World updates| Trump Wanted Gulf of Mexico Named After Him | Controversy

Hindi News International World Updates| Trump Wanted Gulf Of Mexico Named After Him | Controversy| Iran, China, Russia, Usa, Putin, Trump, 26 मिनट पहले कॉपी लिंक अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक इंटरव्यू में खुलासा किया कि उन्होंने एक समय गल्फ ऑफ मैक्सिको का नाम ‘गल्फ ऑफ ट्रम्प’ रखने पर भी विचार किया था, लेकिन बाद में यह फैसला छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि यह शायद काम नहीं करता और विवाद बढ़ सकता था। ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि यह फैसला उनकी बड़ी योजना का हिस्सा था। इसके तहत उन्होंने इस खाड़ी का नाम बदलकर ‘गल्फ ऑफ अमेरिका’ रखने का आदेश दिया था। उन्होंने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में, 20 जनवरी 2025 को, एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर करके यह बदलाव लागू किया। इस आदेश के तहत अमेरिका के अंदर सभी सरकारी एजेंसियों को नया नाम अपनाने के निर्देश दिए गए। यूएस जियोलॉजिकल सर्वे ने भी अपने रिकॉर्ड में यह बदलाव दर्ज किया। हालांकि, इस फैसले पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आलोचना हुई। खासकर मेक्सिको ने इसका विरोध किया। वहां की राष्ट्रपति क्लाउडिया शीनबाम ने कहा कि गल्फ ऑफ मैक्सिको नाम सदियों से इस्तेमाल हो रहा है और पूरी दुनिया में मान्यता प्राप्त है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔
Himachal chester hill Controversy | RERA ex chairman Shrikant Baldi Vs CS Sanjay Gupta

हिमाचल के पूर्व रेरा चेयरमैन ने चीफ सेक्रेटरी के दो आदेश अवैध बताए। हिमाचल प्रदेश में 1500 करोड़ रुपए का कथित चेस्टर हिल भूमि खरीद घोटाला तूल पकड़ रहा है। रेरा के पूर्व चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी के बाद अब पूर्व मुख्य सचिव विनीत चौधरी ने भी हिमाचल सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए। इस बीच भारतीय जनता पार्टी ने भी कांग . BJP के वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक जमवाल ने कहा कि भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे अफसरों पर कार्रवाई करने के बजाय मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू उन्हें शेल्टर दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि सचिवालय को भ्रष्टाचार का अड्डा बनाने वाले अफसरों पर सीएम को कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने चेस्टर हिल मामला सीबीआई को देने की मांग की। जमवाल ने कहा कि अधिकारियों के बीच खुले आरोप-प्रत्यारोप सरकार के भीतर समन्वय की कमी और कमजोर नेतृत्व को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा- प्रदेश में ऐसी स्थिति पहली बार बनी है जब अधिकारी सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हैं। भाजपा के प्रदेश वरिष्ठ प्रवक्ता त्रिलोक जमवाल। बाल्दी ने चीफ सेक्रेटरी के दो ऑर्डर को अवैध बताया इससे पहले, श्रीकांत बाल्दी ने चीफ सेक्रेटरी संजय गुप्ता के खिलाफ मोर्चा खोला। बाल्दी ने संजय गुप्ता के दो आदेशों को ‘अवैध’ करार देते हुए उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि वह जल्द शिमला आकर इस मसले पर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात करेंगे। श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि संजय गुप्ता ने पहले SDM सोलन की चेस्टर हिल प्रोजेक्ट की भूमि खरीद में गड़बड़ी उजागर करने वाली जांच रिपोर्ट को दबाया। इस रिपोर्ट में भूमि कानून (सेक्शन 118) के उल्लंघन की बात सामने आई थी। इसके बाद, संजय गुप्ता ने नगर निगम सोलन द्वारा अवैध निर्माण को गिराने के कमिश्नर के आदेश को भी रद्द कर दिया। बाल्दी ने कहा कि चीफ सेक्रेटरी के दोनों आदेश उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर थे। बाल्दी ने इसे सत्ता के दुरुपयोग का उदाहरण बताया। वहीं, संजय गुप्ता ने दो सप्ताह पूर्व शिमला में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर श्रीकांत बाल्दी समेत दो पूर्व मुख्य सचिव आरडी धीमान और प्रबोध सक्सेना पर भी कई गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने RERA के पूर्व चेयरमैन श्रीकांत बाल्दी द्वारा चेस्टर हिल प्रोजेक्ट को क्लीयरेंस देने पर भी सवाल उठाए थे। इसके बाद बाल्दी ने भी संजय गुप्ता पर पलटवार किया है। सोशल मीडिया में गलत खबर फैलाई जा रही: बाल्दी श्रीकांत बाल्दी ने कहा कि सोशल मीडिया में यह बात फैलाई जा रही है कि उन्होंने RERA चेयरमैन रहते हुए चेस्टर हिल प्रोजेक्ट का दौरा किया था और उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। इस पर बाल्दी ने स्पष्ट किया कि RERA अथॉरिटी ने करीब तीन साल पहले केवल चेस्टर हिल फेज-1 का दौरा किया था, जो लगभग पूरा हो चुका था। उस समय फेज-2 और 4 अस्तित्व में ही नहीं थे, जिस पर आज विवाद हो रहा है। मुख्य सचिव ने दो पूर्व चीफ सेक्रेटरी पर लगाए षड़यंत्र रचने के आरोप। RERA ने चेस्टर हिल प्रमोटर पर लगाया था 10 लाख जुर्माना: बाल्दी बाल्दी ने बताया कि उनके दौरे के दौरान प्रोजेक्ट की प्रगति संतोषजनक पाई गई थी और फ्लैट खरीदारों ने गुणवत्ता को लेकर संतुष्टि जताई थी। उस समय RERA के पास इस प्रोजेक्ट के खिलाफ कोई शिकायत भी लंबित नहीं थी। हालांकि, बाद में शिकायतें मिलने पर RERA ने प्रोजेक्ट प्रमोटर्स के खिलाफ कार्रवाई की और 10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया। RERA का काम प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करना है प्रोजेक्ट रजिस्ट्रेशन को लेकर बाल्दी ने कहा कि RERA केवल प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन करता है, कोई मंजूरी नहीं देता। सभी आवश्यक अनुमतियां राज्य सरकार के संबंधित विभागों द्वारा दी जाती हैं। उन्होंने दावा किया कि चेस्टर हिल प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन सभी जरूरी दस्तावेजों के आधार पर पूरी पारदर्शिता के साथ किया गया था। हिमाचल हाईकोर्ट के एडवोकेट विनय शर्मा ने चीफ सेक्रेटरी के खिलाफ छोटा शिमला थाना में शिकायत दी। चेस्टर हिल मामले में एडवोकेट ने मुख्य सचिव के खिलाफ शिकायत दी बता दें कि चेस्टर हिल प्रोजेक्ट मामले में हाईकोर्ट के एडवोकेट विनय शर्मा ने मुख्य सचिव संजय गुप्ता के खिलाफ छोटा शिमला थाने में शिकायत दे रखी है। इसमें उन्होंने चेस्टर हिल प्रोजेक्ट में 1500 करोड़ रुपए के जमीन खरीद घोटाले के आरोप लगाए हैं। SDM की जांच रिपोर्ट को गलत ठहराकर बंद किया उन्होंने कहा कि SDM सोलन ने अपनी जांच रिपोर्ट में चेस्टर हिल प्रोजेक्ट की जमीन खरीद में कई गड़बड़ियां उजागर की थीं, लेकिन मुख्य सचिव संजय गुप्ता ने SDM की जांच रिपोर्ट को ही गलत ठहराकर बंद कर दिया। इसके आधार पर उन्होंने मुख्य सचिव के खिलाफ शिकायत दे रखी है। इसी मामले में माकपा ने भी मुख्य सचिव के खिलाफ प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए और उन्हें पद से हटाने की चेतावनी दे रखी है। यह मामला विधानसभा में गूंज चुका है। इसके बाद ही मुख्य सचिव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर राज्य के तीन पूर्व मुख्य सचिवों पर उन्हें बदनाम करने के षड्यंत्र रचने के आरोप लगाए।
थमने का नाम नहीं ले रहा वंदे मातरम् विवाद:मालिनी गौड़ बोलीं- हम ऐसे लोगों से वोट ही नहीं मांगते, आकाश विजयवर्गीय ने कहा-ऐसे लोग देशद्रोही

इंदौर में नगर निगम बजट परिषद के दौरान शुरू हुआ वंदे मातरम् का विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब इंदौर में बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने ऐलान किया है कि वह उन जगहों पर वोट मांगने भी नहीं जाती, जहां लोग वंदे मातरम् नहीं बोलते हैं। वहीं आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि जो लोग वंदेमातरम नहीं बोलते वो लोग आतंकी से कम नहीं है, ये लोग देशद्रोही हैं। बीजेपी विधायक मालिनी गौड़ ने कहा कि जो इस देश में रहेगा, उसे “वंदे मातरम” और “भारत माता की जय” बोलना ही होगा। यह देशभक्ति से जुड़ा विषय है और इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने दिवंगत नेता लखन दादा का जिक्र करते हुए कहा कि वे भी यही कहते थे और वह स्वयं भी उसी विचारधारा पर चलती हैं। मुझे उनके वोट भी नहीं चाहिए जो वंदे मातरम् नहीं बोलते और भारत माता की जय नहीं बोलते। वहीं पूर्व मंत्री व विधायक ऊषा ठाकुर ने कहा कि वंदे मातरम गाना होगा, नहीं तो भारत से जाना होगा। ऐसे लोगों के वोट नहीं चाहिए मालिनी गौड़ ने कहा कि जो लोग वंदे मातरम् या भारत माता की जय बोलने से परहेज करते हैं, उनके वोट की उन्हें आवश्यकता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे क्षेत्रों में वे चुनाव प्रचार के लिए भी नहीं जातीं। विधायक के इस बयान के बाद पहले से चल रहा वंदे मातरम् विवाद और तेज हो गया है। राजनीतिक हलकों में इस बयान को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। विवाद में आकाश विजयवर्गीय ने कहा कि ये तो भाजपा का शासन, मोदी जी की सरकार है। आरएसएस जैसी संस्था है। वरना वंदे मातरम् पर आपत्ति लेने वाले लोग अवसर मिलने पर देश और समाज का बड़ा नुकसान कर सकते हैं। इस देश में रहना है तो वंदे मातरम् बोलना होगा इधर, राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम विवाद पर पूर्व मंत्री उषा ठाकुर ने कहा कि इस देश में रहना होगा तो वंदे मातरम् कहना होगा। इस्लाम इजाजत नहीं देता, तो ये इस्लामिक कंट्री तो है नहीं, भारत स्वतंत्र एक देश है जो संविधान के सिद्धांतों पर चलता है। तुम्हें गाड़ने की जो अनुमति मिली है वह भी भारत माता की असीम कृपा से ही मिली है, जिसकी गोद में आप समाहित होते हैं उसकी प्रार्थना करने से आपको परहेज है। भारत में रहना है तो वंदे मातरम् गाना होगा, नहीं तो भारत से जाना होगा। खामनेई की मौत पर छाती पीटने वाले अल्पसंख्यक वर्ग के भाई-बहन इस देश में सबसे ज्यादा सुरक्षित हैं और सबसे ज्यादा योजनाओं का फायदा उठा रहे हैं और उसके बाद इनके लोगों के भीतर इतनी राष्ट्रद्रोहिता बसी हुई है। मामले को लेकर परिवाद दायर सामाजिक कार्यकर्ता विकास अवस्थी ने एडवोकेट आकाश शर्मा के माध्यम से जिला कोर्ट में परिवाद प्रस्तुत करते हुए आरोप लगाया है कि संबंधित पार्षदों ने मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर यह बयान दिया कि इस्लाम में ‘वंदे मातरम्’ गाना प्रतिबंधित है। शहर में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई गई है। ये खबर भी पढ़ें… इंदौर की पार्षद रुबीना खान का वंदे मातरम् गाते VIDEO इंदौर नगर निगम में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सियासी विवाद में नया मोड़ आ गया है। जिस गीत को इस्लाम का हवाला देकर पार्षद रुबीना खान ने गाने से इनकार किया था, अब उसी को गाते हुए उनके दो वीडियो सामने आए हैं। एक वीडियो 2023-24 बजट सत्र का है, दूसरा 2026-27 का। दोनों में रुबीना वंदे मातरम् गाते और नारे लगाते दिख रही हैं।
पुलिस आरक्षक-अधिवक्ता का हुआ विवाद:दोनों में मारपीट का CCTV, वकील का आरोप- पुलिस नहीं दर्ज हो रही है FIR

जबलपुर में मामूली विवाद को लेकर जिला न्यायालय के अधिवक्ता और पुलिस आरक्षक के बीच जमकर लड़ाई हुई। हंगामा होते देख आसपास के लोग घरों से बाहर निकल आए और लड़ाई को शांत करवाया। जानकारी लगते ही अधिवक्ता के साथी मौके पर पहुंचे और फिर थोड़ी देर बाद सिविल लाइन थाने पहुंचकर पुलिस आरक्षक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। इधर, पुलिस आरक्षक ने भी अधिवक्ता पर मारपीट का आरोप लगाया है। जानकारी लगते ही पुलिस अधिकारी थाने पहुंचे और घटनाक्रम की जांच शुरू कर दी है। मामला सिविल लाइन स्थित समीक्षा टाउन का है, जहां शनिवार रात को बच्चों के बीच हुए विवाद पर बड़े आमने-सामने आ गए। विवाद और मारपीट का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है। रात तीन घंटे तक थाने में वह बैठे रहे जिला न्यायालय में पैरवी करने वाले पकंज कुमार शर्मा का कहना है कि शनिवार शाम को कैंपस में बच्चे खेल रहे थे। इसी दौरान उनकी किसी बात को लेकर लड़ाई हो गई। बच्चों की आवाज सुनने के बाद पकंज और पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी जो कि मदनमहल थाने मे पदस्थ है, वह भी बाहर निकल आया, जिसके बाद दोनों के बीच जमकर हाथापाई हुई। अधिवक्ता का आरोप है कि पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी जो कि पड़ोस में ही प्रकाश सराठे के घर पर किराए से रहते हैं, उन्होंने मामूली बात पर उके साथ मारपीट की है। अधिवक्ता का कहना है कि रात तीन घंटे तक थाने में वह बैठे रहे, पर उनकी तरफ से एफआईआर दर्ज नहीं की गई है। गाली-गलौच करते हुए मारपीट करना शुरू कर दिया पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि विवाद शाम करीब साढ़े 6 बजे हुआ था। अचानक ही पुलिस आरक्षक साकेत तिवारी सामने आया और गाली-गलौच करते हुए मारपीट करना शुरू कर दिया। मौके पर मौजूद लोगों ने बचाने की कोशिश की, इसके बाद भी वह मारता रहा। अधिवक्ता का कहना है कि जब वह शिकायत दर्ज कराने के लिए सिविल लाइन थाने पहुंचा, तो वहां पर मौजूद पुलिसकर्मीयों ने एफआईआर ना दर्ज करते हुए समझौता करने का दवाब बनाया। उनका कहना है कि थाने में जो पुलिसकर्मी की ड्यूटी एफआईआर करने की होती है, उसे भी वहां से इसलिए अलग कर दिया गया कि वह शिकायत ना लिख सके। अधिवक्ता पकंज कुमार शर्मा की और से पुलिस को सीसीटीवी भी सौंपे गए है। जिसमें कि विवाद हो रहा है। अधिवक्ता के साथ मारपीट की जानकारी लगते ही उनके साथी भी सिविल लाइन थाने पहुंच गए। सीएसपी सोनू कुर्मी का का कहना है कि दोनों और से शिकायत दी गई है। घटना के सीसीटीवी फुटेज भी मिले है। जांच करवाई जा रही है।
Allahabad HC Delhi Justice Yashwant Verma resign after burnt notes bundle fire news updates

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया है। 14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित घर में लगी आग में 500-500 के नोटों के बंडल जले मिले थे। इस विवाद के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया . 14 मार्च 2025 को दिल्ली HC के जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगी। वहां दमकल कर्मियों को जले हुए 500 रुपए के नोटों से भरी बोरियां मिलीं। 7 जनवरी- सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय जांच पैनल में खामी बताई 7 जनवरी को कोर्ट ने कहा था कि लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित संसदीय जांच पैनल में कुछ खामी दिखाई देती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर के पास यह अधिकार है कि वह जस्टिस वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित कर सकें, भले ही राज्यसभा में ऐसा ही प्रस्ताव खारिज हो चुका हो। 16 दिसंबर 2025- कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर को नोटिस दिया इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजे मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों से जवाब मांगा था। जस्टिस दत्ता ने पूछा था- राज्यसभा में प्रस्ताव नामंजूर हुआ फिर भी लोकसभा में समिति बनाई गई। संसद में इतने सारे सांसद और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, संसद में मौजूद कानूनी विशेषज्ञों ने इसे होने कैसे दिया? याचिका में दावा- जांच पैनल भारतीय संविधान का उल्लंघन 7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट और CJI खन्ना की सिफारिश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने 1968 के जज जांच कानून के तहत शुरू हुई कार्रवाई को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर की है। लोकसभा अध्यक्ष ने जज (जांच) कानून 1968 की धारा 3(2) के तहत के जांच पैनल बनाया, जिसे संविधान के खिलाफ बताया गया है। याचिका में 12 अगस्त 2025 की लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गई है। जस्टिस वर्मा के वकील ने कहा कि जज को हटाने से जुड़े प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर जांच समिति बनाएं सिर्फ लोकसभा स्पीकर अकेले यह कमेटी न बनाएं। इससे पहले तीन हाईकोर्ट जजों की जांच में जस्टिस वर्मा दोषी पाए गए और उन्हें हटाने की सिफारिश हुई थी। इसके बाद सरकार ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव रखा, जिसे 146 सांसदों के समर्थन के साथ अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया। संसद में महाभियोग लाने की प्रक्रिया क्या है… जजों की जांच के कानून के बारे में जानें… 1968 के जजों (जांच) अधिनियम के मुताबिक जब किसी जज को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में मंजूर हो जाता है तो स्पीकर या चेयरमैन उस आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाते हैं। ————————– ये खबर भी पढ़िए- सुप्रीम कोर्ट बोला-मेरठ का मामला देश के लिए चेतावनी:जिंदगी की कीमत पर व्यवसाय नहीं चलेगा, 859 संपत्तियों को तोड़ने के आदेश सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में अवैध निर्माण के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने गुरुवार को 859 संपत्तियों पर बने अवैध सेटबैक को दो महीने के भीतर तोड़ने का आदेश दिया है। अवैध सेटबैक यानी इमारत के चारों ओर छोड़ी जाने वाली अनिवार्य खाली जगह में किया गया निर्माण। लाइव लॉ के मुताबिक, कोर्ट ने कहा- मामला सिर्फ यूपी तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के लिए चेतावनी है। अगर प्रशासन ने समय रहते कदम उठाए होते, तो इतनी बड़ी समस्या पैदा नहीं होती।कानून का राज लोगों के शोर-शराबे के आगे झुक नहीं सकता है। व्यवसाय किसी की जिंदगी की कीमत पर नहीं चल सकता है। पढ़ें पूरी खबर…
WhatsApp Encryption Fraud Controversy; Meta Vs Elon Musk Telegram

Hindi News Business WhatsApp Encryption Fraud Controversy; Meta Vs Elon Musk Telegram | Mark Zuckerberg वॉशिंगटन12 मिनट पहले कॉपी लिंक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X के मालिक इलॉन मस्क और टेलीग्राम के CEO पावेल डुरोव ने वॉट्सऐप की प्राइवेसी पर सवाल उठाए हैं। मस्क ने कहा कि वॉट्सऐप पर भरोसा नहीं किया जा सकता। वहीं डुरोव ने इसे इतिहास का सबसे बड़ा ‘एन्क्रिप्शन’ फ्रॉड बताया। यह विवाद अमेरिका में वॉट्सऐप के खिलाफ दायर एक नए क्लास एक्शन मुकदमे के बाद शुरू हुआ है। यह मुकदमा इसी साल जनवरी में ब्रायन वाई. शिराज़ी और निदा सैमसन नाम के दो यूजर्स ने कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में दायर किया गया था। इसमें मेटा प्लेटफॉर्म्स और एक्सेंचर को पक्षकार बनाया गया है। याचिकाकर्ताओं ने जूरी ट्रायल की मांग की है और कंपनी से हर्जाने की अपील की है। एन्क्रिप्शन के बावजूद निजी मैसेज पढ़ रहा वॉट्सऐप याचिका में दावा किया गया है कि वॉट्सऐप अपने यूजर्स के मैसेज को बीच में ही इंटरसेप्ट करता है। इसमें कहा गया है कि मेटा इन मैसेजेस को एक्सेंचर जैसी तीसरी पार्टियों के साथ शेयर कर रहा है। जबकि कंपनी दावा करती है कि उसके मैसेज ‘एंड-टू-एंड एन्क्रिप्टेड’ हैं, यानी भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई तीसरा इन्हें नहीं पढ़ सकता। मस्क बोले वॉट्सऐप की जगह X चैट इस्तेमाल करें इलॉन मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए X चैट का इस्तेमाल करने की अपील की और दावा किया कि वहां ‘असली प्राइवेसी’ मिलती है। वहीं पावेल डुरोव ने वॉट्सऐप अरबों यूजर्स को गुमराह कर रहा है। डुरोव ने दावा किया कि टेलीग्राम ने कभी ऐसा नहीं किया और न ही कभी करेगा। मेटा बोला- आरोप पूरी तरह गलत और बेतुके हैं इन गंभीर आरोपों पर मेटा के प्रवक्ता ने कहा कि मुकदमे में किए गए दावे पूरी तरह से झूठे और बेतुके हैं। वॉट्सऐप पिछले एक दशक से सिग्नल प्रोटोकॉल का इस्तेमाल कर रहा है। आपके मैसेज भेजने वाले और पाने वाले के अलावा कोई और नहीं पढ़ सकता। पुराना है मस्क और जुकरबर्ग का झगड़ा इलॉन मस्क और मार्क जुकरबर्ग के बीच विवाद कोई नया नहीं है। मस्क द्वारा ट्विटर (अब X) खरीदने के बाद जुकरबर्ग ने उसे टक्कर देने के लिए ‘थ्रेड्स’ लॉन्च किया था। 2025 में मस्क ने अपने AI चैटबॉट ‘ग्रोक’ को मेटा AI से बेहतर बताया था। जून 2023 में मस्क ने जुकरबर्ग को ‘केज फाइट’ की चुनौती भी दी थी, जिसके जवाब में जुकरबर्ग ने लोकेशन मांगी थी। नॉलेज बॉक्स : क्या होता है एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन? सरल शब्दों में कहें तो एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन एक ऐसी सुरक्षा तकनीक है जो आपके मैसेज को एक गुप्त कोड में बदल देती है, जिसे सिर्फ भेजने वाला और प्राप्त करने वाला ही पढ़ सकता है। इसके बीच में इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर, हैकर या यहां तक कि सर्विस देने वाली कंपनी (जैसे वॉट्सऐप या मेटा) खुद भी आपके मैसेज, फोटो या कॉल को देख या सुन नहीं सकती है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔ खबरें और भी हैं…
गोलीकांड में 10 पर केस, एक गिरफ्तार:वीडियो से जांच में आया नया मोड़; अस्पताल से आरोपी गायब

नरसिंहपुर जिले के गोटेगांव थाना क्षेत्र के मालीवाड़ा गांव में हुए फायरिंग कांड की जांच में तीसरे दिन नया मोड़ आया है। पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के कुल 10 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। एक आरोपी शरद पटेल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। यह घटना अब सिर्फ गोलीबारी तक सीमित नहीं रही, बल्कि सोशल मीडिया पर भी दोनों पक्षों के बीच खुलकर टकराव देखने को मिल रहा है। दोनों पक्षों की ओर से आईडी पर तीखी बयानबाजी शुरू हो गई है, जिससे विवाद और बढ़ गया है। घायल महिला सविता के पति ऋषिराज पटेल ने दूसरे पक्ष के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां पोस्ट की थीं, जिन्हें बाद में हटा लिया गया। वहीं, दूसरे पक्ष के शुभम पटेल ने आईडी से लाइव के जरिए खुद को जान का खतरा बताते हुए पुलिस पर कार्रवाई न करने के आरोप लगाए। पुलिस ने इन वीडियो और पोस्ट्स को जांच में शामिल कर लिया है। इनमें दिख रहे लोगों की भूमिका की पड़ताल की जा रही है, जिससे मामले की तह तक पहुंचा जा सके। अस्पताल में भर्ती एक पक्ष के कुछ लोग अचानक वहां से गायब हो गए हैं। आशंका जताई जा रही है कि ये लोग गिरफ्तारी से बचने के लिए फरार हुए हैं। हालांकि, पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन इस पहलू पर भी जांच जारी है। एसडीओपी मनीष त्रिपाठी के नेतृत्व में गोटेगांव पुलिस ने मालीवाड़ा गांव में आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी की है। हालांकि, अभी तक कोई हथियार बरामद नहीं हुआ है। पुलिस मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपियों की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है। अस्पताल से गायब हुए आरोपी एसडीओपी मनीष त्रिपाठी ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है। एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। घायल दोनों पक्षों के आरोपी सविता पटेल और गिरवर पटेल को जबलपुर के एक अस्पताल किया गया था। जहां उनका इलाज चल रहा था। इसी दौरान दोनों वहां से गायब हो गए।
बंगाली एक्टर की मौत पर सौरव गांगुली का बयान:बोले- वे पानी में गए ही क्यों; एक्ट्रेस बोलीं- आप AC में रहते हो, मजबूरी नहीं समझोगे

बंगाली एक्टर राहुल अरुणोदय बनर्जी की मौत के मामले में पूर्व क्रिकेटर सौरव गांगुली का एक बयान विवादों में आ गया है। दरअसल राहुल की मौत ओडिशा में शूटिंग के दौरान पानी में डूबने से हुई थी, जिस पर सौरव ने सवाल उठाया था कि वे पानी में गए ही क्यों। इस पर एक्ट्रेस स्वस्तिका मुखर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। स्वस्तिका ने कहा कि एक पब्लिक फिगर होने के नाते सौरव गांगुली को पता होना चाहिए कि वे क्या बोल रहे हैं। सौरव गांगुली ने क्या कहा था? कुछ दिन पहले जब सौरव गांगुली से राहुल की मौत के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने इसे ‘बहुत दुर्भाग्यपूर्ण’ बताया। लेकिन उन्होंने आगे यह भी जोड़ दिया, “मुझे समझ नहीं आता कि शूटिंग के लिए भी वह पानी में क्यों गए?” सौरव के इसी ‘क्यों’ वाले सवाल पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। एक्ट्रेस बोलीं- आपको जमीन की हकीकत नहीं पता’ स्वस्तिका मुखर्जी ने एक इंटरव्यू में सौरव को जवाब देते हुए कहा, सौरव गांगुली अपना नॉन-फिक्शन शो AC फ्लोर पर शूट करते हैं। उन्हें वो सब कुछ मिल जाता है जिसकी उन्हें जरूरत होती है क्योंकि वो सौरव गांगुली हैं। उन्हें नहीं पता कि जमीन पर असल में शूटिंग कैसे होती है। स्वस्तिका ने आगे कहा कि अगर राहुल पानी में नहीं जाते, तो मेकर्स उनकी जगह किसी और को ले आते। काम की मजबूरी और रिस्क सबको समझ नहीं आता। मजबूरी में करना पड़ता है रिस्क वाला काम स्वस्तिका ने सौरव के लहजे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब आप किसी के काम पर इस तरह की टिप्पणी करते हैं, तो आप उसके काम को छोटा दिखाने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा, हर कोई सौरव गांगुली नहीं होता जिसे सारी सुविधाएं मिलें। एक आम एक्टर के लिए उसका काम ही उसकी कमाई का जरिया है। अगर वह मना करेगा तो उसका करियर खत्म हो सकता है। किसी की मौत पर ऐसे सवाल उठाना संवेदनहीनता है। कैसे हुई थी राहुल बनर्जी की मौत? यह हादसा 29 मार्च को ओडिशा में हुआ था। राहुल वहां अपने बंगाली शो ‘भोलेबाबा पार करेगा’ की शूटिंग कर रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक सीन के दौरान राहुल और उनकी को-एक्ट्रेस श्वेता मिश्रा घुटने तक पानी में खड़े थे। अचानक उनका पैर फिसला और वे पास ही बने एक गहरे गड्ढे में चले गए। दोनों को तुरंत दीघा के अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने राहुल को मृत घोषित कर दिया। श्वेता की जान बच गई, लेकिन राहुल को नहीं बचाया जा सका। बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में हड़ताल राहुल की मौत ने फिल्म सेट पर सुरक्षा के इंतजामों की पोल खोल दी है। इसके विरोध में और बेहतर सुरक्षा नियमों की मांग को लेकर बंगाली फिल्म और टीवी इंडस्ट्री ने 7 अप्रैल से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है। कलाकारों और टेक्नीशियंस का कहना है कि जब तक सेट पर सुरक्षा के कड़े मानकतय नहीं किए जाते, तब तक काम बंद रहेगा।
लेटेंट विवाद पर समय रैना के बड़े खुलासे:कहा- कपिल शर्मा मेरे अगले एपिसोड में आने वाले थे; सुनील पाल, मुकेश खन्ना पर कसा तंज

स्टैंडअप कॉमेडियन समय रैना ने अपने नए यूट्यूब स्पेशल ‘समय रैना- स्टिल अलाइव’ के साथ वापसी की है। पिछले साल ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ शो को लेकर हुए भारी विवाद के बाद यह उनका पहला बड़ा वीडियो है। मंगलवार को रिलीज हुए इस 1 घंटे 21 मिनट के स्पेशल में समय ने उन सभी सेलेब्स को जवाब दिया है जिन्होंने मुश्किल वक्त में उनकी आलोचना की थी। साथ ही उन्होंने अपने फैंस को बताया कि वे जल्द ही ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का सीजन 2 लेकर आ रहे हैं। समय ने लेटेंट विवाद को ‘क्रॉस फायर’ बताया है, जिसमें एक कश्मीरी होने के नाते वे बीच में फंस गए। मुकेश खन्ना और बी प्राक पर साधा निशाना विवाद के दौरान मुकेश खन्ना (शक्तिमान) और सिंगर बी प्राक ने समय की काफी आलोचना की थी। इस पर पलटवार करते हुए समय ने कहा, “शक्तिमान कह रहे थे कि ऐसे कंटेंट का बच्चों पर क्या असर पड़ेगा। भाई, जब शक्तिमान आता था, तब हर दूसरे महीने खबर आती थी कि किसी बच्चे ने शक्तिमान समझकर छत से छलांग लगा दी। आपने तो बच्चे मारे हैं, आप क्या बोल रहे हो?” वहीं बी प्राक के लिए उन्होंने कहा कि उन्हें किसी ने पॉडकास्ट पर बुलाया भी नहीं था, फिर भी वे बीच में कूद पड़े। सुनील पाल और कपिल शर्मा का जिक्र समय ने कॉमेडियन सुनील पाल पर भी तंज कसा। उन्होंने बताया कि सुनील पाल उन्हें टीवी पर कपिल शर्मा से सीखने की सलाह दे रहे थे, जबकि असलियत में कपिल समय के अगले एपिसोड में आने वाले थे। समय ने दावा किया कि कपिल उन्हें मैसेज करके शो की तारीफ करते थे और खुद को उनका बड़ा फैन बताते थे। समय ने कहा कि एक ‘साफ-सुथरा’ किरदार निभाना उनके लिए बनावटी है और वे अपनी डार्क कॉमेडी के अंदाज को नहीं छोड़ेंगे। रणवीर अल्लाहबादिया पर किया खुलासा समय रैना ने अपने स्पेशल में उस FIR पर खुलकर बात की जो यूट्यूबर रणवीर अल्लाहबादिया के एक कमेंट के कारण हुई थी। समय ने बताया कि उस विवादित एपिसोड में रणवीर ने एक कंटेस्टेंट के माता-पिता को लेकर अभद्र सवाल एक बार नहीं, बल्कि 8 बार पूछा था। समय ने मजाक में कहा, “मैंने एडिट के दौरान उन 8 में से 7 सवाल हटा दिए थे। मैंने तो अपनी तरफ से 99% कीटाणु मार दिए थे, पर एक परसेंट रह गए और विवाद हो गया।” उन्होंने रणवीर की ‘क्लीन इमेज’ पर तंज कसते हुए उन्हें ‘द मंक हू सोल्ड माई फेरारी’ कहा। ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ का सीजन 2 आएगा वीडियो के आखिरी हिस्से में समय ने अपने फ्यूचर प्रोजेक्ट का ऐलान किया। उन्होंने कहा कि लोग अक्सर पूछते हैं कि क्या ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ खत्म हो गया है? समय ने कहा, “सीजन 1 इससे बेहतर हाई पॉइंट पर खत्म नहीं हो सकता था। लेकिन मैं सीजन 2 जरूर लाऊंगा क्योंकि मुझे वह काम करने में मजा आता है। अब मैं दुनिया में जब तक हूं, बस मजे करना चाहता हूं।” उन्होंने वादा किया कि अगला सीजन और भी ‘वाइल्ड’ होगा। क्या था 2025 का विवाद? साल 2025 में समय रैना का शो ‘इंडियाज गॉट लेटेंट’ अपनी डार्क कॉमेडी और अश्लील चुटकुलों के कारण विवादों में घिर गया था। शो में गेस्ट बनकर आए रणवीर अल्लाहबादिया ने एक कंटेस्टेंट के परिवार पर टिप्पणी की थी, जिसके बाद पुलिस में FIR दर्ज हुई। भारी दबाव और कानूनी कार्रवाई के चलते समय को वह एपिसोड डिलीट करना पड़ा था और माफी भी मांगनी पड़ी थी।
TMC MP Derek OBrien: EC Meeting on Voter List Controversy

Hindi News National TMC MP Derek OBrien: EC Meeting On Voter List Controversy | Election Free From Fear नई दिल्ली1 मिनट पहले कॉपी लिंक बुधवार को दिल्ली में TMC प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग के अधिकारियों से SIR के मुद्दे पर मुलाकात की। बैठक के तुरंत बाद TMC सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें सिर्फ 7 मिनट में बाहर भेज दिया। डेरेक ओ’ब्रायन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि बैठक सुबह 10:02 बजे शुरू हुई और 10:07 बजे खत्म हो गई। वहीं बैठक के खत्म होते ही चुनाव आयोग ने भी X पर पोस्ट कर लिखा कि- हमने इस बार तृणमूल कांग्रेस को दो टूक कह दिया है। पश्चिम बंगाल में इस बार चुनाव: भय रहित, हिंसा रहित, धमकी रहित, प्रलोभन रहित, छापा रहित, बूथ एवं सोर्स जामिंग रहित होकर ही रहेंगे। SIR के पहले चरण में पश्चिम बंगाल में करीब 91 लाख वोटरों के नाम हटाए गए हैं। यह राज्य की कुल आबादी का 11.85% से ज्यादा है। खबर अभी अपडेट हो रही है… TMC बालो- बैठक का वीडियो जारी करें डेरेक ओ’ब्रायन ने कहा कि जब उन्होंने अधिकारियों के ट्रांसफर और निष्पक्ष चुनाव पर सवाल उठाया, तो मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन्हें वहां से जाने के लिए कह दिया। जो आज हुआ, वह शर्मनाक है। मैं चुनाव आयोग को चुनौती देता हूं कि बैठक का वीडियो या ऑडियो जारी करे। वहीं, चुनाव आयोग के अधिकारियों के मुताबिक, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने डेरेक ओ ब्रायन से बैठक में शालीनता बनाए रखने को कहा था। लेकिन डेरेक आयोग के परिसर में चिल्लाना लग और अनुचित व्यवहार करने लगे। प्रतिनिधिमंडल में डेरेक ओ ब्रायन के अलावा साकेत गोखले, मेनका गुरुस्वामी और सागरिका घोष शामिल थीं। ———————————————– दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔









