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मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा

मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा

मध्य प्रदेश में विभागीय अफसरों की लापरवाही से होने वाली सरकार की फजीहत और मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था तय की है। इसमें सरकार की सम्पत्ति की सुरक्षा के साथ मुख्य सचिव को कोर्ट में घसीटने से बचाने पर फोकस किया है। सभी विभाग प्रमुखों और विभागाध्यक्षों से सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि कोर्ट के मामले में पक्षकार के रूप में मुख्य सचिव का नाम हटाए जाने की कार्यवाही कराना है क्योंकि मुख्य सचिव किसी विभाग के भारसाधक सचिव नहीं होते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए जारी ताजा निर्देशों में कहा है कि विभाग के सचिव और कलेक्टर की यह जिम्मेदारी होगी कि वह यह देखें कि जिन मामलों में मुख्य सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाकर राज्य शासन के विरुद्ध कोर्ट में केस या याचिका लगाई जाती है उसमें समय पर मुख्य सचिव का नाम हटाने का काम कराया जाए। जीएडी ने इसको लेकर जारी निर्देश में कहा है कि सभी विभागों द्वारा मध्यप्रदेश राज्य मुकदमा प्रबंधन नीति 2018 के अनुरूप कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी और सेवा विवादों से संबंधित अभ्यावेदनों का समय पर निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा। कोर्ट में पक्ष रखने विधि अधिकारियों, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति करें निर्देशों में यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष तेजी से रखने के लिए राज्य के विधि अधिकारियों को तथा सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जानी चाहिए। अगर किसी मामले में कानूनी जटिलता हो और किसी और को अधिवक्ता नियुक्त किया जाना हो तो ऐसा प्रस्ताव विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन के साथ विधि विभाग को भेजा जाएगा। इसमें प्रशासनिक विभाग द्वारा उनके नाम और सेवा शर्तों का साफ तौर पर उल्लेख किया जाएगा। इसके लिए विधि विभाग द्वारा अन्तरविभागीय समिति गठित की गई है जिसमें भारसाधक सचिव वित्त विभाग के होंगे और कमेटी के अध्यक्ष होंगे। सदस्य के रूप में भारसाधक सचिव विधि विभाग तथा संबंधित प्रशासकीय विभाग के भारसाधक सचिव शामिल किए जाएंगे। सरकार को नुकसान तो वसूली अफसर से हो जारी निर्देशों में कहा है कि अगर किसी प्रकरण में विलंब, गलती, चूक और विषय वस्तु से भिन्नता के कारण सरकार के खिलाफ आदेश जारी होता है तो विभाग की यह जिम्मेदारी होगी कि ऐसे मामले में संबंधित अफसर की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही करें और अगर सरकार को क्षति हुई है तो संबंधित अधिकारी से वसूली की जाए। इसके लिए प्रभारी अधिकारी के दायित्व तय किए गए हैं। जीएडी ने सरकारी जमीन से संबंधित मामलों को लेकर भी गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा है कि कलेक्टर और जिला प्राधिकारी अपने क्षेत्र में कोर्ट द्वारा सरकार के खिलाफ दिए गए आदेश के मामले में शासकीय अधिवक्ता से सलाह लेकर अपील पेश करेंगे। जहां कलेक्टर के सक्षम होने की स्थिति न हो, वहां विभाग प्रमुख को निर्णय के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने अवमानना के मामलों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के लिए कहा है। प्रशासनिक प्रकरणों के निराकरण के लिए नई कार्यप्रणाली लागू सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अनुसार प्रशासनिक प्रकरणों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही समयसीमा में पूरी करें। साथ ही, हर स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी निर्धारित की गई है। निर्देशों में कहा गया है कि प्रकरणों के परीक्षण के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी। यदि किसी प्रकरण में जानकारी अधूरी पाई जाती है, तो संबंधित पक्ष से तत्काल जानकारी प्राप्त कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सभी विभाग लंबित कोर्ट मामलों की नियमित समीक्षा करेंगे सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अपील, पुनरीक्षण और समीक्षा से जुड़े मामलों के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इन मामलों में निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। विशेष रूप से विलंब से प्राप्त प्रकरणों में ‘कंडोनेशन ऑफ डिले’ (विलंब क्षमा) के प्रावधानों का उचित उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी विभाग नियमित रूप से अपने लंबित प्रकरणों की समीक्षा करेंगे और उनकी प्रगति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे। साथ ही, रिकॉर्ड संधारण और दस्तावेजों के सुरक्षित रख-रखाव पर भी बल दिया गया है।

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मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा

मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के निर्देश:GAD ने जारी की गाइडलाइन, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति के लिए कहा

मध्य प्रदेश में विभागीय अफसरों की लापरवाही से होने वाली सरकार की फजीहत और मुख्य सचिव को कोर्ट की अवमानना से बचाने के लिए राज्य सरकार ने नई व्यवस्था तय की है। इसमें सरकार की सम्पत्ति की सुरक्षा के साथ मुख्य सचिव को कोर्ट में घसीटने से बचाने पर फोकस किया है। सभी विभाग प्रमुखों और विभागाध्यक्षों से सामान्य प्रशासन विभाग ने कहा है कि कोर्ट के मामले में पक्षकार के रूप में मुख्य सचिव का नाम हटाए जाने की कार्यवाही कराना है क्योंकि मुख्य सचिव किसी विभाग के भारसाधक सचिव नहीं होते हैं। सामान्य प्रशासन विभाग ने इसके लिए जारी ताजा निर्देशों में कहा है कि विभाग के सचिव और कलेक्टर की यह जिम्मेदारी होगी कि वह यह देखें कि जिन मामलों में मुख्य सचिव के माध्यम से पक्षकार बनाकर राज्य शासन के विरुद्ध कोर्ट में केस या याचिका लगाई जाती है उसमें समय पर मुख्य सचिव का नाम हटाने का काम कराया जाए। जीएडी ने इसको लेकर जारी निर्देश में कहा है कि सभी विभागों द्वारा मध्यप्रदेश राज्य मुकदमा प्रबंधन नीति 2018 के अनुरूप कर्मचारियों की सेवा संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए संस्थागत व्यवस्था बनाई जाएगी और सेवा विवादों से संबंधित अभ्यावेदनों का समय पर निराकरण करने का प्रयास किया जाएगा। कोर्ट में पक्ष रखने विधि अधिकारियों, स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति करें निर्देशों में यह भी कहा है कि सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में सरकार का पक्ष तेजी से रखने के लिए राज्य के विधि अधिकारियों को तथा सुप्रीम कोर्ट में सरकार का पक्ष रखने स्थायी अधिवक्ताओं की नियुक्ति की जानी चाहिए। अगर किसी मामले में कानूनी जटिलता हो और किसी और को अधिवक्ता नियुक्त किया जाना हो तो ऐसा प्रस्ताव विभागीय मंत्री के प्रशासकीय अनुमोदन के साथ विधि विभाग को भेजा जाएगा। इसमें प्रशासनिक विभाग द्वारा उनके नाम और सेवा शर्तों का साफ तौर पर उल्लेख किया जाएगा। इसके लिए विधि विभाग द्वारा अन्तरविभागीय समिति गठित की गई है जिसमें भारसाधक सचिव वित्त विभाग के होंगे और कमेटी के अध्यक्ष होंगे। सदस्य के रूप में भारसाधक सचिव विधि विभाग तथा संबंधित प्रशासकीय विभाग के भारसाधक सचिव शामिल किए जाएंगे। सरकार को नुकसान तो वसूली अफसर से हो जारी निर्देशों में कहा है कि अगर किसी प्रकरण में विलंब, गलती, चूक और विषय वस्तु से भिन्नता के कारण सरकार के खिलाफ आदेश जारी होता है तो विभाग की यह जिम्मेदारी होगी कि ऐसे मामले में संबंधित अफसर की जिम्मेदारी तय करते हुए कार्यवाही करें और अगर सरकार को क्षति हुई है तो संबंधित अधिकारी से वसूली की जाए। इसके लिए प्रभारी अधिकारी के दायित्व तय किए गए हैं। जीएडी ने सरकारी जमीन से संबंधित मामलों को लेकर भी गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा है कि कलेक्टर और जिला प्राधिकारी अपने क्षेत्र में कोर्ट द्वारा सरकार के खिलाफ दिए गए आदेश के मामले में शासकीय अधिवक्ता से सलाह लेकर अपील पेश करेंगे। जहां कलेक्टर के सक्षम होने की स्थिति न हो, वहां विभाग प्रमुख को निर्णय के लिए प्रस्ताव भेजे जाएंगे। सामान्य प्रशासन विभाग ने अवमानना के मामलों में किसी तरह की लापरवाही नहीं बरतने के लिए कहा है। प्रशासनिक प्रकरणों के निराकरण के लिए नई कार्यप्रणाली लागू सामान्य प्रशासन विभाग (GAD) के अनुसार प्रशासनिक प्रकरणों के निस्तारण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया है। विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे प्रकरणों का प्राथमिकता के आधार पर परीक्षण कर आवश्यक कार्यवाही समयसीमा में पूरी करें। साथ ही, हर स्तर पर जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका भी निर्धारित की गई है। निर्देशों में कहा गया है कि प्रकरणों के परीक्षण के दौरान सभी आवश्यक दस्तावेजों की जांच अनिवार्य होगी। यदि किसी प्रकरण में जानकारी अधूरी पाई जाती है, तो संबंधित पक्ष से तत्काल जानकारी प्राप्त कर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। इसके अलावा, प्रकरणों के निराकरण में अनावश्यक विलंब होने पर संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। सभी विभाग लंबित कोर्ट मामलों की नियमित समीक्षा करेंगे सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अपील, पुनरीक्षण और समीक्षा से जुड़े मामलों के लिए अलग-अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी। इन मामलों में निर्धारित समय-सीमा का कड़ाई से पालन करना होगा। विशेष रूप से विलंब से प्राप्त प्रकरणों में ‘कंडोनेशन ऑफ डिले’ (विलंब क्षमा) के प्रावधानों का उचित उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि सभी विभाग नियमित रूप से अपने लंबित प्रकरणों की समीक्षा करेंगे और उनकी प्रगति की जानकारी उच्च अधिकारियों को उपलब्ध कराएंगे। साथ ही, रिकॉर्ड संधारण और दस्तावेजों के सुरक्षित रख-रखाव पर भी बल दिया गया है।

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