स्कूल बसों का लंदन जैसा हाईटेक नेटवर्क तेलंगाना में:एक रूट के कई स्कूलों के लिए साझा बस, खास एप से जुड़ेंगे पेरेंट्स, स्कूल-ऑपरेटर

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद का हाईटेक इलाका ‘साइबराबाद’ अब बड़े बदलाव की दहलीज पर है। अक्सर ट्रैफिक जाम व स्कूल छोड़ते वक्त होने वाली अफरा-तफरी से जूझने वाले इस क्षेत्र के लिए साइबराबाद पुलिस और ‘सोसाइटी फॉर साइबराबाद सिक्योरिटी काउंसिल’ (एससीएससी) ने ‘लंदन ट्रांसपोर्ट मॉडल’ से प्रेरित मास्टरप्लान तैयार किया है। नए ‘स्टूडेंट मोबिलिटी सिस्टम’ का मकसद जाम खत्म करना, बच्चों की सुरक्षा को अभेद्य बनाना, माता-पिता का तनाव घटाने के साथ स्थानीय समुदाय के लिए रोजगार के मौके भी पैदा करना भी है। साइबराबाद पुलिस कमिश्नर डॉ. एम. रमेश बताते हैं, ‘हाईटेक सिटी और आसपास के इलाकों में ट्रैफिक का बड़ा हिस्सा स्कूल जाने वाले बच्चों और उन्हें छोड़ने जाने वाले निजी वाहनों का होता है। क्षेत्र के अधिकांश स्कूल अपनी बस सेवा नहीं देते। इस वजह से पेरेंट्स निजी वाहनों से बच्चों को छोड़ते हैं, ट्रैफिक का दबाव बढ़ता है।’ डॉ. रमेश ने कहा, पुलिस खास एप विकसित कर रही है। यह डिजिटल प्लेटफॉर्म अभिभावकों, स्कूलों और बस ऑपरेटरों को एक सूत्र में पिरोएगा। हालांकि इस ‘गेम-चेंजर’ एप का नाम अभी तय होना बाकी है, क्योंकि अधिकारी सभी हितधारकों की राय लेकर प्रभावी नाम रखना चाहते हैं।’ योजना का सबसे महत्वाकांक्षी हिस्सा बसों की संख्या में बढ़ोतरी है। वर्तमान में चलने वाली 3 हजार स्कूल बसों के बेड़े को बढ़ाकर 15 हजार करने का लक्ष्य रखा गया है। पुलिस का मानना है कि जब छात्र असुरक्षित निजी वाहनों या माता-पिता की गाड़ियों के बजाय इस साझा बस सेवा इस्तेमाल करेंगे, तो निजी वाहनों का बोझ कम होगा। अनुमान है कि इससे ट्रैफिक जाम में 30% तक की कमी आएगी। डॉ. रमेश बताते हैं, ‘प्रोजेक्ट में सामाजिक भागीदारी पर भी फोकस है। इसमें स्थानीय स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं, आशा और आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं को जोड़ा जाएगा। बसों में स्थायी अटेंडेंट के साथ-साथ ‘होम पिक-अप’ की सुविधा भी होगी, जिससे स्थानीय महिलाओं के लिए रोजगार और अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे। बच्चों की सुरक्षा के लिए ड्राइवरों और अटेंडेंट का सख्त पुलिस वेरिफिकेशन और खास ट्रेनिंग जरूरी होगी। एआई से रूटिंग, पुलिस कंट्रोल रूम से कनेक्टिविटी रहेगी सिस्टम को हाईटेक बनाने के लिए एआई और जीआईएस (जियोग्राफिक इंफॉर्मेशन सिस्टम) की मदद ली जा रही है। एआई से विश्लेषण होगा कि किस क्षेत्र के छात्र किस स्कूल में जा रहे हैं। उसी आधार पर स्मार्ट रूटिंग की जाएगी। इससे एक ही क्षेत्र के कई स्कूलों के लिए साझा बस रूट तैयार किए जा सकेंगे। इससे समय और ईंधन दोनों की बचत होगी। सिस्टम की सुरक्षा लंदन के ‘ट्रांसपोर्ट फॉर लंदन’ मॉडल पर आधारित होगी। सीसीटीवी और कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से बसों लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। इसकी सीधी कनेक्टिविटी पुलिस कंट्रोल रूम से रहेगी ताकि आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।
इंदौर में युवक ने लगाई फांसी:दुकान से घर पहुंचा, फिर फंदे पर झूल गया, छोटे भाई ने परिवार को बताया

इंदौर के निरंजनपुर में रहने वाले एक युवक ने फांसी लगा ली। वह रात में किराना दुकान से अपने घर आया और यह कदम उठा लिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है। लसूड़िया पुलिस के मुताबिक, 20 वर्षीय नयन पिता राम सिंह राय ने अपने घर में फांसी लगा ली। रिश्तेदारों ने बताया कि नयन रात में अपनी दुकान से घर पहुंचा था। करीब रात साढ़े नौ बजे उसके भाई मयंक ने उसे फंदे पर लटका हुआ देखा। नयन को फंदे से उतारने पर उसकी सांसें चल रही थीं, लेकिन अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार के लोगों ने बताया कि कमरे से किसी तरह का सुसाइड नोट नहीं मिला। पत्नी नहीं थी घर पर परिवार के अनुसार, नयन ने करीब एक साल पहले ही इलाके में रहने वाली युवती से प्रेम विवाह किया था। जब वह घर पहुंचा, तब उसकी पत्नी मायके में थी। वहीं, माता-पिता एक कार्यक्रम में शामिल होने गए थे। पुलिस के मुताबिक, संभवतः पति-पत्नी के बीच किसी बात को लेकर कहासुनी हुई थी, जिसके बाद नयन ने यह कदम उठाया। फिलहाल, परिवार के बयान के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
क्या मटके का पानी सेहत के लिए फायदेमंद? इस बारे में क्या है आयुर्वेद की राय, एक्सपर्ट से समझ लीजिए

Last Updated:April 05, 2026, 12:09 IST Benefits of Clay Pot Water: गर्मी में अगर आप मटका का पानी पिएंगे, तो सेहत को फायदा होगा. आयुर्वेद के अनुसार मटके का पानी न केवल शरीर को ठंडक देता है, बल्कि यह पाचन सुधारने और शरीर से टॉक्सिन्स निकालने में मदद करता है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह गर्मियों में हाइड्रेशन और मिनरल्स की कमी को पूरा करने का सुरक्षित उपाय है. मटका का पानी सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. Benefits of Matka Water: गर्मी में एक तरह जहां फ्रिज का चलन तेजी से बढ़ रहा है, वहीं कई लोग मटका का पानी पीना पसंद करते हैं. मटका नेचुरल तरीके से पानी को ठंडा रखता है और टेस्टी बना देता है. मटका मिट्टी से बना होता है और प्राचीन काल से ही पानी रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है. आयुर्वेद के अनुसार मटके का पानी सेहत के लिए भी फायदेमंद माना जाता है. यह न सिर्फ शरीर को ठंडक देता है, बल्कि पेट की सेहत भी सुधार सकता है. अगर आप भी फ्रिज का पानी पीना पसंद नहीं करते हैं, तो बाजार से मटका खरीद लाइए और गर्मियों में ठंडे पानी का लाभ उठाइए. यूपी के अलीगढ़ आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर और आयुर्वेदाचार्य डॉ. पीयूष माहेश्वरी ने News18 को बताया कि मटके का पानी प्राकृतिक रूप से ठंडा रहता है. मिट्टी की सतह में मौजूद छोटे-छोटे छिद्र पानी को शुद्ध और ठंडा बनाते हैं. आयुर्वेद में इसे शरीर की गर्मी को संतुलित करने और पाचन तंत्र को शांत करने वाला माना जाता है. खासकर गर्मियों में मटके का पानी पीना शरीर को अंदर से ठंडक पहुंचाता है और प्यास बुझाने में मदद करता है. मटके का पानी न केवल शरीर को ठंडक प्रदान करता है, बल्कि पाचन और स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. सही तरीके से इस्तेमाल करने पर यह गर्मियों में शरीर को हाइड्रेटेड रखने और प्राकृतिक मिनरल्स प्राप्त करने का एक सुरक्षित और असरदार माध्यम है. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. आयुर्वेद के अनुसार मटके के पानी में कुछ मिनरल्स जैसे कैल्शियम, मैग्नीशियम और पोटैशियम प्राकृतिक रूप में हल्की मात्रा में मौजूद रहते हैं. ये मिनरल्स हार्ट, मांसपेशियों और हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होते हैं. आयुर्वेद में इसे शुद्ध जल का स्रोत माना गया है, जो शरीर को एनर्जी और ताकत प्रदान करता है. मटके का पानी पित्त और कफ को संतुलित करने में मदद करता है. खाली पेट मटके का पानी पीने से पाचन तंत्र सक्रिय होता है और भोजन आसानी से पचता है. इसे डिटॉक्सिफिकेशन के लिए भी उपयोगी माना जाता है, क्योंकि यह शरीर में जमा अतिरिक्त गर्मी और विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है. मटके का पानी पानी के अन्य साधारण स्रोतों की तुलना में अधिक ठंडा और ताज़ा लगता है. मिट्टी में प्राकृतिक फिल्ट्रेशन होने के कारण यह पानी कुछ हद तक शुद्ध रहता है. हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि मटके का पानी हमेशा साफ और स्वच्छ हो. गंदे मटके या लंबा रखा पानी स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है. मटके का पानी पीते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. मटके को हमेशा साफ रखें और हर दिन पानी बदलें. यदि पानी लंबे समय तक रखा हो या मटके में किसी तरह का फफूंद या बदबू हो, तो उसे इस्तेमाल न करें. About the Author अमित उपाध्याय अमित उपाध्याय News18 Hindi की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 12:09 IST
मुफ्त में एचपीवी वैक्सीनेशन से होगी बेटियों की रक्षा, सर्वाइकल कैंसर से होगा बचाव, अंबाला में शुरू हुआ अभियान

Last Updated:April 05, 2026, 11:49 IST महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के खतरे को खत्म करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण अभियान को गति दे दी है. इस अभियान के तहत वे सभी किशोरियाँ पात्र हैं जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष से कम हैं. क्योंकि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ख़बरें फटाफट अंबालाः बेटियों की मुस्कान को सुरक्षित रखने और उनके भविष्य को बीमारी के साये से बचाने के लिए अम्बाला में एक संवेदनशील और सराहनीय पहल शुरू हुई है. दरअसल महिलाओं में तेजी से बढ़ रहे सर्वाइकल कैंसर के खतरे को खत्म करने के उद्देश्य से स्वास्थ्य विभाग ने जिलेभर में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) संक्रमण के खिलाफ टीकाकरण अभियान को गति दे दी है. बता दें कि इस अभियान के तहत वे सभी किशोरियाँ पात्र हैं जिन्होंने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली है और 15 वर्ष से कम हैं. क्योंकि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर दूसरा सबसे आम कैंसर है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ऐसे में मर्क एंड कंपनी द्वारा निर्मित गार्डासिल 4 टीका इस संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है, जिसे भारत सरकार ने कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद मंजूरी दी है. सर्वाइकल कैंसर के रोकथाम में कारगर साबित होगा टीकाकरण वहीं लोकल 18 को ज्यादा जानकारी देते हुए अंबाला सिविल सर्जन डॉ. रेनू बेरी पजनी ने बताया कि भारत में सर्वाइकल कैंसर के मामले महिलाओं में काफी ज्यादा बढ़ रहे हैं, जिसकी रोकथाम को लेकर भारत सरकार ने प्रदेश भर के जिलों में ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (HPV) टीकाकरण का अभियान तेजी चला दिया है. उन्होंने बताया कि भारत में महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर सबसे आम कैंसर बन चुका है, जिसका मुख्य कारण HPV संक्रमण है. ऐसे में टीकाकरण इस संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी और सुरक्षित उपाय है, जिसे भारत सरकार ने कड़े वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद मंजूरी दी है. बताया कि यह टीकाकरण अंबाला जिले के नागरिक अस्पताल और सीएचसी, पीएचसी सभी जगह पर उपलब्ध हैं. वैसे निजी अस्पतालों में यह टीका लगभग 12000 रूपये में लगता है जोकि काफी महंगा होता है. लेकिन सरकारी कार्यक्रम के तहत यह सभी पात्र किशोरियों को निःशुल्क लगाया जा रहा है. अगले तीन महीनों तक चलने वाले इस अभियान में प्रत्येक पात्र किशोरी को टीके की केवल एक ही खुराक दी जाएगी. यह एक टीका जहां सर्वाइकल कैंसर से किशोरियों की रक्षा करेगा तो वही इसका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं है. 31 मार्च तक अंबाला जिले में 139 किशोरियों को यह वैक्सीन लगाई जा चुकी है, जोकि काफी ज्यादा पहले से बेहतर महसूस कर रही है. सहमति और डिजिटल प्रमाण पत्र वहीं मिली जानकारी के अनुसार टीकाकरण के लिए OTP आधारित सहमति या अभिभावकों की लिखित सहमति अनिवार्य है. टीकाकरण के बाद लाभार्थी की जानकारी ऑनलाइन U-WIN पोर्टल पर दर्ज की जाएगी और पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एक लिंक भेजा जाएगा, जिससे डिजिटल प्रमाण पत्र डाउनलोड किया जा सकेगा. About the Author Rajneesh Kumar Yadav मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें First Published : April 05, 2026, 11:49 IST
ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसिक रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रेवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैक्कार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैक्कार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। अमेरिका ने निकलने से पहले अपने दो विमान जलाए द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से एक बचाए गए अमेरिकी एयरमैन और कमांडो को निकालने वाले दो ट्रांसपोर्ट विमान वहीं फंस गए थे। इसके बाद अमेरिका को तीन नए विमान भेजने पड़े, ताकि एयरमैन और सैनिकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में अमेरिकी सेना ने उन फंसे हुए ट्रांसपोर्ट विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ईरान के अंदर से आई तस्वीरों से संकेत मिलता है कि ये विमान एक अस्थायी एयरस्ट्रिप पर फंस गए थे, जिसे अमेरिकी सेना ने देश के एक दूरदराज इलाके में बनाया था। न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, इस पूरे रेस्क्यू मिशन में सैकड़ों स्पेशल ऑपरेशंस सैनिक शामिल थे। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बचाए गए वेपन्स ऑफिसर को रेस्क्यू के बाद इलाज के लिए कुवैत ले जाया गया। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए। —————————- ये खबर भी पढ़ें… 23 साल बाद दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट:ट्रम्प का ईरानी आसमान पर कब्जे का दावा गलत; अब तक अमेरिका के 7 विमान तबाह ईरान जंग के एक महीने बाद ट्रम्प ने 2 अप्रैल को अमेरिकी जनता को संबोधित किया। 19 मिनट के भाषण में उन्होंने दावा किया कि अमेरिका ने ईरान की हवाई सेना को तबाह कर दिया है और
ईरान के पहाड़ों में छिपा था अमेरिकी पायलट:24 घंटे में दुश्मन के बीच से बचाया, ट्रम्प बोले- यह इतिहास का सबसे साहसी रेस्क्यू ऑपरेशन

अमेरिका के एक F-15 फाइटर जेट को ईरान के ऊपर मार गिराए जाने के बाद उसके दोनों क्रू मेंबर्स को अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने बचा लिया है। शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने दर्जनों लड़ाकू विमानों के साथ ईरान में ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। इस दौरान भारी गोलीबारी हुई, लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने इसे अमेरिकी इतिहास का सबसे साहसी सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन करार दिया है। पैराशूट से उतरने के बाद घायल हुआ था अफसर अमेरिकी वेबसाइट एक्सियोस ने 3 अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि ईरान ने शुक्रवार को F-15 विमान गिरा दिया था। उसमें दो लोग थे। एक पायलट और एक वेपन सिस्टम ऑफिसर (जो हथियारों को ऑपरेट करता है)। पायलट को कुछ घंटों के भीतर ही बचा लिया गया था। लेकिन दूसरा क्रू मेंबर, जो वेपन सिस्टम ऑफिसर था, पैराशूट से उतरने के बाद घायल हो गया। चोट लगने के बावजूद वह चलने की हालत में था। इसके बाद वह ईरान के पहाड़ी इलाके में छिप गया और वहां एक दिन से ज्यादा समय तक पकड़ से बचता रहा। उसने अपनी SERE ट्रेनिंग (जिंदा रहना, बचना, विरोध करना और निकलना) का इस्तेमाल करते हुए कोहगिलुयेह और बोयर-अहमद प्रांत के कठिन पहाड़ी इलाके में खुद को छिपाए रखा। CIA ने अफवाह फैलाकर ईरान को भटकाया अमेरिका और ईरान दोनों उसे ढूंढ रहे थे। ईरान की IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड) भी उसे पकड़ने के लिए वहां पहुंच गई थी। दूसरे अधिकारी को ढूंढना बहुत मुश्किल था। इसके लिए CIA ने एक चाल चली। उन्होंने ईरान के अंदर गलत जानकारी फैलाई कि अमेरिकी सेना उसे पहले ही ढूंढ चुकी है और उसे निकालने की तैयारी कर रही है। इससे ईरान की खोज की दिशा भटक गई। इसी दौरान CIA ने अपनी खास तकनीक का इस्तेमाल करके उस अधिकारी की सही लोकेशन पता कर ली। यह लोकेशन पेंटागन, अमेरिकी सेना और व्हाइट हाउस को दी गई। इसके बाद राष्ट्रपति ट्रम्प ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन का आदेश दिया। अफसर के पास सिर्फ 1 पिस्तौल थी शनिवार को स्पेशल कमांडो यूनिट ने भारी हवाई सुरक्षा के साथ ऑपरेशन चलाया। अमेरिकी लड़ाकू विमानों ने ईरानी फोर्स को उस इलाके तक पहुंचने से रोकने के लिए हमले भी किए। घायल अफसर के पास सिर्फ एक पिस्तौल थी। जब अमेरिकी फोर्स उस एयरमैन तक पहुंचने लगी, तब गोलीबारी भी हुई। लेकिन अंत में अमेरिकी टीम अधिकारी को सुरक्षित निकालने में सफल रही और सभी सैनिक ईरान से बाहर आ गए। अमेरिका के पूर्व सेना अधिकारी मेजर जनरल (रिटायर्ड) मार्क मैककार्ली ने CNN से कहा कि जिस इलाके में यह घटना हुई, वह पहाड़ी था और पूरी तरह सुनसान था। इसके साथ ही ईरान की तरफ से उस सैनिक को पकड़ने पर इनाम भी घोषित किया गया था। इन सभी हालात को देखते हुए यह मिशन बेहद खतरनाक था। मैककार्ली ने यह भी बताया कि उस सैनिक की लोकेशन एक इमरजेंसी बीकन (सिग्नल देने वाला उपकरण) के जरिए पता चली होगी। जब फाइटर जेट गिरता है, तो यह बीकन लगातार कमांड सेंटर को लोकेशन भेजता रहता है। पहली बार दुश्मन ने गिराया अमेरिकी फाइटर जेट इस रेस्क्यू मिशन की शुरुआत शुक्रवार को हुई, जब F-15E स्ट्राइक ईगल विमान को ईरान की सेना ने मार गिराया। यह इस एक महीने से चल रही जंग में पहला मौका था, जब किसी अमेरिकी फाइटर जेट को दुश्मन की फायरिंग से गिराया गया। F-15E विमान में दो लोग थे, जो इजेक्ट होकर बाहर निकले। पायलट को जल्दी बचा लिया गया, लेकिन वेपन्स सिस्टम ऑफिसर का पता नहीं चल पाया, जिससे तुरंत बड़े स्तर पर खोज अभियान शुरू किया गया। हालांकि, मिशन के दौरान एक बड़ी रुकावट भी आई। दो ट्रांसपोर्ट विमान, जो कमांडो और एयरमैन को निकालने वाले थे, ईरान के एक दूरदराज बेस पर खराब हो गए। इसके बाद तीन नए विमान भेजे गए। अमेरिकी फोर्स ने उन खराब विमानों को उड़ा दिया, ताकि वे ईरान के हाथ न लगें। ट्रम्प बोले- पहली बार एक साथ दो सफल रेस्क्यू ऑपरेशन हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने कहा कि इस सैनिक को बचाने के लिए अमेरिकी सेना ने दर्जनों विमान भेजे, जिनमें दुनिया के सबसे खतरनाक हथियार लगे थे। उन्होंने बताया कि सैनिक घायल जरूर हुआ है, लेकिन वह ठीक हो जाएगा। ट्रम्प ने यह भी कहा कि यह ऑपरेशन एक और पायलट के सफल रेस्क्यू के बाद हुआ, जिसे एक दिन पहले बचाया गया था। उस समय इसकी जानकारी इसलिए नहीं दी गई थी, ताकि दूसरे ऑपरेशन पर खतरा न आए। ट्रम्प के मुताबिक, सैन्य इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि दुश्मन के इलाके के अंदर, दो अमेरिकी पायलटों को अलग-अलग ऑपरेशन में सुरक्षित निकाला गया है। उन्होंने कहा कि यह साबित करता है कि अमेरिका का ईरान के आसमान पर पूरा दबदबा है, हालांकि उन्होंने यह नहीं बताया कि F-15 जेट को ईरान ने कैसे मार गिराया। ट्रम्प ने इस ऑपरेशन को पूरे अमेरिका के लिए गर्व का पल बताया और कहा कि देश को इस पर एकजुट होना चाहिए।
जयारोग्य न्यूरोसर्जरी ओपीडी में छत का प्लास्टर गिरा:ओपीडी शुरू होने से पहले हादसा; ग्वालियर में अस्पताल की 50 साल पुरानी इमारत

ग्वालियर के जयारोग्य अस्पताल समूह (जेएएच) की न्यूरोसर्जरी ओपीडी में ओपीडी शुरू होने से ठीक पहले शनिवार को छत का भारी प्लास्टर गिर गया। घटना न्यूरोसर्जरी विभाग के कमरा नंबर 1 में हुई, जहां विभागाध्यक्ष की ओपीडी लगनी थी। उस समय मरीज और डॉक्टर मौजूद थे, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ। प्लास्टर जूनियर डॉक्टरों के बैठने की जगह के ठीक पीछे गिरा। घटना के समय वहां कोई डॉक्टर मौजूद नहीं था, जिससे बड़ा हादसा टल गया। 60 से 80 साल पुराने भवन जर्जर जेएएच के न्यूरोसर्जरी-न्यूरोलॉजी और केआरएच भवन 60 से 80 साल पुराने हैं। जर्जर हालत के कारण यहां अक्सर प्लास्टर और छज्जे टूटकर गिरते रहते हैं। 2 अप्रैल 2026 को कमलाराजा अस्पताल में छज्जे का बड़ा हिस्सा गिरा था। प्रभावित क्षेत्र को पहले ही बंद कर दिया गया था, इसलिए कोई घायल नहीं हुआ। चार साल में 11 बार भेजे गए प्रस्ताव अस्पताल प्रबंधन ने भवन मरम्मत और वायरिंग बदलने के लिए पिछले चार साल में 11 बार शासन को प्रस्ताव भेजे हैं। अभी तक कार्य शुरू नहीं हुआ है। गायनिक और पीडियाट्रिक विभागाध्यक्ष एक साल पहले नए भवन की मांग कर चुके हैं। डीन डॉ. आरकेएस धाकड़ ने पुनर्निर्माण प्रक्रिया तेज होने की बात कही है। 5 मार्च 2026 को न्यूरोलॉजी वार्ड, 12 मार्च को न्यूरोसर्जरी वार्ड और 30 मार्च को शौचालय में प्लास्टर गिरा। इन घटनाओं में भी कोई घायल नहीं हुआ। 2024 से अब तक कई संरचनात्मक हादसे 4 जुलाई 2024 को एसएनसीयू की फॉल्स सीलिंग और 27 दिसंबर 2025 को गलियारे की बीम गिरी थी। 25 फरवरी 2026 को लेबर रूम के शौचालय की दीवार धंस गई थी। 2022 के फायर ऑडिट में फायर सेफ्टी सिस्टम में कई खामियां मिली थीं। सुधार के लिए प्रस्ताव भेजे गए, लेकिन कार्रवाई लंबित है।
चुनावी रेवड़ियों से राज्यों का कर्ज बढ़ रहा:लाड़ली बहना के कारण MP का कर्ज रेड लाइन में, महाराष्ट्र में राशन किट योजना बंद

चुनाव में फ्री राशन, महिलाओं को नकदी जैसी ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ वाली योजनाएं राज्यों के लिए बड़ा बोझ बन रही हैं। हालत यह है कि इनको पूरा करने के लिए राज्य न पर्याप्त संसाधन जुटा पा रहे हैं और न संतुलित बजट बना पा रहे हैं। कुछ राज्यों में तो इन घोषणाओं का बोझ कुल राजस्व प्राप्तियों के 30 से 40% तक पहुंच गया है। हिमाचल जैसे छोटे राज्य में नकदी संकट की विकट स्थिति है। राज्य में सीएम, मंत्री, विधायकों समेत अफसरों के वेतन-पेंशन टालने पड़े। तेलंगाना को चुनावी घोषणाओं के लिए हर साल 1 लाख करोड़ चाहिए, पर बजट की कमी से कई योजनाएं अटकी हैं। मप्र में लाड़ली बहना योजना के चलते GSDP के मुकाबले कर्ज 27% से बढ़कर 32% पहुंच गया। महाराष्ट्र में लाडकी बहिन योजना के दबाव के कारण त्योहारों में मिलने वाली राशन किट योजना बंद कर दी गई है। एक्सपर्ट कमेंट… कैश ट्रांसफर जैसे चुनावी वादे जारी रहे तो भले देश की इकोनॉमी बेहतर रहे, पर राज्य डिफॉल्ट कर सकते हैं। हिमाचल के जैसे ही दूसरे राज्य भी खर्च में कटौती कर रहे हैं। डॉ. अमरजीत सिंह सेठी, इंडियन एसोसिएशन फॉर रिसर्च इन नेशनल इनकम एंड वेल्थ के एडिटर संकट क्यों: घोषणाएं ज्यादा, कमाई कम
एक गलती से बढ़ेगा पित्त-कफ! बैसाख में अपनाएं ये देसी डाइट प्लान, एक्सपर्ट से समझें सब

कोरबा : 3 अप्रैल से बैसाख महीने की शुरुआत हो चुकी है जो की 1 मई तक चलेगा.बैसाख माह वसंत के अंत एवं ग्रीष्म की शुरुआत का संक्रमणकाल है.इस अवधि में मौसम धीरे‑धीरे गरम व शुष्क होता है, जिससे कफ‑पित्त दोनो दोष असंतुलित हो सकते हैं और संक्रामक रोगों की सम्भावना बढ़ती है.आयुर्वेदिक विशेषज्ञ डॉ. नागेंद्र नारायण शर्मा, जो छत्तीसगढ़ के प्रख्यात नाड़ी वैद्य हैं, उन्होंने इस ऋतु में विशेष आहार‑विधान की महत्ता को बताया. वनस्पति तेल से परहेज, बेल‑सत्तू को प्राथमिकताडॉ. शर्मा के अनुसार, बैसाख माह मे भारी, तेलीय व मसालेदार भोजन से बचना चाहिए.वनस्पति तेल शरीर में कफ को बढ़ाता है और पित्त दोष को असंतुलित कर देता है.इस समय तेल‑रहित, हल्का एवं ताजा भोजन ही स्वास्थ्य के लिये लाभदायक है. वहीं, बेल साबूदाना और सत्तू को इस माह के प्रमुख पोषक माना गया है.बेल में आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो गर्मी में शरीर को ऊर्जा प्रदान करते हैं.सत्तू में प्रोटीन, फाइबर और आयरन की भरपूर मात्रा होती है, जिससे पाचन‑तंत्र मजबूत रहता है और शारीरिक शक्ति बनी रहती है. क्या खाएंजौ, दलिया, चावल, मक्क, मोंठ, मूंग, चना, तुअर दाल,बेल, संतरा, तरबूज, खरबुज, आम, मौसंबी, सेव, लौकी, ककड़ी, कद्दू, हरा धनिया, तरोई, करेला, जिमीकंद, सहजन की फली, पुदीना, चौलाई,जीरा, सूखा धनिया, मीठा नीम, हल्दी, इलायची, पतली दालचीनी.इन पदार्थों में जल संतुलन, एंटी‑ऑक्सीडेंट और पाचन‑सहायक गुण होते हैं, जो गर्मी के तापमान से शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं.गर्म मौसम में पर्याप्त मात्रा में शुद्ध पानी एवं नारियल पानी सेवन करें, जिससे डिहाइड्रेशन से बचाव होगा.खाने में हल्का व ताज़ा रखना, देर रात का भोजन न करना और बासी भोजन से पूरी तरह परहेज करना चाहिए. क्या न खाएंवनस्पति तेल, बाजरा, पुराना गेहूँ, उड़द दाल, मसूर, साथ ही मेथी, बैंगन, मूली, फूल‑गोभी, पत्ता‑गोभी, अरबी, पपीते तथा अधिक तीखा‑तेज़ मसालेदार व्यंजन.इनसे कफ‑पित्त की वृद्धि, अपच, उल्टी और डिहाइड्रेशन की शंका बढ़ती है. डॉ. शर्मा ने बताया की बैसाख में आयुर्वेदिक नियमों का पालन कर हम न केवल संक्रमण‑रोगों से बच सकते हैं, बल्कि शरीर को संतुलित रख कर गर्मी के सत्र में ऊर्जा भी बनाए रख सकते हैं.बेल, सत्तू और मौसमी फल‑सब्जियों को अपने थाली में शामिल कर स्वस्थ बेसाख का आनंद उठाएं.
बड़वानी में नबालिग लड़किया कराया जा रहा सीवरेज का काम:उम्र 11 से 12 साल के बीच, खोदी गई सड़क की कर रही थीं मरम्मत

बड़वानी में सीवरेज के काम में बाल मजदूरी का मामला सामने आया है। जिला मुख्यालय के योग माया मंदिर रोड पर एक सीवरेज कंपनी द्वारा नाबालिग बच्चों से काम करवाया जा रहा था। यह घटना शनिवार रात को सामने आई, जहां बच्चों से चैंबर बनाने और खोदी गई सड़क को फिर से बनाने का भारी काम लिया जा रहा था। मौके पर नाबालिग बच्चियां सड़क निर्माण और मरम्मत के कार्य में लगी हुई थीं। बताया गया कि ठेकेदार कम मजदूरी देने के लालच में इन नाबालिगों से काम करवा रहे हैं। इस संबंध में तस्वीरें और वीडियो भी सामने आए हैं। जब मीडिया ने काम कर रहे बच्चों से उनकी उम्र जाननी चाही, तो मौके पर मौजूद ठेकेदार ने उन्हें वहां से भगा दिया। एक बच्ची के पिता से पूछने पर उसने अपनी बेटी की उम्र 11-12 साल बताई, लेकिन ठेकेदार ने उसे भी चुप करा दिया। ठेकेदार ने दावा किया कि बच्ची अपनी मर्जी से काम करने आती है। पांच से सात बच्चियां कर रही थीं काम नगर पालिका नेता प्रतिपक्ष राकेश सिंह जाधव ने बताया कि उन्हें देर रात सीवरेज के काम में पांच से सात नाबालिग बच्चों से बाल श्रम करवाने की जानकारी मिली थी। शनिवार रात को उन्होंने मौके पर जाकर जायजा लिया, जहां नाबालिग बच्चों से गैंती-पावड़े उठाकर काम करवाया जा रहा था। जाधव के पहुंचने पर ठेकेदार ने बच्चों को वहां से भगा दिया। जाधव ने यह भी आरोप लगाया कि पूरे शहर में सीवरेज का घटिया काम किया जा रहा है। इस मामले में श्रम विभाग और जिला प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि खुलेआम हो रही बाल मजदूरी पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।









