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किडनी फंक्शन टेस्ट I किडनी बीमारी के लक्षण

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सिर्फ क्रिएटिनिन टेस्ट से किडनी की असली हालत का पता नहीं चलता. डॉक्टरों के मुताबिक पेशाब जांच, eGFR और UACR जैसे टेस्ट शुरुआती किडनी डैमेज पकड़ने में बेहद जरूरी हैं. समय रहते जांच और इलाज से डायलिसिस जैसी गंभीर स्थिति से बचा जा सकता है.

कानपुर. जब भी लोगों को किडनी से जुड़ी कोई परेशानी होती है या डॉक्टर जांच लिखते हैं, तो ज्यादातर लोग सिर्फ क्रिएटिनिन और किडनी फंक्शन जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं. रिपोर्ट सामान्य आते ही उन्हें लगता है कि उनकी किडनी पूरी तरह स्वस्थ है. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. कई बार किडनी अंदर ही अंदर खराब होती रहती है और साधारण जांच में इसका पता तक नहीं चलता. बीमारी जब गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है, तब जाकर क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा हुआ नजर आता है. कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर युवराज गुलाटी ने बताया कि सिर्फ किडनी फंक्शन जांच के भरोसे रहना खतरनाक हो सकता है. किडनी की असली स्थिति जानने के लिए दूसरी जरूरी जांचें भी करानी चाहिए. इनमें सबसे महत्वपूर्ण पेशाब की जांच मानी जाती है. इससे यह पता चलता है कि कहीं पेशाब में प्रोटीन या खून तो नहीं आ रहा. पेशाब में प्रोटीन आना किडनी खराब होने का शुरुआती संकेत माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में क्रिएटिनिन सामान्य रहता है, लेकिन पेशाब की जांच में गड़बड़ी सामने आ जाती है. ऐसे मामलों में अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. GSVM Medical College के डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी पकड़ने के लिए सिर्फ एक जांच काफी नहीं होती. किडनी फंक्शन जांच के अलावा ईजीएफआर जांच भी बेहद जरूरी है. इस जांच से यह पता चलता है कि किडनी कितनी क्षमता से खून साफ कर रही है. इसके साथ ही यूएसीआर जांच भी अहम मानी जाती है, जिससे पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन की मात्रा का पता चलता है. यह जांच शुरुआती दौर में ही किडनी की खराबी का संकेत दे सकती है.

पेशाब की जांच को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से लोग पेशाब की जांच को सामान्य समझकर टाल देते हैं, जबकि यही जांच कई बार बड़ी बीमारी का संकेत दे देती है. पेशाब में झाग बनना, खून आना या बार-बार संक्रमण होना किडनी की खराबी की तरफ इशारा कर सकता है. डॉक्टर युवराज गुलाटी के मुताबिक शरीर भी पहले से संकेत देने लगता है. जैसे पैरों और चेहरे पर सूजन आना, बिना वजह थकान रहना, भूख कम लगना, रात में बार-बार पेशाब आना या रक्तचाप लगातार बढ़ा रहना किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.

मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन जांच, ईजीएफआर, यूएसीआर और पेशाब की जांच जरूर करानी चाहिए. समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवा और खानपान से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन लापरवाही करने पर मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है. विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सिर्फ एक सामान्य रिपोर्ट देखकर निश्चिंत न हों. अगर शरीर में लगातार कोई परेशानी महसूस हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेकर पूरी जांच कराएं. समय पर जांच ही किडनी को गंभीर बीमारी बनने से बचा सकती है.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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कानपुर. जब भी लोगों को किडनी से जुड़ी कोई परेशानी होती है या डॉक्टर जांच लिखते हैं, तो ज्यादातर लोग सिर्फ क्रिएटिनिन और किडनी फंक्शन जांच करवाकर निश्चिंत हो जाते हैं. रिपोर्ट सामान्य आते ही उन्हें लगता है कि उनकी किडनी पूरी तरह स्वस्थ है. लेकिन हकीकत इससे काफी अलग है. कई बार किडनी अंदर ही अंदर खराब होती रहती है और साधारण जांच में इसका पता तक नहीं चलता. बीमारी जब गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है, तब जाकर क्रिएटिनिन स्तर बढ़ा हुआ नजर आता है. कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर युवराज गुलाटी ने बताया कि सिर्फ किडनी फंक्शन जांच के भरोसे रहना खतरनाक हो सकता है. किडनी की असली स्थिति जानने के लिए दूसरी जरूरी जांचें भी करानी चाहिए. इनमें सबसे महत्वपूर्ण पेशाब की जांच मानी जाती है. इससे यह पता चलता है कि कहीं पेशाब में प्रोटीन या खून तो नहीं आ रहा. पेशाब में प्रोटीन आना किडनी खराब होने का शुरुआती संकेत माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार कई मरीजों में क्रिएटिनिन सामान्य रहता है, लेकिन पेशाब की जांच में गड़बड़ी सामने आ जाती है. ऐसे मामलों में अगर समय रहते इलाज शुरू हो जाए तो किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है. GSVM Medical College के डॉक्टरों के मुताबिक किडनी की बीमारी पकड़ने के लिए सिर्फ एक जांच काफी नहीं होती. किडनी फंक्शन जांच के अलावा ईजीएफआर जांच भी बेहद जरूरी है. इस जांच से यह पता चलता है कि किडनी कितनी क्षमता से खून साफ कर रही है. इसके साथ ही यूएसीआर जांच भी अहम मानी जाती है, जिससे पेशाब में एल्ब्यूमिन यानी प्रोटीन की मात्रा का पता चलता है. यह जांच शुरुआती दौर में ही किडनी की खराबी का संकेत दे सकती है.

पेशाब की जांच को हल्के में लेना पड़ सकता है भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि बहुत से लोग पेशाब की जांच को सामान्य समझकर टाल देते हैं, जबकि यही जांच कई बार बड़ी बीमारी का संकेत दे देती है. पेशाब में झाग बनना, खून आना या बार-बार संक्रमण होना किडनी की खराबी की तरफ इशारा कर सकता है. डॉक्टर युवराज गुलाटी के मुताबिक शरीर भी पहले से संकेत देने लगता है. जैसे पैरों और चेहरे पर सूजन आना, बिना वजह थकान रहना, भूख कम लगना, रात में बार-बार पेशाब आना या रक्तचाप लगातार बढ़ा रहना किडनी की बीमारी के शुरुआती लक्षण हो सकते हैं.

मधुमेह और रक्तचाप के मरीजों को ज्यादा खतरा

डॉक्टरों का कहना है कि मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है. ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन जांच, ईजीएफआर, यूएसीआर और पेशाब की जांच जरूर करानी चाहिए. समय रहते बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवा और खानपान से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है. लेकिन लापरवाही करने पर मरीज को डायलिसिस तक की जरूरत पड़ सकती है. विशेषज्ञों ने लोगों से अपील की है कि सिर्फ एक सामान्य रिपोर्ट देखकर निश्चिंत न हों. अगर शरीर में लगातार कोई परेशानी महसूस हो रही है तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लेकर पूरी जांच कराएं. समय पर जांच ही किडनी को गंभीर बीमारी बनने से बचा सकती है.

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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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