर में ‘पंजाबी डेविल्स’ मोटरसाइकिल क्लब की नींव रखी थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई साधारण बाइकर्स ग्रुप नहीं था, बल्कि यह एक ‘आउटलॉ’ यानी कानून न मानने वाला गैंग था, जिसके संबंध दुनिया के सबसे खतरनाक बाइक गैंग ‘हेल्स एंजेल्स’ (Hells Angels) से बताए जाते हैं. जशनप्रीत इस गैंग का मुख्य चेहरा था और वह इसके जरिए अंडरवर्ल्ड और हथियारों की तस्करी की दुनिया में अपनी पैठ बना चुका था. जशनप्रीत की उम्र महज 27 साल है, लेकिन उसकी आपराधिक गतिविधियों का दायरा बहुत बड़ा था. वह स्टॉकटन और आसपास के इलाकों में अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला एक मुख्य कड़ी बन चुका था. हथियारों का जखीरा और ‘क्लेमोर’ माइन की बरामदगी जशनप्रीत की गिरफ्तारी की कहानी जून 2025 से शुरू होती है. 6 जून 2025 को जशनप्रीत ने एक अंडरकवर एजेंट (भेष बदले पुलिस अधिकारी) को कई खतरनाक हथियार बेचने की कोशिश की. इनमें एक शॉर्ट-बैरल राइफल, तीन असॉल्ट हथियार, तीन मशीन गन कन्वर्जन डिवाइस और एक रिवॉल्वर शामिल थे. जब पुलिस ने उसके घर और गाड़ी की तलाशी ली तो अधिकारी भी दंग रह गए. वहां से न केवल मशीन गन और साइलेंसर मिले, बल्कि पुलिस को एक ‘पाइनएप्पल’ स्टाइल का हैंड ग्रेनेड और एक मिलिट्री ग्रेड की ‘क्लेमोर’ माइन भी मिली. क्लेमोर माइन एक ऐसा विस्फोटक है जिसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में सेना द्वारा किया जाता है. इसकी गंभीरता को देखते हुए सैन जोकिन काउंटी शेरिफ विभाग की बम निरोधक टीम ने इन विस्फोटकों को मौके पर ही नष्ट किया. भारत भागने की नाकाम कोशिश और एयरपोर्ट पर ड्रामा जुलाई 2025 में जब जशनप्रीत पर राज्य स्तर के आरोप तय हुए, तो वह अदालत में पेश नहीं हुआ. इसके बाद उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया. जशनप्रीत जानता था कि वह फंस चुका है, इसलिए उसने अमेरिका छोड़कर भारत भागने का प्लान बनाया. 23 जुलाई 2025 को एफबीआई (FBI) को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) से अलर्ट मिला कि जशनप्रीत ने भारत के लिए टिकट बुक की है और वह 26 जुलाई को सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला है. लेकिन इससे पहले कि वह विमान में सवार होकर फरार हो पाता, अधिकारियों ने उसे एयरपोर्ट पर ही दबोच लिया. तब से वह संघीय हिरासत में है. कितने साल की होगी जेल? जशनप्रीत सिंह को सजा सुनाने के लिए 11 मई 2026 की तारीख तय की गई है. अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेल ए. ड्रोज़्ड उसे सजा सुनाएंगे. जशनप्रीत को दो अलग-अलग अपराधों के लिए भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है: अवैध हथियारों के सौदे के लिए: अधिकतम 5 साल की जेल और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना. मशीन गन रखने के लिए: अधिकतम 10 साल की जेल और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना. कुल मिलाकर, जशनप्रीत को 15 साल तक की जेल हो सकती है, हालांकि अंतिम सजा अदालत के विवेक और फेडरल सेंटेंसिंग गाइडलाइंस पर निर्भर करेगी. ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका यह मामला अमेरिकी न्याय विभाग के एक बड़े अभियान ‘ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका’ का हिस्सा है. इस अभियान का लक्ष्य अमेरिका में अवैध प्रवासियों द्वारा की जा रही घुसपैठ को रोकना, ड्रग कार्टेल्स और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों को खत्म करना और समुदायों को हिंसक अपराधों से सुरक्षित रखना है. जशनप्रीत के मामले की जांच में एफबीआई, एटीएफ, होमलैंड सिक्योरिटी और कई स्थानीय पुलिस विभागों ने मिलकर काम किया है.
मुंबई पुलिस के रडार पर कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? | mumbai police crime branch may interrogate lawrence bishnoi anmol bishnoi in bollywood director rohit shetty case

Lawrence Bishnoi: बॉलीवुड डायरेक्टर रोहित शेट्टी के घर फायरिंग में क्या लॉरेंस बिश्नोई गैंग शामिल है? क्या लॉरेंस बिश्नोई या उसके भाई अनमोल बिश्नोई से मुंबई पुलिस पूछताछ करने वाली है? मुंबई के जूहू में बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के आवास के बाहर एक फरवरी को अज्ञात हमलावरों ने 4-5 राउंड फायरिंग की. गोलीबारी से बालकनी के ग्लास पैनल में निशान आए, लेकिन रोहित शेट्टी सुरक्षित बच गए. उस वक्त रोहित शेट्टी अपने घर के सातवें मंजिल पर थे. इस घटना के बाद मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने 12 स्पेशल टीम बनाईं और 100 से ज्यादा CCTV चेक किए. मुंबई पुलिस को इस केस मेंपुणे से बाइक पर आए हमलावर का सुराग मिला. पुलिस ने 5 लोगों को हिरासत में लिया, बाद में 4 गिरफ्तार किए. शुरुआती जांच में लॉरेंस बिश्नोई गैंग से लिंक का शक, खासकर बाबा सिद्दीकी हत्याकांड से जुड़े शुभम लोनकर का मिला है. यह घटना बॉलीवुड में संगठित अपराध और गैंगवार की आशंका बढ़ा रही है. ऐसे में इस हाई-प्रोफाइल केस पूरे देश में चर्चा में है. ऐसे में अहमदाबाद जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई और दिल्ली के तिहाड़ जेल में बंद अनमोल बिश्नोई से क्या मुंबई पुलिस पूछताछ करेगी? लॉरेंस बिश्नोई से होगी पूछताछ! बॉलीवुड निर्देशक रोहित शेट्टी के जूहू स्थित आवास शेट्टी टावर के बाहर 1 फरवरी की देर रात हुई गोलीबारी ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है. अज्ञात हमलावरों ने करीब 4-5 राउंड फायर किए, जिसमें एक गोली बालकनी के ग्लास पैनल को तोड़ते हुए अंदर गई, लेकिन रोहित शेट्टी और उनके परिवार के कोई सदस्य घायल नहीं हुए. उस समय रोहित शेट्टी अपने घर की सातवीं मंजिल पर मौजूद थे. मुंबई पुलिस ने इस घटना के 12 घंटे के भीतर चार लोगों को गिरफ्तार किया. गिरफ्तार किए शख्स का नाम स्वप्निल साकत, सिद्धार्थ येन्पुरे, आदित्य गायकवाड़, समर्थ पोमाजी है. सभी गिरफ्तार शख्स का उम्र 18 साल से 23 साल के बीच है. इन लोगों पर आरोप है कि इन्होंने हमलावरों को लॉजिस्टिक सपोर्ट दिया. मुंबई पुलिस के रडार पर क्यों और कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? रोहित शेट्टी के घर फायरिंग पर बड़ा अपडेट मुबंई पुलिस ने एक और आरोपी अमन मारोटे को नोटिस जारी किया गया. ये सभी शुभम लोनकर के निर्देश पर काम कर रहे थे, जो लॉरेंस बिश्नोई गैंग का सदस्य है और बाबा सिद्दीकी हत्याकांड में आरोपी है. शूटर अभी फरार है. गिरफ्तार लोगों ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोनकर से संपर्क किया और स्कूटर खरीदकर उसे जूहू में छोड़ दिया था. क्या बिश्नोई ब्रदर्स से होगी पूछताछ? रोहित शेट्टी के घर हमला करने के बाद कुछ घंटों बाद लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने सोशल मीडिया पर जिम्मेदारी ली. शुभम लोंकर और आरजू बिश्नोई से जुड़े अकाउंट से पोस्ट में लिखा कि यह ट्रेलर है और अगर रोहित शेट्टी ने उनके काम में दखल दिया तो अगली गोलियां उनके छाती में या बेडरूम में लगेंगी. पोस्ट में पूरे बॉलीवुड को चेतावनी दी गई कि बाबा सिद्दीकी की तरह हालात न हों तो अपनी राह सुधारें. पुलिस इस पोस्ट की आईपी ट्रेस कर रही है. मुंबई पुलिस हल्के में नहीं ले रही ये घटना अब सवाल उठ रहा है कि क्या मुंबई पुलिस अहमदाबाद की साबरमती जेल में बंद लॉरेंस बिश्नोई से पूछताछ करेगी? सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच इस पर विचार कर रही है ताकि असली मोटिव और साजिश का पता लगे. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा है कि शुभम लोनकर ने लोकल लोगों को भर्ती किया, ऐसा लगता है वह बॉलीवुड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराना चाहता है और एक्सटॉर्शन नेटवर्क को फिर से सक्रिय करना चाहता है.. हालांकि, यह भी संभव है कि लोनकर ने बिश्नोई की जानकारी के बिना यह कदम उठाया हो. फिलहाल कोई फाइनल फैसला नहीं हुआ है, लेकिन पूछताछ की संभावना मजबूत है. मुंबई पुलिस के रडार पर क्यों और कैसे आया गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई, रोहित शेट्टी केस में होगी पूछताछ? लॉरेंस के भाई अनमोल बिश्नोई, जो तिहाड़ जेल में बंद हैं, इस केस में सीधे रडार पर नहीं दिख रहे. जांच अभी शूटर्स और लोनकर पर केंद्रित है, लेकिन अगर बड़े लेवल की साजिश सामने आई तो अनमोल पर भी नजर जा सकती है. यह घटना बॉलीवुड में संगठित अपराध और गैंगवार की आशंका को बढ़ा रही है. रोहित शेट्टी ने कोई पूर्व धमकी नहीं मिलने की बात कही है, लेकिन उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई है. पुलिस अब शूटर को पकड़ने पर फोकस कर रही है, जिसकी गिरफ्तारी से पूरी साजिश खुल सकती है. जांच जारी है और अगले कुछ दिनों में बड़े खुलासे की उम्मीद है.
बंगाल चुनाव 2026: किस विधानसभा चुनाव के लिए वाम-कांग्रेस में होगा गठबंधन? सीपीआई (एम) ने किया खुलासा

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026: सर को लेकर पश्चिम बंगाल की राजनीति में हलचल है। वोट-मुखी पश्चिम बंगाल में हर दिन राजनीतिक पारा चढ़ रहा है। इसके साथ ही राजनीतिक सूत्रों पर भी चर्चा शुरू हो गई है. इस 2026 के विधानसभा चुनाव में वाम-कांग्रेस के बीच सीट समझौते को लेकर विभिन्न हलकों में चर्चा शुरू हो गई है. इस संबंध में अब एबीपी आनंद के सामने सीपीआईएम के राज्य सचिव मोहम्मद अरायल ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है. आपसे पूछा गया, ”चुनाव तो लगभग आ गया है। आप भी निश्चित रूप से अपनी रणनीति बना रहे हैं। 2021 में आप कांग्रेस के साथ गए थे। इस बार कांग्रेस के साथ आपका रुख क्या है?” चर्चा फाइनल स्टेज में- मोहम्मद महासभा उत्तर में मोहम्मद राय ने कहा, ‘हम पिछली पूजा के बाद से ही वाम मोर्चे के जो सहयोगी हैं, उनके साथ हम चर्चा कर रहे हैं। चार साथ की चर्चा हो रही है। उन्होंने आगे कहा, ”मेरे पास सी-सटीक लिबरेशन से बात है। वे इस बात से सहमत हैं कि वामपंथ में नहीं रहेंगे. वाम मोर्चे के सहयोगी के रूप में हमारा समर्थन करेंगे, हम बीजेपी-तृणमूल को हराने के लिए लड़ेंगे। सीट को लेकर जिस दिन बैठेंगे उस दिन फाइनल हो जाएगा। आईएसएसएफ भी साथ आने के लिए सहमत- मोहम्मद आध्याल ईसाई कहते हैं, “वामपंथियों के बाहर जो हैं, उनसे हमारी आईएसएफ के साथ बात हुई है। वे भी सैद्धांतिक रूप से सहमत हैं कि वामपंथियों के साथ ही लड़ेंगे। उन्हें यह भी कहा जाता है कि और कौन आएगा यह कोई शर्त नहीं रखेगा। वामपंथियों के सहयोगियों को जैसे कहा गया है कि वे भी वामपंथियों के साथ ही लड़ेंगे।” उन्होंने आगे कहा, ”कांग्रेस की ओर से पार्टी की ओर से कुछ सिद्धांतों को प्रदर्शित किया गया है। अगर सहमति हो सके तो कुछ पार्टीवाद। इसलिए बार-बार कहा जा रहा है कि पहले राजनीतिक रूप से रुख साफ करना होगा। वामपंथ के साथ सहमति बनाने के लिए पहले राजनीति को स्पष्ट करना होता है। वह राजनीति में बीजेपी-तृणमूल विरोधी होगी। सांप्रदायिकता-साम्राज्यवाद विरोधी और गठबंधन करने वाले लोगों के पक्ष में होंगे।” ईसाई ने कहा, ”वैश्विक कैथोलिकों के सामने सिर नहीं झुकाया जाता है, उन कांग्रेस कैथोलिकों का हम सम्मान करते हैं।” बहुत लालची-प्रलोभन-मारपीट-लाठी-जेल-जुर्माना, सी.पी.आई.एम. की तरह है। वे क्लासिक में नहीं गए, उस सम्मान को खत्म करना होगा। “वैश्विक नेतृत्व के साथ अगर कांग्रेस का व्यावसायिक या वाणिज्यिक या राजनीतिक संबंध है, तो उसके लिए ये को-लेटरल डेमेज क्यों होंगे?” (टैग्सटूट्रांसलेट)एबीपी आनंद एक्सक्लूसिव(टी)सीपीएम(टी)वाम-कांग्रेस गठबंधन(टी)मोहम्मद सलीम(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)सीपीआई एम(टी)कांग्रेस(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल समाचार(टी)पश्चिम बंगाल समाचार(टी)एली(टी)डब्ल्यूबी चुनाव 2026(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव 2026(टी)एबीपी आनंदा एक्सक्लूसिव(टी)सी पीएम(टी)लेफ्ट-कांग्रेस गठबंधन(टी)मोहम्मद दरगाह(टी)पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026(टी)बीजेपी(टी)सी गठबंधन पार्टी(टी)कांग्रेस(टी)टीएमसी(टी)पश्चिम बंगाल समाचार







