sugar health risks | sugar health problems | अत्यधिक चीनी के नुकसान | शुगर से होने वाली बीमारियां |

Last Updated:April 05, 2026, 15:26 IST Sugar Health Risks: अगर आप भी हर छोटी खुशी में मीठा ढूंढते हैं या फिर चाय, कॉफी और मिठाइयों में अत्यधिक चीनी के शौकीन हैं, तो ठहर जाइए! यह स्वाद आपकी सेहत के लिए ‘मीठा जहर’ साबित हो सकता है. चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, चीनी का अत्यधिक सेवन न केवल मोटापे को दावत देता है, बल्कि यह शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे लिवर, हृदय और मस्तिष्क को भी अंदरूनी रूप से खोखला कर देता है. आइए विस्तार से समझते हैं कि क्यों आज से ही आपको अपनी डाइट में चीनी की मात्रा को नियंत्रित करने की जरूरत है. चीनी के अधिक सेवन का सबसे पहला और सीधा असर हमारे रक्त शर्करा (Blood Sugar) के स्तर पर पड़ता है. शोध बताते हैं कि ज्यादा चीनी का सेवन शरीर में इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है. जब कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति प्रतिक्रिया देना बंद कर देती हैं, तो रक्त में शर्करा का स्तर अनियंत्रित हो जाता है. यही स्थिति आगे चलकर टाइप-2 मधुमेह का कारण बनती है. मधुमेह रोगियों के लिए तो चीनी का सेवन जानलेवा तक हो सकता है. चीनी में कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है, लेकिन इसमें फाइबर, विटामिन या मिनरल्स जैसे आवश्यक पोषक तत्व बिल्कुल नहीं होते. इसे ‘एम्प्टी कैलोरी’ कहा जाता है. जब हम अधिक चीनी खाते हैं, तो यह शरीर में अतिरिक्त फैट के रूप में जमा होने लगती है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है और व्यक्ति मोटापे का शिकार हो जाता है. क्या आपको लगता है कि सिर्फ नमक से ब्लड प्रेशर बढ़ता है? ऐसा नहीं है. अधिक चीनी का सेवन शरीर में सूजन और ट्राईग्लिसराइड्स (खून में मौजूद वसा) के स्तर को बढ़ा देता है. यह स्थिति हाई ब्लड प्रेशर को जन्म देती है, जो सीधे तौर पर दिल की बीमारियों और हार्ट अटैक के जोखिम को बढ़ाती है. ब्लड प्रेशर के मरीजों को हमेशा चिकित्सक की सलाह पर ही चीनी का सेवन करना चाहिए. Add News18 as Preferred Source on Google चीनी का एक बड़ा हिस्सा लिवर द्वारा संसाधित किया जाता है. जब हम बहुत अधिक चीनी खाते हैं, तो हमारा लिवर इसे फैट में बदलने लगता है. समय के साथ यह फैट लिवर में जमा होने लगता है, जिससे नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर की गंभीर समस्या पैदा हो सकती है. लिवर के मरीजों को इस मामले में विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है. बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि चॉकलेट खाने से दांत खराब होते हैं. इसके पीछे का विज्ञान यह है कि चीनी दांतों के हानिकारक बैक्टीरिया के लिए भोजन का काम करती है. इससे बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो दांतों के इनेमल को नष्ट कर कैविटी और टूथ डिके (सड़न) का कारण बनते हैं. चीनी केवल शारीरिक नहीं बल्कि मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी घातक है. चिकित्सक बताते हैं कि चीनी के अत्यधिक सेवन से मस्तिष्क के रसायनों में असंतुलन पैदा हो सकता है. यह डिप्रेशन (अवसाद), चिंता और एकाग्रता में कमी का एक बड़ा कारण बन सकता है. मानसिक शांति और बेहतर फोकस के लिए चीनी का सीमित सेवन अनिवार्य है. First Published : April 05, 2026, 15:26 IST
ट्रक की टक्कर से 3 गायों की मौत:बैल मृत साथियों को उठाने का प्रयास करता दिखा, वीडियो वायरल

शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र में एक सड़क हादसे में तीन गायों की मौत हो गई। स्टेशन रोड पर तेज रफ्तार ट्रक ने इन गायों को कुचल दिया। इस घटना के बाद एक वीडियो सामने आया है, जिसमें एक बैल मृत गायों को उठाने का प्रयास करता दिख रहा है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया। बदरवास निवासी ऋषि भारती (25) ने थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह करीब 7 बजे स्टेशन रोड पर ट्रक क्रमांक UP78CN7825 के चालक ने लापरवाही से वाहन चलाते हुए तीन गायों को टक्कर मार दी। हादसे में तीनों गायों की मौके पर ही मौत हो गई। निखिल बैरागी, अमित जैन और अमित यादव सहित कई प्रत्यक्षदर्शियों ने इस घटना को देखा। हादसे के तुरंत बाद स्थानीय लोगों ने पशु अस्पताल को सूचित किया। इसी बीच, घटना का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसने कई लोगों को भावुक कर दिया। वीडियो में एक बैल मृत पड़ी गायों के पास खड़ा दिखाई देता है और उन्हें बार-बार उठाने की कोशिश करता है। यह दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो वह अपने साथियों को जीवित करने का प्रयास कर रहा हो। पुलिस ने शिकायत के आधार पर अज्ञात ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है। मामले की जांच शुरू कर दी गई है।
शरीर के लिए वरदान है मल्टीग्रेन आटा, घर पर इन 5 चीजों से करें तैयार, कई समस्याएं हो जाएंगी दूर

Last Updated:April 05, 2026, 14:11 IST Multigrain Flour Benefits: मल्टीग्रेन आटा कई अनाजों के मिश्रण से तैयार होता है और यह शरीर को जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है. डाइटिशियन की मानें तो मल्टीग्रेन आटा पाचन सुधारने, वजन कंट्रोल करने और ब्लड शुगर स्टेबल बनाए रखने में मदद करता है. घर पर आसानी से तैयार किया गया यह आटा सेहत सुधारने में कारगर साबित हो सकता है. मल्टीग्रेन आटा डायबिटीज के मरीजों के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. Homemade Multigrain Atta Benefits: हमारे शरीर को रोज कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है और ये पोषक तत्व हमें खान-पान से मिलते हैं. आज के समय में खराब खान-पान के कारण लोगों में पोषण की कमी हो जाती है. इसकी वजह से कई बीमारियां पैदा हो रही हैं. अगर आप बीमारियों से बचना चाहते हैं, तो हेल्दी डाइट अपनाना बेहद जरूरी है. मल्टीग्रेन आटा एक ऐसा ही विकल्प है, जो कई अनाजों के मिश्रण से तैयार होता है और शरीर को भरपूर पोषण प्रदान करता है. इसे घर पर आसानी से तैयार करके आप अपनी सेहत को बेहतर बना सकते हैं. अगर आप डायबिटिक हैं, तो यह आटा आपके लिए वरदान है. क्या होता है मल्टीग्रेन आटा? नोएडा के डाइट मंत्रा क्लीनिक की डाइटिशियन कामिनी सिन्हा ने News18 को बताया कि मल्टीग्रेन आटा एक से ज्यादा अनाजों को मिलाकर बनाया जाता है. मल्टीग्रेन आटे में गेहूं, जौ, बाजरा, रागी और चना जैसी चीजों को मिलाया जाता है. हर अनाज अपने-अपने पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिससे यह आटा फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स का अच्छा सोर्स बन जाता है. यह सामान्य गेहूं के आटे की तुलना में ज्यादा पौष्टिक होता है और लंबे समय तक एनर्जी प्रदान करता है. अगर आप क्रोनिक डिजीज से जूझ रहे हैं, तब भी यह आटा आपके शरीर को मजबूती प्रदान करता है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. घर पर कैसे बनाएं मल्टीग्रेन आटा? डाइटिशियन ने बताया कि आप घर पर ही आसानी से 5 मुख्य चीजों से मल्टीग्रेन आटा तैयार कर सकते हैं. इसके लिए आपको गेहूं, जौ, बाजरा, रागी और चना की जरूरत होती है. जौ को पाचन के लिए बेहतर माना जाता है. बाजरा कैल्शियम और फाइबर से भरपूर होता है. रागी आयरन और हड्डियों के लिए लाभकारी है, जबकि चना प्रोटीन का बढ़िया सोर्स है. इन सभी अनाजों को अच्छी तरह साफ करके हल्का भून लें और फिर चक्की में पिसवा लें. आप अपनी जरूरत के अनुसार इनका अनुपात तय कर सकते हैं, लेकिन गेहूं की मात्रा थोड़ी अधिक रखना बेहतर रहता है. मल्टीग्रेन आटे के हेल्थ बेनिफिट्स एक्सपर्ट की मानें तो मल्टीग्रेन आटा कई स्वास्थ्य समस्याओं को दूर करने में मदद करता है. इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाता है और कब्ज की समस्या से राहत देता है. यह ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में मदद करता है, जिससे डायबिटीज के मरीजों के लिए भी यह फायदेमंद हो सकता है. यह वजन घटाने में सहायक होता है और लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस कराता है. इस आटे में मौजूद मिनरल्स जैसे कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम हड्डियों को मजबूत बनाते हैं. फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट्स दिल को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं. यह कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है और हार्ट डिजीज से बचाता है. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 14:11 IST
गर्मियों में अमृत है गन्ने का रस! ऊर्जा से भरपूर… पाचन को रखता है फिट, जानें इसके कई फायदे

Last Updated:April 05, 2026, 13:26 IST Benefits of Sugarcane Juice: गर्मियों की तपती धूप में शरीर को ठंडक और तुरंत ऊर्जा देने वाले पेय की मांग तेजी से बढ़ जाती है. ऐसे में गन्ने का रस लोगों की पहली पसंद बनकर उभरता है, क्योंकि यह न सिर्फ सस्ता और आसानी से उपलब्ध है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी कई फायदे देता है. आयुर्वेद में भी इसे शरीर को ठंडक देने और ऊर्जा बढ़ाने वाला प्राकृतिक पेय माना गया है. वैद्य मालती देवी के अनुसार अगर गन्ने का रस साफ-सफाई का ध्यान रखते हुए पिया जाए तो यह शरीर के लिए बेहद लाभकारी साबित हो सकता है. यह गर्मी में होने वाली कमजोरी, डिहाइड्रेशन और पाचन से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करता है. हालांकि उन्होंने यह भी सलाह दी है कि हमेशा स्वच्छ स्थान से ताजा रस ही पिएं और मधुमेह के मरीज सेवन से पहले डॉक्टर की राय जरूर लें. गर्मी का मौसम आते ही शरीर को ठंडक और ऊर्जा की जरूरत बढ़ जाती है. तेज धूप, लू और पसीने की वजह से शरीर जल्दी थक जाता है, और पानी की कमी भी हो जाती है. ऐसे में गन्ने का रस एक सस्ता प्राकृतिक और सेहतमंद पेय माना जाता है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान वैद्य मालती देवी बताती है कि अगर सही तरीके से गन्ने का रस पिया जाए तो यह शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद साबित होता है. मालती देवी बताती है कि सबसे बड़ा फायदा यह है कि गन्ने का रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देता है. इसमें प्राकृतिक शुगर (ग्लूकोज) होती है, जो शरीर में जल्दी अवशोषित होकर ऊर्जा प्रदान करती है गर्मी में जब कमजोरी या चक्कर जैसा महसूस होता है, तब एक गिलास गन्ने का रस तुरंत राहत देता है. मालती देवी बताती है कि गन्ने का रस गर्मियों में शरीर को ठंडा रखने के लिए एक बेहतरीन प्राकृतिक पेय है. यह शरीर के तापमान को संतुलित बनाए रखने में मदद करता है और तेज गर्मी के असर को कम करता है. जब लू चलती है, तब गन्ने का रस शरीर को अंदर से ठंडक देता है और हीट स्ट्रोक से बचाने में सहायक होता है. इसमें भरपूर मात्रा में पानी और प्राकृतिक शर्करा होती है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ-साथ हाइड्रेट भी रखती है. यही वजह है कि गर्मियों में गांवों से लेकर शहरों तक लोग गन्ने का रस बड़े शौक से पीते हैं और इसे अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बना लेते है. Add News18 as Preferred Source on Google वैद्य मालती देवी बताती हैं कि गन्ने का रस डिहाइड्रेशन (पानी की कमी) से बचाने में बेहद कारगर होता है. इसमें पानी की मात्रा काफी अधिक होती है, जो शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करती है. साथ ही गन्ने के रस में पोटेशियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स पाए जाते है. ये मिनरल्स शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखते हैं, जिससे कमजोरी, चक्कर और थकान जैसी समस्याएं कम होती हैं. गर्मियों में नियमित रूप से इसका सेवन करने से शरीर तरोताजा बना रहता है और पानी की कमी नहीं होने पाती. पेट के लिए फायदेमंद: वैद्य मालती देवी बताती है कि गन्ने का रस पाचन तंत्र के लिए भी काफी लाभकारी होता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व पाचन क्रिया को बेहतर बनाते हैं और कब्ज जैसी समस्याओं से राहत दिलाने में मदद करते हैं. इसके अलावा अगर किसी को पेट में जलन या एसिडिटी की परेशानी रहती है, तो गन्ने का रस उसे शांत करने में सहायक होता है. यह पेट को ठंडक पहुंचाता है और अंदरूनी गर्मी को कम करता है, जिससे व्यक्ति को आराम महसूस होता है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में इसका सेवन करने से पाचन से जुड़ी दिक्कतों में सुधार देखा जा सकता है. लिवर के लिए फायदेमंद: गन्ने का रस लिवर की सेहत के लिए भी अच्छा माना जाता है. आयुर्वेद के अनुसार यह शरीर से विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर निकालने में मदद करता है. जिससे लिवर की कार्यक्षमता बेहतर होती है. पीलिया (जॉन्डिस) के मरीजों के लिए भी गन्ने का रस लाभकारी माना जाता है, क्योंकि यह लिवर को मजबूती देता है और शरीर को जरूरी पोषण प्रदान करता है. हालांकि, डॉक्टर भी इसे सीमित मात्रा में ही पीने की सलाह देते हैं, ताकि शरीर को फायदा मिले और कोई नुकसान न हो. इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक: मालती देवी बताती है कि गन्ने का रस शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनिटी) बढ़ाने में भी मदद करता है. इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर को अंदर से मजबूत बनाते है और बीमारियों से लड़ने की ताकत देते है. नियमित रूप से सीमित मात्रा में गन्ने का रस पीने से शरीर में ऊर्जा बनी रहती है और संक्रमण का खतरा भी कम हो सकता है. यही वजह है कि गर्मियों में इसे सेहत के लिए एक फायदेमंद प्राकृतिक पेय माना जाता है. त्वचा के लिए फायदेमंद: गन्ने का रस त्वचा की सेहत के लिए भी काफी लाभकारी माना जाता है. इसमें मौजूद पोषक तत्व त्वचा को अंदर से नमी प्रदान करते हैं, जिससे त्वचा मुलायम और हाइड्रेटेड बनी रहती है. इसके नियमित सेवन से त्वचा में प्राकृतिक चमक आती है और चेहरा ताजा दिखता है. खासकर गर्मियों में होने वाली समस्याएं जैसे रूखापन, जलन और बेजान त्वचा को कम करने में गन्ने का रस मददगार साबित होता है. यह शरीर को ठंडक देने के साथ-साथ त्वचा को भी स्वस्थ बनाए रखने में सहायक है. First Published : April 05, 2026, 13:26 IST
श्योपुर में ओलावृष्टि से बर्बाद हुई फसलें:भाजपा जिलाध्यक्ष ने किया दौरा, किसानों ने की मुआवजे के लिए सर्वे की मांग

श्योपुर में जिले में शनिवार को हुई तेज ओलावृष्टि ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया। मानपुर क्षेत्र सहित कई गांवों में गेहूं की तैयार फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है, जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। कई गांवों में 100% तक नुकसान मानपुर क्षेत्र के बगडुआ, चिमल्का, भोगीका, जावदेश्वर, सोंठवा, रामबड़ोदा, इच्छाखेड़ी और जैनी गांवों में ओलों की मार से गेहूं की फसल जमीन पर गिर गई। किसानों का कहना है कि फसल कटाई के लिए पूरी तरह तैयार थी, लेकिन ओलावृष्टि ने सब कुछ नष्ट कर दिया। कई किसानों ने 100 प्रतिशत तक नुकसान होने की बात कही है। जल्द सर्वे कराकर मुआवजे का दिया आश्वासन घटना के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष शशांक भूषण ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ प्रभावित गांवों का दौरा किया। उन्होंने किसानों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और हालात का जायजा लिया। शशांक भूषण ने किसानों को भरोसा दिलाया कि नुकसान का जल्द सर्वे कराया जाएगा और उन्हें उचित मुआवजा दिलाने की कोशिश की जाएगी। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही कई समस्याओं से जूझ रहे हैं, ऐसे में यह आपदा उनके लिए और कठिनाई लेकर आई है। पूर्व जिलाध्यक्ष ने खेतों में जाकर देखी फसल नायब तहसीलदार टी.एस. लकड़ा ने बताया कि फसल के पूरी तरह सूखने का इंतजार किया जा रहा है। इसके बाद विधिवत सर्वे शुरू किया जाएगा और रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी, ताकि किसानों को राहत मिल सके। इस दौरान पूर्व जिलाध्यक्ष सुरेंद्र जाट और पूर्व विधायक ब्रजराज सिंह चौहान भी मौजूद रहे। उन्होंने खेतों में जाकर फसल की स्थिति देखी और किसानों को हर संभव मदद का भरोसा दिया। ओलावृष्टि से हुए भारी नुकसान ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर प्रशासन पर है कि सर्वे और मुआवजे की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है।
दतिया हाईवे पर सड़क हादसे में युवक की मौत:डोंगरपुर निवासी सुमित अहिरवार की पहचान, कार डिवाइडर पार कर गलत साइड से आई

दतिया में ग्वालियर-झांसी हाईवे पर शनिवार शाम एक सड़क दुर्घटना में एक युवक की मौत हो गई। मृतक की पहचान देर रात डोंगरपुर निवासी 19 वर्षीय सुमित पुत्र पंजाब सिंह अहिरवार के रूप में हुई है। कोतवाली पुलिस के अनुसार, सुमित दतिया से अपने गांव डोंगरपुर लौट रहा था। असनई चौराहे के पास उसकी तेज रफ्तार कार अनियंत्रित हो गई। कार डिवाइडर पार करते हुए रॉन्ग साइड में जा घुसी और सामने से आ रहे एक वाहन से उसकी जोरदार भिड़ंत हो गई। हादसा इतना भीषण था कि कार के परखच्चे उड़ गए और उसमें सवार सुमित की मौके पर ही मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि यह हादसा शाम करीब 5 बजे हुआ था। झांसी की ओर से ग्वालियर जा रही कार अचानक चालक का संतुलन बिगड़ने से डिवाइडर से टकराई और उछलकर दूसरी लेन में पहुंच गई थी। सूचना मिलते ही डायल 112 और एंबुलेंस मौके पर पहुंची। घायल युवक को तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। दुर्घटना के समय युवक की पहचान नहीं हो पाई थी। पुलिस ने बताया कि दुर्घटनाग्रस्त कार का नंबर DL 9 CAC 0603 है, जो राजकुमार सोनी के नाम पर दर्ज है। हादसे में शामिल दूसरा वाहन एक क्रेन (क्रमांक MP 07 GA 9144) था, जिसका चालक वाहन छोड़कर मौके से फरार हो गया।
स्कूल बसों का लंदन जैसा हाईटेक नेटवर्क तेलंगाना में:एक रूट के कई स्कूलों के लिए साझा बस, खास एप से जुड़ेंगे पेरेंट्स, स्कूल-ऑपरेटर

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का हाईटेक इलाका ‘साइबराबाद’ अब बड़े बदलाव की दहलीज पर है। अक्सर ट्रैफिक जाम व स्कूल छोड़ते वक्त होने वाली अफरा-तफरी से जूझने वाले इस क्षेत्र के लिए साइबराबाद पुलिस और ‘सोसाइटी फॉर साइबराबाद सिक्योरिटी काउंसिल’ (एससीएससी) ने ‘लंदन ट्रांसपोर्ट मॉडल’ से प्रेरित मास्टरप्लान तैयार किया है। नए ‘स्टूडेंट मोबिलिटी सिस्टम’ का मकसद जाम खत्म करना, बच्चों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना, माता-पिता का तनाव घटाने के साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के मौके भी पैदा करना भी है। साइबराबाद पुलिस कमिश्नर डॉ. एम. रमेश बताते हैं, ‘हाईटेक सिटी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा स्कूल जाने वाले बच्चों और उन्हें छोड़ने जाने वाले निजी वाहनों का होता है। क्षेत्र के अधिकांश स्कूल अपनी बस सेवा नहीं देते। इस वजह से पेरेंट्स निजी वाहनों से बच्चों को छोड़ते हैं, ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है।’ डॉ. रमेश ने कहा, पुलिस खास एप विकसित कर रही है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म अभिभावकों, स्कूलों और बस ऑपरेटरों को एक सूत्र में पिरोएगा। हालांकि इस ‘गेम-चेंजर’ एप का नाम अभी तय होना बाकी है, क्योंकि अधिकारी सभी हितधारकों की राय लेकर प्रभावी नाम रखना चाहते हैं।’ योजना का सबसे महत्वाकांक्षी हिस्सा बसों की संख्या में बढ़ोतरी है। वर्तमान में चलने वाली 3 हजार स्कूल बसों के बेड़े को बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस का मानना है कि जब छात्र असुरक्षित निजी वाहनों या माता-पिता की गाड़ियों के बजाय इस साझा बस सेवा इस्तेमाल करेंगे, तो निजी वाहनों का बोझ कम होगा। अनुमान है कि इससे ट्रैफिक जाम में 30% तक की कमी आएगी। डॉ. रमेश बताते हैं, ‘प्रोजेक्ट में सामाजिक भागीदारी पर भी फोकस है। इसमें स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। बसों में स्थायी अटेंडेंट के साथ-साथ ‘होम पिक-अप’ की सुविधा भी होगी, जिससे स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे। बच्चों की सुरक्षा के लिए ड्राइवरों और अटेंडेंट का सख्त पुलिस वेरिफिकेशन और खास ट्रेनिंग जरूरी होगी। एआई से रूटिंग, पुलिस कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी रहेगी सिस्टम को हाईटेक बनाने के लिए एआई और जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) की मदद ली जा रही है। एआई से विश्लेषण होगा कि किस क्षेत्र के छात्र किस स्कूल में जा रहे हैं। उसी आधार पर स्मार्ट रूटिंग की जाएगी। इससे एक ही क्षेत्र के कई स्कूलों के लिए साझा बस रूट तैयार किए जा सकेंगे। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। सिस्टम की सुरक्षा लंदन के ‘ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन’ मॉडल पर आधारित होगी। सीसीटीवी और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से बसों लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। इसकी सीधी कनेक्टिविटी पुलिस कंट्रोल रूम से रहेगी ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
इंदौर में युवक ने लगाई फांसी:दुकान से घर पहुंचा, फिर फंदे पर झूल गया, छोटे भाई ने परिवार को बताया

इंदौर के निरंजनपुर में रहने वाले एक युवक ने फांसी लगा ली। वह रात में किराना दुकान से अपने घर आया और यह कदम उठा लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। लसूड़िया पुलिस के मुताबिक, 20 वर्षीय नयन पिता राम सिंह राय ने अपने घर में फांसी लगा ली। रिश्तेदारों ने बताया कि नयन रात में अपनी दुकान से घर पहुंचा था। करीब रात साढ़े नौ बजे उसके भाई मयंक ने उसे फंदे पर लटका हुआ देखा। नयन को फंदे से उतारने पर उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बताया कि कमरे से किसी तरह का सुसाइड नोट नहीं मिला। पत्नी नहीं थी घर पर परिवार के अनुसार, नयन ने करीब एक साल पहले ही इलाके में रहने वाली युवती से प्रेम विवाह किया था। जब वह घर पहुंचा, तब उसकी पत्नी मायके में थी। वहीं, माता-पिता एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। पुलिस के मुताबिक, संभवतः पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी, जिसके बाद नयन ने यह कदम उठाया। फिलहाल, परिवार के बयान के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
क्या मटके का पानी सेहत के लिए फायदेमंद? इस बारे में क्या है आयुर्वेद की राय, एक्सपर्ट से समझ लीजिए

Last Updated:April 05, 2026, 12:09 IST Benefits of Clay Pot Water: गर्मी में अगर आप मटका का पानी पिएंगे, तो सेहत को फायदा होगा. आयुर्वेद के अनुसार मटके का पानी न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि यह पाचन सुधारने और शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह गर्मियों में हाइड्रेशन और मिनरल्स की कमी को पूरा करने का सुरक्षित उपाय है. मटका का पानी सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. Benefits of Matka Water: गर्मी में एक तरह जहां फ्रिज का चलन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं कई लोग मटका का पानी पीना पसंद करते हैं. मटका नेचुरल तरीके से पानी को ठंडा रखता है और टेस्टी बना देता है. मटका मिट्टी से बना होता है और प्राचीन काल से ही पानी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. आयुर्वेद के अनुसार मटके का पानी सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पेट की सेहत भी सुधार सकता है. अगर आप भी फ्रिज का पानी पीना पसंद नहीं करते हैं, तो बाजार से मटका खरीद लाइए और गर्मियों में ठंडे पानी का लाभ उठाइए. यूपी के अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और आयुर्वेदाचार्य डॉ. पीयूष माहेश्वरी ने News18 को बताया कि मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है. मिट्टी की सतह में मौजूद छोटे-छोटे छिद्र पानी को शुद्ध और ठंडा बनाते हैं. आयुर्वेद में इसे शरीर की गर्मी को संतुलित करने और पाचन तंत्र को शांत करने वाला माना जाता है. खासकर गर्मियों में मटके का पानी पीना शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है और प्यास बुझाने में मदद करता है. मटके का पानी न केवल शरीर को ठंडक प्रदान करता है, बल्कि पाचन और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और प्राकृतिक मिनरल्स प्राप्त करने का एक सुरक्षित और असरदार माध्यम है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. आयुर्वेद के अनुसार मटके के पानी में कुछ मिनरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम प्राकृतिक रूप में हल्की मात्रा में मौजूद रहते हैं. ये मिनरल्स हार्ट, मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. आयुर्वेद में इसे शुद्ध जल का स्रोत माना गया है, जो शरीर को एनर्जी और ताकत प्रदान करता है. मटके का पानी पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करता है. खाली पेट मटके का पानी पीने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और भोजन आसानी से पचता है. इसे डिटॉक्सिफिकेशन के लिए भी उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में जमा अतिरिक्त गर्मी और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. मटके का पानी पानी के अन्य साधारण स्रोतों की तुलना में अधिक ठंडा और ताज़ा लगता है. मिट्टी में प्राकृतिक फिल्ट्रेशन होने के कारण यह पानी कुछ हद तक शुद्ध रहता है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मटके का पानी हमेशा साफ और स्वच्छ हो. गंदे मटके या लंबा रखा पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. मटके का पानी पीते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. मटके को हमेशा साफ रखें और हर दिन पानी बदलें. यदि पानी लंबे समय तक रखा हो या मटके में किसी तरह का फफूंद या बदबू हो, तो उसे इस्तेमाल न करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 12:09 IST
मुफ्त में एचपीवी वैक्सीनेशन से होगी बेटियों की रक्षा, सर्वाइकल कैंसर से होगा बचाव, अंबाला में शुरू हुआ अभियान

Last Updated:April 05, 2026, 11:49 IST महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के खतरे को खत्म करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण अभियान को गति दे दी है. इस अभियान के तहत वे सभी किशोरियाँ पात्र हैं जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष से कम हैं. क्योंकि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ख़बरें फटाफट अंबालाः बेटियों की मुस्कान को सुरक्षित रखने और उनके भविष्य को बीमारी के साये से बचाने के लिए अम्बाला में एक संवेदनशील और सराहनीय पहल शुरू हुई है. दरअसल महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के खतरे को खत्म करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण अभियान को गति दे दी है. बता दें कि इस अभियान के तहत वे सभी किशोरियाँ पात्र हैं जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष से कम हैं. क्योंकि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ऐसे में मर्क एंड कंपनी द्वारा निर्मित गार्डासिल 4 टीका इस संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है, जिसे भारत सरकार ने कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद मंजूरी दी है. सर्वाइकल कैंसर के रोकथाम में कारगर साबित होगा टीकाकरण वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला सिविल सर्जन डॉ. रेनू बेरी पजनी ने बताया कि भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले महिलाओं में काफी ज्यादा बढ़ रहे हैं, जिसकी रोकथाम को लेकर भारत सरकार ने प्रदेश भर के जिलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण का अभियान तेजी चला दिया है. उन्होंने बताया कि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे आम कैंसर बन चुका है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ऐसे में टीकाकरण इस संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है, जिसे भारत सरकार ने कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद मंजूरी दी है. बताया कि यह टीकाकरण अंबाला जिले के नागरिक अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी सभी जगह पर उपलब्ध हैं. वैसे निजी अस्पतालों में यह टीका लगभग 12000 रूपये में लगता है जोकि काफी महंगा होता है. लेकिन सरकारी कार्यक्रम के तहत यह सभी पात्र किशोरियों को निःशुल्क लगाया जा रहा है. अगले तीन महीनों तक चलने वाले इस अभियान में प्रत्येक पात्र किशोरी को टीके की केवल एक ही खुराक दी जाएगी. यह एक टीका जहां सर्वाइकल कैंसर से किशोरियों की रक्षा करेगा तो वही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है. 31 मार्च तक अंबाला जिले में 139 किशोरियों को यह वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जोकि काफी ज्यादा पहले से बेहतर महसूस कर रही है. सहमति और डिजिटल प्रमाण पत्र वहीं मिली जानकारी के अनुसार टीकाकरण के लिए OTP आधारित सहमति या अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य है. टीकाकरण के बाद लाभार्थी की जानकारी ऑनलाइन U-WIN पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक लिंक भेजा जाएगा, जिससे डिजिटल प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकेगा. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 11:49 IST









