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Delhi High Court Relief | Maggi Controversy Retailers Criminal Case Quashed

Delhi High Court Relief | Maggi Controversy Retailers Criminal Case Quashed
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नई दिल्ली20 मिनट पहले

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दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के मैगी विवाद में दुकानदारों के खिलाफ दर्ज सभी केस रद्द कर दिए हैं। यह सभी क्रिमिनल केस मैगी में लेड और मोनोसोडियम ग्लूटामेट की ज्यादा मात्रा पाए जाने के आरोपों के बाद दर्ज किए गए थे।

जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा।

इस फैसले और पूरे मामले के हर पहलू को सवाल-जवाब के जरिए जानिए…

सवाल: दिल्ली हाईकोर्ट ने मैगी से जुड़ा क्या फैसला सुनाया है?

जवाब: दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के चर्चित मैगी विवाद में दुकानदारों (रिटेलर्स और सप्लायर्स) के खिलाफ दर्ज सभी क्रिमिनल केस रद्द कर दिए हैं। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने 2015 में जिन दुकानों से सैंपल लिए थे, उनके मालिकों पर मुकदमे चलाए जा रहे थे। कोर्ट ने इन याचिकाओं का निपटारा करते हुए कानूनी कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।

सवाल: अदालत ने मुकदमों को खारिज करने का क्या कारण बताया?

जवाब: जस्टिस मधु जैन ने कहा कि जब जांच का मूल आधार ही वैज्ञानिक रूप से खत्म हो चुका है, तो एक लंबा आपराधिक ट्रायल सही नहीं होगा। कोर्ट के मुताबिक, फूड सेफ्टी एनालिस्ट की शुरुआती रिपोर्ट के अलावा मिलावट का कोई सबूत मौजूद नहीं है।

सवाल: यह पूरा मामला कब और कैसे शुरू हुआ था?

जवाब: मई 2015 में देशभर में मैगी के सैंपल लिए गए थे। फूड एनालिस्ट की शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मैगी के मसाला टेस्टमेकर में लेड की मात्रा तय सीमा 2.5 पार्ट्स पर मिलियन (PPM) से ज्यादा थी।

इसके अलावा पैकेट पर नो एडेड मैसेज का दावा करने के बावजूद इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो मिलने का आरोप लगाया गया था। साथ ही इसे इंसान के खाने के लिए असुरक्षित बताया गया था।

सवाल: मामले में दुकानदारों और सप्लायरों को कैसे आरोपी बनाया गया था?

जवाब: फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने जांच के दौरान मैगी की सप्लाई चेन का पता लगाया। दुकानदारों के अलावा सप्लायर फर्म मेसर्स धींगरा ब्रदर्स और मैन्युफैक्चरर कंपनी नेस्ले इंडिया लिमिटेड के जिम्मेदार प्रतिनिधियों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत FIR दर्ज कर समन जारी किए गए थे।

सवाल: दुकानदारों के वकीलों ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?

जवाब: आरोपियों की तरफ से पेश वकील राजेश बत्रा और सोनिया कुकरेजा ने दलील दी कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 13 अगस्त 2015 को ही मैगी पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था। इसके बाद तीन मान्यता प्राप्त लैब में नए सैंपलों की जांच हुई थी, जिसमें लेड की मात्रा तय सीमा के भीतर पाई गई थी। इसलिए अब केस का कोई आधार ही नहीं बचता।

सवाल: सुप्रीम कोर्ट और सरकारी लैब की क्या भूमिका रही?

जवाब: मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो हाई कोर्ट ने 16 जनवरी 2016 को मैसुरु स्थित सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) को मैगी के सैंपलों की दोबारा जांच का आदेश दिया। सरकारी लैब की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मैगी में लेड और अजीनोमोटो की मात्रा तय नियमों और तय मानकों के भीतर ही थी।

सवाल: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया था?

जवाब: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CFTRI की रिपोर्ट को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के समक्ष रखा गया था। NCDRC ने केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि मैगी असुरक्षित थी, इसका कोई प्रमाण नहीं है और रेफरल लैब की रिपोर्ट ही अंतिम मानी जाएगी।

सवाल: मामले पर सरकारी पक्ष की क्या दलील थी?

जवाब: राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील दिगम सिंह डागर ने तर्क दिया कि सैंपल लेने की प्रक्रिया FSS एक्ट के नियमों के अनुसार हुई थी। उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और NCDRC के फैसले अलग संदर्भ में थे, इसलिए दुकानदारों के खिलाफ चल रहे केस रद्द नहीं होने चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।

सवाल: इस फैसले का आम दुकानदारों और आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

जवाब: इस फैसले से उन छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले 9 सालों से सिर्फ सामान बेचने की वजह से अदालती चक्कर काट रहे थे। आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह फैसला साफ करता है कि देश की सर्वोच्च अदालतों और वैज्ञानिक लैब की जांच में मैगी में लेड और हानिकारक तत्वों का दावा खारिज हो चुका है।

जानें क्या है मोनोसोडियम ग्लूटामेट और पार्स पर मिलियन

  • मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG): यह एक फ्लेवर एन्हांसर है, जो खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह कई प्राकृतिक चीजों (जैसे टमाटर, पनीर) में भी पाया जाता है।
  • पार्स पर मिलियन (PPM): यह किसी तत्व की शुद्धता या मिलावट मापने की इकाई है। 1 PPM का मतलब 10 लाख हिस्सों में से 1 हिस्सा होता है। खाद्य नियमों के तहत मैगी में सीसे की सीमा 2.5 PPM निर्धारित है।

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जस्टिस मधु जैन की बेंच ने कहा कि जब सुप्रीम कोर्ट और सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) की जांच में मैगी के सैंपल सुरक्षित पाए जा चुके हैं, तो दुकानदारों पर मुकदमा चलाना उनके साथ अन्याय होगा।

इस फैसले और पूरे मामले के हर पहलू को सवाल-जवाब के जरिए जानिए…

सवाल: दिल्ली हाईकोर्ट ने मैगी से जुड़ा क्या फैसला सुनाया है?

जवाब: दिल्ली हाईकोर्ट ने साल 2015 के चर्चित मैगी विवाद में दुकानदारों (रिटेलर्स और सप्लायर्स) के खिलाफ दर्ज सभी क्रिमिनल केस रद्द कर दिए हैं। फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने 2015 में जिन दुकानों से सैंपल लिए थे, उनके मालिकों पर मुकदमे चलाए जा रहे थे। कोर्ट ने इन याचिकाओं का निपटारा करते हुए कानूनी कार्यवाही को समाप्त कर दिया है।

सवाल: अदालत ने मुकदमों को खारिज करने का क्या कारण बताया?

जवाब: जस्टिस मधु जैन ने कहा कि जब जांच का मूल आधार ही वैज्ञानिक रूप से खत्म हो चुका है, तो एक लंबा आपराधिक ट्रायल सही नहीं होगा। कोर्ट के मुताबिक, फूड सेफ्टी एनालिस्ट की शुरुआती रिपोर्ट के अलावा मिलावट का कोई सबूत मौजूद नहीं है।

सवाल: यह पूरा मामला कब और कैसे शुरू हुआ था?

जवाब: मई 2015 में देशभर में मैगी के सैंपल लिए गए थे। फूड एनालिस्ट की शुरुआती रिपोर्ट में दावा किया गया था कि मैगी के मसाला टेस्टमेकर में लेड की मात्रा तय सीमा 2.5 पार्ट्स पर मिलियन (PPM) से ज्यादा थी।

इसके अलावा पैकेट पर नो एडेड मैसेज का दावा करने के बावजूद इसमें मोनोसोडियम ग्लूटामेट यानी अजीनोमोटो मिलने का आरोप लगाया गया था। साथ ही इसे इंसान के खाने के लिए असुरक्षित बताया गया था।

सवाल: मामले में दुकानदारों और सप्लायरों को कैसे आरोपी बनाया गया था?

जवाब: फूड सेफ्टी डिपार्टमेंट ने जांच के दौरान मैगी की सप्लाई चेन का पता लगाया। दुकानदारों के अलावा सप्लायर फर्म मेसर्स धींगरा ब्रदर्स और मैन्युफैक्चरर कंपनी नेस्ले इंडिया लिमिटेड के जिम्मेदार प्रतिनिधियों के खिलाफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स एक्ट के तहत FIR दर्ज कर समन जारी किए गए थे।

सवाल: दुकानदारों के वकीलों ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?

जवाब: आरोपियों की तरफ से पेश वकील राजेश बत्रा और सोनिया कुकरेजा ने दलील दी कि बॉम्बे हाईकोर्ट ने 13 अगस्त 2015 को ही मैगी पर लगे प्रतिबंध को हटा दिया था। इसके बाद तीन मान्यता प्राप्त लैब में नए सैंपलों की जांच हुई थी, जिसमें लेड की मात्रा तय सीमा के भीतर पाई गई थी। इसलिए अब केस का कोई आधार ही नहीं बचता।

सवाल: सुप्रीम कोर्ट और सरकारी लैब की क्या भूमिका रही?

जवाब: मामला जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, तो हाई कोर्ट ने 16 जनवरी 2016 को मैसुरु स्थित सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (CFTRI) को मैगी के सैंपलों की दोबारा जांच का आदेश दिया। सरकारी लैब की वैज्ञानिक जांच रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ कि मैगी में लेड और अजीनोमोटो की मात्रा तय नियमों और तय मानकों के भीतर ही थी।

सवाल: राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग ने इस मुद्दे पर क्या रुख अपनाया था?

जवाब: सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CFTRI की रिपोर्ट को नेशनल कंज्यूमर डिस्प्यूट्स रिड्रेसल कमीशन (NCDRC) के समक्ष रखा गया था। NCDRC ने केंद्रीय उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निष्कर्ष निकाला कि मैगी असुरक्षित थी, इसका कोई प्रमाण नहीं है और रेफरल लैब की रिपोर्ट ही अंतिम मानी जाएगी।

सवाल: मामले पर सरकारी पक्ष की क्या दलील थी?

जवाब: राज्य सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील दिगम सिंह डागर ने तर्क दिया कि सैंपल लेने की प्रक्रिया FSS एक्ट के नियमों के अनुसार हुई थी। उन्होंने कहा कि बॉम्बे हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट और NCDRC के फैसले अलग संदर्भ में थे, इसलिए दुकानदारों के खिलाफ चल रहे केस रद्द नहीं होने चाहिए। हालांकि हाईकोर्ट ने इस दलील को खारिज कर दिया।

सवाल: इस फैसले का आम दुकानदारों और आम जनता पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

जवाब: इस फैसले से उन छोटे दुकानदारों को बड़ी राहत मिली है, जो पिछले 9 सालों से सिर्फ सामान बेचने की वजह से अदालती चक्कर काट रहे थे। आम उपभोक्ताओं के लिए भी यह फैसला साफ करता है कि देश की सर्वोच्च अदालतों और वैज्ञानिक लैब की जांच में मैगी में लेड और हानिकारक तत्वों का दावा खारिज हो चुका है।

जानें क्या है मोनोसोडियम ग्लूटामेट और पार्स पर मिलियन

  • मोनोसोडियम ग्लूटामेट (MSG): यह एक फ्लेवर एन्हांसर है, जो खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए इस्तेमाल होता है। यह कई प्राकृतिक चीजों (जैसे टमाटर, पनीर) में भी पाया जाता है।
  • पार्स पर मिलियन (PPM): यह किसी तत्व की शुद्धता या मिलावट मापने की इकाई है। 1 PPM का मतलब 10 लाख हिस्सों में से 1 हिस्सा होता है। खाद्य नियमों के तहत मैगी में सीसे की सीमा 2.5 PPM निर्धारित है।

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