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jashanpreet singh punjabi devils motorcycle club | guilty plea firearms machine gun illegal weapons | america fbi | कौन है ‘पंजाबी डेविल्स’ गैंग का सरगना जशनप्रीत सिंह, जिसको लेकर अमेरिका में मचा है बवाल?

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जशनप्रीत सिंह अमेरिका में उन भारतीय युवाओं में से एक था, जो कैलिफोर्निया की सड़कों पर बाइक कल्चर में कूद पड़ा. अमेरिकी शहर स्टॉकटन में रहते हुए उसने पंजाबी डेविल्स (Punjabi Devils) नाम का एक मोटरसाइकिल क्लब बनाया, जो पंजाबी-सिख आइडेंटिटी से प्रेरित था. क्लब के सदस्य अक्सर गुरुद्वारे जाते, चैरिटी राइड्स करते, लेकिन अंदर से यह एक आउटलॉ गैंग था, जो नियम कायदा नहीं मानता था और जो हेल्स एंजेल्स जैसे बड़े गैंग से प्रभावित था. इस गैंग का लोगो एक दाढ़ी वाले शैतान की तस्वीर वाला था, जो पंजाबी टोपी पहने था. पंजाबी डेविल्स बाइक रैलियां, मीटिंग्स और सदस्यों को संगठित करता था. लेकिन जल्दी ही यह क्लब अवैध गतिविधियों में फंस गया. जून 2025 में जशनप्रीत सिंह ने एक अंडरकवर अधिकारी को हथियार बेचने की कोशिश में आरोपी बनाया गया और भारत भागते वक्त एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया.

जशनप्रीत सिंह की कहानी एक छोटे बाइकर क्लब से शुरू होकर अवैध हथियारों का बड़े तस्कर के तौर पर उभर गया. बाद में भारत भागने की कोशिश में अमेरिकी जेल तक पहुंच गई. इस शख्स ने अमेरिका की धरती पर न केवल अपना गैंग बनाया, बल्कि वह खतरनाक हथियारों की तस्करी और घातक विस्फोटकों के काले कारोबार में भी शामिल हो गया. हम बात कर रहे हैं 27 वर्षीय जशनप्रीत सिंह की, जिसने हाल ही में अमेरिकी संघीय अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया है.

कौन है ‘पंजाबी डेविल्स’ का संस्थापक जशनप्रीत सिंह?

अमेरिकी अटॉर्नी एरिक ग्रांट के अनुसार, जशनप्रीत सिंह ने हथियारों के अवैध व्यापार और मशीन गन रखने के गंभीर आरोपों में अपनी गलती मान ली है. यह मामला न केवल हथियारों की तस्करी से जुड़ा है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भागने की एक नाकाम कोशिश की फिल्मी कहानी भी शामिल है.

जशनप्रीत सिंह ने कैलिफोर्निया के स्टॉकटन शहर में ‘पंजाबी डेविल्स’ मोटरसाइकिल क्लब की नींव रखी थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई साधारण बाइकर्स ग्रुप नहीं था, बल्कि यह एक ‘आउटलॉ’ यानी कानून न मानने वाला गैंग था, जिसके संबंध दुनिया के सबसे खतरनाक बाइक गैंग ‘हेल्स एंजेल्स’ (Hells Angels) से बताए जाते हैं. जशनप्रीत इस गैंग का मुख्य चेहरा था और वह इसके जरिए अंडरवर्ल्ड और हथियारों की तस्करी की दुनिया में अपनी पैठ बना चुका था.

जशनप्रीत की उम्र महज 27 साल है, लेकिन उसकी आपराधिक गतिविधियों का दायरा बहुत बड़ा था. वह स्टॉकटन और आसपास के इलाकों में अवैध हथियारों की सप्लाई करने वाला एक मुख्य कड़ी बन चुका था.

हथियारों का जखीरा और ‘क्लेमोर’ माइन की बरामदगी

जशनप्रीत की गिरफ्तारी की कहानी जून 2025 से शुरू होती है. 6 जून 2025 को जशनप्रीत ने एक अंडरकवर एजेंट (भेष बदले पुलिस अधिकारी) को कई खतरनाक हथियार बेचने की कोशिश की. इनमें एक शॉर्ट-बैरल राइफल, तीन असॉल्ट हथियार, तीन मशीन गन कन्वर्जन डिवाइस और एक रिवॉल्वर शामिल थे.

जब पुलिस ने उसके घर और गाड़ी की तलाशी ली तो अधिकारी भी दंग रह गए. वहां से न केवल मशीन गन और साइलेंसर मिले, बल्कि पुलिस को एक ‘पाइनएप्पल’ स्टाइल का हैंड ग्रेनेड और एक मिलिट्री ग्रेड की ‘क्लेमोर’ माइन भी मिली. क्लेमोर माइन एक ऐसा विस्फोटक है जिसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में सेना द्वारा किया जाता है. इसकी गंभीरता को देखते हुए सैन जोकिन काउंटी शेरिफ विभाग की बम निरोधक टीम ने इन विस्फोटकों को मौके पर ही नष्ट किया.

भारत भागने की नाकाम कोशिश और एयरपोर्ट पर ड्रामा

जुलाई 2025 में जब जशनप्रीत पर राज्य स्तर के आरोप तय हुए, तो वह अदालत में पेश नहीं हुआ. इसके बाद उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया. जशनप्रीत जानता था कि वह फंस चुका है, इसलिए उसने अमेरिका छोड़कर भारत भागने का प्लान बनाया.

23 जुलाई 2025 को एफबीआई (FBI) को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) से अलर्ट मिला कि जशनप्रीत ने भारत के लिए टिकट बुक की है और वह 26 जुलाई को सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला है. लेकिन इससे पहले कि वह विमान में सवार होकर फरार हो पाता, अधिकारियों ने उसे एयरपोर्ट पर ही दबोच लिया. तब से वह संघीय हिरासत में है.

कितने साल की होगी जेल?

जशनप्रीत सिंह को सजा सुनाने के लिए 11 मई 2026 की तारीख तय की गई है. अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेल ए. ड्रोज़्ड उसे सजा सुनाएंगे. जशनप्रीत को दो अलग-अलग अपराधों के लिए भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है:

  1. अवैध हथियारों के सौदे के लिए: अधिकतम 5 साल की जेल और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना.
  2. मशीन गन रखने के लिए: अधिकतम 10 साल की जेल और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना.
  3. कुल मिलाकर, जशनप्रीत को 15 साल तक की जेल हो सकती है, हालांकि अंतिम सजा अदालत के विवेक और फेडरल सेंटेंसिंग गाइडलाइंस पर निर्भर करेगी.

ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका

यह मामला अमेरिकी न्याय विभाग के एक बड़े अभियान ‘ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका’ का हिस्सा है. इस अभियान का लक्ष्य अमेरिका में अवैध प्रवासियों द्वारा की जा रही घुसपैठ को रोकना, ड्रग कार्टेल्स और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों को खत्म करना और समुदायों को हिंसक अपराधों से सुरक्षित रखना है. जशनप्रीत के मामले की जांच में एफबीआई, एटीएफ, होमलैंड सिक्योरिटी और कई स्थानीय पुलिस विभागों ने मिलकर काम किया है.

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जशनप्रीत सिंह अमेरिका में उन भारतीय युवाओं में से एक था, जो कैलिफोर्निया की सड़कों पर बाइक कल्चर में कूद पड़ा. अमेरिकी शहर स्टॉकटन में रहते हुए उसने पंजाबी डेविल्स (Punjabi Devils) नाम का एक मोटरसाइकिल क्लब बनाया, जो पंजाबी-सिख आइडेंटिटी से प्रेरित था. क्लब के सदस्य अक्सर गुरुद्वारे जाते, चैरिटी राइड्स करते, लेकिन अंदर से यह एक आउटलॉ गैंग था, जो नियम कायदा नहीं मानता था और जो हेल्स एंजेल्स जैसे बड़े गैंग से प्रभावित था. इस गैंग का लोगो एक दाढ़ी वाले शैतान की तस्वीर वाला था, जो पंजाबी टोपी पहने था. पंजाबी डेविल्स बाइक रैलियां, मीटिंग्स और सदस्यों को संगठित करता था. लेकिन जल्दी ही यह क्लब अवैध गतिविधियों में फंस गया. जून 2025 में जशनप्रीत सिंह ने एक अंडरकवर अधिकारी को हथियार बेचने की कोशिश में आरोपी बनाया गया और भारत भागते वक्त एयरपोर्ट से गिरफ्तार कर लिया गया.

जशनप्रीत सिंह की कहानी एक छोटे बाइकर क्लब से शुरू होकर अवैध हथियारों का बड़े तस्कर के तौर पर उभर गया. बाद में भारत भागने की कोशिश में अमेरिकी जेल तक पहुंच गई. इस शख्स ने अमेरिका की धरती पर न केवल अपना गैंग बनाया, बल्कि वह खतरनाक हथियारों की तस्करी और घातक विस्फोटकों के काले कारोबार में भी शामिल हो गया. हम बात कर रहे हैं 27 वर्षीय जशनप्रीत सिंह की, जिसने हाल ही में अमेरिकी संघीय अदालत में अपना जुर्म कबूल कर लिया है.

कौन है ‘पंजाबी डेविल्स’ का संस्थापक जशनप्रीत सिंह?

अमेरिकी अटॉर्नी एरिक ग्रांट के अनुसार, जशनप्रीत सिंह ने हथियारों के अवैध व्यापार और मशीन गन रखने के गंभीर आरोपों में अपनी गलती मान ली है. यह मामला न केवल हथियारों की तस्करी से जुड़ा है, बल्कि इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भागने की एक नाकाम कोशिश की फिल्मी कहानी भी शामिल है.

जशनप्रीत सिंह ने कैलिफोर्निया के स्टॉकटन शहर में ‘पंजाबी डेविल्स’ मोटरसाइकिल क्लब की नींव रखी थी. जांच एजेंसियों के मुताबिक, यह कोई साधारण बाइकर्स ग्रुप नहीं था, बल्कि यह एक ‘आउटलॉ’ यानी कानून न मानने वाला गैंग था, जिसके संबंध दुनिया के सबसे खतरनाक बाइक गैंग ‘हेल्स एंजेल्स’ (Hells Angels) से बताए जाते हैं. जशनप्रीत इस गैंग का मुख्य चेहरा था और वह इसके जरिए अंडरवर्ल्ड और हथियारों की तस्करी की दुनिया में अपनी पैठ बना चुका था.

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जब पुलिस ने उसके घर और गाड़ी की तलाशी ली तो अधिकारी भी दंग रह गए. वहां से न केवल मशीन गन और साइलेंसर मिले, बल्कि पुलिस को एक ‘पाइनएप्पल’ स्टाइल का हैंड ग्रेनेड और एक मिलिट्री ग्रेड की ‘क्लेमोर’ माइन भी मिली. क्लेमोर माइन एक ऐसा विस्फोटक है जिसका इस्तेमाल युद्ध के मैदान में सेना द्वारा किया जाता है. इसकी गंभीरता को देखते हुए सैन जोकिन काउंटी शेरिफ विभाग की बम निरोधक टीम ने इन विस्फोटकों को मौके पर ही नष्ट किया.

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जुलाई 2025 में जब जशनप्रीत पर राज्य स्तर के आरोप तय हुए, तो वह अदालत में पेश नहीं हुआ. इसके बाद उसके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट जारी किया गया. जशनप्रीत जानता था कि वह फंस चुका है, इसलिए उसने अमेरिका छोड़कर भारत भागने का प्लान बनाया.

23 जुलाई 2025 को एफबीआई (FBI) को अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) से अलर्ट मिला कि जशनप्रीत ने भारत के लिए टिकट बुक की है और वह 26 जुलाई को सैन फ्रांसिस्को इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरने वाला है. लेकिन इससे पहले कि वह विमान में सवार होकर फरार हो पाता, अधिकारियों ने उसे एयरपोर्ट पर ही दबोच लिया. तब से वह संघीय हिरासत में है.

कितने साल की होगी जेल?

जशनप्रीत सिंह को सजा सुनाने के लिए 11 मई 2026 की तारीख तय की गई है. अमेरिकी जिला न्यायाधीश डेल ए. ड्रोज़्ड उसे सजा सुनाएंगे. जशनप्रीत को दो अलग-अलग अपराधों के लिए भारी सजा का सामना करना पड़ सकता है:

  1. अवैध हथियारों के सौदे के लिए: अधिकतम 5 साल की जेल और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना.
  2. मशीन गन रखने के लिए: अधिकतम 10 साल की जेल और 2,50,000 डॉलर का जुर्माना.
  3. कुल मिलाकर, जशनप्रीत को 15 साल तक की जेल हो सकती है, हालांकि अंतिम सजा अदालत के विवेक और फेडरल सेंटेंसिंग गाइडलाइंस पर निर्भर करेगी.

ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका

यह मामला अमेरिकी न्याय विभाग के एक बड़े अभियान ‘ऑपरेशन टेक बैक अमेरिका’ का हिस्सा है. इस अभियान का लक्ष्य अमेरिका में अवैध प्रवासियों द्वारा की जा रही घुसपैठ को रोकना, ड्रग कार्टेल्स और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक संगठनों को खत्म करना और समुदायों को हिंसक अपराधों से सुरक्षित रखना है. जशनप्रीत के मामले की जांच में एफबीआई, एटीएफ, होमलैंड सिक्योरिटी और कई स्थानीय पुलिस विभागों ने मिलकर काम किया है.

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