खुश रहने का मिल गया तरीका, इन कामों को करने से लाइफ रहेगी हैप्पी-हैप्पी! एक्सपर्ट ने बताया सबकुछ

Last Updated:April 10, 2026, 16:32 IST Gorakhpur News: खुशी कोई बाहरी चीज नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग के सही तालमेल का परिणाम है. अगर आप अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव करें, जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और सकारात्मक सोच, तो आप खुद ही अपने ‘हैप्पी इंडेक्स’ को बढ़ा सकते हैं. आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि खुश रहने के लिए क्या करें. गोरखपुर: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर व्यक्ति खुश रहना चाहता है, लेकिन खुशी केवल परिस्थितियों पर नहीं, बल्कि हमारे शरीर और दिमाग के संतुलन पर भी निर्भर करती है. वैज्ञानिक रिसर्च के अनुसार, हमारे शरीर में कुछ खास हार्मोन ऐसे होते हैं, जो हमारी खुशी को नियंत्रित करते हैं. अगर इन हार्मोन को सही तरीके से सक्रिय किया जाए, तो व्यक्ति का ‘हैप्पी इंडेक्स’ यानी खुश रहने का स्तर काफी बढ़ सकता है. कुछ खास उपाय में यह चीज है, शरीर को बदल सकती हैं और आपके लिए भी यह बेहतर साबित होगा. गोरखपुर यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अभय की ओर से की गई रिसर्च में यह सामने आया है कि सेरोटोनिन, डोपामिन, एंडॉर्फिन और ऑक्सीटोसिन जैसे हार्मोन खुशी के लिए बेहद जरूरी होते हैं. इन हार्मोन को एक्टिव करने के लिए नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार और सकारात्मक सोच जरूरी है. कैसे काम करते हैं ये हार्मोन डोपामिन: यह हार्मोन मोटिवेशन और खुशी से जुड़ा होता है. जब आप कोई लक्ष्य हासिल करते हैं, तो इसका स्तर बढ़ता है. सेरोटोनिन: मूड को स्थिर रखने में मदद करता है और डिप्रेशन को कम करता है. एंडॉर्फिन: यह ‘नेचुरल पेनकिलर’ है जो एक्सरसाइज के दौरान रिलीज होता है और आपको अच्छा महसूस कराता है. ऑक्सीटोसिन: इसे ‘लव हार्मोन’ कहा जाता है, जो रिश्तों और अपनापन बढ़ाता है. खुश रहने के लिए जरूरी एक्सरसाइजप्रोफेसर अभय के अनुसार, रोजाना 30 से 45 मिनट की फिजिकल एक्टिविटी जैसे वॉक, योग, रनिंग या खेलकूद करने से एंडॉर्फिन और डोपामिन का स्तर बढ़ता है. इसके अलावा मेडिटेशन और प्राणायाम से सेरोटोनिन का संतुलन बेहतर होता है. सही खान-पान की भूमिकाखुश रहने के लिए डाइट भी उतनी ही जरूरी है. प्रोटीन, हरी सब्जियां, फल, नट्स और पर्याप्त पानी शरीर में हार्मोन संतुलन बनाए रखते हैं. खासकर केला, दही, डार्क चॉकलेट और हरी पत्तेदार सब्जियां सेरोटोनिन बढ़ाने में मदद करती हैं. खुशी कोई बाहरी चीज नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग के सही तालमेल का परिणाम है. अगर आप अपनी दिनचर्या में थोड़े बदलाव करें, जैसे नियमित व्यायाम, संतुलित भोजन और सकारात्मक सोच, तो आप खुद ही अपने ‘हैप्पी इंडेक्स’ को बढ़ा सकते हैं और एक बेहतर संतुलित जीवन जी सकते हैं. About the Author आर्यन सेठ आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए. News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें Location : Gorakhpur,Uttar Pradesh First Published : April 10, 2026, 16:32 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
एआईएमआईएम-एजेयूपी विभाजन: तीन तरह से यह बंगाल के महत्वपूर्ण मुस्लिम वोट को प्रभावित कर सकता है | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:10 अप्रैल, 2026, 16:25 IST मतदाता अनिश्चित हैं कि एआईएमआईएम के सार्वजनिक रूप से टूटने और व्यापक मीडिया कवरेज के बाद वे एजेयूपी पर भरोसा कर सकते हैं या नहीं। बंगाल विधानसभा चुनाव के लिए असदुद्दीन ओवैसी ने हुमायूं कबीर के साथ गठबंधन किया है. वह शुक्रवार था. सुबह के साढ़े पांच बजे थे जब पश्चिम बंगाल के अधिकांश लोग जाग रहे थे। सुबह होते ही, असदुद्दीन ओवैसी की एआईएमआईएम ने हुमायूं कबीर की आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) से नाता तोड़ लिया और इस खबर को सार्वजनिक कर दिया। बमुश्किल कुछ हफ्ते बाद जब दोनों कोलकाता में एक साथ दिखे और घोषणा की कि वे टीएमसी के खिलाफ राज्य में अल्पसंख्यकों के लिए लड़ेंगे, तो यह फैसला बहुत जल्दी आया। द रीज़न? सत्तारूढ़ टीएमसी द्वारा जारी एक स्टिंग ऑपरेशन में भाजपा के साथ “गुप्त” समझ का दावा किया गया है – कि उप मुख्यमंत्री पद के बदले कबीर की पार्टी बंगाल में किंगमेकर के रूप में उभरेगी। एआईएमआईएम का बंगाल की नई मुस्लिम पार्टी से नाता तोड़ने का फैसला कबीर के यह कहने के बावजूद आया कि वीडियो फर्जी है और उन्नत कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग करके बनाया गया है। उन्होंने टीएमसी को आरोपों को साबित करने या 2,000 करोड़ रुपये के मानहानि मामले का सामना करने की भी चुनौती दी है। कबीर के दावों के बावजूद एआईएमआईएम ने कहा, “हुमायूं कबीर के खुलासों से पता चला है कि बंगाल के मुसलमान कितने असुरक्षित हैं।” अपने राजनीतिक अलगाव संदेश में, उन्होंने दावा किया कि बंगाल के मुसलमान “सबसे गरीब, उपेक्षित और उत्पीड़ित समुदायों” में से हैं। ओवैसी की पार्टी ने स्पष्ट कर दिया कि वे कबीर के सहयोगी बने रहकर उन पर लगे आरोपों से उत्पन्न राजनीतिक बोझ को साझा करने के बजाय स्वतंत्र रूप से लड़ना पसंद करेंगे। हुमायूं कबीर के खुलासों से पता चला है कि बंगाल के मुसलमान कितने असुरक्षित हैं. एआईएमआईएम ऐसे किसी भी बयान से संबद्ध नहीं हो सकती जहां मुसलमानों की अखंडता पर सवाल उठाया जाता है। आज तक AIMIM ने कबीर की पार्टी से अपना गठबंधन वापस ले लिया है. बंगाल के मुसलमान…- AIMIM (@aimim_national) में से एक हैं 10 अप्रैल 2026 बंगाल की राजनीति के लिए इसका क्या मतलब है, जहां 2011 की जनगणना के अनुसार अल्पसंख्यक आबादी का 27 प्रतिशत हिस्सा हैं, और एक निर्णायक वोटिंग ब्लॉक है जिसने 2011 में सत्ता में आने के बाद से ममता बनर्जी का समर्थन किया है? ओवेसी के पास सुरक्षा के लिए एक बड़ा मैदान है ओवैसी के लिए बंगाल एक छोटा प्रवेश बिंदु है. तेलंगाना के अलावा, उनकी पार्टी ने महाराष्ट्र, बिहार और कर्नाटक में मुसलमानों के लिए बोलने वाले राजनीतिक संगठन के रूप में अपनी पैठ बनाई है। कोई भी इसके दृष्टिकोण से असहमत हो सकता है, लेकिन उन राज्यों में अल्पसंख्यक समुदाय के बीच इसके समर्थक हैं। इस चुनाव में, वह पश्चिम बंगाल में अपने पदचिह्न का विस्तार करना चाहते थे, जहां उन्होंने हुमायूं कबीर की पार्टी के साथ गठबंधन किया था, जिसने बंगाल के दो मुस्लिम बहुल जिलों मुर्शिदाबाद और मालदा जिलों में मुसलमानों के बीच मोहभंग का फायदा उठाया था। हालाँकि, टीएमसी का कथित स्टिंग ऑपरेशन, जिसका कबीर ने विरोध किया है, सच्चाई की परवाह किए बिना, उन्हें और उनकी पार्टी को एआईएमआईएम के लिए दायित्व बनाता है। इसका प्रभाव अन्य राज्यों में भी पड़ सकता है जहां एआईएमआईएम सक्रिय है, जिससे इसके समर्थन आधार के बीच असहज सवाल खड़े हो सकते हैं। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि एआईएमआईएम ने अपने बड़े राजनीतिक हितों की रक्षा के लिए तुरंत नाता तोड़ लिया। कबीर की बर्खास्तगी के बावजूद, धारणा मायने रखती है हुमायूं कबीर द्वारा स्टिंग को आक्रामक ढंग से खारिज करने के बावजूद – इसे एआई-जनित मनगढ़ंत कहानी कहना और टीएमसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की धमकी देना – राजनीति अक्सर धारणा के बारे में होती है। कथित वीडियो में, पूर्व टीएमसी विधायक, जो अब मुर्शिदाबाद-मालदा-बीरभूम बेल्ट में मुस्लिम राजनीति का एक प्रमुख चेहरा हैं, एक ऐसे व्यक्ति से बात करते हुए दिखाई दे रहे हैं जो कैमरे पर दिखाई नहीं दे रहा है। कबीर को यह दावा करते हुए सुना जाता है कि उनकी भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी के साथ एक “गुप्त” समझ है – कि अगर वह 70-80 सीटें हासिल करते हैं और विधानसभा चुनावों में भाजपा को लगभग 100-120 सीटें मिलती हैं, तो वह उप मुख्यमंत्री पद के बदले में समर्थन देंगे। कबीर ने पूरे वीडियो को एआई-जनरेटेड बताकर खारिज कर दिया है। हालाँकि, उनके पिछले बयान कुछ मुस्लिम मतदाताओं के लिए दावों को विश्वसनीय बना सकते हैं, भले ही वीडियो वास्तव में मनगढ़ंत हो। मार्च के मध्य में पीटीआई को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “अगर हमारी पार्टी सरकार बनाती है तो पहली बार कोई मुस्लिम मुख्यमंत्री होगा. लेकिन अगर हम सरकार नहीं भी बनाते हैं तो भी हम इतनी संख्या लाएंगे कि हमारे बिना कोई सरकार नहीं बन पाएगी.” उस समय, ये आम चुनाव-मौसम के दावों की तरह लग सकते थे, लेकिन ऐसे बयान अब संदेह को बढ़ावा दे सकते हैं और उनके विरोधियों द्वारा इसका फायदा उठाया जा सकता है। खंडित मुस्लिम वोट? 2011 के बाद से मुसलमानों ने बड़े पैमाने पर ममता बनर्जी की टीएमसी को वोट दिया है, जब उनकी निष्ठा वाम मोर्चे से बदल गई थी। हालाँकि, पहली बार, भाजपा द्वारा वर्षों से बार-बार मुस्लिम तुष्टीकरण के आरोप लगाए जाने के बावजूद, मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर दिनाजपुर और बीरभूम जैसे जिलों में मुस्लिम मतदाताओं का एक वर्ग सत्तारूढ़ दल से अलग होता दिख रहा है। राजनीतिक रूप से चतुर व्यक्ति कबीर ने मुर्शिदाबाद के बेलडांगा – जो कि 66 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाला जिला है – में निजी भूमि के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल बाबरी के नाम पर एक मस्जिद बनाने के लिए किया, जिससे स्थानीय मुसलमानों में मजबूत भावनाएं पैदा हुईं। यह जल्द ही उनके लिए समर्थन की एक स्थिर धारा में तब्दील हो गया। कबीर ने एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करके अपनी पार्टी लॉन्च की और उन्हें ओवैसी का समर्थन प्राप्त था। आख़िरकार, ओवैसी एक प्रमुख अखिल भारतीय मुस्लिम नेता हो सकते हैं, लेकिन बंगाल में उनकी स्वीकार्यता सीमित है। सांस्कृतिक मतभेद मायने रखते हैं – औवेसी मटन खाते हैं, जबकि बंगाल के
सुबह में गर्म पानी पीने से क्या सच में पिघल जाती है पेट की चर्बी ? यकीन करने से पहले डॉ. पारस अग्रवाल से जान लें

Last Updated:April 10, 2026, 15:56 IST Hot Water Melt Fat: सुबह-सुबह गर्म पानी यानी गुनगुने पानी पीना सेहत के लिए अच्छा माना जाता है. आयुर्वेद हो या मेडिकल साइंस सबमें कहा जाता है कि सुबह में दिन की शुरुआत एक गिलास गुनगुने पानी से करना चाहिए. लेकिन इन दिनों सोशल मीडिया पर ऐसी खबरों की बाढ आ गई है जिसमें दावा किया जाता है कि अगर सुबह में गुनगुने पानी पिएंगे तो इससे पेट की चर्बी कुछ ही महीनों में गलने लगेगी. इस बात में आखिर कितनी सच्चाई है. मारेंगे एशिया अस्पताल में मेटाबोलिक डिसॉर्डडर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से जब हमने बात की तो उन्होंने इस पूरे मामले को विस्तार से बताया. गर्म पानी और वजन कम करने का कनेक्शन. Hot Water Melt Fat: राष्ट्रीय हेल्थ सर्वे के मुताबिक भारत में 24 प्रतिशत महिला और 23 प्रतिशत पुरुष मोटापे के शिकार हैं. इनमें से अधिकांश के पेट पर बुरी तरह चर्बी जमी होती है. पेट की चर्बी हर तरह के मोटापे से ज्यादा खतरनाक है क्योंकि यह चर्बी लिवर, किडनी, हार्ट जैसे महत्वपूर्ण अंगों को घेर लेती है और उन अंगों पर अप्रत्यक्ष रूप से दबाव डालती है. ऐसे में सोशल मीडिया पर हमेशा दावा किया जाता है कि सुबह में खाली पेट गर्म पानी पीने से पेट की चर्बी कुछ ही महीने में गल जाती है. आखिर इस बात में कितनी सच्चाई है. इसी बात को जानने के लिए हमने मारेंगे एशिया अस्पताल में मेटाबोलिक डिसॉर्डडर के डायरेक्टर डॉ. पारस अग्रवाल से बात की. मेडिकल साइंस की हकीकतडॉ. पारस अग्रवाल ने बताया कि जिस तरह शरीर का वजन बढ़ने के लिए कई चीजें जिम्मेदार होती है उसी तरह इस अतिरिक्त चर्बी को बाहर निकालने के लिए एक साथ कई मोर्चे पर काम करना पड़ता है. जहां तक गर्म पानी की बात है तो पानी पीने से फायदा ही होता है अगर आप इसे संतुलित मात्रा में पिए तो. लेकिन अगर पानी आपने कम पिया या जरूरत से ज्यादा पिया तो इसका नुकसान उठाना पड़ेगा. पर मेडिकल साइंस में इस बात का कोई जिक्र नहीं है कि सुबह खाली पेट गर्म या गुनगुना पानी पिएंगे तो इससे शरीर की चर्बी गलने लगेगी. हां, कुछ हद तक इससे मेटाबोलिज्म बूस्ट हो सकता है. गर्म पानी शरीर के तापमान को थोड़ा बढ़ा सकता है और हो सकता है कि इससे कैलोरी थोड़ी ज्यादा बर्न हो जाए. पर इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि सुबह खाली पेट गर्म पानी आपके पेट की चर्बी को गला दे या कम कर दें. आयुर्वेद चाहे जो भी कहता हो लेकिन मेडिकल साइंस में आज तक यह प्रमाणित नहीं हुआ है कि गर्म पानी से वजन कम होता है या पेट की चर्बी गल जाती है. वजन बढ़ता क्यों हैइस सवाल पर डॉ. पारस अग्रवाल कहते हैं कि मोटे तौर पर वजन बढ़ने के लिए 3 कारण जिम्मेदार होते हैं. पहला-आपने जरूरत से ज्यादा खाया. दूसरा-आपने शारीरिक मेहनत नहीं की या शरीर को हिलाया-डुलाया नहीं और तीसरा-गलत चीजें खाई. जब आप जरूरत से ज्यादा खाएंगे तो जाहिर इस भोजन से एनर्जी भी ज्यादा बनेगी और जब एनर्जी खर्च नहीं होगी तो वह चर्बी के रूप में शरीर में जमा होने लगेगा. वहीं जितनी आपके शरीर में एनर्जी बन रही है अगर वह नहीं खाएंगे तो यह भी चर्बी में बदल जाएगी. अंत में यदि आप गलत चीजें खाएंगे तो इसमें थोड़े से ज्यादा एनर्जी बनेगी और वह सीधे चर्बी में बदल जाएगी. जैसे पिज्जा-बर्गर, ज्यादा चीनी, मिठाई, ज्यादा तेल, तली-भुनी चीजें, पैकेटबंद चीजें, मीठा पेय आदि में खराब कार्बोहाइड्रैट होता है इसलिए फिर वजन घटाने के लिए क्या करें डॉ. पारस अग्रवाल सीधे कहते हैं जिस तरह आपने वजन बढ़ाया है उसी तरह इसे घटा लीजिए. जैसे आपको सबसे पहले कैलोरी पर नियंत्रण करना है. यानी आप पहले जितना खाते थे. उसमें धीरे-धीरे कटौती करें. मसलन यदि आप पहले 3 रोटी खाते थे तो अब 2 रोटी खाइए. इसी तरह भोजन की पूरी मात्रा को कम कीजिए. इसके बाद आप पहले जो गंदी चीजें खाते थे, उसे छोड़ दीजिए. जैसे हर तरह के पैकेटबंद फूड, बिस्किट, चॉकलेट, ब्रेड, पिज्जा-बर्गर, बाहर की तली-भुनी चीजें, ज्यादा तेल वाली चीजें, चिप्स, कुरकुरे, कोल्ड ड्रिंक, चीनी वाली चीजें आदि छोड़ दीजिए. बेहतर होगा कि चीनी को पूरी तरह छोड़ दें. इसी जगह आप रोज घर का बना खाना खाएं. चावल, दाल, रोज हरी सब्जियां, फल, सीड्स, ड्राई फ्रूट्स आदि का सेवन करें. अब इन सबके बाद रोज कम से कम आधा घंटा एक्सरसाइज करें. एक्सरसाइज इस तरह से करें कि शरीर के सभी अंगों में हरकतें हो. इसके लिए जिम जाना जरूरी नहीं. किसी भी तरह से आप शरीर के हिलाए-डुलाएं. ऑफिस में तेज वॉक करें, लिफ्ट की जगह सीढ़ियों का इस्तेमाल करें. चेयर से हर आधे-एक घंटे पर उठकर स्ट्रैच करें, थोड़ा घूम लें. इसके अलावा पर्याप्त नींद लें और तनाव भी कम करें. तनाव कम करने के लिए योगा, ध्यान आदि का सहारा लें. और सबसे जरूरी बात कि पहले यह देखें कि वजन किसी बीमारी की वजह से तो नहीं बढ़ी है. अगर बीमारी की वजह से है तो इसका इलाज पहले कराएं. निश्चित रूप से वजन घटेगा. About the Author Lakshmi Narayan 18 साल से ज्यादा के लंबे करियर में लक्ष्मी नारायण ने डीडी न्यूज, आउटलुक, नई दुनिया, दैनिक जागरण, हिन्दुस्तान जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में अपनी सेवाएं दी हैं। समसामयिक विषयों के विभिन्न मुद्दों, राजनीति, समाज, …और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 10, 2026, 15:56 IST
मैहर में गैस सिलेंडर के लिए चक्काजाम:एजेंसी देर से खुलने पर उपभोक्ता भड़के; एसडीएम ने संचालक को फटकार लगाई

मैहर जिले के अमरपाटन में शुक्रवार को मानसी गैस एजेंसी के सामने उपभोक्ताओं ने गैस सिलेंडर न मिलने पर चक्काजाम कर दिया। नाराज लोगों ने सतना रोड पर मुख्य मार्ग को अवरुद्ध कर दिया, जिससे वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही एसडीएम डॉ. आरती सिंह पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचीं और स्थिति को संभाला। सुबह 11 बजे तक एजेंसी न खुलने पर भड़का आक्रोश मानसी गैस एजेंसी पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की भीड़ जमा थी, लेकिन सुबह 11 बजे तक काउंटर नहीं खुले। भीषण गर्मी और कड़ी धूप में घंटों इंतजार करने के बाद उपभोक्ताओं का धैर्य टूट गया और उन्होंने सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। लोगों ने एजेंसी संचालक पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। दूसरों के कार्ड पर गैस वितरण पर लगी रोक एसडीएम ने मौके पर कतार में लगे लोगों की रैंडम जांच की, जिसमें पाया गया कि कई लोग पड़ोसियों या अन्य व्यक्तियों के गैस कार्ड की फोटोकॉपी लेकर आए थे। एसडीएम ने स्पष्ट किया कि सिलेंडर केवल कार्डधारक के परिवार के सदस्य को ही दिया जाएगा। अब से वितरण के लिए पहचान पत्र और मूल गैस कार्ड लाना अनिवार्य होगा। शनिवार से शुरू होगी होम डिलीवरी एसडीएम डॉ. आरती सिंह ने एजेंसी संचालक को फटकार लगाते हुए तत्काल वितरण शुरू करवाया। उन्होंने निर्देश दिए कि एजेंसी पर भीड़ कम करने के लिए शनिवार से अनिवार्य रूप से होम डिलीवरी शुरू की जाए। प्रशासन ने स्पष्ट किया कि क्षेत्र में गैस की किल्लत नहीं है और जाम हटने के बाद यातायात सामान्य हो गया है।
अक्षय कुमार से मिलने नंगे पैर पैदल निकला फैन:राजकोट से 700 किमी चलकर मुंबई पहुंचा, एक महीने इंतजार के बाद मुलाकात हुई

मुंबई में बॉलीवुड एक्टर अक्षय कुमार से मिलने के लिए गुजरात के राजकोट निवासी अशोक कंजारिया ने 700 किलोमीटर पैदल यात्रा की। वह 17 फरवरी 2026 को तिरंगा लेकर बिना जूते पहने राजकोट से निकले और 18 दिन में मुंबई पहुंचे। हालांकि, मुंबई पहुंचने के बाद कई दिनों तक अक्षय से उनकी मुलाकात नहीं हो सकी। इसके बाद उन्होंने शहर में ही रुककर कोशिश जारी रखी। वह कई बार अक्षय कुमार के घर के बाहर पहुंचे, लेकिन उनसे मिलने में सफलता नहीं मिली। ‘देश गुजरात’ की रिपोर्ट के अनुसार, अशोक कंजारिया ने हार नहीं मानी और करीब एक महीने तक मुंबई में इंतजार किया। इस दौरान वह फुटपाथ और रेलवे स्टेशन पर रहे। इस दौरान उनके लगभग 14 हजार रुपये खर्च हुए। उनके परिवार में पत्नी और दो बेटे राजकोट में उनका इंतजार कर रहे थे। 6 मार्च को मुंबई पहुंचने के बाद उन्हें पूरे एक महीने तक इंतजार करना पड़ा। आखिर में 8 अप्रैल को उनकी मुलाकात संभव हो सकी। अक्षय कुमार ने अपनी सिक्योरिटी टीम को उन्हें बुलाने के निर्देश दिए थे। अशोक ने मौका न निकल जाए, यह सोचकर सुबह 7 बजे ही जुहू पहुंच गए। फिर सुबह 8:30 बजे उनकी अक्षय कुमार से मुलाकात हुई। इस दौरान एक्टर ने उन्हें आशीर्वाद दिया और साथ में फोटो भी खिंचवाई। मुलाकात के दौरान अक्षय ने अशोक को ‘खुश रह बेटा’ कहकर आशीर्वाद दिया और साथ में फोटो भी खिंचवाई। अशोक ने बाद में बताया कि अक्षय सर ने मुझे कई बार ‘बेटा’ कहकर बुलाया। भगवान ने उनकी इच्छा पूरी कर दी। अशोक का कहना है कि मेरा बड़ा सपना सच हो गया, साथ ही अक्षय ने अशोक को नंगे पैर चलने से मना किया और इसे गलत बताया।
रायसेन कलेक्टर का औचक निरीक्षण, गेहूं खरीदी व्यवस्थाओं पर सख्ती:किसानों से लिया फीडबैक; लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए

रायसेन कलेक्टर अरुण कुमार विश्वकर्मा ने शुक्रवार को सांची विकासखंड के बरखेड़ी सलामतपुर स्थित शाहीन वेयरहाउस गेहूं उपार्जन केंद्र का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने केंद्र पर गेहूं खरीदी की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। कलेक्टर ने केंद्र प्रभारी और संबंधित अधिकारियों से खरीदी की प्रगति, बारदाना, तौल व्यवस्था और किसानों को मिलने वाली सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप पारदर्शी और सुचारु उपार्जन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए, ताकि किसानों को कोई परेशानी न हो। किसानों से फीडबैक लिया निरीक्षण के दौरान, कलेक्टर ने उपज बेचने आए किसानों से भी सीधे बातचीत की। उन्होंने किसानों से केंद्र पर उपलब्ध व्यवस्थाओं, तौल प्रक्रिया और भुगतान को लेकर फीडबैक लिया। कलेक्टर ने अधिकारियों को किसानों की समस्याओं का मौके पर ही निराकरण करने और खरीदी प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही न बरतने के निर्देश दिए। उल्लेखनीय है कि जिले में 9 अप्रैल से गेहूं खरीदी शुरू की गई है। इसके लिए विभिन्न स्थानों पर सरकारी उपार्जन केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों पर किसानों से समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदा जा रहा है और प्रशासन द्वारा व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।
‘सबसे बड़ा घुसपैठिया गुजरात से आया’: असम में कन्हैया कुमार का अमित शाह पर परोक्ष हमला | राजनीति समाचार

आखरी अपडेट:10 अप्रैल, 2026, 14:34 IST कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधा। कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह (बाएं से दाएं) कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा पर निशाना साधते हुए राज्य से घुसपैठियों को बाहर निकालने के भाजपा के वादे पर निशाना साधा। कुमार ने असम के बोंगाईगांव में एक सार्वजनिक सभा को संबोधित करते हुए कहा, “…मैंने कहा था कि हिमंत बिस्वा सरमा के साथ सबसे बड़ा घुसपैठिया गुजरात से आया है और उसे भी बाहर निकालने की जरूरत है।” यह बयान शाह की पिछली टिप्पणी के जवाब में था कि असम में घुसपैठियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें “एक-एक करके” निर्वासित किया जाएगा। उन्होंने 9 अप्रैल को असम में बराक घाटी के पत्थरकांडी में कहा था, “हमने घुसपैठियों की पहचान कर ली है; अब उन्हें एक-एक करके देश से बाहर भेजने का समय आ गया है।” बोंगाईगांव में कांग्रेस उम्मीदवार गिरीश बरुआ के लिए प्रचार कर रहे कन्हैया कुमार ने कहा कि असम के संसाधन राज्य के लोगों के हैं, इस पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। बोंगाईगांव, असम: कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार कहते हैं, “हमारे गांव और जिले के लोग बोंगाईगांव में काम करते हैं, लेकिन हम अभी भी कहते हैं कि बोंगाईगांव के संसाधन और असम की संपत्ति पहले असम के लोगों की है… जैसे गांधीजी ने अंग्रेजों से समझौता नहीं किया,… pic.twitter.com/hBAKvzEWU3– आईएएनएस (@ians_india) 10 अप्रैल 2026 “हमारे गांव और जिले के लोग बोंगाईगांव में काम करते हैं, लेकिन हम अभी भी कहते हैं कि बोंगाईगांव के संसाधन और असम की संपत्ति पहले असम के लोगों की है… जिस तरह गांधी ने अंग्रेजों के साथ समझौता नहीं किया, उसी तरह हम इस देश के संविधान को मिटने नहीं देंगे। हम इन चोरों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे…” उन्होंने कहा। असम में मतदान भारत के चुनाव आयोग के अनुसार, असम की 126 सीटों पर गुरुवार, 9 अप्रैल को एक ही चरण में मतदान हुआ, जिसमें राज्य में 85.74 प्रतिशत का प्रभावशाली मतदान दर्ज किया गया। जहां भाजपा के नेतृत्व वाला एनडीए लगातार तीसरी बार सत्ता हासिल करना चाहता है, वहीं कांग्रेस के नेतृत्व वाला गठबंधन रायजोर दल और सीपीआई (एम) के साथ गठबंधन पर भरोसा करके वापसी करना चाहता है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 10 अप्रैल, 2026, 14:34 IST समाचार राजनीति ‘सबसे बड़ा घुसपैठिया गुजरात से आया’: असम में कन्हैया कुमार का अमित शाह पर परोक्ष हमला अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)कन्हैया कुमार असम भाषण(टी)कन्हैया कुमार अमित शाह(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)असम घुसपैठियों की टिप्पणी(टी)कांग्रेस बनाम बीजेपी असम(टी)बोंगाईगांव चुनाव रैली(टी)असम मतदाता मतदान 2026(टी)असम विधानसभा चुनाव
स्मार्टफोन की लत दिमाग को बना रहा 10 साल बूढ़ा? ‘डिजिटल डिटॉक्स’ से ब्रेन हेल्थ को ऐसे करें रीवर्स, रिसर्च में बड़ा खुलासा

Last Updated:April 10, 2026, 14:33 IST Social media addiction and brain health : शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने पर दिमाग की एकाग्रता (Attention) में इतना सुधार हुआ, जो उम्र के साथ आने वाली 10 साल की गिरावट को मिटाने के बराबर था. यानी, सिर्फ 14 दिन का संयम आपके दिमाग को 10 साल तक जवां बना सकता है. न्यू मैक्सिको में भी कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए मेटा पर भारी जुर्माना लगाया है. Impact of social media on memory and attention :क्या आपकी सुबह फोन की स्क्रीन से शुरू होती है और रात उसी नीली रोशनी के साथ खत्म हो जाती है? अगर हाँ, तो आप अकेले नहीं हैं. रिसर्च बताती है कि एक औसत इंसान दिन के 4 से 5 घंटे सिर्फ फोन पर बिता रहा है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह लत आपके दिमाग को समय से पहले बूढ़ा बना रही है? विज्ञान का दावा है कि सोशल मीडिया की यह आदत आपके दिमाग को 10 साल तक पीछे धकेल सकती है. राहत की बात यह है कि इसे ‘रिवर्स’ यानी ठीक करना भी आपके ही हाथ में है. दुनियाभर की कोर्ट ले रही ऐतिहासिक फैसलेसोशल मीडिया का जाल अब इतना गहरा हो गया है कि इसे लेकर दुनिया भर की अदालतें सख्त हो गई हैं. पिछले महीने कैलिफोर्निया में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया गया, जहाँ टेक दिग्गज मेटा और यूट्यूब को एक युवती को करीब 50 करोड़ रुपये ($6 मिलियन) हर्जाना देने का आदेश मिला. वजह? वह इन प्लेटफॉर्म्स की इतनी बुरी तरह आदी हो गई थी कि उसका मानसिक स्वास्थ्य पूरी तरह बिगड़ गया. न्यू मैक्सिको में भी कोर्ट ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाने के लिए मेटा पर भारी जुर्माना लगाया है. ये फैसले साफ बताते हैं कि अब पानी सिर के ऊपर से गुजर चुका है. क्या है डिजिटल डिटॉक्स, जो लौटाएगा दिमाग की जवानी?‘PNAS नेक्सस’ द्वारा किए गए एक ताजा अध्ययन में 467 लोगों पर रिसर्च की गई. इन लोगों ने सिर्फ दो हफ्ते के लिए अपने फोन से इंटरनेट का नाता तोड़ दिया. नतीजे चौंकाने वाले थे! शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मार्टफोन से दूरी बनाने पर दिमाग की एकाग्रता (Attention) में इतना सुधार हुआ, जो उम्र के साथ आने वाली 10 साल की गिरावट को मिटाने के बराबर था. यानी, सिर्फ 14 दिन का संयम आपके दिमाग को 10 साल तक जवां बना सकता है. फोन और कंप्यूटर के इस्तेमाल में बड़ा फर्कअध्ययन में एक दिलचस्प बात सामने आई. शोधकर्ताओं का मानना है कि हम कंप्यूटर या लैपटॉप का इस्तेमाल किसी काम के लिए करते हैं, लेकिन फोन का इस्तेमाल “मजबूरी और बिना सोचे-समझे” (Mindless scrolling) होता है. यही वह आदत है जो हमारे डिनर, वॉक और परिवार के साथ बिताए जाने वाले सुकून के पलों को छीन रही है. जब प्रतिभागियों ने फोन का इंटरनेट बंद किया, तो उनका ऑनलाइन समय 314 मिनट से घटकर महज 161 मिनट रह गया. मूड और नींद में जबरदस्त सुधारहार्वर्ड यूनिवर्सिटी की एक और स्टडी बताती है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल कम करने से केवल एक हफ्ते के भीतर चिंता (Anxiety), अवसाद (Depression) और अनिद्रा (Insomnia) जैसी समस्याओं में बड़ी गिरावट आती है. अगर आप रात भर करवटें बदलते हैं या बिना वजह तनाव महसूस करते हैं, तो शायद इसकी जड़ आपके हाथ में मौजूद वह छोटा सा गैजेट ही है. बच्चों पर मंडराता खतरा और कड़े कानूनसोशल मीडिया के खतरों को देखते हुए अब कई देश सख्त कानून बना रहे हैं. अमेरिका के मैसाचुसेट्स में 14 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की तैयारी है, वहीं इंडोनेशिया ने 16 साल से कम उम्र वालों पर इसे प्रतिबंधित कर दिया है. वैज्ञानिक अब उन लोगों की पहचान कर रहे हैं जो दूसरों से अपनी तुलना करके दुखी होते हैं या अकेलेपन को दूर करने के लिए घंटों रील स्क्रॉल करते हैं. कैसे करें शुरुआत? एक्सपर्ट की सलाहजॉर्जटाउन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर कोस्टाडिन कुश्लेव का कहना है कि आपको हमेशा के लिए फोन छोड़ने की जरूरत नहीं है. बस कुछ दिनों का ‘आंशिक डिटॉक्स’ (Partial Detox) भी जादू की तरह काम करता है. सप्ताह में एक दिन ‘नो फोन डे’ रखें या सोने से 2 घंटे पहले फोन को खुद से दूर कर दें. आपका दिमाग खुद-ब-खुद हील होने लगेगा. डिजिटल दुनिया की चकाचौंध में हम अपनी दिमागी शांति खो रहे हैं. विज्ञान ने रास्ता दिखा दिया है- फैसला अब आपका है कि आप फोन को खुद पर हावी होने देंगे या अपने दिमाग की सेहत को चुनेंगे. (यह लेख पीनास नेक्सस (PNAS Nexus), हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की स्टडी और द वाशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट पर आधारित है.) About the Author Pranaty Tiwary मैंने लेडी श्रीराम कॉलेज फॉर वूमन से अपनी ग्रेजुएशन और मिरांडा हाउस से मास्टर्स की डिग्री पूरी की है. पत्रकारिता करियर की शुरुआत दूरदर्शन(2009) से की, जिसके बाद दैनिक भास्कर सहित कई प्रमुख अख़बारों में मेनस्ट्र…और पढ़ें News18 न्यूजलेटर अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में सबमिट करें First Published : April 10, 2026, 14:31 IST
ओलावृष्टि-बारिश से दतिया के 42 गांवों की गेहूं फसल बर्बाद:सेवढ़ा क्षेत्र में जलभराव से सड़ी फसल, मुआवजे के इंतजार में किसान

दतिया की सेवढ़ा तहसील क्षेत्र में बीते सप्ताह हुई ओलावृष्टि और लगातार बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है। 42 गांवों में गेहूं की फसल पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। हालत यह है कि खेतों में अब भी पानी भरा हुआ है और खड़ी फसल सड़कर नष्ट हो रही है। किसान न तो फसल काट पा रहे हैं और न ही उसमें से एक दाना निकालने की उम्मीद बची है। दैनिक भास्कर टीम ने आलमपुर बुजुर्ग, जरौली, दिगुवा सहित कई गांवों का दौरा किया। जहां किसानों ने बताया कि 7 दिन बीत जाने के बाद भी खेतों में जलभराव बना हुआ है। गेहूं पूरी तरह सड़ चुकी है, जिससे खाने के लिए अनाज तक नहीं बचा। वहीं पशुओं के लिए भूसे का भी गंभीर संकट खड़ा हो सकता है। किसानों का कहना है कि अब हालात ऐसे बन गए हैं कि उन्हें अपने पशु बेचने तक की नौबत आ गई है। परिवार के भरण-पोषण के साथ बेटियों की शादी जैसी जिम्मेदारियां भी उनके सामने बड़ी चुनौती बन गई हैं। आरोप- कई गांवों में सर्वे नहीं हुआ ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि अभी तक कई गांवों में सर्वे टीम नहीं पहुंची है। किसान मुआवजे की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन सर्वे में देरी से उन्हें राहत मिलने पर भी संशय बना हुआ है। किसानों का दर्द है कि फसल पूरी तरह खत्म हो चुकी है, लेकिन खेतों की सफाई के लिए भी अब उन्हें अलग से खर्च करना पड़ेगा। इधर, जनप्रतिनिधि और नेता केवल आश्वासन दे रहे हैं। जमीनी स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। मामले की लेकर अपर कलेक्टर महेंद्र सिंह कपचे ने बताया कि सर्वे टिम लगी हुई है, जो जल्द सर्वे कर जांच रिपोर्ट सौंपेगी।
रिटायर्ड फौजी ने खुद को मारी गोली मौत:परिजन बोले-बंदूक साफ करते समय हुआ हादसा, स्पॉट से राइफल और शराब मिली

ग्वालिय में एक रिटायर्ड फौजी की संदिग्ध हालत में गोली लगने से मौत हो गई है। परिजन का कहना है की बंदूक साफ करते में गोली लगी है जबकि पुलिस का कहना है कि यह खुदकुशी है। घटनास्थल से बंदूक और एक शराब का क्वार्टर मिला है। आसपास बंदूक साफ करने का कोई भी सामान नहीं मिला है। घटना गुरुवार रात 11:00 की है। पड़ोसी घायल फौजी को लेकर पहले बिरला हॉस्पिटल पहुंचे फिर ज्यारोग्य अस्पताल। यहां डॉक्टर ने फौजी को मृत घोषित कर दिया। रात 1 बजे पुलिस को सूचना दी गई है। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। शहर के महाराजपुरा थाना क्षेत्र के आदित्यपुरम निवासी 58 वर्षीय रामस्वरूप भदौरिया आर्मी से रिटायर्ड जवान हैं। वह भिंड के अटेर स्थित मोरा गांव के रहने वाले हैं। कुछ दिन पहले उनका बेटा और अन्य परिजन गांव में खेती का काम देखने के लिए गए थे और घर पर वह अकेले थे। रात 11 बजे के लगभग उनके घर से गोली चलने की आवाज आई। गोली की आवाज सुनते ही पड़ोसी उनके घर में पहुंचे तो रामस्वरूप घायल हालत में कमरे में पड़े हुए थे। पास ही उनकी लाइसेंसी राइफल पड़ी हुई थी। साथ ही एक शराब का क्वाटर भी पड़ा था। मामले की सूचना पड़ोसियों ने उनके बेटे विजय को दी। मामले का पता चलते ही विजय ने पड़ोसियों से पिता को उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाने को बोला और पास ही रहने वाले अपने बहनोई रायसिंह को बताया। मामले का पता चलते ही वह उन्हें लेकर अस्पताल पहुंचे। जहां पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सीने में लगी है गोली मामले का पता चलते ही महाराजपुरा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और रिटायर्ड फौजी का शव निगरानी में लेकर पीएम हाउस पहुंचाकर मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस जांच में पता चला है कि गोली उनके सीने में लगी है। राइफल साफ करते चली गोली या सुसाइड पुलिस को प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि गोली रामस्वरूप के सीने में लगी है और उनके बगल में ही उनकी राइफल पड़ी हुई थी। अब पुलिस पता लगा रही है कि गोली राइफल साफ करते समय असावधानी से चली या फिर उन्होंने सुसाइड किया है। पुलिस का कहना इस मामले में टीआई महारजपुरा यशवंत गोयल ने बताया कि एक रिटायर्ड फौजी की गोली लगने से मौत हुई है। अभी मामला सुसाइड का लग रहा है। परिजन बन्दूक साफ करते समय गोली चलने से हादसे कि बात कह रहे हैं।









