दिलीप कुमार की 5वीं पुण्यतिथि पर भावुक हुईं सायरा बानो:लिखा- साहब मुझे यादों का खजाना देकर गए, उनके बिना जिंदगी में खालीपन है

दिग्गज अभिनेता दिवंगत दिलीप कुमार की आज पांचवीं पुण्यतिथि है। इस मौके पर उनकी पत्नी और पूर्व एक्ट्रेस सायरा बानो ने सोशल मीडिया पर एक भावुक नोट शेयर किया है। 81 साल की सायरा बानो ने इंस्टाग्राम पर दिलीप कुमार के साथ अपनी कई पुरानी तस्वीरें पोस्ट की हैं। उन्होंने लिखा कि दिलीप साहब भले ही उनकी नजरों से दूर हो गए हैं, लेकिन वे उनकी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। सायरा ने दिलीप कुमार के साथ बिताए समय को अपनी जिंदगी का सबसे खूबसूरत और मुकम्मल हिस्सा बताया। यादों को बताया सबसे वफादार साथी सायरा बानो ने अपने पोस्ट में लिखा कि जिंदगी की सबसे खूबसूरत बात यह है कि यह कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती, बल्कि यादों में बनी रहती है। समय के उलट, यादें सबसे वफादार साथी होती हैं। वे बिना बुलाए लौट आती हैं और हर मुस्कान, हर नजर और हर शब्द को इस तरह वापस ले आती हैं जैसे कुछ भी नहीं खोया हो। किसी को याद रखना इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि उन्हें कभी भुलाया नहीं गया। दिलीप साहब देकर गए यादों का खजाना सायरा ने दिलीप कुमार को याद करते हुए लिखा कि मुझे लगता है कि साहब ने इस दुनिया को छोड़ने से पहले मुझे एक बड़ा खजाना दिया है। यह खजाना उनकी यादों का है, जो इतना समृद्ध है कि मैं अपनी बाकी की जिंदगी इन्हीं यादों के बीच रहकर बिता दूंगी। उन्होंने आगे लिखा कि 7 जुलाई 2021 को दिलीप कुमार सिर्फ मुझे ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को छोड़कर चले गए थे जो उनसे प्यार करती थी। उनके जाने से परिवार, दोस्तों और सिनेमा जगत में एक ऐसा खालीपन आया जिसे शब्दों में बयान नहीं किया जा सकता। नजरों से दूर हुए, जिंदगी से नहीं सायरा बानो ने दिलीप कुमार के साथ अपने रिश्ते पर बात करते हुए लिखा कि वे दुनिया के लिए एक बड़े स्टार थे, लेकिन मेरे लिए वे मेरी जिंदगी का सहारा और मेरी शांत ताकत थे। हमारी जिंदगी सिर्फ साथ रहने तक सीमित नहीं थी, बल्कि यह पूरी तरह से सफल थी। साहब के जाने को पांच साल बीत चुके हैं, लेकिन वे मेरी जिंदगी से कभी दूर नहीं हुए। ऐसा गहरा प्यार समय के सामने नहीं झुकता। वे हर रोज मेरी यादों में रहते हैं। 12-13 साल की उम्र में ही दिलीप कुमार को दिल दे बैठीं सायरा इससे पहले दैनिक भास्कर को दिए इंटरव्यू में सायरा जी ने कहा था, ‘12-13 साल की थी, जब पहली बार उन्हें देखा था। पहली बार देखते ही मैंने अपनी मां से कहा कि जब बड़ी हो जाऊंगी तो इसी शख्स से शादी करूंगी। वे जब सफेद कुर्ते पजामे में हाथ फोल्ड करके निकलते थे, तो ऐसा लगता था कि इंसान नहीं फरिश्ता आ रहा है। मैं बहुत लकी हूं कि उनसे शादी कर पाई, वर्ना देश में उस वक्त तमाम खूबसूरत लड़कियां थीं, जो उनके लिए मर-मिटने को तैयार थीं।’ दोनों की जोड़ी को माना जाता है मिसाल दिलीप कुमार और सायरा बानो की जोड़ी को बॉलीवुड की सबसे मजबूत जोड़ियों में से एक माना जाता है। दोनों ने साल 1966 में शादी की थी और दिलीप कुमार के आखिरी समय तक सायरा हमेशा उनके साथ रहीं। दिलीप कुमार के बीमार रहने के दौरान भी सायरा ने पूरी तरह उनका ख्याल रखा। जब दिलीप कुमार जीवित थे, तब आमिर खान और शाह रुख खान जैसे बॉलीवुड के बड़े स्टार्स अक्सर उनके घर उनसे मिलने आया करते थे। लंबी बीमारी के बाद 7 जुलाई 2021 को 98 वर्ष की उम्र में दिलीप कुमार का निधन हो गया था।
नौकरी के लिए अब केवल डिग्री और अनुभव काफी नहीं:रेस्तरां में उम्मीदवार के व्यवहार, ड्रिंक ऑर्डर करने के तरीके से भी तय हो रही किस्मत

नौकरी के लिए इंटरव्यू में अब सिर्फ डिग्री या अनुभव काफी नहीं है। रेस्तरां में आपका व्यवहार और ड्रिंक ऑर्डर करने का तरीका भी चयन का पैमाना हो सकता है। करीब 2.38 लाख करोड़ रुपए के टर्नओवर वाली हेल्थकेयर कंपनी बूपा के सीईओ इनाकी एरेनियो 45 मिनट के पारंपरिक इंटरव्यू को काफी नहीं मानते। वे बड़े पदों के लिए तीन मुलाकातों में कुल छह घंटे का मूल्यांकन करते हैं। इसमें उम्मीदवार का आत्मविश्वास, पहल करने की क्षमता और दूसरों के प्रति सम्मान परखा जाता है। पहले चरण में दफ्तर में दो घंटे तक उम्मीदवार के सीवी और अनुभव पर विस्तार से चर्चा होती है। दूसरे चरण में रेस्तरां में नाश्ता या लंच किया जाता है। यहां एरेनियो देखते हैं कि उम्मीदवार खुद पहल करता है या दूसरों का अनुसरण करता है। यदि वे केवल पानी मंगाते हैं और उम्मीदवार अपने लिए वाइन ऑर्डर करता है, तो इससे वे उसका आत्मविश्वास और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता आंकते हैं। वे दूसरों की नकल करने वाले उम्मीदवारों को पसंद नहीं करते। एरेनियो ऐसे अकेले सीईओ नहीं हैं। करीब 2.95 लाख करोड़ की कंपनी ट्विलियो के सीईओ खोजेमा शिपचैंडलर वरिष्ठ उम्मीदवारों का 45 मिनट का डिनर इंटरव्यू लेते हैं। वे देखते हैं कि काम के बाद व्यक्ति कैसा व्यवहार करता है। बातचीत में बार-बार ‘मैं’ शब्द का इस्तेमाल टीम भावना की कमी का संकेत माना जाता है। वे उम्मीदवारों को सवाल पूछने के लिए 20 मिनट अलग से देते हैं। इस दौरान कोई सवाल न पूछना अयोग्यता माना जाता है। कुछ सीईओ ऐसे उम्मीदवारों को भी तुरंत खारिज कर देते हैं, जो खाना चखे बिना ही उसमें नमक डाल देते हैं। उनके अनुसार यह बिना सोचे-समझे फैसले करने की आदत दर्शाता है। वेटर से लेकर गार्ड तक से आपके व्यवहार पर गौर कर रहे कंपनियों के सीईओ एक सीईओ इंटरव्यू में वेटर से जानबूझकर गलत खाना सर्व करवाकर उम्मीदवार के गुस्से को परखा गया। एपल के स्टीव जॉब्स का मशहूर ‘बियर टेस्ट’ भी इसी सोच पर आधारित था। वे उम्मीदवार को दफ्तर से बाहर टहलाने ले जाते थे और देखते थे कि क्या उसके साथ सहज होकर समय बिताया जा सकता है। इससे वे समझते थे कि उम्मीदवार टीम में घुलने-मिलने और साथ काम करने के अनुकूल है या नहीं। ‘डायरी ऑफ अ सीईओ’ के फाउंडर स्टीवन बार्टलेट ने बिना अनुभव वाली एक महिला को सिर्फ इसलिए नौकरी दी क्योंकि उसने बिल्डिंग के गार्ड को नाम लेकर धन्यवाद कहा था।
टाटा ग्रुप में नई पीढ़ी को कमान सौंपने की रणनीति:नोएल टाटा की बेटी माया संभालेंगी रिटेल चेन ‘वेस्टसाइड’ का ई-कॉमर्स

टाटा ग्रुप की फैशन रिटेल चेन ‘वेस्टसाइड’ के ई-कॉमर्स मार्केटिंग की कमान नोएल टाटा की बेटी माया टाटा (37 साल) संभालेंगी। सोमवार को हुए इस बदलाव का मकसद वेस्टसाइड की ऑनलाइन मौजूदगी बढ़ाना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विस्तार है। हालांकि कंपनी की ओर से अभी इस पर आधिकारिक मुहर लगना बाकी है। नोएल टाटा ट्रेंट के चेयरमैन हैं और वे नवंबर 2026 में ये पद छोड़ेंगे। माना जा रहा है कि बेटी के नए रोल में वे उनके मार्गदर्शक की भूमिका में रहेंगे। माया के भाई नेविल टाटा पहले से ट्रेंट के ‘स्टार बाजार’ हाइपरमार्केट डिवीजन की कमान संभाल रहे हैं। माया की एंट्री से साफ है कि टाटा ग्रुप अब ई-कॉमर्स और डिजिटल इंटीग्रेशन पर सबसे ज्यादा दांव लगा रहा है, ताकि भारतीय ब्रांड्स को ग्लोबल पहचान दिलाई जा सके। आखिर माया को क्यों मिली यह नई जिम्मेदारी माया टाटा अपने भाई नेविल और बहन लिआ के उलट, एक ही ग्रुप कंपनी से नहीं जुड़ी रहीं। माया ने टाटा कैपिटल से करिअर की शुरुआत की। फिर टाटा डिजिटल से जुड़ीं, जो टाटा नियो, बिगबास्केट, क्रोमा और टाटा 1एमजी जैसे प्लेटफॉर्म्स की पैरेंट कंपनी है। यहां उन्होंने डिजिटल कॉमर्स, कस्टमर एक्विजिशन और ऑनलाइन रिटेल की बारीकियां समझी। इस ‘मल्टी-वर्टिकल एक्सपोजर’ की वजह से ही उन्हें वेस्टसाइड की ओमनीचैनल और ई-कॉमर्स रणनीति को लीड करने के लिए सबसे उपयुक्त माना जा रहा है। इनके पास 3 लाख करोड़ का बिजनेस नोएल के तीनों बच्चे अब ग्रुप की अलग-अलग बड़ी कंपनियां संभाल रहे हैं। यह नई पीढ़ी को कमान सौंपने की रणनीति का हिस्सा है। तीनों भाई-बहन टाटा ट्रस्ट्स की संस्थाओं के बोर्ड में भी हैं। नेविल टाटा- ट्रेंट के स्टार बाजार हाइपरमार्केट डिवीजन की कमान संभाल रहे। लिआ टाटा- इंडियन होटल्स कंपनी (ताज) में वीपी हैं। इन दो लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप करीब ₹2.82 लाख करोड़ है। ट्रेंट की 40 फीसदी कमाई वेस्टसाइड से – ट्रेंट ने वित्त वर्ष 2026 का अंत करीब ~19,700 करोड़ की रेवेन्यू के साथ किया। कुल कमाई में वेस्टसाइड की हिस्सेदारी 40% रही। – कंपनी हर साल 50 नए स्टोर खोलने की रणनीति पर काम कर रही है। Âदेश के 321 शहरों में कंपनी के स्टोर्स की संख्या बढ़कर 1,286 हो चुकी है।
सीरिया में फ्रांसीसी राष्ट्रपति मैक्रों के दौरे के बीच धमाका:जिस होटल में ठहरना था उसके पास ब्लास्ट, सुरक्षा बढ़ाई गई

सीरिया की राजधानी दमिश्क में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच मंगलवार को धमाका हुआ है। यह ब्लास्ट उस होटल के पास हुआ है, जहां मैक्रों के ठहरने की व्यवस्था की गई थी। प्रत्यक्षदर्शियों ने कई धमाकों की आवाज सुनने और इलाके से धुआं उठता देखने की जानकारी दी। धमाके के तुरंत बाद सुरक्षा एजेंसियों ने आसपास की सड़कों को बंद कर दिया और पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। फिलहाल किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है। अधिकारियों ने धमाके के कारणों की जांच शुरू कर दी है। मैक्रों, बशर अल-असद के सत्ता से हटने के बाद दमिश्क का दौरा करने वाले यूरोपीय संघ (EU) के पहले बड़े नेता हैं। खबर लगातार अपडेट हो रही है….
स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का नैतिक पतन:छात्रों के स्टार्टअप में निवेश से मोटी कमाई कर रहे प्रोफेसर, बिना ठोस आइडिया के करोड़ों की फंडिंग

क्या कोई 21 साल का छात्र किसी ऐसी यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट को इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकता है, जिसका सालाना बजट दुनिया के 116 देशों की सरकारों से भी बड़ा हो? स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र और युवा पत्रकार थियो बेकर ने न सिर्फ ऐसा कर दिखाया, बल्कि सिलिकॉन वैली की इस पसंदीदा यूनिवर्सिटी के भीतर चल रहे मुनाफे, धोखाधड़ी और रसूख के खेल को भी बेनकाब कर दिया है। बेकर ने अपनी नई किताब ‘हाउ टू रूल द वर्ल्ड’ में स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के इसी चमकदार चेहरे के पीछे छिपे नैतिक पतन के काले सच को सामने रखा है। बेकर ने शुरुआत में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की, इसके साथ ही उनका रुझान छात्र अखबार ‘द स्टैनफर्ड डेली’ की ओर हो गया। निडर खोजी पत्रकार की तरह काम करते हुए उन्होंने साबित किया कि तत्कालीन प्रेसिडेंट मार्क टेसियर-लवाइन के रिसर्च पेपर्स में डेटा से भारी हेरफेर हुई थी। इस खुलासे से देशव्यापी विवाद हुआ और प्रेसिडेंट को इस्तीफा देना पड़ा। साहसी रिपोर्टिंग के लिए बेकर को प्रतिष्ठित जॉर्ज पोल्क अवार्ड मिला। इसे जीतने वाले वे सबसे युवा पत्रकार बने। किताब के मुताबिक स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी अब सिर्फ ‘फुटबॉल टीम वाला बड़ा टेक इनक्यूबेटर’ बनकर रह गई है। यहां का पूरा माहौल इस बात से संचालित होता है कि कौन कितनी जल्दी करोड़पति बन सकता है। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर खुद अपने ही छात्रों के स्टार्टअप्स में शुरुआती निवेशक बनकर मोटी कमाई कर रहे हैं। कैंपस में हर वक्त वेंचर कैपिटलिस्ट कंपनियां घूमती रहती हैं ताकि किसी छात्र के ‘अगले बड़े आइडिया’ पर पैसा लगा सकें। बेकर के मुताबिक मजबूत पहचान वाले छात्रों को बिना ठोस बिजनेस आइडिया के भी सात अंकों की फंडिंग आसानी से मिल जाती है। बेकर के अनुसार कैंपस में छात्रों के बीच अंधी और हिंसक प्रतियोगिता चलती है, जहां वे हर नैतिक सीमा पार करने को तैयार रहते हैं। इतिहास, कला और तार्किक सोच जैसे मूल्य पीछे छूट गए हैं। हालात इतने बिगड़े चुके हैं कि कैंपस में यह मजाक आम हो चुका है यहां का सिस्टम ‘बस थोड़ी सी धोखाधड़ी’ को सहजता से स्वीकार करता है। उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए यह गंभीर चेतावनी: समाजशास्त्री बोस्टन कॉलेज में ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर हायर एजुकेशन’ के संस्थापक और उच्च शिक्षा के प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रोफेसर फिलिप अल्तबाक के अनुसार स्टैनफर्ड की यह स्थिति आधुनिक उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। प्रो. अल्तबाक के अनुसार, ‘जब यूनिवर्सिटी नॉलेज और चरित्र निर्माण के केंद्र न रहकर कॉर्पोरेट फैक्ट्रियां बन जाती हैं, तो वे समाज को बौद्धिक रूप से खोखला कर देती हैं। स्टैनफर्ड में जो हो रहा है, वह इस बात का सबूत है कि कैसे ‘अंधाधुंध पूंजीवाद’ ने शिक्षा के मूल सिद्धांतों को ही निगल लिया है। बेकर की किताब इस व्यवस्था के खिलाफ एक जरूरी कानूनी और नैतिक दस्तावेज है।’
चांदी ₹4,408 गिरकर ₹2.29 लाख पर आई:सोना ₹1,442 सस्ता होकर ₹1.44 लाख का हुआ; जून में सोना 13 हजार, चांदी 34 हजार सस्ती हुई

सोने-चांदी के दाम में इस आज यानी 7 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,442 रुपए गिरकर 1.44 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी का दाम 4,408 रुपए गिरकर 2.29 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले बीते महीने यानी जून में सोना-चांदी में गिरावट रही थी। बीते महीने सोना 13 हजार और चांदी 34 हजार रुपए सस्ती हुई थी। नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 7 जुलाई 2026 चांदी इस साल 1.69 लाख रुपए गिरी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 36 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। यह चांदी के अब तक की सबसे ज्यादा दाम थे। तब से अब तक 149 दिन में चांदी 1.69 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोना 159 दिन में ₹32 हजार और चांदी ₹1.59 लाख सस्ती नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह यूएस-ईरान समझौता: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौता साइन हुआ है। इसकी वजह से पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम हो गया, जिससे निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे ‘सुरक्षित निवेश’ से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें गिरती हैं। मुनाफावसूली: पिछले कुछ समय पहले सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी थीं। दामों में इतनी बड़ी तेजी आने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। ईटीएफ में बिकवाली: सुरक्षित निवेश का आकर्षण कम होने से गोल्ड-सिल्वर ETFs में भारी बिकवाली देखी गई। इससे भी सोने-चांदी के दाम में गिरावट आ रही है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
चांदी ₹4,408 गिरकर ₹2.29 लाख पर आई:सोना ₹1,442 सस्ता होकर ₹1.44 लाख का हुआ; जून में सोना ₹15 हजार, चांदी ₹38 हजार सस्ती हुई

सोने-चांदी के दाम में इस आज यानी 7 जुलाई को गिरावट है। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने का दाम 1,442 रुपए गिरकर 1.44 लाख रुपए हो गया है। वहीं, 1 किलो चांदी का दाम 4,408 रुपए गिरकर 2.29 लाख रुपए पर आ गई है। इससे पहले बीते महीने यानी जून में सोना-चांदी में गिरावट रही थी। बीते महीने सोना 15 हजार और चांदी 38 हजार रुपए सस्ती हुई थी। कैरेट के हिसाब से सोने की कीमत देश के बड़े शहरों में सोने की कीमत सोर्स: goodreturns 7 जुलाई 2026 चांदी इस साल 1.57 लाख रुपए गिरी इस साल सोने-चांदी की कीमत में लगातार उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। 31 दिसंबर 2025 को सोने के दाम 1.33 लाख रुपए थे, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपए के सबसे ऊपरी स्तर पर पहुंच गए थे। तब से अब तक सोना 32 हजार रुपए सस्ता हो चुका है। वहीं, चांदी के कीमत 31 दिसंबर 2025 को 2.30 लाख रुपए थी, जो 29 जनवरी को 3.86 लाख रुपए तक पहुंच गई थी। यह चांदी के अब तक की सबसे ज्यादा दाम थे। तब से अब तक 159 दिन में चांदी 1.57 लाख रुपए सस्ती हो गई है। सोना 159 दिन में ₹32 हजार और चांदी ₹1.57 लाख सस्ती नोट:- सोने की कीमत प्रति 10 ग्राम और चांदी की कीमत किलो में | सोर्स:- IBJA सोने-चांदी के दाम में गिरावट की वजह यूएस-ईरान समझौता: अमेरिका-ईरान के बीच युद्धविराम समझौता साइन हुआ है। इसकी वजह से पश्चिम एशिया में युद्ध का खतरा कम हो गया, जिससे निवेशकों ने सोने-चांदी जैसे ‘सुरक्षित निवेश’ से अपना पैसा निकालना शुरू कर दिया। मजबूत अमेरिकी डॉलर: फेडरल रिजर्व के संकेतों के बाद वैश्विक बाजार में अमेरिकी डॉलर इंडेक्स मजबूत हुआ है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें गिरती हैं। मुनाफावसूली: पिछले कुछ समय पहले सोने और चांदी की कीमतें अपने रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी थीं। दामों में इतनी बड़ी तेजी आने के बाद बड़े निवेशकों और ट्रेडर्स ने मुनाफावसूली की, जिससे कीमतों में अचानक तेज गिरावट आई। ईटीएफ में बिकवाली: सुरक्षित निवेश का आकर्षण कम होने से गोल्ड-सिल्वर ETFs में भारी बिकवाली देखी गई। इससे भी सोने-चांदी के दाम में गिरावट आ रही है। ज्वेलर्स से सोना खरीदते समय इन 2 बातों का रखें ध्यान असली चांदी की पहचान करने के 4 तरीके
E10 गाड़ियों में E20 ईंधन से घट सकता है माइलेज:रबर पार्ट भी खराब हो सकते हैं; ARAI की इंजन टेस्टिंग रिपोर्ट में खुलासा

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। 10 सवालों के जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: ARAI की इस रिपोर्ट में सबसे मुख्य बात क्या निकलकर सामने आई है? जवाब: ARAI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सवाल 2: क्या रिपोर्ट को आम जनता के लिए जारी किया गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: नहीं, इस स्टडी रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार और देश के प्रमुख वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच इस पूरे मामले पर नीति बनाने और तकनीकी सुधार करने के लिए एक मुख्य रेफरेंस पॉइंट बनी हुई है। सवाल 3: चार पहिया वाहनों के इंजन पर E20 ईंधन के असर को लेकर क्या टेस्टिंग की गई थी? जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही। सवाल 4: दूसरे चार पहिया वाहन निर्माता की गाड़ी में क्या तकनीकी समस्या देखी गई? जवाब: दूसरे OEM के इंजन की जब 809 घंटे तक टेस्टिंग की गई, तो उसके एग्जॉस्ट वाल्व में ‘थर्मोमैकेनिकल फेलियर’ देखा गया। हालांकि, इस मामले के जानकारों का कहना है कि एग्जॉस्ट वाल्व के फेल होने के पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। सवाल 5: यह ‘थर्मोमैकेनिकल फेलियर’ क्या होता है और इससे इंजन को क्या नुकसान है? जवाब: थर्मोमैकेनिकल फेलियर तब होता है जब अत्यधिक गर्मी और तेज व बार-बार होने वाली हलचल (मैकेनिकल स्ट्रेस) एक साथ मिलती हैं। इन दोनों के संयुक्त दबाव के कारण इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व मुड़ सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह पूरी तरह से टूट सकता है। सवाल 6: BS-IV और BS-VI इंजन वाली चार पहिया गाड़ियों की टेस्टिंग में क्या अंतर मिला? जवाब: रिपोर्ट में 4-व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के तहत बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान एक BS-IV इंजन का परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य रहा। इसके विपरीत, एक BS-VI टर्बो चार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद ही समस्या देखी गई। सवाल 7: दो पहिया वाहनों पर इस टेस्टिंग का क्या परिणाम रहा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, तीन दो पहिया वाहन निर्माताओं ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए गए थे। इन टेस्ट्स में इंजनों में कोई समस्या नहीं पाई गई। इन्हें E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य पाया गया है। सवाल 8: क्या E20 ईंधन से गाड़ियों के मैटेलिक पार्ट्स या उत्सर्जन पर बुरा असर पड़ता है? जवाब: नहीं, सभी टेस्ट किए गए वाहनों पर इस स्टडी में पाया गया कि E20 ईंधन का मैटेलिक कंपोनेंट्स पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, E10-कंप्लायंट वाहनों में E20 ईंधन डालने पर भी साइलेंसर से होने वाला उत्सर्जन तय कानूनी सीमाओं के भीतर ही पाया गया। सवाल 9: गाड़ियों की माइलेज या ईंधन की खपत पर इससे क्या प्रभाव पड़ा? जवाब: ARAI की स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E10 ईंधन की तुलना में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने पर वाहनों की ईंधन खपत 2% से 6% तक बढ़ जाती है। यानी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि, ईंधन की खपत में होने वाली यह बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल और कैटेगरी के हिसाब से बदलती है। सवाल 10: गाड़ी के स्टार्ट होने, चलने और वाष्पीकरण उत्सर्जन पर क्या असर दिखा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, E20 ईंधन के साथ गाड़ियों का इवैपोरेटिव एमिशन भी पूरी तरह से कानूनी सीमा के भीतर पाया गया। इसके साथ ही, गाड़ियों की स्टार्टेबिलिटी (आसानी से स्टार्ट होना) और ड्राइवैबिलिटी (चलने की परफॉर्मेंस) भी E20 ईंधन के साथ बिल्कुल ठीक पाई गई। सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे। पेट्रोल में 25% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला टाल सकती है सरकार E20 फ्यूल के विरोध के बीच सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।
E10 गाड़ियों में E20 ईंधन से घट सकता है माइलेज:रबर पार्ट भी खराब हो सकते हैं; ARAI की इंजन टेस्टिंग रिपोर्ट में खुलासा

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। 10 सवालों के जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: ARAI की इस रिपोर्ट में सबसे मुख्य बात क्या निकलकर सामने आई है? जवाब: ARAI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सवाल 2: क्या रिपोर्ट को आम जनता के लिए जारी किया गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: नहीं, इस स्टडी रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार और देश के प्रमुख वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच इस पूरे मामले पर नीति बनाने और तकनीकी सुधार करने के लिए एक मुख्य रेफरेंस पॉइंट बनी हुई है। सवाल 3: चार पहिया वाहनों के इंजन पर E20 ईंधन के असर को लेकर क्या टेस्टिंग की गई थी? जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही। सवाल 4: दूसरे चार पहिया वाहन निर्माता की गाड़ी में क्या तकनीकी समस्या देखी गई? जवाब: दूसरे OEM के इंजन की जब 809 घंटे तक टेस्टिंग की गई, तो उसके एग्जॉस्ट वाल्व में ‘थर्मोमैकेनिकल फेलियर’ देखा गया। हालांकि, इस मामले के जानकारों का कहना है कि एग्जॉस्ट वाल्व के फेल होने के पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। सवाल 5: यह ‘थर्मोमैकेनिकल फेलियर’ क्या होता है और इससे इंजन को क्या नुकसान है? जवाब: थर्मोमैकेनिकल फेलियर तब होता है जब अत्यधिक गर्मी और तेज व बार-बार होने वाली हलचल (मैकेनिकल स्ट्रेस) एक साथ मिलती हैं। इन दोनों के संयुक्त दबाव के कारण इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व मुड़ सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह पूरी तरह से टूट सकता है। सवाल 6: BS-IV और BS-VI इंजन वाली चार पहिया गाड़ियों की टेस्टिंग में क्या अंतर मिला? जवाब: रिपोर्ट में 4-व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के तहत बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान एक BS-IV इंजन का परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य रहा। इसके विपरीत, एक BS-VI टर्बो चार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद ही समस्या देखी गई। सवाल 7: दो पहिया वाहनों पर इस टेस्टिंग का क्या परिणाम रहा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, तीन दो पहिया वाहन निर्माताओं ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए गए थे। इन टेस्ट्स में इंजनों में कोई समस्या नहीं पाई गई। इन्हें E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य पाया गया है। सवाल 8: क्या E20 ईंधन से गाड़ियों के मैटेलिक पार्ट्स या उत्सर्जन पर बुरा असर पड़ता है? जवाब: नहीं, सभी टेस्ट किए गए वाहनों पर इस स्टडी में पाया गया कि E20 ईंधन का मैटेलिक कंपोनेंट्स पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, E10-कंप्लायंट वाहनों में E20 ईंधन डालने पर भी साइलेंसर से होने वाला उत्सर्जन तय कानूनी सीमाओं के भीतर ही पाया गया। सवाल 9: गाड़ियों की माइलेज या ईंधन की खपत पर इससे क्या प्रभाव पड़ा? जवाब: ARAI की स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E10 ईंधन की तुलना में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने पर वाहनों की ईंधन खपत 2% से 6% तक बढ़ जाती है। यानी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि, ईंधन की खपत में होने वाली यह बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल और कैटेगरी के हिसाब से बदलती है। सवाल 10: गाड़ी के स्टार्ट होने, चलने और वाष्पीकरण उत्सर्जन पर क्या असर दिखा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, E20 ईंधन के साथ गाड़ियों का इवैपोरेटिव एमिशन भी पूरी तरह से कानूनी सीमा के भीतर पाया गया। इसके साथ ही, गाड़ियों की स्टार्टेबिलिटी (आसानी से स्टार्ट होना) और ड्राइवैबिलिटी (चलने की परफॉर्मेंस) भी E20 ईंधन के साथ बिल्कुल ठीक पाई गई। सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे। पेट्रोल में 25% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला टाल सकती है सरकार E20 फ्यूल के विरोध के बीच सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।
15% तक महंगा हो सकता है मोबाइल रिचार्ज:अगले 3-4 महीने में बढ़ोतरी हो सकती है, जियो-एयरटेल का मार्केट शेयर और बढ़ेगा

अगले 3 से 4 महीने में मोबाइल रिचार्ज और इंटरनेट प्लान महंगे हो सकते हैं। सेंट्रम इंस्टीट्यूशनल रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, टेलीकॉम कंपनियां टैरिफ में 12 से 15% तक की बढ़ोतरी कर सकती हैं। रिपोर्ट के अनुसार मार्केट में अब मुख्य रूप से 3 प्राइवेट और 1 सरकारी यानी BSNL कंपनी ही बची हैं, जिससे कंसॉलिडेशन यानी बाजार का सिमट गया है। ऐसे में कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाने का माहौल बन गया है। प्रति यूजर कमाई में 1.5% तक की बढ़ोतरी की उम्मीद रिपोर्ट में टेलीकॉम सेक्टर के फाइनेंशियल परफॉर्मेंस का भी अनुमान लगाया गया है। इसके अनुसार जून तिमाही में देश की तीनों बड़ी प्राइवेट टेलीकॉम कंपनियों यानी जियो, एयरटेल, वोडाफोन-आइडिया के प्रति यूजर होने वाले औसत रेवेन्यू यानी एवरेज रेवेन्यू पर यूजर (ARPU) में तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) आधार पर 1 से 1.5% की बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। 2G से 4G-5G पर शिफ्ट हो रहे हैं ग्राहक कंपनियों के ARPU में सुधार की सबसे बड़ी वजह ग्राहकों का तेजी से 2G नेटवर्क छोड़कर 4G और 5G नेटवर्क पर जाना है। इसके अलावा, पोस्टपेड ग्राहकों की बढ़ती संख्या से भी प्रति यूजर कमाई में बढ़ोतरी हो रही है। जियो और एयरटेल के बढ़ेंगे ग्राहक सेंट्रम की रिपोर्ट के मुताबिक, रिलायंस जियो और भारती एयरटेल के यूजर लगातार बढ़ रहे हैं। जून तिमाही में रिलायंस जियो के करीब 70 लाख नए ग्राहक जोड़ने की उम्मीद है। वहीं भारती एयरटेल के ग्राहकों में लगभग 50 लाख की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके मुकाबले वोडाफोन-आइडिया केवल 2 लाख ग्राहक ही जोड़ पाएगी। 5G कवरेज बढ़ने से डेटा का इस्तेमाल बढ़ा देशभर में 4G और 5G नेटवर्क का दायरा बढ़ने के कारण ग्राहकों का डेटा यूसेज लगातार मजबूत बना हुआ है। रिलायंस जियो और एयरटेल ने देश के 90% से ज्यादा जिलों में अपनी 5G सर्विस पहुंचा दी है। अब इन कंपनियों का पूरा फोकस अपने नेटवर्क पर ज्यादा से ज्यादा 5G स्मार्टफोन को जोड़ने पर है। इसके साथ ही दोनों कंपनियां 5G FWA (फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस) और फिक्स्ड ब्रॉडबैंड सेगमेंट में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं, क्योंकि इस बाजार में अभी ग्रोथ की काफी संभावनाएं हैं। वोडाफोन आइडिया भी बढ़ा रही है दायरा कमजोर ग्राहक ग्रोथ के बावजूद वोडाफोन आइडिया (VIL) भी देश में अपना 5G नेटवर्क बढ़ा रही है। फिलहाल वोडाफोन आइडिया का 5G नेटवर्क करीब 100 शहरों में पहुंच चुका है और कंपनी इसे तेजी से बढ़ा रही है।









