Saturday, 22 Aug 2026 | 02:31 PM

Trending :

EXCLUSIVE

स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का नैतिक पतन:छात्रों के स्टार्टअप में निवेश से मोटी कमाई कर रहे प्रोफेसर, बिना ठोस आइडिया के करोड़ों की फंडिंग

स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का नैतिक पतन:छात्रों के स्टार्टअप में निवेश से मोटी कमाई कर रहे प्रोफेसर, बिना ठोस आइडिया के करोड़ों की फंडिंग

क्या कोई 21 साल का छात्र किसी ऐसी यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट को इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकता है, जिसका सालाना बजट दुनिया के 116 देशों की सरकारों से भी बड़ा हो? स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र और युवा पत्रकार थियो बेकर ने न सिर्फ ऐसा कर दिखाया, बल्कि सिलिकॉन वैली की इस पसंदीदा यूनिवर्सिटी के भीतर चल रहे मुनाफे, धोखाधड़ी और रसूख के खेल को भी बेनकाब कर दिया है। बेकर ने अपनी नई किताब ‘हाउ टू रूल द वर्ल्ड’ में स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के इसी चमकदार चेहरे के पीछे छिपे नैतिक पतन के काले सच को सामने रखा है। बेकर ने शुरुआत में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की, इसके साथ ही उनका रुझान छात्र अखबार ‘द स्टैनफर्ड डेली’ की ओर हो गया। निडर खोजी पत्रकार की तरह काम करते हुए उन्होंने साबित किया कि तत्कालीन प्रेसिडेंट मार्क टेसियर-लवाइन के रिसर्च पेपर्स में डेटा से भारी हेरफेर हुई थी। इस खुलासे से देशव्यापी विवाद हुआ और प्रेसिडेंट को इस्तीफा देना पड़ा। साहसी रिपोर्टिंग के लिए बेकर को प्रतिष्ठित जॉर्ज पोल्क अवार्ड मिला। इसे जीतने वाले वे सबसे युवा पत्रकार बने।​ किताब के मुताबिक स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी अब सिर्फ ‘फुटबॉल टीम वाला बड़ा टेक इनक्यूबेटर’ बनकर रह गई है। यहां का पूरा माहौल इस बात से संचालित होता है कि कौन कितनी जल्दी करोड़पति बन सकता है। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर खुद अपने ही छात्रों के स्टार्टअप्स में शुरुआती निवेशक बनकर मोटी कमाई कर रहे हैं। कैंपस में हर वक्त वेंचर कैपिटलिस्ट कंपनियां घूमती रहती हैं ताकि किसी छात्र के ‘अगले बड़े आइडिया’ पर पैसा लगा सकें। बेकर के मुताबिक मजबूत पहचान वाले छात्रों को बिना ठोस बिजनेस आइडिया के भी सात अंकों की फंडिंग आसानी से मिल जाती है। बेकर के अनुसार कैंपस में छात्रों के बीच अंधी और हिंसक प्रतियोगिता चलती है, जहां वे हर नैतिक सीमा पार करने को तैयार रहते हैं। इतिहास, कला और तार्किक सोच जैसे मूल्य पीछे छूट गए हैं। हालात इतने बिगड़े चुके हैं कि कैंपस में यह मजाक आम हो चुका है यहां का सिस्टम ‘बस थोड़ी सी धोखाधड़ी’ को सहजता से स्वीकार करता है। उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए यह गंभीर चेतावनी: समाजशास्त्री बोस्टन कॉलेज में ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर हायर एजुकेशन’ के संस्थापक और उच्च शिक्षा के प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रोफेसर फिलिप अल्तबाक के अनुसार स्टैनफर्ड की यह स्थिति आधुनिक उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। प्रो. अल्तबाक के अनुसार, ‘जब यूनिवर्सिटी नॉलेज और चरित्र निर्माण के केंद्र न रहकर कॉर्पोरेट फैक्ट्रियां बन जाती हैं, तो वे समाज को बौद्धिक रूप से खोखला कर देती हैं। स्टैनफर्ड में जो हो रहा है, वह इस बात का सबूत है कि कैसे ‘अंधाधुंध पूंजीवाद’ ने शिक्षा के मूल सिद्धांतों को ही निगल लिया है। बेकर की किताब इस व्यवस्था के खिलाफ एक जरूरी कानूनी और नैतिक दस्तावेज है।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

लेटेस्ट टॉप अपडेट

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets
Monalisa POCSO Act on Farman Khan; Director Sanoj Says Truth Won

April 10, 2026/
3:06 pm

46 मिनट पहले कॉपी लिंक फिल्म डायरेक्टर सनोज मिश्रा ने महाकुंभ की वायरल गर्ल ‘मोनालिसा’ की शादी मामले में राष्ट्रीय...

इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम में चोरी करने वाला गिरोह पकड़ाया:CCTV फुटेज में कैद चोर के हाथ के टैटू से हुई पहचान; लैपटॉप-बैटरियां जब्त

April 6, 2026/
12:05 am

ग्वालियर के झांसी रोड इलाके में इलेक्ट्रिक स्कूटी शोरूम में चोरी करने वाले तीन शातिर चोरों को पुलिस ने गिरफ्तार...

BJP releases manifesto ahead of Assam Assembly elections 2026. (Image: ANI)

March 31, 2026/
10:45 am

आखरी अपडेट:मार्च 31, 2026, 10:45 IST तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026: तमिलनाडु में भाजपा की सफलता 2029 के आम चुनाव से...

राजगढ़ में शादीशुदा प्रेमी जोड़े ने पेड़ पर फांसी लगाई:पांच साल से एक दूसरे को जानते थे; दो दिन में दूसरी ऐसी घटना

April 14, 2026/
10:19 pm

राजगढ़ जिले के भोजपुर थाना क्षेत्र के दुर्गपुरा गांव में मंगलवार सुबह एक प्रेमी जोड़े के शव गांव से करीब...

Moong Dal Khichdi Recipe

February 19, 2026/
11:40 pm

मूंग दाल खिचड़ी रेसिपी: भारतीय आश्रम में मूंग दाल की दाल को बार-बार बीमारी के वक्त आरामदायक भोजन के रूप...

तस्वीर का विवरण

May 23, 2026/
7:31 pm

एलोवेरा जेल के फायदे: त्वचा को ठंडक देता है। चेहरे को अंतिम संस्कार किया जाता है। पिंपल और जलन को...

Kerala Lottery Result Today: The first prize winner of Karunya Plus KN-613 will take home Rs 1 crore. (Image: Shutterstock)

March 5, 2026/
9:39 am

आखरी अपडेट:मार्च 05, 2026, 09:39 IST भाजपा और सहयोगी जद (यू) के नेताओं ने घोषणा की कि नीतीश कुमार द्वारा...

राजनीति

स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का नैतिक पतन:छात्रों के स्टार्टअप में निवेश से मोटी कमाई कर रहे प्रोफेसर, बिना ठोस आइडिया के करोड़ों की फंडिंग

स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी का नैतिक पतन:छात्रों के स्टार्टअप में निवेश से मोटी कमाई कर रहे प्रोफेसर, बिना ठोस आइडिया के करोड़ों की फंडिंग

क्या कोई 21 साल का छात्र किसी ऐसी यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट को इस्तीफा देने पर मजबूर कर सकता है, जिसका सालाना बजट दुनिया के 116 देशों की सरकारों से भी बड़ा हो? स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के छात्र और युवा पत्रकार थियो बेकर ने न सिर्फ ऐसा कर दिखाया, बल्कि सिलिकॉन वैली की इस पसंदीदा यूनिवर्सिटी के भीतर चल रहे मुनाफे, धोखाधड़ी और रसूख के खेल को भी बेनकाब कर दिया है। बेकर ने अपनी नई किताब ‘हाउ टू रूल द वर्ल्ड’ में स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी के इसी चमकदार चेहरे के पीछे छिपे नैतिक पतन के काले सच को सामने रखा है। बेकर ने शुरुआत में कंप्यूटर साइंस की पढ़ाई शुरू की, इसके साथ ही उनका रुझान छात्र अखबार ‘द स्टैनफर्ड डेली’ की ओर हो गया। निडर खोजी पत्रकार की तरह काम करते हुए उन्होंने साबित किया कि तत्कालीन प्रेसिडेंट मार्क टेसियर-लवाइन के रिसर्च पेपर्स में डेटा से भारी हेरफेर हुई थी। इस खुलासे से देशव्यापी विवाद हुआ और प्रेसिडेंट को इस्तीफा देना पड़ा। साहसी रिपोर्टिंग के लिए बेकर को प्रतिष्ठित जॉर्ज पोल्क अवार्ड मिला। इसे जीतने वाले वे सबसे युवा पत्रकार बने।​ किताब के मुताबिक स्टैनफर्ड यूनिवर्सिटी अब सिर्फ ‘फुटबॉल टीम वाला बड़ा टेक इनक्यूबेटर’ बनकर रह गई है। यहां का पूरा माहौल इस बात से संचालित होता है कि कौन कितनी जल्दी करोड़पति बन सकता है। यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर खुद अपने ही छात्रों के स्टार्टअप्स में शुरुआती निवेशक बनकर मोटी कमाई कर रहे हैं। कैंपस में हर वक्त वेंचर कैपिटलिस्ट कंपनियां घूमती रहती हैं ताकि किसी छात्र के ‘अगले बड़े आइडिया’ पर पैसा लगा सकें। बेकर के मुताबिक मजबूत पहचान वाले छात्रों को बिना ठोस बिजनेस आइडिया के भी सात अंकों की फंडिंग आसानी से मिल जाती है। बेकर के अनुसार कैंपस में छात्रों के बीच अंधी और हिंसक प्रतियोगिता चलती है, जहां वे हर नैतिक सीमा पार करने को तैयार रहते हैं। इतिहास, कला और तार्किक सोच जैसे मूल्य पीछे छूट गए हैं। हालात इतने बिगड़े चुके हैं कि कैंपस में यह मजाक आम हो चुका है यहां का सिस्टम ‘बस थोड़ी सी धोखाधड़ी’ को सहजता से स्वीकार करता है। उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए यह गंभीर चेतावनी: समाजशास्त्री बोस्टन कॉलेज में ‘इंटरनेशनल सेंटर फॉर हायर एजुकेशन’ के संस्थापक और उच्च शिक्षा के प्रसिद्ध समाजशास्त्री प्रोफेसर फिलिप अल्तबाक के अनुसार स्टैनफर्ड की यह स्थिति आधुनिक उच्च शिक्षा व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। प्रो. अल्तबाक के अनुसार, ‘जब यूनिवर्सिटी नॉलेज और चरित्र निर्माण के केंद्र न रहकर कॉर्पोरेट फैक्ट्रियां बन जाती हैं, तो वे समाज को बौद्धिक रूप से खोखला कर देती हैं। स्टैनफर्ड में जो हो रहा है, वह इस बात का सबूत है कि कैसे ‘अंधाधुंध पूंजीवाद’ ने शिक्षा के मूल सिद्धांतों को ही निगल लिया है। बेकर की किताब इस व्यवस्था के खिलाफ एक जरूरी कानूनी और नैतिक दस्तावेज है।’

WhatsApp
Facebook
Twitter
LinkedIn

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

हेल्थ & फिटनेस

विज्ञापन

राजनीति

लेटेस्ट टॉप अपडेट

ग्लोबल करेंसी अपडेट

Provided by IFC Markets

Live Cricket

सच्चाई की दहाड़

ब्रेकिंग खबरें सीधे अपने ईमेल पर पाने के लिए रजिस्टर करें।

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.