अभिजीत दीपके पर भड़के मनोज मुंतशिर:बोले- यह युवाओं के दम पर देश को अगला नेपाल, पाकिस्तान या बांग्लादेश बनाना चाहते हैं

नेशनल अवॉर्ड विनर गीतकार मनोज मुंतशिर ने वोट चोरी के विरोध में प्रदर्शन कर रहे युवाओं को लेकर एक वीडियो जारी किया। इसमें उन्होंने अभिजीत दीपके पर युवाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया और यूट्यूबर ध्रुव राठी की भी आलोचना की। मनोज ने दावा किया कि ऐसे लोगों की फंडिंग सरहद पार से आती है। उन्होंने कहा कि वह बीजेपी के वैचारिक विचारों से सहमत हैं, लेकिन सरकार के आदमी नहीं हैं। मनोज मुंतशिर ने अपने करीब 8 मिनट 42 सेकेंड के वीडियो की शुरुआत युवाओं को संबोधित करते हुए की। उन्होंने कहा कि युवा बिना तथ्यों को समझे वोट चोरी के मुद्दे पर आंदोलन कर रहे हैं। उनके मुताबिक, युवाओं को यह जानना चाहिए कि उन्हें कौन नेतृत्व दे रहा है और उनके आंदोलन का उद्देश्य क्या है। अभिजीत दीपके पर लगाए आरोप मनोज ने अभिजीत दीपके पर निशाना साधते हुए कहा कि वह अरविंद केजरीवाल की टीम से जुड़े हैं। मनोज के मुताबिक, आम आदमी पार्टी की चुनावी हार के बाद सत्ता में वापसी के लिए युवाओं की ऊर्जा का इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने पंजाब और हिमाचल प्रदेश के स्कूलों की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोग उन राज्यों की समस्याओं पर बात नहीं करते, जहां कांग्रेस या आम आदमी पार्टी की सरकार है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसा अपने समर्थकों और फंडर्स को नाराज नहीं करने के लिए किया जाता है। ध्रुव राठी पर भी साधा निशाना मनोज ने यूट्यूबर ध्रुव राठी की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि राठी भारत की उपलब्धियों और सफलताओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं देते। मनोज ने कहा कि मंगलयान से लेकर सैन्य उपलब्धियों तक, देश की तारीफ के मौकों पर उनकी टाइमलाइन पर उत्साह नहीं दिखता। उन्होंने दावा किया कि ऐसे लोगों की फंडिंग सरहद पार से आती है और आरोप लगाया कि वे भारत के खिलाफ नफरत फैलाते हैं। युवाओं से बोले- अपनी समझ से फैसला लें मनोज मुंतशिर ने युवाओं से कहा कि वह इस बात की परवाह नहीं करते कि कोई व्यक्ति किस पार्टी को वोट देता है या किस नेता का समर्थन करता है। उन्होंने युवाओं की सोच और स्वतंत्र निर्णय लेने की क्षमता पर भरोसा जताया। उन्होंने कहा कि मुझे बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि आपके इस विद्रोह का नेतृत्व जयप्रकाश नारायण या अन्ना हजारे जैसे लोग नहीं कर रहे हैं, बल्कि कुछ बेहद बेहद झूठे, चालबाज और अवसरवादी लोग कर रहे हैं। यह तुम्हारे दम पर इस देश को अगला नेपाल, पाकिस्तान या बांग्लादेश बनाना चाहते हैं। क्या आप भी ऐसा ही बनना चाहते हैं? क्या आप उनके जैसे बनना चाहते हैं? उन्होंने यह भी साफ किया कि वह बीजेपी के सदस्य नहीं हैं और न ही सरकार से उनका कोई संबंध है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सत्य, सेना और सनातन में विश्वास के कारण उनकी विचारधारा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और बीजेपी से मेल खाती है। चुनाव आयोग और वोट चोरी के आरोपों पर सवाल वीडियो में मनोज मुंतशिर ने चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर भी सवाल उठाया। उन्होंने तर्क दिया कि अगर चुनाव आयोग पूरी तरह बीजेपी के प्रभाव में काम करता है, तो फिर कई राज्यों में बीजेपी सत्ता से बाहर क्यों है? उन्होंने तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, झारखंड, कर्नाटक, तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन जगहों पर बीजेपी सत्ता में नहीं है। उनका तर्क था कि अगर चुनाव आयोग पूरी तरह बीजेपी के पक्ष में होता, तो बीजेपी इन सभी राज्यों में चुनाव जीतती। उन्होंने उत्तर प्रदेश के 2024 लोकसभा चुनाव का उदाहरण भी दिया। मनोज के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में बीजेपी और उसके सहयोगियों को 80 में से 36 सीटें मिलीं, जबकि समाजवादी पार्टी और कांग्रेस ने मिलकर 43 सीटें जीतीं। उन्होंने सवाल किया कि अगर चुनाव आयोग बीजेपी के पक्ष में काम कर रहा था, तो उत्तर प्रदेश में बीजेपी और उसके सहयोगियों को नुकसान कैसे हुआ। बंगाल का उदाहरण देकर कही अपनी बात मनोज मुंतशिर ने पश्चिम बंगाल के चुनावी आंकड़ों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने 2016 में राज्य में केवल तीन विधानसभा सीटें जीती थीं और इसके बाद पार्टी का प्रदर्शन लगातार बढ़ा। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का उदाहरण बताते हुए कहा कि किसी राजनीतिक दल को चुनाव जीतने के लिए जनता के बीच जाना पड़ता है, लोगों से संपर्क करना पड़ता है और उन्हें अपनी नीतियों के बारे में समझाना पड़ता है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता कभी किसी पार्टी को सत्ता देती है और कभी उससे सत्ता छीन लेती है। उनके मुताबिक, इसे लोकतंत्र की सामान्य प्रक्रिया के रूप में देखना चाहिए। वीडियो के अंत में देशभक्ति का संदेश वीडियो के अंत में मनोज मुंतशिर ने युवाओं से देशहित को ध्यान में रखकर फैसला लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि युवाओं को किसी भी व्यक्ति या विचार को आंख बंद करके स्वीकार नहीं करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि वह युवाओं को देशविरोधी नहीं मानते, बल्कि उन्हें देश के प्रति सकारात्मक सोच रखने वाला मानते हैं। साथ ही उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपनी ऊर्जा और विरोध का इस्तेमाल सोच-समझकर करें। मनोज मुंतशिर ने अपने वीडियो का समापन “जय हिंद, जय भारत, जय जवान, जय किसान” के नारे के साथ किया।
Historic 135-Year-Old Library Demolition Controversy

Hindi News Career Historic 135 Year Old Library Demolition Controversy | Lord Curzon Legacy 9 मिनट पहले कॉपी लिंक सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी देश की सबसे पुरानी और दूसरी सबसे बड़ी सरकारी लाइब्रेरी है। 1969 में शास्त्री भवन में स्थापित की गई ये लाइब्रेरी अब तक 5500 स्क्वायर मीटर में 4 मंजिल में संचालित की जा रही है। मगर अब इसे सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत तोड़ा जाना है और किताबों को शिफ्ट करने के लिए अभी तक दूसरी जगह नहीं मिली है। लाइब्रेरी में 1702 की दुर्लभ किताबें, सरकारी रिकॉर्ड और गजेटियर भी शामिल हैं। इस लाइब्रेरी में हर दिन सरकारी अधिकारी और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले छात्र आते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लिया, 3 हफ्ते में जवाब मांगा 5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने लाइब्रेरी शिफ्ट करने की जगह को लेकर केंद्र सरकार से तीन हफ्ते में जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूछा कि नए सेंट्रल विस्टा प्लान में लाइब्रेरी के लिए कितनी जगह दी गई है? जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने सोमवार को केंद्र से जगह का लेआउट प्लान और पूरा ब्योरा हलफनामे में देने को कहा है। कोर्ट ने पूछा कि 1891 से चल रही लाइब्रेरी और 8.5 लाख किताबों के साथ आरके पुरम में रखी 2 लाख किताबें के लिए क्या सिर्फ दो कमरे दिए जा रहे हैं? आरके पुरम में रखी किताबों का क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए सीनियर एडवोकेट हरिप्रिया पद्मनाभन को अमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। 2023 में संस्कृति मंत्रालय ने नई जगह की मांग की थी सेंट्रल विस्टा नई दिल्ली में रायसीना हिल से लेकर इंडिया गेट तक के इलाके का एक बड़ा पुनर्विकास प्रोजेक्ट है। इस प्रोजेक्ट के तहत, शास्त्री भवन जिसमें 4 मंजिला सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी है, उसे तोड़कर उस जगह कर्तव्य भवन 4 और 5 बनाए जाने हैं। इस प्रोजेक्ट की घोषणा 2019 में की गई थी और सरकार को पहले से ही पता था कि प्रशासनिक केंद्र में किन संस्थाओं को जगह दी जाएगी। अब सवाल ये है कि इतनी पुरानी लाइब्रेरी कैसे कहीं और शिफ्ट होगी? कैसे बनी देश की दूसरी सबसे बड़ी लाइब्रेरी इसे 1901 के इंपीरियल लाइब्रेरी एक्ट के तहत मान्यता मिली थी। इस एक्ट में कहा गया था कि ‘इसका मकसद एक रेफरेंस लाइब्रेरी बनाना है, जो स्टूडेंट्स के लिए पढ़ने की जगह हो और भारत के भविष्य के इतिहासकारों के लिए भंडार हो। इसमें भारत के बारे में किसी भी समय लिखी गई हर किताब को देखा और पढ़ा जा सके’। ब्रिटिश भारत के पहले इतिहासकार ने शुरुआत की एफ. डब्ल्यू . फॉरेस्टरवे ब्रिटिश भारत के पहले इतिहासकार, शिक्षक और अभिलेखपाल थे। उन्हें कोलकाता इंपीरियल डिपार्टमेंट का पहला क्यूरेटर अपॉइन्ट किया गया था। फॉरेस्टर ने ‘प्रेस एंड रजिस्ट्रेशन ऑफ बुक्स एक्ट, 1867’ के तहत मिले लगभग एक हजार वॉल्यूम (किताबों के सेट) को इकट्ठा किया, जो कलकत्ता की राइटर्स बिल्डिंग में पड़े हुए थे। इस कलेक्शन और उसी बिल्डिंग में मौजूद दूसरे सचिवालय पुस्तकालयों के अलग-अलग कलेक्शन को मिलाकर ‘इंपीरियल लाइब्रेरी’ नाम दिया गया, जिसका उद्घाटन 11 मई 1891 को हुआ था। ईस्ट इंडिया कॉलेज, फोर्ट विलियम कॉलेज की किताबें शामिल इस लाइब्रेरी कलेक्शन में ईस्ट इंडिया कॉलेज, फोर्ट विलियम कॉलेज और लंदन में ईस्ट इंडिया कंपनी बोर्ड के लाइब्रेरी की किताबें कलेक्शन का हिस्सा रही हैं। हालांकि जब इंपीरियल लाइब्रेरी एक्ट के तहत एक नई इंपीरियल लाइब्रेरी बनाई गई, तो पुराने इंपीरियल रिकॉर्ड्स ऑफिस का पूरा कलेक्शन नई लाइब्रेरी में नहीं भेजा गया, बल्कि कलेक्शन का एक हिस्सा ‘इंपीरियल सचिवालय पुस्तकालय’ के पास ही रखा गया था। जिससे ये इंपीरियल लाइब्रेरी से अलग पहचाना जा सके और ये राइटर्स बिल्डिंग में ही काम करता रहा। 1912 में राजधानी बदली और लाइब्रेरी का पता भी 1912 में राजधानी के दिल्ली शिफ्ट होने के साथ ही ‘इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी’ को भी दिल्ली लाया गया और इसे सिविल लाइन्स, दिल्ली की पुरानी सेक्रेटेरिएट बिल्डिंग में रखा गया। 1913 में इसके कलेक्शन का कुछ हिस्सा शिमला सेक्रेटेरिएट भेज दिया गया। 10 फरवरी 1931 को नई दिल्ली में नए सेक्रेटेरिएट के उद्घाटन के साथ, इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को नॉर्थ ब्लॉक में शिफ्ट कर दिया गया और शिमला में चल रही सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को भी इंपीरियल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी में मिला दिया गया। 300 स्क्वायर मीटर के दो कमरों का ऑफर, नामंजूर सेंट्रल सेक्रेटेरिएट लाइब्रेरी को सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत तोड़ा जा रहा है। सीपीडब्ल्यूडी ने सभी मंत्रालयों को 30 सितंबर तक भवन खाली करने को समय दिया था। हालांकि, आवास और शहरी कार्य मंत्रालय और सीपीडब्ल्यूडी अब तक इस लाइब्रेरी के लिए नई जगह नहीं ढूंढ पाए हैं। लाइब्रेरी के लिए कर्तव्य भवन-2 में 300 स्क्वायर मीटर की दो कमरों की जगह ऑफर की गई थी, जिसे लाइब्रेरी प्रशासन ने इनकार कर दिया। ये लाइब्रेरी CSL भारतीय राज्य के लिए एक वर्किंग आर्काइव (कामकाजी संग्रह) के तौर पर काम करती है, जो इसकी संस्थागत यादों और पिछली सरकारों के कामों और फैसलों का रिकॉर्ड रखता है। यह सरकार के अपने रिकॉर्ड रूम जैसा है। इतनी बड़ी आर्काइव को बगैर किसी सुरक्षा के यूंही छोड़ना चिंताजनक बात है। किताबों को सुरक्षित रखना बड़ा संघर्ष रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल आर्काइव्स एनेक्सी को गिराने और नेशनल म्यूजियम के कलेक्शन को दूसरी जगह ले जाने पर लोगों के बीच बातचीत हुई और विशेषज्ञों की राय ली गई। इससे पता चलता है कि नेशनल म्यूजियम का कलेक्शन ‘युगे युगीन भारत म्यूजियम’ में ले जाया जा रहा है, जो नॉर्थ और साउथ ब्लॉक की इमारतों में बन रहा है। लेकिन इसकी सही इन्वेंट्री और कैटलॉगिंग, संरक्षण की सुविधाएं, नाजुक और दुर्लभ चीजों के लिए क्लाइमेट-कंट्रोल्ड स्टोरेज, डिजिटाइजेशन, ट्रेंड स्टाफ और लोगों की पहुंच की जरूरत होगी। अस्थाई बदलाव स्थायी क्यों हो सकता है? CSL की क्षेत्रीय भाषाओं का सेक्शन, ‘तुलसी सदन लाइब्रेरी’ मंडी हाउस मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए 2011 में अस्थायी तौर पर बंद कर दिया गया था। इसके सामान को नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा के परिसर में रख दिया गया और ये लाइब्रेरी आज भी बंद है। बिना किसी फाइनल जगह के लाखों दुर्लभ दस्तावेजों को अस्थायी स्टोरेज में ले जाने से उनके खराब होने या खोने का खतरा बढ़ जाता है। जब कोई कलेक्शन स्टोरेज में रखा
दिलजीत दोसांझ का घर समझ लिखे खालिस्तानी नारे:पड़ोसी बोला- मुंह बांधकर आए 4-5 लोग, स्प्रे की स्मेल आने पर मेरी नींद खुली

पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के गांव दोसांझ कलां में कुछ लोगों ने एक घर की दीवार पर ‘खालिस्तान जिंदाबाद’ के नारे लिख दिए। बाद में पता चला कि जिस घर की दीवार पर नारे लिखे गए, वह दिलजीत दोसांझ का नहीं, बल्कि उनके पड़ोसी का है। घटना से नाराज पड़ोसी ने कहा कि बिना किसी वजह के उसकी दीवार खराब कर दी। पड़ोसी मुख्तियार ने बताया बुधवार देर रात करीब डेढ़ बजे चार-पांच आदमी दीवार पर कुछ लिख रहे थे, स्प्रे की स्मेल आने पर मेरी नींद खुली, जब मैंने उन्हें डांटा, तो भाग गए। मामले में पुलिस का कहना है कि यह घर मुख्तियार का है। सीसीटीवी कैमरे चेक करवाए जा रहे हैं। इसके बारे में अभी कुछ कन्फर्म नहीं है। कैमरों की जांच करके फिर पूरा पता लगेगा। दीवार पर खालिस्तान वगैरह कुछ लिखा हुआ था मुख्तियार ने कहा कि स्प्रे की स्मेल अंदर तक आ गई। मेरी नींद खुली तो मैंने उन्हें डांटा। उन्होंने मुंह बांधे हुए थे। इसके बाद वे लोग यहां से निकल गए। जब मैं उठकर देखने गया तो दीवार पर खालिस्तान वगैरह कुछ लिखा हुआ था। नीचे उन्होंने दिलजीत दोसांझ का नाम मेंशन किया हुआ था। उन्हें शायद यह पता नहीं था कि यह दिलजीत का घर नहीं है। पांच से सात हजार रुपए का नुकसान हो गया उन्होंने कहा कि मैं दिहाड़ी करने वाला आदमी हूं। ये लोग मेरी दीवार खराब करके चले गए हैं। इस वजह से मेरा पांच से सात हजार रुपए का नुकसान हो गया है। उन्होंने कहा कि दिलजीत का घर अगली ओर रोड पर है। उन्होंने बताया कि गुरुवार सुबह पुलिस आई थी और पूछताछ करके चली गई। दिलजीत और खालिस्तानी समर्थकों से जुड़े विवाद… ************* ये खबर भी पढ़ें: लुधियाना में DIG ऑफिस के बाहर फायरिंग का दावा: कार के शीशे तोड़े, CCTV में दिखे 3 लोग; ACP बोले- गोली नहीं चली, सिविल सूट का मामला लुधियाना में DIG ऑफिस के ठीक सामने युवकों ने एक व्यक्ति पर जानलेवा हमला कर दिया। उसने दावा किया कि आरोपियों ने पहले उसके साथ मारपीट की, फिर कार के शीशे तोड़ दिए। इसके बाद हवाई फायरिंग करते हुए मौके से फरार हो गए। (पढ़ें पूरी खबर)
MPSC Recruitment Controversy | Pune Protest High Court Hearing

15 मिनट पहले कॉपी लिंक महाराष्ट्र लोकसेवा आयोग यानी MPSC के खिलाफ बीते एक महीने से लगातार कैंडिडेट्स प्रदर्शन कर रहे हैं। पुणे में प्रदर्शनकारियों ने MPSC मुर्दाबाद के नारे लगाए और विरोध जताते हुए MPSC आयोग की अर्थी भी निकाली। आज 7 अक्टूबर को बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई की और 70 हजार खाली पदों और भर्ती प्रक्रिया पर महाराष्ट्र सरकार से तीन हफ्ते के भीतर जवाब मांगा। सरकार को तीन सप्ताह के भीतर भर्ती का रोडमैप पेश करना होगा। साथ ही मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आयोग की जांच कराने की बात कही। साथ ही कोर्ट ने कहा- ‘हम कैंडिडेट्स की समस्या को समझ रहे हैं लेकिन उन्हें आंदोलन के बजाय पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए।’ इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा है। MNS नेता राज ठाकरे पहुंचे, राहुल गांधी भी हो सकते हैं शामिल इससे पहल महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे भी प्रोटेस्ट में पहुंचे थे और 30 सितंबर को सीएम देवेंद्र फडणवीस से भी कैंडिडेट्स ने मुलाकात की थी। NCP विधायक रोहित पवार के मुताबिक राहुल गांधी 7-8 अक्टूबर को कैंडिडेट्स से मिल सकते हैं। MPSC आयोग के खिलाफ पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता को लेकर कैंडिडेट्स लंबे समय से प्रदर्शन हो रहे हैं। इन प्रदर्शनों की मुख्य मांग MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा है। MPSC आयोग के खिलाफ 5 महीनों से अलग-अलग विरोध प्रदर्शन 30 जून को छत्रपति संभाजीनगर में MPSC की परीक्षाओं को CBT (कंप्युटर बेस्ड टेस्ट) कराने के फैसले के खिलाफ कैंडिडेट्स ने आंदोलन शुरू किया था। स्टूडेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया ( SFI) ने ऑनलाइन मोड में परीक्षाएं करवाने के फैसले का नोटिफिकेशन फाड़कर विरोध किया और परीक्षाएं ऑफलाइन कराने की मांग की थी। इसके बाद 16 जुलाई को संभाजीनगर में प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे स्टूडेंट्स ने ऑफलाइन एग्जाम कराने की मांग को लेकर दोबारा प्रदर्शन शुरू किया था। ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा इंटरव्यू के बाद रद्द हुई अगस्त में ड्रग इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा में पेपर लीक मामला सामने आया था। MPSC ने फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन डिपार्टमेंट में ड्रग इंस्पेक्टर, ग्रुप-B पोस्ट के लिए भर्ती प्रक्रिया पेपर लीक के बाद रद्द कर दी थी। ये परीक्षा 22 मार्च 2026 को हुई थी और जुलाई में इसका रिजल्ट जारी होने के बाद इंटरव्यू हुए थे। इसके बाद प्रशासन के खिलाफ कैंडिडेट्स का आक्रोश ओर बढ़ गया। 27 अगस्त को विधायक रोहित पवार ने पेपर लीक मामले को लेकर 1 सितंबर को MPSC कार्यालय के बाहर आंदोलन की चेतावनी दी थी। पेपर लीक, परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन MPSC आयोग के खिलाफ छात्रों के प्रदर्शन जारी है, जहां पेपर लीक और परीक्षा व्यवस्था के पारदर्शिता को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। कांग्रेस की युवा इकाई के नेता भी आंदोलन में शामिल हैं। ये कैंडिडेट्स पिछले कुछ समय से परीक्षा प्रक्रिया, भर्ती में देरी और कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल कर रहे हैं। कैंडिडेट्स का गुस्सा सिर्फ एक परीक्षा का नहीं, बल्कि पूरी भर्ती और परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता है। पुणे में MPSC कैंडिडेट्स का आंदोलन फिलहाल तीन अलग-अलग जगहों पर चल रहा है और इन जगहों पर छात्रों की मांगें भी अलग हैं। आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार के इस्तीफे की मांग परीक्षा रद्द होने के बाद कैंडिडेट्स ने आयोग के अध्यक्ष विवेक भीमनवार और सचिव महेंद्र उत्तमराव हरपालकर की जवाबदेही तथा इस्तीफे की मांग तेज हो गई। उम्मीदवारों का कहना है कि महाराष्ट्र की सरकारी भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं, परीक्षा प्रक्रिया में गड़बड़ी और पारदर्शिता की कमी है। छात्रों ने परीक्षा पैटर्न में गड़बड़ियों और कुछ पदों में कटौती को भी अपना मुद्दा बनाया। इन कैंडिडेट्स की मुख्य मांगों में MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार का इस्तीफा और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं की जांच शामिल थी। सितंबर के आखिर में आंदोलन बड़ा हो गया और कैंडिडेट्स ने 2 अक्टूबर को बड़े प्रोटेस्ट का ऐलान किया। इसके बाद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कैंडिडेट्स से बातचीत की और आंदोलन स्थगित किया गया। इसके साथ ही कैंडिडेट्स ने स्टेनोग्राफर पद को बहाल करने की भी मांग की है। पेपर लीक मामले में आरोपी रहे अधिकारी अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में हुई सभी परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग भी की है। कई बड़े नेताओं और चेहरों ने विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया शिवसेना (UBT) के विधायक आदित्य ठाकरे पुणे पहुंचे और प्रदर्शनकारी छात्रों से मिलकर उनके आंदोलन का समर्थन किया। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने छात्रों के आंदोलन और उनकी मांगों का समर्थन किया। सांसद सुप्रिया सुले राज्य सरकार के मंत्री धनंजय मुंडे ने भी छात्रों के एक समूह से मुलाकात कर उनकी मांगों पर चर्चा की। MPSC चेयरमैन- मैं गुनहगार, तो तुरंत पद छोड़ूंगा आरोपों का जवाब देते हुए, MPSC के चेयरमैन विवेक भीमन्वार ने कहा कि कमीशन और राज्य सरकार ने ऐसी घटनाओं को दोबारा होने से रोकने के लिए अलग-अलग हाई-लेवल कमेटियां बनाई हैं। पेपर लीक के मामले में पुलिस केस भी दर्ज किया गया है। एक बयान में भीमन्वार ने कहा, ‘मुझे इस बात का बहुत दुख है कि सच्चाई साफ होने के बावजूद, मेरी छवि खराब करने के मकसद से मुझ पर निजी और राजनीतिक कारणों से आरोप लगाए जा रहे हैं। पद संभालने के बाद से मैंने MPSC में कई सुधार किए हैं।’ साथ ही उन्होंने कहा कि हमने कुल 84 परीक्षाएं सफलतापूर्वक आयोजित की हैं। हालांकि, अगर मेरे खिलाफ एक भी सबूत मिलता है, तो मैं एक पल के लिए भी इस पद पर नहीं रहूंगा। मैंने पहले ही साफ कर दिया है कि ड्रग इंस्पेक्टर परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने की घटना मेरे पद संभालने से पहले की है। आयोग- ग्रुप C की परीक्षा में पद बढ़ाए जाएंगे सरकार की MPSC विवाद को लेकर सफाई है कि MPSC के मौजूदा और पूर्व अध्यक्षों तथा सदस्यों के कामकाज की तीन महीने के भीतर न्यायिक जांच कराई जाएगी। MPSC की परीक्षाएं ऑफलाइन ही कराए जाने या किसी भी तरह के बदलाव के प्रस्ताव पर कैंडिडेट्स से चर्चा जरूर की जाएगी। इसके साथ ही सरकार ने कैंडिडेट्स की मांग पर ग्रुप C की 3 जनवरी को होने वाली परीक्षा में पदों की संख्या बढ़ाने, तीन साल की भर्तियों की योजना बनाने और रिटायरमेंट से खाली होने वाले पदों
Jaya Bachchan Controversy | Kangana Ranaut Targets MP After Delhi Video

3 मिनट पहले कॉपी लिंक कंगना रनोट और जया बच्चन अभी तक एक साथ किसी फिल्म में नजर नहीं आई हैं। दिल्ली में मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस मार्च में सपा सांसद और एक्ट्रेस जया बच्चन भी शामिल हुईं। विरोध प्रदर्शन के दौरान जया बच्चन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। एक न्यूज चैनल से बात करने से इनकार करते हुए वह माइक को पीछे धक्का देती नजर आईं। इस दौरान उनके चेहरे पर इरिटेशन दिखी। जिसके बाद बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने जया बच्चन पर तंज कसा। इंस्टाग्राम स्टोरी में जया बच्चन का वीडियो शेयर करते हुए कंगना ने लिखा- जब आप पूरी दुनिया के सामने अपनी बात रखने के लिए धरने पर बैठते हैं, लेकिन जब आपसे पूछा जाता है कि आखिर आप कहना क्या चाहती हैं, तो जया बच्चन जी का जवाब होता है- नहीं बताऊंगी। पहले भी जया बच्चन पर टिप्पणी कर चुकी हैं कंगना यह पहली बार नहीं है जब कंगना रनोट ने जया बच्चन पर टिप्पणी की हो। जया बच्चन अक्सर मीडिया में अपने बर्ताव को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। पैपराजी और आम लोगों को वह कई बार डांट लगा चुकी हैं। इसी को लेकर कंगना उन पर तीखी बयानबाजी करती रही हैं। पिछले साल नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर जया बच्चन ने एक शख्स को सेल्फी लेने से मना करते समय धक्का देकर पीछे किया था। तब कंगना ने उन्हें बिगड़ी हुईं और प्रिविलेज्ड महिला कहा था। साथ ही इस घटना को शर्मनाक बताया था। वहीं, सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में ड्रग्स और नेपोटिज्म को लेकर बहस छिड़ी थी। इसी दौरान कंगना रनोट ने फिल्म इंडस्ट्री की तुलना ‘गटर’ से की थी। कंगना के बयान पर जया बच्चन ने राज्यसभा में बिना नाम लिए प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। जया ने बॉलीवुड को गटर कहना गलत बताया था। इसके बाद कंगना ने सोशल मीडिया पर जया बच्चन के बयान का जवाब दिया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, “जया जी, क्या आप तब भी यही बात कहतीं अगर मेरी जगह आपकी बेटी श्वेता को टीनएज में पीटा जाता, नशीला पदार्थ दिया जाता और उसके साथ छेड़छाड़ की जाती? क्या आप तब भी यही कहतीं अगर अभिषेक लगातार बदमाशी और उत्पीड़न की शिकायत करते और एक दिन फांसी पर लटके पाए जाते? हमारे लिए भी थोड़ी करुणा (दया) दिखाइए।” मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष ने मार्च निकाला SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक ने मंगलवार को दिल्ली में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकाला। मार्च संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस की ओर जा रहा था। पुलिस ने रास्ते में प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए। दोनों आठ घंटे से ज्यादा समय तक धरने पर बैठे रहे। वे ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की मांग कर रहे थे। रात करीब 8 बजे पुलिस ने राहुल और अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर किंग्सवे कैंप पुलिस लाइन पहुंचाया। करीब दो घंटे बाद रात 10:10 बजे सभी को छोड़ दिया गया। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि लोकतंत्र के गद्दारों को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है। उन्होंने कहा कि इसका हिसाब होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी पार्टी ने मिलने का समय नहीं मांगा था। राहुल गांधी और प्रियंका को रात 8 बजे पुलिस के जवानों ने आकाशवाणी भवन से हिरासत में लिया। मशक्कत के बाद उन्हें बस में बैठाया गया। आयोग ने सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया। वहीं, भाजपा ने प्रदर्शन को अराजकता फैलाने की कोशिश बताया। पार्टी ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… हिमाचल में कंगना रनोट बोलीं-लोग मुझे निठल्ला कह रहे: अफसरों को फटकारा- बैठक में खानापूर्ति के लिए न आएं, फैसलों पर काम भी करें हिमाचल के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनोट ने एक बैठक में अधिकारियों को फटकार लगाई थी। जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में सांसद निधि का इस्तेमाल नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई थी। कंगना ने कहा था कि लोग उन्हें निठल्ला कह रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर काम करने को कहा था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Jaya Bachchan Controversy | Kangana Ranaut Targets MP After Delhi Video

10 मिनट पहले कॉपी लिंक कंगना रनोट और जया बच्चन अभी तक एक साथ किसी फिल्म में नजर नहीं आई हैं। दिल्ली में मंगलवार को इंडिया ब्लॉक के सांसदों ने चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। इस मार्च में सपा सांसद और एक्ट्रेस जया बच्चन भी शामिल हुईं। विरोध प्रदर्शन के दौरान जया बच्चन का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। एक न्यूज चैनल से बात करने से इनकार करते हुए वह माइक को पीछे धक्का देती नजर आईं। इस दौरान उनके चेहरे पर इरिटेशन दिखी। जिसके बाद बीजेपी सांसद और एक्ट्रेस कंगना रनोट ने जया बच्चन पर तंज कसा। इंस्टाग्राम स्टोरी में जया बच्चन का वीडियो शेयर करते हुए कंगना ने लिखा- जब आप पूरी दुनिया के सामने अपनी बात रखने के लिए धरने पर बैठते हैं, लेकिन जब आपसे पूछा जाता है कि आखिर आप कहना क्या चाहती हैं, तो जया बच्चन जी का जवाब होता है- नहीं बताऊंगी। पहले भी जया बच्चन पर टिप्पणी कर चुकी हैं कंगना यह पहली बार नहीं है जब कंगना रनोट ने जया बच्चन पर टिप्पणी की हो। जया बच्चन अक्सर मीडिया में अपने बर्ताव को लेकर सुर्खियों में रहती हैं। पैपराजी और आम लोगों को वह कई बार डांट लगा चुकी हैं। इसी को लेकर कंगना उन पर तीखी बयानबाजी करती रही हैं। पिछले साल नई दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर जया बच्चन ने एक शख्स को सेल्फी लेने से मना करते समय धक्का देकर पीछे किया था। तब कंगना ने उन्हें बिगड़ी हुईं और प्रिविलेज्ड महिला कहा था। साथ ही इस घटना को शर्मनाक बताया था। वहीं, सुशांत सिंह राजपूत के निधन के बाद बॉलीवुड में ड्रग्स और नेपोटिज्म को लेकर बहस छिड़ी थी। इसी दौरान कंगना रनोट ने फिल्म इंडस्ट्री की तुलना ‘गटर’ से की थी। कंगना के बयान पर जया बच्चन ने राज्यसभा में बिना नाम लिए प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कुछ लोग जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं। जया ने बॉलीवुड को गटर कहना गलत बताया था। इसके बाद कंगना ने सोशल मीडिया पर जया बच्चन के बयान का जवाब दिया था। उन्होंने ट्वीट कर लिखा था, “जया जी, क्या आप तब भी यही बात कहतीं अगर मेरी जगह आपकी बेटी श्वेता को टीनएज में पीटा जाता, नशीला पदार्थ दिया जाता और उसके साथ छेड़छाड़ की जाती? क्या आप तब भी यही कहतीं अगर अभिषेक लगातार बदमाशी और उत्पीड़न की शिकायत करते और एक दिन फांसी पर लटके पाए जाते? हमारे लिए भी थोड़ी करुणा (दया) दिखाइए।” मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष ने मार्च निकाला SIR के विरोध और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर इंडिया ब्लॉक ने मंगलवार को दिल्ली में ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकाला। मार्च संसद से चुनाव आयोग के ऑफिस की ओर जा रहा था। पुलिस ने रास्ते में प्रदर्शनकारियों को रोक दिया और कई नेताओं को हिरासत में लिया। इसके बाद राहुल गांधी और प्रियंका गांधी आकाशवाणी भवन परिसर में पहुंच गए। दोनों आठ घंटे से ज्यादा समय तक धरने पर बैठे रहे। वे ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की मांग कर रहे थे। रात करीब 8 बजे पुलिस ने राहुल और अन्य नेताओं को हिरासत में लेकर किंग्सवे कैंप पुलिस लाइन पहुंचाया। करीब दो घंटे बाद रात 10:10 बजे सभी को छोड़ दिया गया। राहुल गांधी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि लोकतंत्र के गद्दारों को बचाने के लिए बचे-खुचे लोकतंत्र को घसीटा गया है। उन्होंने कहा कि इसका हिसाब होगा। चुनाव आयोग ने कहा कि शाम 4 बजे तक किसी पार्टी ने मिलने का समय नहीं मांगा था। राहुल गांधी और प्रियंका को रात 8 बजे पुलिस के जवानों ने आकाशवाणी भवन से हिरासत में लिया। मशक्कत के बाद उन्हें बस में बैठाया गया। आयोग ने सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से मिलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन विपक्ष ने इसे स्वीकार नहीं किया। वहीं, भाजपा ने प्रदर्शन को अराजकता फैलाने की कोशिश बताया। पार्टी ने राहुल गांधी पर भी निशाना साधा। ……………….. यह खबर भी पढ़ें… हिमाचल में कंगना रनोट बोलीं-लोग मुझे निठल्ला कह रहे: अफसरों को फटकारा- बैठक में खानापूर्ति के लिए न आएं, फैसलों पर काम भी करें हिमाचल के मंडी से भाजपा सांसद कंगना रनोट ने एक बैठक में अधिकारियों को फटकार लगाई थी। जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति की बैठक में सांसद निधि का इस्तेमाल नहीं होने पर उन्होंने नाराजगी जताई थी। कंगना ने कहा था कि लोग उन्हें निठल्ला कह रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों से पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों पर काम करने को कहा था। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Delhi University Hindu College Admission Controversy

Hindi News Career Delhi University Hindu College Admission Controversy | Staff Protest कुछ ही क्षण पहले कॉपी लिंक DU के हिंदू कॉलेज में एडमिशन में धांधली को लेकर घमासान मचा हुआ है। इसके विरोध में खुद दिल्ली यूनिवर्सिटी के शिक्षक और हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) सड़क पर उतर आए हैं और एडमिशन में धांधली की बात कर रहे हैं। दरअसल शिक्षकों और HCSA का आरोप है कि एडमिशन कमेटी और डिपार्टमेंट हेडस के कड़े विरोध के बाद भी 20% की तय लिमिट से ज्यादा एडमिशन कर दिए गए हैं। शिक्षक- DU कुलपति कॉलेज कमान अपने हाथ में लें DU के ही शिक्षकों और HCSA ने मिलकर DU कुलपति प्रोफेसर योगेश सिंह को एक ज्ञापन सौंपा, जिसमें एडमिशन में हुई धांधली की जांच की मांग की गई है। साथ ही इस ज्ञापन में कुलपति से दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज का कंट्रोल अपने हाथ में लेने की रिक्वेस्ट भी है। एडमिशन में धांधली, लिमिट से ज्यादा एडमिशन का आरोप हिंदू कॉलेज में विवाद एडमिशन में धांधली के चलते हो हो रहा है। दरअसल ये पूरा मामला एक्सस्ट्रा करिकुलम एक्टिविटी और स्पोर्ट्स कोटे से हुए एडमिशन को लेकर है। हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) के मुताबिक ‘एडमिशन के लिए स्पोर्ट्स और एक्स्ट्रा कैरिकुलम एक्टिविटीज (ECA) कोटे के तहत निर्धारित सीमा से ज्यादा सीटें अलॉट की गई हैं। हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) ने आरोप लगाया था कि BCom (ऑनर्स) और BA (ऑनर्स) पॉलिटिकल साइंस में स्पोर्ट्स और ECA (एक्स्ट्रा करिकुलम एक्टिविटीज) कोटे के तहत एडमिशन, किसी एक अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम के लिए तय 20% की लिमिट से ज्यादा किए गए हैं। हिंदू कॉलेज स्टाफ एसोसिएशन (HCSA) ने 14 सितंबर को धरना शुरू किया था। 10 सीटों पर 17 एडमिशन अलॉट करने का आरोप असल में हिंदू कॉलेज में ECA और स्पोर्ट्स कोटे के तहत कुल 48 सुपरन्यूमेरेरी सीटें हैं। जिनमें 33 स्पोर्ट्स की और 15 ECA कैटेगरी की। जिनका 20% यानी 9.6 एडमिशन दिए जा सकेंगे। इस नियम के मुताबिक एक सिलेबस में अधिकतम 10 सीटें तय हैं, लेकिन इसके उलट ECA और स्पोर्ट्स कोटे से कॉमर्स में 17 और पॉलिटिकल साइंस में 15 सीटें अलॉट की गई। इसी आधार पर HCSA ने आपत्ति उठाई है। हिंदू कॉलेज- एडमिशन एल्गोरिदम में गलती हुई हिंदू कॉलेज ने एडमिशन के इस पूरे मामले पर कहा कि ये उसके अधिकार से बाहर है। साथ ही DU एडमिशन डिपार्टमेंट इसके लिए एडमिशन एल्गोरिदम में हुई गलती को जिम्मेदार बता रहा है। वहीं यूनिवर्सिटी ने ज्यादा एडमिशन को अपने एडमिशन एल्गोरिदम में हुई एक गलती बताया। बता दें कि ECA एडमिशन में डिबेट, म्यूजिक, डांस, थिएटर और फाइन आर्ट्स जैसी एक्टिविटीज में मिली मान्यता प्राप्त उपलब्धियों को शामिल किया जाता है। एडमिशन विवाद के चलते कुलपति के ऑफिस तक मार्च करते स्टूडेंट्स। DU प्रिंसिपल की सफाई- एडमिशन सेल करती है सीट अलॉट DU हिन्दू कॉलेज के प्रिंसिपल ने इस एडमिशन प्रोसेस पर सफाई दी है। DU में एडमिशन प्रोसेस सेंट्रालाइज्ड होता है, जिसके तहत UG और PG सिलेबस में एडमिशन के लिए DU एडमिशन सेल एप्लीकेशन इनवाइट भेजता है। स्टूडेंट्स की पसंद के आधार पर कॉलेज और सब्जेक्ट अलॉटमेंट का फैसला यूनिवर्सिटी करती है। एप्लीकेशन प्रोसेस पूरा होने के बाद CUET स्कोर के आधार पर कैंडिडेट्स को कॉलेज अलॉट किए जाते हैं। वहीं ECA और स्पोर्ट्स कोटे से एडमिशन के लिए भी CUET स्कोर जरूरी होता है। DU ने ये भी कहा कि मेरिट वॉयलेशन नहीं हुआ, क्योंकि जिन स्टूडेंट्स को एडमिशन मिला है, स्पोर्ट्स/ECA के मेरिट स्कोर के आधार पर एलिजिबल थे। दूसरी ओर HCSA ने प्रिंसिपल के खिलाफ नो-कॉन्फिडेंस मोशन पास किया और पूरे मामले की जांच की मांग की है। गवर्निंग बॉडी के चेयरमैन TC A रंगाचारी और प्रिंसिपल अंजू श्रीवास्तव को हटाने की भी मांग की है। जिन स्टूडेंट्स को एडमिशन मिल वो कैंसिल होंगे इन सीटों को भरने के लिए 3 दिन के लिए दोबारा एडमिशन सेल खोला जाना चाहिए और स्टूडेंट्स को मौका मिलना चाहिए। बता दें कि यूनिवर्सिटी एडमिशन रूल के मुताबिक कैटेगरी वायज अनरिजर्व कैटेगरी में 50.5% ओबीसी में 27%, अनुसूचित जाति (SC) 15%, अनुसूचित जनजाति (ST) की 7.5%, EWS के लिए 10% और दिव्यांग (PwD) के लिए 5% सीट भरना जरूरी होता होता है। स्टूडेंट्स और टीचर्स को धमकाने का भी आरोप एसोसिएशन ने छात्र और शिक्षक प्रदर्शनकारियों को डराने-धमकाने का आरोप भी लगाया है। आरोप है कि अनियमित बैठकों और समानांतर समितियों के माध्यम से इसे दरकिनार कर दिया गया था। इसने स्टडी लीव, चाइल्ड केयर लीव, सबैटिकल लीव और प्रमोशन में देरी, और तय कार्यकाल से अधिक समय तक पद पर बने रहने वालों को लेकर भी चिंता जताई है। ————- ये खबर भी पढ़ें.. NEET PG में 258 स्टूडेंट्स के 0 या नेगेटिव नंबर:क्या फिर माइनस नंबर वाले होंगे क्वालिफाई? एक्सपर्ट बोले-सीटें भरने का नहीं, बेचने का फॉर्मूला 24 सितंबर को जारी हुए NEET-PG 2026 रिजल्ट में इस बार कुल 2,63,535 कैंडिडेट्स ने क्वालिफाई किया है। पूरी खबर पढ़ें.. दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
Mika Singh Controversy | Statement On Pakistan And Dubai Muslims

13 मिनट पहले कॉपी लिंक मीका सिंह का असली नाम अमरीक सिंह है। मीका, प्रसिद्ध पंजाबी पॉप स्टार दलेर सिंह मेहंदी के सबसे छोटे भाई हैं। सिंगर मीका सिंह ने पाकिस्तान और वहां के लोगों को लेकर अपनी राय बताई है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग बुरे नहीं हैं। टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में मीका ने कहा, “पाकिस्तान बुरा नहीं, पाकिस्तान के लोग कहीं से बुरे नहीं। पता नहीं क्यों हमें पाकिस्तान के ही मुसलमान खराब लगते हैं, लेकिन दुबई के मुसलमान बहुत अच्छे लगते हैं। यह मुझे आज तक समझ नहीं आया।” मीका बोले- मैं चुपके से पाकिस्तान नहीं गया था मीका ने 2019 में कराची में एक निजी शादी में परफॉर्म किया था। उनकी पाकिस्तान यात्रा पर भारत में आलोचना हुई थी। इसके बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने उन पर बैन लगा दिया था। बाद में यह बैन हटा लिया गया। इस घटना पर मीका ने कहा कि वह चुपके से पाकिस्तान नहीं गए थे। उन्होंने कहा, “जब मैं पाकिस्तान गया था, तब भारत-पाकिस्तान के संबंध अच्छे थे। मेरे पाकिस्तान पहुंचने के बाद उरी हमला हुआ था।” मीका ने कहा, “मैं चोरी-छिपे पाकिस्तान नहीं गया था। मैं वीजा लेकर गया था। उस समय कोई यह नहीं कह रहा था कि मुझे वहां परफॉर्म नहीं करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “अगर आप वहां किसी निजी कार्यक्रम में परफॉर्म करते हैं, कुछ पैसे कमाते हैं और उन्हें भारत वापस लाते हैं, तो उस पैसे पर भारत में टैक्स लगता है।” मीका सिंह ने अपने 14 सदस्यीय बैंड के साथ पाकिस्तान के कराची शहर में एक हाई-प्रोफाइल शादी के कार्यक्रम (मेहंदी की रस्म) में प्रस्तुति दी थी। मीका ने पाकिस्तान में भारतीय कलाकारों के परफॉर्म करने पर होने वाली आलोचना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सिंगर्स के भारत में परफॉर्म करने पर लोगों को परेशानी नहीं होती। मीका ने कहा, “जब वे यहां आकर परफॉर्म करते हैं, तो आपको कोई परेशानी नहीं होती। मुझे पाकिस्तानी सिंगर्स से कोई दिक्कत नहीं है। जब वे यहां आते हैं, तो आईफा में सभी हाथ उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान में लोग मुझे सम्मान दे रहे हैं, तो हमें इससे खुश होना चाहिए।” मीका ने पाकिस्तान से अपने निजी जुड़ाव की बात बताई मीका ने यह भी बताया कि पाकिस्तान से उनका निजी जुड़ाव क्यों है। उन्होंने वहां मौजूद सिख धार्मिक स्थलों का जिक्र किया। सिंगर ने कहा, “पाकिस्तान से मेरा जुड़ाव क्यों है? इसके पीछे एक भावनात्मक कहानी है। गुरु नानक देव जी का गुरुद्वारा ननकाना साहिब वहां है। पाकिस्तान में तीन बड़े गुरुद्वारे हैं।” उन्होंने कहा, “जब मुझे पहले पाकिस्तान से न्योते मिलते थे, तो मुझे लगता था कि मुझे गुरुद्वारे की ओर से बुलाया जा रहा है।” 2019 के पहले 2017 में मीका सिंह का एक बयान विवाद का कारण बना था। दरअसल, अमेरिका के ह्यूस्टन में भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक म्यूजिकल शो के प्रमोशन वीडियो में मीका ने दोनों देशों के लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि 15 अगस्त को हमारा हिंदुस्तान आजाद हुआ और 14 अगस्त को हमारा पाकिस्तान। उनके इस बयान में पाकिस्तान को हमारा पाकिस्तान कहने पर भारत में सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी आलोचना की थी। विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी मामले में शामिल हो गई थी। पार्टी की फिल्म विंग के तत्कालीन प्रमुख अमेय खोपकर ने मीका सिंह के बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें महाराष्ट्र में आकर कार्यक्रम करने की चुनौती दी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर मीका ने मुंबई या महाराष्ट्र में परफॉर्म करने की कोशिश की तो MNS इसका विरोध करेगी और कार्यक्रम नहीं होने देगी। ………………. मीका सिंह से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…. मीका सिंह ने दिलजीत दोसांझ पर उठाए सवाल: बोले- ‘बॉर्डर 2’ को प्रमोट नहीं किया, पाकिस्तानी एक्ट्रेस वाली फिल्म का किया प्रमोशन सिंगर मीका सिंह ने हाल ही में दिलजीत दोसांझ के बॉलीवुड फिल्मों के प्रमोशन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा था कि दिलजीत ने ‘बॉर्डर 2’ को ज्यादा प्रमोट नहीं किया। मीका ने यह भी कहा था कि दिलजीत ने उस फिल्म के बारे में पोस्ट किया था, जिसमें पाकिस्तानी एक्ट्रेस हानिया आमिर थीं। हालांकि, दिलजीत ने ‘बॉर्डर 2’ का फर्स्ट लुक और कुछ BTS वीडियो शेयर किए थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Mika Singh Controversy | Statement On Pakistan And Dubai Muslims

25 मिनट पहले कॉपी लिंक मीका सिंह का असली नाम अमरीक सिंह है। मीका, प्रसिद्ध पंजाबी पॉप स्टार दलेर सिंह मेहंदी के सबसे छोटे भाई हैं। सिंगर मीका सिंह ने पाकिस्तान और वहां के लोगों को लेकर अपनी राय बताई। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के लोग बुरे नहीं हैं। टाइम्स नाउ के साथ बातचीत में मीका ने कहा, “पाकिस्तान बुरा नहीं, पाकिस्तान के लोग कहीं से बुरे नहीं। पता नहीं क्यों हमें पाकिस्तान के ही मुसलमान खराब लगते हैं, लेकिन दुबई के मुसलमान बहुत अच्छे लगते हैं। यह मुझे आज तक समझ नहीं आया।” मीका बोले- मैं चुपके से पाकिस्तान नहीं गया था मीका ने 2019 में कराची में एक निजी शादी में परफॉर्म किया था। उनकी पाकिस्तान यात्रा पर भारत में आलोचना हुई थी। इसके बाद फेडरेशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज ने उन पर बैन लगा दिया था। बाद में यह बैन हटा लिया गया। इस घटना पर मीका ने कहा कि वह चुपके से पाकिस्तान नहीं गए थे। उन्होंने कहा, “जब मैं पाकिस्तान गया था, तब भारत-पाकिस्तान के संबंध अच्छे थे। मेरे पाकिस्तान पहुंचने के बाद उरी हमला हुआ था।” मीका ने कहा, “मैं चोरी-छिपे पाकिस्तान नहीं गया था। मैं वीजा लेकर गया था। उस समय कोई यह नहीं कह रहा था कि मुझे वहां परफॉर्म नहीं करना चाहिए।” उन्होंने कहा, “अगर आप वहां किसी निजी कार्यक्रम में परफॉर्म करते हैं, कुछ पैसे कमाते हैं और उन्हें भारत वापस लाते हैं, तो उस पैसे पर भारत में टैक्स लगता है।” मीका सिंह ने अपने 14 सदस्यीय बैंड के साथ पाकिस्तान के कराची शहर में एक हाई-प्रोफाइल शादी के कार्यक्रम (मेहंदी की रस्म) में प्रस्तुति दी थी। मीका ने पाकिस्तान में भारतीय कलाकारों के परफॉर्म करने पर होने वाली आलोचना पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी सिंगर्स के भारत में परफॉर्म करने पर लोगों को परेशानी नहीं होती। मीका ने कहा, “जब वे यहां आकर परफॉर्म करते हैं, तो आपको कोई परेशानी नहीं होती। मुझे पाकिस्तानी सिंगर्स से कोई दिक्कत नहीं है। जब वे यहां आते हैं, तो आईफा में सभी हाथ उठाते हैं।” उन्होंने कहा, “अगर पाकिस्तान में लोग मुझे सम्मान दे रहे हैं, तो हमें इससे खुश होना चाहिए।” मीका ने पाकिस्तान से अपने निजी जुड़ाव की बात बताई मीका ने यह भी बताया कि पाकिस्तान से उनका निजी जुड़ाव क्यों है। उन्होंने वहां मौजूद सिख धार्मिक स्थलों का जिक्र किया। सिंगर ने कहा, “पाकिस्तान से मेरा जुड़ाव क्यों है? इसके पीछे एक भावनात्मक कहानी है। गुरु नानक देव जी का गुरुद्वारा ननकाना साहिब वहां है। पाकिस्तान में तीन बड़े गुरुद्वारे हैं।” उन्होंने कहा, “जब मुझे पहले पाकिस्तान से न्योते मिलते थे, तो मुझे लगता था कि मुझे गुरुद्वारे की ओर से बुलाया जा रहा है।” 2017 में मीका सिंह का एक बयान विवादों में आया था 2019 के पहले 2017 में मीका सिंह का एक बयान विवाद का कारण बना था। दरअसल, अमेरिका के ह्यूस्टन में भारत और पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के मौके पर आयोजित एक म्यूजिकल शो के प्रमोशन वीडियो में मीका ने दोनों देशों के लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने का न्योता दिया था। इस दौरान उन्होंने कहा था कि 15 अगस्त को हमारा हिंदुस्तान आजाद हुआ और 14 अगस्त को हमारा पाकिस्तान। उनके इस बयान में पाकिस्तान को हमारा पाकिस्तान कहने पर भारत में सोशल मीडिया यूजर्स ने उनकी आलोचना की थी। विवाद बढ़ने के बाद महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) भी मामले में शामिल हो गई थी। पार्टी की फिल्म विंग के तत्कालीन प्रमुख अमेय खोपकर ने मीका सिंह के बयान पर आपत्ति जताते हुए उन्हें महाराष्ट्र में आकर कार्यक्रम करने की चुनौती दी थी। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर मीका ने मुंबई या महाराष्ट्र में परफॉर्म करने की कोशिश की तो MNS इसका विरोध करेगी और कार्यक्रम नहीं होने देगी। ………………. मीका सिंह से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…. मीका सिंह ने दिलजीत दोसांझ पर उठाए सवाल: बोले- ‘बॉर्डर 2’ को प्रमोट नहीं किया, पाकिस्तानी एक्ट्रेस वाली फिल्म का किया प्रमोशन सिंगर मीका सिंह ने हाल ही में दिलजीत दोसांझ के बॉलीवुड फिल्मों के प्रमोशन पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा था कि दिलजीत ने ‘बॉर्डर 2’ को ज्यादा प्रमोट नहीं किया। मीका ने यह भी कहा था कि दिलजीत ने उस फिल्म के बारे में पोस्ट किया था, जिसमें पाकिस्तानी एक्ट्रेस हानिया आमिर थीं। हालांकि, दिलजीत ने ‘बॉर्डर 2’ का फर्स्ट लुक और कुछ BTS वीडियो शेयर किए थे। पूरी खबर यहां पढ़ें… दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
फर्जी मैसेज वायरल होने पर भड़के जावेद अख्तर:CJP-अभिजीत दीपके की आलोचना करने के दावों को बताया झूठ, बोले- मेरे नाम का इस्तेमाल क्यों?

जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर वायरल उस मेसैज को पूरी तरह फेक बताया है, जिसमें दावा किया गया था कि उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस दावे को खारिज किया। जावेद अख्तर ने सवाल उठाया कि अभिजीत दीपके और CJP की आलोचना के लिए उनके नाम का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है। उन्होंने X पर लिखा, “मैं जावेद अख्तर, सभी को बताना चाहता हूं कि सोशल मीडिया पर फैला यह झूठा मेसैज कि मैंने CJP की आलोचना की है और अभिजीत दीपके को नीचा दिखाया है। यह पूरी तरह से फेक है। मुझे आश्चर्य है कि दीपके और CJP का विरोध करने वालों को मुझ जैसे व्यक्ति से विश्वसनीयता उधार लेने की जरूरत क्यों पड़ रही है? ये हालत हो गई है? दुखद है।” बता दें कि सोशल मीडिया पर वायरल हुए फेक मैसेज में जावेद अख्तर ने अभिजीत दीपके और CJP की आलोचना की थी। इसमें दीपके को अरविंद केजरीवाल की कठपुतली बताया गया था। जावेद अख्तर और कंचन गुप्ता में सोशल मीडिया पर भिड़ंत सोमवार को जावेद अख्तर और सूचना प्रसारण मंत्रालय में वरिष्ठ सलाहकार कंचन गुप्ता ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के एक बयान को लेकर सोशल मीडिया एक्स पर भिड़ गए। दरअसल, मौलाना साजिद रशीदी ने आबादी बढ़ाने को लेकर बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि मुस्लिम परिवारों में पांच से ज्यादा बच्चे होना सामान्य है और छह बच्चों की संख्या उनके लिए लास्ट है। उन्होंने हिंदू परिवारों के कम बच्चे पैदा करने पर भी सवाल उठाए। रशीदी ने कहा था, “हमारे यहां तो पांच से ऊपर होते हैं सबके। छह तो बिल्कुल लास्ट आंकड़ा है। कम से कम नहीं तो छह, आठ, दस और ग्यारह-बारह भी होते हैं।” उन्होंने हिंदुओं की ओर इशारा करते हुए कहा, “कम से कम दस पर तो आओ।” कंचन गुप्ता ने जावेद अख्तर पर साधा निशाना कंचन गुप्ता ने रशीदी के बयान की खबर शेयर करते हुए जावेद अख्तर पर सवाल उठाए। उन्होंने लिखा कि अगर किसी हिंदू ने कहा होता कि मुसलमानों के 11-12 बच्चे होते हैं तो नसीरुद्दीन शाह भड़क जाते, जावेद अख्तर को बहुत बुरा लगता और LeLi गैंग सड़कों पर ‘सर तन से जुदा…’ के नारे लगाते हुए मार्च निकालता। उन्होंने कहा कि यह बात मौलाना रशीदी ने कही है। कंचन गुप्ता ने आगे लिखा कि उन्होंने जावेद अख्तर को बताया कि उनके सहधर्मी मौलाना साजिद रशीदी किस बात का गर्व से प्रदर्शन करते हैं। उनके मुताबिक, इतना ही उन्हें सांप्रदायिक और कट्टरपंथी करार देने के लिए काफी था। जावेद अख्तर ने कंचन गुप्ता को दिया जवाब जावेद अख्तर ने कंचन गुप्ता के आरोपों पर कहा कि एक कट्टर सांप्रदायिक और संकीर्ण सोच वाले व्यक्ति होने के बावजूद उन्होंने ऐसे मौलाना के बयान पर भरोसा किया, जो उनकी तरह सांप्रदायिक और संकीर्ण सोच वाला लगता है। उन्होंने कहा कि दोनों एक ही तरह के लोग हैं। अख्तर ने सुझाव दिया कि दूसरे समुदाय के अपने हम-ख्याल व्यक्ति पर भरोसा करने के बजाय सरकारी जनगणना के आंकड़ों पर भरोसा किया जाए। उन्होंने कहा कि नफरत फैलाने की कोशिशों के लिए शायद ये आंकड़े काम के न हों। हिंदू धर्म को लेकर भी हुई बहस कंचन गुप्ता के आरोपों के जवाब में जावेद अख्तर ने लिखा, “आप हिंदू धर्म की सफेद चादर पर एक बदसूरत दाग की तरह हैं।” उन्होंने विवेकानंद, गांधी और राधाकृष्णन को पढ़ने की बात कही और कहा कि उन्हें मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ नहीं जोड़ा जा सकता। इस पर कंचन गुप्ता ने कहा कि हिंदू धर्म कोई “सफेद चादर” यानी कफन नहीं है। उन्होंने इसे जीवंत, बहुरंगी और जीवन को ऊर्जा देने वाला धर्म बताया। उन्होंने कहा कि जावेद अख्तर की उपमाएं और मिसालें बहुत कुछ जाहिर करती हैं। इसके बाद जावेद अख्तर ने कहा कि मौलाना उनके धर्म के नहीं हैं, क्योंकि वह किसी भी धर्म को नहीं मानते। उन्होंने कंचन गुप्ता से कहा, “मिस्टर कंचन गुप्ता, आपने गलत आदमी से पंगा लिया है। मैं आपको अपने झूठ के साथ बचकर नहीं निकलने दूंगा। आजमाकर देख लीजिए।” कंचन गुप्ता ने जवाब में इसे “सुविधा के अनुसार किनारा करना” बताया। उन्होंने कहा कि इस्लाम को लेकर जावेद अख्तर की सोच की तुलना हिंदू धर्म, जो उनका धर्म है, के प्रति उनके नजरिए से नहीं की जानी चाहिए। इसके बाद जावेद अख्तर ने रिप्लाई देते हुए लिखा, “तुम हिंदू धर्म की सफेद चादर पर लगे एक बदसूरत दाग हो। स्वामी विवेकानंद, महात्मा गांधी और डॉ. राधाकृष्णन को पढ़ो, तब समझोगे कि तुम जैसे संकीर्ण सोच वाले लोग जिस धर्म को बदनाम कर रहे हो, वह वास्तव में क्या है। अपनी पूरी कोशिश कर लो, लेकिन तुम मुझे मुस्लिम कट्टरपंथियों के साथ जोड़ नहीं सकते। मुंबई पुलिस ने खुद तीन बार कट्टरपंथी मुल्लाओं से मेरी सुरक्षा के लिए मुझे सुरक्षा दी है। मुझे नहीं लगता कि तुम यह बात समझ पाओगे। तुम इतने छोटी सोच वाले हो कि सच कहूं तो मुझे तुम्हारे लिए अफसोस होता है।” …..… यह खबर भी पढ़ें… CJP के आंदोलन में शामिल हुए नसीरुद्दीन शाह: पुलिस परमिशन न मिलने के बाद भी पहुंचे, दीपके को गले लगाया; शबाना आजमी-विशाल ददलानी भी पहुंचे 2 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में प्रदर्शन हुआ था। नसीरुद्दीन शाह इसमें शामिल हुए थे। अभिनेत्री शबाना आजमी और संगीतकार विशाल ददलानी भी प्रदर्शन में पहुंचे थे। नसीरुद्दीन ने CJP संस्थापक अभिजीत दीपके से मुलाकात की और उन्हें गले लगाया था। विशाल भारद्वाज और शर्लिन चोपड़ा समेत कई सेलेब्स ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…





