Peeragarhi flyover 3 death body | पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर कार में 3 लाश, एक महिला संग 2 पुरुष कौन थे, सॉफ्ट ड्रिंक खोलेगा रहस्य, अब तक क्या पता चला? | Peeragarhi flyover 3 death body in car 1 woman 2 men who were those how they killed soft drink bottle mystery what police found

Peeragarhi Flyover Death Mystery: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में रविवार को पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर एक कार के अंदर तीन लोग मृत पाए गए. मृतकों की पहचान रंधीर, शिवनरेश और लक्ष्मी के रूप में हुई है. इनमें से एक वाहन का मालिक भी था. दोपहर बाद करीब 3:50 बजे PCR कॉल मिली, जिसमें बताया गया कि फ्लाईओवर की सर्विस लेन के पास एक कार में बैठे तीन लोग बेहोश पड़े हैं. दिल्ली पुलिस ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बाहरी दिल्ली के पीरागढ़ी फ्लाईओवर पर दो पुरुष और एक महिला के शव मिले हैं. पुलिस ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह खुद ही जान देने का मामला लगता है. बाहरी जिला के पुलिस उपायुक्त सचिन शर्मा ने बताया कि मामले की जांच जारी है. डीसीपी सचिन शर्मा ने बताया कि हमें एक कार में तीन शव होने की सूचना मिली थी. उन्होंने बताया कि ऐसा नहीं लगता कि कोई जोर-जबरदस्ती हुई है. पुलिस अभी जांच कर रही है. पुलिस ने बताया कि शवों पर किसी प्रकार की चोट के स्पष्ट निशान नहीं हैं. इस घटना से जुड़ी हर डिटेल इस तरह से है -: घटना कहां हुई?दिल्ली के पश्चिमी इलाके में पीरागढ़ी फ्लाईओवर के पास एक कार में तीन शव मिलने से सनसनी फैल गई. यह कार सर्विस लेन के पास खड़ी थी. दिल्ली पुलिस को सूचना कैसे मिली?करीब 3:50 बजे PCR कॉल मिली कि कार में बैठे लोग प्रतिक्रिया नहीं दे रहे हैं और बेहोश लग रहे हैं. मौके पर पहुंचने पर पुलिस ने क्या पाया?पुलिस ने कार खोलकर देखा तो अंदर तीनों लोग मृत मिले और वाहन में जहरीले पदार्थ की तेज गंध थी. कार से सॉफ्ट ड्रिंक का बोतल बरामद किया गया है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है. क्या मृतकों की पहचान हुई है?मृतकों की पहचान 76 वर्षीय रंधीर सिंह, 47 वर्षीय शिव नरेश सिंह और 40 वर्षीय लक्ष्मी देवी के रूप में हुई है. मृतक कहां के रहने वाले थे?रंधीर सिंह और शिव नरेश सिंह बापरोला गांव के निवासी थे, जबकि लक्ष्मी देवी का पता अभी स्पष्ट नहीं है. कार में उनकी स्थिति कैसी थी?रंधीर सिंह ड्राइविंग सीट पर थे, जबकि शिव नरेश और लक्ष्मी देवी पीछे की सीट पर बैठे मिले. सभी शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है. रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजहों का पता चल सकेगा. कार किसकी थी?पुलिस के अनुसार कार मृतकों में से एक की ही थी. क्या शरीर पर चोट के निशान थे?पुलिस ने बताया कि किसी भी शव पर बाहरी चोट के निशान नहीं मिले हैं. मौके से क्या-क्या बरामद हुआ?कार से मोबाइल फोन, नकदी और महिला के पहने हुए गहने सुरक्षित मिले हैं. सॉफ्ट ड्रिंक का बोतल भी मिला है. क्या कोई संदिग्ध वस्तु मिली?फॉरेंसिक टीम को कार में एक सॉफ्ट ड्रिंक की बोतल मिली है, जिसे जांच के लिए भेजा गया है. पुलिस की शुरुआती जांच क्या कहती है?पुलिस की मानें तो प्राथमिक जांच में यह मामला सामूहिक आत्महत्या का प्रतीत हो रहा है. हत्या की आशंका पर क्या कहा गया?फिलहाल जबरन कार्रवाई के कोई संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन सभी पहलुओं की जांच जारी है. परिजनों से संपर्क कैसे हुआ?दस्तावेजों के आधार पर पुलिस ने रंधीर सिंह के परिजनों से संपर्क किया और एक रिश्तेदार मौके पर पहुंचा. लक्ष्मी देवी का अन्य दो से क्या संबंध था?परिजन उनके संबंध के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दे सके हैं. शवों का क्या किया गया है?तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. फिलहाल रिपोर्ट का इंतजार है, ताकि मौत की वजहों का पता चल सके. मौत के कारणों की पुष्टि कैसे होगी?पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक जांच के बाद ही सही कारणों का पता चलेगा. पुलिस अधिकारियों ने क्या बयान दिया?डीसीपी सचिन शर्मा ने कहा कि मामला संदिग्ध नहीं लग रहा, लेकिन जांच जारी है. इलाके में क्या कदम उठाए गए?पुलिस ने घटनास्थल को घेर लिया और फॉरेंसिक टीम के साथ साक्ष्य जुटाए. क्या कोई लूटपाट या संघर्ष के संकेत मिले?नहीं, सभी कीमती सामान सुरक्षित मिले हैं और संघर्ष के कोई निशान नहीं पाए गए. आगे की कार्रवाई क्या होगी?फॉरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद पुलिस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई तय करेगी.
बेंगलुरु में बेवड़ी छोरियों का उत्पात: टक्कर के बाद कैब ड्राइवर की आई शामत, बीच बचाव में लोगों के छूटे पसीने

Last Updated:February 08, 2026, 19:35 IST Bangalore Drunk Women Road Rage: बेंगलुरु में नशे में धुत दो युवतियों ने शनिवार रात जमकर उत्पात मचाया. उनकी टू-व्हीलर के कैब से टकराने के बाद शुरू हुए विवाद में उन्होंने ड्राइवर को हेलमेट और लोहे की चैन से पीटा. बीच-बचाव करने आए स्थानीय लोगों पर भी हमला किया गया. पुलिस हिरासत में भी युवतियां अश्लील इशारे और गालियां देती रहीं. पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों को गिरफ्तार कर लिया है और जांच जारी है. पुलिस मामले की जांच कर रही है. आधी रात का वक्त, शराब का नशा और टक्क्र. बेंगलुरु की सड़कों पर शनिवार रात जो मंजर दिखा उसने कानून-व्यवस्था को शर्मसार कर दिया. नशे में धुत दो युवतियों ने न केवल एक कैब ड्राइवर को हेलमेट से पीटा बल्कि बीच-बचाव करने आए आम लोगों पर भी जंजीरों से हमला बोल दिया. हद तो तब हो गई जब पुलिस की गाड़ी के भीतर से भी ये युवतियां अश्लील इशारे और गालियां देती रहीं. बेंगलुरु की पब कल्चर वाली सड़कों पर यह किसी फिल्मी विलेन जैसा खौफनाक ड्रामा था. नशे की सनक और सरेआम गुंडागर्दीपुलिस के मुताबिक, शनिवार रात लिसा और मैथ्यू नाम की दो युवतियां अपने दोस्तों से मिलकर घर लौट रही थीं. नशे में चूर इन युवतियों की टू-व्हीलर ने अहमद नामक ड्राइवर की कैब को पीछे से टक्कर मार दी. जब अहमद ने विरोध किया तो युवतियों का पारा चढ़ गया. उन्होंने ड्राइवर को गंदी गालियां देना शुरू किया और पास पड़ा हेलमेट उसके सिर पर दे मारा. मारपीट और अश्लील इशारेवहां मौजूद चश्मदीदों का दावा है कि युवतियों ने अपने हाथों पर लोहे की चैन लपेट रखी थी जिससे उन्होंने कैब ड्राइवर और वहां मौजूद लोगों पर ताबड़तोड़ वार किए. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक युवती बीच सड़क पर पुरुषों को लात मारती और अश्लील इशारे करती नजर आ रही है. पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया है लेकिन उनकी आक्रामकता पुलिस वैन के अंदर भी कम नहीं हुई. सवाल-जवाब बेंगलुरु में नशे में धुत युवतियों के बवाल की मुख्य वजह क्या थी?नशे में धुत दो युवतियों की टू-व्हीलर ने एक कैब को पीछे से टक्कर मार दी थी, जिसके बाद बहस मारपीट में बदल गई. नशे में धुत युवतियों की पहचान क्या है?पुलिस ने आरोपियों की पहचान लिसा और मैथ्यू के रूप में की है, जिन्हें हिरासत में ले लिया गया है. बेंगलुरु में मारपीट के दौरान युवतियों ने किन हथियारों का इस्तेमाल किया?युवतियों ने कैब ड्राइवर पर हेलमेट से हमला किया और हाथ में चैन लपेटकर लोगों को मारा. बंगलुरु वायरल वीडियो में युवतियों का व्यवहार कैसा दिख रहा है?वीडियो में युवतियां भीड़ को गालियां दे रही हैं, अश्लील इशारे कर रही हैं और रोकने की कोशिश कर रहे पुरुषों को लात मार रही हैं. पुलिस ने बेंगलुरु में नशे में धुत युवतियों के मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?स्थानीय निवासियों की शिकायत पर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और दोनों युवतियों को जेल भेजकर जांच शुरू कर दी है. About the Author Sandeep Gupta पत्रकारिता में 14 साल से भी लंबे वक्त से सक्रिय हूं. साल 2010 में दैनिक भास्कर अखबार से करियर की शुरुआत करने के बाद नई दुनिया, दैनिक जागरण और पंजाब केसरी में एक रिपोर्टर के तौर पर काम किया. इस दौरान क्राइम और…और पढ़ें First Published : February 08, 2026, 19:33 IST
Delhi Gangster: 4500 KM तक पीछा, 100 होटलों में रेड, फिर मिली दिल्ली पुलिस को बड़ी कामयाबी | delhi police special cell chase 4500 km and caught two dreaded sharpshooters kapil sangwan alias nandu gang kolhapur maharashtra

Last Updated:February 08, 2026, 19:22 IST दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 4500 किलोमीटर के फिल्मी पीछा के बाद कुख्यात कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग के दो खूंखार शार्पशूटरों, सौरभ और योगेश को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया है. हरियाणा के संदीप हत्याकांड के मुख्य आरोपी इन बदमाशों ने 100 से अधिक होटलों में छिपने की कोशिश की, लेकिन पुलिस के फंदे से नहीं बच सके. नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने एक बेहद चुनौतीपूर्ण और साहसिक ऑपरेशन को अंजाम देते हुए कुख्यात गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू गैंग के दो मुख्य शार्पशूटरों को गिरफ्तार कर लिया है. इन आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दिल्ली पुलिस की टीम ने हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और मध्य प्रदेश होते हुए महाराष्ट्र तक 4500 किलोमीटर का लंबा सफर तय किया. इन्हें कोल्हापुर के श्री टेम्बलई मंदिर के पास से धर दबोचा गया. सौरभ लाकड़ा और योगेश शर्मा की तलाश पुलिस को 17 जुलाई 2025 को हरियाणा के बादली में हुए सनसनीखेज संदीप उर्फ बबलू हत्याकांड में थी. संदीप जब अपने दोस्त के साथ कार में जा रहा था, तभी इन हमलावरों ने कपिल सांगवान उर्फ नंदू के इशारे पर उन पर अंधाधुंध फायरिंग की थी, जिसमें संदीप की मौत हो गई थी. स्पेशल सेल के डीसीपी आलाप पटेल के अनुसार, इंस्पेक्टर पवन कुमार और सुमित कादयान की टीम को जनवरी के आखिरी हफ्ते में इन बदमाशों के महाराष्ट्र में होने की सूचना मिली थी. 100 से ज्यादा होटल: पुलिस टीम ने कोल्हापुर और आसपास के इलाकों में 100 से अधिक होटलों और गेस्ट हाउसों की तलाशी ली. 28-29 जनवरी की दरम्यानी रात को पुलिस ने ऊंचगांव रोड पर घेराबंदी कर दोनों को काबू किया. पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उन्होंने प्रतिद्वंद्वी गिरोहों से खतरे के कारण मध्य प्रदेश से हथियार खरीदे थे. पुलिस ने दिल्ली में उनकी निशानदेही पर छापेमारी कर 02 पिस्टल और 02 कारतूस बरामद किए हैं. गैंगस्टर कपिल सांगवान उर्फ नंदू का खौफकपिल सांगवान उर्फ नंदू फिलहाल विदेश में बैठकर अपना गैंग चला रहा है. वह दिल्ली के नजफगढ़ और हरियाणा के इलाकों में रंगदारी और वर्चस्व की लड़ाई के लिए जाना जाता है. योगेश और सौरभ जैसे शार्पशूटर उसके सबसे भरोसेमंद गुर्गे हैं, जो सुपारी लेकर हत्याओं को अंजाम देते हैं. कानूनी कार्रवाई और साइड इफेक्ट्सपुलिस ने इन दोनों के खिलाफ BNSS (भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता) की विभिन्न धाराओं और आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है. इस गिरफ्तारी से नंदू गैंग को बड़ा झटका लगा है और दिल्ली-हरियाणा के व्यापारियों ने राहत की सांस ली है. पुलिस अब इनके अन्य सहयोगियों और हथियारों के सप्लायरों की तलाश में जुटी है. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi Cantonment,New Delhi,Delhi First Published : February 08, 2026, 19:22 IST
ghaziabad triple sisters suicide case: ghaziabad police six questions to father list | three wives why extra marital affairs | गाजियाबाद ट्रिपल सुसाइड केस में पिता से पुलिस के ये 6 सवाल, तीन बीवियां फिर एक्स्ट्रा मैरिटल अफेयर्स क्यों?

Ghaziabad Triple Sisters Suicide Case: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी की 9वीं मंजिल से कूदकर जान देने वाली तीन सगी बहनों के पिता चेतन को लेकर सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं. 12, 14 और 16 साल की तीन सगी बहनों निशिका, प्राची और पाखी की आत्महत्या की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, गाजियाबाद पुलिस को डरावने सच से सामना हो रहा है. हर दिन नए-नए सुराग हाथ लग रहे हैं. जांच में जो सबसे चौंकाने वाली बात सामने आई है, वह है पिता चेतन कुमार का निजी जीवन. गाजियाबाद पुलिस के अनुसार चेतन ने तीन सगी बहनों सुजाता, हीना और टीना से शादी की. फिर बाद में एक पत्नी की सहेली से भी उसके संबंध हो गए, जिसकी वजह से परिवार में अक्सर झगड़े होते रहते थे. उस लिव इन पार्टनर की भी साल 2018 में तीसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी. पुलिस ने उस वक्त हादसा बताया था, लेकिन अब उस केस की भी फाइल फिर से खुल गई है. चेतन की पहली पत्नी सुजाता से संतान न होने पर उसने उसकी छोटी बहन हीना से शादी हुई. बाद में दो पत्नियों की तीसरी बहन टीना को भी पत्नी बनाकर घर ले आया. तीन बेटियों की मौत के बाद अब एक 13 साल का एक दिव्यांग बेटा और टीना से जन्मी चार साल की एक बेटी बची है. मरने वाली बच्चियों में एक सुजाता की और दो हीना की बेटी थी. पहले कहा गया था कि सुजाता से बच्चा नहीं होने पर परिवार ने ही उसकी बहन से शादी करवा दी. लेकिन बाद में सुजाता से बच्चा फिर कैसे हो गया? अब गाजियाबाद पुलिस ने कई सवालों के साथ चेतन और तीन पत्नियों के साथ-साथ अन्य संबंधियों से पूछताछ कर रही है. आइए जानते हैं कि गाजियाबाद ने चेतन और उसके पत्नियों से क्या-क्या सवाल पूछे? गाजियाबाद पुलिस का पिता चेतन से छह सवाल 1-बच्चियों को स्कूल क्यों नहीं भेजा? बच्चियों ने कोरोना के समय में स्कूल जाना बंद कर दिया था. इसके बाद कई बार स्कूल भेजने की कोशिश की, लेकिन तीनों नहीं गए. बेटियां की निगरानी क्यों नहीं कर पाए? तीनों बेटियां एक साथ खाती, रहतीं और टॉयलेट जाती थीं. तीनों हमारे साथ सोती थीं, लेकिन मुझको नींद आते ही मोबाइल लेकर तीनों दूसरे कमरे में जाकर देखने लगती थीं. आपकी कितनी महिलाओं से संबंध रहे? पहली पत्नी सुजाता है, जिसके संतान न होने पर परिवार की मर्जी से साली हिना से शादी कर ली. सीलमपुर में ससुराल के पड़ोस में रहने वाली तब्बू से संबंध हो गए. उसे नौ साल पहले राजेंद्रनगर वाले फ्लैट में साथ रहने के लिए लाया तो घर पर झगड़े होने लगे. 2018 में यहां उसकी तीसरी मंजिल से गिरकर मौत हो गई थी. उस समय मैं घर में नहीं था. इसके बाद तब्बू की रिश्तेदार टीना से संबंध हो गए और उसके गर्भवती होने पर कोर्ट मैरिज कर ली. बच्चियों से मारपीट और शादी कराने की बात में क्या सच्चाई है? नहीं, कभी भी बच्चियों के साथ मारपीट नहीं किया. शादी कराने की बात उन्हें डराने के लिए कही थी, ताकि मोबाइल देखना छोड़ दें. बच्चियों को मोबाइल कब दिलाए? करीब छह सात महीने पहले दो मोबाइल दिलाए थे. दोनों फोन एक जानकार के कहने पर एक व्यक्ति को बेच दिए. दो फ्लैट किराये पर क्यों लिए? घर में ज्यादा सदस्य थे. कभी कोई मेहमान आता या कभी झगड़ा होता था तो उसके लिए दूसरा फ्लैट किराये पर लिया था. क्या बिजनेस में नुकसान हुआ? कोरोना के दौरान थोड़ा नुकसान हुआ, लेकिन दो करोड़ के कर्ज की बात गलत है. बच्चियों को क्या दिक्कत थी? विवाहित चेतन से क्यों शादी की? (पत्नियों से सवाल) सुजाता ने कहा कि उनकी गलती थी जो बच्चियों पर ध्यान नहीं दिया. इसीलिए अपनी बच्चियों को खो दिया. हिना ने कहा कि परिवार की मर्जी से शादी की. वहीं, टीना ने कहा कि संबंध हो जाने के कारण शादी कर ली. तीनों ने चेतन पर कोई भी आरोप नहीं लगाया. पुलिस अब क्या करेगी? गाजियाबाद पुलिस अब साल 2015 से उन पुरानी फाइलों को भी खंगाल रही है, जब चेतन ने एक बाद एक तीन शादियां की. फिर एक पूर्व लिव-इन पार्टनर की साहिबाबाद के राजेंद्र नगर में एक इमारत की छत से गिरकर संदिग्ध मौत हुई थी. उस समय पुलिस ने उसे ‘सुसाइड’ मानकर केस बंद कर दिया था, लेकिन अब तीन बेटियों की उसी अंदाज में हुई मौत ने पुलिस को उस पुराने मामले को दोबारा खोलने पर मजबूर कर दिया है. ये कहानी है गाजियाबाद के भारत सिटी सोसाइटी की, जहां एक सामान्य दिखने वाला परिवार अंदर से टूटा-बिखरा था. एक सुसाइड नोट, जिसमें लिखे थे सॉरी पापा. लेकिन ये शब्द एक गहरी साजिश, पारिवारिक उलझनों और भावनात्मक पीड़ा की कहानी छिपाए हुए थे. परिवार में तीन पत्नियां, पांच बच्चे सभी एक ही फ्लैट में रहते हैं, लेकिन ये साथ सिर्फ दिखावा था.अब पुलिस के सामने आने वाले दिनों में कई और सवाल खड़े हैं. लगभग चार साल से घर में कोई टीवी नहीं, कोई दोस्त नहीं. तीनों बहनें पूरी तरह अलग-थलग पड़ गईं. क्या सचमुच में तीनों बहनों की दुनिया कोरियन कल्चर में बस गई थी? वे सोशल मीडिया पर कोरियन नामों से एक्टिव थीं ली नो भैया, कुइना दीदी जैसे नामों से रिश्ते जोड़तीं. कोरियन टीवी सीरीज के-पॉप म्यूजिक और गेम्स उनकी जिंदगी बन गए थे. डायरी में लिखा था- वी लव कोरियन. लव, लव, लव. कोरियन वाज अवर लाइफ. लेकिन पिता चेतन को ये पसंद नहीं था. अब गाजियाबाद पुलिस जांच कर रही है कि क्या सच में सुसाइड था या फिर कुछ और?
Hindu girls in Pakistan: abduction forced marriage | conversion punishment | how muslim ppc law difference bns act | पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन शादी की सच्चाई

Pakistan Hindu Girl Story: पाकिस्तान में बालिग या नाबालिग हिंदू या मुस्लिम लड़कियों का अपहरण करके बलात्कार करना, जबरन शादी करना और फिर तलाक दे देना या मार देना कितना बड़ा अपराध है? क्या पाकिस्तान में भी भारत की तरह ही कानून है या फिर अलग? क्या पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों को घर से उठाकर शादी करना या बलात्कार करने की सजा, मुस्लिमों के साथ होने वाली इस तरह की घटनाओं जैसी ही है? क्या पाकिस्तान में भी भारतीय न्याय संहिता या फिर आईपीसी और सीआरपीसी की तरह कानून है? पाकिस्तान पेनल कोड (PPC) की धारा 498B के तहत जबरन शादी को अपराध माना जाता है, इसके बाद भी हिंदू लड़कियों के साथ इस तरह की घटनाएं क्यों ज्यादा हो रही हैं? जानिए जमीनी हकीकत. पाकिस्तान में जबरन शादी करने पर कितने साल की सजा होती है? पाकिस्तान पेनल कोड की धारा 498B के तहत जबरन शादी को अपराध माना जाता है. इसमें 3 से 7 साल की जेल और जुर्माने की सजा हो सकती है. इसी तरह धारा 375 बलात्कार को परिभाषित करती है और धारा 365 अपहरण को. हालांकि, अल्पसंख्यक समुदायों, खासकर हिंदू और ईसाई लड़कियों के मामलों में यह पाकिस्तानी कानून कमजोर है. अक्सर धर्म परिवर्तन का दावा करके अपराध को जायज ठहरा दिया जाता है. इसी तरह अदालतें शरिया कानून का हवाला देकर पीड़िता को अपहरणकर्ता के साथ रखने का फैसला सुना देती है. पाकिस्तानी कानून भारतीय कानून से कितना अलग है? भारत में कानून ज्यादा सेकुलर हैं और अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा बेहतर है. संविधान की धारा 15, 25 है, लेकिन दोनों देशों में सामाजिक पूर्वाग्रह और राजनीतिक दबाव से न्याय प्रभावित होता है. पाकिस्तान में धार्मिक अदालतें और राजनीतिक प्रभाव ज्यादा हैं, जबकि भारत में हाल के एंटी-कन्वर्जन लॉज को ‘लव जिहाद’ के नाम पर विवादास्पद माना जाता है. पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के साथ क्या होता है? एक कहानी से समझें- यह स्टोरी साल 2012 में पाकिस्तानी हिंदू रिंकल कुमारी पर आधारित है, जो पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों के अपहरण और जबरन रूपांतरण का एक प्रमुख उदाहरण है. न्यूज 18 हिंदी ने इसे एक काल्पनिक कथा के रूप में प्रस्तुत किया है, लेकिन तथ्यों पर आधारित और भारत के कानून से तुलना की है. सिंध प्रांत के छोटे से शहर मीरपुर मथेलो में रहने वाली 19 साल की रिंकल कुमारी एक साधारण हिंदू परिवार की बेटी थी. उसके पिता एक स्कूल टीचर थे और रिंकल कॉलेज जाना चाहती थी. एक रात फरवरी 2012 में कुछ लोग उसके घर में घुसे. उन्होंने रिंकल को क्लोरोफॉर्म से बेहोश किया और अपहरण कर लिया. अगले दिन, उसके परिवार को पता चला कि रिंकल को पड़ोसी नवेद शाह ने अपहरण किया है, जो मुस्लिम था. अपहरण के बाद नवेद ने कोर्ट में क्या दावा किया था? नवेद ने दावा किया कि रिंकल ने अपनी इच्छा से इस्लाम कबूल किया और उससे शादी की. लेकिन रिंकल के परिवार ने कहा कि यह जबरन था. रिंकल के पिता ने पुलिस में शिकायत की, लेकिन स्थानीय प्रभावशाली नेता मियां मिथु ने नवेद का साथ दिया. पाकिस्तान में ऐसे मामलों में पीपीसी की धारा 498B के बावजूद, अगर रूपांतरण का दावा हो तो कोर्ट्स शरिया का हवाला देकर पीड़िता को अपहरणकर्ता के साथ रख सकती हैं. हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा? रिंकल का केस करांची हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सुनवाई के दौरान रिंकल ने रोते हुए कहा, ‘मैं हिंदू हूं, मुझे जबरन कन्वर्ट किया गया.’ लेकिन दबाव में उसने कोर्ट में नवेद के साथ रहने का बयान दिया. सुप्रीम कोर्ट ने उसे तीन हफ्ते प्रोटेक्टिव कस्टडी में रखा, लेकिन आखिर में उसे नवेद के साथ जाने दिया. यह मामला भारत में होता तो क्या होता? जबकि, परिवार का कहना था कि रिंकल को धमकी दी गई थी. अगर वह वापस आई तो परिवार का कत्ल कर दिया जाएगा. अब भारत से तुलना करें. अगर यह मामला भारत में होता तो उस समय आईपीसी की धारा 366 के तहत अपहरण और शादी के लिए दंड 10 साल तक का होता. अगर रिंकल नाबालिग होती हालांकि वह 19 की है. लेकिन मान लीजिए 17 की होती भारत में नवेद पर POCSO एक्ट लागू होता, जिसमें स्टेट्यूटरी रेप की सजा आजीवन कारावास तक है. भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा संविधान की किसा धारा के तहत होती है? भारत में अल्पसंख्यक अधिकारों की सुरक्षा संविधान की धारा 25 से होती और एनजीओ या हाई कोर्ट ज्यादा सक्रिय होते. पाकिस्तान में धार्मिक दबाव ज्यादा था, जबकि भारत में सेकुलर फ्रेमवर्क से न्याय की उम्मीद ज्यादा होती. रिंकल की स्टोरी हजारों हिंदू लड़कियों की तरह खत्म हुई. वह कभी घर नहीं लौटी. उसके परिवार ने पाकिस्तान छोड़ दिया और मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठा, लेकिन न्याय नहीं मिला. यह दिखाता है कि कानून होने के बावजूद, सामाजिक और राजनीतिक दबाव कैसे अल्पसंख्यकों को प्रभावित करते हैं. पाकिस्तान की तरह अगर नाबालिग लड़कियों का भारत में अपहरण होता तो कितनी होती सजा? भारत की तरह पाकिस्तान में भी नाबालिग लड़की को अपहरण करके जबरन शादी करना अपराध है. पाकिस्तान में चाइल्ड मैरिज रेस्ट्रेंट एक्ट 1929 के तहत महिलाओं की शादी की न्यूनतम उम्र 16 साल है. वहीं पुरुषों के लिए 18, लेकिन सिंध प्रांत में 2013 के एक्ट और इस्लामाबाद में 2025 के नए कानून के तहत दोनों लिंगों के लिए 18 साल है. पाकिस्तान में लगभग हर साल 1,000 से अधिक अल्पसंख्यक लड़कियां अपहरण, धर्म परिवर्तन और मुस्लिम लड़के के साथ जबरन शादी का शिकार होती हैं. पाकिस्तान में हिंदू लड़कियों और महिलाओं को सबसे ज्यादा अपराधों का सामना जैसे अपहरण, इस्लाम धर्म अपनाने का मजबूर करना, जबरन शादी, घरेलू दासता और यौन हिंसा से सामना करना पड़ता है. ये अपराध मुख्य रूप से सिंध प्रांत में होते हैं, जहां हिंदू अल्पसंख्यक हैं.
दिल्ली पुलिस ने 48 घंटे में छात्रा का मोबाइल बरामद किया: weeping girl arrived police station case solved by delhi police in 48 hours shahdara district gtb enclave

नई दिल्ली. राजधानी दिल्ली के शाहदरा जिले से इंसानियत और पुलिसिया मुस्तैदी की एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने खाकी के प्रति जनता के भरोसे को और मजबूत किया है. यह कहानी एक छात्रा की मेहनत, उसके आंसुओं और दिल्ली पुलिस के उस वादे की है, जिसे पुलिस ने दो दिन की मोहलत में पूरा कर दिखाया. एक छात्रा के साथ ऐसी घटना घटी, जिसने दिल्ली पुलिस के अधिकारी को दिल पसीज गया. घटना है तो बहुत छोटी, लेकिन इतनी मार्मिक है, जिसको सुनकर आपका भी दिल पसीज जाएगा. 31 जनवरी 2026 की शाम एक छात्रा रोती-बिलखती हुई जी.टी.बी. एन्क्लेव थाने पहुंची. उसके आंसू थमने का नाम नहीं ले रहे थे. उसने पुलिस को बताया कि उसने अपनी पॉकेट मनी से पाई-पाई जोड़कर एक मोबाइल फोन खरीदा था, जिसे दो मोटर साइकिल सवार लड़कों ने उससे छीन लिया. छात्रा का रो-रोकर बुरा हाल था, वह बार-बार कह रही थी कि वह अब दूसरा फोन नहीं खरीद पाएगी और उसकी परीक्षाओं पर भी इसका असर पड़ेगा. छात्रा के साथ क्या हुआ था? छात्रा की हालत देख पुलिस टीम भावुक हो गई. जीटीबी एन्क्लेव पुलिस स्टेशन की टीम ने छात्रा को दिलासा दिया और एक बड़ा वादा किया. पुलिस ने बोला- बेटी, तुम शांति से अपनी परीक्षा की तैयारी करो, तुम्हारा छीना हुआ फोन दो दिन के भीतर वापस मिल जाएगा शुरू हुआ दिल्ली पुलिस का एक्शन शाहदरा जिले के डीसीपी प्रशांत गौतम के निर्देश पर एक क्रैक टीम बनाई गई. इस टीम में हेड कांस्टेबल मनीष, मनोज, सचिन और कांस्टेबल अभिषेक शामिल थे. टीम ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों के दर्जनों सीसीटीवी कैमरों की जांच की. फुटेज में दो संदिग्ध युवक हीरो स्प्लेंडर मोटरसाइकिल पर झपटमारी कर भागते हुए नजर आए. पुलिस ने भागने के रास्ते पर लगे कैमरों का पीछा किया, जिससे आरोपियों के ठिकाने का अंदाजा लगा. 48 घंटे में ही पूरा हुआ ऑपरेशन 3 फरवरी 2026 को, जब क्रैक टीम गश्त पर थी, तभी एक मुखबिर से गुप्त सूचना मिली कि वारदात में शामिल संदिग्ध युवक फिर से किसी वारदात को अंजाम देने के इरादे से इलाके में घूम रहा है. पुलिस ने तुरंत घेराबंदी की और दोनों आरोपियों को दबोच लिया. पूछताछ में उन्होंने छात्रा से मोबाइल छीनने की बात कबूल कर ली. पकड़े गए दोनों आरोपी कोई नौसिखिए नहीं, बल्कि पुराने अपराधी हैं. मानसरोवर पार्क का रहने वाला राहुल पहले भी 8 आपराधिक मामलों में शामिल रह चुका है. 36 साल का राजेश कुमार सैनी मॉडर्न शाहदरा का रहने वाला 4 वारदातों में शामिल रहा है. दिल्ली पुलिस ने अपना वादा निभाया और 48 घंटे के भीतर आरोपी को पकड़कर मोबाइल बरामद कर लिया. अब छात्रा अपनी परीक्षाएं बिना किसी तनाव के दे सकेगी. डीसीपी प्रशांत गौतम ने टीम की सराहना करते हुए कहा कि पुलिस का काम केवल अपराधी को पकड़ना ही नहीं, बल्कि पीड़ित को न्याय दिलाना और समाज में सुरक्षा की भावना पैदा करना भी है.
दिल्ली में रिक्शा चालक से Oppo मोबाइल लूट, चमन गिरफ्तार : delhi police anand parbat rickshaw puller mobile snatching robbery case arrest 22 year boy bns sections

होमताजा खबरDelhi नाम- चमन, काम- रिक्शा चालकों से मोबाइल लूटना, ऐसे रगड़ दिया दिल्ली पुलिस Last Updated:February 05, 2026, 17:50 IST Delhi Crime News: दिल्ली पुलिस ने आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती निवासी चमन को रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग से गिरफ्तार किया, जिसने 3 फरवरी 2026 को ओप्पो मोबाइल लूट में दो साथियों संग रिक्शा चालक को निशाना बनाया था. फाइल फोटो- दिल्ली पुलिस नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस ने सनसनीखेज लूट की वारदात को सुलझाया है, जो आपको हैरान कर देगा. पुलिस ने एक शातिर लुटेरे को गिरफ्तार किया है, जिसने अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर एक गरीब रिक्शा चालक को अपना निशाना बनाया था. घटना 3 फरवरी 2026 की हुई थी. रिक्शा चालक रात के समय पहाड़गंज से काम निपटाकर लौट रहा था. जैसे ही वह रोहतक रोड पर एक जूस की दुकान के पास पहुंचा, तीन लड़कों ने उसका रास्ता रोक लिया. वारदात को बड़े ही शातिर तरीके से अंजाम दिया गया. रिक्शा चालक ने बताया एक शख्स धक्का देकर नीचे गिरा दिया. दो अन्य ने उसके हाथ और पैर पकड़ लिए ताकि वह हिल न सके. तीसरे आरोपी ने जबरन उसकी पैंट की जेब से ओप्पो (Oppo) मोबाइल फोन निकाला और तीनों मौके से फरार हो गए. पीड़ित की शिकायत पर आनंद पर्वत थाने में बीएनएस के तहत मामला दर्ज किया गया. दिल्ली पुलिस का ऑपरेशन चमन लूट की गंभीरता को देखते हुए एसीपी पटेल नगर और आनंद पर्वत एसएचओ के नेतृत्व में एक टीम बनाई गई. जांच के दौरान पुलिस ने इलाके के सीसीटीवी फुटेज खंगाले और अपने गुप्तचरों को सक्रिय किया. बीट पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई ताकि संदिग्धों पर नजर रखी जा सके. गुप्त सूचना पर मिली बड़ी कामयाबी तलाश के दौरान पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली कि लूट में शामिल एक आरोपी रामस्वरूप विद्यार्थी मार्ग पर सीएनजी पंप के पास खड़ा है. पुलिस टीम ने बिना देरी किए मौके पर दबिश दी और मुखबिर की निशानदेही पर आरोपी को धर दबोचा. पकड़े गए आरोपी की पहचान चमन, जिसकी उम्र 22 साल के रूप में हुई, जो आनंद पर्वत की पंजाबी बस्ती का रहने वाला है. तलाशी लेने पर उसके पास से रिक्शा चालक का लूटा हुआ मोबाइल फोन मिल गया. नशे की लत बनी जुर्म की वजह पूछताछ के दौरान आरोपी चमन ने अपना जुर्म कबूल कर लिया. उसने बताया कि वह कम समय में ज्यादा पैसे कमाने और अपनी नशे की जरूरतों को पूरा करने के लिए चोरी, झपटमारी और लूट जैसी वारदातों को अंजाम देता है. पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, चमन का पुराना आपराधिक इतिहास भी है. वह साल 2025 में भी आर्म्स एक्ट के तहत आनंद पर्वत थाने में गिरफ्तार हो चुका है. पुलिस अब चमन के उन दो अन्य साथियों की तलाश कर रही है जो इस वारदात में शामिल थे और अभी फरार हैं. About the Author रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें Location : Delhi,Delhi,Delhi First Published : February 05, 2026, 17:48 IST
20 साल की दिव्यांग बच्ची, 16 रेप के आरोपी; DNA जांच में बच्चे का दादा ही निकला ‘बाप’

Last Updated:February 05, 2026, 17:25 IST Mumbai Crime News: मुंबई में एक बाप अपनी बेटी से रेप कर प्रेग्नेंट करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने बताया कि लड़की मूक-बधिर थी, वह अपनी पीड़ा किसी से बयां नहीं कर सकती थी. पुलिस ने बताया कि पेट दर्द का इलाज कराने के लिए दादी के साथ अस्पताल पहुंची थी, जहां उसे पांच महीने के प्रेग्नेंसी का पता चला. पेट दर्द की इलाज कराने असप्ताल पहुंची लड़की पांच महीने की प्रेग्नेंट निकली. (सांकेतिक) Mumbai Crime News: मुंबई के पॉश से दिल दहलाने वाली खबर आई है. दक्षिण मुंबई में एक 20 साल की मूक-बधिर संग दरिंदगी ने लोगों को झकझोर दिया. दिल दहलाने वाली एक ऐसी कहानी है जिसे सुनकर किसी भी पत्थर दिल इंसान की रूह कांप जाए. एक 15 साल की युवती, जो न बोल सकती थी और न ही दुनिया को समझने की मानसिक स्थिति में थी, उसे हवस के भेड़ियों ने अपनी दरिंदगी का शिकार बनाया. तबीयत ज्यादा खराब होने के बाद, जब अस्पताल भर्ती कराया गया, तो दरिंदों की पोल खुली. दरअसल, अस्पताल पेट दर्द को लेकर पहुंची पांच महीने की प्रेग्नेंट थी. वहीं, डॉक्टरों की टीम ने पुलिस की निगरानी में DNA रिपोर्ट में लड़की का बाप ही उसके बच्चे का बाप निकला. पुलिस के सूत्रों के मुताबिक यह मामला 2025 में तब सामने आया. हॉस्पिटल स्टाफ ने मेडिकल जांच के दौरान पाया कि चुप रहने वाली महिला पांच महीने की प्रेग्नेंट थी. सितंबर में अपनी दादी से पेट में तकलीफ की शिकायत करने के बाद उसे शहर के कामा एंड एल्ब्लेस हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था. डॉक्टरों ने जब युवती की जांच की, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई. वह युवती, जो अपनी तकलीफ जुबां से बयां नहीं कर सकती थी, पांच महीने की गर्भवती थी. पुलिस जांच में खुला राजअस्पताल प्रशासन ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. जब पुलिस ने तफ्तीश शुरू की, तो परत दर परत सच सामने आया. सच ने समाज के चेहरे पर तमाचा जड़ दिया. पीड़ित युवती मानसिक रूप से दिव्यांग और मूक-बधिर थी, जिसका फायदा उठाकर एक-दो नहीं, बल्कि 16 अलग-अलग दरिंदों ने बार-बार उसके साथ घिनौना काम किया. DNA रिपोर्ट का खुलासा पुलिस के लिए असली चुनौती यह थी कि आखिर उस मासूम को गर्भवती करने वाला मुख्य आरोपी कौन है? पुलिस ने संदेह के घेरे में आए 16 लोगों को राउंडअप किया. इन 16 लोगों में युवती का अपना पिता भी शामिल था. उन सभी के खून के नमूने और DNA सैंपल लिए गए ताकि भ्रूण के जेनेटिक मटेरियल से उनका मिलान किया जा सके. जब फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आई, तो 16 लोगों में से केवल एक व्यक्ति का DNA मैच हुआ. वो कोई और नहीं, बल्कि उस लड़की का सगा पिता था. उस पिता ने अपनी सगी बेटी की जिंदगी को नर्क बना दिया. रिश्तों का कत्ल काउंसलिंग के दौरान पीड़ित युवती ने टूटी-फूटी भाषा और संकेतों में बताया कि उसके साथ कई लोगों ने गलत काम किया था. पुलिस ने इस मामले में पहले ही एक पुरुष और एक को गिरफ्तार किया था, लेकिन मुख्य आरोपी के रूप में पिता का नाम सामने आना सबसे बड़ा झटका था. पुलिस के अनुसार, यह दरिंदगी पिछले साल मार्च से सितंबर के बीच हुई थी. फिलहाल पुलिस ने आरोपी पिता को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की गहन जांच जारी है. समाज के लिए एक बड़ा सवाल हमारे समाज के खोखलेपन की गवाही है. एक दिव्यांग बेटी जो अपनी सुरक्षा के लिए अपने पिता पर निर्भर थी, उसे उसी घर में कैद कर दिया गया जहां उसका रक्षक ही भक्षक बन बैठा. 16 लोगों की हैवानियत झेलने वाली उस मासूम की ‘खामोश चीख’ आज हम सब से सवाल पूछ रही है क्या हम वाकई एक सुरक्षित समाज में रह रहे हैं? About the Author Deep Raj Deepak दीप राज दीपक 2022 में न्यूज़18 से जुड़े. वर्तमान में होम पेज पर कार्यरत. राजनीति और समसामयिक मामलों, सामाजिक, विज्ञान, शोध और वायरल खबरों में रुचि. क्रिकेट और मनोरंजन जगत की खबरों में भी दिलचस्पी. बनारस हिंदू व…और पढ़ें Location : Mumbai,Maharashtra First Published : February 05, 2026, 17:19 IST
why girls are disappearing from delhi : special ground report doctor maid 16 year old daughter love story delhi police – क्यों गायब हो रही हैं दिल्ली से लड़कियां, नौकरानी की 16 साल की बेटी की कहानी से आपको समझ में आ जाएगा

नई दिल्ली. पिछले साल नवंबर महीने में रात के तकरीबन 11.30 बज रहे थे. दिल्ली सरकार के एक बड़े अस्पताल के डॉक्टर ने न्यूज 18 हिंदी को फोन कर बताया, ‘उनकी नौकरानी की बेटी अचानक घर से गायब हो गई है. नौकरानी ने रोते कुछ देर पहले बताया कि सर देखिए न मेरी बेटी तीन-चार दिनों से लापता है. आनंद पर्वत थाने में शिकायत भी दर्ज कराई है, लेकिन दिल्ली पुलिस कुछ कर नहीं रही है. कुछ लिंक है तो जरा बेटी का पता लगवा दीजिए. लड़की 4 दिनों से घर से गायब है. नाबालिग है सर डर लग रहा है. क्या दिल्ली पुलिस में कोई है, जो मेरी बेटी को खोजने में मदद करेगा? यह घटना दिल्ली के सिर्फ गुलाबी बाग एरिया की नहीं बल्कि कमोबेश हर थाने और हर इलाके की है. हालांकि, तकरीबन दो महीने बाद वह नाबालिग लड़की खुद ही घर लौट आई. लड़की अपने खुद के सगे रिश्तेदार के साथ गायब होकर मथुरा में रह रही थी. फिर दो महीने के बाद मां के पास लौट आई. लेकिन मां की शिकायत रह गई कि दिल्ली पुलिस ने एक बार भी मेरी बेटी के बारे में मुझसे कोई जानकारी नहीं ली और न ही खोजने की कोशिश की. बेटी आ गई तो ठीक है वरना नहीं आती तो हम क्या करते? दिल्ली से इस वजह से गायब हो रही लड़कियां इस एक घटना से आप समझ गए होंगे कि दिल्ली से कम उम्र की लड़कियां क्यों गायब हो रही हैं? क्या मां-बाप का गाइडेंस और पुलिसिंग खराब हो गई है या फिर बच्चे समय से पहले जवान और समझदार हो गए हैं? या फिर मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने क्रांति ला दिया है? दिल्ली में बच्चों के गायब होने के हाल के आंकड़े इसे और गंभीर बना रहे हैं. फरवरी 2026 तक के हालिया डेटा से पता चलता है कि जनवरी 2026 के पहले 15 दिनों में ही राजधानी से 807 लोग गायब हो गए, जिनमें 509 महिलाएं और बच्चियां शामिल थीं. इनमें 191 नाबालिग थे, जिनमें से ज्यादातर 146 लड़कियां थीं. 2025 में दिल्ली में कुल 24,508 मिसिंग केस दर्ज हुए, जिनमें 60% से ज्यादा महिलाएं करीब 14,870 और बच्चियां शामिल थीं. इनमें लड़कियों की उम्र 12-18 साल तक थी. ऐसे में बड़ा सवाल दिल्ली पुलिस, दिल्ली सरकार और दिल्ली पुलिस का ह्यूमन ट्रैफिकिंग डिपार्टमेंट इसको कैसे देख रही है? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी ने क्या कहा? दिल्ली पुलिस के स्पेशल सीपी देवेश चंद्र श्रीवासस्तव कहते हैं, ‘दिल्ली में लापता व्यक्तियों, विशेषकर बच्चों के संबंध में किसी भी प्रकार की घबराहट या भय का कोई कारण नहीं है. पहले की तुलना में दिल्ली में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग में कोई तेजी नहीं आई है, जबकि, पिछले वर्षों की तुलना में जनवरी 2026 महीने में लापता व्यक्तियों की रिपोर्टिंग के मामलों में कमी दर्ज की गई है. क्योंकि, दिल्ली में निष्पक्ष एवं पारदर्शी रिपोर्टिंग की नीति अपनाई जाती है. लापता व्यक्तियों की रिपोर्ट न केवल स्थानीय पुलिस थाने में दर्ज कराई जा सकती है, बल्कि ऑनलाइन माध्यम से तथा ERSS-112 के माध्यम से भी दर्ज कराई जा सकती है. निर्धारित SOP के द्वारा, दिल्ली पुलिस इन सभी मामलों में लापता व्यक्तियों का तुरन्त पता लगाने का प्रयास किया जाता है, जिसमें लापता बच्चों के मामलों को विशेष प्राथमिकता दी जाती है. इस संबंध में सभी जिलों में dedicated Missing Persons Squads तथा क्राइम ब्रांच में Anti Human Trafficking Unit कार्यरत हैं, ताकि इस विषय में केंद्रित एवं प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके. यह स्पष्ट किया जाता है कि दिल्ली में बच्चों के लापता होने अथवा अपहरण के मामलों में किसी भी संगठित गिरोह की संलिप्तता सामने नहीं आई है.’ क्या कहते हैं मनोवैज्ञानिक? देश के जाने-माने मनोवैज्ञानिक और दिल्ली यूनिवर्सिटी में डॉ अंबेडकर कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग के एचओडी नवीन कुमार कहते हैं, ‘आज के दौर में इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म सबसे बड़े खतरे बन गए हैं. फेक आईडी के जरिए अनजान लोग बच्चियों से दोस्ती करते हैं, उन्हें प्यार के जाल में फंसाते हैं या ग्लैमरस दुनिया का लालच देकर घर छोड़ने पर मजबूर कर देते हैं. पढ़ाई का बोझ या माता-पिता की टोक-टाक से तंग आकर 12-18 साल के बच्चे-बच्चियां बिना सोचे-समझे घर से निकल जाती हैं. कुछ बच्चे ड्रग्स और अन्य नशों की लत के कारण भी आपराधिक गिरोहों के हत्थे चढ़ रहे हैं. लेकिन कहीं न कहीं घर के अंदर गाइडेंस और बाहर का माहौल बदला है. माता-पिता को अपने बच्चों पर नजर रखने की जरूरूत है. कोशिश करें कि मोबाइल और सोशल मिडिया से दूर रखकर खेलकूद में ध्यान दिलाएं.’ दिल्ली पुलिस क्या कर सकती है? दिल्ली पुलिस के पूर्व ज्वाइंट सीपी एसबीएस त्यागी कहते हैं, ‘देखिए यह बिल्कुल अलग मामला होता है. दिल्ली पुलिस का एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (AHTU) और क्राइम ब्रांच इस समस्या से निपटने के लिए नोडल एजेंसी है. दिल्ली पुलिस का यह विशेष अभियान गायब बच्चों को उनके परिवार से मिलाने का काम करता है. दिल्ली पुलिस ने अबतक हजारों बच्चों को रेस्क्यू किया है. दिल्ली में अब किसी भी नाबालिग के गायब होने पर तुरंत एफआईआर दर्ज होती है और पहले 48 घंटे में सघन तलाशी शुरू की जाती है. गायब बच्चे की जानकारी 24 घंटे के भीतर Zonal Integrated Police Network पर डाल दी जाती है ताकि देशभर की पुलिस अलर्ट हो जाए. इसके बाद भी अगर इस तरह की घटना लगातार हो रही है, तो इसके पीछे के कारणों को दूर करने की जरूरत है. यह सिर्फ अकेले पुलिस की बस की बात नहीं है. पुलिस का काम है, मामला दर्ज होने के बाद जल्दी से जल्दी निपटाना.’ दिल्ली पुलिस हर दिन किसी न किसी को इस तरह के मामले को सुलझाती है. बीते माह जनवरी महीने में हीएक 14 साल की लड़की प्रिया की गायब होने की शिकायत मिली. प्रिया का इंस्टाग्राम पर एक अज्ञात दोस्त से बात करने की आदत लग गई. उस दोस्त ने खुद को मुंबई का एक कास्टिंग डायरेक्टर बताया. प्रिया घर से 50 हजार रुपये और जेवर लेकर उसे मिलने चली गई. एएचटीयू की टीम ने तकनीकी सर्विलांस के जरिए प्रिया को आनंद विहार बस टर्मिनल से तब पकड़ा जब वह एक
passport rules if you live in ghaziabad and have a passport issued with a delhi address right wrong punishment jail | रहते हैं गाजियाबाद में और दिल्ली के पते पर बना है पासपोर्ट, तो अब जाएंगे जेल! शुरू होने जा रहा बड़ा अभियान

गाजियाबाद. हाल ही में गाजियाबाद में एक ही एड्रेस पर 22 पासपोर्ट बनने की खबर ने विदेश मंत्रालय को हैरान और परेशान कर दिया है. पिछले दिनों गाजियाबाद में एक बहुत बड़े पासपोर्ट फर्जीवाड़े का भंडाफोड़ हुआ था, जिसमें एक ही पते और एक ही मोबाइल नंबर और फर्जी कागजों के दम पर 22 पासपोर्ट बनवा लिए गए. इस खेल में पोस्ट ऑफिस का पोस्टमैन भी शामिल था. दिल्ली पासपोर्ट ऑफिस की चिट्ठी के बाद जब गाजियाबाद पुलिस ने जांच शुरू की, परत दर परत राज खुलते चले गए. ऐसे में अब पासपोर्ट विभाग ने बड़ी तैयारी शुरू की है, जिसमें पासपोर्ट उसी एड्रेस पर बनेगा, जिस एड्रेस पर आवेदक का कम से कम एक स्थाई पता हो. अगर आप गाजियाबाद में रहते हैं दिल्ली में नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में पहले कभी रह रहे थे, तो अब आप दिल्ली के एड्रेस पर पासपोर्ट नहीं बना सकते. बीते कुछ सालों से आपको अपना पासपोर्ट बनवाने के लिए गांव या शहर जाने की जरूरत नहीं पड़ती है. विदेश मंत्रालय की Apply Anywhere in India योजना के तहत आप भारत के किसी भी कोने से पासपोर्ट के लिए आवेदन कर सकते हैं. लेकिन, इस सुविधा के साथ कुछ सख्त नियम भी जुड़े हैं, जिन्हें नजरअंदाज करना आपको अपराधी बना सकता है. क्या गाजियाबाद का व्यक्ति दिल्ली में पासपोर्ट बनवा सकता है?जी हां, बिल्कुल! 2018 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय (RPO) की सीमाएं खत्म हो गई हैं. आप कैसे पासपोर्ट सेवा केंद्र (PSK) को चुन सकते हैं, कैसे होता है वेरिफिकेशन? जी आप बिल्कुल अपने पसंद का पोसपोर्ट सेवा केंद्र चुन सकते हैं. पुलिस वेरिफिकेशन आपके ‘वर्तमान पते’ (Current Address) पर ही होगा, जहां आप अभी रह रहे हैं. लेकिन बहुत लोग ये करते हैं कि वह रहते हैं गाजियाबाद में लेकिन दिल्ली के अपने पुराने पते पर पासपोर्ट बना लेते हैं. पुलिस वेरिफेकशन में अड़ोसी-पड़ोसी को बोले रखते हैं कि आए तो बता दीजिएगा कि मैं यही रहता हूं. बाद में पुलिस की मदद से पासपोर्ट तो बना लेते हैं, लेकिन जो गैरकानूनी है. पासपोर्ट बनाने के लिए क्या-क्या जरूरी दस्तावेज चाहिए? आपको दिल्ली में रहने का सबूत जैसे रेंट एग्रीमेंट, बिजली का बिल, बैंक पासबुक या कंपनी का लेटर देना होगा. भले ही आपके स्थायी पते के दस्तावेज बिहार के हों, लेकिन वर्तमान पता साबित करना अनिवार्य है. क्या पुराने पते पर पासपोर्ट बन सकता है?अक्सर लोग उस पते पर पासपोर्ट बनवाने की कोशिश करते हैं जहां वे पहले रहते थे लेकिन अब नहीं रहते. यह पूरी तरह गैर-कानूनी है. पासपोर्ट के नियमों के मुताबिक, आपको केवल उसी पते का जिक्र करना चाहिए जहां आप आवेदन के समय पिछले एक साल से रह रहे हैं. यदि पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान आप उस पते पर नहीं पाए जाते हैं, तो आपकी रिपोर्ट ‘Adverse’ लग जाएगी. इससे न केवल आपका पासपोर्ट आवेदन रद्द होगा, बल्कि आपको ब्लैकलिस्ट भी किया जा सकता है. फर्जी एड्रेस पर पासपोर्ट बनाना कितना बड़ा जुर्मपासपोर्ट एक बेहद संवेदनशील दस्तावेज है. फर्जी पते या गलत जानकारी देना राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ माना जाता है. पासपोर्ट अधिनियम, 1967 की धारा 12 कहता है कि अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर गलत जानकारी देता है या तथ्यों को छुपाता है, तो उसे 2 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं. यदि कोई गैर-भारतीय जैसे बांग्लादेशी या रोहिंग्या फर्जी पते पर भारतीय पासपोर्ट बनवाता है, तो सजा 1 साल से 5 साल तक की जेल और 50,000 रुपये तक का जुर्माना हो सकता है. 2026 के नए नियम: डिजिटल और सख्त वेरिफिकेशनसाल 2026 में पासपोर्ट नियमों को और भी ‘हाई-टेक’ बनाया गया है. अब पुलिस वेरिफिकेशन के लिए डिजिटल टैब का इस्तेमाल होता है, जो सीधे जीपीएस (GPS) लोकेशन से जुड़ा होता है. इसका मतलब है कि पुलिसकर्मी को आपके घर आना ही होगा और वह आपकी लोकेशन को सिस्टम में अपडेट करेगा. अगर आप उस एड्रेस पर नहीं रहते हैं, तो सिस्टम तुरंत उसे रिजेक्ट कर देगा. जरूरी सलाह सच्चाई ही रास्ता है: हमेशा अपने वर्तमान पते की जानकारी दें. अगर आप किराए पर हैं, तो रेंट एग्रीमेंट को ही आधार बनाएं. पुराना पासपोर्ट अपडेट: अगर आपके पास पहले से पासपोर्ट है और आपका पता बदल गया है, तो उसे ‘Re-issue’ करवाकर नया पता दर्ज कराएं. पुलिस से न डरें: पुलिस वेरिफिकेशन अब पहले से बहुत आसान और पारदर्शी हो गया है. बस आपके पास सही दस्तावेज होने चाहिए. पासपोर्ट बनवाना अब आपका अधिकार है और सरकार ने इसे सुगम बनाया है, लेकिन ईमानदारी ही इसकी पहली शर्त है. फर्जीवाड़े की छोटी सी कोशिश आपकी विदेश यात्रा के सपने को हमेशा के लिए खत्म कर सकती है.







