Tuesday, 14 Apr 2026 | 03:40 PM

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सिवनी में ज्योति कलश व जवारों का विसर्जन:571 ज्योति कलशों की शोभायात्राएं आकर्षण का केंद्र; दलसागर घाट पर हुआ विसर्जन

सिवनी में ज्योति कलश व जवारों का विसर्जन:571 ज्योति कलशों की शोभायात्राएं आकर्षण का केंद्र; दलसागर घाट पर हुआ विसर्जन

चैत्र नवरात्रि के समापन के बाद जिलेभर के देवी मंदिरों और घरों में स्थापित ज्योति कलशों एवं जवारों का विसर्जन जारी है। रविवार रात नगर के विभिन्न क्षेत्रों में विसर्जन कार्यक्रम आयोजित किए गए। छिंदवाड़ा चौक, बारापत्थर और भैरोगंज सहित कई स्थानों से शोभायात्राएं निकालकर दलसागर तालाब के घाट पर विधि-विधान से विसर्जन किया गया। नगर के प्रमुख सिद्ध पीठों और मंदिरों में स्थापित ज्योति कलशों और जवारों को मां भगवती की आरती के बाद शोभायात्रा के रूप में निकाला गया। सिद्धपीठ माता दीवाला मंदिर, दुर्गा चौक स्थित मां राजराजेश्वरी दरबार, देसाई मढ़िया, काली चौक काली मंदिर, सिंहवाहिनी मंदिर और चित्रगुप्त हनुमान मंदिर सहित अन्य मंदिरों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इन यात्राओं में शामिल हुए। 571 ज्योति कलशों की शोभायात्रा बनी आकर्षण दुर्गा चौक मंदिर में स्थापित 571 ज्योति कलशों की विसर्जन शोभायात्रा विशेष आकर्षण का केंद्र रही। इस यात्रा के दौरान देवी गीतों पर श्रद्धालु शामिल हुए। नवरात्रि के नौ दिनों की साधना पूर्ण होने के बाद श्रद्धालु परंपरा अनुसार जवारों और ज्योति कलशों का विसर्जन कर रहे हैं। जिन स्थानों पर बाद में स्थापना की गई थी, वहां नौ दिन पूरे होने पर अब विसर्जन किया जा रहा है। आज सोमवार रात में भी नगर के कई स्थानों से विसर्जन यात्राएं निकाली जाएंगी। श्रद्धालुओं के लिए जगह-जगह पानी की व्यवस्था गर्मी को देखते हुए अधिकांश स्थानों पर दिन के बजाय रात्रि में विसर्जन किया जा रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह शीतल पेयजल और फलों की व्यवस्था भी की गई है। जिले के धनोरा, घंसौर, केवलारी, लखनादौन, छपारा, बरघाट और कुरई विकासखंडों में भी जवारों के विसर्जन का क्रम जारी है।

90 हजार भक्तों ने किए मां शारदा के दर्शन:नवरात्रि के तीसरे दिन करीब 80 हजार लोग सीढ़ियां चढ़कर पहुंचे दरबार

90 हजार भक्तों ने किए मां शारदा के दर्शन:नवरात्रि के तीसरे दिन करीब 80 हजार लोग सीढ़ियां चढ़कर पहुंचे दरबार

चैत्र नवरात्रि के तीसरे दिन शनिवार को मैहर की मां शारदा देवी के दरबार में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा। देशभर से आए श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन किए और अपनी मन्नतें मांगीं। भारी भीड़ के बावजूद प्रशासन की चौकस व्यवस्था के चलते भक्तों को दर्शन करने में कोई परेशानी नहीं हुई। प्रशासन के आंकड़ों के मुताबिक, शनिवार को कुल 89,936 श्रद्धालुओं ने मां शारदा के दर्शन किए। भक्तों ने अपनी सुविधा के अनुसार अलग-अलग रास्तों का चुनाव किया। सबसे ज्यादा 79,413 भक्त सीढ़ियों के रास्ते मंदिर पहुंचे। 3,200 श्रद्धालुओं ने उड़नखटोले (रोपवे) का आनंद लेते हुए दर्शन किए। 1,323 भक्तों ने वैन के जरिए मंदिर तक का सफर तय किया। सुरक्षा और सुविधा के कड़े इंतजाम सीढ़ी मार्ग से लेकर मंदिर परिसर तक हर जगह पुलिस और मंदिर समिति के लोग मुस्तैद रहे। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए खास इंतजाम किए गए थे, जिससे कहीं भी अफरा-तफरी का माहौल नहीं बना। प्रशासन ने भक्तों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए विशेष व्यवस्थाएं की हैं ताकि नवरात्रि के नौ दिनों तक श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के शांतिपूर्वक दर्शन कर सकें।

बुरहानपुर में नवकुंडीय गायत्री महायज्ञ का दूसरा दिन:36 जोड़ों ने आहुति दी, संस्कार-सद्भाव के संदेश के साथ प्रकृति सेवा का आह्वान

बुरहानपुर में नवकुंडीय गायत्री महायज्ञ का दूसरा दिन:36 जोड़ों ने आहुति दी, संस्कार-सद्भाव के संदेश के साथ प्रकृति सेवा का आह्वान

बुरहानपुर के गायत्री शक्तिपीठ में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर नवकुंडीय गायत्री महायज्ञ का दूसरा दिन शुक्रवार को हुआ। इस आयोजन में 36 जोड़ों ने आहुतियां दीं, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। शिकारपुरा थाना के सामने स्थित गायत्री शक्तिपीठ में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी महायज्ञ के माध्यम से समाज में संस्कार, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश प्रसारित किया जा रहा है। यज्ञ के साथ विभिन्न संस्कारों का भी आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य जनमानस को संस्कृति से जोड़ना था। यज्ञ के दौरान आचार्य विजय जी ने प्रकृति सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन दिनों मुरझाते पौधों को जल देना, पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना और गौमाता को गौ ग्रास अर्पित करना पुण्यकारी है। उन्होंने नीम की नई कोपलों के सेवन को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया। महायज्ञ की पूर्णाहुति के समय आचार्य देवेंद्र जी ने श्रद्धालुओं को एक बुराई त्यागने और नियमित गायत्री मंत्र जप का संकल्प दिलाया। गायत्री परिवार के कार्यकर्ता इन नौ दिनों तक निरंतर गायत्री मंत्र जप, साधना और अनुष्ठान कर रहे हैं, जिससे वातावरण में दिव्यता बनी हुई है। वसंत मोड़े ने गायत्री महायज्ञ के महत्व को समझाते हुए इसे आत्मकल्याण और विश्वकल्याण का श्रेष्ठ माध्यम बताया।

9 दिन तक अखंड ज्योत जलाकर मन्नत मांग रहे श्रद्धालु:छतरपुर में प्राचीन खेरे की देवी मंदिर में सुबह से लगीं कतारें; देखिए तस्वीरें

9 दिन तक अखंड ज्योत जलाकर मन्नत मांग रहे श्रद्धालु:छतरपुर में प्राचीन खेरे की देवी मंदिर में सुबह से लगीं कतारें; देखिए तस्वीरें

छतरपुर में चैत्र नवरात्रि के पहले दिन गुरुवार को जिलेभर के देवी मंदिरों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी है। शहर के सैकड़ों वर्ष पुराने प्राचीन खेरे की देवी माता मंदिर में सुबह से ही दर्शन के लिए लंबी कतारें लगी हुई हैं, जहां श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए अगले 9 दिनों तक लगातार जलने वाली अखंड ज्योत प्रज्ज्वलित कर रहे हैं और विधि-विधान से माता की पूजा-अर्चना का दौर जारी है। स्थानीय मान्यता के अनुसार, शहर का खेरे की देवी माता मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है। कहा जाता है कि नगर की रक्षा के लिए माता यहां विराजमान हुई थीं। इसी आस्था के कारण नवरात्रि के दौरान इस मंदिर में विशेष रूप से धार्मिक माहौल रहता है। व्रत रखकर सुख-समृद्धि की कर रहे कामना मंदिर परिसर में गुरुवार सुबह से ही पूजा, आरती और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया। महिलाएं और युवक-युवतियां पारंपरिक वेशभूषा में माता के दर्शन के लिए पहुंचे। कई श्रद्धालुओं ने व्रत रखकर माता से सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पुजारी बोले- सच्चे मन से मांगी गई इच्छा पूरी होती है नवरात्रि के पहले दिन से ही श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए मंदिर में ज्योत प्रज्ज्वलित करते हैं, जो अगले नौ दिनों तक लगातार जलती रहती है। मंदिर के पुजारी रज्जू महाराज ने बताया, “यहां वर्षों से यह परंपरा चली आ रही है कि भक्त नवरात्रि में ज्योत जलाकर माता से अपनी मनोकामना मांगते हैं। सच्चे मन से मांगी गई हर इच्छा पूरी होती है।” नवरात्रि के पहले दिन उमड़ी इस आस्था की भीड़ से पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया है, जो अगले नौ दिनों तक इसी तरह बना रहेगा। देखिए अन्य तस्वीरें…

चैत्र नवरात्रि शुरू, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा:नरसिंहपुर के सदर मड़िया मंदिर में मांगी हर मुराद पूरी होती; दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु

चैत्र नवरात्रि शुरू, पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा:नरसिंहपुर के सदर मड़िया मंदिर में मांगी हर मुराद पूरी होती; दूर-दूर से पहुंचे श्रद्धालु

चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज गुरुवार से शुरू हो गया है। पहले दिन मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी और पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। नरसिंहपुर शहर के प्राचीन सदर मड़िया मंदिर में भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। यहां सुबह से ही भक्तों का तांता लगा रहा। श्रद्धालुओं ने मां को जल अर्पित कर पूजा की और अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मान्यता है कि मांगी गई हर मुराद पूरी होती मंदिर को लेकर लोगों में गहरी आस्था है कि यहां मांगी गई हर मुराद पूरी होती है। इसी कारण दूर-दूर से श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मनोकामना पूर्ण होने पर भक्त घट-कलश स्थापना भी कराते हैं। मंदिर के पुजारी मोहित कृष्ण शास्त्री ने बताया कि चैत्र नवरात्रि का पहला दिन हिंदू नववर्ष की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है। इस नौ दिवसीय पर्व में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। उन्होंने ब्रह्म पुराण का हवाला देते हुए कहा कि इसी कालखंड में ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की थी, इसलिए इस पर्व का विशेष महत्व है। सच्ची श्रद्धा से मां भगवती सभी मनोकामनाएं पूर्ण करतीं पुजारी ने आगे कहा कि यदि कोई भक्त सच्चे मन और श्रद्धा से मां भगवती का स्मरण करता है, तो मां उसकी पुकार अवश्य सुनती हैं और उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं। यही कारण है कि देशभर में चैत्र नवरात्रि का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जाता है।

राष्ट्रपति अयोध्या पहुंचीं, योगी ने स्वागत किया:रामलला के दर्शन करेंगी; श्रीराम यंत्र के पूजन में शामिल होंगी

राष्ट्रपति अयोध्या पहुंचीं, योगी ने स्वागत किया:रामलला के दर्शन करेंगी; श्रीराम यंत्र के पूजन में शामिल होंगी

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अयोध्या पहुंच गई हैं। वह थोड़ी देर में राम मंदिर पहुंचेंगी। उनका काफिला एयरपोर्ट से रवाना हो चुका है। एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उनका स्वागत किया। राष्ट्रपति नवरात्रि के पहले दिन रामलला का दर्शन-पूजन करेंगी। इसके बाद दूसरे फ्लोर पर बने राम परिवार दरबार के भी दर्शन करेंगी। राष्ट्रपति श्रीराम यंत्र की स्थापना के पूजन कार्यक्रम में भी शामिल होंगी। अयोध्या में करीब 5 घंटे रुकने के बाद वह दोपहर 3 बजे मथुरा के लिए रवाना होंगी। मथुरा में राष्ट्रपति इस्कॉन और प्रेम मंदिर में दर्शन करेंगी। शुक्रवार यानी 20 मार्च को वह प्रेमानंद महाराज से मुलाकात करेंगी। रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद राष्ट्रपति का यह दूसरा अयोध्या दौरा है। इससे पहले वह 1 मई 2024 को अयोध्या आई थीं, तब उन्होंने हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन किया था। राम यंत्र के बारे में जानिए राम यंत्र को कांचीपुरम (तमिलनाडु) स्थित मठ में तैयार किया गया। इसके बाद इसे कांचीपुरम से तिरुपति (आंध्र प्रदेश) लाया गया। फिर रथयात्रा के जरिए 10 दिन पहले इसे अयोध्या पहुंचाया गया। राम यंत्र का वजन 150 किलो है। इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य रघुनाथ दास शास्त्री ने बताया- राम यंत्र एक विशेष वैदिक ज्यामितीय संरचना है। इसमें भगवान श्रीराम और अन्य देवी-देवताओं की दिव्य ऊर्जा को मंत्रों और आकृतियों के माध्यम से स्थापित किया गया है। इसे अत्यंत शुभ और आध्यात्मिक ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है। राष्ट्रपति के अयोध्या दौरे से जुड़ी अपडेट्स जानने के लिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए—

9-Day Event & 5-Day Garba in March 2026

9-Day Event & 5-Day Garba in March 2026

देवास में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर पहली बार माता की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। शहर में नौ दिवसीय आराधना महोत्सव की तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बुधवार शाम को माता की प्रतिमा को जुलूस के रूप में शहर के प्रमुख मार्गों से लेकर विकास नगर स्थित आयोजन स्थल . पांच दिन गरबा का भी आयोजन शहर में महोत्सव 19 मार्च से 28 मार्च 2026 तक चलेगा। 19 मार्च को घट स्थापना के साथ इसका शुभारंभ होगा। इस दौरान धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी। महोत्सव के दौरान 19 से 23 मार्च तक रात 7 बजे से पांच दिवसीय गरबा महोत्सव और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इसके बाद 24 से 26 मार्च तक भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। 27 मार्च को महाप्रसादी, 28 को निकलेगा चल समारोह 27 मार्च को शाम 6 बजे महोत्सव में महाभोजन प्रसादी का आयोजन होगा, जिसमें आमजन को प्रसादी वितरित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, प्रतिदिन आरती के बाद भी महाप्रसादी बांटी जाएगी। महोत्सव का समापन 28 मार्च को शाम 4 बजे होगा। समापन के अवसर पर भव्य झांकी और गरबा के साथ विसर्जन चल समारोह आयोजित किया जाएगा। यह चल समारोह सयाजी गेट से शुरू होकर मीठा तालाब तक जाएगा। आयोजन स्थल के रूप में वीर सावरकर चौराहा, विकास नगर, देवास तय किया गया है।

नवरात्रि में उपवास सिर्फ धर्म ही नहीं सेहत के लिए भी जरूरी, जानें आयुर्वेदिक कारण

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Last Updated:March 18, 2026, 21:27 IST Chaitra Navratri Fasting Benefits: नवरात्रि में व्रत रखना केवल धार्मिक परंपरा नहीं है, बल्कि इसके पीछे आयुर्वेद का गहरा महत्व भी है. इसे सिर्फ आस्था से जोड़कर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि यह शरीर को अंदर से साफ और संतुलित करने का एक अच्छा तरीका है. ख़बरें फटाफट Chaitra Navratri 2026: 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि शुरू हो रही है. हिन्दू धर्म को मानने वाले लोगों के लिए ये 9 दिन बहुत ही अहम होता है. इस दौरान कई लोग उपवास रखते हैं, वहीं कुछ लोग पूजा-पाठ के साथ लहसुन प्याज का सेवन नहीं करते सिर्फ सात्विक भोजन करते हैं. लेकिन ये सिर्फ धार्मिक ही नहीं बल्कि सेहत के नजरिए से भी अहम समय होता है.  ये नवरात्रि ऐसे समय पर आती है जब मौसम बदल रहा होता है. मौसम के इस बदलाव का असर हमारे शरीर पर पड़ता है. आयुर्वेद के अनुसार, इस समय शरीर में वात और पित्त दोष बिगड़ सकते हैं, जिससे पाचन कमजोर हो जाता है और बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में व्रत रखना फायदेमंद होता है. व्रत के दौरान हम हल्का और सात्विक भोजन करते हैं, जैसे फल, कुट्टू, सिंघाड़ा, दही और साबूदाना. ये सभी चीजें पचने में आसान होती हैं. रोजाना तला-भुना और मसालेदार खाना खाने से पाचन तंत्र पर जो दबाव पड़ता है, व्रत के दौरान वह कम हो जाता है. इससे शरीर को आराम मिलता है और वह खुद को ठीक करने लगता है. चैत्र नवरात्रि में उपवास के फायदे आयुर्वेद में पाचन शक्ति, यानी अग्नि, को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है. ऐसे में जब हम व्रत रखते हैं, तो यह अग्नि मजबूत होती है. इससे शरीर में जमा गंदगी (टॉक्सिन्स) बाहर निकलने लगती है. यही वजह है कि व्रत के दौरान लोग खुद को हल्का और ज्यादा ऊर्जावान महसूस करते हैं. नवरात्रि का व्रत सिर्फ शरीर के लिए ही नहीं, बल्कि मन के लिए भी अच्छा और जरूरी होता है. इस समय लोग पूजा, ध्यान और संयम रखते हैं, जिससे मन को शांति मिलती है. आज की तेज भागदौड़ वाली जिंदगी में यह एक तरह का मेंटल डिटॉक्स होता है और हमें अंदर से संतुलित करता है. इसके अलावा, नवरात्रि में खाए जाने वाले ज्यादातर भोजन सात्विक होते हैं. ये न सिर्फ हल्के होते हैं बल्कि शरीर को जरूरी पोषण भी देते हैं. इतना ही नहीं ये फूड्स हमारे इम्युनिटी को बढ़ाने में भी मदद करते हैं, जिससे शरीर को मौसमी बीमारियों से बचने में मदद मिलती है. About the Author शारदा सिंहSenior Sub Editor शारदा सिंह बतौर सीनियर सब एडिटर News18 Hindi से जुड़ी हैं. वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्यू पर आधारित रिपोर्ट्स बनाने में एक्सपर्ट हैं. शारदा पिछले 5 सालों से मीडिया …और पढ़ें First Published : March 18, 2026, 21:27 IST Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.

सट्टे और जुए की कमाई का दान नहीं:गुना में सजेगा 9 फीट की महाकाली का दरबार; सदस्यों की तनख्वाह से होगा आयोजन

सट्टे और जुए की कमाई का दान नहीं:गुना में सजेगा 9 फीट की महाकाली का दरबार; सदस्यों की तनख्वाह से होगा आयोजन

गुना के तलैया मोहल्ले में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर आज जबलपुर से महाकाली की 9 फीट ऊंची प्रतिमा पहुंच रही है, जहां बिना चंदे के समिति सदस्यों की एक महीने की तनख्वाह से 9 दिनों तक ‘गुना की महारानी’ का दरबार सजेगा और शतचंडी यज्ञ चलेगा। झांकी परिसर में समिति द्वारा विशेष बोर्ड लगाए जाएंगे, जिनमें स्पष्ट लिखा होगा कि जुआ, सट्टा या क्रिकेट सट्टा जैसी अवैध गतिविधियों से कमाए गए रुपयों का दान कृपया हमें न दें। समाज में कुरीतियों के खिलाफ संदेश देने के लिए यह कदम उठाया गया है, ताकि लोगों को यह समझाया जा सके कि गलत काम हमेशा गलत ही होता है। बिना चंदे के हो रहा आयोजन, सदस्यों ने दी तनख्वाह इस झांकी की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि आयोजन समिति इसके लिए किसी भी व्यक्ति के पास चंदा मांगने नहीं जाएगी और यह पूरी तरह से बिना चंदे की झांकी है। झांकी का पूरा खर्च उठाने के लिए समिति के सभी कार्यकर्ताओं और सदस्यों ने अपनी एक माह की तनख्वाह या मजदूरी का योगदान दिया है। जबलपुर के कलाकार ने बनाई 9 फीट की प्रतिमा इस बार ‘गुना की महारानी’ के रूप में महाकाली की जो भव्य प्रतिमा स्थापित की जा रही है, उसकी ऊंचाई नौ फीट है। इस 9 फीट ऊंची प्रतिमा का निर्माण जबलपुर के प्रसिद्ध कलाकार विजय सोनकर द्वारा विशेष रूप से किया गया है। प्रदेश में चैत्र नवरात्रि की एकमात्र झांकी पूरे मध्य प्रदेश में एकमात्र गुना ही ऐसा जिला है, जहां चैत्र नवरात्रि के अवसर पर इस तरह का विशेष दरबार लगाया जाता है। पिछले वर्ष से ही तलैया मोहल्ले में यह झांकी लगना शुरू हुई है, जो आकर्षण का केंद्र रही थी और इसे देखने आसपास के जिलों से भी बड़ी संख्या में लोग पहुंचे थे। तीसरे दिन जगराता, दशमी को पालकी में होगा विसर्जन नौ दिनों तक सजने वाले इस दरबार में शतचंडी यज्ञ के साथ-साथ नवरात्रि के तीसरे दिन जगराते का भी आयोजन किया जाएगा। दशमी वाले दिन नौ फीट ऊंचाई वाली माता की प्रतिमा कांधे पर सवार होकर पालकी में झांकी स्थल से सिंगवासा तालाब तक जाएगी।