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पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी I GIMS Greater Noida

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ग्रेटर नोएडा के गवर्नमेंट इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंस, जिम्स में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट शुरू की गई है. अब हड्डियों और जोड़ों की गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की मदद से बेहतर इलाज मिल सकेगा. इस सुविधा से खासतौर पर गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है.

ग्रेटर नोएडा. अब बच्चों के इलाज के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों के महंगे खर्च और लंबी भागदौड़ का सामना कम करना पड़ेगा. जिम्स हॉस्पिटल में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट की शुरुआत की गई है. इस नई हाईटेक सुविधा के शुरू होने से हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को अब सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक इलाज मिल सकेगा. जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि नई यूनिट में बच्चों की सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें और अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से जटिल ऑपरेशन भी आसानी से किए जा सकेंगे. उन्होंने बताया की यूनिट में हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक ड्रिल सिस्टम, पीडियाट्रिक हिप प्लेटिंग सेट, स्मॉल बोन ड्रिल सिस्टम और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक इंस्ट्रूमेंट्स जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं. इन उपकरणों के आने से बच्चों की हड्डियों की सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और बेहतर तरीके से हो सकेगी. खास बात यह है कि इन सेवाओं का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी मिलेगा, जो अब तक महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर थे.

देश में मेडिकल डिवाइस की तेजी से बढ़ रही है मांग 

उन्होंने कहा कि देश में मेडिकल डिवाइस की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में उपकरण विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. ऐसे में सरकार मेडिकल सेक्टर को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सेक्टर-28 में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और आधुनिक तकनीक आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. उन्होंने यह भी कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े.  जिम्स हॉस्पिटल के ऑर्थो डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हेड विकास सक्सेना ने बताया कि इस यूनिट से हर साल एक हजार से अधिक बच्चों को फायदा मिलने की संभावना है. जन्मजात हड्डी संबंधी समस्याएं, दुर्घटनाओं में लगी चोटें और ऑर्थोपेडिक बीमारियों से पीड़ित बच्चों का इलाज अब बेहतर तरीके से हो सकेगा. उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि समय पर इलाज मिलने से बच्चों को भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से भी बचाया जा सकेगा. अस्पताल में शुरू हुई इस नई सुविधा को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में भी खुशी का माहौल है. लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी. अब बच्चों के इलाज के लिए महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी.

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Monali Paul

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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ग्रेटर नोएडा. अब बच्चों के इलाज के लिए लोगों को प्राइवेट अस्पतालों के महंगे खर्च और लंबी भागदौड़ का सामना कम करना पड़ेगा. जिम्स हॉस्पिटल में बच्चों के लिए एडवांस पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक सर्जरी यूनिट की शुरुआत की गई है. इस नई हाईटेक सुविधा के शुरू होने से हड्डियों और जोड़ों से जुड़ी गंभीर समस्याओं से जूझ रहे बच्चों को अब सरकारी अस्पताल में ही आधुनिक इलाज मिल सकेगा. जिम्स के निदेशक डॉ. ब्रिगेडियर राकेश गुप्ता ने बताया कि नई यूनिट में बच्चों की सर्जरी के लिए आधुनिक मशीनें और अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए हैं, जिनकी मदद से जटिल ऑपरेशन भी आसानी से किए जा सकेंगे. उन्होंने बताया की यूनिट में हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक ड्रिल सिस्टम, पीडियाट्रिक हिप प्लेटिंग सेट, स्मॉल बोन ड्रिल सिस्टम और पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक इंस्ट्रूमेंट्स जैसी आधुनिक सुविधाएं स्थापित की गई हैं. इन उपकरणों के आने से बच्चों की हड्डियों की सर्जरी पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित और बेहतर तरीके से हो सकेगी. खास बात यह है कि इन सेवाओं का लाभ आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को भी मिलेगा, जो अब तक महंगे प्राइवेट अस्पतालों में इलाज कराने को मजबूर थे.

देश में मेडिकल डिवाइस की तेजी से बढ़ रही है मांग 

उन्होंने कहा कि देश में मेडिकल डिवाइस की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन अभी भी बड़ी मात्रा में उपकरण विदेशों से मंगाने पड़ते हैं. ऐसे में सरकार मेडिकल सेक्टर को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास कर रही है. उन्होंने कहा कि सेक्टर-28 में मेडिकल डिवाइस पार्क विकसित करने की योजना पर भी काम चल रहा है, जिससे आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ेगी और आधुनिक तकनीक आसानी से उपलब्ध हो सकेगी. उन्होंने यह भी कहा कि हमारा उद्देश्य है कि हर जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि लोगों को इलाज के लिए बड़े शहरों या निजी अस्पतालों पर निर्भर न रहना पड़े.  जिम्स हॉस्पिटल के ऑर्थो डिपार्टमेंट के प्रोफेसर हेड विकास सक्सेना ने बताया कि इस यूनिट से हर साल एक हजार से अधिक बच्चों को फायदा मिलने की संभावना है. जन्मजात हड्डी संबंधी समस्याएं, दुर्घटनाओं में लगी चोटें और ऑर्थोपेडिक बीमारियों से पीड़ित बच्चों का इलाज अब बेहतर तरीके से हो सकेगा. उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए बताया कि समय पर इलाज मिलने से बच्चों को भविष्य में होने वाली गंभीर परेशानियों से भी बचाया जा सकेगा. अस्पताल में शुरू हुई इस नई सुविधा को लेकर मरीजों और उनके परिजनों में भी खुशी का माहौल है. लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पताल में आधुनिक मशीनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की सुविधा मिलने से गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों को बड़ी राहत मिलेगी. अब बच्चों के इलाज के लिए महंगे प्राइवेट अस्पतालों के चक्कर लगाने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी.

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नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…और पढ़ें

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