बुरहानपुर के गायत्री शक्तिपीठ में चैत्र नवरात्रि के अवसर पर नवकुंडीय गायत्री महायज्ञ का दूसरा दिन शुक्रवार को हुआ। इस आयोजन में 36 जोड़ों ने आहुतियां दीं, जिससे वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा से भर गया। शिकारपुरा थाना के सामने स्थित गायत्री शक्तिपीठ में प्रतिवर्ष की तरह इस वर्ष भी महायज्ञ के माध्यम से समाज में संस्कार, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश प्रसारित किया जा रहा है। यज्ञ के साथ विभिन्न संस्कारों का भी आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य जनमानस को संस्कृति से जोड़ना था। यज्ञ के दौरान आचार्य विजय जी ने प्रकृति सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि इन दिनों मुरझाते पौधों को जल देना, पक्षियों के लिए दाना-पानी की व्यवस्था करना और गौमाता को गौ ग्रास अर्पित करना पुण्यकारी है। उन्होंने नीम की नई कोपलों के सेवन को स्वास्थ्य के लिए लाभकारी बताया। महायज्ञ की पूर्णाहुति के समय आचार्य देवेंद्र जी ने श्रद्धालुओं को एक बुराई त्यागने और नियमित गायत्री मंत्र जप का संकल्प दिलाया। गायत्री परिवार के कार्यकर्ता इन नौ दिनों तक निरंतर गायत्री मंत्र जप, साधना और अनुष्ठान कर रहे हैं, जिससे वातावरण में दिव्यता बनी हुई है। वसंत मोड़े ने गायत्री महायज्ञ के महत्व को समझाते हुए इसे आत्मकल्याण और विश्वकल्याण का श्रेष्ठ माध्यम बताया।













































