12:41 AM4 मई 2026
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बंगाल चुनाव में 5 बड़े मुद्दे
SIR में वोट कटना: पश्चिम बंगाल में कुल रजिस्टर्ड वोटर्स की संख्या 7.66 करोड़ थी। चुनाव से पहले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) हुआ, जिसमें 91 लाख नाम हटाए गए। अब वोटर्स की संख्या घटकर 6.75 करोड़ रह गई, यानी 11.8% की कमी।
सुप्रीम कोर्ट ने SIR पर वोटर्स की आपत्तियां सुनने के लिए 19 ट्रिब्यूनल नियुक्त किए थे। पिछले महीने से, जब ये ट्रिब्यूनल बने, तब से उनके पास 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर की गईं। यह साफ नहीं है कि इनमें से कितनी अपीलें सुनी गईं। पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने 28 अप्रैल कहा कि उनके पास निपटाए गए मामलों का आंकड़ा नहीं है।
अवैध घुसपैठियों का मुद्दा: 2021 के बंगाल चुनाव में 140 से अधिक सीटों पर जीत का अंतर 1000 से 5000 के बीच था। कई सीटों पर इस अंतर से ज्यादा वोट कट गए हैं। बीजेपी ने वोटर लिस्ट से हटाए गए करीब 91 लाख नामों को ‘अवैध घुसपैठियों’ और ‘ब्लैक वोट्स’ कहा।
महिलाओं से जुड़ी योजनाएं: पिछले 3 चुनाव में पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा वोट कर रही हैं। इस बार तो यह अंतर डेढ़ फीसदी तक बढ़ा है। जानकार इसकी वजह ममता सरकार की महिलाओं से जुड़ी 3 बड़ी योजनाएं- लक्ष्मीर भंडार, कन्याश्री और रूपश्री प्रकल्प को बताते हैं।
भाजपा ने भी इस बार प्रधानमंत्री उज्जवला योजना, पीएम आवास योजना, शौचालय और महिलाओं की सुरक्षा का मुद्दा उठाया। घोषणा पत्र में गरीब महिलाओं को हर महीने 3 हजार रुपए देने का वादा किया।
महिला आरक्षण का मुद्दा: चुनाव से ठीक पहले सरकार संसद में परिसीमन से जुड़ा बिल लाई। टीएमसी ने इसका विरोध किया। इसके बाद PM मोदी से लेकर शाह और बाकी बड़े नेताओं ने हर रैली में कहा गढ़ा कि ममता महिलाओं को सत्ता में 33% हिस्सेदारी नहीं देना चाहती हैं।
एंटी इनकंबेंसी: TMC 2011 के बाद लगातार 15 साल से सत्ता में है। उसके नेताओं पर राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला जैसे आरोप लगे हैं। अगर भाजपा टीएमसी के वोट शेयर में 3 से 5% की सेंध लगा देती है, तो बढ़त ले लेगी।










































