Monday, 13 Apr 2026 | 12:28 PM

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मेटावर्स को ‘भविष्य’ बता रहे थे जुकरबर्ग, अब ‘अतीत’:अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी लोगों से दूर रही वर्चुअल दुनिया; 7.5 लाख करोड़ रु. गंवाए

मेटावर्स को ‘भविष्य’ बता रहे थे जुकरबर्ग, अब ‘अतीत’:अरबों डॉलर खर्च करने के बाद भी लोगों से दूर रही वर्चुअल दुनिया; 7.5 लाख करोड़ रु. गंवाए

फेसबुक के संस्थापक मार्क जुकरबर्ग ने 2021 में जब कंपनी का नाम बदलकर ‘मेटा’ किया था, तब उन्होंने एक ऐसी आभासी दुनिया (मेटावर्स- वर्चुअल रियलिटी) का सपना दिखाया था, जहां लोग अवतार बनकर रहेंगे, काम करेंगे और खेलेंगे। आज वह विजन खत्म होने की कगार पर है। मेटा ने हाल ही में ‘मेटावर्स’ पर काम कर रहे 10 प्रतिशत कर्मचारियों की छंटनी कर दी। कंपनी ने घोषणा की है कि 15 जून से लोग वीआर हेडसेट (आंखों पर पहनने वाला इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस) के जरिए होराइजन वर्ल्ड्स जैसे इमर्सिव प्लेटफॉर्म का उपयोग नहीं कर पाएंगे। जिस प्रोजेक्ट पर कंपनी ने करीब 80 बिलियन डॉलर (लगभग 7.5 लाख करोड़ रुपए) गंवाए, वह अब सिमट रहा है। जुकरबर्ग की यह महत्वाकांक्षी योजना टेक दुनिया की सबसे महंगी विफलताओं में से एक मानी जा रही है, क्योंकि अब कंपनी का पूरा ध्यान एआई पर टिक गया है। जुकरबर्ग ने 2014 में कंपनी ‘ऑक्युलस’ को करीब 16,600 करोड़ रुपए में खरीदकर इस सफर की शुरुआत की थी। उन्हें भरोसा था कि वर्चुअल रियलिटी स्मार्टफोन की जगह ले लेगी। इसके लिए उन्होंने गेमिंग स्टूडियो खरीदे और डेवलपर्स पर करोड़ों लुटाए। कोविड लॉकडाउन के वक्त ये आइडिया क्रांतिकारी लगा, लेकिन बाद में वास्तविकता इससे अलग रही। मेटावर्स के शुरुआती वर्जन तकनीकी खामियों से भरे थे, जिसका सोशल मीडिया पर काफी मजाक उड़ा। करीब 7.4 लाख करोड़ रुपए खर्च करने के बाद भी आम जनता ने इसे पूरी तरह नकार दिया। एपल के महंगे हेडसेट और बाजार की बेरुखी ने बिगाड़ा मेटा का खेल मेटा ही नहीं, इस रेस में उतरी दिग्गज कंपनी ‘एपल’ को भी तगड़ा झटका लगा है। 2024 में लॉन्च हुए एपल विजन प्रो की कीमत लगभग करीब 3 लाख रुपए थी, जो एक आम आदमी के बजट से कोसों दूर थी। विश्लेषकों का मानना है कि वीआर तकनीक को एक स्वतंत्र प्लेटफॉर्म के रूप में स्थापित करना उम्मीद से कहीं ज्यादा कठिन और समय लेने वाला काम है। डिज्नी जैसी कंपनियों ने भी अपने ‘चीफ मेटावर्स ऑफिसर्स’ के पद खत्म कर दिए हैं। अब मेटा ने अपने फ्लैगशिप एप होराइजन वर्ल्ड्स का रुख वीआर से हटाकर मोबाइल फोन की ओर कर दिया है, जो इस प्रोजेक्ट की हार की औपचारिक स्वीकारोक्ति है। मेटा अपनी हार स्वीकार कर चुका है। पिछले साल एक कॉन्फ्रेंस में जुकरबर्ग ने ‘मेटावर्स’ शब्द का जिक्र सिर्फ दो बार किया, जबकि ‘एआई’ का नाम 23 बार लिया। कंपनी अब ‘सुपर इंटेलिजेंस’ एआई बनाने के लिए इस साल 10.81 लाख करोड़ रुपए खर्च करने की योजना बना रही है। जुकरबर्ग का नया लक्ष्य ऐसा डिजिटल साथी बनाना है, जो इंसान जैसा बुद्धिमान हो। जिस भविष्य को जुकरबर्ग ने ‘मेटा’ नाम दिया था, वह अब एआई के डेटा सेंटर्स और कोडिंग की परतों के नीचे कहीं दब गया है।

531 प्रेजेंटेशन में सुनाए गए 870 चुटकुलों पर आधारित रिपोर्ट:वैज्ञानिकों के 66% जोक्स फ्लॉप, सिर्फ 9% पर खुलकर हंसी: स्टडी

531 प्रेजेंटेशन में सुनाए गए 870 चुटकुलों पर आधारित रिपोर्ट:वैज्ञानिकों के 66% जोक्स फ्लॉप, सिर्फ 9% पर खुलकर हंसी: स्टडी

वैज्ञानिकों के रिसर्च पेपर जितने गंभीर होते हैं, कॉन्फ्रेंस टॉक्स में उनके जोक्स (चुटकुले) उतने ही कम असरदार निकल रहे हैं। प्रोसीडिंग्स ऑफ द रॉयल सोसाइटी बी में छपी एक स्टडी के मुताबिक 14 बायोलॉजी कॉन्फ्रेंस के 531 प्रेजेंटेशन में की गई हंसी-मजाक की 66% कोशिशें फ्लॉप रहीं। इन पर दर्शकों ने या तो हल्की-सी शिष्टाचार वाली मुस्कान दी या फिर कोई रिएक्शन नहीं दिया। स्टडी में कुल 870 जोक्स दर्ज किए गए। इनमें से सिर्फ 9% जोक्स पर पूरी ऑडियंस खुलकर हंसी। करीब 24% मौकों पर जोक्स को मध्यम सफलता मिली, यानी लगभग आधे लोग हंसे। स्टडी की सह-लेखिका विक्टोरिया स्टाउट के अनुसार वैज्ञानिक मजाक को जरूरी स्किल नहीं मानते। उनका कहना है कि ह्यूमर से लोग आपको ज्यादा याद रखते हैं और सहयोग की संभावना भी बढ़ती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों ने अधिक जोक्स किए अध्ययन के अनुसार, महिला वैज्ञानिकों के मुकाबले पुरुषों ने मंच पर अधिक जोक्स सुनाए और मजाक करने का रिस्क लिया। कुल प्रेजेंटेशन में से लगभग 60% में कम से कम एक बार हंसी का माहौल बनाने की कोशिश की गई। वहीं, 40% वैज्ञानिकों ने अपनी बात पूरी तरह गंभीर रखी, ताकि जोक फेल होने का कोई खतरा न रहे। बोरियत से शुरू हुई नोटिंग, फिर बन गई स्टडी सह-लेखिका विक्टोरिया स्टाउट ने पीएचडी की बोरियत दूर करने के लिए वक्ताओं के जोक्स नोट किए, जो बाद में रिसर्च का आधार बने। उन्होंने इटली के स्टेफानो मैमोला के साथ 2022-24 के बीच 14 बायोलॉजी कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया। टीम ने यह भी रिकॉर्ड किया कि मजाक करने के बाद वक्ता दर्शकों की हंसी के लिए कितनी देर तक इंतजार करते हैं। खुद की गलतियों पर बने सबसे ज्यादा मजाक वैज्ञानिकों के जोक्स में सबसे ज्यादा चर्चा खुद की गलतियों और तकनीकी दिक्कतों की रही, जिसे शोधकर्ताओं ने मानवीय पहलू माना। रिसर्च टॉपिक व फील्ड वर्क के किस्से भी कॉमेडी का जरिया बने। साइंस राइटर टायलर सोडरबोर्ग ने कहा कि बायोलॉजिस्ट्स का जोक्स के प्रति यह उत्साह अच्छी बात है, भले ही वे हर बार दर्शकों को हंसाने में पूरी तरह सफल न हो पाए हों।

Historic feat of 11th class student

Historic feat of 11th class student

द न्यूयॉर्क टाइम्स33 मिनट पहले कॉपी लिंक कूपर 800 मीटर और 600 मीटर (1:14.15 मिनट) में अंडर-20 इंडोर वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं। उम्र महज 17 साल, 3 महीने, 3 दिन। जिस उम्र में बच्चे स्कूल की पढ़ाई, क्लासरूम और परीक्षाओं की उलझनों में फंसे होते हैं, उस उम्र में अमेरिका के 11वीं के छात्र कूपर लुटकेनहॉस ने दुनिया जीत ली है। टेक्सास के ‘नॉर्थवेस्ट हाई स्कूल’ में पढ़ने वाले कूपर क्लास से छुट्टी लेकर पोलैंड पहुंचे और इतिहास रच दिया। टोरून में आयोजित वर्ल्ड इंडोर एथलेटिक्स की 800 मीटर रेस में उन्होंने गोल्ड जीता। वे वर्ल्ड इंडोर के इतिहास में गोल्ड जीतने वाले सबसे कम उम्र के चैम्पियन बन गए हैं। कूपर ने फाइनल रेस 1 मिनट 44.24 सेकंड में पूरी की, जो उनके करियर की दूसरी सबसे तेज टाइमिंग है। इस रोमांचक फाइनल में उन्होंने बेल्जियम के इलियट क्रेस्टन (सिल्वर) को मात्र 0.14 सेकंड के करीबी अंतर से मात दी। स्पेन के मोहम्मद अताउई ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। फाइनल में कूपर ने उम्र से कहीं ज्यादा परिपक्वता दिखाई। लेन 4 से शुरुआत करते हुए वे रेस के शुरुआती हिस्से में क्रेस्टन के ठीक पीछे रहे। 400 मीटर की दूरी 51.92 सेकंड में तय हुई, लेकिन जैसे ही तीसरा लैप (600 मीटर) शुरू हुआ, कूपर ने रेस का कंट्रोल अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने जो तूफानी रफ्तार पकड़ी, उसने सबको हैरान कर दिया। उनका आखिरी लैप ट्रैक पर मौजूद सभी एथलीट में सबसे तेज (26.17 सेकंड) रहा। इससे पहले सेमीफाइनल में भी उन्होंने 1:44.48 मिनट का बेहतरीन समय निकाला था। ग्लोबल मंच पर कूपर का यह पहला मेडल है। लेकिन यह सफलता रातों-रात नहीं मिली। महज सात महीने पहले, 16 साल की उम्र में वे टोक्यो वर्ल्ड एथलेटिक्स में अपनी हीट में 7वें स्थान पर रहकर बाहर हो गए थे। लेकिन उस हार ने उन्हें तोड़ा नहीं। 2025 में ही उन्होंने कॉलेज एथलेटिक्स छोड़कर पेशेवर बनने का फैसला किया। उसी साल उन्हें ‘यंग एथलीट ऑफ द ईयर’ चुना गया था और फरवरी में उन्होंने यूएस इंडोर का खिताब भी जीता। कूपर 800 मीटर और 600 मीटर (1:14.15 मिनट) में अंडर-20 इंडोर वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं। उनकी जीत ने 800 मीटर में अमेरिका का दबदबा कायम रखा है। यह लगातार तीसरा मौका है, जब यह ग्लोबल इंडोर खिताब अमेरिकी ने जीता है। 2025 में जोश होए और 2024 में ब्राइस होपेल विजेता बने थे। जीत के बाद कूपर लुटकेनहॉस बोले मैं यह सोचकर मैदान पर उतरा था कि शायद मैं इस रेस का फेवरेट नहीं हूं। हो सकता है यह मेरे कम उम्र होने का असर हो, लेकिन तीसरे लैप में मुझे खुद पर भरोसा था और मैंने यहीं से रेस को कंट्रोल करने का फैसला किया। आखिरी 150 मीटर में मेरे साथियों की चीयरिंग ने मुझे फिनिश लाइन तक सबसे पहले पहुंचा दिया। – दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल में शनिवार को डिमोना और नजदीकी‎ शहर अराद पर गिरी ईरान की दो बैलिस्टिक ‎मिसाइलों ने इजराइलियों को स्तब्ध कर दिया है। ‎इजराइल के दक्षिण नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर ‎से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित उसके प्रमुख‎ परमाणु रिसर्च सेंटर और रिएक्टर के मुकाबले कुछ ‎ही स्थान ऐसे होंगे जो इनसे ज्यादा सुरक्षित हों।‎ इसलिए तीन घंटे के अंतर से गिरी दो ईरानी‎ मिसाइलों ने इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम‎ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।‎ विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि पिछले साल‎ईरान से 12 दिन के युद्ध में इनका जखीरा खत्म ‎हो गया होगा। यह चिंता आने वाले सप्ताहों में‎ और गहरी होगी। इजराइल के सैनिक अधिकारियों ‎ने बताया, वे जांच कर रहे हैं कि गड़बड़ी कहां हुई‎ है। लेकिन विस्तृत ब्योरे पर चुप्पी साध रखी है।‎ रविवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ‎प्रभावित स्थानों का दौरा करने के बाद‎ इजराइलियों से कहा कि वे बेफिक्र न रहें। मिसाइल ‎अलर्ट आने पर बम शेल्टर में शरण लें।‎ इजराइली सेना ने ईरान की बैलिस्टिक‎ मिसाइलों को रोकने की दर 90% बताई है। ‎अधिकारियों का कहना है कि डिफेंस सिस्टम ‎रोकथाम की 100% क्षमता कभी हासिल नहीं ‎कर सकते हैं। इजराइली एयर और मिसाइल ‎डिफेंस सिस्टम के पूर्व कमांडर ब्रिगेडियर जनरल‎ रैन कोचाव ने बताया कि डिमोना बहुस्तरीय ‎इजराइली और अमेरिकी डिफेंस सिस्टम से‎ सुरक्षित था। यह ऑपरेशनल नाकामी है।‎ इजराइल के मिसाइल डिफेंस में आयरन डोम‎ प्रमुख है। लेकिन इसे हमास की कम दूरी की‎ मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है।‎ बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का उसका सबसे ‎आधुनिक हथियार एरो-3 है, लेकिन एरो-3‎‎सिस्टम महंगा है। उसे बनाने में समय लगता है।‎ इजराइली मीडिया ने रविवार को बताया कि अराद‎ और डिमोना में एरो-3 तैनात नहीं था। इजराइल ‎और अमेरिका द्वारा तैयार एंटीबैलिस्टिक मिसाइल‎ सिस्टम धरती के वातावरण के बाहर अंतरिक्ष में ‎मिसाइलों को रोकता है। इजराइल में अमेरिका का‎ थाड सिस्टम भी तैनात है।‎ अधिक इंटरसेप्टर की मांग‎ इजराइली रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल अमीर‎ बराम इस माह अधिक इंटरसेप्टर और गोला-बारूद ‎सप्लाई करने की मांग करने वाशिंगटन गए थे। नाम‎न बताने की शर्त पर तीन इजराइली अधिकारियों ने‎ यह जानकारी दी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं ‎हुआ है कि क्या अमेरिका अधिक सप्लाई के लिए‎ सहमत हो गया है।‎ क्लस्टर मिसाइलों से खतरा‎ जमीन से कुछ किलोमीटर ऊपर फटने वाली ‎ईरान की क्लस्टर मिसाइलें घातक साबित हो‎ रही हैं। अराद, डिमोना, तेल अवीव और ‎यरूशलम के पास बेट शेमेश पर हमलों के‎ अलावा अन्य इलाकों में बड़े मिसाइल के‎ हिस्सों या क्लस्टर मिसाइलों से कई बिल्डिंग‎ और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।‎ इजराइल के सेफ्टी सिस्टम के कमजोर होने पर चिंता‎ पिछले साल जून में 12 दिन के युद्ध की‎समाप्ति के बाद इजराइली सेना ने चिंता‎जताई थी कि क्या देश का मिसाइल एयर‎डिफेंस सिस्टम ईरान की बैलिस्टिक‎मिसाइल खत्म होने से पहले ही चुक‎जाएगा। उस वक्त अधिकारियों ने कहा था‎कि इजराइल को अपने इंटरसेप्टर बचा कर‎खर्च करना होंगे। उसे सामरिक इंफ्रास्ट्रक्चर‎को अहमियत देना पड़ेगी। वैसे इजराइली‎ सेना ने इन बातों का खंडन किया है।‎

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल पर ईरान की बैलिस्टिक मिसाइल गिरने से हड़कंप:इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम में सेंध लगने‎ की जांच शुरू, यूएस से अधिक गोला-बारूद की मांग‎

इजराइल में शनिवार को डिमोना और नजदीकी‎ शहर अराद पर गिरी ईरान की दो बैलिस्टिक ‎मिसाइलों ने इजराइलियों को स्तब्ध कर दिया है। ‎इजराइल के दक्षिण नेगेव रेगिस्तान में डिमोना शहर ‎से लगभग 14 किलोमीटर दूर स्थित उसके प्रमुख‎ परमाणु रिसर्च सेंटर और रिएक्टर के मुकाबले कुछ ‎ही स्थान ऐसे होंगे जो इनसे ज्यादा सुरक्षित हों।‎ इसलिए तीन घंटे के अंतर से गिरी दो ईरानी‎ मिसाइलों ने इजराइल के मिसाइल डिफेंस सिस्टम‎ पर सवाल खड़े कर दिए हैं।‎ विशेषज्ञ अनुमान लगा रहे हैं कि पिछले साल‎ईरान से 12 दिन के युद्ध में इनका जखीरा खत्म ‎हो गया होगा। यह चिंता आने वाले सप्ताहों में‎ और गहरी होगी। इजराइल के सैनिक अधिकारियों ‎ने बताया, वे जांच कर रहे हैं कि गड़बड़ी कहां हुई‎ है। लेकिन विस्तृत ब्योरे पर चुप्पी साध रखी है।‎ रविवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतनयाहू ने ‎प्रभावित स्थानों का दौरा करने के बाद‎ इजराइलियों से कहा कि वे बेफिक्र न रहें। मिसाइल ‎अलर्ट आने पर बम शेल्टर में शरण लें।‎ इजराइली सेना ने ईरान की बैलिस्टिक‎ मिसाइलों को रोकने की दर 90% बताई है। ‎अधिकारियों का कहना है कि डिफेंस सिस्टम ‎रोकथाम की 100% क्षमता कभी हासिल नहीं ‎कर सकते हैं। इजराइली एयर और मिसाइल ‎डिफेंस सिस्टम के पूर्व कमांडर ब्रिगेडियर जनरल‎ रैन कोचाव ने बताया कि डिमोना बहुस्तरीय ‎इजराइली और अमेरिकी डिफेंस सिस्टम से‎ सुरक्षित था। यह ऑपरेशनल नाकामी है।‎ इजराइल के मिसाइल डिफेंस में आयरन डोम‎ प्रमुख है। लेकिन इसे हमास की कम दूरी की‎ मिसाइलों को रोकने के लिए बनाया गया है।‎ बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने का उसका सबसे ‎आधुनिक हथियार एरो-3 है, लेकिन एरो-3‎‎सिस्टम महंगा है। उसे बनाने में समय लगता है।‎ इजराइली मीडिया ने रविवार को बताया कि अराद‎ और डिमोना में एरो-3 तैनात नहीं था। इजराइल ‎और अमेरिका द्वारा तैयार एंटीबैलिस्टिक मिसाइल‎ सिस्टम धरती के वातावरण के बाहर अंतरिक्ष में ‎मिसाइलों को रोकता है। इजराइल में अमेरिका का‎ थाड सिस्टम भी तैनात है।‎ अधिक इंटरसेप्टर की मांग‎ इजराइली रक्षा मंत्रालय के डायरेक्टर जनरल अमीर‎ बराम इस माह अधिक इंटरसेप्टर और गोला-बारूद ‎सप्लाई करने की मांग करने वाशिंगटन गए थे। नाम‎न बताने की शर्त पर तीन इजराइली अधिकारियों ने‎ यह जानकारी दी है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं ‎हुआ है कि क्या अमेरिका अधिक सप्लाई के लिए‎ सहमत हो गया है।‎ क्लस्टर मिसाइलों से खतरा‎ जमीन से कुछ किलोमीटर ऊपर फटने वाली ‎ईरान की क्लस्टर मिसाइलें घातक साबित हो‎ रही हैं। अराद, डिमोना, तेल अवीव और ‎यरूशलम के पास बेट शेमेश पर हमलों के‎ अलावा अन्य इलाकों में बड़े मिसाइल के‎ हिस्सों या क्लस्टर मिसाइलों से कई बिल्डिंग‎ और सड़कों को नुकसान पहुंचा है।‎ इजराइल के सेफ्टी सिस्टम के कमजोर होने पर चिंता‎ पिछले साल जून में 12 दिन के युद्ध की‎समाप्ति के बाद इजराइली सेना ने चिंता‎जताई थी कि क्या देश का मिसाइल एयर‎डिफेंस सिस्टम ईरान की बैलिस्टिक‎मिसाइल खत्म होने से पहले ही चुक‎जाएगा। उस वक्त अधिकारियों ने कहा था‎कि इजराइल को अपने इंटरसेप्टर बचा कर‎खर्च करना होंगे। उसे सामरिक इंफ्रास्ट्रक्चर‎को अहमियत देना पड़ेगी। वैसे इजराइली‎ सेना ने इन बातों का खंडन किया है।‎

मॉल जाकर शॉपिंग करना पसंद कर रही जेन-जी‎:हर साल 5% बढ़ रही अमेरिका के ए-क्लास मॉल्स की आय‎

मॉल जाकर शॉपिंग करना पसंद कर रही जेन-जी‎:हर साल 5% बढ़ रही अमेरिका के ए-क्लास मॉल्स की आय‎

अमेरिका में रियल एस्टेट डेवलपर ऐसा सोचते‎ रहे हैं कि शॉपिंग मॉल्स खत्म हो गए हैं। लेकिन ‎‎अब स्थिति बदल रही है। नई पीढ़ी (जेन-जी)‎खुद जाकर शॉपिंग करना पसंद कर रही है। ‎लिहाजा खास किस्म के मॉल चलने लगे हैं।‎ अमेरिका में ज्यादातर ए-क्लास मॉल्स की ‎‎मालिक साइमन प्रॉपर्टी के न्यूयॉर्क शहर के ‎‎रूजवेल्ट फील्ड पर स्थित मॉल की 96.3‎%‎जगह किराए पर है। एक्स फेंटी, अरमानी, हर्मीस ‎‎और रोलेक्स उसकी किराएदार हैं।‎शॉपिंग मॉल्स की नई सफलता और‎ इनोवेशन में युवाओं खास तौर पर जेन-जी की‎ अहम भूमिका है। इस्पॉस कंज्यूमर ट्रैकर के सर्वे‎ के अनुसार 18 से 34 वर्ष आयु के 58%‎खरीदारों ने बताया कि वे अक्सर मॉल्स में ‎शॉपिंग करते हैं। उनकी ये दर 55 साल की‎आयु के लोगों से दोगुनी है।‎ ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎1990 के दशक में शॉपिंग मॉल किसी बड़ी ‎कंपनी या स्टोर के कारण ही सफल हो पाते थे।‎आज साइमन व जीजीपी जैसी कंपनियों के ‎मॉल रिटेल, खानपान, मनोरंजन सहित कुछ नए‎ स्टोर की वजह से चलने लगे हैं। हालांकि बी‎ और सी क्लास के मॉल्स की आय हर साल 5%‎कम हो रही है।‎ ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎शॉपिंग मॉल्स K-आकार की रिकवरी कर रहे‎ हैं। इसका मतलब है कि अच्छे मॉल और ‎ऊंचाइयों पर जा रहे हैं, वहीं पुराने और साधारण ‎मॉल तेजी से बंद हो रहे हैं। ग्रोथ फैक्टर के‎ अनुसार 2024 में मॉल्स में आने वाले कंज्यूमर ‎की संख्या में 9.7% बढ़ोतरी हुई है।‎ टॉप 100 मॉल्स की हिस्सेदारी 50%‎ अमेरिका में लगभग 900 मॉल हैं। लेकिन उनमें ‎कुछ ही कामयाब हैं। टॉप 100 मॉल्स का मूल्य‎ पूरे सेक्टर का 50 फीसदी है। जबकि सबसे ‎निचले 350 मॉल का मूल्य सिर्फ दस प्रतिशत है।‎ए-मॉल्स की आय हर साल पांच फीसदी बढ़ रही‎ है। ब्रुकफील्ड प्रॉपर्टीज के मॉल्स डिवीजन‎ जीजीपी के किराएदारों की बिक्री 2019 के बाद‎ बीस प्रतिशत बढ़ी है। कंपनी हर साल किराया ‎बढ़ा रही है।‎

The dominance of ‘wonderkids’, players being developed at a young age

The dominance of 'wonderkids', players being developed at a young age

Hindi News Sports The Dominance Of ‘wonderkids’, Players Being Developed At A Young Age लंदन25 मिनट पहले कॉपी लिंक क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं। खेलों की दुनिया में अद्भुत ट्रेंड नजर आने लगा है। इंग्लिश फुटबॉल क्लब आर्सनल के मैक्स डॉवमैन हाल ही में प्रीमियर लीग के इतिहास में गोल करने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बने हैं। स्केटबोर्डिंग में 17 वर्षीय स्काई ब्राउन और डार्ट्स में 18 वर्षीय ल्यूक लिटलर दो-दो बार वर्ल्ड चैम्पियन बन चुके हैं। क्रिकेट में 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी आईपीएल और अंडर-19 वर्ल्ड कप खेलने और शतक लगाने वाले सबसे युवा बैटर हैं। टेनिस में एमा राडुकानू ने 18 की उम्र में ग्रैंड स्लैम जीता था। फॉर्मूला-1 में 19 वर्षीय किमी एंटोनेली दूसरे सबसे कम उम्र के रेस विनर बने हैं। ऐसा लगता है टीनेजर्स खेलों पर राज कर रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि आंकड़े कुछ और कहानी बताते हैं। 1992 से 2021 के बीच ओलिंपियंस की औसत उम्र में वास्तव में दो साल का इजाफा हुआ है। टेनिस, क्रिकेट और फुटबॉल में खिलाड़ी अब ज्यादा उम्र तक अपने करियर के शीर्ष पर खेल रहे हैं। तो फिर औसत उम्र का बढ़ना और दूसरी तरफ 14-18 साल के युवाओं का विश्व स्तर पर धूम मचाना, आखिर इस चमत्कार के पीछे क्या वजह है? विशेषज्ञों का मानना है कि इसका सबसे बड़ा कारण आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस, मनोविज्ञान और एडवांस ट्रेनिंग है। फॉर्मूला-1 की ड्राइवर एकेडमी में नेक्स्ट-जेनरेशन सिमुलेटर और ट्रेनिंग की मदद से युवाओं को कम अनुभव के बावजूद कम उम्र में ही शारीरिक और मानसिक दबाव के लिए तैयार कर लिया जाता है। फुटबॉल में भी ‘एलीट प्लेयर परफॉर्मेंस प्लान’ जैसी व्यवस्थाओं ने बड़ी क्रांति ला दी है। डेस रयान कहते हैं कि अब खिलाड़ियों को फिजिकल, मेडिकल, साइकोलॉजिकल और एजुकेशनल तौर पर जो सुविधाएं मिल रही हैं, वे उन्हें बड़े मंच के लिए जल्दी तैयार कर रही हैं। प्रोफेसर शॉन कमिंग बताते हैं कि अब खेल पहले से कहीं ज्यादा तेज और ताकतवर हो गया है। जो बच्चे जल्दी विकसित होते हैं, उन्हें बेहतर सपोर्ट मिलता है। एकेडमी में बच्चों पर भारी वजन उठाने का दबाव नहीं डाला जाता, बल्कि उन्हें सही टेक्निक सिखाई जाती है ताकि शरीर तैयार होने पर वे सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सकें। हालांकि, सफलता के साथ कुछ सावधानियां भी जरूरी हैं। विशेषज्ञों की चेतावनी है कि इन युवा एथलीटों का शरीर 22 साल की उम्र तक बढ़ता है, इसलिए चोटों से बचाने के लिए वर्कलोड मैनेज करना जरूरी है। युवाओं का दिमाग 23 साल तक पूरी तरह परिपक्व नहीं होता। वे गलतियां कर सकते हैं, इसलिए मैदान के बाहर भी उन्हें सही मेंटरशिप और सुरक्षा की उतनी ही जरूरत होती है जितनी मैदान पर। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

जारा ने चीन में आधी दुकानें बंद की:फास्ट फैशन की जंग में चीनी ब्रांड शीन-टेमू को दी मात, प्रीमियम कस्टमर पर फोकस, रिकॉर्ड 4.3 लाख करोड़ की बिक्री

जारा ने चीन में आधी दुकानें बंद की:फास्ट फैशन की जंग में चीनी ब्रांड शीन-टेमू को दी मात, प्रीमियम कस्टमर पर फोकस, रिकॉर्ड 4.3 लाख करोड़ की बिक्री

फैशन जगत में जब शीन और टेमू जैसे चीनी ब्रांड्स ने ‘अल्ट्रा-चीप’ मॉडल से तहलका मचाया, तो माना गया कि जारा को टिके रहने के लिए कीमतें घटानी होंगी। लेकिन स्पेनिश दिग्गज इंडिटेक्स ने इसके उलट ‘प्रीमियम रणनीति’ अपनाई। ये स्पेनिश क्लॉदिंग ग्रुप है, जिसकी कुल बिक्री का दो-तिहाई हिस्सा जारा से आता है। नतीजा? साल 2025 में कंपनी की सालाना बिक्री 4.3 लाख करोड़ और शुद्ध कमाई रिकॉर्ड 67 हजार करोड़ रुपए पहुंच गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में 6% अधिक है। जारा का ऑपरेटिंग प्रॉफिट प्रतिद्वंद्वी एचएंडएम से पांच गुना ज्यादा है। रोथ्सचाइल्ड बैंक के जेफ लोअरी के अनुसार, फास्ट-फैशन को ‘लग्जरी लुक’ के साथ बेचना अब रंग ला रहा है। इंडिटेक्स ने कीमत के बजाय स्टाइल पर फोकस किया। कंपनी ने 50वीं वर्षगांठ पर नामी फोटोग्राफर स्टीवन मेसेल और टॉप मॉडल्स के साथ ‘लग्जरी कैंपेन’ चलाया, जिसने ब्रांड की छवि बदल दी। मेसेल लग्जरी ब्रांड्स के साथ काम करने के लिए जाने जाते हैं। इस शूट के हेयर स्टाइलिस्ट और मेकअप आर्टिस्ट भी उसी आला दर्जे के थे। इन विज्ञापनों में बीते 30 वर्षों की हर टॉप-पेड मॉडल को डोना समर के गाने ‘आई फील लव’ पर थिरकते हुए दिखाया गया। यह ग्लैमर इंडिटेक्स के लिए एक सफल रणनीति का प्रतीक है। आज इंस्टाग्राम पर जारा के विज्ञापन किसी महंगे लग्जरी हाउस जैसे दिखते हैं। ग्रुप के फाउंडर अमानसियो ओर्टेगा ने जारा को एक फुर्तीले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क पर खड़ा किया है, जो हर हफ्ते नया स्टॉक पेश करता है। इससे डेड-स्टॉक का जोखिम कम होता है और ब्रांड को ऊंची कीमतें रखने की ताकत मिलती है। बर्नस्टीन के विलियम वुड्स कहते हैं कि जारा उन 30-40 साल के खरीदारों को टार्गेट करता है जो एचएंडएम के ग्राहकों से अधिक समृद्ध हैं। शीन और टेमू जैसे चीनी ‘इवन-फास्टर-फैशन’ रिटेलर्स की प्रतिस्पर्धा ने एचएंडएम समेत कई प्रतिद्वंद्वियों को कीमतें घटाने पर मजबूर किया। फुर्तीला बिजनेस मॉडल, हर हफ्ते नए आइटम उतार रहे इंडिटेक्स के प्रमुख ऑस्कर गार्सिया मसेइरास इस सफलता का श्रेय कंपनी के आधे दशक पुराने बिजनेस मॉडल को देते हैं। संस्थापक अमानसियो ओर्टेगा ने इस व्यवसाय को एक फुर्तीले लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के इर्द-गिर्द भुना है, जो ग्राहकों की पसंद के आधार पर माल को तुरंत बदलने की अनुमति देता है। जारा और उसके सहयोगी ब्रांड हर हफ्ते, और कभी-कभी हफ्ते में दो बार नए आइटम पेश करने का लक्ष्य रखते हैं। इससे यह जोखिम कम हो जाता है कि ब्रांड ऐसे कपड़े बनाए जिन्हें कोई नहीं चाहता और फिर उन्हें भारी छूट पर बेचना पड़े। यह जारा को ऊंची कीमतें निर्धारित करने की छूट भी देता है, क्योंकि इसके कपड़े लोकप्रिय शैलियों को तुरंत अपना लेते हैं। 2021 में मार्टा ओर्टेगा के प्रेसिडेंट बनने के बाद जारा और अधिक ‘प्रीमियम’ हुआ है। ब्रांड ने हाल ही में जॉन गैलियानो और स्टेफानो पिलाती जैसे दिग्गज डिजाइनरों के साथ साझेदारी की है। सुपर बाउल में गायक ‘बैड बनी’ की स्टाइलिंग भी इसी रणनीति का हिस्सा है। पर्सनल शॉपर्स, लग्जरी बुटीक के आइडिया से बड़ा बदलाव लाई इंडिटेक्स प्रमुख ऑस्कर गार्सिया मसेइरास कहते हैं, ‘ग्राहक अब कपड़ों की खरीद से परे कुछ और (अनुभव) तलाश रहे हैं।’ जारा ने चीन में अपनी लोकेशन आधी कर दी है, लेकिन बाकी बची दुकानों को बड़ा और आलीशान बनाया। इसका असर यह हुआ कि डॉयचे बैंक के अनुसार, 2022-25 के बीच प्रति वर्ग मीटर बिक्री 46% बढ़ी है। ब्रांड अब ‘फास्ट फैशन’ की छवि छोड़ ‘किफायती लक्जरी’ की ओर बढ़ रहा है, जहां ग्राहकों को हाई-एंड बुटीक जैसा अहसास मिलता है। अब स्टोर में हैंडबैग-जूतों के लिए अलग बुटीक एरिया और ग्राहकों की मदद के लिए ‘पर्सनल शॉपर्स’ मौजूद हैं। जारा का यह ‘लग्जरी टच’ अब मुनाफे की नई इबारत लिख रहा है।

वार्ड-4 में तीन दिन से स्ट्रीट लाइट बंद, अंधेरे से परेशानी

वार्ड-4 में तीन दिन से स्ट्रीट लाइट बंद, अंधेरे से परेशानी

राजगढ़| वार्ड-4 में पिछले करीब तीन दिन से स्ट्रीट लाइट बंद है, जिससे पूरे इलाके में रात के समय अंधेरा बना रहता है। रहवासियों को आवाजाही में परेशानी हो रही है व दुर्घटना का खतरा भी बना हुआ है। अंधेरे के कारण असुरक्षा की भावना भी बढ़ रही है। कई बार शिकायत के बाद भी अब तक समस्या का समाधान नहीं हो पाया है। रहवासियों ने जिम्मेदार विभाग से जल्द स्ट्रीट लाइट चालू कराने की मांग की है। -राजेंद्र कटारिया, रहवासी की रिपोर्ट।

नई वेबसीरीज:करण जौहर की ‘नजदीकियां’ में दिखेंगे ‘हीरामंडी’ के नवाब ताजदार

नई वेबसीरीज:करण जौहर की ‘नजदीकियां’ में दिखेंगे ‘हीरामंडी’ के नवाब ताजदार

बॉलीवुड अभिनेता ताहा शाह बदुशा इन दिनों लगातार चर्चा में हैं। हाल ही में उन्होंने ‘हीरामंडी’ में नवाब ताजदार का किरदार निभाकर दर्शकों का दिल जीत लिया। इस सीरीज में उनके अभिनय को खूब सराहा गया और इससे उन्हें एक नई पहचान मिली। अब ताहा शाह जल्द ही फिल्म निर्माता करण जौहर की नई वेब सीरीज ‘नजदीकियां’ में नजर आने वाले हैं। यह सीरीज धर्मा प्रोडक्शन्स के बैनर तले बनेगी और प्राइम वीडियो पर स्ट्रीम की जाएगी। वेब सीरीज करण जौहर की फिल्म ‘कभी अलविदा ना कहना’ से प्रेरित हो सकती है, जिसमें रिश्तों की जटिलताओं को दिखाया गया था। सीरीज की कहानी दो शादीशुदा जोड़ों के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां उनके पति एक-दूसरे के प्यार में पड़ जाते हैं। इस कहानी में कर्तव्य और व्यक्तिगत खुशी के बीच संघर्ष को दिखाया जाएगा। धर्मा के साथ फिर से काम करना मेरे लिए खास सीरीज में ताहा शाह के साथ परेश पाहुजा, आकांक्षा सिंह और निकिता दत्ता भी अहम भूमिकाओं में नजर आएंगे। इसका निर्देशन रुचिर अरुण करेंगे। ताहा ने इस प्रोजेक्ट को लेकर खुशी जताई है। उन्होंने कहा कि धर्मा प्रोडक्शन के साथ फिर काम करना उनके लिए खास है। इससे पहले वह ‘गिप्पी’ में भी काम कर चुके हैं। ताहा शाह ने अपने करियर की शुरुआत 2011 में फिल्म ‘लव का द एंड’ से की थी। इसके बाद वह कई प्रोजेक्ट्स में नजर आए।