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Learning from mistakes and moving forward

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Hindi News Sports Success Mantras Of Champions: Learning From Mistakes And Moving Forward एलिस डेवलिन. द न्यूयॉर्क टाइम्स9 मिनट पहले कॉपी लिंक टेनिस स्टार इगा स्वातेक से लेकर ओलिंपियन तक, हर किसी के पास दबाव संभालने और फोकस बनाए रखने का अपना तरीका है। मैदान पर दिखने वाली सफलता सिर्फ ताकत, फिटनेस और अभ्यास का नतीजा नहीं होती। बड़े खिलाड़ी अपने दिमाग को भी उसी तरह तैयार करते हैं, जैसे शरीर को। पिछले कुछ वर्षों में खिलाड़ियों, कोच और स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट्स के बीच एक बात बार-बार सामने आई है कि चैम्पियन खिलाड़ी अपने दिमाग को संभालना जानते हैं। टेनिस स्टार इगा स्वातेक से लेकर ओलिंपियन तक, हर किसी के पास दबाव संभालने और फोकस बनाए रखने का अपना तरीका है। ये छोटे-छोटे मानसिक अभ्यास उन्हें बड़े मुकाबलों में शांत और मजबूत बनाए रखते हैं। ऐसे ही पांच तरीके दुनियाभर के खिलाड़ी अपना रहे हैं। 1. पुराने पल में फंसे नहीं रहते खिलाड़ी परफॉर्मेंस कोच सिंद्रा कैमफॉफ इस तरीके को ‘लर्न, बर्न, रिटर्न’ कहती हैं। यानी पहले गलती समझो, फिर उसे दिमाग से निकालो और आगे बढ़ो। कुछ खिलाड़ी इसके लिए खास शब्द इस्तेमाल करते हैं। एनएफएल खिलाड़ी एडम थीलेन गलती के बाद ‘फ्लश इट’ बोलते थे, जैसे बुरी बात को बाहर निकाल दिया हो। इससे खिलाड़ी पुराने पल में फंसे नहीं रहते। 2. दिमाग को बाहरी चीजों पर लगाने की सलाह अमेरिकी ओलिंपिक टीम के स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट एलेक्स कोहेन कहते हैं कि ज्यादा सोचने से खिलाड़ी अपनी लय खो देते हैं। अगर खिलाड़ी हर मूवमेंट के बारे में सोचने लगे, तो उसका खेल बिगड़ सकता है। इसलिए वह खिलाड़ियों को बाहरी चीजों पर ध्यान लगाने की सलाह देते हैं। इससे शरीर स्वाभाविक तरीके से काम करता है। 3. पहेलियों से दिमाग की नसों को सक्रिय करना दुनिया की नंबर-3 टेनिस खिलाड़ी इगा स्वातेक मैच से पहले सुडोकू और क्रॉसवर्ड हल करती हैं। न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. ओरियाना कॉर्नेट के मुताबिक, पहेलियां दिमाग की नई नसों को सक्रिय करती हैं और फोकस बढ़ाती हैं। साथ ही यह दिमाग को शांत भी रखती हैं। स्वातेक शुरु में मैच से पहले मैथ्स का होमवर्क करती थीं, अब उसकी जगह पजल्स ने ले ली है। 4. नकारात्मक सोच को सकारात्मकता में बदलना ओलिंपियन केंडेल विलियम्स अपने दिमाग में आने वाले नकारात्मक विचारों को ‘ANTS’ यानी ऑटोमैटिक नेगेटिव थॉट्स कहती हैं। जब भी उनके मन में ‘मैं नहीं कर पाऊंगी’ जैसे विचार आते हैं, वे खुद को याद दिलाती हैं कि यह सिर्फ एक नकारात्मक सोच है, सच नहीं। फिर वह उसे सकारात्मक सोच से बदल देती हैं। इससे आत्मविश्वास बना रहता है। 5. हर थकान का इलाज अलग स्पोर्ट्स साइकोलॉजिस्ट डॉ. किर्स्टन कूपर कहती हैं कि सिर्फ सोना ही आराम नहीं होता। मानसिक थकान के लिए मानसिक आराम जरूरी है। अगर दिनभर फैसले लेने पड़े हों, तो दिमाग को कुछ समय बिना सोच-विचार के छोड़ना चाहिए। स्क्रीन से दूरी, शांत समय बिताना, अच्छे लोगों के साथ रहना और खुद को भावनात्मक दबाव से दूर रखना भी जरूरी है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

मंत्री पद छोड़ने वाले स्ट्रीटिंग अब पीएम की दौड़ में:स्वास्थ्य मंत्री पद से इस्तीफा, 2018 में किया था 10 साल बाद प्रधानमंत्री बनने का दावा

मंत्री पद छोड़ने वाले स्ट्रीटिंग अब पीएम की दौड़ में:स्वास्थ्य मंत्री पद से इस्तीफा, 2018 में किया था 10 साल बाद प्रधानमंत्री बनने का दावा

ब्रिटेन के स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के नेतृत्व पर भरोसा खत्म होने का हवाला देते हुए हाल ही में इस्तीफा दे दिया। पत्र में उन्होंने कहा कि स्टारमर लेबर पार्टी को अगला चुनाव नहीं जिता पाएंगे। इसे स्ट्रीटिंग की प्रधानमंत्री पद की महत्वाकांक्षा से जोड़कर देखा जा रहा है। वेस स्ट्रीटिंग को ब्रिटिश राजनीति का बेहद चतुर खिलाड़ी माना जाता है। विश्लेषक डेविड जेफरी बताते हैं कि स्ट्रीटिंग लंबे समय से पीएम बनने की इच्छा रखते रहे हैं। साल 2018 के एक शो में उन्होंने 10 साल बाद खुद को प्रधानमंत्री तक बताया था। अब वे अपने उस दावे को हकीकत में बदलने के बेहद करीब दिख रहे हैं। स्ट्रीटिंग खुद को एक आम राजनेता नहीं मानते। उनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण रहा है। टावर हैमलेट्स के गरीब कामकाजी परिवार से आने वाले स्ट्रीटिंग ने कॉलेज और यूनिवर्सिटी की पढ़ाई का खर्च उठाने के लिए दुकानों में नौकरियां कीं। उन्होंने अपनी 2023 की किताब ‘वन बॉय, टू बिल्स एंड अ फ्राय अप’ में खुलासा किया था कि उनके दादा हथियारबंद लूट के मामले में जेल जा चुके थे। उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सेल्विन कॉलेज से इतिहास की पढ़ाई की और 2015 में पहली बार सांसद बने। डॉक्टरों से रहा टकराव: स्वास्थ्य मंत्री के तौर पर वेस स्ट्रीटिंग का ट्रैक रिकॉर्ड मजबूत है। उन्होंने मार्च 2026 तक 65% मरीजों का इलाज 18 हफ्तों के भीतर कराने का लक्ष्य रखा और ब्रिटेन की सरकारी स्वास्थ्य सेवा (एनएचएस) की वेटिंग लिस्ट में 17 साल की सबसे बड़ी कटौती दर्ज की। हालांकि डॉक्टरों की हड़तालों के चलते वे पार्टी के वामपंथी धड़े के निशाने पर भी रहे। लेबर पार्टी का नेतृत्व पाने के लिए उन्हें इसी वामपंथी सदस्यता का समर्थन जुटाना होगा, जिसे पीएम स्टारमर से भी ज्यादा कट्टर माना जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से रहा है छत्तीस का आंकड़ा अगर स्ट्रीटिंग ब्रिटेन के अगले प्रधानमंत्री बनते हैं, तो लंदन-वॉशिंगटन रिश्तों पर नजर रहेगी, क्योंकि वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मुखर आलोचक रहे हैं। ट्रम्प के पहले कार्यकाल (2017-2021) में स्ट्रीटिंग ने उन्हें ‘घिनौना’ शख्स तक कहा था। इसी तरह, गर्भावस्था में पैरासिटामोल और ऑटिज्म वाले ट्रम्प के दावे पर स्ट्रीटिंग ने कह चुके हैं कि लोग ‘ट्रम्प की फिजूल बातों’ के बजाय ब्रिटिश डॉक्टरों और वैज्ञानिकों की सुनें।

लग्जरी की नई दीवानगी, एक घड़ी के लिए हंगामा:लॉन्च होते ही बवाल; कहीं पुलिस बुलाई़ तो कहीं आंसू गैस छोड़ी

लग्जरी की नई दीवानगी, एक घड़ी के लिए हंगामा:लॉन्च होते ही बवाल; कहीं पुलिस बुलाई़ तो कहीं आंसू गैस छोड़ी

स्विस कंपनी स्वॉच और लग्जरी वॉच मेकर ऑडेमर्स पिग्वे की नई लिमिटेड एडिशन ‘रॉयल पॉप’ पॉकेट घड़ी के लिए दुनियाभर में अनूठा क्रेज दिख रहा है। 16 मई को लॉन्च की घोषणा से पहले लोग इसे खरीदने के लिए कई-कई दिन से स्टोर्स के बाहर लाइन लगाकर बैठे रहे । 16 मई को लॉन्चिंग के बाद यूरोप, अमेरिका और मध्य-पूर्व और के कई शहरों में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। कहीं झगड़े हुए, कहीं स्टोर्स बंद करने पड़े और कई जगह हालात संभालने के लिए पुलिस तक बुलानी पड़ी। दो दिन बाद भी कई शहरों में स्वॉच के स्टोर्स बंद हैं। स्वॉच ने सोशल मीडिया पोस्ट में लोगों से बड़ी संख्या में स्टोरों पर न आने का अनुरोध किया है। आमतौर पर ऑडेमर्स पिग्वे की घड़ियां लाखों-करोड़ों रुपए की होती हैं, लेकिन विशेष पॉकेट वॉच काफी कम कीमत में मिल रही है। लोगों को उम्मीद है कि बाद में इसे ज्यादा दाम में बेचा जा सकेगा। इसी वजह से युवा खरीदार, कलेक्टर और रीसेलर बड़ी संख्या में इसे खरीदने पहुंच रहे हैं। कई वेबसाइट्स पर इसकी रीसेल कीमत लॉन्च प्राइस से कई गुना ज्यादा बताई जा रही है। घड़ियों को ऑनलाइन 20 लाख रु. तक में बेचा गया इनमें ऑडेमर्स पिग्वे की प्रसिद्ध ‘रॉयल ओक’ सीरीज की ऑक्टागोनल डिजाइन और स्वॉच की 80 के दशक की ‘पॉप’ शैली का मिश्रण है। पहली बार स्वॉच ने अपने प्रतिष्ठित सिस्टम51 यांत्रिक मूवमेंट को हाथ से चाबी भरने वाले कैलिबर में बदलकर इनमेंं शामिल किया है। इनमें पारदर्शी सैफायर केसबैक, ओपन मेनस्प्रिंग बैरल और प्रीमियम सुपर-लुमिनोवा कोटिंग है जो रात में भी अच्छी विजिबिलिटी देती है। ऑडेमर्स पिग्वे की करोड़ों रुपए वाली घड़ियों के डिजाइन कॉपी करके बनी ये घड़ियां करीब 350 पाउंड (45 हजार रु.) में मिल रही हैं। इन घड़ियों को ऑनलाइन 16,000 पाउंड (20 लाख रुपए) तक में बेचा गया है। लंदन, पेरिस में भीड़ संभालने पुलिस बुलाई न्यूयॉर्क में स्टोर के बाहर डेरा डाले कई लोग बीमार पड़ गए। लंदन में पुलिस डॉग्स तैनात करने पड़े। पेरिस में पुलिस को आंसू गैस का इस्तेमाल करना पड़ा। मिलान में भी पुलिस बुलानी पड़ी। दुबई सहित कई शहरों में लॉन्च इवेंट रद्द करने पड़े। भारत : मुंबई-दिल्ली में भारी भीड़, इवेंट हुआ रद्द भारत में मुंबई के पैलेडियम मॉल स्थित स्वॉच बुटीक और दिल्ली के सेलेक्ट सिटीवॉक स्टोर पर भारी भीड़ जुटी। दोनों शहरों में लॉन्च से कई घंटे पहले ही लंबी कतारें लग गई थीं। सुरक्षा कारणों को देखते हुए लॉन्च इवेंट ही निरस्त कर दी गई।

तेजा सज्जा की ‘हनु-मैन’ अब 3D में:25 जून को सिनेमाघरों में होगी रिलीज; अगले भाग में ऋषभ शेट्टी की एंट्री से बढ़ा फैंस का रोमांच

तेजा सज्जा की ‘हनु-मैन’ अब 3D में:25 जून को सिनेमाघरों में होगी रिलीज; अगले भाग में ऋषभ शेट्टी की एंट्री से बढ़ा फैंस का रोमांच

तेलुगु सुपरहीरो फिल्म ‘हनु-मैन’ एक बार फिर बड़े परदे पर वापसी करने जा रही है। इस बार फिल्म को 3डी फॉर्मेट में रिलीज किया जाएगा, जिससे दर्शकों को पहले से ज्यादा भव्य और रोमांचक सिनेमाई अनुभव मिलने वाला है। निर्माताओं ने आधिकारिक घोषणा करते हुए बताया कि ‘हनु-मैन 3डी’ 25 जून 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। मेकर्स ने नए पोस्टर के साथ सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए कहा कि यह फिल्म पहले दर्शकों के दिलों पर राज कर चुकी है और अब नए अंदाज में लौट रही है। साल 2024 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की थी और भारतीय सुपरहीरो फिल्मों के लिए नई शुरुआत मानी गई थी। फिल्म की कहानी काल्पनिक गांव अंजनाद्री पर आधारित है, जहां हनुमंथु नाम का एक साधारण युवक भगवान हनुमान की दिव्य शक्तियां प्राप्त करने के बाद लोगों की रक्षा करता है। इसमें तेजा के अलावा अमृता अय्यर, वरलक्ष्मी सरथकुमार, समुद्रकानी और विनय राय ने भी अहम किरदार निभाए थे। फिल्म के अगले पार्ट ‘जय हनुमान’ में ऋ षभ शेट्टी भी नजर आएंगे निर्देशक प्रशांत वर्मा की यह फिल्म उनके सिनेमैटिक यूनिवर्स की पहली कड़ी मानी जाती है। फिल्म की सफलता के बाद अब इसके अगले भाग ‘जय हनुमान’ को लेकर भी दर्शकों में काफी उत्साह है। खबरों के मुताबिक, आगामी फिल्म में ऋषभ शेट्टी भी नजर आ सकते हैं। जिनका पहला लुक भी मेकर्स ने बाते साल ही रिवील कर दिया था। ऐसे में अब ‘हनु-मैन 3डी’ की दोबारा रिलीज को लेकर फैंस के बीच जबरदस्त उत्सुकता देखने को मिल रही है और माना जा रहा है कि फिल्म एक बार फिर बॉक्स ऑफिस पर बड़ा रिकॉर्ड बना सकती है।

संगीत- फैशन की दुनिया में चमका एस्टन विला का खिलाड़ी:इंग्लैंड के 30 वर्षीय कोर्टनी हॉस; अपराधियों के हमले ने छीना फुटबॉल करियर

संगीत- फैशन की दुनिया में चमका एस्टन विला का खिलाड़ी:इंग्लैंड के 30 वर्षीय कोर्टनी हॉस; अपराधियों के हमले ने छीना फुटबॉल करियर

एक समय था, जब इंग्लैंड के फुटबॉल मैदानों में कोर्टनी हॉस का नाम गूंजता था। प्रीमियर लीग में खेलना, लाखों पाउंड की कमाई, बड़े स्टेडियमों की चमक और दुनिया भर में पहचान, यह सब उनके जीवन का हिस्सा था। लेकिन अब वही खिलाड़ी फुटबॉल से दूर, माइक्रोफोन के सामने खड़ा होकर अपने नए सपनों को आवाज दे रहा है। 30 वर्षीय कोर्टनी हॉस की कहानी सिर्फ एक फुटबॉलर की नहीं, बल्कि संघर्ष, दर्द और फिर नई शुरुआत की कहानी है। इंग्लैंड के क्लब एस्टन विला के लिए खेलने वाले इस डिफेंडर ने करियर में कई बड़े पल देखे। मैनचेस्टर यूनाइटेड के खिलाफ ओल्ड ट्रैफर्ड में विजयी गोल करना सबसे यादगार पल बना। लेकिन किस्मत ने उनके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। साल 2018 में क्रिसमस के दौरान लंदन में परिवार से मिलने गए हॉस का कुछ अपराधियों ने पीछा किया। घर पहुंचते ही उन पर हमला हुआ। सिर पर बोतल से वार किया गया। खून से लथपथ हालत में वह किसी तरह अस्पताल पहुंचे। उस रात उन्होंने सिर्फ अपना करियर नहीं, बल्कि अपनी जान भी लगभग खो दी थी। इसके बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी। फुटबॉल खेलना जारी रखा, लेकिन शरीर अब उनका साथ छोड़ने लगा था। कभी ग्रोइन इंजरी, कभी एंकल और फिर घुटने की गंभीर समस्या। चोटें बढ़ती गईं और मैदान पर उनका समय कम होता गया। 2022 में वह वॉटफोर्ड क्लब गए, उम्मीद थी कि करियर पटरी पर लौटेगा। लेकिन घुटने की चोट ने सब खत्म कर दिया। लगातार सर्जरी हुईं, रिहैब चला, लेकिन वापसी नहीं हो सकी। दो साल तक उन्होंने प्रोफेशनल मैच नहीं खेला। आखिरकार एस्टन विला ने भी उनका साथ छोड़ दिया। जहां कई खिलाड़ी ऐसे समय में टूट जाते हैं, वहीं हॉस ने खुद को नए रास्ते पर खड़ा किया। फुटबॉल से दूर होने के बाद उन्होंने संगीत को चुना, जो उनका बचपन का प्यार था। अब वह ‘कोर्टनी हॉस’ नहीं, बल्कि ‘कोर्ट्स’ के नाम से पहचाने जाना चाहते हैं। अब उनका इंस्टाग्राम फुटबॉल नहीं, बल्कि म्यूजिक वीडियो और गानों से भरा है। जल्द ही उनका नया एल्बम आने वाला है। इसके साथ ही वह ‘ब्लाइंडेड माइंड्स’ नाम से कपड़ों का ब्रांड भी लॉन्च कर रहे हैं। कभी प्रीमियर लीग का डिफेंडर रहा यह खिलाड़ी जिंदगी के नए मैदान में उतर चुका है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब उसके हाथ में फुटबॉल नहीं, बल्कि माइक्रोफोन है। लेकिन जज्बा वही पुराना है- गिरकर फिर उठने का। हॉस के परिवार में सभी संगीत के शौकीन हॉस का परिवार संगीत के बेहद करीब रहा है। सात भाइयों वाले परिवार में सभी माइकल जैक्सन, अशर, क्रिस ब्राउन जैसे कलाकारों के गाने सुना करते थे। परिवार की पार्टियों में सभी भाई मिलकर गाते थे और बचपन में उन्हें लगता था कि वे ‘जैक्सन फाइव’ का हिस्सा हैं। उन्होंने कहा था कि उन्हें रैप, आर एंड बी, क्लासिकल, इंडी और रॉक सहित हर तरह का संगीत पसंद है। हालांकि, उन्होंने आर एंड बी को इसलिए चुना क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी आवाज इस शैली के लिए सबसे बेहतर है।

ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

ब्यूटी+पर्सनल केयर का खर्च 10 साल में 5 गुना बढ़ा:ड्रेसिंग टेबल में काजल, पाउडर, लिपस्टिक ही नहीं; एसपीएफ फाउंडेशन, मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो जैसे प्रोडक्ट भी

भारत में महिलाएं प्राचीन काल से ही सजने-संवरने और सौंदर्य देखभाल के लिए अलग-अलग तरीकों का इस्तेमाल करती रही हैं। कभी उबटन, चंदन, गुलाबजल, काजल, मेहंदी और प्राकृतिक तेलों तक सीमित रहने वाला ब्यूटी कल्चर आज अरबों रुपए के विशाल बाजार में बदल चुका है। पहले सौंदर्य देखभाल का मतलब केवल पारंपरिक घरेलू नुस्खे और सामाजिक अवसरों पर सजना-संवरना होता था, लेकिन अब यह आत्मविश्वास, लाइफस्टाइल, सेल्फ-केयर, सोशल मीडिया उपस्थिति और व्यक्तिगत पहचान का हिस्सा बन गया है। भारतीय महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल अब सिर्फ काजल, पाउडर और एक लिपस्टिक तक सीमित नहीं रही। बीते दो दशकों में भारत का ब्यूटी कल्चर तेजी से बदला है। पहले जहां ‘गोरा दिखाना’ ब्यूटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा वादा था, वहीं अब ‘स्किन हेल्थ’, ‘ग्लो’, ‘सन प्रोटेक्शन’, ‘हाइड्रेशन’ और ‘एंटी-एजिंग’ जैसे शब्द आम हो चुके हैं। महिलाएं अब यह जानना चाहती हैं कि किसी प्रोडक्ट में कौन-सा सक्रिय तत्व है और वह त्वचा पर क्या असर डालेगा। कोविड के बाद ‘स्किन-फर्स्ट” और ‘स्किन मिनिमलिज्म’ का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। यानी कम लेकिन असरदार उत्पादों का इस्तेमाल। ग्लोबल डेटा, वोग इंडिया जैसे प्रकाशनों के मुताबिक अब ‘हाइब्रिड ब्यूटी’ तेजी से लोकप्रिय हो रही है। यानी ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल जो मेकअप और स्किनकेयर दोनों का काम करें। जैसे- एसपीएफ वाला फाउंडेशन, सीरम युक्त कंसीलर या मॉइश्चराइजर-प्राइमर कॉम्बो। ब्यूटी इंडस्ट्री से जुड़े लोगों के मुताबिक बीते एक दशक में परिवारों के मासिक खर्च में स्किनकेयर, हेयरकेयर और कॉस्मेटिक्स का हिस्सा लगातार बढ़ा है। प्रति महिला ब्यूटी और पर्सनल केयर मासिक खर्च पांच गुना तक बढ़ गया है। बदलता ट्रेंड: फेयर स्किन, ग्लास स्किन, मैट स्किन… हाइब्रिड 1950-60 और पहले – घरेलू नुस्खों और सादगी का दौर ब्यूटी केयर मतलब बेसन, मलाई, हल्दी, गुलाबजल और नारियल तेल। ड्रेसिंग टेबल पर टैल्कम पाउडर, काजल और सिंदूर ही मुख्य उत्पाद होते थे। मेकअप शादी या विशेष अवसरों तक सीमित था। 1960-80- फिल्मों का असर, गोरापन सुंदरता का प्रतीक हीरोइनों की हेयरस्टाइल और चटक मेकअप का असर बढ़ा। रंगीन लिपस्टिक, नेल पॉलिश, कॉम्पैक्ट पाउडर लोकप्रिय हुए। गोरी त्वचा सुंदरता का प्रतीक बनी। फेयरनेस क्रीम का बाजार तेजी से बढ़ा। 1990 का दशक – उदारीकरण और विदेशी ब्रांड्स का प्रवेश अंतरराष्ट्रीय ब्रांड भारत आए। अलग-अलग शेड्स की लिपस्टिक, फाउंडेशन और हेयर कलर के विकल्प मिले। फैशन मैगजीन और टीवी विज्ञापनों ने ‘ग्लैमरस लुक’ को लोकप्रिय बनाया। 2000 का दशक – सलून संस्कृति का उदय छोटे शहरों में भी फेशियल, हेयर स्पा, स्किन ट्रीटमेंट आम होने लगे। युवा लड़कियां भी नियमित ब्यूटी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने लगीं। 2010 के बाद – इन्फ्लुएंसर्स ने बदला ट्रेंड ‘नो-मेकअप मेकअप’, ‘कोरियन स्किनकेयर’, ‘सनस्क्रीन’, ‘रेटिनॉल’, ‘नियासिनामाइड’ और ‘क्लीन ब्यूटी’ जैसे शब्द आम हो गए। (स्रोत- इंस्टीट्यूटो मारांगोनी, वोग) अब ब्यूटी यानी स्किन हेल्थ ब्यूटी काउंसलर लवीना मनवानी कहती हैं, भारतीय महिलाओं की सोच में सबसे बड़ा बदलाव ‘स्किन हेल्थ’ को लेकर आया है। सोशल मीडिया, कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स ने भी पसंद बदली है। पहले ड्रेसिंग टेबल पर 4-5 उत्पाद होते थे, अब 20-30 होना सामान्य है। 10 साल में ब्यूटी केयर खर्च 5 गुना बढ़ गया है। तेजी से बढ़ रहा ब्यूटी बाजार रेडसीर, रिसर्च एंड मार्केट्स जैसी कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार 2025 में भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर (बीपीसी) बाजार का आकार करीब 2 लाख करोड़ रुपए था, जो 2030 तक 4 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंचने का अनुमान है। 3-4 वर्षों में भारत चौथा सबसे बड़ा बीपीसी मार्केट होगा। बदल रहा है ब्यूटी प्रोडक्ट की खरीदारी का तरीका 85% उपभोक्ता अब ब्यूटी प्रोडक्ट्स के इंग्रेडिएंट्स पर ध्यान देते हैं। 48% लोग सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स से प्रभावित होकर खरीदारी करते हैं। 55% उपभोक्ताओं को कोलेजन आधारित उत्पाद आकर्षक लगते हैं। 46% लोग हायल्यूरोनिक एसिड वाले उत्पाद पसंद कर रहे हैं। (स्रोत- ग्लोबल डेटा)

फीफा कप 2026; ‘परफेक्ट’ घास तैयार:47 करोड़ खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई, 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग

फीफा कप 2026; ‘परफेक्ट’ घास तैयार:47 करोड़ खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई गई, 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग

फीफा वर्ल्ड कप 2026 शुरू होने में अब कुछ ही हफ्ते बचे हैं। टूर्नामेंट के 104 मैचों के लिए इस बार ऐसी प्राकृतिक घास तैयार की जा रही है, जो अलग-अलग मौसम और स्टेडियम की परिस्थितियों में भी एक जैसी खेले। इसके लिए फीफा ने करीब 47 करोड़ रुपए खर्च कर वैज्ञानिकों की टीम लगाई है। टीम ने पिछले 8 साल में 170 से ज्यादा प्रयोग किए हैं, ताकि खिलाड़ियों की चोट का खतरा घटे और ट्रैक्शन व बॉल बाउंस बेहतर रहे। 2024 के कोपा अमेरिका टूर्नामेंट में अर्जेंटीना के खिलाड़ियों ने अटलांटा स्टेडियम की अस्थाई प्राकृतिक घास की शिकायत की थी। उन्होंने कहा था कि पिच ‘डिजास्टर’ (बेहद खराब) है और गेंद ‘स्प्रिंगबोर्ड’ की तरह अजीब ढंग से उछल रही है। साल 2026 के वर्ल्ड कप में मेजबान अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको ऐसी बदनामी से बचना चाहते हैं। 5 मिलीमीटर का अंतर भी बदल सकता है खेल का मिजाज टेनेसी यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर जॉन सोरोचन और मिशिगन स्टेट यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ट्रे रोजर्स की देखरेख में वर्ल्ड कप के 16 स्टेडियमों के लिए पिच तैयार हो रही हैं। सोरोचन के मुताबिक घास की ऊंचाई में सिर्फ 5 मिलीमीटर का फर्क भी खेल का मिजाज बदल देता है। इसे परखने के लिए लैब के छोटे मैदानों पर चमकदार लाल रंग की मशीनों से फुटबॉल को शूट किया गया। इससे बॉल की स्पीड तक मापा गया।

Companies are building their image with outsiders

Companies are building their image with outsiders

बीजिंग14 मिनट पहले कॉपी लिंक चीन में विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स कमाई का आसान जरिया हैं, लेकिन यह पूरी तरह गैर-कानूनी हैं।- प्रतीकात्मक फोटो चीन के कॉरपोरेट जगत में ‘वाइट मंकी’ नाम का एक गैर-कानूनी ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है। इसके तहत कंपनियां अपने घरेलू प्रोडक्ट्स और ब्रांड को इंटरनेशनल दिखाने के लिए विदेशियों को मोटी रकम देकर हायर कर रही हैं। कई मामलों में बिना किसी अनुभव के सिर्फ ‘गैर-चीनी’ चेहरे के आधार पर इन्हें नकली डॉक्टर, वैज्ञानिक, वकील, शेफ और यहां तक कि फर्जी विदेशी सीईओ तक बना दिया जाता है। भर्तियां वीचैट के गुप्त ग्रुप्स के जरिए होती हैं। कई कंपनियां गंभीर प्रोफेशनल मीटिंग्स में भी इनका इस्तेमाल करती हैं। पियर्स को एक बड़ी डील के दौरान पुडोंग के हाई-टेक पार्क में ‘इंटरनेशनल वकील’ बनाकर मीटिंग में बैठाया गया। वहां उसने सिर्फ नोट्स लेने का नाटक किया। इसी तरह रूसी नागरिक एंज़ो को महीनों तक एक ऑटोमोबाइल कंपनी का फर्जी विदेशी सीईओ बनाकर अलग-अलग शहरों में घुमाया गया। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियां जर्मन या अमेरिकी नागरिकों के मुकाबले रूसी और यूरोपीय लोगों को 2 से 3 गुना कम वेतन देती हैं। विदेशी चेहरों का क्रेज 2008 के फूड स्कैंडल के बाद बढ़ा बताया गया कि 2008 में मिलावटी दूध और फूड स्कैंडल के बाद घरेलू सामानों पर लोगों का भरोसा कमजोर हुआ। सानलु कंपनी के शिशु मिल्क पाउडर में मेलामाइन मिलने से लाखों बच्चे बीमार हुए और 6 की मौत हुई थी। इसके बाद विदेशी चेहरों वाले विज्ञापनों को लोग क्वालिटी और सेफ्टी की गारंटी मानने लगे। दुनियाभर के चेहरों से चीनी प्रोडक्ट्स को मिली प्रतिष्ठा मैनचेस्टर चाइना इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर श्याओबिंग वांग के अनुसार, लोग चीनी स्टार की पसंद को सिर्फ स्थानीय मानते हैं। लेकिन जब साल 2025 में दिग्गज पूर्व फुटबॉलर डेविड बेखम ने चीनी खिलौना ‘लाबुबु’ के साथ फोटो पोस्ट की, तो वह वायरल हो गई। बेखम जैसे ग्लोबल चेहरे चीनी प्रोडक्ट्स को दुनिया में असली वैधता और प्रतिष्ठा दिलाते हैं। विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स अवैध चीन में विदेशी छात्रों के लिए ‘वाइट मंकी’ जॉब्स कमाई का आसान जरिया हैं, लेकिन यह पूरी तरह गैर-कानूनी हैं। कानून के मुताबिक स्टूडेंट वीसा पर ऐसे काम करने पर करीब 70 हजार से 2 लाख रुपए जुर्माना, 15 दिन तक की जेल और डिपोर्टेशन हो सकता है। ऐसे ही मामले में युगांडा के एक छात्र को अवैध रूप से पढ़ाने पर भारी जुर्माना और डिपोर्ट झेलना पड़ा था। फर्जी ‘प्रोफेसर’ का खुलासा, जांच शुरू हाल ही में लाइव-स्ट्रीमिंग इन्फ्लुएंसर ‘श्यांगयी’ का फर्जीवाड़ा पकड़ा गया। उसने विटामिन्स के प्रचार के लिए विदेशी मॉडल ‘लिंडा’ को सिडनी यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर बताया था। जांच में खुलासा हुआ कि उसने महज 71 हजार रुपए लेकर स्क्रिप्ट पढ़ी थी। अथॉरिटी मामले की जांच कर रही है। दैनिक भास्कर को Google पर पसंदीदा सोर्स बनाएं ➔

नई फिल्म:कांस में रिलीज हुआ वामिका की ‘डीसी’ का ट्रेलर

नई फिल्म:कांस में रिलीज हुआ वामिका की ‘डीसी’ का ट्रेलर

वामिका गब्बी मौजूदा वक्त में इंडस्ट्री की सबसे व्यस्त एक्ट्रेसेस में से एक हैं। पिछले महीने ‘भूत बंगला’ की सफलता के बाद कल ही उनकी नई फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ रिलीज हुई है। अब उनकी आगामी फिल्म ‘डीसी’ रिलीज को तैयार है। फिल्म का ट्रेलर 79वें कांस फिल्म फेस्टिवल में जारी किया गया है। ‘डीसी’ से निर्देशक से एक्टर बने लोकेश कनगराज अपना एक्टिंग डेब्यू कर रहे हैं। 3 मिनट 13 सेकेंड के इस ट्रेलर में लोकेश कनगराज को देवदास और वामिका को चंद्रा के रूप में दिखाया गया है। ट्रेलर में दिखाया जाता है कि चंद्रा के माता-पिता ने कोलकाता में उसे कई साल पहले अवैध रूप से देह व्यापार में बेच दिया था। अब उसके पास रहने की कोई जगह नहीं है। जल्द ही पता चलता है कि देवदास एक पुलिस वाले और डॉक्टर चंद्रा की हत्या के आरोप में वॉन्टेड है। इसके बाद ट्रेलर में जबरदस्त एक्शन, खूनखराबा, बम धमाके और गोलीबारी देखने को मिलती है।

नया खलनायक:राम चरण स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ से दिव्येंदु का फर्स्ट लुक हुआ रिवील

नया खलनायक:राम चरण स्टारर फिल्म ‘पेड्डी’ से दिव्येंदु का फर्स्ट लुक हुआ रिवील

साउथ सुपरस्टार राम चरण की अगली फिल्म ‘पेड्डी’ लगातार चर्चा में बनी हुई है। ‘गेम चेंजर’ के बॉक्स ऑफिस पर उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं करने के बाद दर्शकों को इस फिल्म से काफी उम्मीदें हैं। फिल्म में जाह्नवी कपूर भी लीड रोल में नजर आएंगी। अब मेकर्स ने फिल्म से दिव्येंदु का पहला लुक भी जारी कर दिया है। वेब सीरीज ‘मिर्जापुर’ से लोकप्रिय हुए दिव्येंदु शर्मा को फिल्म में ‘रामबुज्जी’ के किरदार में पेश किया गया है। पोस्टर में उनका दमदार और आक्रामक अंदाज देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दिव्येंदु फिल्म में ग्रामीण आंध्र प्रदेश की क्रिकेट दुनिया पर दबदबा रखने वाले एक खतरनाक खलनायक की भूमिका निभा रहे हैं। उनका लुक कहानी में बड़े टकराव और तीव्र संघर्ष की ओर इशारा करता है। पोस्टर में उनका गंभीर और जोशीला अंदाज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। फिल्म का निर्देशन बुची बाबू सना कर रहे हैं। इस फिल्म को बड़े स्तर पर तैयार किया जा रहा है और इसे पैन-इंडिया रिलीज के तौर पर पेश किया जाएगा। मेकर्स ने यह भी घोषणा की है कि फिल्म का ट्रेलर 18 मई को रिलीज किया जाएगा। वहीं, यह फिल्म 4 जून को सिनेमाघरों में दस्तक देगी। बता दें कि दिव्येंदु को हाल ही में वेब सीरीज ‘ग्लोरी’में देगा गया था। इस सीरीज में उनके साथ पुलकित सम्राट ने भी लीड रोल प्ले किया है।