1 करोड़ बरामदगी पर 20 लाख हड़पने का आरोप:गुना पुलिस से हाईकोर्ट ने मांगी स्टेटस रिपोर्ट; पूछा-फरियादी का बयान दर्ज हुआ या नहीं

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने गुना जिले की पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए नाराजगी जताई है। गुना पुलिस पर गुजरात को कुछ व्यापारियों के एक करोड़ रुपए की बरामदगी के दौरान 20 लाख रुपए हड़पने का आरोप लगा है। गुना पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर लगाई गई याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रूख अपनाया है। कोर्ट ने राज्य शासन से पूछा है कि फरियादी का बयान दर्ज किया गया है या नहीं। इस संबंध में 20 अप्रैल तक स्टेटस रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। गुना में 1 करोड़ कैश पकड़कर 20 लाख में डील का आरोप ग्वालियर रेंज के गुना जिले की पुलिस 19-20 मार्च की दरमियानी रात नेशनल हाइवे-46 के टोल नाका रूठियाई पुलिस चौकी के पास वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान गुजरात पासिंग नंबर GJ 05 RK-9351 की एक स्कॉर्पियो को रोका गया, जो किसी जीरा कारोबारी की बताई जा रही थी। गाड़ी की तलाशी के दौरान उसमें नोटों के बंडल मिले। गाड़ी से मिले पैसे की कुल कीमत करीब एक करोड़ रुपए बताई गई। आरोप है कि इतनी बड़ी राशि पकड़े जाने के बाद नियमों के तहत आयकर विभाग या वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने के बजाय मौके पर मौजूद पुलिस टीम ने सेटलमेंट का रास्ता चुना। पुलिस और व्यापारी के बीच 20 लाख रुपए में डील फाइनल हुई। पुलिस ने कथित तौर पर 20 लाख रुपए अपने पास रख लिए और बाकी 80 लाख रुपए के साथ कारोबारी को जाने दिया। इस मामले में हंगामा उस समय मचा जब गुजरात के एक आईपीएस अधिकारी का फोन गुना पुलिस के पास पहुंचा। इसके बाद रात को आईजी-डीआईजी व एसपी एक्टिव हुए और तत्काल थाना प्रभारी समेत चार पुलिसकर्मी सस्पेंड कर दिए गए। याचिका पर सुनवाई में यह निकला निष्कर्ष अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने बताया कि मामला 19 मार्च 2026 को गुना पुलिस द्वारा गुजरात के व्यापारियों से एक करोड़ रुपए की बरामदगी के दौरान 20 हजार रुपए हड़पने के आरोप से जुड़ा है। इस प्रकरण में खुद को फरियादी बताते हुए नीरज जादौन ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। याचिकाकर्ता का आरोप है कि उसे कथित तौर पर उठाकर थाने लाया गया, जहां पुलिस अधिकारियों ने उसके साथ मारपीट और टॉर्चर किया। आरोप है कि पुलिस ने दबाव बनाकर अपने मुताबिक बयान दर्ज कराए और जबरन हस्ताक्षर करवाए। रिहा होने के बाद उसने मेडिकल परीक्षण (ए) कराया, जिसमें शरीर पर चार गंभीर चोटें पाई गईं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अवधेश सिंह भदौरिया ने कोर्ट में तर्क दिया कि पुलिस बड़े अधिकारियों को बचाने के लिए मामले में लीपापोती कर रही है और फरियादी का वास्तविक बयान दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने मांग की कि बयान दोबारा वकील की मौजूदगी में और वीडियोग्राफी के साथ दर्ज किया जाए। साथ ही दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो। वहीं राज्य शासन की ओर से उपस्थित एडिशनल एडवोकेट जनरल विवेक खेड़कर ने दलील दी कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि फरियादी का बयान दर्ज हुआ भी है या नहीं, ऐसे में याचिका विचार योग्य नहीं है।
मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा

मध्य प्रदेश में विभागीय अफसरों की लापरवाही से होने वाली सरकार की फजीहत और मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था तय की है। इसमें सरकार की सम्पत्ति की सुरक्षा के साथ मुख्य सचिव को कोर्ट में घसीटने से बचाने पर फोकस किया है। सभी विभाग प्रमुखों और विभागाध्यक्षों से सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि कोर्ट के मामले में पक्षकार के रूप में मुख्य सचिव का नाम हटाए जाने की कार्यवाही कराना है क्योंकि मुख्य सचिव किसी विभाग के भारसाधक सचिव नहीं होते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए जारी ताजा निर्देशों में कहा है कि विभाग के सचिव और कलेक्टर की यह जिम्मेदारी होगी कि वह यह देखें कि जिन मामलों में मुख्य सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाकर राज्य शासन के विरुद्ध कोर्ट में केस या याचिका लगाई जाती है उसमें समय पर मुख्य सचिव का नाम हटाने का काम कराया जाए। जीएडी ने इसको लेकर जारी निर्देश में कहा है कि सभी विभागों द्वारा मध्यप्रदेश राज्य मुकदमा प्रबंधन नीति 2018 के अनुरूप कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी और सेवा विवादों से संबंधित अभ्यावेदनों का समय पर निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा। कोर्ट में पक्ष रखने विधि अधिकारियों, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति करें निर्देशों में यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष तेजी से रखने के लिए राज्य के विधि अधिकारियों को तथा सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जानी चाहिए। अगर किसी मामले में कानूनी जटिलता हो और किसी और को अधिवक्ता नियुक्त किया जाना हो तो ऐसा प्रस्ताव विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन के साथ विधि विभाग को भेजा जाएगा। इसमें प्रशासनिक विभाग द्वारा उनके नाम और सेवा शर्तों का साफ तौर पर उल्लेख किया जाएगा। इसके लिए विधि विभाग द्वारा अन्तरविभागीय समिति गठित की गई है जिसमें भारसाधक सचिव वित्त विभाग के होंगे और कमेटी के अध्यक्ष होंगे। सदस्य के रूप में भारसाधक सचिव विधि विभाग तथा संबंधित प्रशासकीय विभाग के भारसाधक सचिव शामिल किए जाएंगे। सरकार को नुकसान तो वसूली अफसर से हो जारी निर्देशों में कहा है कि अगर किसी प्रकरण में विलंब, गलती, चूक और विषय वस्तु से भिन्नता के कारण सरकार के खिलाफ आदेश जारी होता है तो विभाग की यह जिम्मेदारी होगी कि ऐसे मामले में संबंधित अफसर की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही करें और अगर सरकार को क्षति हुई है तो संबंधित अधिकारी से वसूली की जाए। इसके लिए प्रभारी अधिकारी के दायित्व तय किए गए हैं। जीएडी ने सरकारी जमीन से संबंधित मामलों को लेकर भी गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा है कि कलेक्टर और जिला प्राधिकारी अपने क्षेत्र में कोर्ट द्वारा सरकार के खिलाफ दिए गए आदेश के मामले में शासकीय अधिवक्ता से सलाह लेकर अपील पेश करेंगे। जहां कलेक्टर के सक्षम होने की स्थिति न हो, वहां विभाग प्रमुख को निर्णय के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने अवमानना के मामलों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के लिए कहा है। प्रशासनिक प्रकरणों के निराकरण के लिए नई कार्यप्रणाली लागू सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अनुसार प्रशासनिक प्रकरणों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही समयसीमा में पूरी करें। साथ ही, हर स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी निर्धारित की गई है। निर्देशों में कहा गया है कि प्रकरणों के परीक्षण के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी। यदि किसी प्रकरण में जानकारी अधूरी पाई जाती है, तो संबंधित पक्ष से तत्काल जानकारी प्राप्त कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सभी विभाग लंबित कोर्ट मामलों की नियमित समीक्षा करेंगे सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अपील, पुनरीक्षण और समीक्षा से जुड़े मामलों के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इन मामलों में निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। विशेष रूप से विलंब से प्राप्त प्रकरणों में ‘कंडोनेशन ऑफ डिले’ (विलंब क्षमा) के प्रावधानों का उचित उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी विभाग नियमित रूप से अपने लंबित प्रकरणों की समीक्षा करेंगे और उनकी प्रगति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे। साथ ही, रिकॉर्ड संधारण और दस्तावेजों के सुरक्षित रख-रखाव पर भी बल दिया गया है।
ग्वालियर में घर में घुसकर नाबालिग छात्रा से रेप:पीड़िता और उसके परिवार को जान से मारने की दी धमकी; भागने से पहले आरोपी अरेस्ट

ग्वालियर के हजीरा में एक नाबालिग छात्रा के साथ दुष्कर्म का मामला सामने आया है। आरोपी ने छात्रा और उसके परिवार को जान से मारने की भी धमकी दी। यह घटना दिसंबर 2025 में हजीरा क्षेत्र की है। बदनामी के डर से छात्रा शुरुआत में चुप रही, लेकिन इसी का फायदा उठाकर आरोपी ने उसे ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। लगातार शारीरिक शोषण से परेशान होकर छात्रा ने आखिरकार मामले की शिकायत दर्ज कराई। शुक्रवार को शिकायत मिलते ही पुलिस ने प्रकरण दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपी से पूछताछ की जा रही है। हजीरा थाना क्षेत्र निवासी 17 वर्षीय नाबालिग 12वीं की छात्रा है। छात्रा ने शिकायत की है कि दिसंबर 2025 में वह घर पर अकेली थी, तभी उसके घर में गोसपुरा नंबर एक निवासी आयुष खटीक घुस आया और उसका मोबाइल नंबर मांगा। जब नाबालिग छात्रा ने मोबाइल नंबर देने से इनकार किया तो आरोपी ने उसे जान से मारने की धमकी देकर रेप किया। घटना के बाद आरोपी उसे धमकी देकर भाग गया। बदनामी और धमकी के कारण नाबालिग चुप रही तो आरोपी उसे ब्लैकमेल कर शोषण करने लगा। अब पीड़ित नाबालिग लगातार शारीरिक शोषण से परेशान हो गई तो शुक्रवार को परिजन को आपबीती सुनाई। इसके बाद पीड़ित छात्रा हजीरा थाने पहुंची और मामले की शिकायत की। जिस पर पुलिस ने दुष्कर्म व पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है। शहर छोड़ने से पहले पकड़ा गया आरोपी वारदात के बाद आरोपी यही सोच रहा था कि पीड़िता डर के चलते पुलिस के पास नहीं जाएगी, लेकिन किसी तरह पीड़ित छात्रा पुलिस तक पहुंच गई। पुलिस ने मामला दर्ज करने से पहले ही आरोपी आयुष की तलाश शुरू कर दी। आरोपी को भी मामला दर्ज होने की भनक लग चुकी थी, वह शहर से भागने की तैयारी में था, लेकिन पुलिस ने उसके भागने से पहले ही गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी पर मारपीट, अवैध वसूली और धमकाने के कई मामले दर्ज हैं पकड़े गए आरोपी का शहर के हजीरा समेत विभिन्न थानों में अच्छा खासा अपराधिक रिकॉर्ड है। मारपीट, अवैध वसूली व धमकाने के कई मामले दर्ज हैं। यही कारण है कि पीड़िता उससे डर गई थी। हजीरा थाना प्रभारी जितेन्द्र सिंह तोमर ने बताया- एक युवक ने नाबालिग पीड़िता के घर में घुसकर जान से मारने की धमकी देकर दुष्कर्म किया है। घटना दिसंबर 2025 की है। पीड़िता ने अब मामले की शिकायत की है, जिस पर मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
Secret Trick: शबाना सैफी की इस ट्रिक से सिर्फ 1 सिटी में ही पकाए एकदम सीधे-खिले चावल, समय भी बचाए और स्वाद भी बढ़ाया

गुप्त युक्ति: अक्सर लोगों की परेशानी यह होती है कि चावल में थोड़ा-थोड़ा कुकर या तो अलग-अलग तरह से चिपक जाते हैं या फिर नीचे से जल जाते हैं। कुकर में परफेक्ट चावल बनाना एक कला है, और कुकिंग एक्सपर्ट शबाना सैफी ने इस कला को बेहद आसान बना दिया है। उनके बताए गए खास टिप्स और पानी के सही अनुपात को अपनाकर आप घर पर ही रॉयल पुलाव जैसे खिले-खिले चावल तैयार कर सकते हैं। आइए हम आपको इस लेख में स्टेप-बाय-स्टेप चावल बनाने की विधि के बारे में बताते हैं। जिससे चावल एकदम खिला-खिला रहेगा और हर दाना एक अलग सा दिखेगा। चावल की गुणवत्ता अच्छी होनी चाहिए चावल की गुणवत्ता और उसे तैयार करने का तरीका सबसे पहला कदम है।खिले-खिले चावल हमेशा अच्छी गुणवत्ता के लिए लंबे ग्रेन बासमती चावल का चयन करें।चावल बनाने से पहले कम से कम 30 मिनट तक सोखना जरूरी है। सब्सने से दाने पानी सोख लेते हैं, जिससे वे पकते समय टूटते नहीं और अपनी पूरी लंबाई तक खिलते हैं।चावल धोते समय हाथों का दबाव अलग, ताकि दानों के बीच से न टूटे। चावल बनाने का पहला स्टेप साधारण चावल को ‘स्पेशल’ बनाने के लिए उन्हें सलाद के बजाय मसाले का तड़का लगाएं। कुकर में थोड़ी सी घी या तेल गरम कर लीजिये. इसमें लौंग, छोटी और बड़ी इलायची, काली मिर्च और जीरा डाला जाता है। जैसे ही मसालों की ध्वनि आने लगे, बड़े-बड़े चावलों को कुकर में डालें। चावलों को घी में 1-2 मिनट का चित्रांकन। ऐसा करने से दानों पर घी की एक परत चढ़ जाती है, जो उन्हें बिजली से रोकती है। चावल पकाने के लिए पानी की मात्रा का ध्यान रखें कुकर में चावल खराब होने का सबसे बड़ा कारण यह है कि हम पानी कम या फिर ज्यादा ले रहे हैं। साधारण शबाना सैफी के अनुसार 2 चम्मच चावल के लिए सिर्फ 2.5 चम्मच पानी का ही उपयोग करें। ज्यादातर लोग ज्यादा पानी दाल देते हैं। चावल स्वादिष्ट हो जाते हैं। यह पोटली का फॉर्मूलेशन चावल को एकदम सटीक टेक्सास देता है। चावल पकाने का सही तरीका यही स्टेप सबसे जरूरी है। जो आपके चावलों को रेस्टोरेंट की तरह बनाएगा। पानी डाउनलोड करने के बाद तुरंत बंद न करें।कुकर को एक साधारण प्लेट से पुराने डेक और उच्च फ्लेम पर व्यंजन बनाया गया।जब ऊपर का पानी सूख जाए और चावलों की सतह दिखे, तब कुकर का असली समुद्र तट।अब केवल एक सीट पर क्लिक करें और तत्काल बंद कर दें। चावल सर्व करने से पहले ये जरूर करें शहर के बाद कुकुर को घण्टा बंद न छोड़ें। स्टीम को तुरंत हटा दिया गया और डेथ एंकर। अब एक केंट या कढ़ी की मदद से चावलों को हाथों से फुलाएं। इसके अंदर की गर्म हवा निकल जाएगी और चावल के साथ में शामिल नहीं होगा। शबाना सैफी का तरीका ये भी पढ़ें – ड्रैगन फ्रूट Vs बनाना शेक: ड्रैगन फ्रूट और बनाना शेक में कौन सबसे ज्यादा जादुई? जानिए क्या हैं फायदे
अनूपपुर में हाथियों ने खड़ी फसलें रौंदी:सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ी, 103 दिनों से मचा रहे तबाही

छत्तीसगढ़ से आए चार हाथियों ने अनूपपुर जिले में पिछले 103 दिनों से डेरा डाल रखा है। हाथियों के लगातार उत्पात और वन विभाग की सुस्ती की वजह से ग्रामीणों में भारी गुस्सा और डर का माहौल है। ये हाथी फिलहाल दो हिस्सों में बंटकर आतंक मचा रहे हैं। तीन हाथियों का दल करनपठार के जंगलों में छिपा है, जबकि एक अकेला हाथी (लोन टस्कर) जिला मुख्यालय से सिर्फ 8 किलोमीटर दूर पोंड़ी और खांड़ा के इलाकों में फसलों और मकानों को नुकसान पहुंचा रहा है। इस अकेले हाथी ने बरबसपुर के सरपंच समेत कई किसानों के खेत रौंद दिए और सिंचाई के पाइप और दीवारें भी तोड़ डालीं। वन विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग उन्हें समय पर हाथियों के आने की सूचना (मुनादी) नहीं दे रहा है। लोगों का कहना है कि अधिकारी सिर्फ दूर खड़े होकर तमाशा देखते हैं। न तो विभाग पटाखे दे रहा है और न ही सुरक्षा के कोई इंतजाम कर रहा है। मजबूर होकर ग्रामीण अपनी जान जोखिम में डालकर मशालों के सहारे हाथियों को खदेड़ रहे हैं। मौत के दो महीने बाद भी नहीं मिला मुआवजा प्रशासन की लापरवाही का एक बड़ा मामला भी सामने आया है। बरबसपुर में 12 फरवरी को हाथी के हमले (दीवार गिरने) से घायल 70 साल के रामविशाल भैना की मौत हो गई थी। इस घटना को दो महीने बीत चुके हैं, लेकिन मृतक के परिवार को अब तक सरकारी सहायता राशि नहीं मिली है। ग्रामीणों का कहना है कि विभाग न तो जान की परवाह कर रहा है और न ही नुकसान की भरपाई।
मिर्गी आने से पहले कर लेगी पता! IIT कानपुर ने बना डाली ऐसी डिवाइस, जेब में रखकर कहीं भी घूमिए

Last Updated:April 10, 2026, 22:36 IST IIT Kanpur News : ये डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती. इस डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. कानपुर. अब ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों का खतरा पहले ही पहचाना जा सकेगा. इसकी मदद से ब्रेन स्ट्रोक और मिर्गी के मरीजों की जान बचाना आसान हो जाएगा. आईआईटी कानपुर में तैयार की गई एक नई “प्वाइंट ऑफ केयर” डिवाइस दिमाग की हर गतिविधि पर नजर रखेगी और किसी भी गड़बड़ी के संकेत पहले ही दे देगी. यह डिवाइस आईआईटी कानपुर के इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर में काम कर रहे स्टार्टअप मेंटीव हेल्थ प्राइवेट लिमिटेड ने तैयार की है. स्टार्टअप के सीईओ हर्ष अरोड़ा के अनुसार, इस तकनीक का मकसद इलाज को अस्पतालों तक सीमित न रखकर सीधे मरीज तक पहुंचाना है, खासकर गांवों में. कैसे करेगी काम यह डिवाइस दिमाग की गतिविधियों को लगातार मॉनिटर करती है. इसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) का इस्तेमाल किया गया है, जिससे यह डेटा को समझकर संभावित खतरे का अंदाजा लगा सकती है. अगर मस्तिष्क में किसी तरह की असामान्य गतिविधि शुरू होती है, तो यह डिवाइस पहले ही अलर्ट दे देगी. इससे डॉक्टर समय रहते इलाज शुरू कर सकेंगे. यह डिवाइस मिर्गी के दौरे आने से पहले भी संकेत दे सकती है, जो मरीजों के लिए राहत भरी बात है. हर्ष अरोड़ा बताते हैं कि डिवाइस का लैब टेस्ट सफल रहा है और अब इसे क्लिनिकल ट्रायल के लिए भेजा गया है. आईआईटी कानपुर की लैब में इसकी टेस्टिंग अभी भी जारी है. पॉकेट में फिट इस डिवाइस की सबसे बड़ी खासियत इसका छोटा और पोर्टेबल होना है. यह पॉकेट साइज की है और पूरी तरह से चार्जेबल है, यानी मरीज इसे कहीं भी आसानी से साथ रख सकता है. हर्ष के मुताबिक, उनकी कंपनी ऐसी डिवाइसेस पर काम कर रही है जिन्हें पहनना और इस्तेमाल करना आसान हो. यही वजह है कि इसे खासतौर पर ग्रामीण इलाकों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है, जहां बड़े अस्पतालों की सुविधा आसानी से नहीं मिलती. पूरी तरह स्वदेशी इस डिवाइस को पूरी तरह भारत में तैयार किया गया है और इसकी कीमत भी विदेशी डिवाइसेस के मुकाबले काफी कम रखी जाएगी. हर्ष अरोड़ा का कहना है कि यह डिवाइस आधे से भी कम कीमत में उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका फायदा उठा सकें. इस प्रोजेक्ट को आईआईटी कानपुर और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय से फंडिंग भी मिली है, जिससे इसे आगे और बेहतर बनाने का काम चल रहा है. उम्मीद की नई किरण ब्रेन से जुड़ी बीमारियां अक्सर अचानक और खतरनाक होती हैं, लेकिन यह डिवाइस समय से पहले चेतावनी देकर मरीजों की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकती है.खा सकर गांवों में रहने वाले मरीजों के लिए यह तकनीक किसी वरदान से कम नहीं. About the Author Priyanshu Gupta Priyanshu has more than 10 years of experience in journalism. Before News 18 (Network 18 Group), he had worked with Rajsthan Patrika and Amar Ujala. He has Studied Journalism from Indian Institute of Mass Commu…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Kanpur Nagar,Uttar Pradesh First Published : April 10, 2026, 22:36 IST
Health Tips: औषधिय गुणों का खजाना है ये पेड़, जड़ से पत्ती तक सभी उपयोगी, जानें फायदे

Last Updated:April 10, 2026, 22:31 IST Neem ke Fayde: बिहार में छपरा जिले के एक अनोखा गांव है. यहां गांव में कई प्रकार के औषधीय पेड़ पौधे आसानी से मिल जाता है. जो आयुर्वेदिक नजरिया से कई मायने में लाभदायक माना जाता है. जिसका उपयोग करने से कई बीमारी से राहत मिलती है. ऐसे में आज हम आपको एक ऐसे पेड़ के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे औषधीय गुणों का भंडार माना जाता है. इसके जड़ से लेकर पत्ता तक को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है. इसे ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो जानते हैं, उसका उपयोग बीमारी के शिकार होने पर करते हैं. जिस बीमारी के लिए लोग हजारों रुपए फूंक देते हैं. उस बीमारी को गांव में मिलने वाले इस मामूली पेड़ पौधे के जड़ी बूटी से खत्म किया जा सकता है. इसी तरह अमरूद के दतुवन से मुंह धोने से दांत का हिलना ठीक हो जाता है. जबकि जामुन के दतुवन से मुंह धोने पर शुगर लेवल सामान्य रहता है. यह पेड़ पौधा आपके घर के आसपास आसानी से मिल जाएगा. आज हम बात कर रहे हैं प्रत्येक गांव में मिलने वाले औषधिय गुणों के खजाने नाम से मशहूर नीम के पेड़ के बारे में. इसके जड़ से लेकर पत्ती तक को औषधी के रूप में उपयोग किया जाता है. नीम के जड़ के छिलका का काढ़ा बनाकर पीने से घाव फुंसी नहीं होता है. इसके साथ ही इसका दातुन करने से मुंह का बदबू खत्म हो जाता है. यही नहीं, दांत का हिलना और ब्लड आना भी खत्म हो जाता है. दांत में कीड़ा नहीं लगता है. इसके दातुन करने से दांत भी साफ रहता है. चांदी की तरह चमक दांत से आता है. दांत का लाइफ बढ़ जाता है. यही वजह है कि ग्रामीण क्षेत्र के लोग जो नीम का दातुवन करते हैं. वैसे लोगों का दांत बुढ़ापे के समय तक पूरी तरह से सुरक्षित रहता है. Add News18 as Preferred Source on Google छपरा के एक्सपर्ट वीरू कुमार ने बताया कि वह बचपन से ही नीम का दतुवन करते आ रहे हैं. आज तक उनके मुंह से कभी बदबू नहीं आया है. उनका दांत चांदी की तरह हमेशा चमकता रहता है. उनके दांत से कभी ब्लड नहीं आता है. नीम के दातुवन करने से पूरे दिन मुंह अच्छा रहता है. किसी प्रकार के घाव फुंसी नहीं होती है. किसी कारणवश अगर घाव हो भी जाता है तो बहुत जल्द ठीक हो जाता है. उन्होंने बताया कि गांव में नीम के पेड़ को औषधिय गुणों का खजाना कहा जाता है. जो लोग जानते हैं. वैसे व्यक्ति कई रोग में नीम के जड़ से लेकर पत्ती तक उपयोग करते हैं, जिससे जटिल से जटिल बीमारी ठीक हो जाती है. उनके ग्रामीण क्षेत्र में आसानी से नीम का पेड़ पौधा मिल जाता है. जिसकी वजह से गांव के लोग भरपूर इसका उपयोग करते हैं. यही वजह है कि कई बीमारी से सुरक्षित रहते हैं. First Published : April 10, 2026, 22:31 IST
खड़गे बोले- महिला आरक्षण संशोधन जल्दबाजी में लाया जा रहा:सरकार आचार संहिता का उल्लंघन कर रही; लोकसभा सीटें 543 से 816 होंगी

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शुक्रवार को कहा कि सरकार महिला आरक्षण संशोधन और लोकसभा में सीटें बढ़ाने की बिल जल्दबाजी में ला रही है। उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान संसद सत्र बुलाना अचार संहिता का उल्लंघन है। सरकार बिल को जल्द से जल्द पास कराना चाहती है, ताकि आने वाले विधानसभा चुनावों में इसका फायदा मिल सके। आज दिल्ली में कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की इस मुद्दे पर बैठक हुई। इसमें खड़गे ने कहा कि अब तक सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं मिला है। जानकारी सिर्फ प्रधानमंत्री के लेटर के जरिए सामने आई है। लंबे समय तक चुप रहने के बाद अब अचानक इस मुद्दे पर सक्रियता दिखाई जा रही है। सरकार ने 16 से 18 अप्रैल तक संसद का सत्र बुलाया बुलाया है। इस दौरान संविधान संशोधन बिल लाने की तैयारी है। सरकार महिलाओं को 33% आरक्षण देने के साथ लोकसभा और विधानसभा सीटों में 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव ला सकती है। इसके तहत लोकसभा सीटें 543 से बढ़ाकर 816 हो जाएगी। बैठक की चार मुख्य बातें… इसी बीच राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि कांग्रेस महिला सशक्तिकरण और सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। CWC की बैठक में महिला आरक्षण, परिसीमन और पश्चिम एशिया के हालात पर भी चर्चा हुई। एक दिन पहले सरकार ने ड्राफ्ट को मंजूरी दी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट मीटिंग में नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन के ड्राफ्ट बिल को मंजूरी दे दी थी। इस प्रस्ताव के तहत लोकसभा की सीटें मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 की जाएंगी, जिनमें 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग बिल लाएगी सरकार राज्यों की विधानसभाओं में भी इसी अनुपात में सीटों का आरक्षण होगा। सरकार एक संशोधन बिल के एक संविधान साथ-साथ परिसीमन कानून में संशोधन के लिए अलग साधारण बिल भी लाएगी। ताकि नए सिरे से सीटों का निर्धारण हो सके। नई सीटों का निर्धारण 2027 की जनगणना के बजाय 2011 की जनगणना के आधार पर किया जा सकता है। यह कानून राज्यों की विधानसभाओं और दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, पुडुचेरी जैसे केंद्र शासित प्रदेशों में भी लागू किया जाएगा। महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 सीटें बढ़ेंगी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिला आरक्षण के बाद यूपी में सबसे ज्यादा 40 लोकसभा सीटें बढ़ेंगी। 80 से बढ़कर 120 हो जाएंगी। महाराष्ट्र में महिलाओं के लिए 24 सीटें आरक्षित हो जाएंगी। यहां लोकसभा की सीटें 48 से बढ़कर 72 हो जाएंगी। रिपोर्ट्स के मुताबिक बिहार में महिला सीटों की संख्या 20 हो सकती है। यहां कुल सीटें 40 से 60 तक पहुंच सकती है। एमपी में 15 महिला आरक्षित सीटें बढ़ सकती हैं। तमिलनाडु में 20 और दिल्ली में 4 यानी महिला सीटें होंगी। झारखंड में 7 महिला आरक्षित सीटें बढ़ने का अनुमान है। 1931 में पहली बार महिला आरक्षण का मुद्दा उठा था 1931: भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान महिला आरक्षण पर पहली बार चर्चा हुई, लेकिन प्रस्ताव अंततः खारिज कर दिया गया। बेगम शाह नवाज और सरोजिनी नायडू जैसी नेताओं ने महिलाओं को पुरुषों पर तरजीह देने के बजाय समान राजनीतिक स्थिति की मांग पर जोर दिया। 1971: भारत में महिलाओं की स्थिति पर समिति का गठन किया गया। इसके कई सदस्यों ने विधायी निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण का विरोध किया। 1974: महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ाने के लिए महिलाओं की स्थिति पर एक समिति ने शिक्षा और समाज कल्याण मंत्रालय को एक रिपोर्ट सौंपी। इसमें पंचायत और नगर निकायों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू करने की सिफारिश की 1988: राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य योजना (National Perspective Plan) ने पंचायत स्तर से संसद तक महिलाओं को आरक्षण देने की सिफारिश की। इसने पंचायती राज संस्थानों और सभी राज्यों में शहरी स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण अनिवार्य करने वाले 73वें और 74वें संविधान संशोधनों की नींव रखी। 1993: 73वें और 74वें संविधान संशोधनों में पंचायतों और नगर निकायों में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड और केरल सहित कई राज्यों ने स्थानीय निकायों में महिलाओं के लिए 50% आरक्षण लागू किया है। ————————– ये खबर भी पढ़ें… 2029 चुनाव से पहले लागू होगा 33% महिला आरक्षण:लोकसभा सीटें बढ़कर 816 होंगी, महिला सांसदों की संख्या 273 तक पहुंचेगी केंद्र सरकार 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33% आरक्षण लागू करने की तैयारी में है। इसके लिए संसद के मौजूदा सत्र में दो बिल लाए जा सकते हैं। इसके जरिए महिला आरक्षण लागू करने की मौजूदा शर्त में बदलाव किया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
बाजार में मिलने वाला आम नेचुरल तरीके से पका है या कार्बाइड से, ऐसे करें पहचान, खा सकेंगे मीठे, रसीले Mango

Ways to check the quality of mangoes: फलों का राजा आम खाने के शौकीनों की कोई कमी नहीं है. हर किसी को गर्मियों का मौसम आते ही आम का इंतजार बेसब्री से रहता है. मुख्य रूप से मई से जुलाई तक के महीने में आम मार्केट में मिलते रहते हैं. आम के कई वेरायटी हैं और सभी का रगं, आकार, स्वाद, बनावट एक-दूसरे से अलग होता है. लेकिन, आम कोई सा भी क्यों न हो, ये सेहत के लिए बेहद हेल्दी होते हैं. बाजार रंग-बिरंगे आमों से भर जाता है, लेकिन जब आप मार्केट में आम खरीदने जाते हैं तो समझ नहीं आता है कि कौन सा आम नेचुरल तरीके से पकाया गया है और कौन सा कार्बाइड से पका है. कार्बाइड से पका आम स्वास्थ्य के लिए काफी हानिकारक होता है. इससे पके आम को आप रेगुलर खाएंगे तो आपके लिवर, किडनी, आंतों पर नकारात्मक असर पड़ेगा. ऐसे में मार्केट में मिलने वाले आम कौन से हेल्दी हैं और कौन से हानिकारक, किसे नेचुरल तरीके से पकाया गया है, कौन सा मीठा और खट्टा है, ये आप इन तरीकों से पहचानें. आम की गुणवत्ता को पहचानने का तरीका -स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बाजार में बिकने वाले कई आम प्राकृतिक तरीके से नहीं, बल्कि केमिकल के जरिए जल्दी पकाए जाते हैं, जो शरीर पर गंभीर असर डाल सकते हैं. सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी. -जो आम प्राकृतिक रूप से पके होते हैं, उनमें एक खास तरह की मिठास, ताजगी भरी खुशबू होती है. इसे आप दूर से ही महसूस कर सकते हैं. वहीं, केमिकल से पकाए गए आमों में यह प्राकृतिक सुगंध लगभग न के बराबर होती है. उनका रंग भी असामान्य रूप से चमकीला पीला होता है. ये देखने में आकर्षक लगते हैं, लेकिन यह उनकी असल गुणवत्ता को छुपा सकता है. -वैज्ञानिकों के अनुसार, प्राकृतिक आम का रंग हल्का हरा और पीला होता है. ये अंदर से पूरी तरह पका होता है, जबकि कृत्रिम रूप से पकाए गए आम अक्सर बाहर से पीले और अंदर से कच्चे रह जाते हैं. -आप पानी में डालकर ये जान सकते हैं कि आप नेचुरल तरीके से पका है या नहीं. यदि आम पानी में डालते ही डूब जाता है तो आम प्राकृतिक रूप से पका है, क्योंकि ये भारी होता है. -केमिकल कार्बाइड से पकाया गया आम वजन में हल्का होता है. इसे पानी में डालेंगे तो तैरता रहेगा. केमिकल से पकाए गए आम को खाने से कई बार जीभ में जलन, गले में हल्की परेशानी महसूस हो सकती है. -कैल्शियम कार्बाइड एक खतरनाक रसायन है. अक्सर आम विक्रेता अपने फायदे के लिए इसका इस्तेमाल करके आम को जल्दी पकाने की कोशिश करते हैं. इससे एसिटिलीन नाम की गैस निकलती है, जो शरीर के लिए हानिकारक होती है. इसमें आर्सेनिक और फॉस्फोरस जैसे तत्व भी हो सकते हैं, जो लंबे समय तक शरीर में रहने पर गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं. -केमिकल से पके हुए आम को खाने से आपको दस्त, पेट दर्द, उल्टी, डायरिया, गले में जलन, मुंह में छाले जैसी समस्याएं हो सकती हैं. अधिक सेंसेटिव लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो सकती है. चक्कर आ सकता है. नींद आने में समस्या हो सकती है. लंबे समय तक ऐसे फलों का सेवन करने से लिवर और किडनी को भी नुकसान पहुंचा सकता है. ये केमिकल कैंसर के रिस्क को भी बढ़ा सकता है.
शरीर के लिए पावर बूस्टर से कम नहीं इस जानवर का दूध, गाय-भैंस से भी ज्यादा असरदार! कई बीमारियों में फायदेमंद

Last Updated:April 10, 2026, 18:50 IST Health News: फरीदाबाद के गांवों में बकरी का दूध बना सेहत और रोजगार का मजबूत सहारा. आयुर्वेद में सबसे गुणकारी माना जाने वाला यह दूध इम्युनिटी बढ़ाने पाचन सुधारने और बीमारियों में फायदेमंद है. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि इसके क्या-क्या फायदे हैं. फरीदाबाद: फरीदाबाद के गांवों में सुबह की शुरुआत अब सिर्फ खेतों से नहीं, बल्कि बकरियों की मिमियाहट और उनके दूध की बढ़ती मांग से भी होने लगी है. अरावली से सटे कोट गांव से लेकर आसपास के कई गांवों तक बकरी का दूध आज लोगों की सेहत और किसानों की आमदनी दोनों का सहारा बन चुका है. खास बात यह है कि बीमारियों के समय इस दूध की डिमांड अचानक बढ़ जाती है और लोग इसे किसी अमृत से कम नहीं मानते हैं. Local18 से बातचीत में फरीदाबाद के सर्वोदय हॉस्पिटल के आयुर्वेदिक डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि आयुर्वेद में दूध के आठ प्रकार बताए गए हैं, जिनमें बकरी का दूध सबसे गुणकारी माना जाता है. यह स्वाद में मधुर और पचने में बेहद हल्का होता है. यही वजह है कि राजस्थान, झारखंड और छत्तीसगढ़ जैसे दूरदराज इलाकों में भी इसका खूब सेवन किया जाता है. त्वचा के लिए बेहद फायदेमंदडॉ. चेतन शर्मा ने बताया कि बकरी के दूध में विटामिन A प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जो त्वचा के लिए बेहद फायदेमंद है. साथ ही यह शरीर को ताकत देता है और इम्युनिटी बढ़ाने में मदद करता है. पुराने समय से ही इसे गंभीर बीमारियों, खासकर ट्यूमर जैसी स्थितियों में भी दिया जाता रहा है. जिन बच्चों को किसी कारणवश मां का दूध नहीं मिल पाता है, उनके लिए भी बकरी का दूध एक अच्छा विकल्प माना जाता है. क्या है बकरी के दूध के फायदे?डॉ. चेतन शर्मा ने यह दूध इतना हल्का होता है कि कमजोर पाचन तंत्र वाले लोगों को भी आसानी से पच जाता है और तुरंत फायदा देता है. न्यूट्रिशन के मामले में भी यह गाय और भैंस के दूध से कहीं ज्यादा असरदार माना जाता है. डेंगू जैसी बीमारियों में प्लेटलेट्स गिरने लगते हैं. ऐसे में बकरी का दूध काफी फायदेमंद साबित होता है. डॉक्टर चेतन शर्मा बताते हैं कि नियमित सेवन से शरीर को अंदर से मजबूती मिलती है, चाहे इसे सीधे पिया जाए या चाय के रूप में लिया जाए, यह हर तरह से शरीर के लिए लाभकारी है. फरीदाबाद के गांवों में बकरी पालन अब सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि एक मजबूत रोजगार बन चुका है. कई परिवार सिर्फ बकरियों के सहारे अपना घर चला रहे हैं और उनके लिए यह दूध न सिर्फ कमाई का जरिया है, बल्कि लोगों की सेहत से जुड़ा एक भरोसा भी बन गया है. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Faridabad,Haryana First Published : April 10, 2026, 18:50 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.







