Left Govt Ends, Congress Returns

2 मिनट पहलेलेखक: ऐश्वर्य राज कॉपी लिंक केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। केरलम में इस हार के बाद 49 साल में यह पहली होने जा रहा है जब देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं है। जानते हैं देश में वामपंथ के विस्तार, जीत और हार से जुड़ी प्रमुख बातें… इससे पहले जानिए लेफ्ट यानी कम्युनिस्ट विचारधारा के बारे में। 1947 में मिली आजादी को मानने से इंकार किया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 1947 में भारत को मिली आजादी को असली आजादी मानने से इंकार कर दिया था। उस वक्त पार्टी का कहना था कि यह आजादी अधूरी और समझौतों का परिणाम है, जिसे उन्होंने ‘झूठी आजादी’ का नाम दिया। इस हकीकत को पूरी तरह स्वीकार करने में पार्टी को 5 साल से ज्यादा का समय लग गया। मार्च 1948 में पार्टी के भीतर एक बड़ा बदलाव हुआ। पीसी. जोशी की जगह बीटी. रणदिवे (BTR) नए जनरल सेक्रेटरी बने। उनके आते ही पार्टी में ‘रणदिवे लाइन’ लागू हुई, जो बेहद कट्टर और आक्रामक थी। इसी सोच के तहत जनवरी 1950 में संविधान लागू होने से पहले ही CPI ने इसका विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पर ‘गुलामी का संविधान’ थोप रहे हैं। लेफ्ट पार्टी ने नेहरू सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। 1948 और 1949 के दौरान यह नीति पूरी तरह विफल रही। इसके बाद मई-जून 1950 में बीटी. रणदिवे को पद से हटा दिया गया। पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने यह स्वीकार किया कि बिना सोचे-समझे 9 मार्च 1949 को देशव्यापी हड़ताल और विद्रोह का जो आह्वान किया गया था, वह बड़ी भूल थी। करीब 6 साल के बाद CPI अपनी कट्टर विचारधारा छोड़कर देश की आजादी की सच्चाई स्वीकार करने के लिए मजबूर हुई। दुनिया की पहली चुनी हुई लोकतांत्रिक लेफ्ट सरकार 5 अप्रैल 1957, केरल के पहले सीएम के रूप में शपथ लेते हुए ईएमएस नंबूदरिपाद । 1956 में त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार को मिलाकर एक नया राज्य केरलम बना। मार्च 1957 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 126 सीटों वालीं विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI को 60 सीट मिलीं। 5 निर्दलीय को मिलाकर उसने सरकार बना ली। ये दुनिया में लेफ्ट की पहली चुनी हुई सरकार थी। ईएमएस नंबूदरीपाद ने मुख्यमंत्री बनने के एक हफ्ते बाद ही दो बड़े कानून लागू किए। पहला- भूमि सुधार कानून और दूसरा- शिक्षा में सुधार को लेकर। भूमि सुधार कानून के बाद बटाईदार किसानों को जमीन खरीदने की छूट मिल गई। लैंडहोल्डिंग की लिमिट तय हो गई। वहीं, एजुकेशन बिल के जरिए प्राइवेट संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए सख्त नियम बना दिए। 2 फरवरी 1959 को इंदिरा गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वो केरलम गईं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नेहरू को सौंप दी। 31 जुलाई 1959 को केरलम सरकार बर्खास्त कर दी गई। गांधी की तस्वीरें हटाईं, माओ–स्टालिन की लगाईं इसी बीच केरलम के स्कूल-कॉलेजों से गांधी की तस्वीर हटाकर माओ और स्टालिन की तस्वीर लगाई जाने लगीं। कहा जाने लगा कि नंबूदरीपाद की सरकार बनाने के लिए कम्युनिस्ट देशों ने फंड भेजे हैं। इसके विरोध में केरलम के गांधी कहे जाने वाले मन्नथ पिल्लई की अगुआई में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। हजारों लोग जेल में डाल दिए गए। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें मछुआरे कम्युनिटी की एक प्रेग्नेंट महिला की जान चली गई। आंदोलन और भड़क उठा। जगह-जगह हिंसा होने लगीं। चीन युद्ध पर सरकार से अलग रुख के कारण दूसरा बड़ा विभाजन 1962 के भारत–चीन युद्ध ने CPI के भीतर वैचारिक दरार बढ़ा दिया। पार्टी का एक धड़ा नेहरू सरकार के समर्थन में था। दूसरा धड़ा चीन को आक्रमणकारी मानने को तैयार नहीं था। ‘राष्ट्रवाद बनाम अंतरराष्ट्रीय साम्यवाद’ की इस बहस के बीच, चीन समर्थक माने जाने वाले नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसी तनाव ने पार्टी के आधार को हिला दिया और कम्युनिस्ट आंदोलन दो फाड़ हो गया। युद्ध के दो साल बाद, 1964 में मतभेद इतने बढ़ गए कि कम्युनिस्ट पार्टी आधिकारिक रूप से विभाजित हो गई। सोवियत संघ की नरम नीति के समर्थक CPI में रहे, जबकि क्रांतिकारी रुख अपनाने वाले नेताओं ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) का गठन किया। साल 1964, CPI (M) की स्थापना के दौरान बाएं से दूसरे नंबर पर ज्योति बसु (पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम) और दूसरी पंक्ति में बाएं से तीसरे नंबर पर केरल के पहले सीएम ईएमएस नंबूदिरीपाद। बंगाल में 1967 में लेफ्ट पश्चिम बंगाल में पहली बार लेफ्ट ने 1967 में ‘यूनाइटेड फ्रंट’ गठबंधन के जरिए सरकार में आई। उस समय अजय मुखर्जी मुख्यमंत्री बने थे और ज्योति बसु डिप्टी सीएम थे। हालांकि, सरकार बहुत अस्थिर रही। 1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई, तो CPI ने शुरुआत में इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का समर्थन किया था, जबकि CPI(M) ने इसका विरोध किया था और उनके कई नेता जेल भी गए थे। 1977 के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट को बंगाल में भारी बहुमत मिला और यहीं से राज्य में कम्युनिस्टों के लंबे शासन की असली शुरुआत हुई। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने और लगातार 2000 तक राज्य के सीएम रहे। उनके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने राज्य में उद्योगों को लाने की कोशिश की। लेकिन सिंगूर और नंदीग्राम जैसे भूमि अधिग्रहण विवादों के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में कम्युनिस्टों के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर दिया। उस वक्त के सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य खुद अपना चुनाव हार गए। 90 के दशक में ज्योति बसु को 3 बार PM बनाने का मौका CBI के पूर्व डायरेक्टर अरुण प्रसाद मुखर्जी ने अपनी किताब ‘राजीव गांधी, ज्योति बसु, इंद्रजीत गुप्त के अनछुए पहलू’ में बताया है कि 1990 और 1991 के उथल-पुथल भरे दौर में राजीव गांधी चाहते थे कि ज्योति बसु देश के प्रधानमंत्री बनें। पहली बार अक्टूबर 1990 में राजीव गांधी ने ज्योति बसु
Left Govt Ends, Congress Returns

23 मिनट पहलेलेखक: ऐश्वर्य राज कॉपी लिंक केरलम विधानसभा चुनाव में पिनराई विजयन की अगुवाई वाले लेफ्ट एलायंस LDF को हार का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस की अगुवाई वाली UDF ने 140 में से 90 से ज्यादा सीटें जीतकर 10 साल बाद सत्ता में वापसी कर ली है। केरलम में इस हार के बाद 49 साल में यह पहली होने जा रहा है जब देश के किसी भी राज्य में लेफ्ट की सरकार नहीं है। जानते हैं देश में वामपंथ के विस्तार, जीत और हार से जुड़ी प्रमुख बातें… इससे पहले जानिए लेफ्ट यानी कम्युनिस्ट विचारधारा के बारे में। 1947 में मिली आजादी को मानने से इंकार किया भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI) ने 1947 में भारत को मिली आजादी को असली आजादी मानने से इंकार कर दिया था। उस वक्त पार्टी का कहना था कि यह आजादी अधूरी और समझौतों का परिणाम है, जिसे उन्होंने ‘झूठी आजादी’ का नाम दिया। इस हकीकत को पूरी तरह स्वीकार करने में पार्टी को 5 साल से ज्यादा का समय लग गया। मार्च 1948 में पार्टी के भीतर एक बड़ा बदलाव हुआ। पीसी. जोशी की जगह बीटी. रणदिवे (BTR) नए जनरल सेक्रेटरी बने। उनके आते ही पार्टी में ‘रणदिवे लाइन’ लागू हुई, जो बेहद कट्टर और आक्रामक थी। इसी सोच के तहत जनवरी 1950 में संविधान लागू होने से पहले ही CPI ने इसका विरोध किया। उन्होंने तर्क दिया कि कांग्रेस के नेता भारतीय जनता पर ‘गुलामी का संविधान’ थोप रहे हैं। लेफ्ट पार्टी ने नेहरू सरकार को हिंसक तरीके से उखाड़ फेंकने का आह्वान किया। 1948 और 1949 के दौरान यह नीति पूरी तरह विफल रही। इसके बाद मई-जून 1950 में बीटी. रणदिवे को पद से हटा दिया गया। पार्टी की सेंट्रल कमेटी ने यह स्वीकार किया कि बिना सोचे-समझे 9 मार्च 1949 को देशव्यापी हड़ताल और विद्रोह का जो आह्वान किया गया था, वह बड़ी भूल थी। करीब 6 साल के बाद CPI अपनी कट्टर विचारधारा छोड़कर देश की आजादी की सच्चाई स्वीकार करने के लिए मजबूर हुई। दुनिया की पहली चुनी हुई लोकतांत्रिक लेफ्ट सरकार 5 अप्रैल 1957, केरल के पहले सीएम के रूप में शपथ लेते हुए ईएमएस नंबूदरीपाद। 1956 में त्रावणकोर, कोचीन और मालाबार को मिलाकर एक नया राज्य केरलम बना। मार्च 1957 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए। 126 सीटों वालीं विधानसभा में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया यानी CPI को 60 सीट मिलीं। 5 निर्दलीय को मिलाकर उसने सरकार बना ली। ये दुनिया में लेफ्ट की पहली चुनी हुई सरकार थी। ईएमएस नंबूदरीपाद ने मुख्यमंत्री बनने के एक हफ्ते बाद ही दो बड़े कानून लागू किए। पहला- भूमि सुधार कानून और दूसरा- शिक्षा में सुधार को लेकर। भूमि सुधार कानून के बाद बटाईदार किसानों को जमीन खरीदने की छूट मिल गई। लैंडहोल्डिंग की लिमिट तय हो गई। वहीं, एजुकेशन बिल के जरिए प्राइवेट संस्थानों को रेगुलेट करने के लिए सख्त नियम बना दिए। 2 फरवरी 1959 को इंदिरा गांधी कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं। इसके बाद वो केरलम गईं। वहां से लौटने के बाद उन्होंने अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नेहरू को सौंप दी। 31 जुलाई 1959 को केरलम सरकार बर्खास्त कर दी गई। गांधी की तस्वीरें हटाईं, माओ–स्टालिन की लगाईं इसी बीच केरलम के स्कूल-कॉलेजों से गांधी की तस्वीर हटाकर माओ और स्टालिन की तस्वीर लगाई जाने लगीं। कहा जाने लगा कि नंबूदरीपाद की सरकार बनाने के लिए कम्युनिस्ट देशों ने फंड भेजे हैं। इसके विरोध में केरलम के गांधी कहे जाने वाले मन्नथ पिल्लई की अगुआई में लाखों लोग सड़कों पर उतर गए। हजारों लोग जेल में डाल दिए गए। आंदोलन को दबाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज किया। इसमें मछुआरे कम्युनिटी की एक प्रेग्नेंट महिला की जान चली गई। आंदोलन और भड़क उठा। जगह-जगह हिंसा होने लगीं। चीन युद्ध पर सरकार से अलग रुख के कारण दूसरा बड़ा विभाजन 1962 के भारत–चीन युद्ध ने CPI के भीतर वैचारिक दरार बढ़ा दिया। पार्टी का एक धड़ा नेहरू सरकार के समर्थन में था। दूसरा धड़ा चीन को आक्रमणकारी मानने को तैयार नहीं था। ‘राष्ट्रवाद बनाम अंतरराष्ट्रीय साम्यवाद’ की इस बहस के बीच, चीन समर्थक माने जाने वाले नेताओं को जेल में डाल दिया गया। इसी तनाव ने पार्टी के आधार को हिला दिया और कम्युनिस्ट आंदोलन दो फाड़ हो गया। युद्ध के दो साल बाद, 1964 में मतभेद इतने बढ़ गए कि कम्युनिस्ट पार्टी आधिकारिक रूप से विभाजित हो गई। सोवियत संघ की नरम नीति के समर्थक CPI में रहे, जबकि क्रांतिकारी रुख अपनाने वाले नेताओं ने मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPI-M) का गठन किया। साल 1964, CPI (M) की स्थापना के दौरान बाएं से दूसरे नंबर पर ज्योति बसु (पश्चिम बंगाल के पूर्व सीएम) और दूसरी पंक्ति में बाएं से तीसरे नंबर पर केरल के पहले सीएम ईएमएस नंबूदिरीपाद। बंगाल में 1967 में लेफ्ट पश्चिम बंगाल में पहली बार लेफ्ट ने 1967 में ‘यूनाइटेड फ्रंट’ गठबंधन के जरिए सरकार में आई। उस समय अजय मुखर्जी मुख्यमंत्री बने थे और ज्योति बसु डिप्टी सीएम थे। हालांकि, सरकार बहुत अस्थिर रही। 1975 में जब इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी लगाई, तो CPI ने शुरुआत में इंदिरा गांधी और इमरजेंसी का समर्थन किया था, जबकि CPI(M) ने इसका विरोध किया था और उनके कई नेता जेल भी गए थे। 1977 के विधानसभा चुनावों में लेफ्ट को बंगाल में भारी बहुमत मिला और यहीं से राज्य में कम्युनिस्टों के लंबे शासन की असली शुरुआत हुई। ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने और लगातार 2000 तक राज्य के सीएम रहे। उनके बाद बुद्धदेव भट्टाचार्य मुख्यमंत्री बने, जिन्होंने राज्य में उद्योगों को लाने की कोशिश की। लेकिन सिंगूर और नंदीग्राम जैसे भूमि अधिग्रहण विवादों के बाद ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस ने 2011 में कम्युनिस्टों के 34 साल पुराने शासन को खत्म कर दिया। उस वक्त के सीएम बुद्धदेव भट्टाचार्य खुद अपना चुनाव हार गए। 90 के दशक में ज्योति बसु को 3 बार PM बनाने का मौका CBI के पूर्व डायरेक्टर अरुण प्रसाद मुखर्जी ने अपनी किताब ‘राजीव गांधी, ज्योति बसु, इंद्रजीत गुप्त के अनछुए पहलू’ में बताया है कि 1990 और 1991 के उथल-पुथल भरे दौर में राजीव गांधी चाहते थे कि ज्योति बसु देश के प्रधानमंत्री बनें। पहली बार अक्टूबर 1990 में राजीव गांधी ने ज्योति बसु से
Tamil Nadu Election Result 2026 LIVE Updates: Assam Kerala Puducherry BJP DMK Congress UDF TVK Winner Candidates List

Hindi News National Tamil Nadu Election Result 2026 LIVE Updates: Assam Kerala Puducherry BJP DMK Congress UDF TVK Winner Candidates List | MK Stalin Vijay Himanta Biswa Sarma Gaurav Gogoi गुवाहाटी/तिरुवनंतपुरम/पुडुचेरी5 मिनट पहले कॉपी लिंक असम, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी विधानसभा चुनाव के नतीजे आज आ जाएंगे। वोटों की गिनती सुबह 8 बजे शुरू होगी। पहले डाक मत पत्र गिने जाएंगे, घंटेभर बाद खुलेंगी ईवीएम। नतीजों से पहले आए एग्जिट पोल्स में असम में फिर हिमंता सरकार बनने का अनुमान है। तमिलनाडु में DMK की वापसी के आसार हैं, तो केरलम में कांग्रेस की अगुआई वाले UDF को बढ़त है। पुडुचेरी में NDA गठबंधन की वापसी दिखाई दे रही है। काउंटिंग के रुझान और नतीजे दैनिक भास्कर एप पर Live टैली में देख सकते हैं, 4 राज्यों के चुनावी नतीजों से जुड़ी पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाएं… लाइव अपडेट्स 5 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिनलाडु: चेन्नई में DMK मुख्यालय की सुरक्षा बढ़ी तमिलनाडु के चेन्नई में DMK मुख्यालय के बाहर सुरक्षा बढ़ाई गई है। आज तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का रिजल्ट आना है। 11 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु: 10 एग्जिट पोल- 6 में DMK+ की वापसी संभव 15 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु में अब तक का सबसे ज्यादा मतदान तमिलनाडु की 234 सीटों पर 23 अप्रैल को वोटिंग हुई थी। इस बार अब तक का सबसे ज्यादा 85.10% मतदान हुआ। इससे पहले सबसे ज्यादा मतदान 2011 में 78.29% हुआ था। 16 मिनट पहले कॉपी लिंक 2026 में महिलाओं ने पुरुषों से 2% ज्यादा वोटिंग की इस चुनाव में वोट डालने में महिलाओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा रही। कुल 2.52 करोड़ महिलाओं ने वोट डाला, जबकि पुरुषों की संख्या 2.35 करोड़ रही। महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों की तुलना में 2.1% ज्यादा दर्ज किया गया। 16 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछली बार DMK को AIADMK से 6% ज्यादा वोट, सरकार बदली 1952 से अब तक तमिलनाडु में कांग्रेस, DMK, AIADMK की सरकार रही है। 1967 से DMK और AIADMK बारी-बारी से सत्ता में आती रहीं। हालांकि, 2011 से ट्रेंड बदला। 2011 और 2016 में लगातार दो बार AIADMK सत्ता में आई। 2021 में DMK ने वापसी की। वोट शेयर के लिहाज से देखें तो 2021 में DMK ने AIADMK से 5.7% ज्यादा वोट हासिल किए। 17 मिनट पहले कॉपी लिंक तमिलनाडु: भाजपा 46 साल में सिर्फ 2 बार 4-4 सीटें जीत पाई भाजपा तमिलनाडु में 1980 से चुनाव लड़ रही है, लेकिन अब तक 2001 और 2021 में उसे 4-4 सीटें ही मिल सकी हैं। यहां भाजपा AIADMK और PMK के साथ गठबंधन में है। 19 मिनट पहले कॉपी लिंक असम: 12 एग्जिट पोल- सभी में भाजपा की वापसी 19 मिनट पहले कॉपी लिंक असम के 26 जिलों में 80% से ज्यादा मतदान असम के 74 साल के इतिहास में इस बार सबसे ज्यादा 85.91% वोटिंग हुई। 35 जिलों में से 26 में 80% से ज्यादा मतदान हुआ। साउथ सलमारा मनकचर जिले में सबसे ज्यादा 95.56% और वेस्ट कार्बी आंगलॉन्ग में सबसे कम 75.25% वोटिंग हुई। 20 मिनट पहले कॉपी लिंक पिछले 3 चुनावों में महिलाओं ने पुरुषों से ज्यादा वोटिंग की असम में पिछले तीन चुनावों में महिलाओं का वोटिंग परसेंट पुरुषों से ज्यादा रहा है। महिलाओं ने 2016 में 1.69%, 2021 में 0.41% और 2016 में 1.56% ज्यादा वोट डाले। 21 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा 10 साल से सत्ता में, वोट शेयर 48.03% बढ़ा 2011 में भाजपा को असम में सिर्फ 11.5% वोट मिले थे। 2021 में पार्टी का वोट शेयर 59.5% हो गया। यानी पिछले 10 साल में भाजपा का वोट शेयर करीब 48.03% बढ़ा, कांग्रेस का वोट शेयर करीब 10% गिर गया। 24 मिनट पहले कॉपी लिंक असम में 76 साल में 15 सीएम, 51 साल कांग्रेस सरकार असम में 76 साल में 15 मुख्यमंत्री बन चुके हैं। करीब 51 साल कांग्रेस के 10 मुख्यमंत्रियों ने सत्ता संभाली। 1978 में पहली गैर-कांग्रेसी सरकार बनी। जनता पार्टी के गोलाप बोरबोरा पहले गैर-कांग्रेसी सीएम बने, लेकिन 2 साल बाद कांग्रेस फिर सत्ता में लौटी। 2016 में पूरे नॉर्थ-ईस्ट में असम ऐसा राज्य बना, जहां बीजेपी ने पहली बार सरकार बनाई। सर्बानंद सोनोवाल सीएम बने। 2021 में लगातार दूसरी बार बीजेपी ने बहुमत हासिल किया। हिमंता बिस्व सरमा ने सत्ता संभाली। यहां कांग्रेस ने भाजपा के खिलाफ 6 पार्टियों से गठबंधन किया है। 25 मिनट पहले कॉपी लिंक केरलम के 8 एग्जिट पोल में से 7 में UDF सरकार 25 मिनट पहले कॉपी लिंक केरलम में पिछली बार से 4.27% ज्यादा वोटिंग केरलम में 39 साल बाद सबसे ज्यादा 78.27% वोटिंग हुई। इससे पहले 1987 में 80.54% वोटिंग हुई थी। 14 जिलों में से दो में 80% से ज्यादा और 10 जिलों में 70% से ज्यादा वोटिंग हुई। कोझिकोड में सबसे ज्यादा 81.32% और पथनमथिट्टा में सबसे कम 70.76% मतदान हुआ। राज्य की कुल 140 सीटों पर 9 अप्रैल को सिंगल फेज की वोटिंग में 2.6 करोड़ वोटर्स ने वोट दिया 28 मिनट पहले कॉपी लिंक पुरुषों के मुकाबले 5% ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले केरलम में इस बार के चुनाव में पुरुषों की तुलना में 5% ज्यादा महिलाओं ने वोटिंग की। कुल मतदान 78.27% हुआ, जिसमें 75.01% वोटिंग पुरुष और 80.86% महिलाओं ने वोट किया। 29 मिनट पहले कॉपी लिंक LDF और UDF के वोट शेयर में 3-4% अंतर का ट्रेंड केरलम में LDF और UDF के वोट शेयर में लगभग 3-4% का अंतर रहता आया है। हालांकि 2011 की तुलना में 2021 में LDF के वोट शेयर में करीब 4% की गिरावट आई थी, फिर भी सरकार LDF की बनी थी। 30 मिनट पहले कॉपी लिंक पिनाराई विजयन लगातार 2 बार सीएम बनने वाले इकलौते राजनेता 1956 में केरलम के गठन के बाद से अब तक राज्य में 12 मुख्यमंत्री बन चुके हैं। इनमें से 6 सीएम लेफ्ट के रहे, जिन्होंने 39 साल सत्ता संभाली। वहीं, 4 सीएम कांग्रेस के बने, जिन्होंने 28 साल सरकार चलाई। CPI(M) के ई.के. नयनार सबसे लंबे समय तक 11 साल सीएम रहे। उन्होंने 3 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, लेकिन लगातार कभी कुर्सी नहीं संभाली। यहां पी विजयन लगातार 2 बार सीएम बनने वाले इकलौते राजनेता हैं। 30 मिनट पहले कॉपी लिंक
Mamata Banerjee; West Bengal Election Result 2026 LIVE Update: BJP TMC Congress Winner Candidates List | Suvendu Adhikari Adhir Ranjan

12:41 AM4 मई 2026 कॉपी लिंक बंगाल चुनाव में 5 बड़े मुद्दे SIR में वोट कटना: पश्चिम बंगाल में कुल रजिस्टर्ड वोटर्स की संख्या 7.66 करोड़ थी। चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) हुआ, जिसमें 91 लाख नाम हटाए गए। अब वोटर्स की संख्या घटकर 6.75 करोड़ रह गई, यानी 11.8% की कमी। सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर वोटर्स की आपत्तियां सुनने के लिए 19 ट्रिब्यूनल नियुक्त किए थे। पिछले महीने से, जब ये ट्रिब्यूनल बने, तब से उनके पास 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर की गईं। यह साफ नहीं है कि इनमें से कितनी अपीलें सुनी गईं। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने 28 अप्रैल कहा कि उनके पास निपटाए गए मामलों का आंकड़ा नहीं है। अवैध घुसपैठियों का मुद्दा: 2021 के बंगाल चुनाव में 140 से अधिक सीटों पर जीत का अंतर 1000 से 5000 के बीच था। कई सीटों पर इस अंतर से ज्यादा वोट कट गए हैं। बीजेपी ने वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 91 लाख नामों को ‘अवैध घुसपैठियों’ और ‘ब्लैक वोट्स’ कहा। महिलाओं से जुड़ी योजनाएं: पिछले 3 चुनाव में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा वोट कर रही हैं। इस बार तो यह अंतर डेढ़ फीसदी तक बढ़ा है। जानकार इसकी वजह ममता सरकार की महिलाओं से जुड़ी 3 बड़ी योजनाएं- लक्ष्मीर भंडार, कन्याश्री और रूपश्री प्रकल्प को बताते हैं। भाजपा ने भी इस बार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, पीएम आवास योजना, शौचालय और महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। घोषणा पत्र में गरीब महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपए देने का वादा किया। महिला आरक्षण का मुद्दा: चुनाव से ठीक पहले सरकार संसद में परिसीमन से जुड़ा बिल लाई। टीएमसी ने इसका विरोध किया। इसके बाद PM मोदी से लेकर शाह और बाकी बड़े नेताओं ने हर रैली में कहा गढ़ा कि ममता महिलाओं को सत्ता में 33% हिस्सेदारी नहीं देना चाहती हैं। एंटी इनकंबेंसी: TMC 2011 के बाद लगातार 15 साल से सत्ता में है। उसके नेताओं पर राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला जैसे आरोप लगे हैं। अगर भाजपा टीएमसी के वोट शेयर में 3 से 5% की सेंध लगा देती है, तो बढ़त ले लेगी।
जोरहाट में मौलिक की तैयारी पूरी: 4 मई को होगी गणना की गणना, सुरक्षा के लिए तैयारी

त्वरित पढ़ें दिखाएँ एआई द्वारा उत्पन्न मुख्य बिंदु, न्यूज़ रूम द्वारा सत्यापित सीसीटीवी निगरानी, वीवीपीएटी और मिलान मीडिया के लिए विशेष सुविधाएँ उपलब्ध हैं। असम विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों की घड़ी के करीब आते ही जोरहाट जिला प्रशासन ने प्राथमिक के लिए सभी दल पूरी तरह से कर ली हैं। जिला (डीसी) जय शिवानी ने बताया कि प्राथमिक सोमवार (4 मई, 2026) को सुबह 8:00 बजे से शुरू होगी। उन्होंने सिद्धांत दिया कि साधारण प्रक्रिया के लिए साधारण, सरल और सरल उपकरणों के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि ज़ोराहाट इलेक्ट्रॉनिक्स जिले के अंतर्गत आने वाले चार विधानसभा क्षेत्र, जिनमें 99-टियोक, 100-जोरहाट, 101-मरियानी और 102-टीटाबोर शामिल हैं, इस महीने की शुरुआत में 9 अप्रैल को सहज से बाढ़ आ गई थी। वोटों की गिनती के लिए दो क्षेत्रीय केंद्र बनाए गए डीसी जय शिवानी ने कहा कि सोमवार (4 मई, 2026) को होने वाली वोटिंग गणना के लिए दो केंद्र बनाए गए हैं। इसमें पहला जोरहाट गर्ल्स एचएस और एमपी स्कूल है, जहां 99-टायोक विधानसभा क्षेत्र में आने वाले पोलिंग बूथों पर वोटों की गिनती होगी। जबकि दूसरा गिनती केंद्र जोरहाट बॉयज एचएस और एमपी स्कूल है, जहां 100-जोरहाट, 101-मरियानी और 102-टिटाबोर विधानसभा क्षेत्र के लिए प्राथमिक की जाएगी। यह भी पढ़ें: ‘200 से ज्यादा पारियां जीतेंगे’, ममता बनर्जी ने टीएमसी की जीत का दावा किया, एलेक्टिट पोल को बताया गलत वोट गिनती के लिए क्या-क्या की व्यवस्था है? अल्लाह शिवानी ने बताया कि तीन के लिए सभी स्थापित केंद्रों पर सभी आवश्यक व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। इसमें टियोक विधानसभा क्षेत्र – दो वोट गिनती हॉल, 17 स्टॉक टेबल, 4 पोस्टल बैलेट टेबल, कुल 15 राउंड। जोरहाट क्षेत्र – एक प्रारंभिक हॉल, 13 स्टॉक टेबल, 3 पोस्टल बैलेट टेबल, कुल 14 राउंड। मरियानी विधानसभा क्षेत्र – एक मातृभाषा हॉल, 14 संग्रहालय टेबल, 3 पोस्टल बैलेट टेबल, कुल 15 राउंड। तिताबोर विधानसभा क्षेत्र – दो माध्यमिक हॉल, 20 मठ टेबल, 3 पोस्टल बैलेट टेबल, कुल 13 राउंड। उन्होंने कहा कि गणित की हर दौर की गिनती पूरी होने के बाद नतीजों की घोषणा की जाएगी और मीडिया कक्ष उपलब्ध कराया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से क्या किये गये हैं सुशील? उन्होंने आगे कहा कि मौलिक को सुरक्षित और व्यावहारिक से लेकर त्रि-स्तरीय व्यवस्था सुरक्षा लागू की गई है। पहला घेरा (100 मीटर मीटर): जिला पुलिस सुरक्षा, यह क्षेत्र पैदल क्षेत्र घोषित रहेगा और किसी भी तरह के वाहनों की अनुमति नहीं होगी। दूसरा घेरा (प्रवेश द्वार): राज्य सशस्त्र पुलिस द्वारा पर्यवेक्षण, जहां माइक्रोस्कोपी ली जाएगी। मोबाइल, लैपटॉप, कैमरा, मशीन, हथियार और अन्य प्रतिबंधित सामग्री को अंदर ले जाना पूरी तरह से अनुचित होगा। तीसरा घेरा (मतगणना हॉल): केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सीएपीएफ) द्वारा सुरक्षा, जहां अतिरिक्त जांच की जाएगी। इस दौरान केवल विशिष्ट पहचान पत्र या पास रखने वाले व्यक्तियों को ही प्रवेश की अनुमति होगी। क्या है प्रतिबंधात्मक आदेश? जिला जय शिवानी ने कहा कि जिस दिन टिकटों की गिनती होगी, उस दिन सुबह 6 बजे केंद्र के 100 मीटर के खंड में बीएनएसएस 2023 की धारा 163 लागू रहेगी। बिना अनुमति के किसी भी प्रकार की भीड़ या गतिविधि प्रतिबंधित रहेगी। वोट गिनती हॉल के अंदर फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर रोक रहेगी, हालांकि अधिकृत मीडिया वोटिंग को हैंडहेल्ड कैमरा ले जाने की सुविधा होगी। मित्र और पर्यवेक्षक उन्होंने कहा कि पूरी वोट गिनती प्रक्रिया की 100 प्रतिशत सीसीटीवी निगरानी और वीडियोग्राफी की जाएगी। केवल अधिकृत लेखांकन कंपनी को प्रवेश मिलेगा। हर टेबल पर माइक्रो-ऑब्जर्वर और इलेक्ट्रॉनिक्स कमीशन की तरफ से नियुक्त ऑब्जर्वर की निगरानी करेंगे। मसौदे की गिनती के बाद वीवीपैट पर्चियों का मिलान अनिवार्य रूप से किया जाएगा। मीडिया के लिए अन्य सुरक्षा उपकरण के अंदर एक विशेष मीडिया सेंटर स्थापित किया गया है, जहां एलईडी स्क्रीन, इंटरनेट और सार्वजनिक एड्रेस सिस्टम की सुविधा होगी। इसके अलावा, अन्य संरचनाओं पर बात करें, तो मेडिकल टीम और स्पीकर की व्यवस्था की गई है, फायर ब्रिगेड की आर्किटेक्चर होगी और बिजली के लिए डीजी सेट के माध्यम से आर्किटेक्चर की व्यवस्था भी की गई है। यह भी पढ़ें: बंगाल का ‘काउंटिंगबोट’ सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, टीएमसी का खारिज, एआईयूडीएफ बोला- चुनाव आयोग पर अब भरोसा नहीं (टैग्सटूट्रांसलेट)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)जोरहाट(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)गौरव गोगोई(टी)बीजेपी(टी)कांग्रेस(टी)असम विधानसभा चुनाव 2026(टी)जोरहाट(टी)असम(टी)हिमंत बिस्वा सरमा(टी)गौरव गोगोई(टी)भाजपा(टी)कांग्रेस
Trinamool Congress protest EVM strongroom in Kolkata, mamata banerjee, TMC West Bengal Chief Electoral Office, Election updates

Hindi News National Trinamool Congress Protest EVM Strongroom In Kolkata, Mamata Banerjee, TMC West Bengal Chief Electoral Office, Election Updates कोलकाता2 मिनट पहलेलेखक: सृष्टि मिश्रा और सुनील मौर्य कॉपी लिंक पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बुधवार देर रात 1 बजे कहा, ‘अगर EVM लूटने और मतगणना में हेरफेर की कोशिश हुई तो हम जान की बाजी लगा देंगे।’ वे भवानीपुर के शेखावत मेमोरियल स्कूल स्थित स्ट्रॉन्ग रूम 4 घंटे से ज्यादा वक्त रहीं। दरअसल, टीएमसी ने आरोप लगाया कि भाजपा और चुनाव आयोग के अधिकारी मतपेटियां खोलने की कोशिश कर रहे हैं। सबूत में सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी शेयर किया। इसके बाद विवाद बढ़ गया। पार्टी के कार्यकर्ता अनुशीलन केंद्र के स्ट्रॉन्ग रूम पहुंच गए। यहां धरना शुरू कर दिया। उधर, चुनाव आयोग ने कहा, ‘पोस्टल बैलेट की छंटाई हो रही थी, पार्टियों को बुलाया, लेकिन कोई नहीं आया। बाद में CCTV को लेकर चिंता जताई। अब सब कुछ ठीक है।’ फोटोज में देखिए TMC-BJP धरना-प्रर्दशन बुधवार शाम 8 बजे धरना शुरू टीएमसी उम्मीदवार कुणाल घोष (बाएं से दूसरे), शशि पांजा (बीच में) और टीएमसी कार्यकर्ताओं ने खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर धरने पर बैठे। रात 8:20 बजे चुनाव आयोग के अफसरों ने समझाया कुणाल घोष और शशि पांजा को चुनाव आयोग के अफसरों ने समझाया, लेकिन वह नहीं माने करीब 9 बजे तक धरने पर बैठे रहे। 9 बजे सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई कोलकाता के खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई। बाहर टीएमसी के कार्यकर्ता नारेबाजी कर रहे थे। 9:30 बजे कार्यकर्ताओं ने घुसने की कोशिश की टीएमसी कार्यकर्ता के बाद भाजपा कार्यकर्ता भी पहुंच गए। भीड़ को देखते हुए सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभाला और लोगों को रोका। खुदीराम अनुशीलन केंद्र स्थित स्ट्रॉन्ग रूम की 24 घंटे निगरानी हो रही है। इसकी रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। देखिए वह VIDEO जिसके बाद हंगामा हुआ… TMC ने X पर वीडियो पोस्ट कर लिखा- CCTV फुटेज में साफ दिख रहा है कि बीजेपी और चुनाव आयोग मिलकर खुलेआम चुनाव में धांधली कर रहे हैं। बंगाल चुनाव से जुड़ी पल-पल की अपडेट्स के लिए नीचे के ब्लॉग से गुजर जाएं… अपडेट्स 29 मिनट पहले कॉपी लिंक कोलकाता पुलिस के लाठीचार्ज में घायल BJP कार्यकर्ता बोला- ये सब ममता का नाटक 29 मिनट पहले कॉपी लिंक EVM से छेड़खानी का पूरा विवाद समझें भास्कर रिपोर्टर सुनील मौर्य और सृष्टि मिश्रा से 30 मिनट पहले कॉपी लिंक भाजपा प्रवक्ता बोले- खिसियानी बिल्ली खंबा नोचे, ममता हार के डर से बौखलाईं भाजपा के प्रवक्ता नवीन मिश्रा ने आरोप लगाया कि TMC की जिस गाड़ी को कलकत्ता पुलिस ने स्ट्रॉन्ग रूम के बैकसाइड पर पार्क करवाया था, उसमें निश्चित तौर पर EVM रही होंगी, जिन्हें बदलने के लिए यह पूरी साजिश रची गई है। ममता बनर्जी को समझ आ गया है कि वे चुनाव हार रही हैं। खिसयानी बिल्ली खंबा नोंचे। ममता ने आज दोपहर ही अपनी गुंडावाहिनी को एक्टिव रहने का मैसेज दिया था। वे पूरे बंगाल में स्ट्रॉन्ग रूम में हंगामा करवाना चाहती हैं, ताकि बंगाल और उसकी संस्कृति बदनाम हो। लेकिन जनता ने अपना फैसला कर दिया है। 31 मिनट पहले कॉपी लिंक चुनाव आयोग बोला- पोस्टल बैलेट छंट रहे थे, पार्टियों को बुलाया, लोग आए नहीं पश्चिम बंगाल के CEO मनोज कुमार अग्रवाल ने स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर चल रहे विवाद पर कहा, “पोस्टल बैलेट की छंटाई शाम 4 बजे की गई थी; पार्टियों ने आमंत्रण को नजरअंदाज कर दिया, और बाद में CCTV को लेकर चिंता जताई। अब सब कुछ ठीक है।” DEO स्मिता पांडे ने बताया- आज जो हुआ वह हमारी कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है, जिसमें पोस्टल बैलेट्स को अलग-अलग किया जाता है। अलग-अलग जिलों में, जो पोलिंग कर्मचारी ड्यूटी पर होते हैं, वे भी वोट डालते हैं और वे पोस्टल बैलेट्स के जरिए ऐसा करते हैं। 31 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता का आरोप- EVM लूटने की कोशिश हुई, हम ऐसा नहीं होने देंगे ममता ने मीडिया के सवाल पर बताया कि जब उनके पास EVM से छेड़छाड़ करने वाला वीडियो पहुंचा, तभी वे यहां आईं। EVM लूटने की कोशिश की जा रही थी, लेकिन हम ऐसा नहीं होने देंगे। यह हमारा फर्ज है कि हम यह सुनिश्चित करें कि नागरिकों के वोटों को ठीक से सुरक्षित रखा जाए और कुछ जानकारी मिलने के आधार पर, हम यहां आए हैं।” ममता बोलीं- “जब से चुनाव की घोषणा हुई है, वे कह रहे हैं कि वे चुनाव आयोग के अधीन हैं। और कोई ‘सुपर पावर’ काम कर रही है और उन पर दबाव डाल रही है। और हर दिन वे वीडियो कॉल, मीटिंग या वॉट्सऐप के जरिए संपर्क कर रहे हैं… वहां सिर्फ ऑब्ज़र्वर मौजूद हैं; इस मामले में उनकी कोई भूमिका नहीं है…” 32 मिनट पहले कॉपी लिंक ममता बोलीं- केंद्रीय सुरक्षा बलों ने मुझे अंदर जाने से रोका ममता ने बाहर आने के बाद कार्यकर्ताओं और मीडिया को बताया- “मैं यहां इसलिए आई हूं, क्योंकि यहां EVMs के लिए एक स्ट्रॉन्ग रूम है। हमें कई जगहों पर गड़बड़ियां मिलीं, इसलिए जब मैंने TV पर यह देखा, तो मुझे लगा कि मुझे यहां आकर देखना चाहिए। मैं आई, लेकिन केंद्रीय बलों ने मुझे रोक दिया। मैंने उनसे कहा कि मुझे अंदर जाने का अधिकार है; चुनाव नियमों के अनुसार, उम्मीदवारों को सील किए गए कमरे के बाहर तक जाने की अनुमति होती है। इसके बाद मुझे अंदर जाने दिया गया… अगर कोई गड़बड़ी हुई है, तो हम इसके खिलाफ लड़ेंगे।” 33 मिनट पहले कॉपी लिंक भवानीपुर स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर हंगामा, BJP कार्यकर्ता से मारपीट; 2 वीडियो पहला वीडियो: EVM स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर BJP कार्यकर्ता वहां तैनात सुरक्षा बलों से बहस करते दिख रहे हैं। वे पूछ रहे हैं कि यहां TMC का कैंपेन व्हीकल क्यों आया है। दूसरा वीडियो: इस वीडियो में सुरक्षाबल भाजपा के एक कार्यकर्ता को खदेड़ रहे हैं। यह कहा जा रहा है कि स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर केवल मीडिया और अधिकृत एजेंट को ही जाने की परमिशन है। 34 मिनट पहले कॉपी लिंक आईपैक डायरेक्टर को जमानत, शाम को आदेश-इन्हें छोड़ा न जाए दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग केस में आईपैक के
पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026: इस एग्जिट पोल में कांग्रेस की ‘बल्ले-बल्ले’, बंगाल में पांच गुना पार्टी का फायदा, फिर रह गईं टीएमसी-बीजेपी

पश्चिम बंगाल में रविवार (29 अप्रैल 2026) को दूसरे चरण का मतदान समाप्त हो गया है। इसके साथ ही सामने आए एक सर्वेक्षण में भी नतीजे सामने आए हैं। हालाँकि, इस बीच पोल डायरी के एक सर्वे में कांग्रेस को बड़ा फ़ायदा मिलता दिख रहा है। पोल डायरी के ताजा सर्वे के मुताबिक बंगाल में कांग्रेस 3 से 5 पर जीत हासिल करती नजर आ रही है। इसके अलावा ममता बनर्जी की टीएमसी 127, बीजेपी 171, लेफ्ट फ्रंट 3 और अन्य 1 सीट पर परती नजर आ रही हैं। पोल डायरी के सर्वे में कांग्रेस को 5 सीटों पर जीत हासिल कर प्रचंड बहुमत से सरकार बनाई गई थी। बीजेपी 71 स्टार्टअप्स पर काम कर रही थी। हालाँकि, इस बार बीजेपी के आंकड़े सुशराते नजर आ रहे हैं। ये भी पढ़ें: तमिलनाडु एग्जिट पोल 2026: तेलंगाना एलेक्टिट पोल में आया नया खुलासा! स्टालिन नहीं इसे सीएम बनाना चाहती है जनता, जानें नाम पश्चिम बंगाल में दो चरणों में रिकॉर्ड वोटिंग हुई निर्वाचन आयोग के अनुसार पश्चिम बंगाल में दो चरणों में हुए चुनावों में रिकॉर्ड 92.47 प्रतिशत मतदान हुआ है, जो स्वतंत्रता के बाद सबसे अधिक है। शाम 7.45 बजे तक, पश्चिम बंगाल में चुनाव के दूसरे चरण में मतदान प्रतिशत 91.66 रहा। 23 अप्रैल को पहले चरण के मतदान में मतदान प्रतिशत 93.19 रहा था। आयोग ने कहा, ”बंगाल में कुल मतदान प्रतिशत 92.47 प्रतिशत है.” पश्चिम बंगाल में 6.81 करोड़ वोट हैं. इससे पहले, राज्य में सबसे अधिक मतदान 2011 के चुनाव में 84.72 प्रतिशत दर्ज किया गया था। इस चरण में महिला झील की भागीदारी पुरुषों की तुलना में थोड़ी अधिक रही। विद्युत आयोग के अनुसार, कुल महिलाओं का प्रतिशत 92.28 प्रतिशत रहा, जबकि पुरुषों का प्रतिशत 91.07 रहा। ये भी पढ़ें: बंगाल में दो चुनावों में बीजेपी की करारी हार! क्या ‘दीदी’ के गढ़ में नहीं खिलेगा कमल, टीएमसी से मिल रही जीत? (टैग्सटूट्रांसलेट)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल एग्जिट पोल 2026(टी)कांग्रेस(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)टीएमसी(टी)बंगाल चुनाव 2026(टी)एग्जिट पोल विवाद(टी)डेरेक ओ
‘ममताजी बंगाल में क्या करती हैं, मोदीजी देश में क्या करते हैं’: राहुल गांधी ने ‘अमीर समर्थक’ राजनीति के लिए पीएम और सीएम पर हमला किया | चुनाव समाचार

आखरी अपडेट:26 अप्रैल, 2026, 00:21 IST राहुल ने एक चुनावी रैली के दौरान कहा कि जहां पीएम मोदी दिल्ली में कॉरपोरेट-अनुकूल एजेंडे को बढ़ावा देते हैं, वहीं ममता ने कोलकाता में इसी तरह के ‘अभिजात वर्ग-केंद्रित’ शासन मॉडल को दोहराया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी, शनिवार, 25 अप्रैल, 2026 को हुगली जिले में राज्य विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले पार्टी के पश्चिम बंगाल अध्यक्ष और सेरामपुर निर्वाचन क्षेत्र से उम्मीदवार शुभंकर सरकार के समर्थन में एक सार्वजनिक बैठक के दौरान सभा का अभिवादन करते हैं। तस्वीर/पीटीआई जैसे ही पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण के लिए उच्च-स्तरीय अभियान चरम पर पहुंच गया है, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) दोनों के खिलाफ तीखा हमला शुरू कर दिया है। शनिवार को हुगली, कोलकाता और दक्षिण 24 परगना में रैलियों की एक श्रृंखला को संबोधित करते हुए, गांधी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के समान वैचारिक विचारधारा के साथ काम करने का आरोप लगाया, उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों नेता गरीबों के कल्याण के बजाय सत्ता के संचय और अमीरों के हितों को प्राथमिकता देते हैं। ‘मिरर इमेज’ आरोप लोकसभा में विपक्ष के नेता ने राज्य और केंद्रीय प्रशासन के बीच समानताएं खींचते समय शब्दों में कोई कमी नहीं की। सेरामपुर में एक विशाल सभा में बोलते हुए, गांधी ने कहा कि बंगाल में टीएमसी द्वारा अपनाई गई रणनीति और राष्ट्रीय स्तर पर भाजपा की रणनीति के बीच “कोई अंतर नहीं” है। उन्होंने तर्क दिया कि जहां मोदी दिल्ली में कॉर्पोरेट-अनुकूल एजेंडे को बढ़ावा देते हैं, वहीं बनर्जी ने कोलकाता में एक समान “अभिजात वर्ग-केंद्रित” शासन मॉडल को दोहराया है, जिससे राज्य के हाशिए पर रहने वाले समुदायों को पीछे छोड़ दिया गया है। गांधी ने विशेष रूप से इस बात पर प्रकाश डाला कि उन्होंने मुख्यमंत्री पर केंद्रीय दबाव की कमी बताई। गांधी ने भीड़ से कहा, “मेरे खिलाफ 36 मामले हैं क्योंकि मैं हर दिन भाजपा से लड़ता हूं; ईडी ने मुझसे 55 घंटे तक पूछताछ की और मेरा घर छीन लिया।” “ममताजी के साथ ऐसा क्यों नहीं हुआ? ऐसा इसलिए है क्योंकि वह बंगाल में जो करती हैं, मोदीजी देश में करते हैं। वह प्रभावी रूप से भाजपा के लिए रास्ता साफ कर रही हैं।” ‘अमीर बनाम गरीब’ गतिशीलता पर ध्यान दें गांधीजी की बयानबाजी का केंद्र आर्थिक असमानता का विषय था। उन्होंने दोनों नेताओं पर बाहरी या कॉर्पोरेट हितों द्वारा “नियंत्रित” होने का आरोप लगाया – आरोप लगाया कि प्रधान मंत्री की नीतियां अंतरराष्ट्रीय दबावों से प्रभावित थीं जबकि टीएमसी ने बंगाल में एक दशक तक “औद्योगिक क्षय” की अध्यक्षता की थी। उन्होंने वादा किया कि कांग्रेस के नेतृत्व वाला विकल्प “लोगों के बजट” पर ध्यान केंद्रित करेगा, जिसमें उनकी पार्टी की पांच गारंटियों पर प्रकाश डाला जाएगा, जिसमें महिलाओं के लिए 2,000 रुपये मासिक भत्ता और जिला अस्पतालों में मुफ्त कैंसर इलाज शामिल है। चरण 2 में रणनीतिक बदलाव इस हमले का समय महत्वपूर्ण है. 23 अप्रैल को पहले चरण में रिकॉर्ड तोड़ 92.72% मतदान के बाद, 29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण में 142 सीटें शामिल होंगी, जिनमें कोलकाता और उत्तर और दक्षिण 24 परगना के महत्वपूर्ण शहरी क्षेत्र शामिल हैं। कांग्रेस को टीएमसी और बीजेपी दोनों के लिए एक विशिष्ट तीसरे विकल्प के रूप में स्थापित करके, गांधी उस राज्य में “मध्यम आधार” को फिर से हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं, जिसने एक दशक से तीव्र द्विध्रुवीय प्रतियोगिता देखी है। चुनी हुई कहानियाँ, आपके इनबॉक्स में हमारी सर्वोत्तम पत्रकारिता वाला एक न्यूज़लेटर जमा करना पहले प्रकाशित: 26 अप्रैल, 2026, 00:21 IST समाचार चुनाव ‘ममताजी बंगाल में क्या करती हैं, मोदीजी देश में क्या करते हैं’: राहुल गांधी ने ‘अमीर समर्थक’ राजनीति के लिए पीएम और सीएम पर हमला किया अस्वीकरण: टिप्पणियाँ उपयोगकर्ताओं के विचार दर्शाती हैं, News18 के नहीं। कृपया चर्चाएँ सम्मानजनक और रचनात्मक रखें। अपमानजनक, मानहानिकारक, या अवैध टिप्पणियाँ हटा दी जाएंगी। News18 अपने विवेक से किसी भी टिप्पणी को अक्षम कर सकता है. पोस्ट करके, आप हमारी उपयोग की शर्तों और गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं। और पढ़ें (टैग्सटूट्रांसलेट)पश्चिम बंगाल(टी)टीएमसी(टी)ममता बनर्जी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)बीजेपी(टी)पश्चिम बंगाल चुनाव(टी)राहुल गांधी(टी)नरेंद्र मोदी(टी)कांग्रेस
EC के नोटिस का कांग्रेस ने दिया जवाब:कहा- चुनाव आयोग की कार्रवाई दुर्भावना से प्रेरित, खड़गे ने मोदी को आतंकी कहा था

कांग्रेस ने पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के आतंकवादी बयान पर चुनाव आयोग को जवाब दिया है। पार्टी ने कहा कि इस मामले में न तो मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (MCC) का उल्लंघन हुआ है और न ही किसी कानून का। कांग्रेस ने अपने जवाब में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग का नोटिस “दुर्भावना से प्रेरित” है और इसे बिना सही जांच के जारी किया गया है। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लिखे पत्र में कहा कि पार्टी को एक ही नंबर के दो अलग-अलग नोटिस मिले, जिन पर अलग-अलग अधिकारियों के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने कहा कि एक नोटिस में शिकायतकर्ता के तौर पर TMC नेता डेरेक ओ ब्रायन का नाम है, जबकि दूसरे नोटिस में यह नाम हटा दिया गया है। इससे आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठते हैं। चुनावी व्यस्तता के बीच भी सिर्फ 24 घंटे का समय दिया कांग्रेस ने यह भी आपत्ति जताई कि जवाब देने के लिए सिर्फ 24 घंटे का समय दिया गया, जो चुनावी व्यस्तता के बीच पर्याप्त नहीं है। पार्टी ने विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा है। पत्र में कांग्रेस ने प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के हालिया बयानों को भी MCC का उल्लंघन बताया और कहा कि इन मामलों में चुनाव आयोग ने कोई कार्रवाई नहीं की। कांग्रेस का कहना है कि आयोग का रवैया “प्राकृतिक न्याय” के सिद्धांतों के खिलाफ है और वह इस मामले में निष्पक्षता नहीं दिखा रहा। खड़गे ने कहा था- मोदी आतंकवादी की तरह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चेन्नई में मंगलवार को कहा था ‘मोदी एक आतंकवादी की तरह हैं जो समानता में विश्वास नहीं रखते। उनकी पार्टी भी समानता और न्याय में विश्वास नहीं रखती।’ उन्होंने कहा था कि पीएम मोदी लोगों और राजनीतिक पार्टियों को डरा रहे हैं। मैंने कभी नहीं कहा कि वह आतंकवादी हैं। मेरा मतलब है कि मोदी हमेशा धमकी देते हैं। हालांकि बाद में उन्होंने बयान पर सफाई देते हुए कहा था कि PM मोदी लोगों और राजनीतिक पार्टियों को डरा रहे हैं। मैंने कभी नहीं कहा कि वह आतंकवादी हैं। मेरा मतलब है कि मोदी हमेशा धमकी देते हैं। चुनाव आयोग ने खड़गे से मांगा था जवाब चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस जारी कर 24 घंटे के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने को कहा था। यह नोटिस आयोग ने वरिष्ठ भाजपा नेता और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू तथा पार्टी के अन्य पदाधिकारियों से शिकायतें मिलने के बाद जारी किया था। आयोग ने कहा था कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि कांग्रेस अध्यक्ष ने राष्ट्रीय चुनाव आयोग के प्रावधानों का उल्लंघन किया है। ————- ये खबर भी पढ़ें… मोदी को आतंकी कहने पर खड़गे को EC का नोटिस:कांग्रेस अध्यक्ष ने बयान पर सफाई भी दी थी चुनाव आयोग (EC) ने बुधवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। भाजपा ने आज पीएम मोदी को आतंकी कहने के मामले में चुनाव आयोग से खड़गे की शिकायत की थी। दरअसल खड़गे ने मंगलवार को चेन्नई में चुनाव प्रचार के दौरान पीएम मोदी को आतंकी कहा था। पूरी खबर पढ़ें…
Bhopal Congress Protest Wheat Procurement Issues

अवनीश भार्गव, मुख्य संगठक कांग्रेस सेवादल मध्य प्रदेश एमपी में गेहूं खरीदी को लेकर लगातार समस्याएं सामने आ रहीं हैं। प्रदेश में 5 एकड़ से कम जमीन वाले किसानों के गेहूं की खरीद 9 और 15 अप्रैल से शुरू हुई है। लेकिन, गेहूं उपार्जन में पोर्टल की कई समस्याओं के कारण किसान परेशान हो रहे हैं। . किसानों की समस्याओं को लेकर गुरुवार को भोपाल में कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव सत्याग्रह कर रहे हैं। भार्गव 24 घंटे का उपवास कर रहे हैं। इस सत्याग्रह में पीसीसी चीफ जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, किसान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष धर्मेन्द्र सिंह चौहान सहित कांग्रेस के तमाम नेता और कार्यकर्ता शामिल हो रहे हैं। भोपाल के आसपास के जिलों से किसानों को भी इस सत्याग्रह में बुलाया गया है। सेवादल के संगठक बोले- किसानों को परेशान करना चाहती है सरकार कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव ने भास्कर से बातचीत में कहा हमारी मुख्य मांग यही है कि गेहूं का उपार्जन मप्र की सरकार को करना चाहिए। मंत्री और मुख्यमंत्री कहते हैं कि हम दाना-दाना खरीदेंगे। लेकिन, जब खरीदी शुरू होती है तो कहते हैं कि पहले 5 एकड़ के किसानों की खरीदी करेंगे। आप किसानों में भेदभाव क्यों कर रहे हैं। किसानों में भेदभाव क्यों किया जा रहा भार्गव ने कहा- जब सरकार ने गेहूं उपार्जन के लिए पंजीयन कराया और किसान ने अपना पंजीयन किया है तो उसका दाना-दाना तुलवाना चाहिए। उसके बावजूद किसानों में भेदभाव किया जा रहा है। यही नहीं जो किसान पंजीयन के बाद स्लॉट बुक कराने जा रहा है तो कहा जा रहा है कि आपका सैटेलाइट वेरिफिकेशन नहीं हैं। छोटे किसानों से कहा जा रहा कि आपका खाता डीबीटी के लिए आधार से लिंक नहीं हैं। एक के बाद गेहूं खरीदी में अवरोध पैदा किए जा रहे हैं। सरकार की मंशा गेहूं खरीदी की नहीं बल्कि, किसानों को परेशान करने की है। ‘जब गेहूं खरीदा ही नहीं तो किसान डिफॉल्टर कैसे कर दिए’ अवनीश भार्गव ने कहा- एक महत्वपूर्ण मुद्दा यह भी है कि आपने किसान को 31 मार्च को ऋण अदा न कर पाने के कारण सहकारी समिति में डिफॉल्टर कर दिया। उससे साल भर का ब्याज ले रहे हैं। जब आपने गेहूं खरीदा ही नहीं तो उसके पहले किसान डिफॉल्टर कैसे हुआ? साल भर का ब्याज लेने का क्या औचित्य है? यदि जितने दिन लेट हुआ है उतने दिन का ब्याज ले लो। पूरे साल का ब्याज लेना न्यायोचित नहीं हैं। सरकार को पुर्नविचार करना चाहिए। ये खबर भी पढ़ें… एमपी सरकार ने गेहूं खरीद का कोटा बढ़ाने केंद्र से मांगी मदद मध्य प्रदेश में गेहूं खरीदी को लेकर सीएम डॉ. मोहन यादव ने कहा कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण गेहूं के निर्यात में आई कमी और जूट के आयात में आ रही बाधाओं के बावजूद राज्य सरकार किसानों का एक-एक दाना खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रदेश में इस वर्ष ‘डबल’ हुई पैदावार को देखते हुए मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से गेहूं उपार्जन का निर्धारित कोटा बढ़ाने की अपील की है, ताकि बंपर उत्पादन का पूरा लाभ किसानों तक पहुंचाया जा सके। पढ़ें पूरी खबर…









