Health Tips: गर्मी में अमृत समान हरा पुदीना, पेट, त्वचा और शरीर को देता है ठंडक व ताजगी, जाने इसके फायदे

गर्मी के मौसम में हरा पुदीना शरीर को ठंडक देने, पेट की समस्याओं से राहत पहुंचाने और ताजगी बनाए रखने में बेहद फायदेमंद माना जाता है. चटनी, शरबत और घरेलू नुस्खों में इस्तेमाल होने वाला पुदीना त्वचा, सिरदर्द और मुंह की बदबू जैसी समस्याओं में भी लाभकारी माना जाता है.
अर्जुन की छाल के फायदे I health benefits of arjun chhaal

Last Updated:May 21, 2026, 20:32 IST Benefits of Arjun Chaal: अर्जुन की छाल को आयुर्वेद में पेट की गर्मी, गैस, एसिडिटी और सीने की जलन से राहत दिलाने वाला प्राकृतिक उपाय माना जाता है. यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने और पेट की सूजन कम करने में मददगार हो सकती है. हालांकि इसका सेवन हमेशा सीमित मात्रा और विशेषज्ञ की सलाह के साथ ही करना चाहिए. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में लोग आज भी कई बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक और पारंपरिक उपचार अपनाते हैं. अर्जुन की छाल भी इन्हीं घरेलू नुस्खों का अहम हिस्सा मानी जाती है. पुराने समय से पेट की गर्मी, गैस और सीने की जलन में इसका उपयोग किया जाता रहा है. पहाड़ों में प्राकृतिक जड़ी-बूटियों पर लोगों का भरोसा आज भी कायम है. प्राकृतिक चीजों का सही तरीके से उपयोग स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हो सकता है. हालांकि आधुनिक जीवनशैली और खानपान के कारण कई समस्याएं बढ़ रही हैं. ऐसे में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय संतुलित आहार और नियमित दिनचर्या अपनाना भी जरूरी माना जाता है. अर्जुन की छाल फायदेमंद जरूर मानी जाती है, लेकिन इसका सेवन सोच-समझकर करना चाहिए. हर व्यक्ति की शारीरिक स्थिति और बीमारी अलग होती है, इसलिए बिना सलाह के किसी भी औषधि का अधिक उपयोग नुकसान पहुंचा सकता है. खासकर जिन लोगों को पहले से कोई गंभीर बीमारी है, जो नियमित दवाइयां लेते हैं. उन्हें डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. आयुर्वेदिक चीजों का सही मात्रा और सही तरीके से सेवन ही लाभ देता है. यदि पेट की जलन, गैस या एसिडिटी लगातार बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. समय पर जांच और सही उपचार जरूरी होता है. अर्जुन की छाल का सेवन कई तरीकों से किया जाता है. कुछ लोग इसका काढ़ा बनाकर पीते हैं, जबकि कई लोग इसका पाउडर गुनगुने पानी के साथ लेते हैं. सुबह खाली पेट या भोजन के बाद सीमित मात्रा में इसका सेवन किया जा सकता है. काढ़ा बनाने के लिए इसकी छाल को पानी में उबालकर तैयार किया जाता है. यह तरीका पारंपरिक रूप से काफी लोकप्रिय है. वहीं पाउडर रूप में इसका उपयोग करना भी आसान माना जाता है. हालांकि हर व्यक्ति की शारीरिक प्रकृति अलग होती है, इसलिए किसी भी घरेलू उपाय को अपनाने से पहले विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर माना जाता है. सही मात्रा में सेवन करने पर इसके बेहतर परिणाम मिल सकते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google अर्जुन की छाल सिर्फ पेट की गर्मी कम करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पाचन तंत्र को मजबूत बनाने में भी मददगार मानी जाती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व भोजन को पचाने की प्रक्रिया को बेहतर करते हैं. जिन लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन या अपच की शिकायत रहती है, उन्हें इससे लाभ मिल सकता है. अर्जुन की छाल पेट और आंतों को शांत रखने का काम करती है. इससे पाचन धीरे-धीरे बेहतर हो सकता है. ग्रामीण इलाकों में लोग इसे घरेलू औषधि के रूप में इस्तेमाल करते हैं. हालांकि किसी भी आयुर्वेदिक चीज का अत्यधिक सेवन नुकसान भी पहुंचा सकता है. कई लोगों को भोजन के बाद पेट फूलने और गैस बनने की समस्या रहती है. यह परेशानी गलत खानपान, तली-भुनी चीजों और कमजोर पाचन के कारण बढ़ सकती है. डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि अर्जुन की छाल पेट को संतुलित रखने में मदद करती है. इसमें ऐसे गुण मौजूद होते हैं, जो पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में सहायक माने जाते हैं. अर्जुन की छाल का सेवन करने से गैस बनने की समस्या में राहत मिल सकती है. खासकर खट्टी डकार और पेट में भारीपन महसूस होने पर लोग इसका उपयोग करते हैं. पहाड़ी क्षेत्रों में कई परिवार आज भी घरेलू नुस्खे के रूप में इसका इस्तेमाल करते हैं. सही खानपान के साथ इसका सेवन अधिक लाभकारी माना जाता है. अर्जुन की छाल में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर की सूजन को कम करने में सहायक हो सकते हैं. पेट और आंतों में सूजन होने पर कई बार जलन, गैस और दर्द जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. ऐसे में अर्जुन की छाल राहत देने का काम कर सकती है. आयुर्वेद में इसे प्राकृतिक औषधि के रूप में लंबे समय से इस्तेमाल किया जाता रहा है. यह पेट को शांत रखने और एसिडिटी कम करने में मददगार साबित हो सकती है. इसके नियमित और संतुलित सेवन से पाचन तंत्र को लाभ मिल सकता है. हालांकि किसी गंभीर बीमारी में केवल घरेलू उपायों पर निर्भर रहना सही नहीं माना जाता है. जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी होती है. बागेश्वर समेत पहाड़ी इलाकों में आयुर्वेदिक औषधियों का इस्तेमाल लंबे समय से होता आ रहा है. इन्हीं में अर्जुन की छाल को बेहद उपयोगी माना जाता है. इसकी तासीर ठंडी होती है, जो शरीर और पेट की अतिरिक्त गर्मी को कम करने में मदद करती है. गर्मियों में कई लोगों को पेट में जलन, भारीपन और बेचैनी की समस्या रहती है. ऐसे में अर्जुन की छाल का सेवन राहत पहुंचा सकता है. इसमें मौजूद प्राकृतिक गुण शरीर को अंदर से ठंडक देने का काम करते हैं. इसे पारंपरिक घरेलू उपचार के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. नियमित और सही मात्रा में सेवन करने पर पेट को आराम मिल सकता है. आजकल गलत खानपान और अनियमित दिनचर्या के कारण एसिडिटी की समस्या तेजी से बढ़ रही है. कई लोग सीने में जलन, खट्टी डकार और गले में जलन से परेशान रहते हैं. आयुर्वेद में अर्जुन की छाल को इन समस्याओं में लाभकारी माना गया है. इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो पेट की अंदरूनी सूजन को कम करने में मदद करते हैं. इससे एसिड बनने की समस्या नियंत्रित हो सकती है. अर्जुन की छाल का काढ़ा पीने से पाचन तंत्र को आराम मिलता है और सीने की जलन कम हो सकती है. इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए. लंबे समय तक परेशानी रहने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Benefits Of Arandi: अरंडी का तेल के फायदे

Last Updated:May 20, 2026, 16:41 IST गांवों और खेतों के आसपास आसानी से दिखाई देने वाला अरंडी का पौधा आयुर्वेद में बेहद उपयोगी माना जाता है. इसके तेल, पत्तों और बीजों का इस्तेमाल वर्षों से घरेलू उपचारों में किया जा रहा है. शरीर दर्द, सूजन, कब्ज, त्वचा और बालों की देखभाल में अरंडी के फायदे लोगों के बीच आज भी काफी लोकप्रिय हैं. गांवों और खेतों के आसपास अक्सर दिखाई देने वाला अरंडी का पौधा देखने में भले ही साधारण लगता हो, लेकिन इसके गुण बेहद खास माने जाते हैं. आयुर्वेद में अरंडी को एक उपयोगी औषधीय पौधे के रूप में जाना जाता है. इसके पत्ते, बीज और तेल का इस्तेमाल वर्षों से घरेलू उपचारों में किया जाता रहा है. ग्रामीण इलाकों में आज भी लोग कई छोटी-बड़ी समस्याओं में अरंडी का उपयोग करते हैं। यही वजह है कि यह पौधा लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग लंबे समय से अरंडी के तेल का इस्तेमाल शरीर के दर्द में करते आ रहे हैं. माना जाता है कि यह तेल शरीर की मांसपेशियों को आराम पहुंचाने में मदद कर सकता है. कई लोग घुटनों, कमर और जोड़ों के दर्द में अरंडी के तेल की मालिश करते हैं. बुजुर्गों के बीच यह घरेलू उपाय काफी लोकप्रिय है. कुछ लोग इसे हल्का गर्म करके मालिश करते हैं, जिससे शरीर को राहत महसूस होती है. अरंडी के तेल में ऐसे गुण पाए जाते हैं जो सूजन को कम करने में मदद कर सकते हैं. यही कारण है कि कई लोग मोच या हल्की सूजन होने पर भी इसका उपयोग करते हैं. हालांकि किसी गंभीर बीमारी या लगातार दर्द होने पर डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. अरंडी के पत्ते भी काफी उपयोगी माने जाते हैं. गांवों में पुराने समय से लोग इसके पत्तों को गर्म करके दर्द वाले हिस्से पर बांधते रहे हैं. माना जाता है कि इससे दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है. कई महिलाएं पारंपरिक घरेलू उपायों में भी अरंडी के पत्तों का इस्तेमाल करती हैं. कुछ लोग सिरदर्द या शरीर दर्द में भी इसके पत्तों का उपयोग घरेलू उपचार के रूप में करते हैं. Add News18 as Preferred Source on Google पुराने समय से अरंडी के तेल का उपयोग कब्ज की समस्या में घरेलू उपाय के रूप में किया जाता रहा है. गांवों में लोग पेट साफ करने के लिए थोड़ी मात्रा में अरंडी के तेल का सेवन करते थे. माना जाता है कि इसमें ऐसे गुण पाए जाते हैं जो आंतों की सफाई करने और पेट को साफ रखने में मदद कर सकते हैं. खासकर जब किसी को लंबे समय तक कब्ज की शिकायत रहती थी, तब बुजुर्ग लोग अरंडी के तेल का इस्तेमाल करने की सलाह देते थे. सुषमा चतुर्वेदी का कहना है कि अरंडी के बीज सीधे खाने योग्य नहीं होते. इनमें कुछ जहरीले तत्व पाए जाते हैं, जो नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए इसका उपयोग हमेशा सावधानी और सही जानकारी के साथ करना चाहिए. बिना विशेषज्ञ सलाह के इसका सेवन करना खतरनाक साबित हो सकता है. आयुर्वेद में भी अरंडी का उपयोग सही मात्रा और सही तरीके से करने की सलाह दी जाती है. किसी भी बीमारी में घरेलू उपाय अपनाने से पहले डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की राय लेना जरूरी माना जाता है. सुषमा चतुर्वेदी बताती है कि अरंडी का पौधा प्रकृति का एक अनमोल उपहार माना जाता है. यह स्वास्थ्य, घरेलू उपयोग और खेती तीनों क्षेत्रों में लोगों के काम आता है. गांवों में वर्षों से इसका इस्तेमाल होता आ रहा है और आज भी इसकी उपयोगिता बनी हुई है. आधुनिक समय में भी अरंडी के तेल और इसके उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है. यही वजह है कि यह साधारण दिखने वाला पौधा लोगों के लिए बेहद खास माना जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग अरंडी के तेल का इस्तेमाल त्वचा को मुलायम रखने के लिए भी करते हैं. सर्दियों में फटी एड़ियों और सूखी त्वचा पर भी इसका उपयोग किया जाता है. माना जाता है कि यह त्वचा में नमी बनाए रखने में मदद करता है. हालांकि संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को किसी भी तेल या घरेलू उपाय का उपयोग करने से पहले सावधानी बरतनी चाहिए. अरंडी का तेल बालों के लिए भी काफी उपयोगी माना जाता है. कई लोग इसे बालों में लगाने से बाल मजबूत और चमकदार बने रहने की बात कहते हैं. बाजार में मिलने वाले कई हेयर ऑयल और ब्यूटी प्रोडक्ट में भी अरंडी के तेल का इस्तेमाल किया जाता है. यह बाल झड़ने की समस्या को कम करने में मदद कर सकता है. कुछ लोग इसे नारियल तेल या दूसरे तेलों में मिलाकर भी इस्तेमाल करते हैं. यही कारण है कि सौंदर्य उत्पादों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
दिल, दिमाग और पाचन का रक्षक वचा पौधा, आयुर्वेद में इसे क्यों माना जाता है संपूर्ण स्वास्थ्य का चमत्कारी उपाय?

Last Updated:May 19, 2026, 15:45 IST वचा (वच) एक औषधीय आयुर्वेदिक पौधा माना जाता है, जो दिल, दिमाग और पाचन के लिए लाभकारी बताया गया है. यह रक्त संचार सुधारने, तनाव कम करने, मानसिक शांति देने और पाचन तंत्र को मजबूत करने में मदद करता है. आयुर्वेद के अनुसार इसके सेवन से हृदय पर दबाव कम होता है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है. हालांकि इसके उपयोग से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार, वचा पौधा शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाने में मदद करता है और दिल को मजबूत रखने में सहायक माना जाता है. इसके अलावा यह तनाव कम करने, दिमाग को शांत रखने और पाचन सुधारने में भी उपयोगी बताया गया है. तनाव कम होने से हृदय पर पड़ने वाला दबाव भी घटता है. आयुर्वेद में वचा (वच) पौधे को एक खास औषधीय पौधा माना गया है. इसे पारंपरिक रूप से हृदय से जुड़ी समस्याओं में लाभकारी बताया जाता है. वाच का उपयोग प्राचीन समय से आयुर्वेदिक उपचार में किया जा रहा है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि इसके अलावा वचा पौधा पाचन तंत्र को भी मजबूत करता है. आयुर्वेद में माना जाता है कि खराब पाचन कई बीमारियों की जड़ होता है. वाच गैस, अपच और पेट की अन्य समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. जब पाचन सही रहता है, तो शरीर में पोषक तत्व अच्छी तरह से अवशोषित होते हैं, जिससे हृदय समेत पूरे शरीर को लाभ मिलता है. Add News18 as Preferred Source on Google डॉ. अभिषेक मिश्रा के अनुसार, वचा पौधा शरीर में रक्त संचार को बेहतर बनाता है. जब शरीर में खून का प्रवाह सही तरीके से होता है, तो हृदय पर दबाव कम पड़ता है और दिल स्वस्थ रहता है. वाच के सेवन से नसों में जमा गंदगी को हटाने में मदद मिलती है, जिससे हार्ट ब्लॉकेज जैसी समस्याओं का खतरा कम हो सकता है. यही कारण है कि आयुर्वेदाचार्य इसे दिल को मजबूत बनाने वाला पौधा मानते हैं. लोकल 18 से बातचीत के दौरान रामनाथ आरोग्यधाम के वैद्य (डॉ.) अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा (वच) के पौधे दिल और दिमाग के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. माना जाता है कि इसके पंचमूल का प्रयोग करके दिल से और दिमाग से संबंधित बीमारियों को दूर किया जा सकता है. वचा पौधे का एक बड़ा गुण यह भी है कि यह तनाव और मानसिक थकान को कम करने में सहायक होता है. आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव दिल की बीमारियों का एक बड़ा कारण बन चुका है. वाच दिमाग को शांत रखने में मदद करता है और चिंता को कम करता है. जब मन शांत रहता है, तो इसका सीधा असर दिल की सेहत पर पड़ता है. तनाव कम होने से हृदय पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव भी घट जाता है. डॉ. अभिषेक मिश्रा बताते हैं कि इसके जड़ को सुखाकर पाउडर बनाकर इसका प्रयोग किया जा सकता है और इसके पांचों मूल का भी प्रयोग किया जाता है. इसका प्रयोग 4 रत्ती से 3 ग्राम तक किया जाता है, लेकिन इसका प्रयोग करने से पहले अपने डॉक्टर या किसी आयुर्वेदाचार्य से एक बार सलाह जरूर लें. डॉ अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा (वच) का पौधा लगाना भी काफी आसान है. इसको गमले में या किचन गार्डन में आसानी से लगाया जा सकता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा बताते हैं कि वचा का उपयोग सिर्फ दिल और पाचन के लिए ही नहीं, बल्कि सर्दी-खांसी, दमा और आवाज से जुड़ी समस्याओं में भी किया जाता है. कई जगहों पर इसे बच्चों की याददाश्त बढ़ाने और बोलने की क्षमता सुधारने के लिए भी उपयोग में लाया जाता है. डॉ. अभिषेक कुमार मिश्रा के अनुसार, वाच में मौजूद औषधीय गुण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी सहायक होते हैं. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
Cherry benefits I चेरी खाने के फायदे

Last Updated:May 18, 2026, 14:00 IST चेरी सिर्फ एक स्वादिष्ट फल नहीं, बल्कि सेहत का खजाना भी है. इसमें मौजूद विटामिन, मिनरल्स और एंटीऑक्सीडेंट दिल को स्वस्थ रखने, ब्लड प्रेशर और शुगर को नियंत्रित करने के साथ-साथ अच्छी नींद में भी मदद करते हैं. नियमित रूप से सीमित मात्रा में चेरी का सेवन शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और कई बीमारियों से बचाव में सहायक माना जाता है. सुल्तानपुर. फलों का महत्व प्राचीन समय से ही चला आ रहा है, उन्हीं में एक फल है चेरी. जो स्वादिष्ट और गुणों से भरपूर फल माना जाता है. इसका रंग काफी आकर्षक होता है और मीठा स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है, वहीं स्वास्थ्य के लिहाज से भी यह काफी लाभकारी होती है. चेरी में बहुत सारे पोषक तत्व पाए जाते हैं. इस, में विटामिन, मिनरल्स, एंटीऑक्सीडेंट और फाइबर अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है. इसमें मौजूद विटामिन-सी, विटामिन-ए, पोटैशियम, आयरन और मैग्नीशियम शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के साथ त्वचा की चमक और पाचन बेहतर बनाता है. इन बीमारियों में है रामबाण फिजीशियन डॉ. एस बी सिंह लोकल 18 से बताते हैं कि चेरी का सेवन हृदय रोग के खतरे को कम करने में सहायक होता है, क्योंकि इसमें पाए जाने वाले एंथोसाइनिन और फ्लेवोनोइड्स खराब कोलेस्ट्रॉल को घटाकर दिल को स्वस्थ रखते हैं. इसमें मौजूद पोटैशियम ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करता है. चेरी खाने से ब्लड शुगर लेवल भी संतुलित रहता है, इसलिए यह मधुमेह रोगियों के लिए भी लाभकारी मानी जाती है. इसमें मिलती है राहतचेरी का एक और बड़ा फायदा यह है कि यह नींद से जुड़ी समस्याओं में राहत देती है. दरअसल, चेरी में मेलाटोनिन पाया जाता है, जो नींद के चक्र को नियंत्रित करता है और अच्छी नींद लाने में मदद करता है. यही कारण है कि इसे रात के खाने के बाद और सोने से कुछ समय पहले सेवन करने की सलाह देते हैं.इसके अलावा चेरी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गठिया और जोड़ों के दर्द में भी राहत पहुंचाते हैं. ऐसे करें सेवन अगर बात करें सेवन के तरीके की, तो चेरी को सुबह खाली पेट खाना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. इसे सीधे फल के रूप में खाया जा सकता है या फिर सलाद, स्मूदी और जूस में भी शामिल किया जा सकता है. दिन में 8 से 10 चेरी खाना पर्याप्त होता है.हालांकि, जिन लोगों को पेट से जुड़ी दिक्कतें रहती हैं, उन्हें इसे अधिक मात्रा में खाने से बचना चाहिए. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Sultanpur,Uttar Pradesh
Chitrak Cheeta Benefits I चित्रक जड़ के फायदे

Last Updated:May 17, 2026, 17:19 IST आयुर्वेद में चित्रक चीता को एक महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग कफ, गैस, अपच, कमजोरी और जोड़ों से जुड़ी समस्याओं में किया जाता रहा है. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार कुछ औषधीय पौधों को शरीर में जमा कफ को संतुलित करने में सहायक माना जाता है. चित्रक चीता भी ऐसे पौधों में शामिल बताया जाता है, पारंपरिक चिकित्सा में इसका उपयोग सर्दी-जुकाम, कफ और मौसम बदलने पर होने वाली कुछ सामान्य परेशानियों में किया जाता रहा है. माना जाता है कि यह शरीर की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. हालांकि, इसका उपयोग बहुत सावधानी से करना चाहिए, क्योंकि हर व्यक्ति के शरीर पर इसका असर अलग हो सकता है. भारत में आयुर्वेद का इतिहास काफी पुराना है. प्राचीन समय से ही कई औषधीय पौधों का उपयोग स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं के लिए किया जाता रहा है. ऐसे ही खास पौधों में चित्रक चीता का नाम भी शामिल है. आयुर्वेद में इसे महत्वपूर्ण औषधीय पौधा माना जाता है. इसकी जड़ और कुछ अन्य हिस्सों का उपयोग पारंपरिक उपचारों में लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि किसी भी औषधीय पौधे का इस्तेमाल डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए. आयुर्वेद में चित्रक चीता का उपयोग कुछ त्वचा संबंधी समस्याओं में भी बताया गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका इस्तेमाल अलग-अलग तरीकों से किया जाता रहा है. माना जाता है कि इसके कुछ गुण त्वचा से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकते हैं. हालांकि इसकी तासीर तेज मानी जाती है, इसलिए इसका उपयोग बहुत सावधानी और सही मात्रा में करना जरूरी होता है. बिना जानकारी या विशेषज्ञ की सलाह के इसका प्रयोग करना नुकसानदायक भी हो सकता है. किसी भी औषधीय पौधे की तरह इसका उपयोग भी चिकित्सकीय सलाह के बाद ही करना बेहतर माना जाता है. Add News18 as Preferred Source on Google आजकल अनियमित खानपान और तली-भुनी चीजों के अधिक सेवन से कई लोगों को गैस और पेट फूलने की समस्या हो जाती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को पेट से जुड़ी परेशानियों में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग पाचन क्रिया को बेहतर बनाने और गैस की समस्या को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि, किसी भी औषधीय पौधे का सेवन विशेषज्ञ की सलाह से ही करना चाहिए. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य जमुना प्रसाद यादव बताते हैं कि आयुर्वेद में चित्रक चीता को पाचन तंत्र के लिए लाभकारी माना गया है. कहा जाता है कि यह पाचन क्रिया को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है. अपच, पेट भारी रहना, गैस या भोजन ठीक से न पचने जैसी समस्याओं में पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. हालांकि इसका सेवन हमेशा विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए. आयुर्वेद के अनुसार चित्रक चीता को शरीर की कमजोरी और थकान दूर करने में उपयोगी माना जाता है. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह शरीर को ऊर्जा देने और सुस्ती कम करने में मदद कर सकता है. जब व्यक्ति लगातार थकान या कमजोरी महसूस करता है, तब पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग बताया जाता है। हालांकि इसके प्रभाव व्यक्ति की स्थिति पर निर्भर कर सकते हैं. कुछ आयुर्वेदिक जानकारों के अनुसार चित्रक चीता में ऐसे गुण बताए जाते हैं, जो शरीर की सूजन से जुड़ी समस्याओं में सहायक हो सकते हैं. कई बार शरीर में सूजन थकान, चोट या अन्य कारणों से भी हो सकती है. पारंपरिक उपचारों में चित्रक चीता का उपयोग ऐसी परेशानियों को कम करने के लिए किया जाता रहा है. हालांकि इसके प्रभाव को लेकर हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है. आज के समय में लोग प्राकृतिक और आयुर्वेदिक चीजों की तरफ तेजी से आकर्षित हो रहे हैं. लेकिन किसी भी पौधे को चमत्कारी मानकर इस्तेमाल करने से पहले सही जानकारी लेना जरूरी है. आयुर्वेद में चित्रक चीता का विशेष महत्व जरूर बताया गया है, लेकिन सुरक्षित और सही उपयोग ही सबसे ज्यादा जरूरी होता है. स्वास्थ्य से जुड़ी किसी भी परेशानी में डॉक्टर या आयुर्वेद विशेषज्ञ की सलाह लेना हमेशा बेहतर विकल्प माना जाता है. बढ़ती उम्र, बदलती जीवनशैली और शरीर में पोषण की कमी के कारण कई लोगों को जोड़ों के दर्द और शरीर में अकड़न की समस्या होने लगती है. इससे चलने-फिरने और रोजमर्रा के काम करने में भी परेशानी हो सकती है. आयुर्वेद में चित्रक चीता को ऐसी समस्याओं में उपयोगी माना गया है. पारंपरिक उपचारों में इसका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. कुछ आयुर्वेद विशेषज्ञों का मानना है कि यह जोड़ों से जुड़ी परेशानियों में सहायक हो सकता है. न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें। उत्तर प्रदेश की ताजा खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें|
खेत में सांप काट ले तो सबसे पहले क्या करें? यहां जानिए वो तरीका जो बचा सकता है आपकी जान

फरीदाबाद: खेत में रात का समय… चारों तरफ अंधेरा… किसान फसल की सिंचाई कर रहा होता है. तभी अचानक पैर के पास कुछ हलचल होती है और पता चलता है कि सांप ने काट लिया. ऐसे समय में अक्सर लोग घबरा जाते हैं. कोई रस्सी बांध देता है कोई जहर चूसने लगता है तो कोई झाड़-फूंक करवाने के लिए दौड़ पड़ता है. लेकिन यही घबराहट कई बार मरीज की हालत और बिगाड़ देती है. फरीदाबाद जैसे इलाकों में जहां गांवों और खेतों के आसपास कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप पाए जाते हैं वहां सही जानकारी होना बेहद जरूरी है. लोकल18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के डॉक्टर सुमित आपातकालीन एवं ट्रॉमा प्रबंधन विभाग के प्रभारी बताते हैं सांप काटने के बाद सबसे जरूरी चीज घबराना नहीं बल्कि मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना है. हर बार सांप काटने पर जहर शरीर में जाए ऐसा जरूरी नहीं होता. कई बार ड्राई बाइट होती है यानी सांप काटता है लेकिन जहर नहीं छोड़ता. वहीं कई बार सांप जहर भी इंजेक्ट कर देता है. ऐसी स्थिति में मरीज खुद यह तय नहीं कर सकता कि जहर गया है या नहीं इसलिए तुरंत डॉक्टर के पास जाना जरूरी है. सांप के काटने पर क्या न करें डॉक्टर सुमित बताते हैं गांवों में लोग अक्सर कई गलतियां कर बैठते हैं. कोई काटी हुई जगह पर कपड़ा या रस्सी कसकर बांध देता है तो कोई मुंह से खून चूसकर जहर निकालने की कोशिश करता है. कुछ लोग ब्लेड से काटकर खून निकालने लगते हैं. यह सब बिल्कुल गलत है और जानलेवा भी हो सकता है. डॉक्टर सुमित बताते हैं जहां सांप ने काटा है वहां मुंह से खून चूसने या ब्लेड से काटने से कोई फायदा नहीं होता. यह सिर्फ फिल्मों और पुराने मिथकों में दिखाया जाता है. कई बार लोग सोचते हैं कि रस्सी या कपड़ा कसकर बांध देंगे तो जहर ऊपर नहीं चढ़ेगा जबकि हकीकत इसके उलट है. ज्यादा टाइट बांधने से खून का संचार रुक जाता है और अस्पताल में खोलने के बाद शरीर को और नुकसान पहुंच सकता है. झाड़-फूंक से कभी सांप का जहर नहीं उतरता डॉक्टर सुमित बताते हैं झाड़-फूंक से कभी सांप का जहर नहीं उतरता. गांवों में आज भी कई लोग मरीज को अस्पताल ले जाने की बजाय झाड़-फूंक कराने ले जाते हैं जिससे इलाज में देरी हो जाती है. जितनी जल्दी मरीज अस्पताल पहुंचेगा उतनी जल्दी एंटी-वेनम देकर उसकी जान बचाई जा सकती है. कोबरा और करैत जैसे सांप जहरीले डॉक्टर सुमित बताते हैं बरसात के मौसम में फरीदाबाद में सांप काटने के मामले ज्यादा आते हैं. उस समय सांप अपने बिलों से बाहर निकल आते हैं. यहां सबसे ज्यादा कोबरा और करैत जैसे जहरीले सांप पाए जाते हैं. अगर इन सांपों ने जहर छोड़ दिया, तो कुछ घंटों के भीतर मरीज की जान भी जा सकती है अगर समय पर इलाज न मिले. कब दिया जाता है एंटी-वेनम डॉक्टर सुमित बताते हैं अस्पताल पहुंचने के बाद सबसे पहले हम मरीज की जांच करते हैं. कई बार शरीर पर सांप काटने के निशान होते हैं, लेकिन जहर के कोई लक्षण नहीं दिखते. ऐसी स्थिति को ड्राई बाइट कहा जाता है और उसमें एंटी-वेनम की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन अगर मरीज में जहर के लक्षण दिखने लगें तो तुरंत एंटी-वेनम दिया जाता है. इलाज में देरी से ज्यादा नुकसान ज्यादातर मरीज दो से चार दिनों में ठीक हो जाते हैं. लेकिन अगर इलाज में देरी हो जाए तो जहर शरीर के दूसरे अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है. कई बार मरीज को वेंटिलेटर तक की जरूरत पड़ जाती है. किडनी खराब होना ब्लीडिंग होना या शरीर के अन्य अंग प्रभावित होना जैसी दिक्कतें भी हो सकती हैं. डॉक्टर सुमित बताते हैं कई बार सांप काटने के तुरंत बाद लक्षण नहीं आते. कुछ मरीजों में दो से तीन दिन बाद भी असर दिखाई देता है. इसी वजह से ऐसे मरीजों को अस्पताल में निगरानी में रखा जाता है. गांवों में एक और अंधविश्वास देखने को मिलता है. कई लोग मानते हैं कि अगर सांप काटने से किसी की मौत हो जाए तो शव को जलाने की बजाय गंगा में बहा देने से वह जिंदा हो सकता है. इस पर डॉक्टर सुमित बताते हैं यह पूरी तरह मिथक है. अगर किसी व्यक्ति की मौत हो चुकी है तो पानी में डालने से वह जिंदा नहीं होगा. क्या सांप को मार देने से जहर नहीं चढ़ता डॉक्टर सुमित बताते हैं कई लोग सांप काटने के बाद मरीज को अस्पताल ले जाने की बजाय पहले सांप को मारने में लग जाते हैं. लोगों को लगता है कि सांप को मार देंगे तो जहर नहीं चढ़ेगा. यह बिल्कुल गलत सोच है. मरीज को छोड़कर सांप के पीछे भागने में समय बर्बाद होता है और यही देरी जानलेवा साबित हो सकती है. मरीज के लक्षण देखकर शुरू होता है इलाज डॉक्टर सुमित बताते हैं सांप को देखकर यह समझने में मदद मिल सकती है कि वह जहरीला था या नहीं लेकिन इसके लिए अपनी जान जोखिम में डालने की जरूरत नहीं है. डॉक्टर मरीज के लक्षण देखकर भी इलाज शुरू कर देते हैं. सांप काटने पर सबसे पहले मरीज को शांत रखें और बिना समय गंवाए तुरंत अस्पताल पहुंचाएं.
बच्चों के पैरों में दर्द I leg pain in childrens

Last Updated:May 11, 2026, 15:54 IST बच्चों के पैरों में बार-बार होने वाला दर्द सिर्फ थकान नहीं, बल्कि ग्रोथ पेन, कमजोरी या पोषक तत्वों की कमी का संकेत भी हो सकता है. बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने बच्चों की डाइट, मसाज और घरेलू उपायों को लेकर जरूरी सलाह दी है. मिर्जापुर. अक्सर छोटे बच्चों के पैरों में दर्द होता है, बच्चों के पैरों में दर्द होने के बाद कई बार मालिश के बाद भी दर्द ठीक नहीं होता है. अगर आपके बच्चों के पैरों में दर्द है तो इसके कुछ खास वजह हो सकती है. पहले ग्रोथ हो सकता है और दूसरा कारण थकान हो सकता है. वहीं, कई बार न्यूट्रिएंट्स की कमी की वजह से भी दर्द होता है. मंडलीय अस्पताल में तैनात डाइटीशियन डॉक्टर ज्योति सिंह ने बच्चों को लेकर टिप्स दिए हैं. डॉक्टर ज्योति सिंह ने घरेलू नुस्खे के साथ ही चिकित्सकीय पद्धति से बच्चों का ध्यान रखने की बात कही है. उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रॉपर न्यूट्रिएंट्स दें और शाम में जरूर पैरों की मालिश करें. मंडलीय अस्पताल की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. ज्योति सिंह ने लोकल 18 से बताया कि बच्चों के पैरों में दो चीजों से दर्द होता है. एक होता है ग्रोथ पैन, जो बच्चों के शारीरिक विकास की वजह से होता है. वहीं, दूसरा दर्द ज्यादा खेल-कूद आदि की वजह से होता है, कभी दर्द कमजोरी की वजह से भी हो सकता है. ऐसे में सबसे जरूरी बच्चों का खान-पान होता है. बच्चों को प्रॉपर प्रोटीन वाले सामान पनीर, अंडे, राजमा, सोयाबीन आदि को डाइट में रखना चाहिए. बच्चों को दूसरी जरूरी चीज कैल्शियम की आवश्यकता होती है. कैल्शियम के लिए बच्चों को रागी, चौराई, रामदाना, शिमला मिर्च, चने, खजूर और अंजीर आदि दे सकते हैं. बच्चों के पैरों में दर्द है तो इप्सम सॉल्ट है तो कुनकुने पानी में डालकर पैर को कुछ देर के लिए रोककर रखना चाहिए. ये टिप्स भी है बेहद कारगरडॉ. ज्योति सिंह ने बताया कि ध्यान रहे कि ज्यादा देर तक पैरों को पानी के अंदर नहीं रखे, वरना लूज मोशन जैसी समस्या हो सकती है. ऐसे में कम से कम समय तक पैरों को पानी में रखे. उन्होंने बताया कि बच्चों के पैरों में दर्द होन पर देसी तरीका है मसाज. थोड़ा मसाज बच्चों का रात में करना चाहिए. इसको करने से सोते समय बच्चों को बेहतर फील होता है. उनको अच्छी नींद लगती है, ये कुछ तरीके थे, जिनका उपयोग बच्चों के लिए पैरों में होने वाले दर्द को कम करने के लिए कर सकते हैं. अगर दर्द असहनीय हो या ज्यादा हो तो किसी पीडियाट्रिक को दिखा सकते हैं. मंडलीय अस्पताल में भी बाल रोग विशेषज्ञ है, यहां सम्पूर्ण इलाज है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Mirzapur,Uttar Pradesh
किडनी फंक्शन टेस्ट I किडनी बीमारी के लक्षण

Last Updated:May 11, 2026, 14:55 IST सिर्फ क्रिएटिनिन टेस्ट से किडनी की असली हालत का पता नहीं चलता. डॉक्टरों के मुताबिक पेशाब जांच, eGFR और UACR जैसे टेस्ट शुरुआती किडनी डैमेज पकड़ने में बेहद जरूरी हैं. समय रहते जांच और इलाज से डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है. कानपुर. जब भी लोगों को किडनी से जुड़ी कोई परेशानी होती है या डॉक्टर जांच लिखते हैं, तो ज्यादातर लोग सिर्फ क्रिएटिनिन और किडनी फंक्शन जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं. रिपोर्ट सामान्य आते ही उन्हें लगता है कि उनकी किडनी पूरी तरह स्वस्थ है. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. कई बार किडनी अंदर ही अंदर खराब होती रहती है और साधारण जांच में इसका पता तक नहीं चलता. बीमारी जब गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है, तब जाकर क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा हुआ नजर आता है. कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर युवराज गुलाटी ने बताया कि सिर्फ किडनी फंक्शन जांच के भरोसे रहना खतरनाक हो सकता है. किडनी की असली स्थिति जानने के लिए दूसरी जरूरी जांचें भी करानी चाहिए. इनमें सबसे महत्वपूर्ण पेशाब की जांच मानी जाती है. इससे यह पता चलता है कि कहीं पेशाब में प्रोटीन या खून तो नहीं आ रहा. पेशाब में प्रोटीन आना किडनी खराब होने का शुरुआती संकेत माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में क्रिएटिनिन सामान्य रहता है, लेकिन पेशाब की जांच में गड़बड़ी सामने आ जाती है. ऐसे मामलों में अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. GSVM Medical College के डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी पकड़ने के लिए सिर्फ एक जांच काफी नहीं होती. किडनी फंक्शन जांच के अलावा ईजीएफआर जांच भी बेहद जरूरी है. इस जांच से यह पता चलता है कि किडनी कितनी क्षमता से खून साफ कर रही है. इसके साथ ही यूएसीआर जांच भी अहम मानी जाती है, जिससे पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन की मात्रा का पता चलता है. यह जांच शुरुआती दौर में ही किडनी की खराबी का संकेत दे सकती है. पेशाब की जांच को हल्के में लेना पड़ सकता है भारीविशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से लोग पेशाब की जांच को सामान्य समझकर टाल देते हैं, जबकि यही जांच कई बार बड़ी बीमारी का संकेत दे देती है. पेशाब में झाग बनना, खून आना या बार-बार संक्रमण होना किडनी की खराबी की तरफ इशारा कर सकता है. डॉक्टर युवराज गुलाटी के मुताबिक शरीर भी पहले से संकेत देने लगता है. जैसे पैरों और चेहरे पर सूजन आना, बिना वजह थकान रहना, भूख कम लगना, रात में बार-बार पेशाब आना या रक्तचाप लगातार बढ़ा रहना किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं. मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा खतरा डॉक्टरों का कहना है कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन जांच, ईजीएफआर, यूएसीआर और पेशाब की जांच जरूर करानी चाहिए. समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवा और खानपान से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन लापरवाही करने पर मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है. विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सिर्फ एक सामान्य रिपोर्ट देखकर निश्चिंत न हों. अगर शरीर में लगातार कोई परेशानी महसूस हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेकर पूरी जांच कराएं. समय पर जांच ही किडनी को गंभीर बीमारी बनने से बचा सकती है. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh
पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी I GIMS Greater Noida

Last Updated:May 10, 2026, 15:34 IST ग्रेटर नोएडा के गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, जिम्स में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट शुरू की गई है. अब हड्डियों और जोड़ों की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से बेहतर इलाज मिल सकेगा. इस सुविधा से खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. ग्रेटर नोएडा. अब बच्चों के इलाज के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों के महंगे खर्च और लंबी भागदौड़ का सामना कम करना पड़ेगा. जिम्स हॉस्पिटल में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट की शुरुआत की गई है. इस नई हाईटेक सुविधा के शुरू होने से हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को अब सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक इलाज मिल सकेगा. जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि नई यूनिट में बच्चों की सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें और अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से जटिल ऑपरेशन भी आसानी से किए जा सकेंगे. उन्होंने बताया की यूनिट में हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक ड्रिल सिस्टम, पीडियाट्रिक हिप प्लेटिंग सेट, स्मॉल बोन ड्रिल सिस्टम और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक इंस्ट्रूमेंट्स जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं. इन उपकरणों के आने से बच्चों की हड्डियों की सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और बेहतर तरीके से हो सकेगी. खास बात यह है कि इन सेवाओं का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी मिलेगा, जो अब तक महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर थे. देश में मेडिकल डिवाइस की तेजी से बढ़ रही है मांग उन्होंने कहा कि देश में मेडिकल डिवाइस की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में उपकरण विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. ऐसे में सरकार मेडिकल सेक्टर को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सेक्टर-28 में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और आधुनिक तकनीक आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. उन्होंने यह भी कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े. जिम्स हॉस्पिटल के ऑर्थो डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हेड विकास सक्सेना ने बताया कि इस यूनिट से हर साल एक हजार से अधिक बच्चों को फायदा मिलने की संभावना है. जन्मजात हड्डी संबंधी समस्याएं, दुर्घटनाओं में लगी चोटें और ऑर्थोपेडिक बीमारियों से पीड़ित बच्चों का इलाज अब बेहतर तरीके से हो सकेगा. उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि समय पर इलाज मिलने से बच्चों को भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से भी बचाया जा सकेगा. अस्पताल में शुरू हुई इस नई सुविधा को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में भी खुशी का माहौल है. लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी. अब बच्चों के इलाज के लिए महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी. About the Author Monali Paul नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Greater Noida,Gautam Buddha Nagar,Uttar Pradesh








