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E10 गाड़ियों में E20 ईंधन से घट सकता है माइलेज:रबर पार्ट भी खराब हो सकते हैं; ARAI की इंजन टेस्टिंग रिपोर्ट में खुलासा

E10 गाड़ियों में E20 ईंधन से घट सकता है माइलेज:रबर पार्ट भी खराब हो सकते हैं; ARAI की इंजन टेस्टिंग रिपोर्ट में खुलासा

ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया यानी ARAI की एक स्टडी में सामने आया है कि पुरानी E10 कंप्लायंट गाड़ियों में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने से फ्यूल सिस्टम के रबर पार्ट्स खराब हो सकते हैं। हालांकि इस रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। 10 सवालों के जवाब में पूरा मामला समझें… सवाल 1: ARAI की इस रिपोर्ट में सबसे मुख्य बात क्या निकलकर सामने आई है? जवाब: ARAI की इस रिपोर्ट के मुताबिक, E10 गाड़ियों में E20 ईंधन इस्तेमाल करने पर फ्यूल-सिस्टम खराब हो सकता है। इससे गाड़ी के रबर पार्ट्स जैसे पाइप, गैस्केट्स, सील्स और ओ-रिंग्स को नुकसान पहुंचता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। सवाल 2: क्या रिपोर्ट को आम जनता के लिए जारी किया गया है और इसका क्या महत्व है? जवाब: नहीं, इस स्टडी रिपोर्ट को अभी तक सार्वजनिक नहीं किया गया है। हालांकि, यह रिपोर्ट सरकार और देश के प्रमुख वाहन निर्माताओं (OEMs) के बीच इस पूरे मामले पर नीति बनाने और तकनीकी सुधार करने के लिए एक मुख्य रेफरेंस पॉइंट बनी हुई है। सवाल 3: चार पहिया वाहनों के इंजन पर E20 ईंधन के असर को लेकर क्या टेस्टिंग की गई थी? जवाब: रिपोर्ट के मुताबिक, दो OEMs ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए थे। इसमें एक निर्माता की गाड़ी के इंजन ने 400 घंटे की टेस्टिंग के बाद कोई समस्या नहीं दिखाई और उसका परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ सही पाया गया। लेकिन दूसरे निर्माता के मामले में स्थिति अलग रही। सवाल 4: दूसरे चार पहिया वाहन निर्माता की गाड़ी में क्या तकनीकी समस्या देखी गई? जवाब: दूसरे OEM के इंजन की जब 809 घंटे तक टेस्टिंग की गई, तो उसके एग्जॉस्ट वाल्व में ‘थर्मोमैकेनिकल फेलियर’ देखा गया। हालांकि, इस मामले के जानकारों का कहना है कि एग्जॉस्ट वाल्व के फेल होने के पीछे कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं। सवाल 5: यह ‘थर्मोमैकेनिकल फेलियर’ क्या होता है और इससे इंजन को क्या नुकसान है? जवाब: थर्मोमैकेनिकल फेलियर तब होता है जब अत्यधिक गर्मी और तेज व बार-बार होने वाली हलचल (मैकेनिकल स्ट्रेस) एक साथ मिलती हैं। इन दोनों के संयुक्त दबाव के कारण इंजन का एग्जॉस्ट वाल्व मुड़ सकता है, उसमें दरार आ सकती है या वह पूरी तरह से टूट सकता है। सवाल 6: BS-IV और BS-VI इंजन वाली चार पहिया गाड़ियों की टेस्टिंग में क्या अंतर मिला? जवाब: रिपोर्ट में 4-व्हीलर इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट के तहत बताया गया है कि टेस्टिंग के दौरान एक BS-IV इंजन का परफॉर्मेंस E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य रहा। इसके विपरीत, एक BS-VI टर्बो चार्ज्ड इंजन में 265 घंटे की ड्यूरेबिलिटी टेस्टिंग के बाद ही समस्या देखी गई। सवाल 7: दो पहिया वाहनों पर इस टेस्टिंग का क्या परिणाम रहा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, तीन दो पहिया वाहन निर्माताओं ने इंजन ड्यूरेबिलिटी टेस्ट किए गए थे। इन टेस्ट्स में इंजनों में कोई समस्या नहीं पाई गई। इन्हें E20 ईंधन के साथ स्वीकार्य पाया गया है। सवाल 8: क्या E20 ईंधन से गाड़ियों के मैटेलिक पार्ट्स या उत्सर्जन पर बुरा असर पड़ता है? जवाब: नहीं, सभी टेस्ट किए गए वाहनों पर इस स्टडी में पाया गया कि E20 ईंधन का मैटेलिक कंपोनेंट्स पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ता है। इसके अलावा, E10-कंप्लायंट वाहनों में E20 ईंधन डालने पर भी साइलेंसर से होने वाला उत्सर्जन तय कानूनी सीमाओं के भीतर ही पाया गया। सवाल 9: गाड़ियों की माइलेज या ईंधन की खपत पर इससे क्या प्रभाव पड़ा? जवाब: ARAI की स्टडी में यह निष्कर्ष निकाला गया है कि E10 ईंधन की तुलना में E20 ईंधन का इस्तेमाल करने पर वाहनों की ईंधन खपत 2% से 6% तक बढ़ जाती है। यानी गाड़ियों का माइलेज कम हो जाता है। हालांकि, ईंधन की खपत में होने वाली यह बढ़ोतरी अलग-अलग गाड़ियों के मॉडल और कैटेगरी के हिसाब से बदलती है। सवाल 10: गाड़ी के स्टार्ट होने, चलने और वाष्पीकरण उत्सर्जन पर क्या असर दिखा? जवाब: रिपोर्ट के अनुसार, E20 ईंधन के साथ गाड़ियों का इवैपोरेटिव एमिशन भी पूरी तरह से कानूनी सीमा के भीतर पाया गया। इसके साथ ही, गाड़ियों की स्टार्टेबिलिटी (आसानी से स्टार्ट होना) और ड्राइवैबिलिटी (चलने की परफॉर्मेंस) भी E20 ईंधन के साथ बिल्कुल ठीक पाई गई। सरकार ने कहा था- टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान का सबूत नहीं मिला बीते दिनों एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में सरकार की ओर से शामिल एक्सपर्ट्स ने कहा था कि बड़े पैमाने पर हुई टेस्टिंग में गाड़ियों को नुकसान पहुंचने का कोई सबूत नहीं मिला है। सोशल मीडिया पर गाड़ी के परफॉर्मेंस को लेकर चल रहे दावों के बीच एक्सपर्ट्स ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में इंजीनियर्स इंडिया लिमिटेड की पूर्व CMD वर्तिका शुक्ला के अलावा बजाज ऑटो के सर्कल हेड मनप्रीत सिंह, टीवीएस के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट प्रशांत कृष्णन मौजूद रहे थे। उनके साथ टोयोटा किर्लोस्कर मोटर के कंट्री हेड विक्रम गुलाटी, मारुति सुजुकी के सीनियर एग्जीक्यूटिव ऑफिसर राहुल भारती, हुंडई इंडिया के पुनीत आनंद और हीरो मोटो के आशुतोष वर्मा भी शामिल हुए थे। पेट्रोल में 25% एथेनॉल ब्लेंडिंग का फैसला टाल सकती है सरकार E20 फ्यूल के विरोध के बीच सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाकर 25% करने की योजना को फिलहाल आगे बढ़ा सकती है। सरकार इस ट्रांजिशन को जल्दबाजी में करने के बजाय धीरे-धीरे और व्यवस्थित तरीके से लागू करना चाहती है। सरकार ने शुरुआत में साल 2030 तक पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का प्लान बनाया था। लेकिन इस टारगेट से बहुत पहले ही E20 फ्यूल (80% पेट्रोल और 20% एथेनॉल) को पूरे देश में स्टैंडर्ड पेट्रोल के रूप में लागू कर दिया गया है और अब हर जगह यही पेट्रोल मिल रहा है।

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