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Allahabad HC Delhi Justice Yashwant Verma resign after burnt notes bundle fire news updates

Allahabad HC Delhi Justice Yashwant Verma resign after burnt notes bundle fire news updates

इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा भेज दिया है। 14 मार्च 2025 को उनके दिल्ली स्थित घर में लगी आग में 500-500 के नोटों के बंडल जले मिले थे। इस विवाद के बाद उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया

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14 मार्च 2025 को दिल्ली HC के जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगी। वहां दमकल कर्मियों को जले हुए 500 रुपए के नोटों से भरी बोरियां मिलीं।

7 जनवरी- सुप्रीम कोर्ट ने संसदीय जांच पैनल में खामी बताई 7 जनवरी को कोर्ट ने कहा था कि लोकसभा स्पीकर की ओर से गठित संसदीय जांच पैनल में कुछ खामी दिखाई देती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जजेज इन्क्वायरी एक्ट के तहत लोकसभा स्पीकर के पास यह अधिकार है कि वह जस्टिस वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए समिति गठित कर सकें, भले ही राज्यसभा में ऐसा ही प्रस्ताव खारिज हो चुका हो।

16 दिसंबर 2025- कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर को नोटिस दिया

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजे मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों से जवाब मांगा था।

जस्टिस दत्ता ने पूछा था- राज्यसभा में प्रस्ताव नामंजूर हुआ फिर भी लोकसभा में समिति बनाई गई। संसद में इतने सारे सांसद और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, संसद में मौजूद कानूनी विशेषज्ञों ने इसे होने कैसे दिया?

याचिका में दावा- जांच पैनल भारतीय संविधान का उल्लंघन

7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट और CJI खन्ना की सिफारिश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने 1968 के जज जांच कानून के तहत शुरू हुई कार्रवाई को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर की है।

लोकसभा अध्यक्ष ने जज (जांच) कानून 1968 की धारा 3(2) के तहत के जांच पैनल बनाया, जिसे संविधान के खिलाफ बताया गया है। याचिका में 12 अगस्त 2025 की लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गई है।

जस्टिस वर्मा के वकील ने कहा कि जज को हटाने से जुड़े प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर जांच समिति बनाएं सिर्फ लोकसभा स्पीकर अकेले यह कमेटी न बनाएं।

इससे पहले तीन हाईकोर्ट जजों की जांच में जस्टिस वर्मा दोषी पाए गए और उन्हें हटाने की सिफारिश हुई थी। इसके बाद सरकार ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव रखा, जिसे 146 सांसदों के समर्थन के साथ अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया।

संसद में महाभियोग लाने की प्रक्रिया क्या है…

जजों की जांच के कानून के बारे में जानें…

1968 के जजों (जांच) अधिनियम के मुताबिक जब किसी जज को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में मंजूर हो जाता है तो स्पीकर या चेयरमैन उस आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाते हैं।

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14 मार्च 2025 को दिल्ली HC के जस्टिस वर्मा के सरकारी बंगले में आग लगी। वहां दमकल कर्मियों को जले हुए 500 रुपए के नोटों से भरी बोरियां मिलीं।

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16 दिसंबर 2025- कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर को नोटिस दिया

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस एजे मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों से जवाब मांगा था।

जस्टिस दत्ता ने पूछा था- राज्यसभा में प्रस्ताव नामंजूर हुआ फिर भी लोकसभा में समिति बनाई गई। संसद में इतने सारे सांसद और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, संसद में मौजूद कानूनी विशेषज्ञों ने इसे होने कैसे दिया?

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7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट और CJI खन्ना की सिफारिश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने 1968 के जज जांच कानून के तहत शुरू हुई कार्रवाई को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर की है।

लोकसभा अध्यक्ष ने जज (जांच) कानून 1968 की धारा 3(2) के तहत के जांच पैनल बनाया, जिसे संविधान के खिलाफ बताया गया है। याचिका में 12 अगस्त 2025 की लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गई है।

जस्टिस वर्मा के वकील ने कहा कि जज को हटाने से जुड़े प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर जांच समिति बनाएं सिर्फ लोकसभा स्पीकर अकेले यह कमेटी न बनाएं।

इससे पहले तीन हाईकोर्ट जजों की जांच में जस्टिस वर्मा दोषी पाए गए और उन्हें हटाने की सिफारिश हुई थी। इसके बाद सरकार ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव रखा, जिसे 146 सांसदों के समर्थन के साथ अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया।

संसद में महाभियोग लाने की प्रक्रिया क्या है…

जजों की जांच के कानून के बारे में जानें…

1968 के जजों (जांच) अधिनियम के मुताबिक जब किसी जज को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में मंजूर हो जाता है तो स्पीकर या चेयरमैन उस आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाते हैं।

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